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भैया बने सैंया

Deshi lund 9

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हाय पापा तू बड़ा ज़ालिम मरद हो भाग २

बेटी होखेला धन पराया, अइसन कहेला लोक हो,
रोज़ राति तू धनवा लूटेले, बुरवा में लांड भोंक हो,
जउन बेटी के, लोक करेले शौक से कन्यादान हो,
चोदत बा बनाके आपन रंडी, ना बा तू नादान हो,

बड़ा होशियार बाटे, तू चालू मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,
हाय पापा तू बड़ा ज़ालिम मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,

रहे ना देला देहिया पर, कउनो कपड़ा के टुकड़वा,
सुलगावेला देहिया के अगन, जइसे प्रेशर कुकरवा,
पापा बेदर्दी मुँहवा में घुसाके चुसवात बारे सुपड़वा,
पियावे लांड के खाड़ा पानी, हम करिले ना नुकूरवा,

मुँहवा चोदे मनभर, तू जोशीला मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,
हाय पापा तू बड़ा ज़ालिम मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,

लांड टनटना जाले जब हमार मुंह के गरमी से,
कंठ तक लांड घुसाबे, काम ना लेले नरमी से,
छोड़ेले ना पापा जब तक उखड़े ना मोर सांस हो,
हमभी छिनार बानि, छोड़ेनी ना अइसन चांस हो,

बेटी के मुंह चोदेवाला, तू फरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,
हाय पापा तू बड़ा ज़ालिम मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,

गोदिया में सर राखि, रउवा चुसतानि अईसे चुच्ची,
जइसे चूचक चबाई के तू बनैबु उके दतमन के कुच्ची,
दबोच के आपन पंजा में मीजेले दुधवा बेदर्दी बाप हो,
बूर से चुवेला खूब पनिया, हिलावत बानि जब उ साँप हो,

पियेले बेटिया के दूध, बाबू मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,
हाय पापा तू बड़ा ज़ालिम मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,

देखके हमार हालत पापा के आवेला बड़ा मजा,
ओके शरारत भरा नज़र से, हम जा तानि लजा,
चढ़ जाले फेन हम पे, लेके आपन बरियारी लांड,
बूरवा के चूमके चाटेले, राखिके तकिया पर डाँड़,

तनिको शरमावेले ना, बेशरम मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,
हाय पापा तू बड़ा ज़ालिम मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,

जिभवा घुसाके चाभेले, खोलके बूर के फाक हो,
कारी झांट हटाके, बूर के बीच में रगड़े तू नाक हो,
घुसाके बूर में ओंगरि, तड़पावेले हमके लांड खातिर,
भीख मंगवावे हमसे लांड के, हवे पापा बड़ा शातिर,

बेशरम बनावे हमके, माहिर मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,
हाय पापा तू बड़ा ज़ालिम मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,

चुचिया दबाईके, लांड माँगेनि हम होके बेचैन हो,
देखके हमके अईसे पापा के मिलेला बड़ा चैन हो,
घुसावेले मोटा लांड, जकड़के मोर पातर डाँड़ हो,
सिसकारी फूटेले मुंह से, शुरू करिले चुदाई कांड हो,

बेटी के बूर लेलस, कइसन मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,
हाय पापा तू बड़ा ज़ालिम मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,

पापा लांड से चोदे कुंवारी बेटीया के बूर हो,
फइलाक़े बूर के खोल देले, बा नशा में चूर हो,
बूर चियार के चोदबात बानि, पूरा मस्ती में,
कहीं फार ना दे बेटी के बूर, चढ़ा के कश्ती में,

गाचागच पेलेले बड़ा बेरहम मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,
हाय पापा तू बड़ा ज़ालिम मरद हो,
बेटिया चोदेले तू देके बड़ा दरद हो,
Not bad but next ki wait hai
 

Sister_Lover

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क्या गजब के कवि हो गुरू..... मजा आ गईल..... गजब प्रेम कहानी कविता रूप में लिखल बाड़ा भाई बहन के..... एकदम हमार सच्ची फैंटेसी ❤️❤️
 

rohnny4545

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क्या गजब के कवि हो गुरू..... मजा आ गईल..... गजब प्रेम कहानी कविता रूप में लिखल बाड़ा भाई बहन के..... एकदम हमार सच्ची फैंटेसी ❤️❤️

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romeo35309

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स्तन तो माँ के अधेड़ उम्र में हो गए है पक्की मौसमी से

सर उठाये झांकते रहते है छाती को ढकी हुई चुननी से

मम्मी तो पवित्र गंगा जल सी, और मेरी निगाहे गन्दी-गन्दी
खूब कामना होती के देखूँ , अपनी ही मम्मी को नंगी
अपनी ही मम्मी को नंगी

नहाकर थोड़ी कमर झुकाकर, मम्मी करती गीले केशो में कंघी
मुख से उच्चारण हो जाता है -- आह -- रंडी ! आह--- रंडी !

