Incest मेरा परिवार सुखी संसार

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Lusty Star

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नमस्कार दोस्तों,
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद,
कहानी लम्बी है, आशा है आपको पसन्द आएगी,

कई किरदार आएंगे,
कई मौके आएंगे

सम्भव है कि कहानी में कुछ ऐसे से भी संवाद और परिस्थिती आएंगी जो आपको लगे कि कही पर ये पढ़ा है,

और भी बहुत कुछ होगा, कहानी को मजेदार बनाने के लिए आप सभी के द्वारा दिए गए सुझावों को समिल्लित करे जाने का पूरा प्रयास करूंगा,
 
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अध्याय 19


'15 मिनट बाद ट्रेन से १००-१२० किमी की रफ्तार पकड़ ली. श्वेता ने ब्लाऊज और पेटीकोट पहन लिया था, कि कहीं अगर उसके बच्चे या राजश्री जाग जाएगी तो समस्या हो जायेगी, साथ ही रमेश ने भी पेंट पहन ली थी,

श्वेता के ब्लाउस के गले से उसकी मस्त मस्त संगमरमरी छातियाँ दिख रही थी. रमेश का हाथ उसकी पैंट पर चला गया. उसका लंड फिर से खड़ा हो रहा था.

वो श्वेता की गुलाबी चूत को एक बार और मारना चाहता था. रमेश ने देखा कि बच्चे और राजश्री अभी भी सो रहे है, राजश्री तो सोने का नाटक कर रही थी,

लेकिन चुदाई के जोश में इस बात से अनजान रमेश ने पैंट की हुक खोल दी.

पैंट खोलकर एक हाथ से लंड सहलाने लगा, उसके सामने श्वेता भी ये देख कर मस्त हो रही थी.


ट्रेन के हिलने से श्वेता की चुचियाँ भी हिल रही थी. वाकई ट्रेन बहुत तेज दौड़ रही थी.

रमेश अपने लंड को फेटने लगा. उसके दिल में, दिमाग में बस एक की तस्वीर थी. श्वेता और उनकी चिकनी चमेली वाली चूत.


खिड़की हल्की सी खोल ली थी, जिसमे से मस्त हवा चल आ रही थी.

खिड़की से सुहावनी हवा अंदर हमारे केबिन में आ रही थी. श्वेता के ब्लाउस में हवा जा रही थी. उसकी गोरी बर्फी से संगमरमरी चुचियाँ साफ साफ दिख रही थी.

श्वेता ने भी ब्लाउज उपर चढ़ लिया था और उनकी दाहिनी चूची बिलकुल बाहर निकल आई थी. लग रहा था की कोई पीला पका आम रमेश को चिढ़ा रहा है कि पकड़ सको तो पकड़ लो,

रमेश (साथ ही राजश्री भी) वो आम देखकर पागल हो गया.

रमेश उठा और सीधा जाकर श्वेता के बगल लेट गया. उनके दाहिने मम्मे को मुँह में भर लिया पीने लगा.

श्वेता वैसे ही बैठी रही,उनकी छाती बहुत ही गोरी, बहुत ही सुंदर थी. निपल्स के चारों तरह काले काले गोल गोल घेरे थे जो रमेश के लंड को पुकार रहे थे.

रमेश के हाथ श्वेता की चुच्ची पर चले गये. और जोर जोर से उसे दबाने लगा. फिर पीने लगा.

श्वेता कुछ कहना चाहती थी पर रमेश ने झट से उनके मुँह पर अपना मुँह रख दिया.

उसको कुछ नही बोलने दिया. उसके पतले पतले होंठों को अपने होंठों में भर लिया और पीने लगा.

श्वेता जब अपने हाथ से मुझे रोकने लगी तो रमेश ने उनके हाथ को कसके पकड़ लिया.

रमेश श्वेता के शहद से मीठे होठों को पी रहा था, और ऐसी चुदाई ट्रेन में, वो हमेशा से ही करना चाहता था, . श्वेता कुछ कहना चाह रही थी.

संभवत रोकना चाहती हों. पर रमेश किसी शिकारी लोमड़ी की तरह उसके मुँह को दबाकर रखा था. उनके होंठ को पी रहा था.

तब श्वेता ने आंखो से इशारा किया राजश्री की तरफ, रमेश ने होठ अलग किए और राजश्री की तरफ देखा तो पाया कि राजश्री ने एक अंगड़ाई ली और फिर सो गई,

अंगड़ाई तो आएगी ही इतनी मस्त चुदाई जो चल रही थी,

दो मिनट ऐसे ही रहने के बाद,

रमेश फिर से श्वेता को चूमने चाटने लगा, जिसमे श्वेता उसका बराबर साथ दे रही थी,
रमेश ने चुदासी श्वेता के दोनों मम्मो आजाद कर दिया,

और थोड़ी देर तक अपनी चुदक्कड़ श्वेता के कबूतरों को देखता रहा. और सोच रहा था कि सच में भगवान ने श्वेता को बड़ी फुर्सत में बनाया था.

वो फिर से हाथ से श्वेता के मम्मे दबाने लगा.

उसकी पैंट में लंड फुफकार मार रहा था.

श्वेता को चोदने को बेताब था.
रमेश को पलभर के लिए लगा की वो स्वर्ग पहुच गया है, पटरी पर तेज दौड़ती ट्रेन. खिड़की से आती हवा. और केबिन में नंगी श्वेता और सोती हुई उसकी बहन,

सूरज की रोशनी से भी सफ़ेद श्वेता की चुचियाँ क्या मस्त लग रही थी,

वो जीभ को घुमा घुमा कर उसके मम्मे पी रहा था.

