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Fantasy ब्रह्माराक्षस

Shekhu69

Member
299
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अध्याय उनचास

हर तरफ हर कोई आने वाले महासंग्राम की तैयारियों में लगा हुआ था जहाँ कालविजय आश्रम में इस वक़्त 10,000 से भी ज्यादा सेना इकट्ठा हो गयी थी

जिसमे 18 -19 साल के नौजवान से लेकर 80-90 साल वृद्ध साधु सभी मौजूद थे

ये सभी वो सिपाही थे जिनके पास मायावी विद्याएँ मौजूद थी और हर कोई किसी न किसी तत्व की शक्ति को धारण करता था


तो वही 3,000 ऐसे भी सिपाही थे जिनके पास मायावी शक्तियां तो थी लेकिन वो किसी तत्व की शक्ति को धारण नही कर सकते थे

तो वही 2,000 ऐसे भी सिपाही थे जो की आम मानव थे जिन्हे गुरुओं ने उनके द्वारा निर्मित मायावी अस्त्र दिये थे

जैसे कि मायावी धनुष जिसके हर बान मे एक खास गुप्त कला थी जिसके बारे में केवल महागुरु जानते थे


जिसके साथ कुछ योध्दाओं को मायावी भाले दिये गये थे जो अपने सामने खड़े शत्रु का गला भेद कर अपने धारक के पास लौटकर आ जाते तो

आखिर मे मायावी तलवारे जिनके धार मे एक महाविषैला द्रव्य लगाया गया था जिसके एक बूंद भी अगर समुद्र मे मिलादे तो समुद्र के जल को पिनेवाला har एक शक्स उसी पल तड़प तड़प कर मर जाए

अभी कालविजय आश्रम में सिपाहियों को उनके कला के अनुसार 7 भागों में बाँटा हुआ था सबसे पहले 5 भाग उन्हे अलग अलग तत्वों के अनुसार बाँटा गया था जिनमे अग्नि वायु जल आकाश और पृथ्वी ये पाँच तत्व संमलित थे

जिनके नेतृत्व की जिम्मेदारी गुरु अग्नि वानर और जल को सोंपी गयी थी इनका मकसद यही था कि जैसे ही कोई भी असुर युद्ध क्षेत्र के करीब आये तो ये सभी मिलकर उन्हे मैदान आने से पूर्व ही मृत्यु से भेट करादे


तो छाट्ठे भाग में वो मायावी जादूगर थे तत्व से जुड़े हुए नही थे इनका काम था कि अगर कोई असुर किसी तरह बच कर युद्ध के मैदान में पहुँच जाए तो उसकी चिता उसी मैदान में बनाई जाए और इनका नेतृत्व कर रहे थे स्वयं महागुरु गुरु नंदी और गुरु सिंह

सबसे आखरी भाग में 2 हिस्सों में विभागा गया था जिसके भाग 1 मे थे मायावी धनुष और भालों को धारण करने वाले योध्दा इनका कार्य था कि जैसे ही युद्ध आरंभ हो तो ये दूर से ही सभी दुश्मनों पर तिर और भालों की वर्षा कर दे

और इनका नेतृत्व की जिम्मेदारी हमारी महिला शक्ति को दी गयी थी याने प्रिया और शांति

और अगर इनसे कोई बच कर युद्ध मैदान के पास पहुँच पाता तो उसका स्वागत पहले पांच भाग याने तत्व शक्ति से होती

तो वही सबसे छोटी टुकड़ी मतलब मायावी तलवार की तो उन्हे पूरे शहर भर मे निवास कर रहे सभी योद्धाओं के परिवार के रक्षा के लिए


(भद्रा अभी तक बेहोश है इसीलिए इस सारे रणनीति मे उसका नाम नही था)

अच्छाई का पक्ष मे कुल 15,000 सिपाही थे

भाग 1 से 5 मै 10,000 तत्व धारक

2,000 अग्नि तत्व

2,000 वायु तत्व

2,000 जल तत्व

2,000 आकाश तत्व

2,000 पृथ्वी तत्व

भाग 6 मायावी जादूगर 3,000 सिपाही

भाग 7 आम मानव 2,000 सिपाही

750 मायावी धनुष के धारक

750 मायावी भालों के धारक

500 मायावी तलवार के धारक

तो वही असुर पक्ष में मायासुर के साथ पूरे 1,00,000 असुरी सेना उसके साथ 25,000 प्रेत, भूत, पिशाच, नरभेड़िये, तांत्रिकों की सेना थी

जिनके योजना मुताबिक सबसे आगे तंत्रिकों की सेना होगी जिनका कार्य होगा अच्छाई के पक्ष का ध्यान भटकाना और उनके बिछाये जालों का पता लगाना

और बाकी तीनों भाग याने प्रेत, भूत, पिशाच इनका कार्य था की वो सभी जालों को नष्ट करके जितनी ज्यादा हो सके उतनी तबाही मचाये


तो नरभेड़ियों को मायासुर ने पूरे भारत वर्ष मे तबाही मचाने का आदेश दिया था जिससे सभी गुरुओं का ध्यान युद्ध मैदान से बँट जाए

तो वही सारे असुर सैनिक जिनकी संख्या 1,00,000 की थी उनका केवल एक ही लक्ष्य था और वो है तबाही मचाना और अच्छाई पक्ष के सभी योध्दाओं को मार गिराना इनका नेतृत्व करने की जिम्मेदारी मायासुर ने कामिनी और मोहिनी को दी थी

और यही सब योजना बनाने में 7 दिनों का समय निकल चुका था

जहाँ दोनों ही पक्षों मे युद्ध की इतनी जोरों से तैयारी चालू थी तो वही दूसरी तरफ कालविजय आश्रम में भद्रा अभी तक बेहोश पड़ा हुआ था जिससे सारे गुरु और प्रिया का चिंता के कारण बुरा हाल हो चुका था

Pतो वही दूसरी तरफ एक अंधेरी जगह मे कोई लड़का था जो लगातार चले जा रहा था जिसके चेहरे के भाव से ये प्रतीत हो रहा था कि वो इस अंधेरी जगह से बिल्कुल अंजान है

और अभी वो चले जा रहा था कि तभी वहा पर एक तेज रोशनी फैल गयी जिससे उस लड़के का चेहरा अब दिखने लगा था और वो लड़का कोई और नही बल्कि अपना भद्रा ही था और जैसे ही वहा का प्रकाश हटा तो वैसे ही भद्रा के सामने कुमार आके खड़ा हो गया