गोल - सुडौल नितम्भों की मल्लिका , मांसल टांगे लम्बी-लम्बी
खूब कामना होती के देखूँ , अपनी ही मम्मी को नंगी
अपनी ही मम्मी को नंगी


करवा चौथ पर जब पिता के मम्मी झुक के पाऊँ छूती रहती है
नहीं जानती नज़र बेटे की , उसकी झुकी गांड पर रहती है।

गहरी नाभि मेरी मम्मी की, कुदरत ने चुत गुलाबी रंग से रंगी
खूब कामना होती के देखूँ , अपनी ही मम्मी को नंगी
अपनी ही मम्मी को नंगी

कैद कर लूँ मम्मी के जिस्म को, अपनी नज़र के तालों में
फस के रह जाना चाहता हूँ, मम्मी की गोरी झांघो के बालों में।

लंड निकालूँ और फैहरा दूँ मम्मी के गोर गालों पे
जी करता है हाथ घुमा दूँ कमर की संकरी ढालों पे।

लंड तो मेरा हर दम नाचे, मम्मी की थिरकती चालों पे
दो-चार तमाचे जोर से जड़ दूँ मम्मी के चूतड़ लालों पे

मम्मी बिस्तर में हो काश ! किसी दिन, आहें ठंडी-ठंडी भरता हूँ
साड़ी पहनी मम्मी को आंखों से नंगी करता हूँ।

कामुक हो लंड निकाले, ध्यान मम्मी का धर्ता हूँ
स्मरण मम्मी का करता हूँ जब गर्ल फ्रंड पर चढ़ता हूँ

ऊपर ऊपर से मम्मी की इज़्ज़त करता बन गया हूँ केसा पाखंडी
खूब कामना होती के देखूँ , अपनी ही मम्मी को नंगी
अपनी ही मम्मी को नंगी


DISCLAMIER : COPY PASTED FROM INTERNET
 

Deshi lund 9

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स्तन तो माँ के अधेड़ उम्र में हो गए है पक्की मौसमी से

सर उठाये झांकते रहते है छाती को ढकी हुई चुननी से

मम्मी तो पवित्र गंगा जल सी, और मेरी निगाहे गन्दी-गन्दी
खूब कामना होती के देखूँ , अपनी ही मम्मी को नंगी
अपनी ही मम्मी को नंगी

नहाकर थोड़ी कमर झुकाकर, मम्मी करती गीले केशो में कंघी
मुख से उच्चारण हो जाता है -- आह -- रंडी ! आह--- रंडी !

गोल - सुडौल नितम्भों की मल्लिका , मांसल टांगे लम्बी-लम्बी
खूब कामना होती के देखूँ , अपनी ही मम्मी को नंगी
अपनी ही मम्मी को नंगी


करवा चौथ पर जब पिता के मम्मी झुक के पाऊँ छूती रहती है
नहीं जानती नज़र बेटे की , उसकी झुकी गांड पर रहती है।

गहरी नाभि मेरी मम्मी की, कुदरत ने चुत गुलाबी रंग से रंगी
खूब कामना होती के देखूँ , अपनी ही मम्मी को नंगी
अपनी ही मम्मी को नंगी

कैद कर लूँ मम्मी के जिस्म को, अपनी नज़र के तालों में
फस के रह जाना चाहता हूँ, मम्मी की गोरी झांघो के बालों में।

लंड निकालूँ और फैहरा दूँ मम्मी के गोर गालों पे
जी करता है हाथ घुमा दूँ कमर की संकरी ढालों पे।

लंड तो मेरा हर दम नाचे, मम्मी की थिरकती चालों पे
दो-चार तमाचे जोर से जड़ दूँ मम्मी के चूतड़ लालों पे

मम्मी बिस्तर में हो काश ! किसी दिन, आहें ठंडी-ठंडी भरता हूँ
साड़ी पहनी मम्मी को आंखों से नंगी करता हूँ।