निपल्स के चारो तरफ काले काले घेरे तो बिलकुल कुदरत का करिश्मा लग रहे थे. वो जोर जोर से हाथों से उसके बूब्स दबा रहा था. और पी रहा था.

फिर श्वेता ने पेटीकोट उपर उठा दिया. श्वेता की गुलाबी चूत दोबारा उसके सामने थी, पिछली बार उसने बराबर देखा नही बस चुदाई की, परंतु इस बार वो उसको प्यार से और देर तक चोदने की फिराक में था,

राजश्री भी अपने भाई का अंदाज और अनुभव देख कर पक्का कर चुकी थी की उसकी पहली चुदाई उसका भाई ही करेगा,


रमेश को श्वेता की मस्त मस्त लाल लाल चूत मिल गयी.

श्वेता ने रमेश के ऊपर आते हुवे अपने हाथ से लंड पकड़ कर चूत पर लगा दिया, और कमर उछाल उछाल कर कर स्वयं ही रमेश को चोदने लगी,

राजश्री का मुँह उतेज्जना से खुल गया. वो ट्रेन की छत को देखने लगी.

रमेश को श्वेता बड़ी ही प्यारी लग रही थी,

धीरे धीरे उसका लंड भी श्वेता की चूत में उसी तरह दौड़ने लगा जैसे ट्रेन लोहे की पटरियों पर सरपट सरपट दौड़ रही थी. ये वाकई एक यादगार अनुभव था.

चलती ट्रेन में श्वेता का इस तरह चोदना दोनो भाई बहनों की हालत खराब कर रहा था पर एक सुखद अनुभव भी दे रहा था,

रमेश का ही नहीं श्वेता का भी यही सपना था की ट्रेन में इस तरह से एक अनजान से स्वयं की चूत मरवाना एक सुहाना सपना था जो आज साकार हो रहा था.

फट फट की आवाज अब ज्यादा जोर से आने लगी थी,

रमेश भी नीचे से उछल उछल कर करके श्वेता को लंड खिला रहा था.
सीट पर बैठे बैठे ही श्वेता को चोद रहा था. श्वेता मुँह से गरम गर्म आहें भर रही थी.

श्वेता बहुत ज्यादा चुदासी हो गयी.

श्वेता : 'चोद मुझे, !! चोदा डाल आज. आप जैसा चाहे वैसे चोदो! मैं बिलकुल गुस्सा नहीं करुँगी!!' बस चोद दीजिए

रमेश भी बहुत जोश में आ गया. बहुत जोर जोर से चलती ट्रेन में श्वेता की चूत में अपने लंड की ट्रेन को दौड़ाने लगा. ट्रेन में श्वेता चुद रही थी,

और

दूसरी तरफ उर्मी और सल्लू की कुछ खिचड़ी पक रही है, क्योंकि उर्मी खेली खाई है, और अब तो उसका पति रमेश भी घर से बाहर है,

फिर कुछ समय बाद रमेश ने लंड निकाल लिया
उसने श्वेता की बाहों में भर लिया. और फिर से उसके मम्मे दबाने लगा.

रमेश इस बार श्वेता की गांड मारने के मूड में था.

उसने धीरे से श्वेता से कहा,

रमेश : चलो तुम्हारी गांड मारता हूँ!!'

ये सुनते ही श्वेता तुरंत ही अपने दो हाथ और पैरों पर कुतिया बन गयी. ये देख राजश्री के मुंह से एक हल्की सी आह निकल गई, जिसे श्वेता ने सुन लिया लेकिन फिर बेशर्मी से अनदेखा कर दिया,

रमेश ने श्वेता के गोल गोल लपर लपर करके गोरे चुतड चूम लिए. बला के खुबसुरत चुतड थे उसके.

रमेश ने लपलपाते हुवे श्वेता के चुतड को खोलकर उनकी गांड देखी. बिलकुल कुवारी कसी गांड लग रही थी.

रमेश : 'ये क्या श्वेता? तुम्हारी गांड तो कुंवारी लग रही है, ?'
श्वेता : इस भूलेखे में मत रहना, ये कइयों के लंड निगल चुकी है, और आज तुम्हारा भी निगल लेगी,

रमेश जीभ लगाकर श्वेता की मस्त मस्त लाल लाल गांड को चाटने लगा, दोनों गोल मटोल पुट्ठों के बीच से एक लाइन सी बनी हुई थी,

जो गांड के छेद से जाते हुए शाकुंतला श्वेता की चूत में जाती थी. और उनकी चूत को २ भागों में विभाजित करती थी.

रमेश ने ऊँगली में ढेर सारा थूक लिया और गांड के छेद में ऊँगली पेल दी.
श्वेता उछल पड़ी.

श्वेता : 'आराम से गांड चोद!!' जल्दी क्या है,

रमेश पहले थोड़ी देर प्यार से फिर जोर जोर से उसकी गांड ऊँगली से चोदने लगा.

ट्रेन सरपट सरपट पटरियों पर दौड़ रही थी.

रमेश जल्दी जल्दी श्वेता की गांड में ऊँगली दे रहा था.

श्वेता : आआआआआ हा हाहा उई उई माँ माँ दैया!! हाय दैया!!

श्वेता गर्म गर्म सिस्कार भरने लगी.

रमेश (यौन उत्तेजना में आकर) : 'ले रंडी!! ले!! आज की रात तू मेरी रंडी बन जा!!"