भद्रा:- कुमार हम कहाँ है और क्या तुम गुरुओं को आज़ाद करने मे सफल हुए और और

अभी भद्रा कुछ और बोलता की तभी कुमार ने उसके होंठो पर उंगली रख दी जिससे भद्रा शांत हो गया

कुमार :- ये जगह हमारा दिमाग है और तुम्हे यहाँ मे ही लेकर आया हूँ और हाँ सारे गुरु और अस्त्र अभी फिलहाल के लिए सुरक्षित है

भद्रा :- क्या मतलब फिलहाल के लिए

कुमार :- भद्रा दुनिया में अति विनाशकारी युद्ध का आगाज़ हो चुका है जो अच्छाई और बुराई के बीच होने वाली है जिसमे अच्छाई का पक्ष कमजोर है

भद्रा :- तो तुम मुझे यहाँ क्यों लेकर आये हो हमे वापस चल कर युद्ध मे हिस्सा लेना चाहिए

कुमार :- नही अभी तुम कमजोर हो और तुम्हारे हिस्सा लेने से भी कुछ बदलेगा नही अगर तुम्हे युद्ध का परिणाम बदलना है तो सबसे पहले तुम्हे अपनी पूरी शक्ति जाग्रुत करनी होगी और उसके बाद खुदको जानना होगा जब तक तुम खुदको पहचानोगे नही तब तक कुछ नहीं बदलेगा

भद्रा :- तो बताओ क्या करना है मुझे मे कैसे पहचान पाऊंगा खुदको

कुमार :- सबसे पहले खुदको शांत करो और फिर ध्यान मै बैठकर तुम्हारे ऊर्जा स्त्रोत को ढूँढो जैसे तुमने पहले किया था लेकिन इसबार किसी एक शक्ति को नही पूरे ऊर्जा स्त्रोत को अपने काबू करना है जिसके बाद में तुम्हे तुम्हारी असलियत से अवगत कराऊंगा

उसके बाद भद्रा ने वैसा ही किया जैसा कुमार उसे बता रहा था

~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आज के लिए इतना ही

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Very nice Lajawab update
 

park

Well-Known Member
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11,019
173
अध्याय उनचास

हर तरफ हर कोई आने वाले महासंग्राम की तैयारियों में लगा हुआ था जहाँ कालविजय आश्रम में इस वक़्त 10,000 से भी ज्यादा सेना इकट्ठा हो गयी थी

जिसमे 18 -19 साल के नौजवान से लेकर 80-90 साल वृद्ध साधु सभी मौजूद थे

ये सभी वो सिपाही थे जिनके पास मायावी विद्याएँ मौजूद थी और हर कोई किसी न किसी तत्व की शक्ति को धारण करता था


तो वही 3,000 ऐसे भी सिपाही थे जिनके पास मायावी शक्तियां तो थी लेकिन वो किसी तत्व की शक्ति को धारण नही कर सकते थे

तो वही 2,000 ऐसे भी सिपाही थे जो की आम मानव थे जिन्हे गुरुओं ने उनके द्वारा निर्मित मायावी अस्त्र दिये थे

जैसे कि मायावी धनुष जिसके हर बान मे एक खास गुप्त कला थी जिसके बारे में केवल महागुरु जानते थे


जिसके साथ कुछ योध्दाओं को मायावी भाले दिये गये थे जो अपने सामने खड़े शत्रु का गला भेद कर अपने धारक के पास लौटकर आ जाते तो

आखिर मे मायावी तलवारे जिनके धार मे एक महाविषैला द्रव्य लगाया गया था जिसके एक बूंद भी अगर समुद्र मे मिलादे तो समुद्र के जल को पिनेवाला har एक शक्स उसी पल तड़प तड़प कर मर जाए

अभी कालविजय आश्रम में सिपाहियों को उनके कला के अनुसार 7 भागों में बाँटा हुआ था सबसे पहले 5 भाग उन्हे अलग अलग तत्वों के अनुसार बाँटा गया था जिनमे अग्नि वायु जल आकाश और पृथ्वी ये पाँच तत्व संमलित थे

जिनके नेतृत्व की जिम्मेदारी गुरु अग्नि वानर और जल को सोंपी गयी थी इनका मकसद यही था कि जैसे ही कोई भी असुर युद्ध क्षेत्र के करीब आये तो ये सभी मिलकर उन्हे मैदान आने से पूर्व ही मृत्यु से भेट करादे


तो छाट्ठे भाग में वो मायावी जादूगर थे तत्व से जुड़े हुए नही थे इनका काम था कि अगर कोई असुर किसी तरह बच कर युद्ध के मैदान में पहुँच जाए तो उसकी चिता उसी मैदान में बनाई जाए और इनका नेतृत्व कर रहे थे स्वयं महागुरु गुरु नंदी और गुरु सिंह

सबसे आखरी भाग में 2 हिस्सों में विभागा गया था जिसके भाग 1 मे थे मायावी धनुष और भालों को धारण करने वाले योध्दा इनका कार्य था कि जैसे ही युद्ध आरंभ हो तो ये दूर से ही सभी दुश्मनों पर तिर और भालों की वर्षा कर दे

और इनका नेतृत्व की जिम्मेदारी हमारी महिला शक्ति को दी गयी थी याने प्रिया और शांति

और अगर इनसे कोई बच कर युद्ध मैदान के पास पहुँच पाता तो उसका स्वागत पहले पांच भाग याने तत्व शक्ति से होती

तो वही सबसे छोटी टुकड़ी मतलब मायावी तलवार की तो उन्हे पूरे शहर भर मे निवास कर रहे सभी योद्धाओं के परिवार के रक्षा के लिए


(भद्रा अभी तक बेहोश है इसीलिए इस सारे रणनीति मे उसका नाम नही था)

अच्छाई का पक्ष मे कुल 15,000 सिपाही थे

भाग 1 से 5 मै 10,000 तत्व धारक

2,000 अग्नि तत्व

2,000 वायु तत्व

2,000 जल तत्व

2,000 आकाश तत्व

2,000 पृथ्वी तत्व

भाग 6 मायावी जादूगर 3,000 सिपाही

भाग 7 आम मानव 2,000 सिपाही

750 मायावी धनुष के धारक

750 मायावी भालों के धारक

500 मायावी तलवार के धारक

तो वही असुर पक्ष में मायासुर के साथ पूरे 1,00,000 असुरी सेना उसके साथ 25,000 प्रेत, भूत, पिशाच, नरभेड़िये, तांत्रिकों की सेना थी

