Incest बैलगाड़ी,,,,,

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rohnny4545

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बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर मादक अपडेट है भाई मजा आ गया
अशोक की बीबी जितनी भोली भाली दिखती हैं उतनी ही चालाक और काम प्यासी लगती हैं
राजू जैसे अजनबी और पहली बार मिले जवानी से भरपूर लडके के साथ कितनी आसानी से पेशाब करने की बात कह गयी और तो और उसे अपने साथ बाहर चलने को कहा
धीरे धीरे साडी उठाना तो राजू को तडपा कर उत्तेजित करना गजब का हैं
राजू व्दारा गांड मराई और चुदाई जैसे उत्तेजक सवाल को सहजता से लेना और जवाब देना कुछ और ही इशारा लगता है
अंत में झटपट साडी उठाकर गोरी गोरी गदराई जवानी से भरी गांड दिखाकर मुतने बैठना और मुतने की मधुर आवाज से राजू का गनगना जाना बहुत ही मादकता भरा हैं
बाहर से अंदर जाने के बाद एक बहुत ही गरमागरम चुदाई होना तय हैं खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
Nice dear
 

Lutgaya

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अपडेट करो भ्राता।
 

rohnny4545

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राजू की आंखों के सामने ही,,, पेशाब की तीव्रता को नहीं सहन कर पाने की स्थिति में अशोक की बीवी अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी गोरी गोरी गांड दिखाते हुए मुतने बैठ गई थी,,, राजू के एक हाथ में लालटेन थी और एक हाथ में डंडा,,, लालटेन उसने अपने लालच के बस हाथ में पकड़ रखा था डंडा अशोक की बीवी की तसल्ली के लिए,,,, और जिस चीज का लालच करके वह लालटेन लेकर बाहर आया था,,, उसमें उसे सफलता हाथ लगी थी,,,राजू जानबूझकर अशोक की बीवी से महज आठ दस कदमों की दूरी पर ही खड़ा था,,, अशोक की बीवी के भोलेपन का वह फायदा उठा रहा था और इतनी नजदीक खड़े होने की वजह से लालटेन की पीली रोशनी में अशोक की बीवी की गोरी गोरी गांड और ज्यादा चमक रही थी राजू तो यह देखकर एकदम मदहोश होने लगा,,, पजामें में उसका लंड गदर मचाने को तैयार था,,,, गहरी सांस लेते हुए वह इस लुभावने दृश्य का आनंद ले रहा था,,,



अशोक की बीवी मुतना शुरू कर दी थी और उसकी गुलाबी क्षेत्र में से आ रही सीटी की आवाज राजू के कानों में मिश्री घोल रही थी ,,मदहोशी का रस घोल रही थी,,, राजू अपने तन बदन में एक अद्भुत उत्तेजना का संचार होता हुआ महसूस कर रहा था,,,, उतेजना के मारे राजू का गला सूखता जा रहा था,,, चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था एक तो घने पेड़ के नीचे झाड़ियों के पास अशोक की बीवी बैठकर मुत रही थी ,, इसलिए अंधेरा कुछ ज्यादा ही था,,। अशोक की बीवी,, राजू के वादे पर यकीन कर गई थी यही उसके भोलेपन का सबसे बड़ा सबुत था,, उसे ऐसा ही लग रहा था कि,,,, राजू ने वादा किया है तो वह उसकी तरफ नहीं देखता होगा,,, वह शायद जमाने के दस्तूर से वाकिफ नहीं थी,,,,,, इसलिए वह सिर्फ चोर की चिंता करते हुए मुत रही थी और इधर उधर देख रही थी हालांकि पीछे की तरफ से निश्चित थी इसलिए पीछे की तरफ नजर घुमाकर नहीं देख रही थी,,, और इसी का फायदा उठाते हुए राजू एक बेहद खूबसूरत औरत को पेशाब करते हुए देखना उसकी खूबसूरत गोरी गोरी गांड लालटेन की रोशनी में चमक रही थी और उस गांड की चमक देख कर राजू का मन कर रहा था कि उसकी गांड को अपनी जीभ से चाट जाए,,,, राजू खान लंड पूरी तरह से अकड़न पर था,,, उसमें मीठा मीठा दर्द होने लगा था,, लंड की गर्मी शांत करना बहुत जरूरी हो गया था और इस समय उसका जुगाड केवलअशोक की बीवी के पास था लेकिन देखना यह था कि अशोक की बीवी उसके हाथ में कैसे आती है,,,





गुलाबी छेद से आ रही सीटी की आवाज और पेशाब की धार जो की बड़ी तीव्रता से जमीन पर पड़ रही थी उसकी आवाज दोनों मिलकर एक अद्भुत माहौल बना रहे थे,,,। राजू से बिल्कुल भी सहन नहीं हो रहा था उसकी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत औरत अपनी नंगी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही थीराजू का मन कर रहा था कि अपना लंड बाहर निकालकर ठीक है उसके पीछे जाकर बैठ जाए और अपने लंड को उसकी गोरी गोरी गांड पर रगडना शुरू कर दें,,,,,,, चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था झिंगुर और कुत्तों की आवाज ही आ रही थी ऐसे में माहौल बनाने के लिए राजू बोला,,,।



आराम से मुत लो भाभी मैं यहीं खड़ा हूं घबराना नहीं,,,।

(राजू की बातों को सुनकर अशोक की बीवी को हिम्मत मिल रही थी लेकिन उसकी यह बात सुनकर अनजाने नहीं वह पीछे नजर करके देखने लगी तो राजू को अपनी ही गांड की तरफ देखता पाकर वह पल भर में ही शर्म से सिहर उठी,,,मैं तुरंत दोनों हाथों के पीछे की तरफ लाकर अपनी बड़ी बड़ी गांड पर उसे ढकने के लिए रख दी,,,, उसकी इस हरकत पर राजू मन ही मन मुस्कुराने लगा,,, और उसकी इस हरकत की वजह जानने के लिए बोला,,,)

क्या हुआ भाभी,,,?

अरे बबुआ तुम तो मेरी तरफ ही देख रहे हो,,, मुझे शर्म आ रही है तुम तो वादा किए थे कि देखोगे नहीं,,,,


हां भाभी मैंने तुमसे वादा था किया था कि तुम्हारी तरफ देखूंगा नहीं लेकिन तुमको कुछ पता चला,,,,


क्या,,,?

सच में तुम को कुछ भी पता नहीं चला,,,(राजू जानबूझकर बात बनाते हुए बोला,,)

नहीं तो क्या हुआ,,,,(वह अभी भी अपनी गांड की फांकों को अपनी हथेलियों से ढकने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली,,,)

अरे भाभी अच्छा हुआ तुम्हें पता नहीं चला और अच्छा हुआ कि मैं देख रहा था इसमें कुछ गलत समझना नहीं लेकिन अगर देखता नहीं होता तो शायद सांप तुम्हें काट लिया होता,,,।




ससससस,, सांप,,,कककक,,,, किधर है,,,, किधर है,,,,(इतना कहते हुए घबरा करवा अपनी गोल गोल गांड को उठाकर खाली होने लगी तो राजू उसे सांत्वना देते हुए बोला,,,)


अरे अरे,,,,, यह क्या कर रही हो,,,(मौके का फायदा उठाते के राजू आगे बढ़ा और अशोक की बीपी के बेहद करीब पहुंच कर उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ दबाते हुए बोला,,,) बैठ जाओ भाभी,,, ठीक से मुत तो लो,,,, अब सांप नहीं है चला गया,,, ठीक तुम्हारे पीछे से गया है,,,,अगर मैं उसे डंडे की आवाज से बहकाया ना होता तो शायद वह तुम्हारी गांड में काट लेता,,,,(राजू कहा था अभी भी अशोक की बीवी के कंधे पर था और जिस तरह से हुआ है दबाए हुए था उसकी वजह से अशोक की बीवी वापस अपनी जगह पर बैठ गई थी,,,,


बाप रे इतना कुछ हो गया और मुझे पता तक नहीं चला अच्छा हुआ कि तुम पीछे खड़े थे,,,


अरे अच्छा हुआ कि मैं पीछे खड़ा तो था लेकिन अगर तुम्हें दिया हुआ वादा पूरा करता तो शायद इस समय ना जाने क्या हो गया होता वह तो अच्छा हुआ कि तुम्हारी गोरी गोरी गांड को देखने का लालच में अपने मन में रोक नहीं पाया और तुम्हारी गांड देखने के लिए ही मैं तुम्हारी तरफ देख रहा था और तभी एक बड़ा सा सांप गुजरने लगा,,,,

अशोक की बीवी


आवाज देना था ना,,,


आवाज देता तो तुम हड़बड़ा जाती घबरा जाती और ऐसे में तुम छटपटाने लगती और तुम्हारा पैर अगर उस पर पड़ जाता तो बिना कहे वह तुम्हें काट लेता इसलिए मैं दिमाग से काम लिया,,,,,, मैं कुछ बोला नहीं शांत रहा और उसे जमीन पर डंडा पटक कर उसका ध्यान भटकाने लगा और वह ठीक तुम्हारे पीछे से गुजर गया सच कहूं तो मैं भी एकदम घबरा गया था,,,, मेरे होते हुए अगर तुम्हें सांप काट लेता तो मेरी मर्दानगी पर दाग लग जाता,,,,(राजू अभी भी उसके कंधे पर हाथ रखे हुए था अब उसे उसकी गांड एकदम करीब से नजर आ रही थीजो कि लालटेन की रोशनी में कम साफ दिखाई दे रही थी उस पर दाग धब्बे बिल्कुल भी नहीं थे,,, एकदम बेदाग गोरापन था,,,, अशोक की बीवी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह एकदम से घबरा गई थी,,, उसे लग रहा था कि राजू जो कुछ भी बोला वह सच है,,, लेकिन या तो राजू की बनी बनाई बात थी वह पूरी तरह से अशोक की बीवी को अपने विश्वास में ले लेना चाहता था,,, अशोक की बीवी एकदम घबराई हुई थी इसलिए उसकी घबराहट को कम करते हुए राजू बोला,,,)