श्वेता भी कहा पीछे रहने वाली थी, चुदाई की गर्मी होती ही ऐसी है, अच्छे अच्छों को रण्डी और भड़वा बना देती है,

श्वेता : हां रमेश में तेरी रंडी बनूँगी .. चोदो मेरे गांड को फाड़ डालो मेरी गांड और चूत को ... आःह्ह

जोर जोर से थोड़ी और देर श्वेता की गांड में उंगली चलाने के बाद रमेश ने अपना लंड उनकी गांड में दे दिया.

थोड़ा सा टाइट लग रहा था, तो रमेश ने ने मुँह से खूब सारा थूक गांड के छेद पर थूक दिया. उसका निशाना बिलकुल सही बैठा.

श्वेता की गांड गीली हो गयी. रमेश ने लंड को हाथ से पकड़कर ज्यूही धक्का मारा लंड श्वेता की गांड में समा गया.


तब जाकर रमेश भी समझ गया कि गांड लग ही कुंवारी रही थी पर वास्तव में लंड निगल चुकी है, श्वेता : अआहाआह!! आह!!'

रमेश उसकी गांड चोदने लगा.

कुछ देर बाद उसकी गांड और खुल गयी. अंदर से गांड की दीवारे गीली और चिकनी हो गयी.

रमेश मजे से श्वेता की गांड चोदने लगा. कुछ देर बाद श्वेत भी बड़े जोश में आ गयी.
श्वेता : 'चोद रमेश! चोद!! इस श्वेता की गांड को मजे से चोद!!' दोबारा नहीं मिलूंगी,

रमेश : 'ले छिनाल!! ले! आज जी भरके अपनी गांड चुदाई करवा ले. क्यूंकि कल हो ना हो,

उसका लौड़ा श्वेता की गांड मजे से लेने लेगा. कुछ देर बाद रमेश ने लंड बाहर निकाला तो श्वेता की गांड का छेद काफी मोटा हो गया था.

राजश्री भी श्वेता की गांड चुदाई और अब गांड का छेद देख कर मस्त हो गई,

रमेश ने फिर से लंड उसकी गांड में डाल दिया और चोदने लगा.

श्वेता के लटकते आमों पर रमेश के हाथ जा रहे थे.

रमेश उसके मम्मो को हाथ से जोर जोर से दबा रहा था.

कुछ देर बाद श्वेता की गांड में बहुत जोर का दर्द उठा. रमेश ने फट फट करके गांड चोदते चोदते श्वेता के मुँह पर हाथ रख दिया जिससे वो चिल्ला न सके.

रमेश जोर जोर से श्वेता की गांड मारने लगा.

लगातार ऐसी चुदाई से केबिन में सभी को गर्मी लगने लगी थी,

फिर कुछ देर बाद रमेश के लंड गांड के छेद में माल गिरा दिया. और श्वेता की चूत भी उस गर्म गर्म वीर्य के अहसास से अपना पानी छोड़ रही थी,

रमेश एक तरफ हो गया, श्वेता भी एक तरफ हो गई और खुश लग रही थी, उसकी गांड से बहता हुवा वीर्य राजश्री को मदमस्त कर रहा था,

श्वेता ने रमेश को किस करते हुवे

श्वेता : आज इतने बरस के बाद जाकर मेरा सपना पूरा हुवा,

रमेश : कोनसा सपना?

श्वेता : ट्रेन में अनजान से चूत चुदवाना और गांड मरवाना,

रमेश : यही मेरा भी सपना था,

राजश्री (मन में सोचते हुवे) : और यही सपना मेरा भी आ जा से,

फिर थोड़ी देर बाद ऐसे ही बात करने के बाद, में और श्वेता एक कम्बल में नंगे ही घुस गए और एक दूसरे से लिपट कर सो गए,

सोते समय अचानक राजश्री और श्वेता की नजरे टकराई, लेकिन कुछ बोली नहीं,

जब ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुंच गई तो सब लोग उतरने लगे,

रमेश सामान लेकर आगे चलने लगा, तो श्वेता ने राजश्री को कहा,

श्वेता : सीधा प्रसारण देखने में मजा आया,

राजश्री (अनजान बनते हुवे) : कैसा सीधा प्रसारण?

श्वेता : देख, में भी एक लड़की हूं, और इस चूत की आग को अच्छे से समझती हूं, भाई ही सही लेकिन तेरे पास मौका है, इस ट्रिप पर अच्छे से चुदवा लेना, और हां देख कर लगता है, कुछ हुवा नही है, तो जब करने की ठान ले तो एक दर्द की गोली साथ रखना, मेरी सलाह यही है कि अपने भाई से चुदवा लेना, बड़ा मस्त चोदता है,

राजश्री : जब तुम्हे सब पता है, तो मैं भी बता दू की इस ट्रिप पर में मेरी भाभी की सौतन बन ही जाऊंगी,


सौतन बनेगी या नहीं....सोचना पड़ेगा
 

sexyswati

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'15 मिनट बाद ट्रेन से १००-१२० किमी की रफ्तार पकड़ ली. श्वेता ने ब्लाऊज और पेटीकोट पहन लिया था, कि कहीं अगर उसके बच्चे या राजश्री जाग जाएगी तो समस्या हो जायेगी, साथ ही रमेश ने भी पेंट पहन ली थी,

श्वेता के ब्लाउस के गले से उसकी मस्त मस्त संगमरमरी छातियाँ दिख रही थी. रमेश का हाथ उसकी पैंट पर चला गया. उसका लंड फिर से खड़ा हो रहा था.

वो श्वेता की गुलाबी चूत को एक बार और मारना चाहता था. रमेश ने देखा कि बच्चे और राजश्री अभी भी सो रहे है, राजश्री तो सोने का नाटक कर रही थी,

लेकिन चुदाई के जोश में इस बात से अनजान रमेश ने पैंट की हुक खोल दी.

