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Incest मां और खेत

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हेलो दोस्तों यह मेरी पहली स्टोरी है। मैं पहली बार कोई स्टोरी लिख रहा हु ।

आसा करता हूं की आप लोगों को स्टोरी पसंद आए।

अब कहानी शुरु करते हैं।

पहले परिचय मेरी माँ से कराता हु। मेरी माँ का नाम संगीता है। उम्र 42 है । दिखने में बहुत ही खूबसूरत है।


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एक दम माल है मेरी मां । मेरी मां जब भी बाजार जाती है तो सभी लोग मेरी मां को ही देखते है। या कहो की मेरी मां के बॉडी फिगर को देखते हैं। जो एक औरत की खूबसूरती का पहचान होती हैं।

और अब मेरा परिचय मेरा नाम रोहित है। उम्र 20 है। और मैं अपनी मां का दीवान हु। मगर अभी तक कुछ करा नहीं है। बस मां के सेक्सी फिगर को देख के daily मुट्ठी मारता हु। और अपने खयालों में ही मां के बारे सोच सोच के मुट्ठी मारता रहता हु।

हम लोग एक गांव मैं रहते हैं। मेरे घर में बस मैं और मां रहते हैं। पापा बाहर सहर में जॉब करते है तो वो कभी कभी आते है घर पर।


एक दिन:-

रात का वक्त था रात के 10 बज रहे थे। मैं अपने रूम में था और मोबाइल चला रहा था । तभी मेरे को मां के पायल की आवाज आती है जब वह चल रही थी तो पायल की आवाज मेरे कानों मैं पड़ती है तभी मैं समझ जाता हु कि मां खेत में शौच करने जा रही है। वह कैसे पता चलता है क्यों कि मेरी मां डेली इस टाइम खेत में हगने जाती है गांवों की औरतों के साथ में।

मेरे गांव में आज भी सभी औरतें खेतों हगने जाती है।

मैं जब देखता हु कि मां चली गई तो मैं भी उनके पीछे पीछे चल देता हु। मां खेत में जा के बैठ जाती हैं और मै एक पेड़ के पीछे छुप के देखता हु। बाकी गांव की औरतें अलग अलग जगहों पर बैठ के हगने लगती है। रात के वक़्त कुछ सही से दिख भी नहीं रहा था। तभी मां पेशाब करती है तो उस में से सीटई की आवाज आती है।

कुछ देर बाद मां उठ के अपनी साड़ी सही करती है और घर के लिए निकल जाती है और मैं भी छुप के से वह से निकल लेता हु।

और घर आके अपने बेड पर लेट के मां के बारे में कल्पना कर के मुट्ठी मारने लगता हु।

मैं:- आह आह आह मां उम्म shh ahhhh।

और अपने लंड को टाइट पकड़ के आगे पीछे करने लगता हु। और मां के बारे में गंदे गंदे विचार सोच के कुछ देर बाद मैं झड़ जाता हूं और उसके बाद सो जाता हूं।

Next day:

मां किचन में थी और खाना बना रही थी । तभी मैं मां के पीछे आ के खड़ा हो जाता हु। और मां के पीठ पे पसीना आई हुआ था जो की मां के ब्लाउज को गिला कर दिया था।


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मैं: मां क्या बना रही हो।
मां: देख नहीं रहा कि रोटी बना रही हूं।
मैं: हा रोटी के साथ और क्या बना या है।
मां: आलू की सब्जी।
मैं: मां देखो न तुम्हें कितना पसीना आ चुका है।
मां: क्या करूं बेटा इतनी गर्मी जो है और ऊपर से या गैस की गर्मी पसीना तो होगा ही न।
मैं: रूको के काम करता हु मैं तुम्हें पंखा कर देता हु और तुम खाना बनाओ।
मां: अच्छा जी अब तू मुझे पंखा करेगा।
मैं: हा मां।

और मैं इतना कह के हाथ वाला पंखा ले के आता हु और मां को हवा देने लगता हु।
मैं: कैसा लग रहा है मां।
मां: अब सही लग रहा है।
मैं: एक काम करता हु आपके पसीना मैं अपने रुमाल से साफ कर देता हु।
मां: क्या तू रुमाल से साफ करेगा मेरा पसीना।
मैं: हा मां।

फिर मैं अपनी जेब में से रुमाल निकलता हूं और मां के पीठ पे जो पसीना आ रहा था उसे अपने रुमाल से साफ कर देता हु और उसके बाद मां के कमर पे आए पसीने को साफ करता हूं।
मां: मेरी कमर तक भी आ गया क्या पसीना।
मैं: हा मां।

अब मैं मां के आगे वाले हिस्से को पोंछ ता हु मां के नाभि को और उनके पेट को। जब मां रोटी बेल रही थी तो उनका शारीर आगे पीछे हो रहा था। फिर मैं सोचता हु कि क्या मैं मां की चुचियों के पास भी जो पसीना आ रहा था क्या मैं उसे पोंछ दूं।

मां: तू जब तक पसीना साफ करता रह गया और यहां रोटी भी बन गई।
मैं: हा।
मां: चल मै जा रही हु नहाने तू अपन खाना निकल के खा लेना।
मैं: ठीक है मां।

और पसीने से गिला हुआ रूमाल मैं अपने जेब में रख लेता हु।

मैं अभी मां के चूचियों के पास जाने वाला ही था जब तक मां रोटी बना चुकी थी। और मैं खाना निकल के खा लेता हु। और मां अपने रूम में चली जाती है।

