Incest मेरा परिवार सुखी संसार

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Lusty Star

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नमस्कार दोस्तों,
आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद,
कहानी लम्बी है, आशा है आपको पसन्द आएगी,

कई किरदार आएंगे,
कई मौके आएंगे

सम्भव है कि कहानी में कुछ ऐसे से भी संवाद और परिस्थिती आएंगी जो आपको लगे कि कही पर ये पढ़ा है,

और भी बहुत कुछ होगा, कहानी को मजेदार बनाने के लिए आप सभी के द्वारा दिए गए सुझावों को समिल्लित करे जाने का पूरा प्रयास करूंगा,
 
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Lusty Star

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आप सभी पाठको से विलंब हेतु क्षमा प्रार्थी हूं, शीघ्र ही अगला अध्याय प्रेषित करने के प्रयास कर रहा हुं, धन्यवाद
 

Lusty Star

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अध्याय 18

उसके खड़े लंड का अनुमान श्वेता को भी होए गया था, दोनो ही उठकर खड़े हो गए,और ट्रेन में अपनी जगह पर आके बैठ गए,

सीट पर आकर मैं श्वेता के बच्चो के साथ ऐसा व्यस्त और साधारण सा दिखने का प्रयत्न करने लगा कि जैसे कुछ हुवा ही नही,

हुवा तो बहुत कुछ था साहब,

आग दोनो तरफ लग चुकी थी, और इस आग से अनजान राजश्री ऊपर की बर्थ पर बिंदास जवानी के जलवे बिखेरते हुवे सो रही थी, उसकी लेगिंग अभी भी उसके कूल्हों की दरार में फंसी हुई थी,

थोड़ी देर बार जब रमेश से रहा नही गया तो वो श्वेता की तरफ देखने लगा,

दोस्तों श्वेता अब दिखने में बहुत सुन्दर लग रही थी,

रमेश कुछ देर तक बच्चो के पास बैठा रहा, for बच्चों को नींद आने लगी तो, तो श्वेता ने उन्हें उसकी बर्थ पर सुला दिया, और स्वयं एक साइड पर बैठ गई,

रमेश भी श्वेता की तरफ मुंह को करके लेट गया |

रमेश जब लेट गया तो श्वेता उसे घूर घूर कर देखने लगी लेकिन चुपके चुपके,

थोड़ी देर बाद ऐसा हूवा की दोनो एक दूसरे को चुपके चुपके देख रहे थे,

रमेश (में में सोचते हुवे) : कितना देखूंगा चोरी चोरी,

कुछ हिम्मत दिखाते हुवे,

रमेश : बच्चो को तो सुला दिया, अब आप कैसे सो पाएंगी इतनी जगह पर,

श्वेता (मन में) : सो तो जाऊ तेरे नीचे पर तू सुलाए तो,

श्वेता : वो चार पांच घंटे की ही तो बात है, ऐसे ही काट जायेंगे,

ऐसा बोल कर वो उठ कर बाथरूम की और चल दी, और पांच मिनिट बाद वापस आके ऐसे बैठ गई की उसके घुटनो से उसके मम्मे दबे जा रही थे और ब्लाऊज फाड़ कर बाहर आना चाहते हो,

रमेश से अब रहा नही जा रहा था और वो उसके बड़े बड़े बूब्स को घुर रहा था |

दृश्य कुछ ऐसा था कि रमेश टकटकी लगाए उसके मम्मो को घुर रहा था और श्वेता भी बेझिझक रमेश को मम्मो के दर्शन करवा रही थी |

थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा, फिर श्वेता बोली,

श्वेता : आप बहुत देर से देख रहे हो अब बस भी करो |

रमेश : क्या मतलब ?