जिनके योजना मुताबिक सबसे आगे तंत्रिकों की सेना होगी जिनका कार्य होगा अच्छाई के पक्ष का ध्यान भटकाना और उनके बिछाये जालों का पता लगाना

और बाकी तीनों भाग याने प्रेत, भूत, पिशाच इनका कार्य था की वो सभी जालों को नष्ट करके जितनी ज्यादा हो सके उतनी तबाही मचाये


तो नरभेड़ियों को मायासुर ने पूरे भारत वर्ष मे तबाही मचाने का आदेश दिया था जिससे सभी गुरुओं का ध्यान युद्ध मैदान से बँट जाए

तो वही सारे असुर सैनिक जिनकी संख्या 1,00,000 की थी उनका केवल एक ही लक्ष्य था और वो है तबाही मचाना और अच्छाई पक्ष के सभी योध्दाओं को मार गिराना इनका नेतृत्व करने की जिम्मेदारी मायासुर ने कामिनी और मोहिनी को दी थी

और यही सब योजना बनाने में 7 दिनों का समय निकल चुका था

जहाँ दोनों ही पक्षों मे युद्ध की इतनी जोरों से तैयारी चालू थी तो वही दूसरी तरफ कालविजय आश्रम में भद्रा अभी तक बेहोश पड़ा हुआ था जिससे सारे गुरु और प्रिया का चिंता के कारण बुरा हाल हो चुका था

Pतो वही दूसरी तरफ एक अंधेरी जगह मे कोई लड़का था जो लगातार चले जा रहा था जिसके चेहरे के भाव से ये प्रतीत हो रहा था कि वो इस अंधेरी जगह से बिल्कुल अंजान है

और अभी वो चले जा रहा था कि तभी वहा पर एक तेज रोशनी फैल गयी जिससे उस लड़के का चेहरा अब दिखने लगा था और वो लड़का कोई और नही बल्कि अपना भद्रा ही था और जैसे ही वहा का प्रकाश हटा तो वैसे ही भद्रा के सामने कुमार आके खड़ा हो गया

भद्रा:- कुमार हम कहाँ है और क्या तुम गुरुओं को आज़ाद करने मे सफल हुए और और

अभी भद्रा कुछ और बोलता की तभी कुमार ने उसके होंठो पर उंगली रख दी जिससे भद्रा शांत हो गया

कुमार :- ये जगह हमारा दिमाग है और तुम्हे यहाँ मे ही लेकर आया हूँ और हाँ सारे गुरु और अस्त्र अभी फिलहाल के लिए सुरक्षित है

भद्रा :- क्या मतलब फिलहाल के लिए

कुमार :- भद्रा दुनिया में अति विनाशकारी युद्ध का आगाज़ हो चुका है जो अच्छाई और बुराई के बीच होने वाली है जिसमे अच्छाई का पक्ष कमजोर है

भद्रा :- तो तुम मुझे यहाँ क्यों लेकर आये हो हमे वापस चल कर युद्ध मे हिस्सा लेना चाहिए

कुमार :- नही अभी तुम कमजोर हो और तुम्हारे हिस्सा लेने से भी कुछ बदलेगा नही अगर तुम्हे युद्ध का परिणाम बदलना है तो सबसे पहले तुम्हे अपनी पूरी शक्ति जाग्रुत करनी होगी और उसके बाद खुदको जानना होगा जब तक तुम खुदको पहचानोगे नही तब तक कुछ नहीं बदलेगा

भद्रा :- तो बताओ क्या करना है मुझे मे कैसे पहचान पाऊंगा खुदको

कुमार :- सबसे पहले खुदको शांत करो और फिर ध्यान मै बैठकर तुम्हारे ऊर्जा स्त्रोत को ढूँढो जैसे तुमने पहले किया था लेकिन इसबार किसी एक शक्ति को नही पूरे ऊर्जा स्त्रोत को अपने काबू करना है जिसके बाद में तुम्हे तुम्हारी असलियत से अवगत कराऊंगा

उसके बाद भद्रा ने वैसा ही किया जैसा कुमार उसे बता रहा था

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आज के लिए इतना ही

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Nice and superb update....
 

parkas

Prime
24,251
54,883
258
अध्याय उनचास

हर तरफ हर कोई आने वाले महासंग्राम की तैयारियों में लगा हुआ था जहाँ कालविजय आश्रम में इस वक़्त 10,000 से भी ज्यादा सेना इकट्ठा हो गयी थी

जिसमे 18 -19 साल के नौजवान से लेकर 80-90 साल वृद्ध साधु सभी मौजूद थे

ये सभी वो सिपाही थे जिनके पास मायावी विद्याएँ मौजूद थी और हर कोई किसी न किसी तत्व की शक्ति को धारण करता था


तो वही 3,000 ऐसे भी सिपाही थे जिनके पास मायावी शक्तियां तो थी लेकिन वो किसी तत्व की शक्ति को धारण नही कर सकते थे

तो वही 2,000 ऐसे भी सिपाही थे जो की आम मानव थे जिन्हे गुरुओं ने उनके द्वारा निर्मित मायावी अस्त्र दिये थे

जैसे कि मायावी धनुष जिसके हर बान मे एक खास गुप्त कला थी जिसके बारे में केवल महागुरु जानते थे


जिसके साथ कुछ योध्दाओं को मायावी भाले दिये गये थे जो अपने सामने खड़े शत्रु का गला भेद कर अपने धारक के पास लौटकर आ जाते तो

आखिर मे मायावी तलवारे जिनके धार मे एक महाविषैला द्रव्य लगाया गया था जिसके एक बूंद भी अगर समुद्र मे मिलादे तो समुद्र के जल को पिनेवाला har एक शक्स उसी पल तड़प तड़प कर मर जाए

अभी कालविजय आश्रम में सिपाहियों को उनके कला के अनुसार 7 भागों में बाँटा हुआ था सबसे पहले 5 भाग उन्हे अलग अलग तत्वों के अनुसार बाँटा गया था जिनमे अग्नि वायु जल आकाश और पृथ्वी ये पाँच तत्व संमलित थे

जिनके नेतृत्व की जिम्मेदारी गुरु अग्नि वानर और जल को सोंपी गयी थी इनका मकसद यही था कि जैसे ही कोई भी असुर युद्ध क्षेत्र के करीब आये तो ये सभी मिलकर उन्हे मैदान आने से पूर्व ही मृत्यु से भेट करादे