पैंट खोलकर एक हाथ से लंड सहलाने लगा, उसके सामने श्वेता भी ये देख कर मस्त हो रही थी.


ट्रेन के हिलने से श्वेता की चुचियाँ भी हिल रही थी. वाकई ट्रेन बहुत तेज दौड़ रही थी.

रमेश अपने लंड को फेटने लगा. उसके दिल में, दिमाग में बस एक की तस्वीर थी. श्वेता और उनकी चिकनी चमेली वाली चूत.


खिड़की हल्की सी खोल ली थी, जिसमे से मस्त हवा चल आ रही थी.

खिड़की से सुहावनी हवा अंदर हमारे केबिन में आ रही थी. श्वेता के ब्लाउस में हवा जा रही थी. उसकी गोरी बर्फी से संगमरमरी चुचियाँ साफ साफ दिख रही थी.

श्वेता ने भी ब्लाउज उपर चढ़ लिया था और उनकी दाहिनी चूची बिलकुल बाहर निकल आई थी. लग रहा था की कोई पीला पका आम रमेश को चिढ़ा रहा है कि पकड़ सको तो पकड़ लो,

रमेश (साथ ही राजश्री भी) वो आम देखकर पागल हो गया.

रमेश उठा और सीधा जाकर श्वेता के बगल लेट गया. उनके दाहिने मम्मे को मुँह में भर लिया पीने लगा.

श्वेता वैसे ही बैठी रही,उनकी छाती बहुत ही गोरी, बहुत ही सुंदर थी. निपल्स के चारों तरह काले काले गोल गोल घेरे थे जो रमेश के लंड को पुकार रहे थे.

रमेश के हाथ श्वेता की चुच्ची पर चले गये. और जोर जोर से उसे दबाने लगा. फिर पीने लगा.

श्वेता कुछ कहना चाहती थी पर रमेश ने झट से उनके मुँह पर अपना मुँह रख दिया.

उसको कुछ नही बोलने दिया. उसके पतले पतले होंठों को अपने होंठों में भर लिया और पीने लगा.

श्वेता जब अपने हाथ से मुझे रोकने लगी तो रमेश ने उनके हाथ को कसके पकड़ लिया.

रमेश श्वेता के शहद से मीठे होठों को पी रहा था, और ऐसी चुदाई ट्रेन में, वो हमेशा से ही करना चाहता था, . श्वेता कुछ कहना चाह रही थी.

संभवत रोकना चाहती हों. पर रमेश किसी शिकारी लोमड़ी की तरह उसके मुँह को दबाकर रखा था. उनके होंठ को पी रहा था.

तब श्वेता ने आंखो से इशारा किया राजश्री की तरफ, रमेश ने होठ अलग किए और राजश्री की तरफ देखा तो पाया कि राजश्री ने एक अंगड़ाई ली और फिर सो गई,

अंगड़ाई तो आएगी ही इतनी मस्त चुदाई जो चल रही थी,

दो मिनट ऐसे ही रहने के बाद,

रमेश फिर से श्वेता को चूमने चाटने लगा, जिसमे श्वेता उसका बराबर साथ दे रही थी,
रमेश ने चुदासी श्वेता के दोनों मम्मो आजाद कर दिया,

और थोड़ी देर तक अपनी चुदक्कड़ श्वेता के कबूतरों को देखता रहा. और सोच रहा था कि सच में भगवान ने श्वेता को बड़ी फुर्सत में बनाया था.

वो फिर से हाथ से श्वेता के मम्मे दबाने लगा.

उसकी पैंट में लंड फुफकार मार रहा था.

श्वेता को चोदने को बेताब था.
रमेश को पलभर के लिए लगा की वो स्वर्ग पहुच गया है, पटरी पर तेज दौड़ती ट्रेन. खिड़की से आती हवा. और केबिन में नंगी श्वेता और सोती हुई उसकी बहन,

सूरज की रोशनी से भी सफ़ेद श्वेता की चुचियाँ क्या मस्त लग रही थी,

वो जीभ को घुमा घुमा कर उसके मम्मे पी रहा था.

निपल्स के चारो तरफ काले काले घेरे तो बिलकुल कुदरत का करिश्मा लग रहे थे. वो जोर जोर से हाथों से उसके बूब्स दबा रहा था. और पी रहा था.

फिर श्वेता ने पेटीकोट उपर उठा दिया. श्वेता की गुलाबी चूत दोबारा उसके सामने थी, पिछली बार उसने बराबर देखा नही बस चुदाई की, परंतु इस बार वो उसको प्यार से और देर तक चोदने की फिराक में था,

राजश्री भी अपने भाई का अंदाज और अनुभव देख कर पक्का कर चुकी थी की उसकी पहली चुदाई उसका भाई ही करेगा,


रमेश को श्वेता की मस्त मस्त लाल लाल चूत मिल गयी.

श्वेता ने रमेश के ऊपर आते हुवे अपने हाथ से लंड पकड़ कर चूत पर लगा दिया, और कमर उछाल उछाल कर कर स्वयं ही रमेश को चोदने लगी,

राजश्री का मुँह उतेज्जना से खुल गया. वो ट्रेन की छत को देखने लगी.

रमेश को श्वेता बड़ी ही प्यारी लग रही थी,

धीरे धीरे उसका लंड भी श्वेता की चूत में उसी तरह दौड़ने लगा जैसे ट्रेन लोहे की पटरियों पर सरपट सरपट दौड़ रही थी. ये वाकई एक यादगार अनुभव था.