भाभी तुम्हारी तो पेशाब ही रुक गई सांप का नाम सुनकर,,, तुम चिंता मत करो ठीक से मुत लो,,, मेरे होते हुए तुम्हें कुछ नहीं होगा,,,,( और यह कहते हुए राजू ठीक उसके पीछे थोड़ा सा बगल में बैठ गया उसका हांथ अभी भी उसके कंधे पर था,,,अशोक की बीवी सांप का नाम सुनकर घबरा तो गई थी लेकिन राजू को अपने इतने करीब बैठा हुआ पाकर अजीब सी स्थिति का अनुभव कर रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, क्योंकि इस तरह से तो कभी उसके पति ने भी उसके साथ नहीं बैठा था,,,, राजु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) तुम चिंता मत करो भाभी पेशाब करो वरना रात को फिर लग जाएगी तो,,, क्या करोगी खामखा नींद खराब होगी,,,,(राजू की हिम्मत बढ़ने लगी थी क्योंकि ऐसा कहते हैं राजू कंधे पर से अपने हाथ को हटा कर सीधे उसकी गोरी गोरी गांड पर रख दिया था,,, और इस समय अशोक की बीवी अपनी हथेली से अपनी गांड को ढकने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रही थी क्योंकि सांप का नाम सुनकर हो रहा है एकदम से सिहर उठी थी और उसके दोनों हथेली अपनी गांड पर से अपने आप ही हट गई थी,,, गोरी गोरी गांड पर हाथ फेरते हुए राजू की उत्तेजना बढ़ने लगी थी एक हाथ में अभी भी उसके लालटेन की जिससे उसकी रोशनी में उसको सब कुछ साफ साफ दिखाई दे रहा था,,,एक अनजान जवान लड़की की हथेली अपनी गांड पर महसूस करते हैं कि अपने आप ही उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ में लगी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था अपने बदन में उसे अजीब सी हलचल महसूस होने लगी थी,,,, और राजू उसी तरह से अपनी हथेली को उसकी गोल गोल गांड पर फिराते हुए एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोला,,,),,

मुतो ना भाभी,,,,,,,,(राजू की हरकत की वजह से अशोक की बीवी की सांसे एकदम गहरी चलने लगी थी उसे अजीब सी हलचल महसूस होने लगी थी उसके बदन में सुरूर सा छाने लगा था,,, और अशोक की बीवी को एकदम स्थिर और शांत देखकर राजू कीमत बढ़ने लगी और वापस की गांड की दोनों फांकों के बीच लाते हुए अपनी हथेली को नीचे की तरफ सरकार ने लगा अपनी मोरी को हरकत देते हुए बहुत ही जल्द वह अशोक की बीवी के गांड के छेद पर अपनी उंगली फिराने लगा,,,,अशोक की बीवी एक दम मस्त हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है,,,,, राजू अपनी हरकत को आगे की ओर बढ़ने लगा अशोक की बीवी की गांड का छेद का स्पर्श अपनी उंगली पर होते ही उसका लंड एक दम फूलने पिचकने लगा,,, राजू के साथ-साथ अशोक की बीवी की हालत खराब होती जा रही थी राजू तो खेला खाया लड़का थाबहुत सी औरतों के साथ में इस तरह के संबंध बना चुका था इसलिए अपनी उत्तेजना को किसी हद तक दबाने में कामयाब हो गया था लेकिन अशोक की बीवी की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी,,,,, उसकी उखडती हुई सांसो को देखकर,,, राजू समझ गया था कि उसे मजा आ रहा है‌ वह मस्ती के सागर में गोते लगा रही है,,,,,,, अभी तक दोबारा उसकी बुर् के गुलाबी छेद से पेशाब की धार नहीं फुटी थी,,, राजू अपनी हथेली को उसकी गांड के छेद पर हल्के से दबाते हुए अपनी उंगली से उसके भूरे रंग के छेद को दबा दिया जिससे ना चाहते हुए भी अशोक की बीवी के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,,सससहहहह,,,, इस आवाज को सुनते ही राजू समझ गया कि उसका काम आसान होने वाला है,,,,,,, इसलिए फिर से,,,मुतो ना भाभी,,,बोलकर वह अपनी उंगलियों को आगे की तरफ बढ़ाने लगा,,, जैसे-जैसे ऊंगलियां बुर की तरफ आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे,, अशोक की बीबी की सांसे अटकने सी लगी थी,,, इस तरह की मदहोशी का अनुभव उसने आज तक नहीं की थी,,, अपने पति के द्वारा भी इस तरह की हरकत का सामना वह कभी नहीं कर पाई थी इसलिए शायद औरतों के खूबसूरत बदन से मर्दो कि इस तरह की हरकत के बारे में उसे कुछ भी समझ नहीं थी,,,,,।

रात की काली स्याह अंधेरे में पेशाब करते समय अशोक की बीवी को राजू पूरी तरह से उकसाने की कोशिश में लगा हुआ था,,,,, जहां उत्तेजना के मारे राजू की हालत खराब थी वहीं दूसरी तरफ अशोक की बीवी पानी पानी हुए जा रही थी क्योंकि इस तरह की छेड़छाड़ उसके पति ने आज तक उसके साथ नहीं किया था,, उसे तो उसकी बस शराब ही भली थी,,,,,,राजू अपनी हरकतों की वजह से पूरी तरह से अशोक की बीवी को अपनी गिरफ्त में ले चुका था,,,, राजू की हरकतों की वजह से पूरी तरह से भावनाओं में बह जाने के सिवा ऐसा लग रहा था कि जो की बीवी के पास दूसरा कोई चारा नहीं था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और राजू की उंगलियां उसकी गांड के छेद से आगे की तरफ बढ़ते हुए उसकी बुर की तरफ जा रही थी जो कि केवल एक अंगुल की ही दूरी पर ही थी,,, पर मात्र एक अंगुल की दूरी तय करने में राजू के साथ साथ अशोक की बीवी को भी अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी उत्तेजना और डर के मारे अशोक की बीवी की पेशाब रुक गई थी,,, गांड की दोनों फांकों के बीच की गर्माहट राजू अपने तन बदन में अच्छी तरह से महसूस कर रहा था छोटे से छेद की गर्मी से कहीं उसका लंड पिघल न जाए इस बात का भी उसे डर था,,,,

अशोक की बीवी पेशाब करते हुए


राजू की हरकतों की तड़प अशोक की बीवी के चेहरे पर साफ नजर आ रही थी उसकी सांसे भी गवाही दे रही थी कि वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी है और राजू अपनी उंगली को धीरे-धीरे करके ठीक उसकी गरम बुर पर रखते ही,,, उसके कान में धीरे से फुसफुसाते हुए बोला,,,।

मुतो ना भाभी रुक क्यों गई,,,?

बस राजू का इतना कहना था कि उत्तेजना के मारे एक बार फिर से अशोक की बीवी की गुलामी बुर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार चल चला कर बाहर निकलने लगी जोकि राजू की उंगलियों को भी गर्माहट के साथ भीगोते हुए जमीन पर गिर रही थी,,,, राजु एकदम से मस्त हो गया और अशोक की बीवी भी मदहोश होने लगी उसकी आ्खो में खुमारी जाने लगी किसी ने भी आज तक उसके साथ इस तरह की हरकत नहीं किया था,,, इसलिए राजू की इस तरह की हरकत की वजह से वह पूरी तरह से चुदवासी हुई जा रही थी,,,,,,अभी तक की हरकत को अशोक की बीवी किसी भी तरह से रोकने की कोशिश नहीं की थी इसलिए राजू की भी हिम्मत बढ़ती जा रही थी लालटेन उसके हाथों में थी बड़े से डंडे को व नीचे जमीन पर रख दिया था और उसी हाथ से अशोक की बीवी की बुर को रगड़ रहा था,,,आंखें दोनों की बंद हो चुकी थी दोनों अपनी अपनी दुनिया में पूरी तरह से मस्त हो चुके थे अशोक की बीवी पेशाब की धार अभी भी अपनी गुलाबी छेद में से निकाले जा रही थी,,,,,। अशोक की बीवी की बुर का गुलाबी छेद नीचे होने की वजह से राजू ठीक से उसकी बुर के दर्शन नहीं कर पाया था हालांकि अपनी हथेलियों से टटोलकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था,,,बुर की गर्माहट अपनी हथेली पर महसुस करते ही वह अशोक की बीवी के कानों में बोला,,,।)

राजु अशोक की बीवी की बुर से खेलता हुआ


तुम्हारी बुर बहुत गर्म है भाभी,,,,

सहहहहह ,,,,आहहहहहह,,,, यह क्या कर रहे हो बबुआ,,(अपनी दोनों आंखों को मदहोशी के आलम में बंद किए हुए ही वह राजू से बोली,,,)

तुम्हें ठीक से मुता रहा था डर के मारे तुम्हारी पेशाब रुक गई थी ना अगर मैं ऐसा ना करता तो तुम्हारी पेशाब रुकी रह जाती है और तुम्हें पेट में दर्द होना शुरू हो जाता,,,(राजू उसी तरह से अशोक की बीवी की बुर को अपनी हथेली से मसलते हुए बोला,,,, और अशोक की बीवी कुछ बोलने के लायक नहीं थी,,,। धीरे-धीरे अशोक की बीवी मूत्र क्रिया संपन्न कर ली लेकिन राजू की हथेली का आनंद लेने में पूरी तरह सेमशगूल हो गई राजू को इस बात का आभास हो गया था वह उसकी मस्ती को धीरे-धीरे और ज्यादा बढ़ा रहा था,,,,,, इसलिए वह धीरे से अपनी एक उंगली को उसकी बुर के अंदर सरका दिया और जैसे ही ऊंगली गुलाबी छेद में प्रवेश की वैसे ही अशोक की बीवी के मुंह से आह निकल गई,,,, उसकी आह की आवाज सुनकर राजू चारों खाने चित हो गया वह पूरी तरह से मदहोश हो गया और अपनी उंगली को पूरी की पूरी उसकी गुलाबी छेद में डालता हुआ बोला,,,,।

आहहहह भाभी मुत ली हो क्या,,,?

हां बबुआ,,,(गरम आहें भरते हुए वह बोली,,,)


तो लो भाभी अब तुम लालटेन पकड़ो मुझे भी जोरो की पेशाब लगी है,,,(राजू पेशाब करने के बहाने से उसे अपने लंड का दर्शन कराना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि वॉच आज इतनी भी भोली भाली हो लेकिन मोटा तगड़ा लैंड देखकर उसकी भी मस्ती पड़ जाएगी और उसे अपनी बुर में लेने के लिए तैयार हो जाएगी,,,, राजु की बात सुनकर अशोक की बीवी बिना कुछ बोले खड़ी हुई और अपने कपड़ों को व्यवस्थित करने के बाद लालटेन को अपने हाथ में ले ली,,, वह लालटेन को हाथ में लेकर पीछे कदम ले जाती इससे पहले ही जल्दबाजी दिखाते हुए राजू तुरंत अपने पजामे में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया,, ताकि लालटेन की रोशनी में वह अच्छी तरह से उसके एजेंट के दीदार कर सके,,, और ऐसा ही हुआ,,,, राजू जैसे ही लंड को अपने पजामे में से बाहर निकाल कर पेशाब करना शुरू किया वैसे ही अशोक की बीवी की नजर उसके मोटे तगड़े लंबे लंड पर चली गई जो कि पूरी तरह से खड़ा था,,, इतने मोटे तगड़े लंबे लंड पर नजर जाते ही अशोक की बीवी की हालत खराब हो गई क्योंकि उसने आज तक केवल अपने पति के ही लंड को देखी थी और अपने पति के लंड के साथ ज्यादा मस्ती नहीं कर पाई थी,,, जोकि राजू के लंड से आधा और पतला ही था,, इसलिए राजू के लंड को देखकर वह पूरी तरह से हैरान हो गई,,,। उसके पैर ज्यों के त्यों वही ठीठक कर रह गए,,,,, राजु के लंड को देखकर अशोक की बीवी की आंखों में चमक आ गई थी,,, उसे यह नजारा बेहद अद्भुत और रमणीय लग रहा था,,, तो राजू भी जानबूझकर अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए पेशाब कर रहा था और अशोक की बीवी की तरफ देखते हुए बोला,,,।


