sandy4hotgirls
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Good start. Need pics and gifs.मैं मां की बताओ को सुन के हेरा हो गया था की मां यह क्या कह रही है " बेटे की पहली पसंद उसकी मां होती हैं"। मैं यह सुन के और जानना चाहता था की मां क्या कहेंगी बबीता आंटी को ।
बबीता: बता चुप क्यों है कैसे पता है की बेटा पहले अपनी मां को पसंद करता है।
मां थोड़ी देर चुप रहती हैं और फिर उसके बाद बोलती है।
मां: अच्छा तो सुन मैं बताती हु कैसे।
बबीता: ह्म्म बता।
मैं जैसे ही सुनता हु की मां बताने वाली है तो मैं अपनी पेंट खोल के बेड पर नंगा लेट जाता हु और अपना लोडे को अपने एक हाथ से पकड़ के ऊपर नीचे करने लगता हु और जो मैं मां की कच्छी लाया था उसके अपनी नाक से लगा के सुंघने लगता हु और उसके बाद फोन पे मां की बातें सुनने लगता हु।
मां: जो आजकल के लड़के होते हैं वह ज्यादातर हम जैसी औरतों में दिलचस्पी रखते हैं। जैसे हमारी उम्र की औरतों पे ।
बबीता: क्या।
मां: हा जैसे तेरे बेटे कोई ही ले ले उससे कोई बाहर नहीं मिली होगी हमारी उम्र की औरत तो उसने अपनी मां को ही अपना बनाने का सोचा है।
बबीता: क्या कह रही है तु।
मां: सही बता रही हु तुझे मैं।
बबिता: इसका मतलब की तेरा बेटा भी तेरे को सोचता होगा।
मां: शायद से हा सोचता भी होगा।
बबीता: अगर तेरा बेटा तेरे बारे में सोचे तो तुझे अच्छा लगेगा गा या बुरा।
मां: इसका जवाब तो है ही नहीं मेरे पास।
बबीता: नहीं तुझे बताना होगा अभी।
बबीता आंटी मां से बुलवाया चाहती थी की मां क्या करे गी जब उसका बेटा उसके बारे में ऐसा सोचे तो। और मैं भी अब ध्यान से सुने लगता हु की मां अब क्या कहेगी।
मां: मेरा बेटा मेरे बारे में ऐसा सोचता ही नहीं है।
बबीता: यह क्या जवाब हुआ मैं कह रही हु की तेरा बेटा तेरे बारे में सोचे तो कैसा लगे गा इसका जवाब दे।
मां: अगर तो सुनना चाहती है तो तो सुन अगर मेरा बेटा, अगर मेरा बेटा, अगर मेरा बेटा।
बबीता: अब बता भी दे।
मैं भी बबीता आंटी की तरहा इंतजार कर रहा था की मां अब बोल दो।
मां: मेरा बेटा मेरे बारे में सोचे तो मैं उसके प्यार में पड़ जाऊंगी।
बबीता: क्या सही में।
मां: हा सही कह रही हु।
मैं इधर मां की बात सुन के इतना खुश होता हु की मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं होता ।
मैं (मन में): अगर मैंने मां का फोन काट दिया होता तो मुझे यह सब सुनने को नहीं मिलता। आज का दिन बहुत अच्छा लग रहा है।
बबीता: तु बड़ी छीनार निकली संगीता ।
मां: इस में छीनार वाली क्या बात है मुझे बता जरा।
बबिता: अपने ही बेटे के साथ यह सब।
मां: यह सब करना कोई गलत नहीं है।
बबीत: कैसे गलत नहीं हैं। मैंने किस लिए तुझे बुलाया है और तु यह सब कह रही है।
मां: अच्छा तो मेरी बात सुन फिर बताना सही है या गलत ।
बबिता: ठीक है बता।
मां: अगर यही कोई बाहर का लड़का होता और तुझे प्यार करता और तुम कभी पकडे जाते हैं तो तुम्हारी पूरे गांव भर में बदनामी होती और तो और कहीं मुंह दिखाने लायक भी नहीं रहती।
मां: इससे अच्छा है कि अपने बेटे के साथी प्यार कर और घर की बात घर में रह जाएगी और किसी को पता भी नहीं चलेगा और तुम दोनों साथ में कहीं भी घूम सकते हो कोई बोलने वाला भी नहीं होगा सभी सोचेंगे की यह दोनों तो मां बेटे है।
बबीता: मगर यह सब मैं अपने बेटे के साथ क्यों करूं।
मां: तु मुझे पहले यह बता की तुने अपने पति के साथ कब चुदाई किया था।
मैं मां की बातों को ध्यान से सुन रहा था तभी मां के मुंह से चुदाई शब्द सुन के मुझे अच्छा लगता हैं और मेरा लोडा और टाइट हो जाता है।
