Incest मेरे परिवार और मेरी वाशना

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Gaandu No 1

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This story is taken from Raj Sharma Stories writer name Dolly Sharma

हाई दोस्तो मेरा नाम सोनू है, मैं एक 19 साल का हॅंडसम लड़का हूँ जिसे देख कर लड़कियाँ मर मिटे लेकिन आज तक ऐसा हुआ नही है क्योंकि आज से 7 साल पहले मुझे सज़ा के तौर पर मेरे पापा – मम्मी ने एक बोरडिंग स्कूल भेज दिया था जो की सिर्फ़ बाय्स के लिए ही
था इसलिए आज तक कोई भी लड़की मुझसे नही पटी लेकिन मैं लड़कियो का दीवाना हूँ और सेक्स का टॉपिक मुझे बहुत पसंद है लेकिन मेरे घर वालो की दी हुई सज़ा की वजह से मैं कभी भी सेक्स का मज़ा नही ले पाया.

अब आप सोच रहे होंगे कि मैने ऐसा कॉन सा गुनाह किया था जिसकी वजह से मुझे इतनी सख़्त सज़ा मिली कि मैं इन सात सालो मे अपने घर भी नही जा पाया अपनी दोनो बहनो से इन सात सालो मे कभी नही मिला और नही मेरे पापा मम्मी कभी उन्हे मुझ से मिलाने लाए
बस साल मे दो बार मम्मी पापा मुझसे मिलने आते थे और गर्मियों की छुट्टी मे भी स्कूल मे ही कोई ना कोई कोर्स करवाते रहते थे

वैसे दोस्तो पहले मैं आपको अपनी फॅमिली के बारे मे बता देता हूँ मेरे परिवार मे पापा, मम्मी, मैं, मेरी एक बड़ी बहन निशा जो अब 20
साल की है और एक छोटी बहन डॉली जो कि 18 की है . बाकी और भी रिश्तेदार है लेकिन उनके बारे मे वक्त आने पर ही बताउन्गा

तो दोस्तो बात उस समय की है जब मैं 5थ मे था मैं एकलौता लड़का होने के कारण पापा मम्मी का लाड़ला था वो मेरी हर ज़िद पूरी करते थे मेरी हर अच्छी बुरी बात मान लिया करते थे इसलिए मैं बहुत जिद्दी हो गया था किसी को भी अपने सामने कुच्छ नही समझता था और लगभग हर दिन कोई ना कोई उल्टा काम करता ही रहता था मेरे पापा मम्मी मुझे बहुत समझते थे लेकिन मैं मानता ही नही था मेरी शैतानिया
दिन पर दिन बढ़ती जा रही थी और मेरे पापा मम्मी की सहन शक्ति ख़तम होते जा रही थी ख़ास तौर पर पापा की क्योंकि मेरी ग़लतियों
की सज़ा उन्हे ही भुगतनी होती थी और आख़िर वो दिन आ ही गया जब उन्होने मुझे 7 साल का स्कूल वास दे दिया

हुआ ये था कि उस दिन हम तीनो भाई बहन और हमारे एक मूह बोले चाचा की लड़की मोना छत पर खेल रहे थे और किसी बात पर गुस्से मे आकर मैने उसे छत से धक्का देदिया जिससे वो नीचे गिर गई वो तो गनीमत थी कि नीचे रोड से एक हाथ ठेला टेंट के गद्दे लेकर जा रहा था जिस पर मोना जाकर गिरी और उसे कोई खास चोट नही आई लेकिन उस घटना के बाद मेरे पापा और मम्मी दोनो ने ही मुझे बोरडिंग भेजने का फ़ैसला कर लिया और सज़ा ये दी कि इन 7 सालो मे जब तक मैं 12थ पास नही कर लेता मुझे घर नही आने दिया जाएगा और
घर से भी सिर्फ़ वो दोनो ही मिलने आएँगे वो भी साल मे सिर्फ़ दो बार मुझे उनका ये फ़ैसला मंजूर नही था लेकिन पापा कुच्छ मान-ने
को तैयार ही नही थे आज तक जिस बेटे को उन्होने आँख तक नही दिखाई थी आज वो उसे पीटने को भी तैयार थे अगर वो उनकी बात नही मानता तो

खैर अब मुझे बोरडिंग भेज दिया गया जहाँ धीरे धीरे मैं वहाँ सटेल हो गया और घर से दूर रहने और टीचर्स की सख्ती के चलते मेरा जिद्दी स्वाभाव भी धीरे धीरे बदल गया

इन सात सालो मे मुझे अपने घर की अपनी बहनो की और अपने पुराने दोस्तो की बहुत याद आई लेकिन मैं मजबूर था और आज सात साल बाद तो मैं उनकी शकले भी भूल गया था आज तो कंडीशन ये थी कि मुझे सिर्फ़ अपने पापा मम्मी के चेहरे ही पता थे अपनी बहनो
की शकल भी मैं भूल गया था और अगर वो मेरे सामने पड़ जाती तो मैं उन्हे नही पहचान सकता था