आहहहहह ,,,, भाभी ,,, तुमको पेशाब करता हुआ देखकर ,, मुझे भी जोरो की पैशाब लग गई,,,।
(लेकिन इस बार अशोक की बीवी कुछ बोली नही क्योंकि राजू के लंड को देखकर उसकी आंखों में शर्म की लालिमा छा गई थी,,और वह शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली थी,,,। राजू मन ही मन प्रसन्न हो रहा था उसका काम धीरे धीरे बनता हुआ नजर आ रहा था उसे अपने पर पूरा विश्वास हो गया था कि जब वहां अपनी उंगली को उसकी बुर में प्रवेश करा दिया तो लंड डालने में कितना देर लगेगा और वह जरा सा भी विरोध नहीं कर पाई थीऔरतों की संगत में राजू को औरतों के मन में क्या चल रहा है इस बारे में थोड़ा थोड़ा समझ में आने लगा था अशोक को देखकर वह समझ गया था कि उसकी बीवी पूरी तरह से प्यासी है तन की प्यार की,,, उसे तृप्ति का अहसास चाहिए संतुष्टि चाहिए जो कि वही उसे प्रदान कर सकता है,,,, पर आज की रात वह अशोक की बीवी के साथ चुदाई का खेल खेलना चाहता था,,,,।

भोली भाली अशोक के बीवी के मन में राजू के लंड को देखकर भी हलचल हो रही थी और वह अपने मन में यही सोच रही थी कि बाप रे इतना मोटा और लंबा लंड,,, उसके पति का तो इसके सामने कुछ भी नहीं है,,, बाप रे यह बुर में कैसे जाता होगा,,, यह सब सोचते हुए उसे अपनी दोनों टांगों के बीच हलचल सी महसूस होने लगी थी जो कि कुछ देर पहले ही राजू ने अपनी हथेली का कमाल दिखाते हुए उसकी बुर से काम रस निकाल दिया था,,। अशोक की बीवी अभी यही सब सोच रही थी कि उसके कानों में फिर से वही आवाज आई जागते रहो जागते रहो,,,, वह एकदम से घबरा गई,,, और राजू से बोली,,,।


जल्दी करो बबुआ,,,मुझे तो बहुत डर लग रहा है आज बाहर बार जागते रहो जागते रहो चिल्ला रहे हैं,,,


अरे भाभी तुम खामखा डरती हो जब मैं तुम्हारे साथ हूं तो किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है,,,।


नहीं नहीं बबुआ सब कुछ तो ठीक है लेकिन जल्दी से अंदर चलो,,,(अशोक की बीवी अपने चारों तरफ नजर घुमाते हुए बोली)


ठीक है भाभी मेरा भी हो गया,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपने खड़े लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसे अपने पहचाने को थोड़ा आगे की तरफ खींच कर उसे अंदर डालने की कोशिश करने लगा जो कि उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था इसलिए पजामे के अंदर जाने में थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी आखिरकार वह थोड़ी मशक्कत करने के बाद अपनी पजामे में लंड को ठुंसते हुए बोला,,,।)


क्या करूं भाभी बहुत परेशान कर देता है ज्यादा लंबा और मोटा है ना इसलिए पजामे में ठीक से जाता नहीं है,,,(अपने पजामे को व्यवस्थित करते हुए बोला लेकिन अभी भी उसके पजामे में खूंटा बना हुआ था,,, ज्यादा लंबा और मोटा कहकर राजू अशोक की बीवी को और ज्यादा तडपाना चाहता था,,,,,। और राजू की बातों को सुनकर वह तड़प भी रही थी,,, राजू की बातों को सुनकर अनजाने नहीं अचानक उसके मुंह से निकला,,,।

हां सच में बहुत मोटा और लंबा है,,,,
(अशोक की बीवी का जवाब सुनकर राजे मंद मंद मुस्कुराने लगा और उसके हाथों से लालटेन ले लिया और नीचे पड़ा डंडा भी हाथ में उठा लिया आगे-आगे अशोक की बीवी और पीछे पीछे राजू घर में प्रवेश कर गए,,,, अंदर आते ही अशोक की बीवी राजू से बोली)

अच्छे से दरवाजा बंद कर देना,,,


तुम चिंता मत करो भाभी,,,( और इतना कहने के साथ ही राजू लालटेन को नीचे जमीन पर रख दिया और डंडे को एक तरफ दीवार के सहारे खड़ा करके दरवाजा बंद करके उसकी सीटकनी लगा दिया ,,,, वापस अपने बिस्तर की तरफ आने लगा अशोक की बीवी दोनों खटिया के बीच में चटाई बिछाकर उस पर बैठ गई थी,,, उसके मन में भी हलचल मची हुई थी राजु के लंड को लेकर,,,और राजू बिस्तर पर बैठते हुए बोला,,,।)

क्या हुआ भाभी रात भर जागने का विचार है क्या,,,


नहीं बबुआ लेकिन ना जाने क्यों नींद नहीं आ रही है,,,

(अशोक की बीवी की बात सुनकर राजू समझ गया था कि उसे नींद क्यों नहीं आ रही है वह किसी भी तरह से आज की रात अशोक की बीवी की चुदाई करना चाहता था और दूसरी तरफ राजू के पिताजी हरिया खाना खाने के बाद अपनी छोटी बहन गुलाबी को इशारा करके अपने कमरे में चला गया और अपनी बीवी मधु के सारे कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया और उसे जबरदस्त तरीके से चोदने लगा दो कि पूरी तरह समझ तो गई थी हरिया यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बीवी को जमके चोदने के बाद वह इत्मीनान से गहरी नींद में सोती है और सुबह से पहले उसकी नींद नहीं खुलती,,इसीलिए हरिया अपनी बीवी को पूरी तरह से तृप्त कर देना चाहता था और थोड़ी ही देर में वहां अपनी बीवी की चुदाई करके कुछ देर तक उसके साथ बिस्तर पर लेटा रहा और जब देखा कि उसकी बीवी गहरी नींद में सो गई है तो वह धीरे से खटिया पर से उठा और बिना आवाज के दरवाजा खोल के बाहर से दरवाजा बंद कर लिया ताकि अगर किसी भी तरह से उसकी नींद खुल भी गई तो वह आराम से कोई बहाना बनाकर बच सकता है,,,, और वहां से निकल कर बगल वाले कमरे में जिसमें गुलाबी सोती है वहां दरवाजे पर आकर दरवाजे पर दस्तक देने के लिए जैसे ही वह हाथ दरवाजे पर रखा दरवाजा अपने आप ही खुल गया,,गुलाबी ने पहले से ही दरवाजा को खुला छोड़ दी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बड़ा भाई उसकी बीवी की चुदाई करके उसके पास जरूर आएगा,,, जैसे ही दरवाजा खुला
दरवाजे के खुलने की आवाज सुनकर खटिया पर ऐसे ही लेटकर अपने बड़े भाई का इंतजार कर रही गुलाबी तुरंत से उठ कर बैठ गई और दरवाजे पर अपने बड़े भाई को देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई,,, अंदर आकर दरवाजे को बंद करते हुए हरिया बोला,,,।

क्या बात है तुझे नींद नहीं आ रही है,,,


तुम्हारा इंतजार कर रही थी,,,,

(इतना सुनते ही हरिया आगे बढ़ा और खटिया पर बैठते हुए गुलाबी को अपनी बाहों में लेकर उसे खटिया पर पीठ के बल लेटाते हुए उसके ऊपर पूरी तरह से छा गया,,,।
 
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Lutgaya

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144
राजू की आंखों के सामने ही,,, पेशाब की तीव्रता को नहीं सहन कर पाने की स्थिति में अशोक की बीवी अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी गोरी गोरी गांड दिखाते हुए मुतने बैठ गई थी,,, राजू के एक हाथ में लालटेन थी और एक हाथ में डंडा,,, लालटेन उसने अपने लालच के बस हाथ में पकड़ रखा था डंडा अशोक की बीवी की तसल्ली के लिए,,,, और जिस चीज का लालच करके वह लालटेन लेकर बाहर आया था,,, उसमें उसे सफलता हाथ लगी थी,,,राजू जानबूझकर अशोक की बीवी से महज आठ दस कदमों की दूरी पर ही खड़ा था,,, अशोक की बीवी के भोलेपन का वह फायदा उठा रहा था और इतनी नजदीक खड़े होने की वजह से लालटेन की पीली रोशनी में अशोक की बीवी की गोरी गोरी गांड और ज्यादा चमक रही थी राजू तो यह देखकर एकदम मदहोश होने लगा,,, पजामें में उसका लंड गदर मचाने को तैयार था,,,, गहरी सांस लेते हुए वह इस लुभावने दृश्य का आनंद ले रहा था,,,

अशोक की बीवी मुतना शुरू कर दी थी और उसकी गुलाबी क्षेत्र में से आ रही सीटी की आवाज राजू के कानों में मिश्री घोल रही थी ,,मदहोशी का रस घोल रही थी,,, राजू अपने तन बदन में एक अद्भुत उत्तेजना का संचार होता हुआ महसूस कर रहा था,,,, उतेजना के मारे राजू का गला सूखता जा रहा था,,, चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था एक तो घने पेड़ के नीचे झाड़ियों के पास अशोक की बीवी बैठकर मुत रही थी ,, इसलिए अंधेरा कुछ ज्यादा ही था,,। अशोक की बीवी,, राजू के वादे पर यकीन कर गई थी यही उसके भोलेपन का सबसे बड़ा सबुत था,, उसे ऐसा ही लग रहा था कि,,,, राजू ने वादा किया है तो वह उसकी तरफ नहीं देखता होगा,,, वह शायद जमाने के दस्तूर से वाकिफ नहीं थी,,,,,, इसलिए वह सिर्फ चोर की चिंता करते हुए मुत रही थी और इधर उधर देख रही थी हालांकि पीछे की तरफ से निश्चित थी इसलिए पीछे की तरफ नजर घुमाकर नहीं देख रही थी,,, और इसी का फायदा उठाते हुए राजू एक बेहद खूबसूरत औरत को पेशाब करते हुए देखना उसकी खूबसूरत गोरी गोरी गांड लालटेन की रोशनी में चमक रही थी और उस गांड की चमक देख कर राजू का मन कर रहा था कि उसकी गांड को अपनी जीभ से चाट जाए,,,, राजू खान लंड पूरी तरह से अकड़न पर था,,, उसमें मीठा मीठा दर्द होने लगा था,, लंड की गर्मी शांत करना बहुत जरूरी हो गया था और इस समय उसका जुगाड केवलअशोक की बीवी के पास था लेकिन देखना यह था कि अशोक की बीवी उसके हाथ में कैसे आती है,,,