तो छाट्ठे भाग में वो मायावी जादूगर थे तत्व से जुड़े हुए नही थे इनका काम था कि अगर कोई असुर किसी तरह बच कर युद्ध के मैदान में पहुँच जाए तो उसकी चिता उसी मैदान में बनाई जाए और इनका नेतृत्व कर रहे थे स्वयं महागुरु गुरु नंदी और गुरु सिंह

सबसे आखरी भाग में 2 हिस्सों में विभागा गया था जिसके भाग 1 मे थे मायावी धनुष और भालों को धारण करने वाले योध्दा इनका कार्य था कि जैसे ही युद्ध आरंभ हो तो ये दूर से ही सभी दुश्मनों पर तिर और भालों की वर्षा कर दे

और इनका नेतृत्व की जिम्मेदारी हमारी महिला शक्ति को दी गयी थी याने प्रिया और शांति

और अगर इनसे कोई बच कर युद्ध मैदान के पास पहुँच पाता तो उसका स्वागत पहले पांच भाग याने तत्व शक्ति से होती

तो वही सबसे छोटी टुकड़ी मतलब मायावी तलवार की तो उन्हे पूरे शहर भर मे निवास कर रहे सभी योद्धाओं के परिवार के रक्षा के लिए


(भद्रा अभी तक बेहोश है इसीलिए इस सारे रणनीति मे उसका नाम नही था)

अच्छाई का पक्ष मे कुल 15,000 सिपाही थे

भाग 1 से 5 मै 10,000 तत्व धारक

2,000 अग्नि तत्व

2,000 वायु तत्व

2,000 जल तत्व

2,000 आकाश तत्व

2,000 पृथ्वी तत्व

भाग 6 मायावी जादूगर 3,000 सिपाही

भाग 7 आम मानव 2,000 सिपाही

750 मायावी धनुष के धारक

750 मायावी भालों के धारक

500 मायावी तलवार के धारक

तो वही असुर पक्ष में मायासुर के साथ पूरे 1,00,000 असुरी सेना उसके साथ 25,000 प्रेत, भूत, पिशाच, नरभेड़िये, तांत्रिकों की सेना थी

जिनके योजना मुताबिक सबसे आगे तंत्रिकों की सेना होगी जिनका कार्य होगा अच्छाई के पक्ष का ध्यान भटकाना और उनके बिछाये जालों का पता लगाना

और बाकी तीनों भाग याने प्रेत, भूत, पिशाच इनका कार्य था की वो सभी जालों को नष्ट करके जितनी ज्यादा हो सके उतनी तबाही मचाये


तो नरभेड़ियों को मायासुर ने पूरे भारत वर्ष मे तबाही मचाने का आदेश दिया था जिससे सभी गुरुओं का ध्यान युद्ध मैदान से बँट जाए

तो वही सारे असुर सैनिक जिनकी संख्या 1,00,000 की थी उनका केवल एक ही लक्ष्य था और वो है तबाही मचाना और अच्छाई पक्ष के सभी योध्दाओं को मार गिराना इनका नेतृत्व करने की जिम्मेदारी मायासुर ने कामिनी और मोहिनी को दी थी

और यही सब योजना बनाने में 7 दिनों का समय निकल चुका था

जहाँ दोनों ही पक्षों मे युद्ध की इतनी जोरों से तैयारी चालू थी तो वही दूसरी तरफ कालविजय आश्रम में भद्रा अभी तक बेहोश पड़ा हुआ था जिससे सारे गुरु और प्रिया का चिंता के कारण बुरा हाल हो चुका था

Pतो वही दूसरी तरफ एक अंधेरी जगह मे कोई लड़का था जो लगातार चले जा रहा था जिसके चेहरे के भाव से ये प्रतीत हो रहा था कि वो इस अंधेरी जगह से बिल्कुल अंजान है

और अभी वो चले जा रहा था कि तभी वहा पर एक तेज रोशनी फैल गयी जिससे उस लड़के का चेहरा अब दिखने लगा था और वो लड़का कोई और नही बल्कि अपना भद्रा ही था और जैसे ही वहा का प्रकाश हटा तो वैसे ही भद्रा के सामने कुमार आके खड़ा हो गया

भद्रा:- कुमार हम कहाँ है और क्या तुम गुरुओं को आज़ाद करने मे सफल हुए और और

अभी भद्रा कुछ और बोलता की तभी कुमार ने उसके होंठो पर उंगली रख दी जिससे भद्रा शांत हो गया

कुमार :- ये जगह हमारा दिमाग है और तुम्हे यहाँ मे ही लेकर आया हूँ और हाँ सारे गुरु और अस्त्र अभी फिलहाल के लिए सुरक्षित है

भद्रा :- क्या मतलब फिलहाल के लिए

कुमार :- भद्रा दुनिया में अति विनाशकारी युद्ध का आगाज़ हो चुका है जो अच्छाई और बुराई के बीच होने वाली है जिसमे अच्छाई का पक्ष कमजोर है

भद्रा :- तो तुम मुझे यहाँ क्यों लेकर आये हो हमे वापस चल कर युद्ध मे हिस्सा लेना चाहिए

कुमार :- नही अभी तुम कमजोर हो और तुम्हारे हिस्सा लेने से भी कुछ बदलेगा नही अगर तुम्हे युद्ध का परिणाम बदलना है तो सबसे पहले तुम्हे अपनी पूरी शक्ति जाग्रुत करनी होगी और उसके बाद खुदको जानना होगा जब तक तुम खुदको पहचानोगे नही तब तक कुछ नहीं बदलेगा

भद्रा :- तो बताओ क्या करना है मुझे मे कैसे पहचान पाऊंगा खुदको

कुमार :- सबसे पहले खुदको शांत करो और फिर ध्यान मै बैठकर तुम्हारे ऊर्जा स्त्रोत को ढूँढो जैसे तुमने पहले किया था लेकिन इसबार किसी एक शक्ति को नही पूरे ऊर्जा स्त्रोत को अपने काबू करना है जिसके बाद में तुम्हे तुम्हारी असलियत से अवगत कराऊंगा

उसके बाद भद्रा ने वैसा ही किया जैसा कुमार उसे बता रहा था

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आज के लिए इतना ही

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Bahut hi badhiya update diya hai VAJRADHIKARI bhai.....
Nice and awesome update....
 