फिर मां घर के पीछे बाथरूम था वहा चली जाती है। फिर मां अपनी कच्छी(पैन्टी) देखती जो अभी सुखा नहीं था। तो मां दुबारा अपने रूम मे आती हैं और जो मां ने अभी पैन्टी पहनी थी उसे उतार के अपने बेड पर रख देती और नहाने चली जाती है।

मैं सब जानता हूं कि मां दुबारा क्यों आईं है अपने रूम में। क्योंकि मैं ही मां की पैन्टी को सुबह गिला कर दिया था। जब मां नहाने चली जाती है तो मैं उनके रूम मैं जाता हु और देखता हु की मां ने अपनी ब्रा और पेन्टी बेड पर ही रखा है।


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फिर मैं ब्रा को उठा के सूंघने लगता हु। क्या मनमोहक खुशबू आ रही थी। और मैं मां की कच्छी(panty) उठाता हु तो देखता हु कि मां की पैन्टी अभी तोड़ी सी गीली थी तो मैं समझ जाता हु की मां जब खाना बना रही थी तो उनको पसीना ही रहा था । और तभी यह पैन्टी गीली हुई है।

मैं: आह मां आपकी पैन्टी से खुशबू बहुत मस्त आ रही है और आपका पसीना इस पैन्टी के खुशबू को और बड़ा दे रहा है।

जेब में रखी रूमाल को निकल के उसे भी सुंघने लगता हु। तभी मैं सोचता हु कि क्यों न मां को नहाते समय देखू और उनकी पैन्टी को सुंघू। फिर मैं एक रूम जाता हु जहां पुराने सामान रखे जाते हैं और उस रूम से घर के पीछे बाथरूम भी सही से दिखता हैं।

मैं उस रूम की खिड़की थोड़ा सा खोल ता हु और मेरे सामने का नजारा एकदम अद्भुत था।


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मां अपनी पेटिकोट में नहा रही थी। और पेटिकोट गीली होने के कारण मां के बदन से चिपकी हुई थी और मां के चूतड उस पेटिकोट में साफ साफ दिख रहे थे। तभी मैं अपना पेंट उतरता हु और अपने लंड को पकड़ के मुठ्ठी मारने लगता हु और मां की पसीने वाली पैन्टी को अपनी नाक से लगा के सूंघने लगता हु।

मैं: आह मां तेरी panty से क्या खुशबू आ रही हैं आह आह आह।
Bhadhai ho achhi suruvaat hai
 
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Update 2

मैं मां को वही खिड़की से देख के मुठ्ठी मर रहा था। और मां की कच्छी(panty) को अपने नाक से लगा के सुंघ रहा था।

मां की कच्छी(panty) में दाग धब्बे देखता हु जो की कच्छी में लगा था और ऐसा लग रहा था की मां की चुत से जो काम रस निकलता है वो इस कच्छी में लगा है। फिर मैं उस दाग धब्बे वाले हिस्से को अपनी नाक में लगा के एक लम्बी सांस लेता हु । और जब मैं लम्बी सांस लेता हु तो कुछ अलग ही महक आ रही थी । मुझे समझ नहीं आ रहा था की ये खुशबु है या फिर बदबु है दोनों का मिक्स महक आ रहा था।


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फिर मैं मां की कच्छी को अपनी नाक से हटा के देखता हु और दाग धब्बे वाले हिस्से को अपनी जीभ से चखना को सोचता हु।

मैं: मां तेरी कच्छी से जो महक आ रही है मेरे से रहा नहीं जा रहा है। तू वहा नहा रही है और मैं तेरी कच्छी से खेल रहा हु।

फिर मैं कच्छी को अपने दोनों हाथों से फैला लाता हु और अपनी जीभ निकाल के उस दाग धब्बे वाले को हिस्से को चाटने लगता हु।


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मैं: ummm ummm मां ahhhhhh।

मुझे उसका स्वाद अजीब लगता है मगर मेरी कामवासना मेरे को और चाटने को कह रही थी। और मैं अपनी मां को अपनी आंखों के सामने नहाता देख उसकी कच्छी चाट रहा था।

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मेरा ध्यान मां से हट के उसकी कच्छी पर चला गया था मैं इतना उस कच्छी को चाटने में खो गया था की मेरा ध्यान मां पर गया ही नहीं और मैं यह सब भुल गया था की मुझे मां को नहाते देखना था।और मैं कुछ देर में उस दाग धब्बे को अपनी जीभ से चाट के साफ कर दिया था।

मैं: ahhhhhh अब हो गई साफ मां की कच्छी। मगर मेरा मुंह का स्वाद कुछ बदल गया है इस कच्छी को चाटने से।

फिर मैं देखता हु कि मां अब नहा ली थी और वही रसी पर अपना पेटीकोट रखी थी फिर मां उस पेटीकोट को उठा के और अपने शर से पहन ती है और अपनी चुचियों के पास लाके रोक देती है और अपनी गीली पेटिकोट का नाड़ा खोल के नीचे गिरा देती है और दूसरे पेटिकोट को अपनी चुचियों के पास लाकर नाड़ा बांध देती है। फिर मैं सोचता हु की मां अब अपने रूम में जाएगी तो मैं वहा से निकल के मां के रूम में जा कर उस कच्छी को वैसे ही रख देता हु जैसे मां छोड़ के गई थी और मैं वहा से निकल के अपने रूम में चला जाता हु।

अब मां अपने रूम में आती है और मेरी जीभ से चाटी हुई अपनी कच्छी पहनती हैं मगर मां को एहसास नहीं होता है कि उसकी कच्छी गीली है।