खैर आज मेरे 12थ के एग्ज़ॅम्स हो गये थे और कल मुझे घर के लिए निकलना था इसलिए आज मैं अपने स्कूल के दोस्तो से मिल कर उनसे विदाई लेने वाला था वैसे तो यहाँ मेरे बहुत से दोस्त थे लेकिन दो दोस्त गुड्डू और ज़य से मेरी बहुत बनती थी दोनो अच्छे घर से भी थे हम तीनो सभी बाते आपस मे शेयर करते थे और सेक्स और लड़कियो के बारे मे भी मुझे उनसे ही मालूम हुआ था गुड्डू और जय दोनो के पास ही स्मार्ट फोन थे जिसमे वो लोग जब छुट्टियों मे घर जाते तो बहुत सी पॉर्न क्लिप्स और पिक्स ले आते थे और फिर हम तीनो ही वो देख
कर अपनी फॅंटेसी शांत करते और मूठ मारने के लिए भी वो बहुत अच्छा सहारा था मैं आपको बता दूं कि मेरे पास मोबाइल नही था इसलिए नही कि हम लोग ग़रीब थे बल्कि इस लिए कि पापा मुझसे इतने नाराज़ थे कि मेरे बार बार रिक्वेस्ट करने के बाद भी उन्होने मुझे स्मार्ट
तो क्या के पॅड वाला मोबाइल भी नही दिलवाया था उनसे बात भी तभी होती थी जब वो हॉस्टिल के फोन पर खुद ही फोन लगते थे


मैं पेपर दे कर हॉस्टिल पहुचा जय और गुड्डू आर्ट्स के स्टूडेंट थे और मैं साइंस का उन दोनो के एग्ज़ॅम एक दिन पहले ही जो गये थे और वो भी कल अपने घर वापस जाने वाले थे

“आगया तू, कैसा गया पेपर” जय ने पुछा


“अरे कैसा सवाल पुछ रहा है तू, आज तक इसका कौनसा पेपर खराब गया है जो ये वाला जाएगा” गुड्डू बोला

मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई


“हाँ यार ये भी बहुत अच्छा गया” मैं बोला


“देखा मैने कहा था ना”गुड्डू बोला और उसने मुझे गले लगा लिया जय भी कहाँ पिछे रहता वो भी आकर हम दोनो से चिपक गया

“फिर दोस्तो, कल हमे हमेशा के लिए यहाँ से और एक दूसरे से दूर हो जाना है” जय बोला उसकी आवाज़ भर्रा गई थी

“कैसी बात करता है तू, हम यहाँ से भले ही चले जाएँगे लेकिन एक दूसरे से कभी दूर नही होंगे हम आज एक दूसरे से वादा करेंगे कि
चाहे कुच्छ भी हो जाए हम साल मे एक बार ज़रूर मिलेंगे और रोज बात करने के लिए व्हाट्स अप तो है ही ना” गुड्डू बोला

“लेकिन इसके पास तो मोबाइल ही नही है” जय बोला

तो क्या हुआ मैं तुम दोनो के नंबर ले लूँगा और मुझे पता है कि अब तक पापा की सारी नाराज़गी दूर हो गई होगी और जल्द ही वो मुझे मोबाइल दिलवा देंगे” मैं बोला

अब हम पलंग पर बैठ चुके थे


“तो कल तू कब निकल रहा है” मैने जय से पुछा क्योंकि उसी का शहर यहाँ से ज़्यादा दूर था

“सवेरे 8 बजे वाली ट्रेन है उसी से जाउन्गा” जय बोला


“और मेरी ट्रेन भी 8 बजे ही है और तेरा क्या प्रोग्राम है सोनू” गुड्डू ने मुझसे पुछा

“मेरी ट्रेन 9 बजे की है” मैं बोला


“यार हम दोनो की छोड़ हम तो साल मे दो बार अपने घर जाते ही रहते है लेकिन तू तो 7 साल बाद घर जा रहा है कैसा लग रहा है तुझे
” जय ने पुछा

“मैं बयान नही कर सकता यार वहाँ आज मेरी पहचान वाले सिर्फ़ मम्मी पापा ही है वैसे तो सभी है लेकिन अब मैं सभी के शकलें भूल चुका हूँ तो एक तरह से मैं अजनाबियो के बीच ही जा रहा हूँ” मैं बोला

“चल जो भी हुआ लेकिन इसका भी अपना ही मज़ा है जब कोई तुझे तेरे सगे संबंधियो और तेरी बहनो से इंट्रोड्यूस करवाएगा” गुड्डू बोला


मैं कुच्छ नही बोला सिर्फ़ सिर हिला कर ही रह गया


उसके बाद हम तीनो ही हॉस्टिल मे सभी से मिले उस रात बहुत मस्ती की और साल मे एक बार मिलने का वादा किया और मैने उन दोनो के मोबाइल नंबर लिया और फिर हम सभी अगले दिन जल्दी निकलना है इसलिए सो गये……..

अगली सुबह हम तीनो अपना समान लेकर स्टेशन पहुचे जय और गुड्डू अपनी अपनी ट्रेन्स मे रवाना हो गये और कुच्छ देर बाद मेरी ट्रेन
भी आगयि और मैं उसमे बैठ कर अपने घर के लिए रवाना हो गया.

यहाँ मैं आपको बता दूं कि हम एक गाओं के रहने वाले है जहाँ पापा की बहुत सी ज़मीन है जिस पर वो खेती का काम करते है जिसके लिए बहुत से नौकर भी रखे है मम्मी एक हाउस वाइफ है जिनका काम घर के सभी सदस्यो का ध्यान रखना और घर चलना है वैसे घर के काम मे मदद के लिए एक बाई और एक छोटी लड़की भी है. 5थ के बाद मुझे तो बोरडिंग भेज दिया गया था लेकिन मेरी बहनो की पढ़ाई के
लिए पापा ने पास के शहर जो हमारे गाओं से कोई 30 किमी दूर था मे एक घर खरीद लिया था जहाँ रह कर मेरी बहनो की पढ़ाई हो रही थी जब तक स्कूल चलते तब तक मम्मी वही रहती पापा भी दिन मे गाओं चले जाते और रात मे वापस आजाते और छुट्टियों मे सभी लोग
गाओं वापस आजाते थे अभी छुट्टियाँ चल रही थी इसलिए सभी गाओं मे ही थे.