श्वेता : जो आप उतने देर से देख रहे हो मैं उसकी ही बात कर रही हूँ |

रमेश (बेशर्मी से) : हाँ तो मैं क्या देख रहा हूँ मुझे नही पता है |

श्वेता (बेशर्मी से उत्तर देते हुवे) तुम मेरे मम्मो को उतनी देर से देख रहे हो ज्यादा पसंद आ गए हैं तो बोलो |

जब एक औरत इतना कह दे और आदमी कुछ न करे, तो वो आदमी नामर्द है,

रमेश : हाँ पसंद है,

श्वेता अपनी जगह से उठकर रमेश के पास आकर बैठते हुवे,
श्वेता ने बिना कुछ देर किए हुवे रमेश के हाथ को पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया |

अब सभी पाठकगण अनुमान लगा सकते है कि दृश्य रहा होगा,


जैसे ही श्वेता ने रमेश के हाथ को अपने बूब्स पर रखा तो रमेश के अन्दर करंट लग गया,

रमेश ने श्वेता के एक मम्मे को हाथ में पकड कर धीरे से दबा दिया तो श्वेता के मुंह से अह की आवाज निकल गयी,

जब उसके मुंह से आवाज निकल गयी तो रमेश ने उसकी आवाज दबाने के लिए उसके रसीले होठों पर खुद के होठ रख दिए,

थोड़ी देर तक चुम्माचाटी चलती रही, फिर श्वेता बोली,

श्वेता (रमेश को आंख मरते हुवे) : हो गया न सोने का बंदोबस्त,

रमेश ने खड़े होकर डिब्बे की लाइट बंद करदी, श्वेता ने दोनो बच्चो को देखा कि सोए या नहीं,

रमेश ने सोचा कि राजश्री को देख लेता हु कि सोई या नहीं, फिर कुछ सोच कर नही देखा, और मन में सोचने लगा कि "क्या फर्क पड़ता है, सोई या नहीं, सो गई तो ठीक, नही सोई तो और भी ठीक,"

रमेश ने श्वेता को कस के जकड़ लिया और उसकी होठो पर अपनी होठो को रख दिया,

जब रमेश ने उसकी होठो पर अपनी होठो को रख दिया तो श्वेता भी उसी जोश में रमेश का साथ देने लगी,

रमेश उसके होठो को चूसने के साथ उसके बड़े मम्मो को मसल रहा था,

रमेश के द्वारा श्वेता के होठो को चूसने के साथ ही उसके मम्मो को मसलने के कारण श्वेता थोड़ी ही देर में गर्म हो गयी, और उसे गर्माहट के मारे जोर जोर से रमेश के होठों को चूसने लगी और काटने भी,
एसी कंपार्टमेंट में दोनो के पसीने आने लगे थे,

ऊपर लेटी राजश्री सीधा प्रसारण देखने में मस्त थी और एक हाथ से खुद के मम्मे को मसले जा रही थी, और मन ही मन में श्वेता को गालियां दे रही थी, कि"साली मेरे लंड पर खुद का अधिकार समझ बैठी है,"

श्वेता और रमेश ने एक दूसरे के कपड़े निकाल फेंके,

श्वेता ने न तो चोली पहनी थी और न ही चड्डी, चुदने के फूल मूड में थी,

रमेश भी एकदम नंगा हो गया था, उसका तना हुवा लंड देख कर श्वेता और राजश्री दोनो अवाक रह गई,,

रमेश : आपने चोली और चड्डी नहीं पहनी है,

श्वेता : अभी थोड़ी देर पहले बाथरूम में जाके निकाल कर आई थी, चुदने के समय कपड़ो की ज्यादा रोक टोक नहीं चाहिए,

रमेश उसको उस तरह घुर घुर कर देखने लगा, और उसको अपने पास खींच लिया,

अब श्वेता के बड़े बूब्स रमेश के सामने आ गए और रमेश उसके एक मम्मे को मुंह में रख कर चूसने लगा तो श्वेता तेज सांसो में अन्हे भरने लगी,

रमेश उसकी श्वेता आवाजे सुनकर और जोश में आ गया और उसके मस्त छोटे गोल निप्पल को मुंह में रख कर ठीक एक बच्चे की तरह चूसने लगा,

रमेश उसके एक दूध को मुंह में रख कर चूस रहा था और दुसरे को हाथ में पकड कर दबा रहा था,

श्वेता (मस्त होकर) : आ आ आ उई माँ आ…. उई हाँ उई हाँ माँ माँ… सी उई सी उई सी उई सी…. अह अह अह उई आउच…….