और मैं अपने रूम में लेट के एक पॉर्न वेबसाईट खोलता हु। और इस वेबसाईट पर Real Mom and Son Porn था और भी कुछ था मगर मैने यह वेबसाईट पहले नहीं देखा था मैं पहली बार इस वेबसाईट को ओपन किया था । यह वेबसाईट देख के मेरे अंदर की जिज्ञासा उठी है की क्या या सही मैं Real Mom and Son वाली वेबसाईट है। तो मैं एक वीडियो प्ले करता हु और वीडियो के इंट्रो से लग जाता है की यह सही में रियल वाले हैं। फिर भी में उस वीडियो को पूरा देखता हु खाली इंट्रो देख के पता नहीं कर सकता था की या वीडियो रियल है।

फिर मैं और भी वीडियो देखता हु जब मैं या सब वीडियो देख रहा था तो मेरा लौड़ा पेंट में ही खड़ा हुआ था। या वीडियो देखी रहा था तो मुझे एक वीडियो दिखती है जिस का नाम था Buy For Your Mom फिर मैं तुरंत इस वीडियो को प्ले करता हु। जैसे ही प्ले करता ही हु तभी मां मेरे रूम का गेट बजाती है और मैं मोबाइल की वॉल्यूम को काम कर देता हु ।

मां: रोहित रोहित।

वैसे भी मोबाइल का वॉल्यूम कम ही था फिर भी कम कर देता हु। और अपने खड़े लंड को पैंट में सही करता हु। यह सब मैं इतना जल्दी कर रहा था। और गेट के पास आके।

मां: रोहित रोहित सो गया क्या ।
मैं: आया मां।

फिर मैं गेट खोलता हु।

मां: अच्छा सुन मैं बाजार जा रही हु बबिता के साथ ।
मैं: ठीक है मां जाओ।
मां: घर देखता रही ओ कुत्ते बिल्ली ना आजाएं अंदर।
मैं: ठीक है मां आप जाओ मैं देख लूंगा।

फिर मां घर से चली जाती है और मैं अपने रूम जा के उस वीडियो को प्ले कर के दिखने लगता हु।

उस वीडियो में:-
(बेटा): देखो मां में क्या लेके आया हु।
(मां): क्या ले के आया है बेटा।
फिर वह लड़का बैग खोलता है जो वह लेके आया था और उस में से एक पाउडर निकलता है और अपनी मां से कहता है।
(बेटा): मां जल्दी से अपनी panty निकल के दो।
(मां): बता पहले क्या है यह।
(बेटा): अपनी panty निकालो तो सही ।
(मां): ठीक है।

फिर उसकी मां उसके सामने नंगी हो जाती है और अपनी panty उतार के अपने बेटे के हाथ में दे देती है। और फिर बेटा उस पाउडर को अपनी मां की panty पर लगाता है। उसकी मां वही खड़ी हो के यह सब देख रही थी की उसका बेटा यह पाउडर क्यों लग रहा है।

(बेटा): लो मां अब इसे पहन लो।

फिर उसकी मां उस पाउडर लगी panty को पहन लेती है।

(मां): यह जो तूने मेरी पैंटी में पाउडर लगाया है इससे क्या होगा।
(बेटा): थोड़ी देर रुको तो मां अभी पता चलेगा कि मैने यह क्यों लगाया है।

फिर 5 मिनट बाद पाउडर अपना असर शुरू करने लगता है। और उसकी मां थोड़ा सा हिलने लगती है और अपनी चुत पर हाथ लगाने लगती है।

(मां): बेटा यह क्या हो रहा है मुझे मेरे चुत में खुजली और गर्मी क्यों लग रही है।
(बेटा): यही तो इस पाउडर का कमाल है मेरी मां।
(मां): बेटा मैं कुछ समझी नहीं।

फिर वह लड़का कैमरे के पास आके कहता।

(बेटा): हेलो दोस्तों यह एक मस्त पाउडर है जो कि आप अपनी मां के पैंटी में यूज कर सकते हो और हा अपनी मां की चुत की गर्मी और खुजली दोनों मिटा सकते हो घंटे तक। इस पाउडर को चुत पर लगाने से औरतों की कामवासना जाग जाती है और वह चुदाई के लिए तैयार हो जाती है।

फिर वह कैमरे को अपनी मां के पास लाता है और उसकी मां पसीने से बिल्कुल तर बतर थी और आहे भर रही थी।

(बेटा): आप लोग देख ही रहे हैं कैसे मेरी मां तड़प रही है। आप लोग इस प्रोडक्ट को खरीदना चाहते हैं तो मेरे वीडियो के नीचे दिए गए लिंक से खरीद सकते हैं। और हा इस पाउडर का एक ट्रांसपेरेंट वाला भी है जो आप लोग उसे यूज कर सकते है जिसे लगाने से पता नहीं चलेगा कि पाउडर लगाया है सफेद वाला जो पाउडर का असली रंग होता है सफेद। तो मिलते है नेक्स्ट वीडियो में। Bye

मैं यह वीडियो देख के उस ट्रांसपेरेंट वाले पाउडर को ऑर्डर कर देता हु। मगर मै आज का आर्डर सेलेक्ट करता हु की आज ही आ जाए यह प्रोडक्ट।

मैं: हा कर दिया ऑर्डर अब बस जल्दी आ जाए यह पाउडर फिर मैं अपनी मां पे इस्तेमाल करूंगा ।

कुछ घंटे बाद:-

मां अब बाजार से आ जाती है और घर के आंगन में चारपाई रखी हुई थी उसे पर बैठ जाती है और मुझसे कहती है।