कामुक हो लंड निकाले, ध्यान मम्मी का धर्ता हूँ
स्मरण मम्मी का करता हूँ जब गर्ल फ्रंड पर चढ़ता हूँ

ऊपर ऊपर से मम्मी की इज़्ज़त करता बन गया हूँ केसा पाखंडी
खूब कामना होती के देखूँ , अपनी ही मम्मी को नंगी
अपनी ही मम्मी को नंगी


DISCLAMIER : COPY PASTED FROM INTERNET
Bhojpuri mai maza aata hai
 

vyabhichari

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पापा सूज गईल बा कोमल बूर हो,
चोदत बारआ होके नशा में चूर हो,
सारा सारा रतिया, चढ़ेले सुरूर हो,
चूस लेतारु होठवा, हवे का गूड़ हो,

सहेलियन पूछेली कइसे बढ़ गईल चुचिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

हिलत बा दुनु चुचिया जब चलेली झटकके,
अइसे देखलन रउवा, जइसे चोदी पटकके,
हिलत बा गाँड़वा, जब चलेनी हम छमकके,
सूंघे पसिनवा, आह भरेले देहिया गमकके,

बस चली तहार त चबा लेबु हमार कछिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

मउका ताकत बारे, कब जाई बाहर माई,
उतरवा देवेला फ्रॉक, जब तलिक ना उ आई,
सूंघे बूर के, चाटे पनिया करे मन भर चुसाई,
छोड़ेला ना तू, हम चाहे केतना भी किकयाई,

गुलाबी बूर के चूसे, फइलाके दुनु फांकिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

कइके कुल लंगटे, हमके मन भर निहारे,
लजावेले ना तनियो, करे सब दिन दहारे,
बइठाके गोदिया में, भींचे चुच्ची औ गाँड़के,
हमके उठावेला मजबूत बांहिया के सहारे,

लौड़ा के रगड़ से मचल जावेला हमार मुनिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

बहकके हमहुँ करेनी ईहे घोर पाप हो,
तनिको ना सकुचात बारे हमार बाप हो,
रखेलु बिछाउना पर हमके नीचे चाप हो,
मीजके पापा बढ़ा देलु हमार ब्रा के नाप हो,

माई से ना भरेला मन, चखेलु हमार जवनिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

घुसा देवेला लौड़ा, कोमल बूर में निकल जाता आह,
पनियाईल बूर में जब सटासट घुसे मुंह से निकले वाह,
चुदबाबे के मस्ती में, बाप बेटी के रिश्ता के रहे ना थाह,
असही चोदे पापा हर दिन इहे बा हमार मन के चाह,

बिन बियाहल ही मन गईल सुहाग रतिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया,

पहिले बचपन में तू देत रहलु हमके लेमनचूस,
अब तू चुसवा के लौड़ा पिलावेला ओकर जूस,
छोड़आ ना हमके अब चाहे रहे माघ चाहे पूस,
जब भी मिली मउका लेब तहार लांड के चूस,

समहरेला ना जवानी अब लअ एकरा हथिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया,

उफ़ तहरा से चुदा के अब रहल ना जाला,
ई चुदक्कड़ रण्डी से पड़ गईल राउर पाला,
लांड घुसाके तू खोल देहलु शरम के ताला,
बहेला बुर से पनिया जइसे बहे कउनु नाला,

लांड खातिर अब मचलत बानि दिन रतिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

रह जाइब तहार रखैल बनके इहे घर में,
ना बनके जाइब दुल्हिन, दोसर के घर में,
माई बेटी बन जाइ सौतन, रहब दुनु घर में,
चोदिह कभू माई कभू हमके अपना तर में,

मज़ा आ जाइ तहरा जब मिली दु औरतिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

गंदा पापा तू सुनत बारू हमार मूत के मधुर धार,
देख गिरत पेशाब बूर से तहार मुंह आवेला लार,
पिलेलु मूत बिटिया के, जब गिरे उ बुरिया के पार,
मस्ती छा जाला तहराके जइसे पिये दारू के धार,

छोड़ि अइसन मउका होई उ बड़ा चुतिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया।

लिहि मज़ा जवनिया के रउवा जमके,
साथ देब पूरा तहार ना कबहु कमके,
जइसे खिलावेला कली के कउनु भँवड़ा,
वइसे फुल गईल बूर लेके तहार लउड़ा,

बियाहवा से पहिने हमार उतर गईल नथिया,
कइसे बताई पापा के बेटी ना रहिल बुचिया,
 
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