रमेश उसके दोनों बूब्स को ऐसे ही कुछ देर तक चूसने के बाद उसकी टांगो को फैला कर श्वेता की चूत में अपनी जीभ को घुसा दिया,

रमेश को ऐसा करता देखा राजश्री का हाथ भी उसकी चूत पर चला गया जो कि एकदम गीली हो गई थी,
दूसरी तरफ रमेश की जीभ के स्पर्स से श्वेता की सिसकियाँ और तेज हो गयी,

रमेश ने श्वेता को इशारे से बताया कि धीरे धीरे नही तो उसकी बहन सुन लेगी,

राजश्री (रमेश के इशारे देख कर मन में) : सुन नही लेगी, सुन लिया और अब ये लंड भी वो ले लेगी,

रमेश श्वेता की चूत को अपनी जीभ से चाट रहा था साथ में उसकी चूत के दाने को होठो से पकड कर खीच खीच कर चूस रहा था,

श्वेता (मस्त होकर मज़े में) : आह आह आह… ऊऊ ऊऊ…

रमेश श्वेता की चूत को चाटने के साथ उसकी चूत में उँगलियों को घुसा कर जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा,

रमेश उसकी चूत में जितने जोर से ऊँगली को अन्दर बाहर करता श्वेता उतने ही जोश से सेक्सी आवाजे करती,

अब रमेश ने उसकी चूत से हटते हुवे अपने मोटे लंड को श्वेता के हाथ में पकड दिया,
श्वेता ने लपक कर रमेश के लंड को हाथ में पकड कर घुटनों के बल बैठकर चूसने लगी,

राजश्री रमेश के लंड को श्वेता के मुंह में आता जाता देखकर हक्की बक्की रह गई,

श्वेता को कुछ खास आश्चर्य नहीं हुवा क्योंकि वो दो बच्चो की मां थी, और पहले से ही खाई खेली थी,

श्वेता लंड को ऐसे ही 5 मिनट तक चूसती रही फिर रमेश ने उसके मुंह से अपने लंड को निकाल लिया और श्वेता को लेटा दिया, लेटते ही श्वेता ने अपनी टांगो को फैला दिया,

रमेश ने भी बिना देर किए हुवे श्वेता की चूत के मुंह पर लंड को रख कर धीरे से घुसा दिया, उसी समय श्वेता और राजश्री की नज़रे आपस में टकरा गई, राजश्री ने मुंह पर उंगली रख कर उसे चुप रहने का इशारा किया,

श्वेता समझ गई और चुदाई चलने लगाए,

रमेश ने चूत में थोडा लंड घुसा दिया तो श्वेता सेक्सी आवाजे करती हुई अपनी चूत को हिलाने लगी,

श्वेता अपनी चूत को हिलाने लगी तो रमेश ने उसकी कमर को पकड लिया और एक जोरदार धक्का मार दिया जिससे उसकी चुत में मेरा पूरा लंड घुस गया,

इस चुदाई के दौरान कई बार राजश्री और श्वेता की नज़रे टकराई जिससे श्वेता को चुदाई का दोगुना मजा आ रहा था,

लेकिन इस बार रमेश के लंड के एक जोरदार झटके ने श्वेता के मुंह से निकलने वाली सेक्सी आवाज को चीख में बदल दिया,
रमेश ने श्वेता चीख सुनकर अपने लंड को बाहर निकालने वाला था तो, श्वेता ने उसके कूल्हों को अपने पैरो से जकड़ किया, और बोली

श्वेता : क्या हुवा, और जोर से चोदो मुझे,

रमेश तब उसकी टांग को उठा कर उसकी गांड पर हाथ मार कर और जोर से चोदने लगा,

रमेश (मन में) : देख मादरचोद को मज़ा आ रहा है,

रमेश उसकी गांड पर हाथ मारते हुए उसकी चूत में धक्के मारने लगा,

रमेश जब श्वेता की चूत में धक्के मारने लगा तो श्वेता मस्त सेक्सी आवाजे करती हुई चुदने लगी,