मां: बेटा एक ग्लास पानी ले के आजा बहुत जोरो की प्यास लगी है।
मैं: ला रहा हु मां।

फिर मैं एक ग्लास में मां के लिए पानी लाता हु। और मां को दे देता हु।

मैं: लो मां।

मां पानी पीने लगते हैं और मां को पसीना भी बहुत आया हुआ होता है बाहर इतनी धूप और गर्मी थी इसके कारण मां पसीने से लटपट थी। मां पानी पीके गिलास को नीचे रख देती है।


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फिर हमारे घर पर बबीता आंटी आती है।

बबीता: संगीता चल मेरे घर पर कुछ काम है।
मां: क्या हुआ।
बबीता: तू चल तो सही।
मां: ठीक है चल रही हु।

और दोनों घर से निकली रही होती है तभी डिलीवरी वाला गेट पर आता है।

डिलीवरी बॉय: रोहित के नाम से ऑर्डर था।
मैं: हा में ही हु।
तभी बबीता आंटी बोलती है।
बबीता: क्या मंगाया है रोहित।
मैं: मैं वो कुछ पढ़ाई का सामान है।
बबीता: अच्छा ठीक है संगीता चल चलते है।

मैं उस प्रोडक्ट को ले लेता हु और मां और आंटी भी अब जा चुकी थी। अब मैं अपने रूम में आके उस पैकेट को खोलता हु और उस में से पाउडर निकल के देखने लगता हु।


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और इधर बबीता आंटी का घर:-
मां: बता क्यों किस लिए लेकर आई है।
बबीता: चल तो सही मेरे रूम में।
दोनों रूम की तरफ चलते हुए जा रही थी।
मां: अभी मैं घर आके आराम ही कर रही थी जब तक तू आ गई।

रूम में आते ही बबीता आंटी एक किताब निकलती है जो उन्होंने बेड के बिस्तर के नीचे रख रखा था।

बबीता: यह देख कौन सी किताब है।
मां उस किताब का नाम पड़ती है।
मां: ये क्या लिखा है " मेरी मां मेरी रखेल"।
बबीता: अभी तो यह सुनकर चौंक जाएगी की यह किताब आई कहां से है।
मां: कहा से आई है।
बबीता: यह किताब मैने अपने बेटे के रूम से निकाला है।
मां: क्या।
बबीता: हा सही कह रही हु।

तभी मैं मां को कॉल करता हु यह पूछने के लिए की कब तक आएंगी घर पर। ताकि मैं उस पाउडर को मां की कच्छी में लगाके रख दूं। मां कॉल उठा ती है।

मां: एक मिनट रुक बबीता रोहित का कॉल आ रहा है।

मै फोन को स्पीकर को लाउड मोड पर रख के बात करता हु।

मां: बोल बेटा।
मैं: मां कब तक आओगी घर पर।
मां: अभी थोड़ा टाइम लगेगा बेटा।
मैं: तो भी कितना टाइम लगेगा।
मां: 1 घंटा लग जाएगा अभी बबीता आंटी का कुछ काम कर रही हु।
मैं: ठीक है मां।

और मैं फोन नहीं कट करता हु और फोन को अपने जेब में डाल के घर के पीछे जा के जहां मां की कच्छी सुख रही थी उस कच्छी को ले के अपने रूम में आ जाता हु । तभी मुझे फोन पे मां की आवाज सुनाई देती हैं।

मां: ये किताब तुने अपने बेटे के रूम से निकाली है।

मैं फोन को अपनी जेब में से निकलता हु और उन दोनों की बातें सुनने लगता हु।

बबीता: हा मैं डेली रात को देखी थी उसे पढ़ते हुए इस किताब को ।
मां: यह किताब तेरे बेटे को मिली कहां से।
बबीता: यही तो नहीं पता मुझे। मुझे लगता है इसके कुछ आवारा दोस्त है उन्हीं से लिया होगा इसने किताब को।
मां: हा या भी हो सकता हैं।

मैं दोनों की बातें सुन के समझ नहीं पा रहा था की किस किताब की बात हो रही है।

बबीता: इस किताब को खोल कर देख इसके अंदर और भी कहानी है।

मां फिर कुछ कहानियों का नाम लेती है।

मां: ये क्या बबीता इस किताब के अंदर तो कुछ ज्यादा ही गंदी-गंदी कहानियों के नाम है।
मां: यह देख क्या लिखा है । " मां मेरी पालतू कुत्तिया" और इस वाले का नाम देख " बुर फाड़वाने को तैयार मेरी मां"।

मैं जैसे ही कहानियों के नाम सुनता हु तो एकदम से हिल जाता हु और सोचता हु की कौन सी किताब इन दोनों के हाथ लग गई है।

बबीता: अब तु ही बता संगीता क्या करूं मैं।
मां: एक बार तु अपने बेटे से बात कर इस बारे में।
मां: मगर यह बात तो बाजार जाते वक़्त भी बता सकती थी।
बबीता: कैसे बताती हम रोड पर यह सब बातें करते हैं और कोई हमारे बातें सुन लेता तो क्या सोचता।
मां: hmm चल एक बार अपने बेटे से बात कर आज।
बबीता: ठीक है।
मां: जब बेटा बड़ा हो जाता है तो उसकी पहली औरत उसकी मां ही होती है जिसे वह पसंद करता हैं।
बबीता: ये क्या कह रही है तु ।
मां: सही कह रही हु।
बबीता: मतलब मैं समझी नहीं तु कहना क्या चाहती है सही से बता।

