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Incest बैलगाड़ी,,,,,

Ajju Landwalia

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राजू अशोक को उसके घर पहुंचाने के बाद वहां पर रुकने वाला नहीं था वह वहां से वापस लौट आना चाहता था क्योंकि घर पर गुलाबी कि बुर की याद उसे बहुत आती थी,, क्योंकि अपनी बुआ को बिना चोदे उसे नींद नहीं आती थी,,, लेकिन जैसे ही उसकी नजर अशोक की बीवी पर पड़ी थी उसका इरादा एकदम से बदल गया था,,,,, और वह वहीं पर रुकना ही मुनासिब समझा,,,, और उसका वहां रुकना ऐसा लग रहा था कि धीरे-धीरे सफलता की राह पकड़ रहा था,,, क्योंकि रात पूरी तरह से गहरा चुकी थी,,, उसका पति नशे में बेसुध होकर सो रहा था,,, खाना पीना हो चुका था,,, और राजू चालाकी दिखाते हुए अशोक की बीवी को खुद अपने हाथों से खाना खिलाया था और राजू यहीं पर ही अशोक की बीवी को अपने हाथों से खाना खिलाते ही सफलता की सीढ़ी चढ़ना शुरू कर दिया था,,, वरना एक औरत किसी गैर मर्द के हाथों से खाना क्यों खाए,,,, राजू को अशोक की बीवी बहुत ही भोली भाली भी लग रही थी जो कि वह थी भी,,,,।

दोनों सोने की तैयारी कर रहे थे और तभी अशोक की बीवी को जोरो की पेशाब लगी थी और जिस तरह से वह कांपते स्वर में चोरों की पेशाब लगने वाली बात की थी उसे सुनते ही राजू के लंड ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया था,,,,,, एक ऐसी औरत जिसे मैं जानता था कि नहीं था जिसे पहली बार मिला था ज्यादा जान पहचान भी नहीं थी ऐसी खूबसूरत औरत जहां से पेशाब लगने वाली बात बोली तो इसे सुनकर ही राजू की खुशी का ठिकाना ना रहा,,,,,

राजू कुछ देर तक शांत होकर खड़ा रहा और उस खूबसूरत औरत को देखता है जो कि बहुत ही भोलेपन से पेशाब लगने वाली बात कही थी,,,, उसका बार-बार कभी दांया पैर उठाना कभी बाया फिर रह रहकर अपनी कमर पकड़ लेना,,,, ,, यह सब दर्शा रहा था कि उसे कितनी तीव्रता से पेशाब लगी है और यह सब देख कर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, पेशाब करने वाली बात से ही वह पल भर में ही उसके खूबसूरत बुर के बारे में कल्पना करना शुरू कर दिया था कि उसकी बुर कैसी होगी तुम चिकनी हो क्या मखमली रेशमी बालों से घुरी हुई होगी,,, फिर अपने ही सवाल का खुद ही जवाब देते हुए बोला,,, जैसे भी होगी बहुत खूबसूरत होगी,,,,। राजू सब कुछ भूल कर उसकी खूबसूरत यौवन को वह अपनी आंखों से पी रहा था,,, एक तरफ जहां पेशाब लगने की वजह से अशोक की बीवी की हालत खराब हो जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसके बारे में सोच कर ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, आखिरकार आशु की बीवी से बिल्कुल भी नहीं रहा गया तो वह बोली,,,।


अरे कुछ करोगे बबुआ,,,, या ऐसे ही खड़े रहोगे,,,।


अरे भाभी इसमें मैं क्या कर सकता हूं पेशाब लगी है तो बाहर जाकर कर लो,,,,,

बाहर,,,,(मुंह बनाते हुए दरवाजे की तरफ देखते हुए) नहीं बाहर मुझे डर लगता है,,,

तो पहले क्या करती थी जब तुम्हें पेशाब लगती थी तब,,,


यही कोने में,,,(आंगन के कोने में उंगली से इशारा करके दिखाते हुए) यहीं पर कर लेती थी,,,


यहां पर,,,(उसके उंगली के इशारे से दिखाए गए कोने की तरफ देखते हुए) यहां पर तुम मुतती थी,,,
(जानबूझकर राजू मुतती शब्द का प्रयोग किया था और वैसे भी अशोक की बीवी के साथ पेशाब के बारे में इतने खुले तौर पर बात करने में इस तरह की उत्तेजना का अनुभव राजू को महसूस हो रही थी राजू पूरी तरह से चुदवासा हो गया था उसके पजामे में हलचल सी होने लगी थी,,,राजू आंगन किस कोने की तरफ देखते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तो आज भी यहीं कर लो ना इस में दिक्कत क्या है,,,,(जिस तरह से वह भोलेपन से बात कर रही थी राजू को ऐसा ही लग रहा था कि उसके बोलने पर अशोक की निकली उसकी आंखों के सामने ही अपनी साड़ी उठाकर मुतना शुरू कर देगी,,,)

नहीं पागल हो गए हो क्या,,,, पहले कोई नहीं रहता था ,, तब करने मैं कोई दिक्कत नहीं होती थी लेकिन अब तो तुम हो,,,