चलती ट्रेन में श्वेता का इस तरह चोदना दोनो भाई बहनों की हालत खराब कर रहा था पर एक सुखद अनुभव भी दे रहा था,

रमेश का ही नहीं श्वेता का भी यही सपना था की ट्रेन में इस तरह से एक अनजान से स्वयं की चूत मरवाना एक सुहाना सपना था जो आज साकार हो रहा था.

फट फट की आवाज अब ज्यादा जोर से आने लगी थी,

रमेश भी नीचे से उछल उछल कर करके श्वेता को लंड खिला रहा था.
सीट पर बैठे बैठे ही श्वेता को चोद रहा था. श्वेता मुँह से गरम गर्म आहें भर रही थी.

श्वेता बहुत ज्यादा चुदासी हो गयी.

श्वेता : 'चोद मुझे, !! चोदा डाल आज. आप जैसा चाहे वैसे चोदो! मैं बिलकुल गुस्सा नहीं करुँगी!!' बस चोद दीजिए

रमेश भी बहुत जोश में आ गया. बहुत जोर जोर से चलती ट्रेन में श्वेता की चूत में अपने लंड की ट्रेन को दौड़ाने लगा. ट्रेन में श्वेता चुद रही थी,

और

दूसरी तरफ उर्मी और सल्लू की कुछ खिचड़ी पक रही है, क्योंकि उर्मी खेली खाई है, और अब तो उसका पति रमेश भी घर से बाहर है,

फिर कुछ समय बाद रमेश ने लंड निकाल लिया
उसने श्वेता की बाहों में भर लिया. और फिर से उसके मम्मे दबाने लगा.

रमेश इस बार श्वेता की गांड मारने के मूड में था.

उसने धीरे से श्वेता से कहा,

रमेश : चलो तुम्हारी गांड मारता हूँ!!'

ये सुनते ही श्वेता तुरंत ही अपने दो हाथ और पैरों पर कुतिया बन गयी. ये देख राजश्री के मुंह से एक हल्की सी आह निकल गई, जिसे श्वेता ने सुन लिया लेकिन फिर बेशर्मी से अनदेखा कर दिया,

रमेश ने श्वेता के गोल गोल लपर लपर करके गोरे चुतड चूम लिए. बला के खुबसुरत चुतड थे उसके.

रमेश ने लपलपाते हुवे श्वेता के चुतड को खोलकर उनकी गांड देखी. बिलकुल कुवारी कसी गांड लग रही थी.

रमेश : 'ये क्या श्वेता? तुम्हारी गांड तो कुंवारी लग रही है, ?'
श्वेता : इस भूलेखे में मत रहना, ये कइयों के लंड निगल चुकी है, और आज तुम्हारा भी निगल लेगी,

रमेश जीभ लगाकर श्वेता की मस्त मस्त लाल लाल गांड को चाटने लगा, दोनों गोल मटोल पुट्ठों के बीच से एक लाइन सी बनी हुई थी,

जो गांड के छेद से जाते हुए शाकुंतला श्वेता की चूत में जाती थी. और उनकी चूत को २ भागों में विभाजित करती थी.

रमेश ने ऊँगली में ढेर सारा थूक लिया और गांड के छेद में ऊँगली पेल दी.
श्वेता उछल पड़ी.

श्वेता : 'आराम से गांड चोद!!' जल्दी क्या है,

रमेश पहले थोड़ी देर प्यार से फिर जोर जोर से उसकी गांड ऊँगली से चोदने लगा.

ट्रेन सरपट सरपट पटरियों पर दौड़ रही थी.

रमेश जल्दी जल्दी श्वेता की गांड में ऊँगली दे रहा था.

श्वेता : आआआआआ हा हाहा उई उई माँ माँ दैया!! हाय दैया!!

श्वेता गर्म गर्म सिस्कार भरने लगी.

रमेश (यौन उत्तेजना में आकर) : 'ले रंडी!! ले!! आज की रात तू मेरी रंडी बन जा!!"

श्वेता भी कहा पीछे रहने वाली थी, चुदाई की गर्मी होती ही ऐसी है, अच्छे अच्छों को रण्डी और भड़वा बना देती है,

श्वेता : हां रमेश में तेरी रंडी बनूँगी .. चोदो मेरे गांड को फाड़ डालो मेरी गांड और चूत को ... आःह्ह

जोर जोर से थोड़ी और देर श्वेता की गांड में उंगली चलाने के बाद रमेश ने अपना लंड उनकी गांड में दे दिया.

थोड़ा सा टाइट लग रहा था, तो रमेश ने ने मुँह से खूब सारा थूक गांड के छेद पर थूक दिया. उसका निशाना बिलकुल सही बैठा.

श्वेता की गांड गीली हो गयी. रमेश ने लंड को हाथ से पकड़कर ज्यूही धक्का मारा लंड श्वेता की गांड में समा गया.


तब जाकर रमेश भी समझ गया कि गांड लग ही कुंवारी रही थी पर वास्तव में लंड निगल चुकी है, श्वेता : अआहाआह!! आह!!'

रमेश उसकी गांड चोदने लगा.

कुछ देर बाद उसकी गांड और खुल गयी. अंदर से गांड की दीवारे गीली और चिकनी हो गयी.

रमेश मजे से श्वेता की गांड चोदने लगा. कुछ देर बाद श्वेत भी बड़े जोश में आ गयी.
श्वेता : 'चोद रमेश! चोद!! इस श्वेता की गांड को मजे से चोद!!' दोबारा नहीं मिलूंगी,

रमेश : 'ले छिनाल!! ले! आज जी भरके अपनी गांड चुदाई करवा ले. क्यूंकि कल हो ना हो,

उसका लौड़ा श्वेता की गांड मजे से लेने लेगा. कुछ देर बाद रमेश ने लंड बाहर निकाला तो श्वेता की गांड का छेद काफी मोटा हो गया था.