मैं यह सुन के चोक जाता हु की मां यह क्या कह रही हैं।



मिलते हैं नेक्स्ट अपडेट में।
Badhiya update
 
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मैं मां की बताओ को सुन के हेरा हो गया था की मां यह क्या कह रही है " बेटे की पहली पसंद उसकी मां होती हैं"। मैं यह सुन के और जानना चाहता था की मां क्या कहेंगी बबीता आंटी को ।

बबीता: बता चुप क्यों है कैसे पता है की बेटा पहले अपनी मां को पसंद करता है।

मां थोड़ी देर चुप रहती हैं और फिर उसके बाद बोलती है।

मां: अच्छा तो सुन मैं बताती हु कैसे।
बबीता: ह्म्म बता।

मैं जैसे ही सुनता हु की मां बताने वाली है तो मैं अपनी पेंट खोल के बेड पर नंगा लेट जाता हु और अपना लोडे को अपने एक हाथ से पकड़ के ऊपर नीचे करने लगता हु और जो मैं मां की कच्छी लाया था उसके अपनी नाक से लगा के सुंघने लगता हु और उसके बाद फोन पे मां की बातें सुनने लगता हु।

मां: जो आजकल के लड़के होते हैं वह ज्यादातर हम जैसी औरतों में दिलचस्पी रखते हैं। जैसे हमारी उम्र की औरतों पे ।
बबीता: क्या।
मां: हा जैसे तेरे बेटे कोई ही ले ले उससे कोई बाहर नहीं मिली होगी हमारी उम्र की औरत तो उसने अपनी मां को ही अपना बनाने का सोचा है।
बबीता: क्या कह रही है तु।
मां: सही बता रही हु तुझे मैं।
बबिता: इसका मतलब की तेरा बेटा भी तेरे को सोचता होगा।
मां: शायद से हा सोचता भी होगा।
बबीता: अगर तेरा बेटा तेरे बारे में सोचे तो तुझे अच्छा लगेगा गा या बुरा।
मां: इसका जवाब तो है ही नहीं मेरे पास।
बबीता: नहीं तुझे बताना होगा अभी।

बबीता आंटी मां से बुलवाया चाहती थी की मां क्या करे गी जब उसका बेटा उसके बारे में ऐसा सोचे तो। और मैं भी अब ध्यान से सुने लगता हु की मां अब क्या कहेगी।

मां: मेरा बेटा मेरे बारे में ऐसा सोचता ही नहीं है।
बबीता: यह क्या जवाब हुआ मैं कह रही हु की तेरा बेटा तेरे बारे में सोचे तो कैसा लगे गा इसका जवाब दे।
मां: अगर तो सुनना चाहती है तो तो सुन अगर मेरा बेटा, अगर मेरा बेटा, अगर मेरा बेटा।
बबीता: अब बता भी दे।

मैं भी बबीता आंटी की तरहा इंतजार कर रहा था की मां अब बोल दो।

मां: मेरा बेटा मेरे बारे में सोचे तो मैं उसके प्यार में पड़ जाऊंगी।
बबीता: क्या सही में।
मां: हा सही कह रही हु।

मैं इधर मां की बात सुन के इतना खुश होता हु की मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता ।
मैं (मन में): अगर मैंने मां का फोन काट दिया होता तो मुझे यह सब सुनने को नहीं मिलता। आज का दिन बहुत अच्छा लग रहा है।

बबीता: तु बड़ी छीनार निकली संगीता ।
मां: इस में छीनार वाली क्या बात है मुझे बता जरा।
बबिता: अपने ही बेटे के साथ यह सब।
मां: यह सब करना कोई गलत नहीं है।
बबीत: कैसे गलत नहीं हैं। मैंने किस लिए तुझे बुलाया है और तु यह सब कह रही है।
मां: अच्छा तो मेरी बात सुन फिर बताना सही है या गलत ।
बबिता: ठीक है बता।
मां: अगर यही कोई बाहर का लड़का होता और तुझे प्यार करता और तुम कभी पकडे जाते हैं तो तुम्हारी पूरे गांव भर में बदनामी होती और तो और कहीं मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहती।
मां: इससे अच्छा है कि अपने बेटे के साथी प्यार कर और घर की बात घर में रह जाएगी और किसी को पता भी नहीं चलेगा और तुम दोनों साथ में कहीं भी घूम सकते हो कोई बोलने वाला भी नहीं होगा सभी सोचेंगे की यह दोनों तो मां बेटे है।
बबीता: मगर यह सब मैं अपने बेटे के साथ क्यों करूं।
मां: तु मुझे पहले यह बता की तुने अपने पति के साथ कब चुदाई किया था।

मैं मां की बातों को ध्यान से सुन रहा था तभी मां के मुंह से चुदाई शब्द सुन के मुझे अच्छा लगता हैं और मेरा लोडा और टाइट हो जाता है।

बबीता: यह क्या पूछ रही है तु।
मां: बता ना पहले।
बबीता: यही करीब 1 साल पहले किया था।
मां: और उसके बाद क्या हो गया अब नहीं करते।
बबीता: क्या बताऊं संगीता तुझे अब तो रोज शराब पीकर आता है और ऐसी सो जाता है और वह भी जो हमने 1 साल पहले किया था उसमें भी यह आदमी 5 मिनट ही टिकपाया था।
मां: देखा 5 मिनट ही टिक पाया था ना तेरा पति अब तो अपने बेटे से करवा कर देख जवान खून है तुझे हर खुशी देगा तेरा बेटा।
बबीता: थोड़ा अपने बारे में भी तो बता तुने कब से नहीं की चुदाई ।
मां: मैं तुझे क्या बताऊं बबीता मैं तो पिछले 2 साल से तड़प रही हु।
बबीता: तो तु अपने बेटे से चुदाई करवा लेती।
मां: करवा लेती मैं मगर मेरा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा था कॉलेज की इसी वजह से नहीं किया था मगर अब मेरे बेटे की पढ़ाई पूरी हो गई है अब देखते हैं।
बबीता: तो तुने इतने साल कैसे काम चलाया ।
मां: वही हम सब औरतों की पसंद गाजर और मूली और बैगन और हा खीरा कैसे भुल सकते है।
बबीता: तु तो बड़ी वाली बुरचोदी निकली संगीता।