ट्रेन से हमारे शहर तक का मेरा सफ़र कोई 6.30 घंटे का था फिर वहाँ से गाओं तक बस मे जाना था लेकिन ज़्यादा बस नही थी हमारे गाओं के लिए और लास्ट बस 5 बजे निकलती थी जो 1 घंटे मे गाओं तक पहुचा देती थी

मेरे घर मे किसी को पता नही था कि मैं आज आने वाला हूँ क्योंकि मैं उन्हे सर्प्राइज़ देना चाहता था तो मैं एक दिन बाद आने को कहा था

शाम के 3.30 बजे ट्रेन मेरे स्टेशन पर रुकी मैं आज 7 साल बाद अपने शहर वापस आकर खुशी से फूला नही समा रहा था स्टेशन से बाहर आकर मैं चारो तरफ नज़रे घुमाने लगा सब कुच्छ बदल गया था कोई भी जगह पहचानी नही जा रही थी चूँकि अभी बस निकलने मे टाइम था इसलिए मैं टाइम पास करने पास के ही एक पार्क मे जो अभी सुनसान पड़ा था जाकर एक बँच पर लेट गया और अपने घर के बारे मे सोचने लगा तभी मुझे पास की झाड़ियो से कुच्छ आहट सुनाई पड़ी मैने गर्दन घुमा कर उस तरफ देखा लेकिन कुच्छ नज़र नही आया तभी मेरे कानो मे एक लड़की की फुसफुसाती सी लेकिन गुस्से से भरी आवाज़ सुनाई पड़ी “मैने तुम्हे कितनी बार कहा है कि मैं इससे आगे नही बढ़ सकती और तुम हो की मानते ही नही”

“लेकिन जान हमारे प्यार को शुरू हुए दो महीने हो गये है और तुम किस और दूध दब्वाने से आगे ही नही बढ़ी जब कि कई लोग तो इतने टाइम मे अबॉर्षन भी करवा लेते है” लड़के की आवाज़ आई.

“वो मुझे नही पता लेकिन मैं इससे आगे नही बढ़ सकती” लड़की बोली

“लेकिन ऐसे मे कैसे चलेगा” लड़का बोला लड़की कुच्छ नही बोली

“ओके तो ठीक है मैं समझ गया तुम्हारे मन मे मेरे लिए कोई प्यार व्यार नही है, चलो अब चलते है मैं सब समझ गया” लड़का फिर बोला

“तुम समझते क्यो नही मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ लेकिन मैं सेक्स के लिए अभी खुद को तैयार नही कर पाई हूँ” लड़की बोली

कुच्छ देर तक कोई आवाज़ नही आई फिर लड़का बोला “चलो ठीक है अभी हम सेक्स नही करते लेकिन अभी जो कर रहे है उससे आगे तो बढ़ सकते है”

“मतलब” लड़की ने पुछा


“मतलब ये कि मैं तुम्हे पूरी नंगी देखना चाहता हूँ” लड़का बोला

“नही नही ये नही हो सकता” लड़की जल्दी से बोली


“ये भी नही, वो भी नही तो ऐसे मे कैसे जमेगी यार” लड़का निराशा मे बोला

“मेरा मतलब ये नही था, मैं एक दम से तुम्हारे सामने नंगी कैसे हो सकती हूँ मुझे बहुत शरम आएगी” लड़की बोली


“अगर ऐसी बात है तुम ब्रा पैंटी मे ही मुझे अपने इस हसीन जिस्म के दर्शन करवा दो” लड़का बोला “ठीक है इतना मैं कर सकती हूँ लेकिन वादा करो तुम कोई शैतानी नही करोगे” लड़की बोली

“ओके प्रॉमिस तो कल पक्का” लड़का बोला


“कल नही परसो, कल घर पर काम है” लड़की बोली


“ठीक है जैसा तुम कहो लेकिन अभी के लिए एक किस तो देदो” लड़का बोला और फिर उनकी आवाज़े आना बंद हो गई

फिर कुच्छ टाइम बाद वो झाड़ियो से निकल कर बाहर जाने लगे मेरी तरफ उनकी निगाह नही गई लेकिन मैने उन दोनो को ही अच्छी तरह से देखा दोनो ही पर्फेक्ट थे अपनी अपनी जगह लेकिन लड़की तो सचमुच मे बॉम्ब थी कि कोई भी उसे एक बार देख ले तो पहला
ख़याल उसे चोदने का ही आए सुंदर चेहरा बड़े बड़े बूब्स भारी भारी जांघे और मस्त मोटी गान्ड क्या नही था उस लड़की मे मुझे उस लड़के से जलन होने लगी की काश उसकी जगह मैं होता कुच्छ ऐसी थी वो लड़की

खैर उसके बाद मैं बस स्टॅंड पहुच गया वहाँ पता किया तो मालूम पड़ा कि मेरे गाओं की बस निकलने मे अभी आधा घंटा और है तो मैं एक होटेल मे नाश्ता करते हुए टाइम पास करने लगा