अरे तो इसमें क्या हुआ मैं थोड़ी ना तुम्हें खा जाऊंगा,,,


देख तो लोगे ना,,,,


क्या देख लूंगा,,,?
(राजू को पूरा यकीन हो गया था कि अशोक की बीवी पूरी तरह से एकदम भोली,,है या तो फिर जानबूझकर इस तरह का नाटक कर रही है क्योंकि कोई भी औरत इस तरह से अनजान लड़के से पेशाब करने वाली बात नहीं कहती,, लेकिन जो भी हो राजू को तो मजा आ रहा था आज की रात उसे रंगीन होने की आशंका नजर आ रही थी,,,। राजू की बात सुनकर अशोक की बीवी शर्माने लगी तो राजू बोला,,,)

बोलो ना भाभी क्या देख लूंगा,,,


अरे मुझे पेशाब करते हुए बबुआ और क्या,,,


इसमें क्या हुआ भाभी अशोक चाचा भी तो देखते होंगे,,,

अरे बबुआ तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करते,,, वह तो मेरे पति हैं,,,(जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए अपने पेशाब पर अंकुश करने की कोशिश करते हुए बोली,,)

तो क्या हुआ है तो इंसान ही,,,


अरे बबुआ तो नहीं समझोगे यहां बड़े बड़े जोरों की लगी हुई है और तुम हो कि बात को इधर उधर घुमा रहे हो,,,


अरे भाभी तो दिक्कत क्या है दरवाजा खोलकर बाहर जाकर कर लो,,,


इतनी हिम्मत होती तो चली नहीं गई होती,,,


क्यों,,,?


अंधेरे में मुझे बहुत डर लगता है वैसे भी रात को चोर उचचको का डर ज्यादा रहता है इसलिए मैं बाहर नहीं जाती,,,,


तो तुम ही बताओ,,, भाभी मैं क्या करूं मैं चलूं साथ में,,,

हां,,,,,( वह एकदम से शरमाते हुए बोली,,,)

और मैंने देख लिया तो,,,,


नहीं नहीं देखना नहीं तुम्हें मेरी कसम मुझे बहुत शर्म आती है,,,,,
(उसके भोलेपन से भरी बातें और उसका भोलापन देखकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी वह अपने मन में सोचने लगा कि इसको चोदने में बहुत मजा आएगा,,, उसकी बात मानते हुए राजू बोला,,,)

ठीक है भाभी नहीं देखुंगा बस,,,,,,,


हां,,, ठीक है,,,,
(इतना कहने के साथ ही वह पैर को दबाते हुए दरवाजे की तरफ आगे बढ़ने लगी और राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि भला ऐसा हो सकता था कि बिल्ली को दूध की रखवाली करने के लिए दिया जाए और बिल्ली उसकी रखवाली ही करें,,,, ऐसा बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है,,,,,, यह तो सिर्फ एक भरोसा था जो राजू ने अपनी तरफ से अशोक की बीवी को दे रखा था,,,, अशोक की बीवी को तो ऐसा ही था कि वादा कर दिया तो निभाएगा जरूर,,, ऐसे हालात में कोई मर्द अपना वादा निभाए ऐसा मुमकिन भी नहीं है और राजू के लिए तो बिल्कुल भी नहीं,,,,,,,, राजु ने जानबूझकर दीवार से ठगी हुई लालटेन को हाथ में ले लिया क्योंकि वह जानता था कि बाहर अंधेरा होगा भले ही चांदनी रात थी तो क्या हुआ क्योंकि घर के बाहर ढेर सारे पेड़ लगे हुए थे,,, और अंधेरे में राजू उसे पेशाब करता हुआ नहीं देख सकता था,, इसलिए वह लालटेन को हाथ में ले लिया था,,,, और कोने में पड़ा मोटा सा डंडा भी हाथ में ले लिया था,,, क्योंकि रात को कभी कबार जरूरत भी पड़ जाती थी,,,अशोक की बीवी दरवाजे पर खड़ी थी दरवाजा पकड़कर और पीछे नजर कमाकर राजू को भी देख रही थी वह उसके आने का इंतजार कर रही थी क्योंकि वहां के लिए दरवाजा खोलकर बाहर जाने में भी डरती थी,,,,,, जैसे ही राजु उसके पास आया वह दरवाजे की सिटकनी खोलने लगी ,,, दरवाजा के खुलते ही पहले वह चारों तरफ नजर घुमाकर तसल्ली करने लगी और फिर इत्मीनान से अपने पैर घर से बाहर निकाल दि और पीछे पीछे राजू के घर से बाहर आ जा लालटेन को अपने हाथ में लेकर थोड़ा हाथ की कोहनी को मोड़कर उठाए हुए था और लालटेन की रोशनी में तकरीबन 15 फीट की दूरी तक सब कुछ नजर आ रहा था,,,,,,, दो कदम चलने के बाद वह फिर से खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगी तो राजू बोला,,,।


कहां मुतोगी भाभी,,,,(राजू जानबूझकर इस तरह के खुले शब्दों का प्रयोग कर रहा था,,, वह अशोक की बीवी को उकसाना चाहता था,,, और अशोक की बीवी भी अपने लिए इस तरह का शब्द का प्रयोग एक अनजान जवान लड़के के मुंह से सुन कर सिहर उठी,,,, राजू के सवाल उंगली से इशारा करते हुए बोली,,,)