मैं(मन में): मां गाजर मूली से कम चलाती है मुझे तो अब पता चल रहा है। और तो और मां मुझ से चुदना भी चाहती थी यह क्या सुन रहा हु मैं।

बबीता: तो बात क्या सोचा है तुने।
मां: पहले तु बता।
बबिता: मैं तो डर रही हु यह सब करने को वह भी अपने बेटे के साथ।
मां: मेरी प्यारी बबीता यह डर को अपने मन से निकाल दे।
बबीता: ठीक है और अब तु बता।
मां: अभी कुछ सोचा नहीं है मैंने क्या करना है।
बबीता: तो भी कुछ तो बता।

मां कुछ बताने जा रही थी तभी बबीता का बेटा सूरज घर आता है। और अपनी मां को आवाज लगाने लगता है।

सूरज: मां मां खाना लगाना मैं अभी मुंह हाथ धो के आता हु।
बबीता: ठीक है।
मां: ठीक है मैं चलती हु मैं तुझे घर पहुंच के कॉल करती हु।
बबीता: ठीक हैं और ये तो लेती जा जो हमे बाजार से कपड़े खरीदे थे।
मां: अरे हा में तो भुल ही गई थी तेरे झोले में रह गया था और मैं ऐसे ही घर चली गई थी।
बबिता: ले ये झोला लेते जा शाम को दे देना।
मां: हा तुने अपने कपड़े निकाल लिया इसमें से।
बबीता: हा निकल लिया है।

मां बबीता आंटी के घर निकल जाती है और मैं इधर मां की बात सुन के की मां घर आ रही है तो मैं पहले फ़ोन कॉल काट देता हु और मां की कच्छी को वही रस्सी पर रख के आ जाता हु मगर मैंने अभी वह पाउडर नहीं लगाया था कच्छी पर। और अपने रूम में आके पैंट पहन लेता हु मगर आज कुछ ज्यादा ही मुठ्ठी मारा था मगर झाड़ा नहीं था।

अब दोपहर का टाइम हो रहा था और मां उस खिलखिलाती धूप में पैदल आ रही थी बबीता आंटी के घर से ।
मां: आज धूप कितनी तेज निकली हुई है और गर्मी कितनी ज्यादा हो रही है।

मां घर का गेट बजती है और मैं गेट खोल देता हु। फिर मां और मैं घर के आंगन में आ जाते हैं और चारपाई पर बैठ जाते हैं।

मैं: मां क्या ले के आई हो ।
मां: मैं कुछ कपड़े लेकर आई हु अपने लिए।
मैं: ओ अच्छा।
मां: हा चल मैं जा रही हु अपने रूम में आराम करने आज कुछ ज्यादा ही थक गई हु।
मैं: ठीक है मां जाओ आराम करो।

अब मां अपने रूम में चली जाती है और अपने रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर देती है। जब मां दरवाजा बंद कर रही थी तो मुझे उस दरवाजे की कुंडी का आवाज आता है जो बंद हो रहा था।

मैं( मन में): लगता है की मां जो कपड़े ले के आई है उसे वह पहन के देखना चाहती हैं।

फिर मैं अपने रूम में जाता हु और उस पाउडर को अपनी जेब में डालकर घर के पीछे चला जाता हु जहा मां की कच्छी थी और जहा मां नहाती थी और मां के रूम की खिड़की भी उसी पीछे वाले हिस्से में थी। तो मैं उस खिड़की से देखने की कोशिश करता हु तो देखता हु की मां तो सो रही है।

उसके बाद मैं अपने रूम में आ जाता हु फिर एकदम से याद आता है की मेरी जेब में तो पाउडर है उस पाउडर को तो कच्छी में लगाना है। मैं फिर से घर के पीछे जा के उस कच्छी में यह पाउडर लगाता हु।
मैं: यह पाउडर तो बहुत बढ़िया है इस कच्छी में लगाया है तो पता ही नहीं चल रहा की पाउडर लगा है।
पाउडर लगाकर अपने रूम में आ जाता हु और अपना मोबाइल चलने लगता हु

अब शाम के टाइम:-
मां सो के उठ जाती है और खाना बनाने की तैयारी करने लगती है और मैं मस्त मोबाइल में लगा हुआ था और वह सब वीडियो देख रहा था जो उस वेबसाईट पर थी। तभी बबीता आंटी का कॉल आता है मां के फोन पर।

फोन कॉल:-
मां: हा बोल बबीता।
बबीता: तुने बोला था की घर जाकर कॉल करूंगी और अब तो शाम हो गई है।
मां: अरे मैं तो भूल ही गई थी की तुझे कॉल भी करना है मैं तो आकर अपने रूम में सो गई थी एकदम से।
बबीता: तो बता क्या करना है।
मां (मजे लेते हुए): क्या बात है बबीता बड़ी उतावली हो रही है।
बबीता: जब से तुने मुझे बताया है तब से मैं सोच ही रही थी क्या मैं यह करूं या ना करूं अब मैंने फैसला ले लिया है।
मां: तो क्या है तेरा फैसला मुझे तो बता।
बबीता: एक ही शर्त पर में बताऊंगी तु भी अपने बेटे के साथ करेगी बोल हां या ना।
मां: मैंने तो तेरे को उस टाइम भी बताया था मैं तो कर लूंगी तु अपना बता।