बबीता: यह क्या पूछ रही है तु।
मां: बता ना पहले।
बबीता: यही करीब 1 साल पहले किया था।
मां: और उसके बाद क्या हो गया अब नहीं करते।
बबीता: क्या बताऊं संगीता तुझे अब तो रोज शराब पीकर आता है और ऐसी सो जाता है और वह भी जो हमने 1 साल पहले किया था उसमें भी यह आदमी 5 मिनट ही टिकपाया था।
मां: देखा 5 मिनट ही टिक पाया था ना तेरा पति अब तो अपने बेटे से करवा कर देख जवान खून है तुझे हर खुशी देगा तेरा बेटा।
बबीता: थोड़ा अपने बारे में भी तो बता तुने कब से नहीं की चुदाई ।
मां: मैं तुझे क्या बताऊं बबीता मैं तो पिछले 2 साल से तड़प रही हु।
बबीता: तो तु अपने बेटे से चुदाई करवा लेती।
मां: करवा लेती मैं मगर मेरा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा था कॉलेज की इसी वजह से नहीं किया था मगर अब मेरे बेटे की पढ़ाई पूरी हो गई है अब देखते हैं।
बबीता: तो तुने इतने साल कैसे काम चलाया ।
मां: वही हम सब औरतों की पसंद गाजर और मूली और बैगन और हा खीरा कैसे भुल सकते है।
बबीता: तु तो बड़ी वाली बुरचोदी निकली संगीता।
मैं(मन में): मां गाजर मूली से कम चलाती है मुझे तो अब पता चल रहा है। और तो और मां मुझ से चुदना भी चाहती थी यह क्या सुन रहा हु मैं।
बबीता: तो बात क्या सोचा है तुने।
मां: पहले तु बता।
बबिता: मैं तो डर रही हु यह सब करने को वह भी अपने बेटे के साथ।
मां: मेरी प्यारी बबीता यह डर को अपने मन से निकाल दे।
बबीता: ठीक है और अब तु बता।
मां: अभी कुछ सोचा नहीं है मैंने क्या करना है।
बबीता: तो भी कुछ तो बता।
मां कुछ बताने जा रही थी तभी बबीता का बेटा सूरज घर आता है। और अपनी मां को आवाज लगाने लगता है।
सूरज: मां मां खाना लगाना मैं अभी मुंह हाथ धो के आता हु।
बबीता: ठीक है।
मां: ठीक है मैं चलती हु मैं तुझे घर पहुंच के कॉल करती हु।
बबीता: ठीक हैं और ये तो लेती जा जो हमे बाजार से कपड़े खरीदे थे।
मां: अरे हा में तो भुल ही गई थी तेरे झोले में रह गया था और मैं ऐसे ही घर चली गई थी।
बबिता: ले ये झोला लेते जा शाम को दे देना।
मां: हा तुने अपने कपड़े निकाल लिया इसमें से।
बबीता: हा निकल लिया है।
मां बबीता आंटी के घर निकल जाती है और मैं इधर मां की बात सुन के की मां घर आ रही है तो मैं पहले फ़ोन कॉल काट देता हु और मां की कच्छी को वही रस्सी पर रख के आ जाता हु मगर मैंने अभी वह पाउडर नहीं लगाया था कच्छी पर। और अपने रूम में आके पैंट पहन लेता हु मगर आज कुछ ज्यादा ही मुठ्ठी मारा था मगर झाड़ा नहीं था।
अब दोपहर का टाइम हो रहा था और मां उस खिलखिलाती धूप में पैदल आ रही थी बबीता आंटी के घर से ।
मां: आज धूप कितनी तेज निकली हुई है और गर्मी कितनी ज्यादा हो रही है।
मां घर का गेट बजती है और मैं गेट खोल देता हु। फिर मां और मैं घर के आंगन में आ जाते हैं और चारपाई पर बैठ जाते हैं।
मैं: मां क्या ले के आई हो ।
मां: मैं कुछ कपड़े लेकर आई हु अपने लिए।
मैं: ओ अच्छा।
मां: हा चल मैं जा रही हु अपने रूम में आराम करने आज कुछ ज्यादा ही थक गई हु।
मैं: ठीक है मां जाओ आराम करो।
अब मां अपने रूम में चली जाती है और अपने रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर देती है। जब मां दरवाजा बंद कर रही थी तो मुझे उस दरवाजे की कुंडी का आवाज आता है जो बंद हो रहा था।
मैं( मन में): लगता है की मां जो कपड़े ले के आई है उसे वह पहन के देखना चाहती हैं।