शाम 5 बजे बस रवाना हुई शहर से गाओं तक का


रास्ता बहुत खराब था गड्ढे भी बहुत थे इसलिए बस हिचकोले लेते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी और मैं सोच रहा था कि जब मैं घर पहुचूँगा तो कैसा लगेगा मैं तो अपनी बहनो को पहचान भी नही पाउन्गा और वो भी मुझे पहचान नही पाएँगी मेरे पुराने दोस्त कैसे होंगे यही सब सोचते सोचते बस की धीमी स्पीड मे मुझे कब झपकी लग गई पता ही नही चला………
 
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Kapil Bajaj

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very very very good hot and nice updated waiting for next updates waiting for next updates waiting for next updates waiting for next update update update update update update update update plz
 

Mahi Maurya

Dil Se Dil Tak
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कहानी की शुरुआत बहुत ही मंझे हुए रचनाकार की तरह की है आपने।
बस एक गुजारिश है कि कहानी में निरंतरता बनाये रखिएगा अन्यथा कहानी का मज़ा खराब हो जाएगा।

All the best.
 

Gaandu No 1

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हाई दोस्तो मेरा नाम सोनू है, मैं एक 19 साल का हॅंडसम लड़का हूँ जिसे देख कर लड़कियाँ मर मिटे लेकिन आज तक ऐसा हुआ नही है क्योंकि आज से 7 साल पहले मुझे सज़ा के तौर पर मेरे पापा – मम्मी ने एक बोरडिंग स्कूल भेज दिया था जो की सिर्फ़ बाय्स के लिए ही
था इसलिए आज तक कोई भी लड़की मुझसे नही पटी लेकिन मैं लड़कियो का दीवाना हूँ और सेक्स का टॉपिक मुझे बहुत पसंद है लेकिन मेरे घर वालो की दी हुई सज़ा की वजह से मैं कभी भी सेक्स का मज़ा नही ले पाया.

अब आप सोच रहे होंगे कि मैने ऐसा कॉन सा गुनाह किया था जिसकी वजह से मुझे इतनी सख़्त सज़ा मिली कि मैं इन सात सालो मे अपने घर भी नही जा पाया अपनी दोनो बहनो से इन सात सालो मे कभी नही मिला और नही मेरे पापा मम्मी कभी उन्हे मुझ से मिलाने लाए
बस साल मे दो बार मम्मी पापा मुझसे मिलने आते थे और गर्मियों की छुट्टी मे भी स्कूल मे ही कोई ना कोई कोर्स करवाते रहते थे

वैसे दोस्तो पहले मैं आपको अपनी फॅमिली के बारे मे बता देता हूँ मेरे परिवार मे पापा, मम्मी, मैं, मेरी एक बड़ी बहन निशा जो अब 20
साल की है और एक छोटी बहन डॉली जो कि 18 की है . बाकी और भी रिश्तेदार है लेकिन उनके बारे मे वक्त आने पर ही बताउन्गा

तो दोस्तो बात उस समय की है जब मैं 5थ मे था मैं एकलौता लड़का होने के कारण पापा मम्मी का लाड़ला था वो मेरी हर ज़िद पूरी करते थे मेरी हर अच्छी बुरी बात मान लिया करते थे इसलिए मैं बहुत जिद्दी हो गया था किसी को भी अपने सामने कुच्छ नही समझता था और लगभग हर दिन कोई ना कोई उल्टा काम करता ही रहता था मेरे पापा मम्मी मुझे बहुत समझते थे लेकिन मैं मानता ही नही था मेरी शैतानिया
दिन पर दिन बढ़ती जा रही थी और मेरे पापा मम्मी की सहन शक्ति ख़तम होते जा रही थी ख़ास तौर पर पापा की क्योंकि मेरी ग़लतियों
की सज़ा उन्हे ही भुगतनी होती थी और आख़िर वो दिन आ ही गया जब उन्होने मुझे 7 साल का स्कूल वास दे दिया

हुआ ये था कि उस दिन हम तीनो भाई बहन और हमारे एक मूह बोले चाचा की लड़की मोना छत पर खेल रहे थे और किसी बात पर गुस्से मे आकर मैने उसे छत से धक्का देदिया जिससे वो नीचे गिर गई वो तो गनीमत थी कि नीचे रोड से एक हाथ ठेला टेंट के गद्दे लेकर जा रहा था जिस पर मोना जाकर गिरी और उसे कोई खास चोट नही आई लेकिन उस घटना के बाद मेरे पापा और मम्मी दोनो ने ही मुझे बोरडिंग भेजने का फ़ैसला कर लिया और सज़ा ये दी कि इन 7 सालो मे जब तक मैं 12थ पास नही कर लेता मुझे घर नही आने दिया जाएगा और
घर से भी सिर्फ़ वो दोनो ही मिलने आएँगे वो भी साल मे सिर्फ़ दो बार मुझे उनका ये फ़ैसला मंजूर नही था लेकिन पापा कुच्छ मान-ने
को तैयार ही नही थे आज तक जिस बेटे को उन्होने आँख तक नही दिखाई थी आज वो उसे पीटने को भी तैयार थे अगर वो उनकी बात नही मानता तो

खैर अब मुझे बोरडिंग भेज दिया गया जहाँ धीरे धीरे मैं वहाँ सटेल हो गया और घर से दूर रहने और टीचर्स की सख्ती के चलते मेरा जिद्दी स्वाभाव भी धीरे धीरे बदल गया