वहां झाड़ियों के पास,,,


ठीक है चलो,,,,,,,
(इतना सुनकर जैसे ही अशोक की बीवी अपना एक कदम आगे बढ़ा कि उसके कानों में फिर से वही आवाज सुनाई दी जागते रहो वह एकदम से घबरा गई,,,)

हाय दैया,,,,, लगता है चोर यहीं कहीं आस पास में ही है,,, मुझे तो बहुत डर लग रहा है,,,


क्या भाभी तुम भी बच्चों जैसा डरती हो ऐसे ही धरती रही तो मुझे लगता है अपनी साड़ी गीली कर दोगी,,,,।

धत्,,,,,(अशोक की बीवी एकदम से शरमाते हुए बोली,, राजू जल्द से जल्द,,, अशोक की बीवी की गोल-गोल गांड देखना चाहता था क्योंकि इतना तो अंदाजा लगा ही लिया था कि जब चेहरा इतना खूबसूरत है तो गांड भी खूबसूरत होगी,,,, इसीलिए राजू उतावला हुआ जा रहा था,,,, उसे इस बात का डर भी था कि कहीं अशोक होश में ना आ जाए और अगर ऐसा हो गया तो रंग में भंग पड़ जाएगा,,,, अशोक की बीवी हिम्मत दिखाते हुए अपने कदम आगे बढ़ाने लगी वैसे तो उसकी हिम्मत बिल्कुल भी नहीं होती थी लेकिन उसके साथ राजू था इसलिए उसमें थोड़ी हिम्मत थी,,,, उसका धीरे धीरे से पैर रखकर आगे बढ़ना राजू को बहुत अच्छा लग रहा था उसके पायलों की खन खन से पूरा वातावरण संगीतमय हुआ जा रहा था,,, चूड़ियों की खनक राजू के कानों में पहुंचते ही सीधे उसके लंड पर दस्तक दे रही थी,,,, राजू उसकी गोल-गोल कांड को मटकते हुए लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ देख पा रहा था,,,

यही तो सबसे बड़ी कमजोरी थी राजू की औरतों की बड़ी-बड़ी गोल गोल गांड,,,, इन्हें देखते ही मदहोश होने लगता था इसीलिए तो इस समय की अशोक की बीवी की गांड को देखकर उसका नियंत्रण अपने आप पर खोता चला जा रहा था उसका मन तो कर रहा था कि आगे बढ़ कर खुद उसकी साड़ी ऊपर कमर तक उठा दी और उसकी नंगी गांड का दीदार कर ले,,,, फिर भी धीरे-धीरे में जो मजा है वह जल्दबाजी में नहीं,,, यही राजू का मूल मंत्र भी था जिसकी वजह से वह अब सफलता हासिल करता आ रहा था और औरतो कि दोनों टांगों के बीच अपना विजय पताका भी लहराता आ रहा था,,, देखते ही देखते अशोक की बीवी सामने की कर्मचारियों के करीब पहुंच गई और राजू जानबूझकर उससे दूर खड़ा रहने की जगह उसे केवल आठ 10 फीट की दूरी पर ही खड़ा हो गया,,, और अशोक की बीवी उसे दूर जाने के लिए ना बोले इसलिए वह पहले ही बोला,,,।)

भाभी लगता तो है कि चोर उचक्के इसी गांव के आसपास में ही तभी जागते रहो की आवाज बार-बार आ रही है,,,।

(इतना सुनते ही वह घबरा गई,,, और उसी जगह पर खड़े खड़े ही अपने चारों तरफ नजर घुमाने लगी,,, और तसल्ली कर लेने के बाद,,, वह अपनी नाजुक उंगलियों को हरकत देते हुए दोनों तरफ से अपनी साड़ी को उंगली से पकड़ ली और उसने ऊपर की तरफ उठाने से पहले,,, राजू की तरफ नजर करके बोली,,,।)

देख बबुआ यहां पर देखना नहीं,,, नहीं तो शर्म के मारे हमारी पेशाब भी रुक जाएगी,,,,


नहीं नहीं भाभी तुम चिंता मत करो मैं नहीं देखूंगा,,,,
( और इतना कहकर दूसरी तरफ देखने का नाटक करने लगा,,,, अशोक के घर पर आकर राजू का समय बहुत अच्छे से गुजर रहा था यहां आने से पहले वह यही सोच रहा था कि अगर वहां रुकना पड़ गया तो रात कैसे बिताएगा,,, लेकिन अशोक की बीवी की खूबसूरती देखकर उसका भोलापन उसकी बातें सुनकर राजू यहां पर जिंदगी भर रुकने को तैयार हो गया था,,,, मौसम भी गर्मी का था लेकिन हवा चलने की वजह से वातावरण में ठंडक आ गई थी,,,, चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,,, वैसे तो चांदनी रात थी लेकिन चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ होने की वजह से यहां पर अंधेरा था अगर राजू साथ में लालटेन ना लाया होता तो उसे भी ठीक से कुछ दिखाई नहीं देता,,,,सामने का नजारा बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ था जोकि पूरी तरह से अपनी मदहोशी पूरे वातावरण में बिखेरने को तैयार था,,,। राजू की आंखें सब कुछ भूल कर सिर्फ सामने के नजारे को देख रही थी जल्द से जल्द राजू उसकी नंगी गांड के दर्शन करने के लिए तड़प रहा था पर ऐसा लग रहा था कि अशोक की बीवी उसे कुछ ज्यादा ही तड़पा रही है,,,,धीरे-धीरे अशोक की बीबी अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी और चारों तरफ नजर घुमाकर देख भी रही थी,,, राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था लेकिन अशोक की बीवी के मन में घबराहट हो रही थी चोर चोको को लेकर उसे चोर ऊच्चोको से बहुत डर लगता था,,,जैसे-जैसे अशोक की बीवी की साड़ी ऊपर की तरफ जा रही थी वैसे उसे लालटेन की पीली रोशनी में उसकी नंगी चिकनी टांग उजागर होती चली जा रही थी गोरी गोरी मांसल पिंडलिया देखकर राजू का मन ललच रहा था,,, देखते ही देखते उसकी साड़ी उसकी मोटी सुडोल जांघों तक आ गई,,, और मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर राजु का सब्र का बांध अब टूटने लगा,, राजू का मन उसको चोदने को करने लगा,,,उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,,
चारों तरफ सन्नाटा फैला हुआ था सिर्फ दूर-दूर तक कुत्तों की भौंकने की आवाज आ रही थी,,और रह रह कर झींगुर की आवाज आने लगती थी,,,।