फिर मैं अपने रूम में जाता हु और उस पाउडर को अपनी जेब में डालकर घर के पीछे चला जाता हु जहा मां की कच्छी थी और जहा मां नहाती थी और मां के रूम की खिड़की भी उसी पीछे वाले हिस्से में थी। तो मैं उस खिड़की से देखने की कोशिश करता हु तो देखता हु की मां तो सो रही है।
उसके बाद मैं अपने रूम में आ जाता हु फिर एकदम से याद आता है की मेरी जेब में तो पाउडर है उस पाउडर को तो कच्छी में लगाना है। मैं फिर से घर के पीछे जा के उस कच्छी में यह पाउडर लगाता हु।
मैं: यह पाउडर तो बहुत बढ़िया है इस कच्छी में लगाया है तो पता ही नहीं चल रहा की पाउडर लगा है।
पाउडर लगाकर अपने रूम में आ जाता हु और अपना मोबाइल चलने लगता हु
अब शाम के टाइम:-
मां सो के उठ जाती है और खाना बनाने की तैयारी करने लगती है और मैं मस्त मोबाइल में लगा हुआ था और वह सब वीडियो देख रहा था जो उस वेबसाईट पर थी। तभी बबीता आंटी का कॉल आता है मां के फोन पर।
फोन कॉल:-
मां: हा बोल बबीता।
बबीता: तुने बोला था की घर जाकर कॉल करूंगी और अब तो शाम हो गई है।
मां: अरे मैं तो भूल ही गई थी की तुझे कॉल भी करना है मैं तो आकर अपने रूम में सो गई थी एकदम से।
बबीता: तो बता क्या करना है।
मां (मजे लेते हुए): क्या बात है बबीता बड़ी उतावली हो रही है।
बबीता: जब से तुने मुझे बताया है तब से मैं सोच ही रही थी क्या मैं यह करूं या ना करूं अब मैंने फैसला ले लिया है।
मां: तो क्या है तेरा फैसला मुझे तो बता।
बबीता: एक ही शर्त पर में बताऊंगी तु भी अपने बेटे के साथ करेगी बोल हां या ना।
मां: मैंने तो तेरे को उस टाइम भी बताया था मैं तो कर लूंगी तु अपना बता।
मैं यह सब बातों से अनजान था की मां और बबीता आंटी क्या बातें कर रही है अभी मैं तो अपने रूम में मोबाइल चला रहा था।
बबीता: ठीक है मैं तैयार हु करने के लिए।
मां: और मैं भी।
बबीता: शुरुआत कैसे करें मुझे समझ नहीं आ रहा।
मां: सब मैं ही बता दूंगी तो तु क्या करेगी थोड़ा अपने मन से सोच के कर।
बबीता: क्या संगीता तु भी बताना मुझे कैसे करूं मैं।
मां: रुक खाना बन ही गया है मेरा मैं अभी थोड़ी देर में घर से निकल रही हु तो तु मुझे मेरे खेत पर मिल।
बबीता: ठीक है मेरा खाना भी बन ही गया है।
और फोन कट हो जाता है और मां मुझे बुलाती है।
मां: रोहित रोहित।
मैं: हा मां आया।
फिर मैं मां के पास आता हु।
मां: बेटा अभी मैं खेत पर जा रही हु सब्जी तोड़ने।
मैं: ठीक है मां।
तभी मां की नजर मेरे पेंट में बने तम्बू पर पड़ती हैं जो इस वक़्त पेंट में खड़ा था और जब मां ने बुलाया तो मैने अपने लन्ड को सही नहीं किया था जन बुझ कर क्योंकि मैंने जो बातें सुनी थी मां और बबीता आंटी के मुंह से इस वजह से मैंने सही करना जरूरी नहीं समझा। मैं भी देखता हु की मां मेरे पेंट में बने तम्बू को देख रही है।
मां: ठीक है तो मैं जा रही हु मुझे जरा टोकरी दे दे उसमें सब्जी लेकर आना है ना।
मैं: अभी लेके आया मां।
फिर मैं टोकरी लेकर आता हु और मां को दे देता हु और मां घर से निकल जाती है और रास्ते में चलते-चलते सोच रही थी।
मां(मन में): आज मैं पहली बार अपने बेटे का लन्ड के साइज को देखा है उसके पेट के अंदर मगर उसका लन्ड खड़ा क्यों था क्या यह यह सब वीडियो देखता है । हां देखता ही होगा ऐसे कैसे खड़ा हो सकता है वह जरूर अपने रूम में वह सब वीडियो देख रहा होगा।
तभी मां को बबीता आंटी आते हुए दिखती है।
बबिता: चल अब चलते हैं।
मां: हा चल।
फिर दोनों खेत पर पहुंच जाती है और हमारे खेत में एक झोपड़ी भी थी और मां इधर-उधर देखने लगती है की कोई सही सी जगह देखें वहां बैठकर बातें करें।
मां: यहां बैठ जाते है।
बबीता: ह्म्म।
मां: मुझे भी नहीं पता की कैसे शुरुआत करूं बबीता।