राजश्री भी श्वेता की गांड चुदाई और अब गांड का छेद देख कर मस्त हो गई,

रमेश ने फिर से लंड उसकी गांड में डाल दिया और चोदने लगा.

श्वेता के लटकते आमों पर रमेश के हाथ जा रहे थे.

रमेश उसके मम्मो को हाथ से जोर जोर से दबा रहा था.

कुछ देर बाद श्वेता की गांड में बहुत जोर का दर्द उठा. रमेश ने फट फट करके गांड चोदते चोदते श्वेता के मुँह पर हाथ रख दिया जिससे वो चिल्ला न सके.

रमेश जोर जोर से श्वेता की गांड मारने लगा.

लगातार ऐसी चुदाई से केबिन में सभी को गर्मी लगने लगी थी,

फिर कुछ देर बाद रमेश के लंड गांड के छेद में माल गिरा दिया. और श्वेता की चूत भी उस गर्म गर्म वीर्य के अहसास से अपना पानी छोड़ रही थी,

रमेश एक तरफ हो गया, श्वेता भी एक तरफ हो गई और खुश लग रही थी, उसकी गांड से बहता हुवा वीर्य राजश्री को मदमस्त कर रहा था,

श्वेता ने रमेश को किस करते हुवे

श्वेता : आज इतने बरस के बाद जाकर मेरा सपना पूरा हुवा,

रमेश : कोनसा सपना?

श्वेता : ट्रेन में अनजान से चूत चुदवाना और गांड मरवाना,

रमेश : यही मेरा भी सपना था,

राजश्री (मन में सोचते हुवे) : और यही सपना मेरा भी आ जा से,

फिर थोड़ी देर बाद ऐसे ही बात करने के बाद, में और श्वेता एक कम्बल में नंगे ही घुस गए और एक दूसरे से लिपट कर सो गए,

सोते समय अचानक राजश्री और श्वेता की नजरे टकराई, लेकिन कुछ बोली नहीं,

जब ट्रेन अपने गंतव्य पर पहुंच गई तो सब लोग उतरने लगे,

रमेश सामान लेकर आगे चलने लगा, तो श्वेता ने राजश्री को कहा,

श्वेता : सीधा प्रसारण देखने में मजा आया,

राजश्री (अनजान बनते हुवे) : कैसा सीधा प्रसारण?

श्वेता : देख, में भी एक लड़की हूं, और इस चूत की आग को अच्छे से समझती हूं, भाई ही सही लेकिन तेरे पास मौका है, इस ट्रिप पर अच्छे से चुदवा लेना, और हां देख कर लगता है, कुछ हुवा नही है, तो जब करने की ठान ले तो एक दर्द की गोली साथ रखना, मेरी सलाह यही है कि अपने भाई से चुदवा लेना, बड़ा मस्त चोदता है,

राजश्री : जब तुम्हे सब पता है, तो मैं भी बता दू की इस ट्रिप पर में मेरी भाभी की सौतन बन ही जाऊंगी,


सौतन बनेगी या नहीं....सोचना पड़ेगा
मस्त........ अति उत्तेजक ..... कहानी है .......

अगले अपडेट का बेसब्री से इन्तजार रहेगा
 

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अध्याय - 20


ट्रेन से उतर कर हम लोग स्टेशन से बाहर आ गये,

एक ऑटो में बैठ कर हम लोग ने राजश्री के ऑफिस के नज़दीक ही एक होटल में कमरा ले लिया,

रिसेप्शन पर एक सुन्दर सी लड़की जो ब्लैक सूट में थी, उसके सूट का गला बहुत डीप था,

उसने हमे गुड मॉर्निंग कहा और रजिस्टर में नाम लिखने लगी, हमने आई डी प्रूफ दिया, जब सारी फोर्मलिटी हो गया था वो लड़की रमेश को देख कर मुस्कुराई,

रिसेप्शन वाली लड़की - सर आपकी वाइफ बहुत सुन्दर है, एन्जॉय कीजिये, आपको किसी चीज की जरूरत होगी तो प्लीज आप हमें फोन कर दीजिये, आपका वीकेंड हैप्पी हो.


हमने थैंक्स कहा, और जैसे वह से घूमे अपने कमरे जाने के लिए हम दोनों को हसी आ गई, हस्ते हस्ते अपने कमरे तक पहुंचे और राजश्री तो और जोर जोर से हसने लगी,

राजश्री - इस लड़की ने मुझे वाइफ बोला, मुझे बहुत हसी आ रही है….

इस तरह से हम दोनों एक दूसरे को देखकर हसने लगे, फिर हम दोनों फ्रेश हुए, सुबह होने में अभी समय था तो हम लोग थोड़ी देर के लिये सा गये,

सुबह उठ कर राजश्री के इंटरव्यू वाले ऑफिस की लोकेशन की और चल निकले,

सब कुछ अच्छा हुआ, राजश्री सेलेक्ट हो गई, हम दोनों काफी खुश थे, लेकिन ऑफिस में बैठा प्रत्येक व्यक्ति राजश्री को ऐसे देख रहा था कि अगर मौक़ा मिले टी साले अभी राजश्री को पटक कर चोद दे,

अभी दोपहर के दो के आसपास बज रहे थे, हम लोग घूमने लग गये, शाम को सात बजे तक घूमते रहे और अभी भी बहुत सी जगह देखने के लिए बाक़ी थी,