इन सात सालो मे मुझे अपने घर की अपनी बहनो की और अपने पुराने दोस्तो की बहुत याद आई लेकिन मैं मजबूर था और आज सात साल बाद तो मैं उनकी शकले भी भूल गया था आज तो कंडीशन ये थी कि मुझे सिर्फ़ अपने पापा मम्मी के चेहरे ही पता थे अपनी बहनो
की शकल भी मैं भूल गया था और अगर वो मेरे सामने पड़ जाती तो मैं उन्हे नही पहचान सकता था

खैर आज मेरे 12थ के एग्ज़ॅम्स हो गये थे और कल मुझे घर के लिए निकलना था इसलिए आज मैं अपने स्कूल के दोस्तो से मिल कर उनसे विदाई लेने वाला था वैसे तो यहाँ मेरे बहुत से दोस्त थे लेकिन दो दोस्त गुड्डू और ज़य से मेरी बहुत बनती थी दोनो अच्छे घर से भी थे हम तीनो सभी बाते आपस मे शेयर करते थे और सेक्स और लड़कियो के बारे मे भी मुझे उनसे ही मालूम हुआ था गुड्डू और जय दोनो के पास ही स्मार्ट फोन थे जिसमे वो लोग जब छुट्टियों मे घर जाते तो बहुत सी पॉर्न क्लिप्स और पिक्स ले आते थे और फिर हम तीनो ही वो देख
कर अपनी फॅंटेसी शांत करते और मूठ मारने के लिए भी वो बहुत अच्छा सहारा था मैं आपको बता दूं कि मेरे पास मोबाइल नही था इसलिए नही कि हम लोग ग़रीब थे बल्कि इस लिए कि पापा मुझसे इतने नाराज़ थे कि मेरे बार बार रिक्वेस्ट करने के बाद भी उन्होने मुझे स्मार्ट
तो क्या के पॅड वाला मोबाइल भी नही दिलवाया था उनसे बात भी तभी होती थी जब वो हॉस्टिल के फोन पर खुद ही फोन लगते थे


मैं पेपर दे कर हॉस्टिल पहुचा जय और गुड्डू आर्ट्स के स्टूडेंट थे और मैं साइंस का उन दोनो के एग्ज़ॅम एक दिन पहले ही जो गये थे और वो भी कल अपने घर वापस जाने वाले थे

“आगया तू, कैसा गया पेपर” जय ने पुछा


“अरे कैसा सवाल पुछ रहा है तू, आज तक इसका कौनसा पेपर खराब गया है जो ये वाला जाएगा” गुड्डू बोला

मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई


“हाँ यार ये भी बहुत अच्छा गया” मैं बोला


“देखा मैने कहा था ना”गुड्डू बोला और उसने मुझे गले लगा लिया जय भी कहाँ पिछे रहता वो भी आकर हम दोनो से चिपक गया

“फिर दोस्तो, कल हमे हमेशा के लिए यहाँ से और एक दूसरे से दूर हो जाना है” जय बोला उसकी आवाज़ भर्रा गई थी

“कैसी बात करता है तू, हम यहाँ से भले ही चले जाएँगे लेकिन एक दूसरे से कभी दूर नही होंगे हम आज एक दूसरे से वादा करेंगे कि
चाहे कुच्छ भी हो जाए हम साल मे एक बार ज़रूर मिलेंगे और रोज बात करने के लिए व्हाट्स अप तो है ही ना” गुड्डू बोला

“लेकिन इसके पास तो मोबाइल ही नही है” जय बोला

तो क्या हुआ मैं तुम दोनो के नंबर ले लूँगा और मुझे पता है कि अब तक पापा की सारी नाराज़गी दूर हो गई होगी और जल्द ही वो मुझे मोबाइल दिलवा देंगे” मैं बोला

अब हम पलंग पर बैठ चुके थे


“तो कल तू कब निकल रहा है” मैने जय से पुछा क्योंकि उसी का शहर यहाँ से ज़्यादा दूर था

“सवेरे 8 बजे वाली ट्रेन है उसी से जाउन्गा” जय बोला


“और मेरी ट्रेन भी 8 बजे ही है और तेरा क्या प्रोग्राम है सोनू” गुड्डू ने मुझसे पुछा

“मेरी ट्रेन 9 बजे की है” मैं बोला


“यार हम दोनो की छोड़ हम तो साल मे दो बार अपने घर जाते ही रहते है लेकिन तू तो 7 साल बाद घर जा रहा है कैसा लग रहा है तुझे
” जय ने पुछा

“मैं बयान नही कर सकता यार वहाँ आज मेरी पहचान वाले सिर्फ़ मम्मी पापा ही है वैसे तो सभी है लेकिन अब मैं सभी के शकलें भूल चुका हूँ तो एक तरह से मैं अजनाबियो के बीच ही जा रहा हूँ” मैं बोला

“चल जो भी हुआ लेकिन इसका भी अपना ही मज़ा है जब कोई तुझे तेरे सगे संबंधियो और तेरी बहनो से इंट्रोड्यूस करवाएगा” गुड्डू बोला


मैं कुच्छ नही बोला सिर्फ़ सिर हिला कर ही रह गया


उसके बाद हम तीनो ही हॉस्टिल मे सभी से मिले उस रात बहुत मस्ती की और साल मे एक बार मिलने का वादा किया और मैने उन दोनो के मोबाइल नंबर लिया और फिर हम सभी अगले दिन जल्दी निकलना है इसलिए सो गये……..