kas1709

Well-Known Member
7,549
7,873
173
अध्याय उनचास

हर तरफ हर कोई आने वाले महासंग्राम की तैयारियों में लगा हुआ था जहाँ कालविजय आश्रम में इस वक़्त 10,000 से भी ज्यादा सेना इकट्ठा हो गयी थी

जिसमे 18 -19 साल के नौजवान से लेकर 80-90 साल वृद्ध साधु सभी मौजूद थे

ये सभी वो सिपाही थे जिनके पास मायावी विद्याएँ मौजूद थी और हर कोई किसी न किसी तत्व की शक्ति को धारण करता था


तो वही 3,000 ऐसे भी सिपाही थे जिनके पास मायावी शक्तियां तो थी लेकिन वो किसी तत्व की शक्ति को धारण नही कर सकते थे

तो वही 2,000 ऐसे भी सिपाही थे जो की आम मानव थे जिन्हे गुरुओं ने उनके द्वारा निर्मित मायावी अस्त्र दिये थे

जैसे कि मायावी धनुष जिसके हर बान मे एक खास गुप्त कला थी जिसके बारे में केवल महागुरु जानते थे


जिसके साथ कुछ योध्दाओं को मायावी भाले दिये गये थे जो अपने सामने खड़े शत्रु का गला भेद कर अपने धारक के पास लौटकर आ जाते तो

आखिर मे मायावी तलवारे जिनके धार मे एक महाविषैला द्रव्य लगाया गया था जिसके एक बूंद भी अगर समुद्र मे मिलादे तो समुद्र के जल को पिनेवाला har एक शक्स उसी पल तड़प तड़प कर मर जाए

अभी कालविजय आश्रम में सिपाहियों को उनके कला के अनुसार 7 भागों में बाँटा हुआ था सबसे पहले 5 भाग उन्हे अलग अलग तत्वों के अनुसार बाँटा गया था जिनमे अग्नि वायु जल आकाश और पृथ्वी ये पाँच तत्व संमलित थे

जिनके नेतृत्व की जिम्मेदारी गुरु अग्नि वानर और जल को सोंपी गयी थी इनका मकसद यही था कि जैसे ही कोई भी असुर युद्ध क्षेत्र के करीब आये तो ये सभी मिलकर उन्हे मैदान आने से पूर्व ही मृत्यु से भेट करादे


तो छाट्ठे भाग में वो मायावी जादूगर थे तत्व से जुड़े हुए नही थे इनका काम था कि अगर कोई असुर किसी तरह बच कर युद्ध के मैदान में पहुँच जाए तो उसकी चिता उसी मैदान में बनाई जाए और इनका नेतृत्व कर रहे थे स्वयं महागुरु गुरु नंदी और गुरु सिंह

सबसे आखरी भाग में 2 हिस्सों में विभागा गया था जिसके भाग 1 मे थे मायावी धनुष और भालों को धारण करने वाले योध्दा इनका कार्य था कि जैसे ही युद्ध आरंभ हो तो ये दूर से ही सभी दुश्मनों पर तिर और भालों की वर्षा कर दे

और इनका नेतृत्व की जिम्मेदारी हमारी महिला शक्ति को दी गयी थी याने प्रिया और शांति

और अगर इनसे कोई बच कर युद्ध मैदान के पास पहुँच पाता तो उसका स्वागत पहले पांच भाग याने तत्व शक्ति से होती

तो वही सबसे छोटी टुकड़ी मतलब मायावी तलवार की तो उन्हे पूरे शहर भर मे निवास कर रहे सभी योद्धाओं के परिवार के रक्षा के लिए


(भद्रा अभी तक बेहोश है इसीलिए इस सारे रणनीति मे उसका नाम नही था)

अच्छाई का पक्ष मे कुल 15,000 सिपाही थे

भाग 1 से 5 मै 10,000 तत्व धारक

2,000 अग्नि तत्व

2,000 वायु तत्व

2,000 जल तत्व

2,000 आकाश तत्व

2,000 पृथ्वी तत्व

भाग 6 मायावी जादूगर 3,000 सिपाही

भाग 7 आम मानव 2,000 सिपाही

750 मायावी धनुष के धारक

750 मायावी भालों के धारक

500 मायावी तलवार के धारक

तो वही असुर पक्ष में मायासुर के साथ पूरे 1,00,000 असुरी सेना उसके साथ 25,000 प्रेत, भूत, पिशाच, नरभेड़िये, तांत्रिकों की सेना थी

जिनके योजना मुताबिक सबसे आगे तंत्रिकों की सेना होगी जिनका कार्य होगा अच्छाई के पक्ष का ध्यान भटकाना और उनके बिछाये जालों का पता लगाना

और बाकी तीनों भाग याने प्रेत, भूत, पिशाच इनका कार्य था की वो सभी जालों को नष्ट करके जितनी ज्यादा हो सके उतनी तबाही मचाये


तो नरभेड़ियों को मायासुर ने पूरे भारत वर्ष मे तबाही मचाने का आदेश दिया था जिससे सभी गुरुओं का ध्यान युद्ध मैदान से बँट जाए

तो वही सारे असुर सैनिक जिनकी संख्या 1,00,000 की थी उनका केवल एक ही लक्ष्य था और वो है तबाही मचाना और अच्छाई पक्ष के सभी योध्दाओं को मार गिराना इनका नेतृत्व करने की जिम्मेदारी मायासुर ने कामिनी और मोहिनी को दी थी

और यही सब योजना बनाने में 7 दिनों का समय निकल चुका था

जहाँ दोनों ही पक्षों मे युद्ध की इतनी जोरों से तैयारी चालू थी तो वही दूसरी तरफ कालविजय आश्रम में भद्रा अभी तक बेहोश पड़ा हुआ था जिससे सारे गुरु और प्रिया का चिंता के कारण बुरा हाल हो चुका था

Pतो वही दूसरी तरफ एक अंधेरी जगह मे कोई लड़का था जो लगातार चले जा रहा था जिसके चेहरे के भाव से ये प्रतीत हो रहा था कि वो इस अंधेरी जगह से बिल्कुल अंजान है

और अभी वो चले जा रहा था कि तभी वहा पर एक तेज रोशनी फैल गयी जिससे उस लड़के का चेहरा अब दिखने लगा था और वो लड़का कोई और नही बल्कि अपना भद्रा ही था और जैसे ही वहा का प्रकाश हटा तो वैसे ही भद्रा के सामने कुमार आके खड़ा हो गया