मैं यह सब बातों से अनजान था की मां और बबीता आंटी क्या बातें कर रही है अभी मैं तो अपने रूम में मोबाइल चला रहा था।

बबीता: ठीक है मैं तैयार हु करने के लिए।
मां: और मैं भी।
बबीता: शुरुआत कैसे करें मुझे समझ नहीं आ रहा।
मां: सब मैं ही बता दूंगी तो तु क्या करेगी थोड़ा अपने मन से सोच के कर।
बबीता: क्या संगीता तु भी बताना मुझे कैसे करूं मैं।
मां: रुक खाना बन ही गया है मेरा मैं अभी थोड़ी देर में घर से निकल रही हु तो तु मुझे मेरे खेत पर मिल।
बबीता: ठीक है मेरा खाना भी बन ही गया है।

और फोन कट हो जाता है और मां मुझे बुलाती है।

मां: रोहित रोहित।
मैं: हा मां आया।
फिर मैं मां के पास आता हु।
मां: बेटा अभी मैं खेत पर जा रही हु सब्जी तोड़ने।
मैं: ठीक है मां।
तभी मां की नजर मेरे पेंट में बने तम्बू पर पड़ती हैं जो इस वक़्त पेंट में खड़ा था और जब मां ने बुलाया तो मैने अपने लन्ड को सही नहीं किया था जन बुझ कर क्योंकि मैंने जो बातें सुनी थी मां और बबीता आंटी के मुंह से इस वजह से मैंने सही करना जरूरी नहीं समझा। मैं भी देखता हु की मां मेरे पेंट में बने तम्बू को देख रही है।

मां: ठीक है तो मैं जा रही हु मुझे जरा टोकरी दे दे उसमें सब्जी लेकर आना है ना।
मैं: अभी लेके आया मां।
फिर मैं टोकरी लेकर आता हु और मां को दे देता हु और मां घर से निकल जाती है और रास्ते में चलते-चलते सोच रही थी।
मां(मन में): आज मैं पहली बार अपने बेटे का लन्ड के साइज को देखा है उसके पेट के अंदर मगर उसका लन्ड खड़ा क्यों था क्या यह यह सब वीडियो देखता है । हां देखता ही होगा ऐसे कैसे खड़ा हो सकता है वह जरूर अपने रूम में वह सब वीडियो देख रहा होगा।

तभी मां को बबीता आंटी आते हुए दिखती है।
बबिता: चल अब चलते हैं।
मां: हा चल।
फिर दोनों खेत पर पहुंच जाती है और हमारे खेत में एक झोपड़ी भी थी और मां इधर-उधर देखने लगती है की कोई सही सी जगह देखें वहां बैठकर बातें करें।
मां: यहां बैठ जाते है।
बबीता: ह्म्म।
मां: मुझे भी नहीं पता की कैसे शुरुआत करूं बबीता।
बबिता: यही बताने के लिए तुने मुझे यहां बुलाया है।
मां: नहीं रे।
बबीता: तो बता फिर।
मां: मैं क्या सोच रही हु एक काम करते हैं जो हमने कपड़े लिए हैं ना उसे अपने घर पर ट्राई करते हैं।
बबीता: क्या कह रही है मुझे कुछ समझ नहीं आया।
मां: मैं कह ना चाहती हु की हम दोनों अपने रूम के दरवाजे को खोल के कपड़े बदलेंगे और अपने बेटों से कहेंगे की हमारे रूम में मत आना।
बबीता: यह कहने से क्या होगा।
मां: तु कितना सवाल जवाब करती है सुन अब जब हम उन्हें माना करेंगे तो वह जरूर आएंगे देखने के लिए की मां ने क्यों बोला कि मेरे रूम में मत आना।
बबीता: अच्छा यह बात है।
मां: हा अभी तो मेरे दिमाग में बस यही आ रहा है फिर आगे देखते हैं क्या करते हैं।
बबिता: ठीक हैं।
मां: चल फिर थोड़ा सब्जियां तोड़ लेते हैं फिर चलते हैं घर।
बबीता: ह्म्म।

इधर मैं अपने रूम में फिर से पॉर्न वीडियो देखने लगा था और जिस वीडियो को देखकर मैंने पाउडर मंगवाया था उसी का नई वीडियो आई थी और वीडियो का नाम था " मां के सजने का सामान" फिर मै यह वीडियो प्ले कर के देखने लगता हु। और वीडियो में देखता हु की वह लड़का अपनी मां को नई स्टाइल की पैन्टी देता हैं और अपनी मां को वह नाई पैन्टी पहना के नचवाता है और नई स्टाइल की ब्रा भी पहनाता है और भी कुछ करता है फिर मैं वह सब चीजें ऑर्डर कर लेता हु।
मैं(मन में): अभी तक तो मैंने वह पाउडर को भी नहीं ट्राई करा है और यह सब और आर्डर कर रहा हु। अभी तक वह मां की कच्छी वही रस्सी पर ही है।
मैं: मां एक बार उस कच्छी को पहन लो ना ताकि तुम्हारा बेटा भी तो देख सके उस पाउडर का कमाल।

इधर खेत में मां सब्जियां तोड़ लेती है और घर के लिए निकल जाते हैं।
मां: चल बबीता अपने बेटो को अपने हुसैन के जलवे दिखते हैं।
बबीता ( हस्ते हुए): हा चल।
मां: उस किताब को पढ़ के थोड़ा आईडिया लेते रहना ।
बबीता: हा ठीक।