अगली सुबह हम तीनो अपना समान लेकर स्टेशन पहुचे जय और गुड्डू अपनी अपनी ट्रेन्स मे रवाना हो गये और कुच्छ देर बाद मेरी ट्रेन
भी आगयि और मैं उसमे बैठ कर अपने घर के लिए रवाना हो गया.

यहाँ मैं आपको बता दूं कि हम एक गाओं के रहने वाले है जहाँ पापा की बहुत सी ज़मीन है जिस पर वो खेती का काम करते है जिसके लिए बहुत से नौकर भी रखे है मम्मी एक हाउस वाइफ है जिनका काम घर के सभी सदस्यो का ध्यान रखना और घर चलना है वैसे घर के काम मे मदद के लिए एक बाई और एक छोटी लड़की भी है. 5थ के बाद मुझे तो बोरडिंग भेज दिया गया था लेकिन मेरी बहनो की पढ़ाई के
लिए पापा ने पास के शहर जो हमारे गाओं से कोई 30 किमी दूर था मे एक घर खरीद लिया था जहाँ रह कर मेरी बहनो की पढ़ाई हो रही थी जब तक स्कूल चलते तब तक मम्मी वही रहती पापा भी दिन मे गाओं चले जाते और रात मे वापस आजाते और छुट्टियों मे सभी लोग
गाओं वापस आजाते थे अभी छुट्टियाँ चल रही थी इसलिए सभी गाओं मे ही थे.


ट्रेन से हमारे शहर तक का मेरा सफ़र कोई 6.30 घंटे का था फिर वहाँ से गाओं तक बस मे जाना था लेकिन ज़्यादा बस नही थी हमारे गाओं के लिए और लास्ट बस 5 बजे निकलती थी जो 1 घंटे मे गाओं तक पहुचा देती थी

मेरे घर मे किसी को पता नही था कि मैं आज आने वाला हूँ क्योंकि मैं उन्हे सर्प्राइज़ देना चाहता था तो मैं एक दिन बाद आने को कहा था

शाम के 3.30 बजे ट्रेन मेरे स्टेशन पर रुकी मैं आज 7 साल बाद अपने शहर वापस आकर खुशी से फूला नही समा रहा था स्टेशन से बाहर आकर मैं चारो तरफ नज़रे घुमाने लगा सब कुच्छ बदल गया था कोई भी जगह पहचानी नही जा रही थी चूँकि अभी बस निकलने मे टाइम था इसलिए मैं टाइम पास करने पास के ही एक पार्क मे जो अभी सुनसान पड़ा था जाकर एक बँच पर लेट गया और अपने घर के बारे मे सोचने लगा तभी मुझे पास की झाड़ियो से कुच्छ आहट सुनाई पड़ी मैने गर्दन घुमा कर उस तरफ देखा लेकिन कुच्छ नज़र नही आया तभी मेरे कानो मे एक लड़की की फुसफुसाती सी लेकिन गुस्से से भरी आवाज़ सुनाई पड़ी “मैने तुम्हे कितनी बार कहा है कि मैं इससे आगे नही बढ़ सकती और तुम हो की मानते ही नही”

“लेकिन जान हमारे प्यार को शुरू हुए दो महीने हो गये है और तुम किस और दूध दब्वाने से आगे ही नही बढ़ी जब कि कई लोग तो इतने टाइम मे अबॉर्षन भी करवा लेते है” लड़के की आवाज़ आई.

“वो मुझे नही पता लेकिन मैं इससे आगे नही बढ़ सकती” लड़की बोली

“लेकिन ऐसे मे कैसे चलेगा” लड़का बोला लड़की कुच्छ नही बोली

“ओके तो ठीक है मैं समझ गया तुम्हारे मन मे मेरे लिए कोई प्यार व्यार नही है, चलो अब चलते है मैं सब समझ गया” लड़का फिर बोला

“तुम समझते क्यो नही मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ लेकिन मैं सेक्स के लिए अभी खुद को तैयार नही कर पाई हूँ” लड़की बोली

कुच्छ देर तक कोई आवाज़ नही आई फिर लड़का बोला “चलो ठीक है अभी हम सेक्स नही करते लेकिन अभी जो कर रहे है उससे आगे तो बढ़ सकते है”

“मतलब” लड़की ने पुछा


“मतलब ये कि मैं तुम्हे पूरी नंगी देखना चाहता हूँ” लड़का बोला

“नही नही ये नही हो सकता” लड़की जल्दी से बोली


“ये भी नही, वो भी नही तो ऐसे मे कैसे जमेगी यार” लड़का निराशा मे बोला

“मेरा मतलब ये नही था, मैं एक दम से तुम्हारे सामने नंगी कैसे हो सकती हूँ मुझे बहुत शरम आएगी” लड़की बोली


“अगर ऐसी बात है तुम ब्रा पैंटी मे ही मुझे अपने इस हसीन जिस्म के दर्शन करवा दो” लड़का बोला “ठीक है इतना मैं कर सकती हूँ लेकिन वादा करो तुम कोई शैतानी नही करोगे” लड़की बोली

“ओके प्रॉमिस तो कल पक्का” लड़का बोला


“कल नही परसो, कल घर पर काम है” लड़की बोली


“ठीक है जैसा तुम कहो लेकिन अभी के लिए एक किस तो देदो” लड़का बोला और फिर उनकी आवाज़े आना बंद हो गई