एक तरफ जहां राजू का मन तड़प रहा था उसकी नंगी गोरी गोरी गांड को देखने के लिए वहीं दूसरी तरफ अशोक की बीवी के मन में घबराहट थी कि कहीं कोई आ ना जाए उसे इस बात की चिंता बिल्कुल भी नहीं थी कि उसके पीछे खड़ा एक अनजान जवान लड़का उसे पेशाब करते हुए देखने जा रहा था और वह भी हाथ में लालटेन जिसमें उसका सब कुछ नजर आ रहा था,,, साड़ी को मोटी मोटी जांघों तक उठाकर वह फिर से इधर-उधर देखने लगी तो राजू बोला,,,।)

जल्दी से करो ना भाभी,,, कितना देर कर रही हो,,,


अरे रुको तो बबुआ कोई चोर आ गया तो,,,


अरे नहीं तुम्हारी गांड मार लेगा,,,,
(राजू एकदम से खुले शब्दों में बोल दिया,,, धीरे-धीरे उसे एहसास होने लगा था कि वह बहुत भोली है वह कुछ बोलेगी नहीं इसीलिए राजू खुले शब्दों में बात करने लगा था,,)

हाय दैया यह कैसी बात कर रहे हो,,,, सच कहूं तो मुझे भी इसी बात का डर रहता है,,, इसीलिए तो रात को घर से बाहर निकलने से डर लगता है,,,,,
(उसकी भोली बातें सुनकर राजू के लंड की अकड़ पड़ने लगी वह पूरी तरह से समझ गया था कि कोशिश करने पर आज की रात उसका लंड उसकी बुर में होगा,,,,,, राजू को इस तरह से खुली बातें करने में बहुत मजा आ रहा था,,,थोड़ा थोड़ा मजा अशोक की बीवी को भी आ रहा था हालांकि उसके मन में डर भी था और वह भी चोर को लेकर,,, लेकिन एक जवान लड़की के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसे भी अच्छा लगने लगा था राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अच्छा भाभी एक बात बताना,,,तो,,,


क्या,,,? (वह उसी तरह से सारे को उसी स्थिति में जांघों तक उठाए हुए बोली,,)


पहले कहो नाराज तो नहीं होगी ना,,,


नही बबुआ,,, तुम से क्या नाराज होना,,,


अच्छा एक बात बताओ तुम्हें सच में चोर से ज्यादा डर लगता है या चुदवाने में,,,,
(राजू के मुंह से इस तरह का सवाल सुनकर अशोक की बीवी के भी तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, वह कुछ बोली नहीं बस अपनी नजर को राजू की तरफ घुमा कर उसकी तरफ देखते हूए बोली,,,)

यह कैसा सवाल है बबुआ,,,


अरे सही तो सवाल है,,,तुम्हें रात को बाहर निकलने में डर लगता है और वह भी चोर से,,,और सच कहूं तो अगर तुम्हारे घर में चोर आ भी गया तो तुम्हें देखकर बोला तुम्हारे घर का कोई कीमती सामान नहीं ले जाएगा लेकिन तुम्हारे पास रखा हुआ बेशकीमती खजाना जरूर लुटकर चला जाएगा,,,,,,,


लेकिन मेरे पास कौनसा खजाना पड़ा हुआ है जो लूट कर चला जाएगा,,,



अरे भाभी तो नहीं जानती तुम्हारे पास इतना बेशकीमती खजाना है कि उसे पाने के लिए दो दो रियासतों में मार हो जाए,,,


धत् पागल ,,, मेरे पास कोई खजाना नहीं है,,,,


हे भाभी,,, बहुत बेशकीमती खजाना है,,,

आहहहह,,, तुम रहने दो बबुआ,,, मुझसे अब ज्यादा रोका नहीं जा रहा है,,,,(इतना कहने के साथ ही एक झटके से मोटी मोटी जांघों पर स्थिर साड़ी को वहां एकदम से कमर तक उठा दी,,, पल भर में ही राजू की आंखों के सामने अशोक की बीवी की गोरी गोरी गांड नंगी हो गई,,, राजू तो बस देखता ही रह गया और वह अगले ही पल नीचे बैठ गई मुतने के लिए,,,, और क्षण मात्र में ही उसकी बुर से नमकीन पानी की धार छूटने लगी,,, और गुलाबी बुर में से आ रही मधुर ध्वनि राजु के कानों में मिश्री घोलने लगी,,,।