भद्रा:- कुमार हम कहाँ है और क्या तुम गुरुओं को आज़ाद करने मे सफल हुए और और

अभी भद्रा कुछ और बोलता की तभी कुमार ने उसके होंठो पर उंगली रख दी जिससे भद्रा शांत हो गया

कुमार :- ये जगह हमारा दिमाग है और तुम्हे यहाँ मे ही लेकर आया हूँ और हाँ सारे गुरु और अस्त्र अभी फिलहाल के लिए सुरक्षित है

भद्रा :- क्या मतलब फिलहाल के लिए

कुमार :- भद्रा दुनिया में अति विनाशकारी युद्ध का आगाज़ हो चुका है जो अच्छाई और बुराई के बीच होने वाली है जिसमे अच्छाई का पक्ष कमजोर है

भद्रा :- तो तुम मुझे यहाँ क्यों लेकर आये हो हमे वापस चल कर युद्ध मे हिस्सा लेना चाहिए

कुमार :- नही अभी तुम कमजोर हो और तुम्हारे हिस्सा लेने से भी कुछ बदलेगा नही अगर तुम्हे युद्ध का परिणाम बदलना है तो सबसे पहले तुम्हे अपनी पूरी शक्ति जाग्रुत करनी होगी और उसके बाद खुदको जानना होगा जब तक तुम खुदको पहचानोगे नही तब तक कुछ नहीं बदलेगा

भद्रा :- तो बताओ क्या करना है मुझे मे कैसे पहचान पाऊंगा खुदको

कुमार :- सबसे पहले खुदको शांत करो और फिर ध्यान मै बैठकर तुम्हारे ऊर्जा स्त्रोत को ढूँढो जैसे तुमने पहले किया था लेकिन इसबार किसी एक शक्ति को नही पूरे ऊर्जा स्त्रोत को अपने काबू करना है जिसके बाद में तुम्हे तुम्हारी असलियत से अवगत कराऊंगा

उसके बाद भद्रा ने वैसा ही किया जैसा कुमार उसे बता रहा था

~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आज के लिए इतना ही

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Nice update....
 

dhparikh

Well-Known Member
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अध्याय उनचास

हर तरफ हर कोई आने वाले महासंग्राम की तैयारियों में लगा हुआ था जहाँ कालविजय आश्रम में इस वक़्त 10,000 से भी ज्यादा सेना इकट्ठा हो गयी थी

जिसमे 18 -19 साल के नौजवान से लेकर 80-90 साल वृद्ध साधु सभी मौजूद थे

ये सभी वो सिपाही थे जिनके पास मायावी विद्याएँ मौजूद थी और हर कोई किसी न किसी तत्व की शक्ति को धारण करता था


तो वही 3,000 ऐसे भी सिपाही थे जिनके पास मायावी शक्तियां तो थी लेकिन वो किसी तत्व की शक्ति को धारण नही कर सकते थे

तो वही 2,000 ऐसे भी सिपाही थे जो की आम मानव थे जिन्हे गुरुओं ने उनके द्वारा निर्मित मायावी अस्त्र दिये थे

जैसे कि मायावी धनुष जिसके हर बान मे एक खास गुप्त कला थी जिसके बारे में केवल महागुरु जानते थे


जिसके साथ कुछ योध्दाओं को मायावी भाले दिये गये थे जो अपने सामने खड़े शत्रु का गला भेद कर अपने धारक के पास लौटकर आ जाते तो

आखिर मे मायावी तलवारे जिनके धार मे एक महाविषैला द्रव्य लगाया गया था जिसके एक बूंद भी अगर समुद्र मे मिलादे तो समुद्र के जल को पिनेवाला har एक शक्स उसी पल तड़प तड़प कर मर जाए

अभी कालविजय आश्रम में सिपाहियों को उनके कला के अनुसार 7 भागों में बाँटा हुआ था सबसे पहले 5 भाग उन्हे अलग अलग तत्वों के अनुसार बाँटा गया था जिनमे अग्नि वायु जल आकाश और पृथ्वी ये पाँच तत्व संमलित थे

जिनके नेतृत्व की जिम्मेदारी गुरु अग्नि वानर और जल को सोंपी गयी थी इनका मकसद यही था कि जैसे ही कोई भी असुर युद्ध क्षेत्र के करीब आये तो ये सभी मिलकर उन्हे मैदान आने से पूर्व ही मृत्यु से भेट करादे


तो छाट्ठे भाग में वो मायावी जादूगर थे तत्व से जुड़े हुए नही थे इनका काम था कि अगर कोई असुर किसी तरह बच कर युद्ध के मैदान में पहुँच जाए तो उसकी चिता उसी मैदान में बनाई जाए और इनका नेतृत्व कर रहे थे स्वयं महागुरु गुरु नंदी और गुरु सिंह

सबसे आखरी भाग में 2 हिस्सों में विभागा गया था जिसके भाग 1 मे थे मायावी धनुष और भालों को धारण करने वाले योध्दा इनका कार्य था कि जैसे ही युद्ध आरंभ हो तो ये दूर से ही सभी दुश्मनों पर तिर और भालों की वर्षा कर दे

और इनका नेतृत्व की जिम्मेदारी हमारी महिला शक्ति को दी गयी थी याने प्रिया और शांति

और अगर इनसे कोई बच कर युद्ध मैदान के पास पहुँच पाता तो उसका स्वागत पहले पांच भाग याने तत्व शक्ति से होती

तो वही सबसे छोटी टुकड़ी मतलब मायावी तलवार की तो उन्हे पूरे शहर भर मे निवास कर रहे सभी योद्धाओं के परिवार के रक्षा के लिए


(भद्रा अभी तक बेहोश है इसीलिए इस सारे रणनीति मे उसका नाम नही था)

अच्छाई का पक्ष मे कुल 15,000 सिपाही थे

भाग 1 से 5 मै 10,000 तत्व धारक

2,000 अग्नि तत्व

2,000 वायु तत्व

2,000 जल तत्व

2,000 आकाश तत्व

2,000 पृथ्वी तत्व

भाग 6 मायावी जादूगर 3,000 सिपाही

भाग 7 आम मानव 2,000 सिपाही

750 मायावी धनुष के धारक

750 मायावी भालों के धारक

500 मायावी तलवार के धारक

तो वही असुर पक्ष में मायासुर के साथ पूरे 1,00,000 असुरी सेना उसके साथ 25,000 प्रेत, भूत, पिशाच, नरभेड़िये, तांत्रिकों की सेना थी