फिर कुच्छ टाइम बाद वो झाड़ियो से निकल कर बाहर जाने लगे मेरी तरफ उनकी निगाह नही गई लेकिन मैने उन दोनो को ही अच्छी तरह से देखा दोनो ही पर्फेक्ट थे अपनी अपनी जगह लेकिन लड़की तो सचमुच मे बॉम्ब थी कि कोई भी उसे एक बार देख ले तो पहला
ख़याल उसे चोदने का ही आए सुंदर चेहरा बड़े बड़े बूब्स भारी भारी जांघे और मस्त मोटी गान्ड क्या नही था उस लड़की मे मुझे उस लड़के से जलन होने लगी की काश उसकी जगह मैं होता कुच्छ ऐसी थी वो लड़की

खैर उसके बाद मैं बस स्टॅंड पहुच गया वहाँ पता किया तो मालूम पड़ा कि मेरे गाओं की बस निकलने मे अभी आधा घंटा और है तो मैं एक होटेल मे नाश्ता करते हुए टाइम पास करने लगा

शाम 5 बजे बस रवाना हुई शहर से गाओं तक का


रास्ता बहुत खराब था गड्ढे भी बहुत थे इसलिए बस हिचकोले लेते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी और मैं सोच रहा था कि जब मैं घर पहुचूँगा तो कैसा लगेगा मैं तो अपनी बहनो को पहचान भी नही पाउन्गा और वो भी मुझे पहचान नही पाएँगी मेरे पुराने दोस्त कैसे होंगे यही सब सोचते सोचते बस की धीमी स्पीड मे मुझे कब झपकी लग गई पता ही नही चला………
Shaandaar update asha hai ki roj update aayega
Yes
 

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अचानक एक ज़ोर की खड-खड की आवाज़ से मेरी नींद टूट गई बस रुकी हुई थी और उसका स्टाफ बस के नीचे घुस कर कुच्छ देख रहा था मैने टाइम देखा तो 5.40 हो गया था यानी अभी भी मेरा गाओं कोई 5-6 किमी दूर होना चाहिए था. मैं नीचे उतरा और आस पास
नज़रे घूमने लगा मार्च का महीना था और गर्मिया स्टार्ट हो गई थी अभी 6 बजने वाले थे लेकिन लग रहा था जैसे 4 ही बजे हो

“भाई लोगो बस खराब हो गई है और अभी इसका सुधारना मुमकिन नही है इसलिए अब आगे आपको पैदल ही जाना पड़ेगा” बस का ड्राइवर बोला जो अभी अभी बस के नीचे से निकला था

“लेकिन इतनी दूर हम पैदल कैसे जाएँगे” एक यात्री बोला

“मजबूरी है भाई, और वैसे भी 5 किमी ही तो चलना है और अगर किस्मत से कोई गाड़ी आ गई तो उस से लिफ्ट ले


लेना” ड्राइवर कंधे उचकाते हुए बोला


अब सभी सवारियाँ उस बस को कोसते हुए अपना समान निकालने लगी मैने भी अपना बॅग निकाला जो कि बहुत भारी था और बस से
नीचे उतर कर रोड की तरफ देखने लगा कि शायद कोई और गाड़ी आरहि हो लेकिन मुझे कोई गाड़ी आते दिखाई नही दी

“लगता है यहाँ नये नये आए हो बेटा तभी किसी गाड़ी का इंतजार कर रहे हो लेकिन बहुत किस्मत वाले हुए तो ही कोई गाड़ी मिलेगी वरना ये लास्ट बस थी” एक बुजुर्ग मुझसे बोला

“लेकिन बाबा कोई मोटर बाइक भी तो आ सकती है ना” मैं बोला

“हां वो तो आ सकती है लेकिन ज़्यादातर पर 2 सवारी ही होती है और अगर कोई अकेला भी हो तो शायद ही लिफ्ट दे क्योंकि रोड की हालत तो तुम देख ही रहे हो ऐसे मे कोई क्यों रिस्क लेगा इसलिए पैदल चलने मे ही समझदारी है” बुजुर्ग बोला और गाओं की तरफ बढ़ गया

अब तक लगभग सभी सवारियाँ जा चुकी थी मैने भी अपना बॅग उठाया और चलने लगा मेरा बॅग भारी था इसलिए मैं बहुत धीरे चल रहा था बाकी के लोग मुझसे बहुत आगे निकल गये थे थोड़ी देर बाद कुच्छ बाइक भी आई और मैने उनसे लिफ्ट माँगी लेकिन किसी ने भी गाड़ी
नही रोकी मैं समझ गया कि बुजुर्ग सही कह रहा था यहाँ लिफ्ट मिलना मुश्किल ही नही नामुमकिन दिख रहा था मैं मन मार कर पैदल
ही चलने लगा अभी मैं कोई आधा किमी ही चला था कि मुझे पिछे से किसी गाड़ी का हॉर्न सुनाई दिया मैने पिछे पलट कर देखा तो एक लड़की स्कूटी पर अकेली चली आरहि थी मेरी उम्मीद जागी कि मुझे लिफ्ट मिल सकती है लेकिन मैं कोई रिस्क नही लेना चाहता था तब तक स्कूटी बहुत पास आ गई थी मैं झट से कूद कर रोड के बीचो-बीच आ खड़ा हुआ और दोनो हाथ फैला कर उस लड़की को रुकने का इशारा करने लगा लेकिन शायद लड़की मेरे इस तरह अचानक रोड के बीच कूदने से घबरा गई और उसने पूरी ताक़त से ब्रेक दबा दिए जिससे स्कूटी अनबॅलेन्स्ड हो गई और रोड पर तिरछी हो गई ये तो अच्छा हुआ कि वो लड़की गिरी नही उसने जैसे तैसे स्कूटी खड़ी की और
तमक कर मुझसे बोली “मरने का इरादा है क्या या मुझे मारने का”