Gazab ka seduction likh rahe ho Bhai.........maja aa gaya
 

Lutgaya

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राजू अशोक को उसके घर पहुंचाने के बाद वहां पर रुकने वाला नहीं था वह वहां से वापस लौट आना चाहता था क्योंकि घर पर गुलाबी कि बुर की याद उसे बहुत आती थी,, क्योंकि अपनी बुआ को बिना चोदे उसे नींद नहीं आती थी,,, लेकिन जैसे ही उसकी नजर अशोक की बीवी पर पड़ी थी उसका इरादा एकदम से बदल गया था,,,,, और वह वहीं पर रुकना ही मुनासिब समझा,,,, और उसका वहां रुकना ऐसा लग रहा था कि धीरे-धीरे सफलता की राह पकड़ रहा था,,, क्योंकि रात पूरी तरह से गहरा चुकी थी,,, उसका पति नशे में बेसुध होकर सो रहा था,,, खाना पीना हो चुका था,,, और राजू चालाकी दिखाते हुए अशोक की बीवी को खुद अपने हाथों से खाना खिलाया था और राजू यहीं पर ही अशोक की बीवी को अपने हाथों से खाना खिलाते ही सफलता की सीढ़ी चढ़ना शुरू कर दिया था,,, वरना एक औरत किसी गैर मर्द के हाथों से खाना क्यों खाए,,,, राजू को अशोक की बीवी बहुत ही भोली भाली भी लग रही थी जो कि वह थी भी,,,,।

दोनों सोने की तैयारी कर रहे थे और तभी अशोक की बीवी को जोरो की पेशाब लगी थी और जिस तरह से वह कांपते स्वर में चोरों की पेशाब लगने वाली बात की थी उसे सुनते ही राजू के लंड ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया था,,,,,, एक ऐसी औरत जिसे मैं जानता था कि नहीं था जिसे पहली बार मिला था ज्यादा जान पहचान भी नहीं थी ऐसी खूबसूरत औरत जहां से पेशाब लगने वाली बात बोली तो इसे सुनकर ही राजू की खुशी का ठिकाना ना रहा,,,,,

राजू कुछ देर तक शांत होकर खड़ा रहा और उस खूबसूरत औरत को देखता है जो कि बहुत ही भोलेपन से पेशाब लगने वाली बात कही थी,,,, उसका बार-बार कभी दांया पैर उठाना कभी बाया फिर रह रहकर अपनी कमर पकड़ लेना,,,, ,, यह सब दर्शा रहा था कि उसे कितनी तीव्रता से पेशाब लगी है और यह सब देख कर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, पेशाब करने वाली बात से ही वह पल भर में ही उसके खूबसूरत बुर के बारे में कल्पना करना शुरू कर दिया था कि उसकी बुर कैसी होगी तुम चिकनी हो क्या मखमली रेशमी बालों से घुरी हुई होगी,,, फिर अपने ही सवाल का खुद ही जवाब देते हुए बोला,,, जैसे भी होगी बहुत खूबसूरत होगी,,,,। राजू सब कुछ भूल कर उसकी खूबसूरत यौवन को वह अपनी आंखों से पी रहा था,,, एक तरफ जहां पेशाब लगने की वजह से अशोक की बीवी की हालत खराब हो जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसके बारे में सोच कर ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, आखिरकार आशु की बीवी से बिल्कुल भी नहीं रहा गया तो वह बोली,,,।


अरे कुछ करोगे बबुआ,,,, या ऐसे ही खड़े रहोगे,,,।


अरे भाभी इसमें मैं क्या कर सकता हूं पेशाब लगी है तो बाहर जाकर कर लो,,,,,

बाहर,,,,(मुंह बनाते हुए दरवाजे की तरफ देखते हुए) नहीं बाहर मुझे डर लगता है,,,

तो पहले क्या करती थी जब तुम्हें पेशाब लगती थी तब,,,


यही कोने में,,,(आंगन के कोने में उंगली से इशारा करके दिखाते हुए) यहीं पर कर लेती थी,,,


यहां पर,,,(उसके उंगली के इशारे से दिखाए गए कोने की तरफ देखते हुए) यहां पर तुम मुतती थी,,,
(जानबूझकर राजू मुतती शब्द का प्रयोग किया था और वैसे भी अशोक की बीवी के साथ पेशाब के बारे में इतने खुले तौर पर बात करने में इस तरह की उत्तेजना का अनुभव राजू को महसूस हो रही थी राजू पूरी तरह से चुदवासा हो गया था उसके पजामे में हलचल सी होने लगी थी,,,राजू आंगन किस कोने की तरफ देखते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तो आज भी यहीं कर लो ना इस में दिक्कत क्या है,,,,(जिस तरह से वह भोलेपन से बात कर रही थी राजू को ऐसा ही लग रहा था कि उसके बोलने पर अशोक की निकली उसकी आंखों के सामने ही अपनी साड़ी उठाकर मुतना शुरू कर देगी,,,)