गुलाबी छेद से आ रही सीटी की आवाज और पेशाब की धार जो की बड़ी तीव्रता से जमीन पर पड़ रही थी उसकी आवाज दोनों मिलकर एक अद्भुत माहौल बना रहे थे,,,। राजू से बिल्कुल भी सहन नहीं हो रहा था उसकी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत औरत अपनी नंगी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही थीराजू का मन कर रहा था कि अपना लंड बाहर निकालकर ठीक है उसके पीछे जाकर बैठ जाए और अपने लंड को उसकी गोरी गोरी गांड पर रगडना शुरू कर दें,,,,,,, चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था झिंगुर और कुत्तों की आवाज ही आ रही थी ऐसे में माहौल बनाने के लिए राजू बोला,,,।

आराम से मुत लो भाभी मैं यहीं खड़ा हूं घबराना नहीं,,,।

(राजू की बातों को सुनकर अशोक की बीवी को हिम्मत मिल रही थी लेकिन उसकी यह बात सुनकर अनजाने नहीं वह पीछे नजर करके देखने लगी तो राजू को अपनी ही गांड की तरफ देखता पाकर वह पल भर में ही शर्म से सिहर उठी,,,मैं तुरंत दोनों हाथों के पीछे की तरफ लाकर अपनी बड़ी बड़ी गांड पर उसे ढकने के लिए रख दी,,,, उसकी इस हरकत पर राजू मन ही मन मुस्कुराने लगा,,, और उसकी इस हरकत की वजह जानने के लिए बोला,,,)

क्या हुआ भाभी,,,?

अरे बबुआ तुम तो मेरी तरफ ही देख रहे हो,,, मुझे शर्म आ रही है तुम तो वादा किए थे कि देखोगे नहीं,,,,


हां भाभी मैंने तुमसे वादा था किया था कि तुम्हारी तरफ देखूंगा नहीं लेकिन तुमको कुछ पता चला,,,,


क्या,,,?

सच में तुम को कुछ भी पता नहीं चला,,,(राजू जानबूझकर बात बनाते हुए बोला,,)

नहीं तो क्या हुआ,,,,(वह अभी भी अपनी गांड की फांकों को अपनी हथेलियों से ढकने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली,,,)

अरे भाभी अच्छा हुआ तुम्हें पता नहीं चला और अच्छा हुआ कि मैं देख रहा था इसमें कुछ गलत समझना नहीं लेकिन अगर देखता नहीं होता तो शायद सांप तुम्हें काट लिया होता,,,।


ससससस,, सांप,,,कककक,,,, किधर है,,,, किधर है,,,,(इतना कहते हुए घबरा करवा अपनी गोल गोल गांड को उठाकर खाली होने लगी तो राजू उसे सांत्वना देते हुए बोला,,,)


अरे अरे,,,,, यह क्या कर रही हो,,,(मौके का फायदा उठाते के राजू आगे बढ़ा और अशोक की बीपी के बेहद करीब पहुंच कर उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ दबाते हुए बोला,,,) बैठ जाओ भाभी,,, ठीक से मुत तो लो,,,, अब सांप नहीं है चला गया,,, ठीक तुम्हारे पीछे से गया है,,,,अगर मैं उसे डंडे की आवाज से बहकाया ना होता तो शायद वह तुम्हारी गांड में काट लेता,,,,(राजू कहा था अभी भी अशोक की बीवी के कंधे पर था और जिस तरह से हुआ है दबाए हुए था उसकी वजह से अशोक की बीवी वापस अपनी जगह पर बैठ गई थी,,,,


बाप रे इतना कुछ हो गया और मुझे पता तक नहीं चला अच्छा हुआ कि तुम पीछे खड़े थे,,,


अरे अच्छा हुआ कि मैं पीछे खड़ा तो था लेकिन अगर तुम्हें दिया हुआ वादा पूरा करता तो शायद इस समय ना जाने क्या हो गया होता वह तो अच्छा हुआ कि तुम्हारी गोरी गोरी गांड को देखने का लालच में अपने मन में रोक नहीं पाया और तुम्हारी गांड देखने के लिए ही मैं तुम्हारी तरफ देख रहा था और तभी एक बड़ा सा सांप गुजरने लगा,,,,


आवाज देना था ना,,,


आवाज देता तो तुम हड़बड़ा जाती घबरा जाती और ऐसे में तुम छटपटाने लगती और तुम्हारा पैर अगर उस पर पड़ जाता तो बिना कहे वह तुम्हें काट लेता इसलिए मैं दिमाग से काम लिया,,,,,, मैं कुछ बोला नहीं शांत रहा और उसे जमीन पर डंडा पटक कर उसका ध्यान भटकाने लगा और वह ठीक तुम्हारे पीछे से गुजर गया सच कहूं तो मैं भी एकदम घबरा गया था,,,, मेरे होते हुए अगर तुम्हें सांप काट लेता तो मेरी मर्दानगी पर दाग लग जाता,,,,(राजू अभी भी उसके कंधे पर हाथ रखे हुए था अब उसे उसकी गांड एकदम करीब से नजर आ रही थीजो कि लालटेन की रोशनी में कम साफ दिखाई दे रही थी उस पर दाग धब्बे बिल्कुल भी नहीं थे,,, एकदम बेदाग गोरापन था,,,, अशोक की बीवी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह एकदम से घबरा गई थी,,, उसे लग रहा था कि राजू जो कुछ भी बोला वह सच है,,, लेकिन या तो राजू की बनी बनाई बात थी वह पूरी तरह से अशोक की बीवी को अपने विश्वास में ले लेना चाहता था,,, अशोक की बीवी एकदम घबराई हुई थी इसलिए उसकी घबराहट को कम करते हुए राजू बोला,,,)

भाभी तुम्हारी तो पेशाब ही रुक गई सांप का नाम सुनकर,,, तुम चिंता मत करो ठीक से मुत लो,,, मेरे होते हुए तुम्हें कुछ नहीं होगा,,,,( और यह कहते हुए राजू ठीक उसके पीछे थोड़ा सा बगल में बैठ गया उसका हांथ अभी भी उसके कंधे पर था,,,अशोक की बीवी सांप का नाम सुनकर घबरा तो गई थी लेकिन राजू को अपने इतने करीब बैठा हुआ पाकर अजीब सी स्थिति का अनुभव कर रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, क्योंकि इस तरह से तो कभी उसके पति ने भी उसके साथ नहीं बैठा था,,,, राजु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) तुम चिंता मत करो भाभी पेशाब करो वरना रात को फिर लग जाएगी तो,,, क्या करोगी खामखा नींद खराब होगी,,,,(राजू की हिम्मत बढ़ने लगी थी क्योंकि ऐसा कहते हैं राजू कंधे पर से अपने हाथ को हटा कर सीधे उसकी गोरी गोरी गांड पर रख दिया था,,, और इस समय अशोक की बीवी अपनी हथेली से अपनी गांड को ढकने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रही थी क्योंकि सांप का नाम सुनकर हो रहा है एकदम से सिहर उठी थी और उसके दोनों हथेली अपनी गांड पर से अपने आप ही हट गई थी,,, गोरी गोरी गांड पर हाथ फेरते हुए राजू की उत्तेजना बढ़ने लगी थी एक हाथ में अभी भी उसके लालटेन की जिससे उसकी रोशनी में उसको सब कुछ साफ साफ दिखाई दे रहा था,,,एक अनजान जवान लड़की की हथेली अपनी गांड पर महसूस करते हैं कि अपने आप ही उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ में लगी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था अपने बदन में उसे अजीब सी हलचल महसूस होने लगी थी,,,, और राजू उसी तरह से अपनी हथेली को उसकी गोल गोल गांड पर फिराते हुए एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोला,,,),,

मुतो ना भाभी,,,,,,,,(राजू की हरकत की वजह से अशोक की बीवी की सांसे एकदम गहरी चलने लगी थी उसे अजीब सी हलचल महसूस होने लगी थी उसके बदन में सुरूर सा छाने लगा था,,, और अशोक की बीवी को एकदम स्थिर और शांत देखकर राजू कीमत बढ़ने लगी और वापस की गांड की दोनों फांकों के बीच लाते हुए अपनी हथेली को नीचे की तरफ सरकार ने लगा अपनी मोरी को हरकत देते हुए बहुत ही जल्द वह अशोक की बीवी के गांड के छेद पर अपनी उंगली फिराने लगा,,,,अशोक की बीवी एक दम मस्त हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है,,,,, राजू अपनी हरकत को आगे की ओर बढ़ने लगा अशोक की बीवी की गांड का छेद का स्पर्श अपनी उंगली पर होते ही उसका लंड एक दम फूलने पिचकने लगा,,, राजू के साथ-साथ अशोक की बीवी की हालत खराब होती जा रही थी राजू तो खेला खाया लड़का थाबहुत सी औरतों के साथ में इस तरह के संबंध बना चुका था इसलिए अपनी उत्तेजना को किसी हद तक दबाने में कामयाब हो गया था लेकिन अशोक की बीवी की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी,,,,, उसकी उखडती हुई सांसो को देखकर,,, राजू समझ गया था कि उसे मजा आ रहा है‌ वह मस्ती के सागर में गोते लगा रही है,,,,,,, अभी तक दोबारा उसकी बुर् के गुलाबी छेद से पेशाब की धार नहीं फुटी थी,,, राजू अपनी हथेली को उसकी गांड के छेद पर हल्के से दबाते हुए अपनी उंगली से उसके भूरे रंग के छेद को दबा दिया जिससे ना चाहते हुए भी अशोक की बीवी के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,,सससहहहह,,,, इस आवाज को सुनते ही राजू समझ गया कि उसका काम आसान होने वाला है,,,,,,, इसलिए फिर से,,,मुतो ना भाभी,,,बोलकर वह अपनी उंगलियों को आगे की तरफ बढ़ाने लगा,,, जैसे-जैसे ऊंगलियां बुर की तरफ आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे,, अशोक की बीबी की सांसे अटकने सी लगी थी,,, इस तरह की मदहोशी का अनुभव उसने आज तक नहीं की थी,,, अपने पति के द्वारा भी इस तरह की हरकत का सामना वह कभी नहीं कर पाई थी इसलिए शायद औरतों के खूबसूरत बदन से मर्दो कि इस तरह की हरकत के बारे में उसे कुछ भी समझ नहीं थी,,,,,।