बाक़ी की जगह कल देखने के लिए सोच कर हम लोग वापस होटल की तरफ़ जाने लगे, रास्ते में एक पार्क में मैंने एक कपल को देखा जो पार्क में बेंच पर ही गोद में बैठाकर चुदाई कर रहे थे,

हमारा ध्यान उनकी तरफ़ जब गया, जब आअह आआह आआअह की आवाज आ रही थी, और वो लड़की कह रही थी,

चुद रही लड़की - भैया धीरे धीरे चोदो दर्द हो रही है, और जल्दी चलो घर मम्मी पापा इंतज़ार कर रहे होंगे,

हम दोनों एक दूसरे का मुह देखने लगे और वो दोनों भाई बहन थे,

थोड़ी देर देखने के बाद हम दोनों एक दूसरे से नज़रे बचाते बचाते होटल में आ गये, और ये सोचने लगे कि चलो सब का अपना अपना ज़िंदगी जीने का तरीका है,

उसके बाद उस शाम को राजश्री को मेरे देखने का तरीका ही चेंज हो गया,

मैं अब हर समय उसके मम्मों को निहार रहा था,

जब वो चल रही थी तो उसके मटकते कमर को देख रहा था, वो तब से और भी ज्यादा हॉट लगने लगी थी, पर मैं ये भी ध्यान रख रहा था की कही उसको मेरी ये नजर पता ना चल जाये, है तो मेरी बहन ही,

फिर धीरे धीरे नार्मल होते गए, एक बार तो उसका मम्मों पर मेरी कोहनी से लग गया, उसने कुछ भी नहीं कहा और वो मुस्कुरा दी, मुझे बहुत ही अच्छा लगा, क्या रुई के तरह उसका गोल गोल चूच लग रहा था यार., जाने अनजाने में ही सही, राजश्री के नाज़ुक हिस्सो पर ये पहला स्पर्श था,


शाम को खाना खाने के बाद हुए करीब हमलोग आठ बजे होटल पहुंचे, कमरे में गए और फ्रेश होके टी वी देखने लगे,

तभी राजश्री नहाकर बाथरूम से निकली, रमेश उसको देखकर हैरान हो गया, वो पिंक कलर की नाईटी में थी, बाल खुले थे बड़ी ही हॉट लग रही थी, वो अंदर ब्रा नहीं पहनी थी,

उसकी नाइटी सिल्की सिल्की थी तो उसके मम्मों का साइज निप्पल समेत दिख रहा था वो जब चल रही थी और कंघी कर रही थी तो उसके मम्मे हिल रहे थे,

यहाँ तक की जब वो चलती थी उसकी चूतड़ गजब की दिख रही थी,

रमेश का लंड तो खड़ा होने लगा था, उसने फटा फट कम्बल रख लिया ताकि राजश्री को पता ना चले कि रमेश का हीरो सलामी ठोंक रहा है.

तभी बेल बजी, दरवाजा सिर्फ सटाया हुआ था,

रमेश - जी कौन है ??

रमेश ने उठ कर जाके देखा तो रिसेप्शन वाली लड़की थी, उसके साथ में एक वेटर भी था, जिसके हाथ में एक बोतल व्हिस्की, दो गुलाब का फूल, दो कैंडल थी,

रमेश - जी कहिए,

रिसेप्शन वाली लड़की - सर ये सारे चीज मैनेजर ने भिजवाई है, और कहा है, सर के लिए गिफ्ट है उनके हनीमून पे,

राजश्री फिर जोर जोर से हसने लगी और रमेश भी,

राजश्री - क्या बेवकूफ मैनेजर है उसको लग रहा है की हम लोगो हनीमून मनाने आये है, पागल कहि का

खूब हसने लगे दोनों मिलकर.

रमेश ने सारा सामान अंदर ले लिये, क्योंकि जब उसने व्हिस्की देखा वो काफी अच्छे ब्रांड का था,रमेश कभी कभी दारू पी लेता है ,

जाते समय उस लड़की ने रमेश के हाथ में एक कागज का टुकड़ा पकड़ा दिया था,

रमेश ने अंदर आके सारा सामान रख दिया, तब तक राजश्री पलंग पर लेट गयी थी, पूरे दिन घूमने की वजह से वो थक गयी थी,

रमेश भी उसी पलंग पर दूसरी तरफ़ लेट गया और ऊर्मि से चैट करने लगा, थोड़ी दे बाद रमेश को वो कागज का टुकड़ा याद आया,

उसने देखा उसने मोबाइल नंबर लिखा है,

उसने फटाफट उस नंबर को मोबाइल में सभी किया और उस पर चैट शुरू की और हेलो लिख कर भेजा,

तुरंत ही दूसरी तरफ़ से जवाब आया, और दोनों में चैट शुरू हो गयी, थोड़ी देर और चैट करके रमेश उठ कर जाने लगा

राजश्री (आधी नींद में ) - कहा जा रहे हो इतनी रात को,

रमेश - यही बाहर, एक सिगरेट पी के आता हूँ,

और उठ कर बाहर चला गया, लेकिन जानबूझ कर मोबाइल वही छोड़ कर चल गया,

उसके दरवाज़े के बाहर जाते ही राजश्री ने रमेश का मोबाइल हाथ में ले लिया और उसकी चैट पढ़ने लग गयी,

उसने लास्ट चैट कोई नये नंबर से की थी, जिसने उसे पास वाले रूम में ही बुलाने की बात थी,

जिस रूम में राजश्री और रमेश रुके थे, उस चैट में उसके एकदम साथ वाले रूम की बात थी, दोनों कमरों के बीच एक दरवाजा भी था कि अगर किसी को दो रूम एक साथ चाहिए तो ऐसे वाले रूम उनको दिये जाते थे,