नहीं पागल हो गए हो क्या,,,, पहले कोई नहीं रहता था ,, तब करने मैं कोई दिक्कत नहीं होती थी लेकिन अब तो तुम हो,,,


अरे तो इसमें क्या हुआ मैं थोड़ी ना तुम्हें खा जाऊंगा,,,


देख तो लोगे ना,,,,


क्या देख लूंगा,,,?
(राजू को पूरा यकीन हो गया था कि अशोक की बीवी पूरी तरह से एकदम भोली,,है या तो फिर जानबूझकर इस तरह का नाटक कर रही है क्योंकि कोई भी औरत इस तरह से अनजान लड़के से पेशाब करने वाली बात नहीं कहती,, लेकिन जो भी हो राजू को तो मजा आ रहा था आज की रात उसे रंगीन होने की आशंका नजर आ रही थी,,,। राजू की बात सुनकर अशोक की बीवी शर्माने लगी तो राजू बोला,,,)

बोलो ना भाभी क्या देख लूंगा,,,


अरे मुझे पेशाब करते हुए बबुआ और क्या,,,


इसमें क्या हुआ भाभी अशोक चाचा भी तो देखते होंगे,,,

अरे बबुआ तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करते,,, वह तो मेरे पति हैं,,,(जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए अपने पेशाब पर अंकुश करने की कोशिश करते हुए बोली,,)

तो क्या हुआ है तो इंसान ही,,,


अरे बबुआ तो नहीं समझोगे यहां बड़े बड़े जोरों की लगी हुई है और तुम हो कि बात को इधर उधर घुमा रहे हो,,,


अरे भाभी तो दिक्कत क्या है दरवाजा खोलकर बाहर जाकर कर लो,,,


इतनी हिम्मत होती तो चली नहीं गई होती,,,


क्यों,,,?


अंधेरे में मुझे बहुत डर लगता है वैसे भी रात को चोर उचचको का डर ज्यादा रहता है इसलिए मैं बाहर नहीं जाती,,,,


तो तुम ही बताओ,,, भाभी मैं क्या करूं मैं चलूं साथ में,,,

हां,,,,,( वह एकदम से शरमाते हुए बोली,,,)

और मैंने देख लिया तो,,,,


नहीं नहीं देखना नहीं तुम्हें मेरी कसम मुझे बहुत शर्म आती है,,,,,
(उसके भोलेपन से भरी बातें और उसका भोलापन देखकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी वह अपने मन में सोचने लगा कि इसको चोदने में बहुत मजा आएगा,,, उसकी बात मानते हुए राजू बोला,,,)

ठीक है भाभी नहीं देखुंगा बस,,,,,,,


हां,,, ठीक है,,,,
(इतना कहने के साथ ही वह पैर को दबाते हुए दरवाजे की तरफ आगे बढ़ने लगी और राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि भला ऐसा हो सकता था कि बिल्ली को दूध की रखवाली करने के लिए दिया जाए और बिल्ली उसकी रखवाली ही करें,,,, ऐसा बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है,,,,,, यह तो सिर्फ एक भरोसा था जो राजू ने अपनी तरफ से अशोक की बीवी को दे रखा था,,,, अशोक की बीवी को तो ऐसा ही था कि वादा कर दिया तो निभाएगा जरूर,,, ऐसे हालात में कोई मर्द अपना वादा निभाए ऐसा मुमकिन भी नहीं है और राजू के लिए तो बिल्कुल भी नहीं,,,,,,,, राजु ने जानबूझकर दीवार से ठगी हुई लालटेन को हाथ में ले लिया क्योंकि वह जानता था कि बाहर अंधेरा होगा भले ही चांदनी रात थी तो क्या हुआ क्योंकि घर के बाहर ढेर सारे पेड़ लगे हुए थे,,, और अंधेरे में राजू उसे पेशाब करता हुआ नहीं देख सकता था,, इसलिए वह लालटेन को हाथ में ले लिया था,,,, और कोने में पड़ा मोटा सा डंडा भी हाथ में ले लिया था,,, क्योंकि रात को कभी कबार जरूरत भी पड़ जाती थी,,,अशोक की बीवी दरवाजे पर खड़ी थी दरवाजा पकड़कर और पीछे नजर कमाकर राजू को भी देख रही थी वह उसके आने का इंतजार कर रही थी क्योंकि वहां के लिए दरवाजा खोलकर बाहर जाने में भी डरती थी,,,,,, जैसे ही राजु उसके पास आया वह दरवाजे की सिटकनी खोलने लगी ,,, दरवाजा के खुलते ही पहले वह चारों तरफ नजर घुमाकर तसल्ली करने लगी और फिर इत्मीनान से अपने पैर घर से बाहर निकाल दि और पीछे पीछे राजू के घर से बाहर आ जा लालटेन को अपने हाथ में लेकर थोड़ा हाथ की कोहनी को मोड़कर उठाए हुए था और लालटेन की रोशनी में तकरीबन 15 फीट की दूरी तक सब कुछ नजर आ रहा था,,,,,,, दो कदम चलने के बाद वह फिर से खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगी तो राजू बोला,,,।