रात की काली स्याह अंधेरे में पेशाब करते समय अशोक की बीवी को राजू पूरी तरह से उकसाने की कोशिश में लगा हुआ था,,,,, जहां उत्तेजना के मारे राजू की हालत खराब थी वहीं दूसरी तरफ अशोक की बीवी पानी पानी हुए जा रही थी क्योंकि इस तरह की छेड़छाड़ उसके पति ने आज तक उसके साथ नहीं किया था,, उसे तो उसकी बस शराब ही भली थी,,,,,,राजू अपनी हरकतों की वजह से पूरी तरह से अशोक की बीवी को अपनी गिरफ्त में ले चुका था,,,, राजू की हरकतों की वजह से पूरी तरह से भावनाओं में बह जाने के सिवा ऐसा लग रहा था कि जो की बीवी के पास दूसरा कोई चारा नहीं था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और राजू की उंगलियां उसकी गांड के छेद से आगे की तरफ बढ़ते हुए उसकी बुर की तरफ जा रही थी जो कि केवल एक अंगुल की ही दूरी पर ही थी,,, पर मात्र एक अंगुल की दूरी तय करने में राजू के साथ साथ अशोक की बीवी को भी अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी उत्तेजना और डर के मारे अशोक की बीवी की पेशाब रुक गई थी,,, गांड की दोनों फांकों के बीच की गर्माहट राजू अपने तन बदन में अच्छी तरह से महसूस कर रहा था छोटे से छेद की गर्मी से कहीं उसका लंड पिघल न जाए इस बात का भी उसे डर था,,,,

राजू की हरकतों की तड़प अशोक की बीवी के चेहरे पर साफ नजर आ रही थी उसकी सांसे भी गवाही दे रही थी कि वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी है और राजू अपनी उंगली को धीरे-धीरे करके ठीक उसकी गरम बुर पर रखते ही,,, उसके कान में धीरे से फुसफुसाते हुए बोला,,,।

मुतो ना भाभी रुक क्यों गई,,,?

बस राजू का इतना कहना था कि उत्तेजना के मारे एक बार फिर से अशोक की बीवी की गुलामी बुर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार चल चला कर बाहर निकलने लगी जोकि राजू की उंगलियों को भी गर्माहट के साथ भीगोते हुए जमीन पर गिर रही थी,,,, राजु एकदम से मस्त हो गया और अशोक की बीवी भी मदहोश होने लगी उसकी आ्खो में खुमारी जाने लगी किसी ने भी आज तक उसके साथ इस तरह की हरकत नहीं किया था,,, इसलिए राजू की इस तरह की हरकत की वजह से वह पूरी तरह से चुदवासी हुई जा रही थी,,,,,,अभी तक की हरकत को अशोक की बीवी किसी भी तरह से रोकने की कोशिश नहीं की थी इसलिए राजू की भी हिम्मत बढ़ती जा रही थी लालटेन उसके हाथों में थी बड़े से डंडे को व नीचे जमीन पर रख दिया था और उसी हाथ से अशोक की बीवी की बुर को रगड़ रहा था,,,आंखें दोनों की बंद हो चुकी थी दोनों अपनी अपनी दुनिया में पूरी तरह से मस्त हो चुके थे अशोक की बीवी पेशाब की धार अभी भी अपनी गुलाबी छेद में से निकाले जा रही थी,,,,,। अशोक की बीवी की बुर का गुलाबी छेद नीचे होने की वजह से राजू ठीक से उसकी बुर के दर्शन नहीं कर पाया था हालांकि अपनी हथेलियों से टटोलकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था,,,बुर की गर्माहट अपनी हथेली पर महसुस करते ही वह अशोक की बीवी के कानों में बोला,,,।)


तुम्हारी बुर बहुत गर्म है भाभी,,,,

सहहहहह ,,,,आहहहहहह,,,, यह क्या कर रहे हो बबुआ,,(अपनी दोनों आंखों को मदहोशी के आलम में बंद किए हुए ही वह राजू से बोली,,,)

तुम्हें ठीक से मुता रहा था डर के मारे तुम्हारी पेशाब रुक गई थी ना अगर मैं ऐसा ना करता तो तुम्हारी पेशाब रुकी रह जाती है और तुम्हें पेट में दर्द होना शुरू हो जाता,,,(राजू उसी तरह से अशोक की बीवी की बुर को अपनी हथेली से मसलते हुए बोला,,,, और अशोक की बीवी कुछ बोलने के लायक नहीं थी,,,। धीरे-धीरे अशोक की बीवी मूत्र क्रिया संपन्न कर ली लेकिन राजू की हथेली का आनंद लेने में पूरी तरह सेमशगूल हो गई राजू को इस बात का आभास हो गया था वह उसकी मस्ती को धीरे-धीरे और ज्यादा बढ़ा रहा था,,,,,, इसलिए वह धीरे से अपनी एक उंगली को उसकी बुर के अंदर सरका दिया और जैसे ही ऊंगली गुलाबी छेद में प्रवेश की वैसे ही अशोक की बीवी के मुंह से आह निकल गई,,,, उसकी आह की आवाज सुनकर राजू चारों खाने चित हो गया वह पूरी तरह से मदहोश हो गया और अपनी उंगली को पूरी की पूरी उसकी गुलाबी छेद में डालता हुआ बोला,,,,।

आहहहह भाभी मुत ली हो क्या,,,?

हां बबुआ,,,(गरम आहें भरते हुए वह बोली,,,)


तो लो भाभी अब तुम लालटेन पकड़ो मुझे भी जोरो की पेशाब लगी है,,,(राजू पेशाब करने के बहाने से उसे अपने लंड का दर्शन कराना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि वॉच आज इतनी भी भोली भाली हो लेकिन मोटा तगड़ा लैंड देखकर उसकी भी मस्ती पड़ जाएगी और उसे अपनी बुर में लेने के लिए तैयार हो जाएगी,,,, राजु की बात सुनकर अशोक की बीवी बिना कुछ बोले खड़ी हुई और अपने कपड़ों को व्यवस्थित करने के बाद लालटेन को अपने हाथ में ले ली,,, वह लालटेन को हाथ में लेकर पीछे कदम ले जाती इससे पहले ही जल्दबाजी दिखाते हुए राजू तुरंत अपने पजामे में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया,, ताकि लालटेन की रोशनी में वह अच्छी तरह से उसके एजेंट के दीदार कर सके,,, और ऐसा ही हुआ,,,, राजू जैसे ही लंड को अपने पजामे में से बाहर निकाल कर पेशाब करना शुरू किया वैसे ही अशोक की बीवी की नजर उसके मोटे तगड़े लंबे लंड पर चली गई जो कि पूरी तरह से खड़ा था,,, इतने मोटे तगड़े लंबे लंड पर नजर जाते ही अशोक की बीवी की हालत खराब हो गई क्योंकि उसने आज तक केवल अपने पति के ही लंड को देखी थी और अपने पति के लंड के साथ ज्यादा मस्ती नहीं कर पाई थी,,, जोकि राजू के लंड से आधा और पतला ही था,, इसलिए राजू के लंड को देखकर वह पूरी तरह से हैरान हो गई,,,। उसके पैर ज्यों के त्यों वही ठीठक कर रह गए,,,,, राजु के लंड को देखकर अशोक की बीवी की आंखों में चमक आ गई थी,,, उसे यह नजारा बेहद अद्भुत और रमणीय लग रहा था,,, तो राजू भी जानबूझकर अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए पेशाब कर रहा था और अशोक की बीवी की तरफ देखते हुए बोला,,,।


आहहहहह ,,,, भाभी ,,, तुमको पेशाब करता हुआ देखकर ,, मुझे भी जोरो की पैशाब लग गई,,,।
(लेकिन इस बार अशोक की बीवी कुछ बोली नही क्योंकि राजू के लंड को देखकर उसकी आंखों में शर्म की लालिमा छा गई थी,,और वह शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली थी,,,। राजू मन ही मन प्रसन्न हो रहा था उसका काम धीरे धीरे बनता हुआ नजर आ रहा था उसे अपने पर पूरा विश्वास हो गया था कि जब वहां अपनी उंगली को उसकी बुर में प्रवेश करा दिया तो लंड डालने में कितना देर लगेगा और वह जरा सा भी विरोध नहीं कर पाई थीऔरतों की संगत में राजू को औरतों के मन में क्या चल रहा है इस बारे में थोड़ा थोड़ा समझ में आने लगा था अशोक को देखकर वह समझ गया था कि उसकी बीवी पूरी तरह से प्यासी है तन की प्यार की,,, उसे तृप्ति का अहसास चाहिए संतुष्टि चाहिए जो कि वही उसे प्रदान कर सकता है,,,, पर आज की रात वह अशोक की बीवी के साथ चुदाई का खेल खेलना चाहता था,,,,।

भोली भाली अशोक के बीवी के मन में राजू के लंड को देखकर भी हलचल हो रही थी और वह अपने मन में यही सोच रही थी कि बाप रे इतना मोटा और लंबा लंड,,, उसके पति का तो इसके सामने कुछ भी नहीं है,,, बाप रे यह बुर में कैसे जाता होगा,,, यह सब सोचते हुए उसे अपनी दोनों टांगों के बीच हलचल सी महसूस होने लगी थी जो कि कुछ देर पहले ही राजू ने अपनी हथेली का कमाल दिखाते हुए उसकी बुर से काम रस निकाल दिया था,,। अशोक की बीवी अभी यही सब सोच रही थी कि उसके कानों में फिर से वही आवाज आई जागते रहो जागते रहो,,,, वह एकदम से घबरा गई,,, और राजू से बोली,,,।


जल्दी करो बबुआ,,,मुझे तो बहुत डर लग रहा है आज बाहर बार जागते रहो जागते रहो चिल्ला रहे हैं,,,


अरे भाभी तुम खामखा डरती हो जब मैं तुम्हारे साथ हूं तो किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है,,,।


नहीं नहीं बबुआ सब कुछ तो ठीक है लेकिन जल्दी से अंदर चलो,,,(अशोक की बीवी अपने चारों तरफ नजर घुमाते हुए बोली)


ठीक है भाभी मेरा भी हो गया,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपने खड़े लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसे अपने पहचाने को थोड़ा आगे की तरफ खींच कर उसे अंदर डालने की कोशिश करने लगा जो कि उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था इसलिए पजामे के अंदर जाने में थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी आखिरकार वह थोड़ी मशक्कत करने के बाद अपनी पजामे में लंड को ठुंसते हुए बोला,,,।)


क्या करूं भाभी बहुत परेशान कर देता है ज्यादा लंबा और मोटा है ना इसलिए पजामे में ठीक से जाता नहीं है,,,(अपने पजामे को व्यवस्थित करते हुए बोला लेकिन अभी भी उसके पजामे में खूंटा बना हुआ था,,, ज्यादा लंबा और मोटा कहकर राजू अशोक की बीवी को और ज्यादा तडपाना चाहता था,,,,,। और राजू की बातों को सुनकर वह तड़प भी रही थी,,, राजू की बातों को सुनकर अनजाने नहीं अचानक उसके मुंह से निकला,,,।