बबिता: यही बताने के लिए तुने मुझे यहां बुलाया है।
मां: नहीं रे।
बबीता: तो बता फिर।
मां: मैं क्या सोच रही हु एक काम करते हैं जो हमने कपड़े लिए हैं ना उसे अपने घर पर ट्राई करते हैं।
बबीता: क्या कह रही है मुझे कुछ समझ नहीं आया।
मां: मैं कह ना चाहती हु की हम दोनों अपने रूम के दरवाजे को खोल के कपड़े बदलेंगे और अपने बेटों से कहेंगे की हमारे रूम में मत आना।
बबीता: यह कहने से क्या होगा।
मां: तु कितना सवाल जवाब करती है सुन अब जब हम उन्हें माना करेंगे तो वह जरूर आएंगे देखने के लिए की मां ने क्यों बोला कि मेरे रूम में मत आना।
बबीता: अच्छा यह बात है।
मां: हा अभी तो मेरे दिमाग में बस यही आ रहा है फिर आगे देखते हैं क्या करते हैं।
बबिता: ठीक हैं।
मां: चल फिर थोड़ा सब्जियां तोड़ लेते हैं फिर चलते हैं घर।
बबीता: ह्म्म।
इधर मैं अपने रूम में फिर से पॉर्न वीडियो देखने लगा था और जिस वीडियो को देखकर मैंने पाउडर मंगवाया था उसी का नई वीडियो आई थी और वीडियो का नाम था " मां के सजने का सामान" फिर मै यह वीडियो प्ले कर के देखने लगता हु। और वीडियो में देखता हु की वह लड़का अपनी मां को नई स्टाइल की पैन्टी देता हैं और अपनी मां को वह नाई पैन्टी पहना के नचवाता है और नई स्टाइल की ब्रा भी पहनाता है और भी कुछ करता है फिर मैं वह सब चीजें ऑर्डर कर लेता हु।
मैं(मन में): अभी तक तो मैंने वह पाउडर को भी नहीं ट्राई करा है और यह सब और आर्डर कर रहा हु। अभी तक वह मां की कच्छी वही रस्सी पर ही है।
मैं: मां एक बार उस कच्छी को पहन लो ना ताकि तुम्हारा बेटा भी तो देख सके उस पाउडर का कमाल।
इधर खेत में मां सब्जियां तोड़ लेती है और घर के लिए निकल जाते हैं।
मां: चल बबीता अपने बेटो को अपने हुसैन के जलवे दिखते हैं।
बबीता ( हस्ते हुए): हा चल।
मां: उस किताब को पढ़ के थोड़ा आईडिया लेते रहना ।
बबीता: हा ठीक।
दोनों बातें करते करते अपने घर आजाती है ।
मां: बेटा मैं अभी नहाने जा रही हु।
मैं: इस टाइम नहाने जा रही हो।
मां: हा बेटा आज गर्मी बहुत है बिना नहाए काम नहीं चले गा।
मैं: हा गर्मी तो है मां।
मां: यह सब्जी रख दे उधर मैं चली नहाने।
फिर मां घर के पीछे नहाने के लिए चली जाती है और मैं भी मां को जाता देख उस रूम में चला जाता हु जहां से घर के पीछे का हिस्सा सही से दिख रहा था। तभी मां को देखता हु की वह कुछ ढूंढ रही थी और बोल भी रही थी।
मां: कहा रखा था मैने यहां भी नहीं है।
फिर मां दीवार के छेद में दिखती हैं और वहा से एक चीज उठाती है मगर मुझे सही से दिख नहीं रहा था की मां ने दीवार के छेद से क्या निकला है।
मां: हा यहाँ राखी थी मैने और मैं कब से इधर उधर देख रही हु।
फिर मां अब नल के पास आती है और नल चला के अपनी बाल्टी भरने लगती है। जो चीज मां को मिलेगी वह नीचे रखती है तब मेरी नजर उसे पर पड़ती है।
मैं(मन में): ये तो दाढ़ी बनाने वाला इरेज़र है क्या मां अपनी बुर के बल साफ करेगी।
अब मां की बाल्टी को भर लेती है और इधर-उधर देखने लगती है।
मां( मन में): कहां है बेटा तु मुझे पता है तु जरूर आया होगा मुझे देखने के लिए।
तभी मैं मां को दिख जाता हु खिड़की के पीछे मगर मां मुझे पता नहीं लगने देना चाह रहे थी कि उन्होंने देख लिया।
मां (मन में): इसका मतलब है की यह मुझे हमेशा देखता होगा नहाते हुए और देखो छुपा कैसे है की किसी की नजर भी ना पड़े ऐसी जगह छुपा है। मैं तो इसे शरीफ समझती थी यह भी बबीता के बेटे जैसा निकला।
Next part main image aur gif laga dunga iss update main utni jarurat nahi thi to lagaya nahi.