कहां मुतोगी भाभी,,,,(राजू जानबूझकर इस तरह के खुले शब्दों का प्रयोग कर रहा था,,, वह अशोक की बीवी को उकसाना चाहता था,,, और अशोक की बीवी भी अपने लिए इस तरह का शब्द का प्रयोग एक अनजान जवान लड़के के मुंह से सुन कर सिहर उठी,,,, राजू के सवाल उंगली से इशारा करते हुए बोली,,,)


वहां झाड़ियों के पास,,,


ठीक है चलो,,,,,,,
(इतना सुनकर जैसे ही अशोक की बीवी अपना एक कदम आगे बढ़ा कि उसके कानों में फिर से वही आवाज सुनाई दी जागते रहो वह एकदम से घबरा गई,,,)

हाय दैया,,,,, लगता है चोर यहीं कहीं आस पास में ही है,,, मुझे तो बहुत डर लग रहा है,,,


क्या भाभी तुम भी बच्चों जैसा डरती हो ऐसे ही धरती रही तो मुझे लगता है अपनी साड़ी गीली कर दोगी,,,,।

धत्,,,,,(अशोक की बीवी एकदम से शरमाते हुए बोली,, राजू जल्द से जल्द,,, अशोक की बीवी की गोल-गोल गांड देखना चाहता था क्योंकि इतना तो अंदाजा लगा ही लिया था कि जब चेहरा इतना खूबसूरत है तो गांड भी खूबसूरत होगी,,,, इसीलिए राजू उतावला हुआ जा रहा था,,,, उसे इस बात का डर भी था कि कहीं अशोक होश में ना आ जाए और अगर ऐसा हो गया तो रंग में भंग पड़ जाएगा,,,, अशोक की बीवी हिम्मत दिखाते हुए अपने कदम आगे बढ़ाने लगी वैसे तो उसकी हिम्मत बिल्कुल भी नहीं होती थी लेकिन उसके साथ राजू था इसलिए उसमें थोड़ी हिम्मत थी,,,, उसका धीरे धीरे से पैर रखकर आगे बढ़ना राजू को बहुत अच्छा लग रहा था उसके पायलों की खन खन से पूरा वातावरण संगीतमय हुआ जा रहा था,,, चूड़ियों की खनक राजू के कानों में पहुंचते ही सीधे उसके लंड पर दस्तक दे रही थी,,,, राजू उसकी गोल-गोल कांड को मटकते हुए लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ देख पा रहा था,,,

यही तो सबसे बड़ी कमजोरी थी राजू की औरतों की बड़ी-बड़ी गोल गोल गांड,,,, इन्हें देखते ही मदहोश होने लगता था इसीलिए तो इस समय की अशोक की बीवी की गांड को देखकर उसका नियंत्रण अपने आप पर खोता चला जा रहा था उसका मन तो कर रहा था कि आगे बढ़ कर खुद उसकी साड़ी ऊपर कमर तक उठा दी और उसकी नंगी गांड का दीदार कर ले,,,, फिर भी धीरे-धीरे में जो मजा है वह जल्दबाजी में नहीं,,, यही राजू का मूल मंत्र भी था जिसकी वजह से वह अब सफलता हासिल करता आ रहा था और औरतो कि दोनों टांगों के बीच अपना विजय पताका भी लहराता आ रहा था,,, देखते ही देखते अशोक की बीवी सामने की कर्मचारियों के करीब पहुंच गई और राजू जानबूझकर उससे दूर खड़ा रहने की जगह उसे केवल आठ 10 फीट की दूरी पर ही खड़ा हो गया,,, और अशोक की बीवी उसे दूर जाने के लिए ना बोले इसलिए वह पहले ही बोला,,,।)

भाभी लगता तो है कि चोर उचक्के इसी गांव के आसपास में ही तभी जागते रहो की आवाज बार-बार आ रही है,,,।

(इतना सुनते ही वह घबरा गई,,, और उसी जगह पर खड़े खड़े ही अपने चारों तरफ नजर घुमाने लगी,,, और तसल्ली कर लेने के बाद,,, वह अपनी नाजुक उंगलियों को हरकत देते हुए दोनों तरफ से अपनी साड़ी को उंगली से पकड़ ली और उसने ऊपर की तरफ उठाने से पहले,,, राजू की तरफ नजर करके बोली,,,।)