हां सच में बहुत मोटा और लंबा है,,,,
(अशोक की बीवी का जवाब सुनकर राजे मंद मंद मुस्कुराने लगा और उसके हाथों से लालटेन ले लिया और नीचे पड़ा डंडा भी हाथ में उठा लिया आगे-आगे अशोक की बीवी और पीछे पीछे राजू घर में प्रवेश कर गए,,,, अंदर आते ही अशोक की बीवी राजू से बोली)

अच्छे से दरवाजा बंद कर देना,,,


तुम चिंता मत करो भाभी,,,( और इतना कहने के साथ ही राजू लालटेन को नीचे जमीन पर रख दिया और डंडे को एक तरफ दीवार के सहारे खड़ा करके दरवाजा बंद करके उसकी सीटकनी लगा दिया ,,,, वापस अपने बिस्तर की तरफ आने लगा अशोक की बीवी दोनों खटिया के बीच में चटाई बिछाकर उस पर बैठ गई थी,,, उसके मन में भी हलचल मची हुई थी राजु के लंड को लेकर,,,और राजू बिस्तर पर बैठते हुए बोला,,,।)

क्या हुआ भाभी रात भर जागने का विचार है क्या,,,


नहीं बबुआ लेकिन ना जाने क्यों नींद नहीं आ रही है,,,

(अशोक की बीवी की बात सुनकर राजू समझ गया था कि उसे नींद क्यों नहीं आ रही है वह किसी भी तरह से आज की रात अशोक की बीवी की चुदाई करना चाहता था और दूसरी तरफ राजू के पिताजी हरिया खाना खाने के बाद अपनी छोटी बहन गुलाबी को इशारा करके अपने कमरे में चला गया और अपनी बीवी मधु के सारे कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया और उसे जबरदस्त तरीके से चोदने लगा दो कि पूरी तरह समझ तो गई थी हरिया यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बीवी को जमके चोदने के बाद वह इत्मीनान से गहरी नींद में सोती है और सुबह से पहले उसकी नींद नहीं खुलती,,इसीलिए हरिया अपनी बीवी को पूरी तरह से तृप्त कर देना चाहता था और थोड़ी ही देर में वहां अपनी बीवी की चुदाई करके कुछ देर तक उसके साथ बिस्तर पर लेटा रहा और जब देखा कि उसकी बीवी गहरी नींद में सो गई है तो वह धीरे से खटिया पर से उठा और बिना आवाज के दरवाजा खोल के बाहर से दरवाजा बंद कर लिया ताकि अगर किसी भी तरह से उसकी नींद खुल भी गई तो वह आराम से कोई बहाना बनाकर बच सकता है,,,, और वहां से निकल कर बगल वाले कमरे में जिसमें गुलाबी सोती है वहां दरवाजे पर आकर दरवाजे पर दस्तक देने के लिए जैसे ही वह हाथ दरवाजे पर रखा दरवाजा अपने आप ही खुल गया,,गुलाबी ने पहले से ही दरवाजा को खुला छोड़ दी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बड़ा भाई उसकी बीवी की चुदाई करके उसके पास जरूर आएगा,,, जैसे ही दरवाजा खुला
दरवाजे के खुलने की आवाज सुनकर खटिया पर ऐसे ही लेटकर अपने बड़े भाई का इंतजार कर रही गुलाबी तुरंत से उठ कर बैठ गई और दरवाजे पर अपने बड़े भाई को देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई,,, अंदर आकर दरवाजे को बंद करते हुए हरिया बोला,,,।

क्या बात है तुझे नींद नहीं आ रही है,,,


तुम्हारा इंतजार कर रही थी,,,,

(इतना सुनते ही हरिया आगे बढ़ा और खटिया पर बैठते हुए गुलाबी को अपनी बाहों में लेकर उसे खटिया पर पीठ के बल लेटाते हुए उसके ऊपर पूरी तरह से छा गया,,,।
वाह rohnny4545 bhai मजा आ गया।
 

Ajju Landwalia

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राजू की आंखों के सामने ही,,, पेशाब की तीव्रता को नहीं सहन कर पाने की स्थिति में अशोक की बीवी अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी गोरी गोरी गांड दिखाते हुए मुतने बैठ गई थी,,, राजू के एक हाथ में लालटेन थी और एक हाथ में डंडा,,, लालटेन उसने अपने लालच के बस हाथ में पकड़ रखा था डंडा अशोक की बीवी की तसल्ली के लिए,,,, और जिस चीज का लालच करके वह लालटेन लेकर बाहर आया था,,, उसमें उसे सफलता हाथ लगी थी,,,राजू जानबूझकर अशोक की बीवी से महज आठ दस कदमों की दूरी पर ही खड़ा था,,, अशोक की बीवी के भोलेपन का वह फायदा उठा रहा था और इतनी नजदीक खड़े होने की वजह से लालटेन की पीली रोशनी में अशोक की बीवी की गोरी गोरी गांड और ज्यादा चमक रही थी राजू तो यह देखकर एकदम मदहोश होने लगा,,, पजामें में उसका लंड गदर मचाने को तैयार था,,,, गहरी सांस लेते हुए वह इस लुभावने दृश्य का आनंद ले रहा था,,,

अशोक की बीवी मुतना शुरू कर दी थी और उसकी गुलाबी क्षेत्र में से आ रही सीटी की आवाज राजू के कानों में मिश्री घोल रही थी ,,मदहोशी का रस घोल रही थी,,, राजू अपने तन बदन में एक अद्भुत उत्तेजना का संचार होता हुआ महसूस कर रहा था,,,, उतेजना के मारे राजू का गला सूखता जा रहा था,,, चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था एक तो घने पेड़ के नीचे झाड़ियों के पास अशोक की बीवी बैठकर मुत रही थी ,, इसलिए अंधेरा कुछ ज्यादा ही था,,। अशोक की बीवी,, राजू के वादे पर यकीन कर गई थी यही उसके भोलेपन का सबसे बड़ा सबुत था,, उसे ऐसा ही लग रहा था कि,,,, राजू ने वादा किया है तो वह उसकी तरफ नहीं देखता होगा,,, वह शायद जमाने के दस्तूर से वाकिफ नहीं थी,,,,,, इसलिए वह सिर्फ चोर की चिंता करते हुए मुत रही थी और इधर उधर देख रही थी हालांकि पीछे की तरफ से निश्चित थी इसलिए पीछे की तरफ नजर घुमाकर नहीं देख रही थी,,, और इसी का फायदा उठाते हुए राजू एक बेहद खूबसूरत औरत को पेशाब करते हुए देखना उसकी खूबसूरत गोरी गोरी गांड लालटेन की रोशनी में चमक रही थी और उस गांड की चमक देख कर राजू का मन कर रहा था कि उसकी गांड को अपनी जीभ से चाट जाए,,,, राजू खान लंड पूरी तरह से अकड़न पर था,,, उसमें मीठा मीठा दर्द होने लगा था,, लंड की गर्मी शांत करना बहुत जरूरी हो गया था और इस समय उसका जुगाड केवलअशोक की बीवी के पास था लेकिन देखना यह था कि अशोक की बीवी उसके हाथ में कैसे आती है,,,

गुलाबी छेद से आ रही सीटी की आवाज और पेशाब की धार जो की बड़ी तीव्रता से जमीन पर पड़ रही थी उसकी आवाज दोनों मिलकर एक अद्भुत माहौल बना रहे थे,,,। राजू से बिल्कुल भी सहन नहीं हो रहा था उसकी आंखों के सामने बेहद खूबसूरत औरत अपनी नंगी गांड दिखाते हुए पेशाब कर रही थीराजू का मन कर रहा था कि अपना लंड बाहर निकालकर ठीक है उसके पीछे जाकर बैठ जाए और अपने लंड को उसकी गोरी गोरी गांड पर रगडना शुरू कर दें,,,,,,, चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था झिंगुर और कुत्तों की आवाज ही आ रही थी ऐसे में माहौल बनाने के लिए राजू बोला,,,।

आराम से मुत लो भाभी मैं यहीं खड़ा हूं घबराना नहीं,,,।

(राजू की बातों को सुनकर अशोक की बीवी को हिम्मत मिल रही थी लेकिन उसकी यह बात सुनकर अनजाने नहीं वह पीछे नजर करके देखने लगी तो राजू को अपनी ही गांड की तरफ देखता पाकर वह पल भर में ही शर्म से सिहर उठी,,,मैं तुरंत दोनों हाथों के पीछे की तरफ लाकर अपनी बड़ी बड़ी गांड पर उसे ढकने के लिए रख दी,,,, उसकी इस हरकत पर राजू मन ही मन मुस्कुराने लगा,,, और उसकी इस हरकत की वजह जानने के लिए बोला,,,)

क्या हुआ भाभी,,,?

अरे बबुआ तुम तो मेरी तरफ ही देख रहे हो,,, मुझे शर्म आ रही है तुम तो वादा किए थे कि देखोगे नहीं,,,,


हां भाभी मैंने तुमसे वादा था किया था कि तुम्हारी तरफ देखूंगा नहीं लेकिन तुमको कुछ पता चला,,,,


क्या,,,?

सच में तुम को कुछ भी पता नहीं चला,,,(राजू जानबूझकर बात बनाते हुए बोला,,)

नहीं तो क्या हुआ,,,,(वह अभी भी अपनी गांड की फांकों को अपनी हथेलियों से ढकने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली,,,)

अरे भाभी अच्छा हुआ तुम्हें पता नहीं चला और अच्छा हुआ कि मैं देख रहा था इसमें कुछ गलत समझना नहीं लेकिन अगर देखता नहीं होता तो शायद सांप तुम्हें काट लिया होता,,,।


ससससस,, सांप,,,कककक,,,, किधर है,,,, किधर है,,,,(इतना कहते हुए घबरा करवा अपनी गोल गोल गांड को उठाकर खाली होने लगी तो राजू उसे सांत्वना देते हुए बोला,,,)


अरे अरे,,,,, यह क्या कर रही हो,,,(मौके का फायदा उठाते के राजू आगे बढ़ा और अशोक की बीपी के बेहद करीब पहुंच कर उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ दबाते हुए बोला,,,) बैठ जाओ भाभी,,, ठीक से मुत तो लो,,,, अब सांप नहीं है चला गया,,, ठीक तुम्हारे पीछे से गया है,,,,अगर मैं उसे डंडे की आवाज से बहकाया ना होता तो शायद वह तुम्हारी गांड में काट लेता,,,,(राजू कहा था अभी भी अशोक की बीवी के कंधे पर था और जिस तरह से हुआ है दबाए हुए था उसकी वजह से अशोक की बीवी वापस अपनी जगह पर बैठ गई थी,,,,