रमेश उसको जोरदार धक्को के साथ अन्दर बाहर करते हुए चोद रहा था,
रमेश उसको ऐसे ही जोरदार धक्को के साथ 15 मिनट तक चोदता रहा और फिर रमेश झड़ गया, और उसी के ऊपर निढाल होकर लेट गया,

रमेश और श्वेता एक दुसरे से लिपट कर लेट गए,

पंद्रह मिनट बाद, ........
 

kamdev99008

FoX - Federation of Xossipians
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अध्याय 18

उसके खड़े लंड का अनुमान श्वेता को भी होए गया था, दोनो ही उठकर खड़े हो गए,और ट्रेन में अपनी जगह पर आके बैठ गए,

सीट पर आकर मैं श्वेता के बच्चो के साथ ऐसा व्यस्त और साधारण सा दिखने का प्रयत्न करने लगा कि जैसे कुछ हुवा ही नही,

हुवा तो बहुत कुछ था साहब,

आग दोनो तरफ लग चुकी थी, और इस आग से अनजान राजश्री ऊपर की बर्थ पर बिंदास जवानी के जलवे बिखेरते हुवे सो रही थी, उसकी लेगिंग अभी भी उसके कूल्हों की दरार में फंसी हुई थी,

थोड़ी देर बार जब रमेश से रहा नही गया तो वो श्वेता की तरफ देखने लगा,

दोस्तों श्वेता अब दिखने में बहुत सुन्दर लग रही थी,

रमेश कुछ देर तक बच्चो के पास बैठा रहा, for बच्चों को नींद आने लगी तो, तो श्वेता ने उन्हें उसकी बर्थ पर सुला दिया, और स्वयं एक साइड पर बैठ गई,

रमेश भी श्वेता की तरफ मुंह को करके लेट गया |

रमेश जब लेट गया तो श्वेता उसे घूर घूर कर देखने लगी लेकिन चुपके चुपके,

थोड़ी देर बाद ऐसा हूवा की दोनो एक दूसरे को चुपके चुपके देख रहे थे,

रमेश (में में सोचते हुवे) : कितना देखूंगा चोरी चोरी,

कुछ हिम्मत दिखाते हुवे,

रमेश : बच्चो को तो सुला दिया, अब आप कैसे सो पाएंगी इतनी जगह पर,

श्वेता (मन में) : सो तो जाऊ तेरे नीचे पर तू सुलाए तो,

श्वेता : वो चार पांच घंटे की ही तो बात है, ऐसे ही काट जायेंगे,

ऐसा बोल कर वो उठ कर बाथरूम की और चल दी, और पांच मिनिट बाद वापस आके ऐसे बैठ गई की उसके घुटनो से उसके मम्मे दबे जा रही थे और ब्लाऊज फाड़ कर बाहर आना चाहते हो,

रमेश से अब रहा नही जा रहा था और वो उसके बड़े बड़े बूब्स को घुर रहा था |

दृश्य कुछ ऐसा था कि रमेश टकटकी लगाए उसके मम्मो को घुर रहा था और श्वेता भी बेझिझक रमेश को मम्मो के दर्शन करवा रही थी |

थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा, फिर श्वेता बोली,

श्वेता : आप बहुत देर से देख रहे हो अब बस भी करो |

रमेश : क्या मतलब ?

श्वेता : जो आप उतने देर से देख रहे हो मैं उसकी ही बात कर रही हूँ |

रमेश (बेशर्मी से) : हाँ तो मैं क्या देख रहा हूँ मुझे नही पता है |

श्वेता (बेशर्मी से उत्तर देते हुवे) तुम मेरे मम्मो को उतनी देर से देख रहे हो ज्यादा पसंद आ गए हैं तो बोलो |

जब एक औरत इतना कह दे और आदमी कुछ न करे, तो वो आदमी नामर्द है,

रमेश : हाँ पसंद है,

श्वेता अपनी जगह से उठकर रमेश के पास आकर बैठते हुवे,
श्वेता ने बिना कुछ देर किए हुवे रमेश के हाथ को पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया |

अब सभी पाठकगण अनुमान लगा सकते है कि दृश्य रहा होगा,


जैसे ही श्वेता ने रमेश के हाथ को अपने बूब्स पर रखा तो रमेश के अन्दर करंट लग गया,

रमेश ने श्वेता के एक मम्मे को हाथ में पकड कर धीरे से दबा दिया तो श्वेता के मुंह से अह की आवाज निकल गयी,

जब उसके मुंह से आवाज निकल गयी तो रमेश ने उसकी आवाज दबाने के लिए उसके रसीले होठों पर खुद के होठ रख दिए,

थोड़ी देर तक चुम्माचाटी चलती रही, फिर श्वेता बोली,

श्वेता (रमेश को आंख मरते हुवे) : हो गया न सोने का बंदोबस्त,

रमेश ने खड़े होकर डिब्बे की लाइट बंद करदी, श्वेता ने दोनो बच्चो को देखा कि सोए या नहीं,

रमेश ने सोचा कि राजश्री को देख लेता हु कि सोई या नहीं, फिर कुछ सोच कर नही देखा, और मन में सोचने लगा कि "क्या फर्क पड़ता है, सोई या नहीं, सो गई तो ठीक, नही सोई तो और भी ठीक,"

रमेश ने श्वेता को कस के जकड़ लिया और उसकी होठो पर अपनी होठो को रख दिया,

जब रमेश ने उसकी होठो पर अपनी होठो को रख दिया तो श्वेता भी उसी जोश में रमेश का साथ देने लगी,

रमेश उसके होठो को चूसने के साथ उसके बड़े मम्मो को मसल रहा था,

रमेश के द्वारा श्वेता के होठो को चूसने के साथ ही उसके मम्मो को मसलने के कारण श्वेता थोड़ी ही देर में गर्म हो गयी, और उसे गर्माहट के मारे जोर जोर से रमेश के होठों को चूसने लगी और काटने भी,
एसी कंपार्टमेंट में दोनो के पसीने आने लगे थे,

ऊपर लेटी राजश्री सीधा प्रसारण देखने में मस्त थी और एक हाथ से खुद के मम्मे को मसले जा रही थी, और मन ही मन में श्वेता को गालियां दे रही थी, कि"साली मेरे लंड पर खुद का अधिकार समझ बैठी है,"

श्वेता और रमेश ने एक दूसरे के कपड़े निकाल फेंके,

श्वेता ने न तो चोली पहनी थी और न ही चड्डी, चुदने के फूल मूड में थी,

रमेश भी एकदम नंगा हो गया था, उसका तना हुवा लंड देख कर श्वेता और राजश्री दोनो अवाक रह गई,,

रमेश : आपने चोली और चड्डी नहीं पहनी है,

श्वेता : अभी थोड़ी देर पहले बाथरूम में जाके निकाल कर आई थी, चुदने के समय कपड़ो की ज्यादा रोक टोक नहीं चाहिए,

रमेश उसको उस तरह घुर घुर कर देखने लगा, और उसको अपने पास खींच लिया,

अब श्वेता के बड़े बूब्स रमेश के सामने आ गए और रमेश उसके एक मम्मे को मुंह में रख कर चूसने लगा तो श्वेता तेज सांसो में अन्हे भरने लगी,

रमेश उसकी श्वेता आवाजे सुनकर और जोश में आ गया और उसके मस्त छोटे गोल निप्पल को मुंह में रख कर ठीक एक बच्चे की तरह चूसने लगा,

रमेश उसके एक दूध को मुंह में रख कर चूस रहा था और दुसरे को हाथ में पकड कर दबा रहा था,

श्वेता (मस्त होकर) : आ आ आ उई माँ आ…. उई हाँ उई हाँ माँ माँ… सी उई सी उई सी उई सी…. अह अह अह उई आउच…….