उस रिसेप्शन वाली लड़की ने जानबूझकर कर रमेश और राजश्री को वो रूम दिया था,

दूसरे रूम की जाते ही वो लड़की जिसका नाम रश्मि थी रमेश पर टूट पड़ी, जैसे की जन्म जन्म से प्यासी थी,

उसकी कमीज के ऊपर से उसके वो दो बॉल साफ-साफ दिखाई दे रहे थे, वो पूरे आम के शेप में थे। उसकी चूचीयाँ देखकर ही रमेश का लंड खड़ा हो गया था

रमेश ने उसको अपनी बाँहों में भर लिया और उसको धीरे-धीरे किस करने लगा।

अब रश्मि अचानक ही शर्माकर अपने आपको छुड़ाने लगी थी,

रमेश - क्या हुआ?

रश्मि - मुझे शर्म आती है।

रमेश - अरे यार, तुम भी ग़ज़ब हो, पहले यह बुलाती हो और अब ये, हम लोग यहाँ मज़े करने आए है और अगर तुम ऐसे शरमाओगी तो ना तुम मज़ा ले पाओगी और न ही मुझे मज़ा आएगा, तो प्लीज ऐसा मत करो,

अब रमेश उसकी गर्दन पर, होंठो पर किस करने लगा था और बीच-बीच में उसके कान को भी चूम रहा था

रश्मि - वो इसलिए कि आज से पहले मैं बस अपने भाई से ही चुदवाई हू,

रमेश मन में सोच रहा था कि साला अजीब शहर है हर बहन अपने भाई से चुदवा रही है,

दूसरी तरफ़ राजश्री ने कान बीचवाले दरवाज़े पर लगा दिये थे, और उसे रमेश और रश्मि की बात साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी, उसने हल्का सा धक्का दिया तो दरवाज़ा खुल गया,

सामने खड़े रमेश और रश्मि चूमाचाटी में लगे हुवे थे, उन्हें इसे बात का पता भी नहीं चला कि उनकी चुदाई का सीधा प्रसारण देखा जाने लगा है,

उनको इस आलिंगन मुद्रा में देख कर राजश्री भी उत्तेजित हो गयी,

इधर रश्मि भी उत्तेजित हो गयी थी और रमेश का पूरा साथ देने लगी,

रमेश ने अपना एक हाथ आगे की तरफ लाते हुए उसके बूब्स पर रख दिया और अपनी उंगलियाँ उसकी चूची के ऊपर से धीरे- धीरे गोल-गोल घुमाने लगा,

रश्मि और राजश्री दोनों एकदम सिहर गयी थी

रश्मि - प्लीज ऐसा करो, उसे ज़ोर से दबाते रहो।

राजश्री भी यही कहना चाहती थी,

रमेश कुछ देर के बाद उसे फिर से धीरे-धीरे दबाने लगा था, वाह क्या बूब्स थे? एकदम टाईट।

रमेश ने बिना देर किए अपना दूसरा हाथ भी आगे की तरफ लाते हुए उसकी दूसरी चूची पर रख दिया और धीरे-धीरे उसकी दोनों चूचीयाँ दबाने लगा था,

थोड़ी देर के बाद रमेश ने अपना एक हाथ नीचे ले जाते हुए रश्मि की चूत पर रख दिया।

दूसरी तरफ़ राजश्री का भी एक हाथ उसकी चूत पर चला गया,

जैसे ही रमेश हाथ उसकी चूत पर गया, तो रश्मि वहाँ से रमेश का हाथ निकालने की कोशिश करने लगी।

उसने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़ लिया।

रमेश रश्मि की कमीज के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा था।

फिर थोड़ी देर के बाद रमेश ने रश्मि की कमीज के अंदर अपना एक हाथ डाला और रश्मि की चूत को सहलाने लगा।

रश्मि के मुँह से आअहह, उूउउफ़फ्फ, की सिसकारियाँ छूटने लगी,

रमेश ने अपना वही हाथ ऊपर ले जाकर रश्मि की कमीज के नीचे से उसकी चूचीयां दबाने लगा, रश्मि ने अंदर ब्रा पहनी थी।

रमेश उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसकी चूचीयाँ एक-एक करके दबाने लगा था

फिर थोड़ी देर के बाद रमेश ने अपने दूसरे हाथ से रश्मि की कमीज की चैन खोल दी और उसकी कमीज ऊपर करके निकाल दी।

रश्मि अब रमेश के सामने वाईट ब्रा में खड़ी थी, वो कमाल की सुंदर लग रही थी। राजश्री भी उसको देख कर और अधिक उत्तेजित हो गयी,

रमेश रश्मि की ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स दबाने लगा था और फिर अपने दोनों हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसकी ब्रा उसके हाथों से अलग कर दी,

वाह क्या बूब्स थे उसके? पूरे गोल शेप में,

उसके बूब्स नहीं ज्यादा छोटे थे और नहीं ज्यादा बड़े थे, बिल्कुल मीडियम साईज़ के थे।

उसके बूब्स के ऊपर पिंक कलर के दो दाने थे, वो क्या खूबसूरत नज़ारा था?

रमेश - मैंने ज़िंदगी में पहली बार इतने अच्छे बूब्स देखे है , ऐसे बूब्स तो शायद ही किसी के होंगे।

रमेश तो पागल ही हो गया था।

रमेश उसके दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथों में लेकर दबाने लगा था,

क्या कसाव था उनमें? वाह,

अब तो बस रमेश उन्हें दबाता ही रह गया था।
 
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