बाप रे इतना कुछ हो गया और मुझे पता तक नहीं चला अच्छा हुआ कि तुम पीछे खड़े थे,,,


अरे अच्छा हुआ कि मैं पीछे खड़ा तो था लेकिन अगर तुम्हें दिया हुआ वादा पूरा करता तो शायद इस समय ना जाने क्या हो गया होता वह तो अच्छा हुआ कि तुम्हारी गोरी गोरी गांड को देखने का लालच में अपने मन में रोक नहीं पाया और तुम्हारी गांड देखने के लिए ही मैं तुम्हारी तरफ देख रहा था और तभी एक बड़ा सा सांप गुजरने लगा,,,,


आवाज देना था ना,,,


आवाज देता तो तुम हड़बड़ा जाती घबरा जाती और ऐसे में तुम छटपटाने लगती और तुम्हारा पैर अगर उस पर पड़ जाता तो बिना कहे वह तुम्हें काट लेता इसलिए मैं दिमाग से काम लिया,,,,,, मैं कुछ बोला नहीं शांत रहा और उसे जमीन पर डंडा पटक कर उसका ध्यान भटकाने लगा और वह ठीक तुम्हारे पीछे से गुजर गया सच कहूं तो मैं भी एकदम घबरा गया था,,,, मेरे होते हुए अगर तुम्हें सांप काट लेता तो मेरी मर्दानगी पर दाग लग जाता,,,,(राजू अभी भी उसके कंधे पर हाथ रखे हुए था अब उसे उसकी गांड एकदम करीब से नजर आ रही थीजो कि लालटेन की रोशनी में कम साफ दिखाई दे रही थी उस पर दाग धब्बे बिल्कुल भी नहीं थे,,, एकदम बेदाग गोरापन था,,,, अशोक की बीवी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी वह एकदम से घबरा गई थी,,, उसे लग रहा था कि राजू जो कुछ भी बोला वह सच है,,, लेकिन या तो राजू की बनी बनाई बात थी वह पूरी तरह से अशोक की बीवी को अपने विश्वास में ले लेना चाहता था,,, अशोक की बीवी एकदम घबराई हुई थी इसलिए उसकी घबराहट को कम करते हुए राजू बोला,,,)

भाभी तुम्हारी तो पेशाब ही रुक गई सांप का नाम सुनकर,,, तुम चिंता मत करो ठीक से मुत लो,,, मेरे होते हुए तुम्हें कुछ नहीं होगा,,,,( और यह कहते हुए राजू ठीक उसके पीछे थोड़ा सा बगल में बैठ गया उसका हांथ अभी भी उसके कंधे पर था,,,अशोक की बीवी सांप का नाम सुनकर घबरा तो गई थी लेकिन राजू को अपने इतने करीब बैठा हुआ पाकर अजीब सी स्थिति का अनुभव कर रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, क्योंकि इस तरह से तो कभी उसके पति ने भी उसके साथ नहीं बैठा था,,,, राजु अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) तुम चिंता मत करो भाभी पेशाब करो वरना रात को फिर लग जाएगी तो,,, क्या करोगी खामखा नींद खराब होगी,,,,(राजू की हिम्मत बढ़ने लगी थी क्योंकि ऐसा कहते हैं राजू कंधे पर से अपने हाथ को हटा कर सीधे उसकी गोरी गोरी गांड पर रख दिया था,,, और इस समय अशोक की बीवी अपनी हथेली से अपनी गांड को ढकने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रही थी क्योंकि सांप का नाम सुनकर हो रहा है एकदम से सिहर उठी थी और उसके दोनों हथेली अपनी गांड पर से अपने आप ही हट गई थी,,, गोरी गोरी गांड पर हाथ फेरते हुए राजू की उत्तेजना बढ़ने लगी थी एक हाथ में अभी भी उसके लालटेन की जिससे उसकी रोशनी में उसको सब कुछ साफ साफ दिखाई दे रहा था,,,एक अनजान जवान लड़की की हथेली अपनी गांड पर महसूस करते हैं कि अपने आप ही उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ में लगी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था अपने बदन में उसे अजीब सी हलचल महसूस होने लगी थी,,,, और राजू उसी तरह से अपनी हथेली को उसकी गोल गोल गांड पर फिराते हुए एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोला,,,),,

मुतो ना भाभी,,,,,,,,(राजू की हरकत की वजह से अशोक की बीवी की सांसे एकदम गहरी चलने लगी थी उसे अजीब सी हलचल महसूस होने लगी थी उसके बदन में सुरूर सा छाने लगा था,,, और अशोक की बीवी को एकदम स्थिर और शांत देखकर राजू कीमत बढ़ने लगी और वापस की गांड की दोनों फांकों के बीच लाते हुए अपनी हथेली को नीचे की तरफ सरकार ने लगा अपनी मोरी को हरकत देते हुए बहुत ही जल्द वह अशोक की बीवी के गांड के छेद पर अपनी उंगली फिराने लगा,,,,अशोक की बीवी एक दम मस्त हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है,,,,, राजू अपनी हरकत को आगे की ओर बढ़ने लगा अशोक की बीवी की गांड का छेद का स्पर्श अपनी उंगली पर होते ही उसका लंड एक दम फूलने पिचकने लगा,,, राजू के साथ-साथ अशोक की बीवी की हालत खराब होती जा रही थी राजू तो खेला खाया लड़का थाबहुत सी औरतों के साथ में इस तरह के संबंध बना चुका था इसलिए अपनी उत्तेजना को किसी हद तक दबाने में कामयाब हो गया था लेकिन अशोक की बीवी की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी,,,,, उसकी उखडती हुई सांसो को देखकर,,, राजू समझ गया था कि उसे मजा आ रहा है‌ वह मस्ती के सागर में गोते लगा रही है,,,,,,, अभी तक दोबारा उसकी बुर् के गुलाबी छेद से पेशाब की धार नहीं फुटी थी,,, राजू अपनी हथेली को उसकी गांड के छेद पर हल्के से दबाते हुए अपनी उंगली से उसके भूरे रंग के छेद को दबा दिया जिससे ना चाहते हुए भी अशोक की बीवी के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,,सससहहहह,,,, इस आवाज को सुनते ही राजू समझ गया कि उसका काम आसान होने वाला है,,,,,,, इसलिए फिर से,,,मुतो ना भाभी,,,बोलकर वह अपनी उंगलियों को आगे की तरफ बढ़ाने लगा,,, जैसे-जैसे ऊंगलियां बुर की तरफ आगे बढ़ रही थी वैसे वैसे,, अशोक की बीबी की सांसे अटकने सी लगी थी,,, इस तरह की मदहोशी का अनुभव उसने आज तक नहीं की थी,,, अपने पति के द्वारा भी इस तरह की हरकत का सामना वह कभी नहीं कर पाई थी इसलिए शायद औरतों के खूबसूरत बदन से मर्दो कि इस तरह की हरकत के बारे में उसे कुछ भी समझ नहीं थी,,,,,।

रात की काली स्याह अंधेरे में पेशाब करते समय अशोक की बीवी को राजू पूरी तरह से उकसाने की कोशिश में लगा हुआ था,,,,, जहां उत्तेजना के मारे राजू की हालत खराब थी वहीं दूसरी तरफ अशोक की बीवी पानी पानी हुए जा रही थी क्योंकि इस तरह की छेड़छाड़ उसके पति ने आज तक उसके साथ नहीं किया था,, उसे तो उसकी बस शराब ही भली थी,,,,,,राजू अपनी हरकतों की वजह से पूरी तरह से अशोक की बीवी को अपनी गिरफ्त में ले चुका था,,,, राजू की हरकतों की वजह से पूरी तरह से भावनाओं में बह जाने के सिवा ऐसा लग रहा था कि जो की बीवी के पास दूसरा कोई चारा नहीं था,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और राजू की उंगलियां उसकी गांड के छेद से आगे की तरफ बढ़ते हुए उसकी बुर की तरफ जा रही थी जो कि केवल एक अंगुल की ही दूरी पर ही थी,,, पर मात्र एक अंगुल की दूरी तय करने में राजू के साथ साथ अशोक की बीवी को भी अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी उत्तेजना और डर के मारे अशोक की बीवी की पेशाब रुक गई थी,,, गांड की दोनों फांकों के बीच की गर्माहट राजू अपने तन बदन में अच्छी तरह से महसूस कर रहा था छोटे से छेद की गर्मी से कहीं उसका लंड पिघल न जाए इस बात का भी उसे डर था,,,,

राजू की हरकतों की तड़प अशोक की बीवी के चेहरे पर साफ नजर आ रही थी उसकी सांसे भी गवाही दे रही थी कि वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी है और राजू अपनी उंगली को धीरे-धीरे करके ठीक उसकी गरम बुर पर रखते ही,,, उसके कान में धीरे से फुसफुसाते हुए बोला,,,।

मुतो ना भाभी रुक क्यों गई,,,?

बस राजू का इतना कहना था कि उत्तेजना के मारे एक बार फिर से अशोक की बीवी की गुलामी बुर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार चल चला कर बाहर निकलने लगी जोकि राजू की उंगलियों को भी गर्माहट के साथ भीगोते हुए जमीन पर गिर रही थी,,,, राजु एकदम से मस्त हो गया और अशोक की बीवी भी मदहोश होने लगी उसकी आ्खो में खुमारी जाने लगी किसी ने भी आज तक उसके साथ इस तरह की हरकत नहीं किया था,,, इसलिए राजू की इस तरह की हरकत की वजह से वह पूरी तरह से चुदवासी हुई जा रही थी,,,,,,अभी तक की हरकत को अशोक की बीवी किसी भी तरह से रोकने की कोशिश नहीं की थी इसलिए राजू की भी हिम्मत बढ़ती जा रही थी लालटेन उसके हाथों में थी बड़े से डंडे को व नीचे जमीन पर रख दिया था और उसी हाथ से अशोक की बीवी की बुर को रगड़ रहा था,,,आंखें दोनों की बंद हो चुकी थी दोनों अपनी अपनी दुनिया में पूरी तरह से मस्त हो चुके थे अशोक की बीवी पेशाब की धार अभी भी अपनी गुलाबी छेद में से निकाले जा रही थी,,,,,। अशोक की बीवी की बुर का गुलाबी छेद नीचे होने की वजह से राजू ठीक से उसकी बुर के दर्शन नहीं कर पाया था हालांकि अपनी हथेलियों से टटोलकर वह पूरी तरह से मस्त हो चुका था,,,बुर की गर्माहट अपनी हथेली पर महसुस करते ही वह अशोक की बीवी के कानों में बोला,,,।)


तुम्हारी बुर बहुत गर्म है भाभी,,,,

सहहहहह ,,,,आहहहहहह,,,, यह क्या कर रहे हो बबुआ,,(अपनी दोनों आंखों को मदहोशी के आलम में बंद किए हुए ही वह राजू से बोली,,,)

तुम्हें ठीक से मुता रहा था डर के मारे तुम्हारी पेशाब रुक गई थी ना अगर मैं ऐसा ना करता तो तुम्हारी पेशाब रुकी रह जाती है और तुम्हें पेट में दर्द होना शुरू हो जाता,,,(राजू उसी तरह से अशोक की बीवी की बुर को अपनी हथेली से मसलते हुए बोला,,,, और अशोक की बीवी कुछ बोलने के लायक नहीं थी,,,। धीरे-धीरे अशोक की बीवी मूत्र क्रिया संपन्न कर ली लेकिन राजू की हथेली का आनंद लेने में पूरी तरह सेमशगूल हो गई राजू को इस बात का आभास हो गया था वह उसकी मस्ती को धीरे-धीरे और ज्यादा बढ़ा रहा था,,,,,, इसलिए वह धीरे से अपनी एक उंगली को उसकी बुर के अंदर सरका दिया और जैसे ही ऊंगली गुलाबी छेद में प्रवेश की वैसे ही अशोक की बीवी के मुंह से आह निकल गई,,,, उसकी आह की आवाज सुनकर राजू चारों खाने चित हो गया वह पूरी तरह से मदहोश हो गया और अपनी उंगली को पूरी की पूरी उसकी गुलाबी छेद में डालता हुआ बोला,,,,।

आहहहह भाभी मुत ली हो क्या,,,?