जिनके योजना मुताबिक सबसे आगे तंत्रिकों की सेना होगी जिनका कार्य होगा अच्छाई के पक्ष का ध्यान भटकाना और उनके बिछाये जालों का पता लगाना

और बाकी तीनों भाग याने प्रेत, भूत, पिशाच इनका कार्य था की वो सभी जालों को नष्ट करके जितनी ज्यादा हो सके उतनी तबाही मचाये


तो नरभेड़ियों को मायासुर ने पूरे भारत वर्ष मे तबाही मचाने का आदेश दिया था जिससे सभी गुरुओं का ध्यान युद्ध मैदान से बँट जाए

तो वही सारे असुर सैनिक जिनकी संख्या 1,00,000 की थी उनका केवल एक ही लक्ष्य था और वो है तबाही मचाना और अच्छाई पक्ष के सभी योध्दाओं को मार गिराना इनका नेतृत्व करने की जिम्मेदारी मायासुर ने कामिनी और मोहिनी को दी थी

और यही सब योजना बनाने में 7 दिनों का समय निकल चुका था

जहाँ दोनों ही पक्षों मे युद्ध की इतनी जोरों से तैयारी चालू थी तो वही दूसरी तरफ कालविजय आश्रम में भद्रा अभी तक बेहोश पड़ा हुआ था जिससे सारे गुरु और प्रिया का चिंता के कारण बुरा हाल हो चुका था

Pतो वही दूसरी तरफ एक अंधेरी जगह मे कोई लड़का था जो लगातार चले जा रहा था जिसके चेहरे के भाव से ये प्रतीत हो रहा था कि वो इस अंधेरी जगह से बिल्कुल अंजान है

और अभी वो चले जा रहा था कि तभी वहा पर एक तेज रोशनी फैल गयी जिससे उस लड़के का चेहरा अब दिखने लगा था और वो लड़का कोई और नही बल्कि अपना भद्रा ही था और जैसे ही वहा का प्रकाश हटा तो वैसे ही भद्रा के सामने कुमार आके खड़ा हो गया

भद्रा:- कुमार हम कहाँ है और क्या तुम गुरुओं को आज़ाद करने मे सफल हुए और और

अभी भद्रा कुछ और बोलता की तभी कुमार ने उसके होंठो पर उंगली रख दी जिससे भद्रा शांत हो गया

कुमार :- ये जगह हमारा दिमाग है और तुम्हे यहाँ मे ही लेकर आया हूँ और हाँ सारे गुरु और अस्त्र अभी फिलहाल के लिए सुरक्षित है

भद्रा :- क्या मतलब फिलहाल के लिए

कुमार :- भद्रा दुनिया में अति विनाशकारी युद्ध का आगाज़ हो चुका है जो अच्छाई और बुराई के बीच होने वाली है जिसमे अच्छाई का पक्ष कमजोर है

भद्रा :- तो तुम मुझे यहाँ क्यों लेकर आये हो हमे वापस चल कर युद्ध मे हिस्सा लेना चाहिए

कुमार :- नही अभी तुम कमजोर हो और तुम्हारे हिस्सा लेने से भी कुछ बदलेगा नही अगर तुम्हे युद्ध का परिणाम बदलना है तो सबसे पहले तुम्हे अपनी पूरी शक्ति जाग्रुत करनी होगी और उसके बाद खुदको जानना होगा जब तक तुम खुदको पहचानोगे नही तब तक कुछ नहीं बदलेगा

भद्रा :- तो बताओ क्या करना है मुझे मे कैसे पहचान पाऊंगा खुदको

कुमार :- सबसे पहले खुदको शांत करो और फिर ध्यान मै बैठकर तुम्हारे ऊर्जा स्त्रोत को ढूँढो जैसे तुमने पहले किया था लेकिन इसबार किसी एक शक्ति को नही पूरे ऊर्जा स्त्रोत को अपने काबू करना है जिसके बाद में तुम्हे तुम्हारी असलियत से अवगत कराऊंगा

उसके बाद भद्रा ने वैसा ही किया जैसा कुमार उसे बता रहा था

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आज के लिए इतना ही

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Rohit1988

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हर तरफ हर कोई आने वाले महासंग्राम की तैयारियों में लगा हुआ था जहाँ कालविजय आश्रम में इस वक़्त 10,000 से भी ज्यादा सेना इकट्ठा हो गयी थी

जिसमे 18 -19 साल के नौजवान से लेकर 80-90 साल वृद्ध साधु सभी मौजूद थे

ये सभी वो सिपाही थे जिनके पास मायावी विद्याएँ मौजूद थी और हर कोई किसी न किसी तत्व की शक्ति को धारण करता था


तो वही 3,000 ऐसे भी सिपाही थे जिनके पास मायावी शक्तियां तो थी लेकिन वो किसी तत्व की शक्ति को धारण नही कर सकते थे

तो वही 2,000 ऐसे भी सिपाही थे जो की आम मानव थे जिन्हे गुरुओं ने उनके द्वारा निर्मित मायावी अस्त्र दिये थे

जैसे कि मायावी धनुष जिसके हर बान मे एक खास गुप्त कला थी जिसके बारे में केवल महागुरु जानते थे


जिसके साथ कुछ योध्दाओं को मायावी भाले दिये गये थे जो अपने सामने खड़े शत्रु का गला भेद कर अपने धारक के पास लौटकर आ जाते तो

आखिर मे मायावी तलवारे जिनके धार मे एक महाविषैला द्रव्य लगाया गया था जिसके एक बूंद भी अगर समुद्र मे मिलादे तो समुद्र के जल को पिनेवाला har एक शक्स उसी पल तड़प तड़प कर मर जाए

अभी कालविजय आश्रम में सिपाहियों को उनके कला के अनुसार 7 भागों में बाँटा हुआ था सबसे पहले 5 भाग उन्हे अलग अलग तत्वों के अनुसार बाँटा गया था जिनमे अग्नि वायु जल आकाश और पृथ्वी ये पाँच तत्व संमलित थे

जिनके नेतृत्व की जिम्मेदारी गुरु अग्नि वानर और जल को सोंपी गयी थी इनका मकसद यही था कि जैसे ही कोई भी असुर युद्ध क्षेत्र के करीब आये तो ये सभी मिलकर उन्हे मैदान आने से पूर्व ही मृत्यु से भेट करादे