दोनों बातें करते करते अपने घर आजाती है ।
मां: बेटा मैं अभी नहाने जा रही हु।
मैं: इस टाइम नहाने जा रही हो।
मां: हा बेटा आज गर्मी बहुत है बिना नहाए काम नहीं चले गा।
मैं: हा गर्मी तो है मां।
मां: यह सब्जी रख दे उधर मैं चली नहाने।
फिर मां घर के पीछे नहाने के लिए चली जाती है और मैं भी मां को जाता देख उस रूम में चला जाता हु जहां से घर के पीछे का हिस्सा सही से दिख रहा था। तभी मां को देखता हु की वह कुछ ढूंढ रही थी और बोल भी रही थी।

मां: कहा रखा था मैने यहां भी नहीं है।
फिर मां दीवार के छेद में दिखती हैं और वहा से एक चीज उठाती है मगर मुझे सही से दिख नहीं रहा था की मां ने दीवार के छेद से क्या निकला है।
मां: हा यहाँ राखी थी मैने और मैं कब से इधर उधर देख रही हु।
फिर मां अब नल के पास आती है और नल चला के अपनी बाल्टी भरने लगती है। जो चीज मां को मिलेगी वह नीचे रखती है तब मेरी नजर उसे पर पड़ती है।

मैं(मन में): ये तो दाढ़ी बनाने वाला इरेज़र है क्या मां अपनी बुर के बल साफ करेगी।

अब मां की बाल्टी को भर लेती है और इधर-उधर देखने लगती है।
मां( मन में): कहां है बेटा तु मुझे पता है तु जरूर आया होगा मुझे देखने के लिए।

तभी मैं मां को दिख जाता हु खिड़की के पीछे मगर मां मुझे पता नहीं लगने देना चाह रहे थी कि उन्होंने देख लिया।

मां (मन में): इसका मतलब है की यह मुझे हमेशा देखता होगा नहाते हुए और देखो छुपा कैसे है की किसी की नजर भी ना पड़े ऐसी जगह छुपा है। मैं तो इसे शरीफ समझती थी यह भी बबीता के बेटे जैसा निकला।




Next part main image aur gif laga dunga iss update main utni jarurat nahi thi to lagaya nahi.
Nice update
 
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Dark_King45

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सच में, आपने बहुत बढ़िया तरीके से buildup किया है। शुरू से लेकर अंत तक tension, curiosity, guilt, lust सब एक साथ घुला-मिला हुआ था। जैसे कोई गर्मागर्म चाय पीते हुए धीरे-धीरे चुस्कियाँ ले रहा हो।

माँ और बबीता की फोन वाली बातचीत ये तो बिल्कुल आग था। जब माँ ने कहा “मेरा बेटा मेरे बारे में सोचे तो मैं उसके प्यार में पड़ जाऊंगी”... उफ्फ! मेरे शरीर में झनझनाहट दौड़ गई। वो hesitation, वो “अगर मेरा बेटा...” वाला pause, और फिर straight bomb फोड़ना, ये बहुत realistic और erotic लगा।

'चुदाई' शब्द जब माँ के मुँह से ये शब्द निकला, तो तन बदन में जैसे आग लग गई हो, वही feeling आई। माँ जैसी औरत का मुँह जब इस शब्द का इस्तेमाल करे, तो नॉर्मल माँ अचानक slutty और desirable लगने लगती है।

माँ का अपना confession की 2 साल से तड़प रही है, गाजर-मूली-खीरा वाला वाला हिस्सा... बहुत कच्चा, बहुत personal और बहुत exciting था। ये दिखाता है कि माँ भी इंसान है, वो भी भूखी है, और अब बेटे को target कर रही है।

खेत वाली प्लानिंग, नया कपड़ा ट्राई करने का बहाना, दरवाजा खुला रखना, “मत आना” बोलना... ये सब इतना calculated और naughty है कि पाठक का दिल भी धड़कने लगता है। anticipation कमाल की है।

सबसे ख़ास नहाने वाला सीन जब माँ जानबूझकर इरेज़र निकालती है, बाल्टी भरती है और मन में सोचती है “मुझे पता है तू देखने आया होगा”... ये जगह तो बिल्कुल चरम थी। माँ अब actively tease कर रही है, बिना directly कुछ कहे।

कहानी में realism अच्छा है, गाँव का माहौल, खेत, झोपड़ी, चारपाई, गर्मी, सब कुछ जीवंत लग रहा है। Dialogue भी natural हैं, खासकर दो औरतों के बीच की निजी जीवन की बातचीत!

एक छोटी सी सलाह अब next part में थोड़ा physical closeness बढ़ाइए लेकिन धीरे-धीरे, माँ का बेटे को touch करना, “गर्मी है ना बेटा” बोलते हुए पसीना पोंछना, या नहाते वक्त towel गिराना। पाउडर वाली चीज़ को भी use करें जब माँ वो कच्छी पहने और अचानक गीली हो जाए, तो reaction कमाल का आएगा।

भाई, पूरी कहानी पढ़ते हुए मैं भी उसी बेटे की जगह खुद को feel कर रहा था। लंड हाथ में थामे, साँसें भारी, आँखें स्क्रीन पर टिकी हुई।

मैं इंतज़ार कर रहा हूँ अगले भाग का, खासकर जब माँ नहाकर वापस आएगी और बेटे को देखेगी। :wink:
Thanks bro for explain 😍😍
 
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