हां बबुआ,,,(गरम आहें भरते हुए वह बोली,,,)


तो लो भाभी अब तुम लालटेन पकड़ो मुझे भी जोरो की पेशाब लगी है,,,(राजू पेशाब करने के बहाने से उसे अपने लंड का दर्शन कराना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि वॉच आज इतनी भी भोली भाली हो लेकिन मोटा तगड़ा लैंड देखकर उसकी भी मस्ती पड़ जाएगी और उसे अपनी बुर में लेने के लिए तैयार हो जाएगी,,,, राजु की बात सुनकर अशोक की बीवी बिना कुछ बोले खड़ी हुई और अपने कपड़ों को व्यवस्थित करने के बाद लालटेन को अपने हाथ में ले ली,,, वह लालटेन को हाथ में लेकर पीछे कदम ले जाती इससे पहले ही जल्दबाजी दिखाते हुए राजू तुरंत अपने पजामे में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया,, ताकि लालटेन की रोशनी में वह अच्छी तरह से उसके एजेंट के दीदार कर सके,,, और ऐसा ही हुआ,,,, राजू जैसे ही लंड को अपने पजामे में से बाहर निकाल कर पेशाब करना शुरू किया वैसे ही अशोक की बीवी की नजर उसके मोटे तगड़े लंबे लंड पर चली गई जो कि पूरी तरह से खड़ा था,,, इतने मोटे तगड़े लंबे लंड पर नजर जाते ही अशोक की बीवी की हालत खराब हो गई क्योंकि उसने आज तक केवल अपने पति के ही लंड को देखी थी और अपने पति के लंड के साथ ज्यादा मस्ती नहीं कर पाई थी,,, जोकि राजू के लंड से आधा और पतला ही था,, इसलिए राजू के लंड को देखकर वह पूरी तरह से हैरान हो गई,,,। उसके पैर ज्यों के त्यों वही ठीठक कर रह गए,,,,, राजु के लंड को देखकर अशोक की बीवी की आंखों में चमक आ गई थी,,, उसे यह नजारा बेहद अद्भुत और रमणीय लग रहा था,,, तो राजू भी जानबूझकर अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए पेशाब कर रहा था और अशोक की बीवी की तरफ देखते हुए बोला,,,।


आहहहहह ,,,, भाभी ,,, तुमको पेशाब करता हुआ देखकर ,, मुझे भी जोरो की पैशाब लग गई,,,।
(लेकिन इस बार अशोक की बीवी कुछ बोली नही क्योंकि राजू के लंड को देखकर उसकी आंखों में शर्म की लालिमा छा गई थी,,और वह शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली थी,,,। राजू मन ही मन प्रसन्न हो रहा था उसका काम धीरे धीरे बनता हुआ नजर आ रहा था उसे अपने पर पूरा विश्वास हो गया था कि जब वहां अपनी उंगली को उसकी बुर में प्रवेश करा दिया तो लंड डालने में कितना देर लगेगा और वह जरा सा भी विरोध नहीं कर पाई थीऔरतों की संगत में राजू को औरतों के मन में क्या चल रहा है इस बारे में थोड़ा थोड़ा समझ में आने लगा था अशोक को देखकर वह समझ गया था कि उसकी बीवी पूरी तरह से प्यासी है तन की प्यार की,,, उसे तृप्ति का अहसास चाहिए संतुष्टि चाहिए जो कि वही उसे प्रदान कर सकता है,,,, पर आज की रात वह अशोक की बीवी के साथ चुदाई का खेल खेलना चाहता था,,,,।

भोली भाली अशोक के बीवी के मन में राजू के लंड को देखकर भी हलचल हो रही थी और वह अपने मन में यही सोच रही थी कि बाप रे इतना मोटा और लंबा लंड,,, उसके पति का तो इसके सामने कुछ भी नहीं है,,, बाप रे यह बुर में कैसे जाता होगा,,, यह सब सोचते हुए उसे अपनी दोनों टांगों के बीच हलचल सी महसूस होने लगी थी जो कि कुछ देर पहले ही राजू ने अपनी हथेली का कमाल दिखाते हुए उसकी बुर से काम रस निकाल दिया था,,। अशोक की बीवी अभी यही सब सोच रही थी कि उसके कानों में फिर से वही आवाज आई जागते रहो जागते रहो,,,, वह एकदम से घबरा गई,,, और राजू से बोली,,,।


जल्दी करो बबुआ,,,मुझे तो बहुत डर लग रहा है आज बाहर बार जागते रहो जागते रहो चिल्ला रहे हैं,,,


अरे भाभी तुम खामखा डरती हो जब मैं तुम्हारे साथ हूं तो किसी बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है,,,।


नहीं नहीं बबुआ सब कुछ तो ठीक है लेकिन जल्दी से अंदर चलो,,,(अशोक की बीवी अपने चारों तरफ नजर घुमाते हुए बोली)


ठीक है भाभी मेरा भी हो गया,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपने खड़े लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसे अपने पहचाने को थोड़ा आगे की तरफ खींच कर उसे अंदर डालने की कोशिश करने लगा जो कि उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था इसलिए पजामे के अंदर जाने में थोड़ी मशक्कत करनी पड़ी आखिरकार वह थोड़ी मशक्कत करने के बाद अपनी पजामे में लंड को ठुंसते हुए बोला,,,।)


क्या करूं भाभी बहुत परेशान कर देता है ज्यादा लंबा और मोटा है ना इसलिए पजामे में ठीक से जाता नहीं है,,,(अपने पजामे को व्यवस्थित करते हुए बोला लेकिन अभी भी उसके पजामे में खूंटा बना हुआ था,,, ज्यादा लंबा और मोटा कहकर राजू अशोक की बीवी को और ज्यादा तडपाना चाहता था,,,,,। और राजू की बातों को सुनकर वह तड़प भी रही थी,,, राजू की बातों को सुनकर अनजाने नहीं अचानक उसके मुंह से निकला,,,।

हां सच में बहुत मोटा और लंबा है,,,,
(अशोक की बीवी का जवाब सुनकर राजे मंद मंद मुस्कुराने लगा और उसके हाथों से लालटेन ले लिया और नीचे पड़ा डंडा भी हाथ में उठा लिया आगे-आगे अशोक की बीवी और पीछे पीछे राजू घर में प्रवेश कर गए,,,, अंदर आते ही अशोक की बीवी राजू से बोली)

अच्छे से दरवाजा बंद कर देना,,,


तुम चिंता मत करो भाभी,,,( और इतना कहने के साथ ही राजू लालटेन को नीचे जमीन पर रख दिया और डंडे को एक तरफ दीवार के सहारे खड़ा करके दरवाजा बंद करके उसकी सीटकनी लगा दिया ,,,, वापस अपने बिस्तर की तरफ आने लगा अशोक की बीवी दोनों खटिया के बीच में चटाई बिछाकर उस पर बैठ गई थी,,, उसके मन में भी हलचल मची हुई थी राजु के लंड को लेकर,,,और राजू बिस्तर पर बैठते हुए बोला,,,।)

क्या हुआ भाभी रात भर जागने का विचार है क्या,,,


नहीं बबुआ लेकिन ना जाने क्यों नींद नहीं आ रही है,,,

(अशोक की बीवी की बात सुनकर राजू समझ गया था कि उसे नींद क्यों नहीं आ रही है वह किसी भी तरह से आज की रात अशोक की बीवी की चुदाई करना चाहता था और दूसरी तरफ राजू के पिताजी हरिया खाना खाने के बाद अपनी छोटी बहन गुलाबी को इशारा करके अपने कमरे में चला गया और अपनी बीवी मधु के सारे कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया और उसे जबरदस्त तरीके से चोदने लगा दो कि पूरी तरह समझ तो गई थी हरिया यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी बीवी को जमके चोदने के बाद वह इत्मीनान से गहरी नींद में सोती है और सुबह से पहले उसकी नींद नहीं खुलती,,इसीलिए हरिया अपनी बीवी को पूरी तरह से तृप्त कर देना चाहता था और थोड़ी ही देर में वहां अपनी बीवी की चुदाई करके कुछ देर तक उसके साथ बिस्तर पर लेटा रहा और जब देखा कि उसकी बीवी गहरी नींद में सो गई है तो वह धीरे से खटिया पर से उठा और बिना आवाज के दरवाजा खोल के बाहर से दरवाजा बंद कर लिया ताकि अगर किसी भी तरह से उसकी नींद खुल भी गई तो वह आराम से कोई बहाना बनाकर बच सकता है,,,, और वहां से निकल कर बगल वाले कमरे में जिसमें गुलाबी सोती है वहां दरवाजे पर आकर दरवाजे पर दस्तक देने के लिए जैसे ही वह हाथ दरवाजे पर रखा दरवाजा अपने आप ही खुल गया,,गुलाबी ने पहले से ही दरवाजा को खुला छोड़ दी थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बड़ा भाई उसकी बीवी की चुदाई करके उसके पास जरूर आएगा,,, जैसे ही दरवाजा खुला
दरवाजे के खुलने की आवाज सुनकर खटिया पर ऐसे ही लेटकर अपने बड़े भाई का इंतजार कर रही गुलाबी तुरंत से उठ कर बैठ गई और दरवाजे पर अपने बड़े भाई को देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई,,, अंदर आकर दरवाजे को बंद करते हुए हरिया बोला,,,।

क्या बात है तुझे नींद नहीं आ रही है,,,


तुम्हारा इंतजार कर रही थी,,,,

(इतना सुनते ही हरिया आगे बढ़ा और खटिया पर बैठते हुए गुलाबी को अपनी बाहों में लेकर उसे खटिया पर पीठ के बल लेटाते हुए उसके ऊपर पूरी तरह से छा गया,,,।


Wah Rohnny Bhai, badi hi garmagarm update post ki he aapne.......maja aa gaya Bhai


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