उसका मूह गुस्से से लाल हो चुका था


“वो…वो…सॉरी मिस लेकिन मेरा ऐसा कोई इरादा नही था वो मेरी बस खराब हो गई थी और मुझे गाओं तक जाना था उस पर यहाँ कोई लिफ्ट भी नही दे रहा था इस लिए मैने ऐसा किया” मैं शर्मिंदा होते हुए बोला

“तो क्या हुआ बस मे और भी तो लोग होंगे वो कैसे गये” लड़की अभी भी भड़क रही थी

“वो तो पैदल ही चले गये” मैने जवाब दिया

“जब बाकी लोग पैदल चल सकते है तो तुम क्यों नही चल सकते क्या कहीं के राजकुमार हो तुम” वो गुस्से से फन्फनाते हुए बोली


“नही ऐसी बात नही है दरअसल मेरा बॅग बहुत भारी है और मुझे आज तक कभी भी इतना पैदल नही चलना पड़ा इसीलिए परेशान हूँ,
प्ल्ज़ मुझे आगे गाओं तक लिफ्ट देदो” मैं खुशमदी लहजे मे बोला

“तुमने ये जो रोड पर कूदने वाली हरकत की है ना अगर ये ना करते तो शायद मैं तुम्हे लिफ्ट दे भी देती लेकिन अभी अभी मैं तुम्हारी वजह से मरते मरते बची हूँ इसलिए लिफ्ट को तो अब तुम भूल ही जाओ, चलो हटो रास्ते से मुझे जाने दो” वो अभी भी तमतमाई हुई थी

“लेकिन मैने उसके लिए सॉरी तो बोल दिया ना अब प्ल्ज़ मुझे लिफ्ट देदो” मैं गिडगिडाते हुए बोला

“नो वे” कहते हुए उसने स्कूटी स्टार्ट की और फुर्र से मेरे साइड से आगे निकल ली

‘तेरी माँ की चूत, साली मादरचोद इतना भाव खाती है जैसे स्कूटी नही प्लेन चला रही हो’ मैं मन ही मन बड़बड़ाया और मन मार कर आगे बढ़ने लगा

मुझे चलते हुए कोई 15 मिनिट हो गये शाम के 7 भी बजने वेल थे और अंधेरा धीरे धीरे अपने पैर पसारने लगा था और मेरा गाओं अभी कोई 2 किमी और दूर था तभी मुझे आगे वही स्कूटी और वो लड़की रोड पर खड़ी दिखाई दिए मेरी चाल थोड़ी बढ़ गयी की शायद कहीं मेडम का मूड चेंज हो गया हो


और वो मुझे लिफ्ट दे दे लेकिन जैसे ही मैं उसके पास पहुचा मेरी नज़र स्कूटी के पिच्छले पहिए पर पड़ी जोकि पंचर हुआ पड़ा था

मैं समझ गया कि साली मुसीबत में है बहुत बज रही थी कमिनि पड़ी सड़ने दे हराम्खोर को मैने सोचा और आगे बढ़ गया वो लगातार
उम्मीद भरी नज़रो से मेरी तरफ देख रही थी लेकिन कुच्छ बोली नही मैं चार कदम और आगे बढ़ गया कि तभी उसकी आवाज़ आई

“आए मिस्टर, तुम्हे लिफ्ट चाहिए थी ना” वो बोली


“लेकिन आप मुझे लिफ्ट कहाँ दे रही हो” मैं चलते हुए ही बोला

“लेकिन अब अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हे लिफ्ट दे सकती हूँ बस मेरी गाड़ी का टायर चेंज करना होगा” वो बोली

“सॉरी मैं ये नही कर सकता और वैसे भी अब गाओं आने ही वाला है” मैं बोला

“अभी कहाँ अभी तो गाओं 2 केयेम दूर है” वो बोली


“तो क्या हुआ जब मैं इतना चल चुका हूँ तो थोड़ा और सही” मैने जवाब दिया और आगे बढ़ गया

“सुनो – सुनो प्ल्ज़ मैं अपने किए पर सॉरी बोलती हूँ लेकिन प्ल्ज़ मेरी मदद कर दो अंधेरा होने वाला है और मुझे टायर चेंज करना नही आता प्ल्ज़ रुक जाओ”

अब वो मेरी मिन्नतें करते हुए बोली


अब तक मैं भी अपना भारी बॅग लादे चलते चलते थक गया था और उस पर उसने मुझसे माफी भी माँग ली थी इसलिए मैं रुका और पिछे मूड कर बोला “ये मत समझना कि मैं पैदल चलने की वजह से तुम्हारी हेल्प कर रहा हूँ असल मे बात सिर्फ़ तुम्हारी एक लड़की होने की है और उस पर अंधेरा इस लिए मैं तुम्हारी मदद कर रहा हू लेकिन उसके लिए भी मेरी एक शर्त है”
 
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urc4me

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Rasprad Shuruaat Romanchak kahani ka. Waiting for next update
 
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