बहुत शानदार विश्लेषण किया है आपने कहानी का मित्रसच में, आपने बहुत बढ़िया तरीके से buildup किया है। शुरू से लेकर अंत तक tension, curiosity, guilt, lust सब एक साथ घुला-मिला हुआ था। जैसे कोई गर्मागर्म चाय पीते हुए धीरे-धीरे चुस्कियाँ ले रहा हो।
माँ और बबीता की फोन वाली बातचीत ये तो बिल्कुल आग था। जब माँ ने कहा “मेरा बेटा मेरे बारे में सोचे तो मैं उसके प्यार में पड़ जाऊंगी”... उफ्फ! मेरे शरीर में झनझनाहट दौड़ गई। वो hesitation, वो “अगर मेरा बेटा...” वाला pause, और फिर straight bomb फोड़ना, ये बहुत realistic और erotic लगा।
'चुदाई' शब्द जब माँ के मुँह से ये शब्द निकला, तो तन बदन में जैसे आग लग गई हो, वही feeling आई। माँ जैसी औरत का मुँह जब इस शब्द का इस्तेमाल करे, तो नॉर्मल माँ अचानक slutty और desirable लगने लगती है।
माँ का अपना confession की 2 साल से तड़प रही है, गाजर-मूली-खीरा वाला वाला हिस्सा... बहुत कच्चा, बहुत personal और बहुत exciting था। ये दिखाता है कि माँ भी इंसान है, वो भी भूखी है, और अब बेटे को target कर रही है।
खेत वाली प्लानिंग, नया कपड़ा ट्राई करने का बहाना, दरवाजा खुला रखना, “मत आना” बोलना... ये सब इतना calculated और naughty है कि पाठक का दिल भी धड़कने लगता है। anticipation कमाल की है।
सबसे ख़ास नहाने वाला सीन जब माँ जानबूझकर इरेज़र निकालती है, बाल्टी भरती है और मन में सोचती है “मुझे पता है तू देखने आया होगा”... ये जगह तो बिल्कुल चरम थी। माँ अब actively tease कर रही है, बिना directly कुछ कहे।
कहानी में realism अच्छा है, गाँव का माहौल, खेत, झोपड़ी, चारपाई, गर्मी, सब कुछ जीवंत लग रहा है। Dialogue भी natural हैं, खासकर दो औरतों के बीच की निजी जीवन की बातचीत!
एक छोटी सी सलाह अब next part में थोड़ा physical closeness बढ़ाइए लेकिन धीरे-धीरे, माँ का बेटे को touch करना, “गर्मी है ना बेटा” बोलते हुए पसीना पोंछना, या नहाते वक्त towel गिराना। पाउडर वाली चीज़ को भी use करें जब माँ वो कच्छी पहने और अचानक गीली हो जाए, तो reaction कमाल का आएगा।
भाई, पूरी कहानी पढ़ते हुए मैं भी उसी बेटे की जगह खुद को feel कर रहा था। लंड हाथ में थामे, साँसें भारी, आँखें स्क्रीन पर टिकी हुई।
मैं इंतज़ार कर रहा हूँ अगले भाग का, खासकर जब माँ नहाकर वापस आएगी और बेटे को देखेगी।![]()