रमेश उसके दोनों बूब्स को ऐसे ही कुछ देर तक चूसने के बाद उसकी टांगो को फैला कर श्वेता की चूत में अपनी जीभ को घुसा दिया,

रमेश को ऐसा करता देखा राजश्री का हाथ भी उसकी चूत पर चला गया जो कि एकदम गीली हो गई थी,
दूसरी तरफ रमेश की जीभ के स्पर्स से श्वेता की सिसकियाँ और तेज हो गयी,

रमेश ने श्वेता को इशारे से बताया कि धीरे धीरे नही तो उसकी बहन सुन लेगी,

राजश्री (रमेश के इशारे देख कर मन में) : सुन नही लेगी, सुन लिया और अब ये लंड भी वो ले लेगी,

रमेश श्वेता की चूत को अपनी जीभ से चाट रहा था साथ में उसकी चूत के दाने को होठो से पकड कर खीच खीच कर चूस रहा था,

श्वेता (मस्त होकर मज़े में) : आह आह आह… ऊऊ ऊऊ…

रमेश श्वेता की चूत को चाटने के साथ उसकी चूत में उँगलियों को घुसा कर जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा,

रमेश उसकी चूत में जितने जोर से ऊँगली को अन्दर बाहर करता श्वेता उतने ही जोश से सेक्सी आवाजे करती,

अब रमेश ने उसकी चूत से हटते हुवे अपने मोटे लंड को श्वेता के हाथ में पकड दिया,
श्वेता ने लपक कर रमेश के लंड को हाथ में पकड कर घुटनों के बल बैठकर चूसने लगी,

राजश्री रमेश के लंड को श्वेता के मुंह में आता जाता देखकर हक्की बक्की रह गई,

श्वेता को कुछ खास आश्चर्य नहीं हुवा क्योंकि वो दो बच्चो की मां थी, और पहले से ही खाई खेली थी,

श्वेता लंड को ऐसे ही 5 मिनट तक चूसती रही फिर रमेश ने उसके मुंह से अपने लंड को निकाल लिया और श्वेता को लेटा दिया, लेटते ही श्वेता ने अपनी टांगो को फैला दिया,

रमेश ने भी बिना देर किए हुवे श्वेता की चूत के मुंह पर लंड को रख कर धीरे से घुसा दिया, उसी समय श्वेता और राजश्री की नज़रे आपस में टकरा गई, राजश्री ने मुंह पर उंगली रख कर उसे चुप रहने का इशारा किया,

श्वेता समझ गई और चुदाई चलने लगाए,

रमेश ने चूत में थोडा लंड घुसा दिया तो श्वेता सेक्सी आवाजे करती हुई अपनी चूत को हिलाने लगी,

श्वेता अपनी चूत को हिलाने लगी तो रमेश ने उसकी कमर को पकड लिया और एक जोरदार धक्का मार दिया जिससे उसकी चुत में मेरा पूरा लंड घुस गया,

इस चुदाई के दौरान कई बार राजश्री और श्वेता की नज़रे टकराई जिससे श्वेता को चुदाई का दोगुना मजा आ रहा था,

लेकिन इस बार रमेश के लंड के एक जोरदार झटके ने श्वेता के मुंह से निकलने वाली सेक्सी आवाज को चीख में बदल दिया,
रमेश ने श्वेता चीख सुनकर अपने लंड को बाहर निकालने वाला था तो, श्वेता ने उसके कूल्हों को अपने पैरो से जकड़ किया, और बोली

श्वेता : क्या हुवा, और जोर से चोदो मुझे,

रमेश तब उसकी टांग को उठा कर उसकी गांड पर हाथ मार कर और जोर से चोदने लगा,

रमेश (मन में) : देख मादरचोद को मज़ा आ रहा है,

रमेश उसकी गांड पर हाथ मारते हुए उसकी चूत में धक्के मारने लगा,

रमेश जब श्वेता की चूत में धक्के मारने लगा तो श्वेता मस्त सेक्सी आवाजे करती हुई चुदने लगी,

रमेश उसको जोरदार धक्को के साथ अन्दर बाहर करते हुए चोद रहा था,
रमेश उसको ऐसे ही जोरदार धक्को के साथ 15 मिनट तक चोदता रहा और फिर रमेश झड़ गया, और उसी के ऊपर निढाल होकर लेट गया,

रमेश और श्वेता एक दुसरे से लिपट कर लेट गए,

पंद्रह मिनट बाद, ........
:hot: :sex: मजा आ गया

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