तो छाट्ठे भाग में वो मायावी जादूगर थे तत्व से जुड़े हुए नही थे इनका काम था कि अगर कोई असुर किसी तरह बच कर युद्ध के मैदान में पहुँच जाए तो उसकी चिता उसी मैदान में बनाई जाए और इनका नेतृत्व कर रहे थे स्वयं महागुरु गुरु नंदी और गुरु सिंह

सबसे आखरी भाग में 2 हिस्सों में विभागा गया था जिसके भाग 1 मे थे मायावी धनुष और भालों को धारण करने वाले योध्दा इनका कार्य था कि जैसे ही युद्ध आरंभ हो तो ये दूर से ही सभी दुश्मनों पर तिर और भालों की वर्षा कर दे

और इनका नेतृत्व की जिम्मेदारी हमारी महिला शक्ति को दी गयी थी याने प्रिया और शांति

और अगर इनसे कोई बच कर युद्ध मैदान के पास पहुँच पाता तो उसका स्वागत पहले पांच भाग याने तत्व शक्ति से होती

तो वही सबसे छोटी टुकड़ी मतलब मायावी तलवार की तो उन्हे पूरे शहर भर मे निवास कर रहे सभी योद्धाओं के परिवार के रक्षा के लिए


(भद्रा अभी तक बेहोश है इसीलिए इस सारे रणनीति मे उसका नाम नही था)

अच्छाई का पक्ष मे कुल 15,000 सिपाही थे

भाग 1 से 5 मै 10,000 तत्व धारक

2,000 अग्नि तत्व

2,000 वायु तत्व

2,000 जल तत्व

2,000 आकाश तत्व

2,000 पृथ्वी तत्व

भाग 6 मायावी जादूगर 3,000 सिपाही

भाग 7 आम मानव 2,000 सिपाही

750 मायावी धनुष के धारक

750 मायावी भालों के धारक

500 मायावी तलवार के धारक

तो वही असुर पक्ष में मायासुर के साथ पूरे 1,00,000 असुरी सेना उसके साथ 25,000 प्रेत, भूत, पिशाच, नरभेड़िये, तांत्रिकों की सेना थी

जिनके योजना मुताबिक सबसे आगे तंत्रिकों की सेना होगी जिनका कार्य होगा अच्छाई के पक्ष का ध्यान भटकाना और उनके बिछाये जालों का पता लगाना

और बाकी तीनों भाग याने प्रेत, भूत, पिशाच इनका कार्य था की वो सभी जालों को नष्ट करके जितनी ज्यादा हो सके उतनी तबाही मचाये


तो नरभेड़ियों को मायासुर ने पूरे भारत वर्ष मे तबाही मचाने का आदेश दिया था जिससे सभी गुरुओं का ध्यान युद्ध मैदान से बँट जाए

तो वही सारे असुर सैनिक जिनकी संख्या 1,00,000 की थी उनका केवल एक ही लक्ष्य था और वो है तबाही मचाना और अच्छाई पक्ष के सभी योध्दाओं को मार गिराना इनका नेतृत्व करने की जिम्मेदारी मायासुर ने कामिनी और मोहिनी को दी थी

और यही सब योजना बनाने में 7 दिनों का समय निकल चुका था

जहाँ दोनों ही पक्षों मे युद्ध की इतनी जोरों से तैयारी चालू थी तो वही दूसरी तरफ कालविजय आश्रम में भद्रा अभी तक बेहोश पड़ा हुआ था जिससे सारे गुरु और प्रिया का चिंता के कारण बुरा हाल हो चुका था

Pतो वही दूसरी तरफ एक अंधेरी जगह मे कोई लड़का था जो लगातार चले जा रहा था जिसके चेहरे के भाव से ये प्रतीत हो रहा था कि वो इस अंधेरी जगह से बिल्कुल अंजान है

और अभी वो चले जा रहा था कि तभी वहा पर एक तेज रोशनी फैल गयी जिससे उस लड़के का चेहरा अब दिखने लगा था और वो लड़का कोई और नही बल्कि अपना भद्रा ही था और जैसे ही वहा का प्रकाश हटा तो वैसे ही भद्रा के सामने कुमार आके खड़ा हो गया

भद्रा:- कुमार हम कहाँ है और क्या तुम गुरुओं को आज़ाद करने मे सफल हुए और और

अभी भद्रा कुछ और बोलता की तभी कुमार ने उसके होंठो पर उंगली रख दी जिससे भद्रा शांत हो गया

कुमार :- ये जगह हमारा दिमाग है और तुम्हे यहाँ मे ही लेकर आया हूँ और हाँ सारे गुरु और अस्त्र अभी फिलहाल के लिए सुरक्षित है

भद्रा :- क्या मतलब फिलहाल के लिए

कुमार :- भद्रा दुनिया में अति विनाशकारी युद्ध का आगाज़ हो चुका है जो अच्छाई और बुराई के बीच होने वाली है जिसमे अच्छाई का पक्ष कमजोर है

भद्रा :- तो तुम मुझे यहाँ क्यों लेकर आये हो हमे वापस चल कर युद्ध मे हिस्सा लेना चाहिए

कुमार :- नही अभी तुम कमजोर हो और तुम्हारे हिस्सा लेने से भी कुछ बदलेगा नही अगर तुम्हे युद्ध का परिणाम बदलना है तो सबसे पहले तुम्हे अपनी पूरी शक्ति जाग्रुत करनी होगी और उसके बाद खुदको जानना होगा जब तक तुम खुदको पहचानोगे नही तब तक कुछ नहीं बदलेगा

भद्रा :- तो बताओ क्या करना है मुझे मे कैसे पहचान पाऊंगा खुदको

कुमार :- सबसे पहले खुदको शांत करो और फिर ध्यान मै बैठकर तुम्हारे ऊर्जा स्त्रोत को ढूँढो जैसे तुमने पहले किया था लेकिन इसबार किसी एक शक्ति को नही पूरे ऊर्जा स्त्रोत को अपने काबू करना है जिसके बाद में तुम्हे तुम्हारी असलियत से अवगत कराऊंगा

उसके बाद भद्रा ने वैसा ही किया जैसा कुमार उसे बता रहा था

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आज के लिए इतना ही

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Fantastic
 

Raj_sharma

परिवर्तनमेव स्थिरमस्ति ||❣️
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24,118
229
Vajra bhaiya update ka besabri se intjaar rahega 👍
 
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