देख बबुआ यहां पर देखना नहीं,,, नहीं तो शर्म के मारे हमारी पेशाब भी रुक जाएगी,,,,


नहीं नहीं भाभी तुम चिंता मत करो मैं नहीं देखूंगा,,,,
( और इतना कहकर दूसरी तरफ देखने का नाटक करने लगा,,,, अशोक के घर पर आकर राजू का समय बहुत अच्छे से गुजर रहा था यहां आने से पहले वह यही सोच रहा था कि अगर वहां रुकना पड़ गया तो रात कैसे बिताएगा,,, लेकिन अशोक की बीवी की खूबसूरती देखकर उसका भोलापन उसकी बातें सुनकर राजू यहां पर जिंदगी भर रुकने को तैयार हो गया था,,,, मौसम भी गर्मी का था लेकिन हवा चलने की वजह से वातावरण में ठंडक आ गई थी,,,, चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,,, वैसे तो चांदनी रात थी लेकिन चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ होने की वजह से यहां पर अंधेरा था अगर राजू साथ में लालटेन ना लाया होता तो उसे भी ठीक से कुछ दिखाई नहीं देता,,,,सामने का नजारा बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ था जोकि पूरी तरह से अपनी मदहोशी पूरे वातावरण में बिखेरने को तैयार था,,,। राजू की आंखें सब कुछ भूल कर सिर्फ सामने के नजारे को देख रही थी जल्द से जल्द राजू उसकी नंगी गांड के दर्शन करने के लिए तड़प रहा था पर ऐसा लग रहा था कि अशोक की बीवी उसे कुछ ज्यादा ही तड़पा रही है,,,,धीरे-धीरे अशोक की बीबी अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी और चारों तरफ नजर घुमाकर देख भी रही थी,,, राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था लेकिन अशोक की बीवी के मन में घबराहट हो रही थी चोर चोको को लेकर उसे चोर ऊच्चोको से बहुत डर लगता था,,,जैसे-जैसे अशोक की बीवी की साड़ी ऊपर की तरफ जा रही थी वैसे उसे लालटेन की पीली रोशनी में उसकी नंगी चिकनी टांग उजागर होती चली जा रही थी गोरी गोरी मांसल पिंडलिया देखकर राजू का मन ललच रहा था,,, देखते ही देखते उसकी साड़ी उसकी मोटी सुडोल जांघों तक आ गई,,, और मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर राजु का सब्र का बांध अब टूटने लगा,, राजू का मन उसको चोदने को करने लगा,,,उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,,
चारों तरफ सन्नाटा फैला हुआ था सिर्फ दूर-दूर तक कुत्तों की भौंकने की आवाज आ रही थी,,और रह रह कर झींगुर की आवाज आने लगती थी,,,।

एक तरफ जहां राजू का मन तड़प रहा था उसकी नंगी गोरी गोरी गांड को देखने के लिए वहीं दूसरी तरफ अशोक की बीवी के मन में घबराहट थी कि कहीं कोई आ ना जाए उसे इस बात की चिंता बिल्कुल भी नहीं थी कि उसके पीछे खड़ा एक अनजान जवान लड़का उसे पेशाब करते हुए देखने जा रहा था और वह भी हाथ में लालटेन जिसमें उसका सब कुछ नजर आ रहा था,,, साड़ी को मोटी मोटी जांघों तक उठाकर वह फिर से इधर-उधर देखने लगी तो राजू बोला,,,।)

जल्दी से करो ना भाभी,,, कितना देर कर रही हो,,,


अरे रुको तो बबुआ कोई चोर आ गया तो,,,


अरे नहीं तुम्हारी गांड मार लेगा,,,,
(राजू एकदम से खुले शब्दों में बोल दिया,,, धीरे-धीरे उसे एहसास होने लगा था कि वह बहुत भोली है वह कुछ बोलेगी नहीं इसीलिए राजू खुले शब्दों में बात करने लगा था,,)

हाय दैया यह कैसी बात कर रहे हो,,,, सच कहूं तो मुझे भी इसी बात का डर रहता है,,, इसीलिए तो रात को घर से बाहर निकलने से डर लगता है,,,,,
(उसकी भोली बातें सुनकर राजू के लंड की अकड़ पड़ने लगी वह पूरी तरह से समझ गया था कि कोशिश करने पर आज की रात उसका लंड उसकी बुर में होगा,,,,,, राजू को इस तरह से खुली बातें करने में बहुत मजा आ रहा था,,,थोड़ा थोड़ा मजा अशोक की बीवी को भी आ रहा था हालांकि उसके मन में डर भी था और वह भी चोर को लेकर,,, लेकिन एक जवान लड़की के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसे भी अच्छा लगने लगा था राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अच्छा भाभी एक बात बताना,,,तो,,,


क्या,,,? (वह उसी तरह से सारे को उसी स्थिति में जांघों तक उठाए हुए बोली,,)


पहले कहो नाराज तो नहीं होगी ना,,,


नही बबुआ,,, तुम से क्या नाराज होना,,,


अच्छा एक बात बताओ तुम्हें सच में चोर से ज्यादा डर लगता है या चुदवाने में,,,,
(राजू के मुंह से इस तरह का सवाल सुनकर अशोक की बीवी के भी तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, वह कुछ बोली नहीं बस अपनी नजर को राजू की तरफ घुमा कर उसकी तरफ देखते हूए बोली,,,)

यह कैसा सवाल है बबुआ,,,


अरे सही तो सवाल है,,,तुम्हें रात को बाहर निकलने में डर लगता है और वह भी चोर से,,,और सच कहूं तो अगर तुम्हारे घर में चोर आ भी गया तो तुम्हें देखकर बोला तुम्हारे घर का कोई कीमती सामान नहीं ले जाएगा लेकिन तुम्हारे पास रखा हुआ बेशकीमती खजाना जरूर लुटकर चला जाएगा,,,,,,,


लेकिन मेरे पास कौनसा खजाना पड़ा हुआ है जो लूट कर चला जाएगा,,,



अरे भाभी तो नहीं जानती तुम्हारे पास इतना बेशकीमती खजाना है कि उसे पाने के लिए दो दो रियासतों में मार हो जाए,,,


धत् पागल ,,, मेरे पास कोई खजाना नहीं है,,,,


हे भाभी,,, बहुत बेशकीमती खजाना है,,,

आहहहह,,, तुम रहने दो बबुआ,,, मुझसे अब ज्यादा रोका नहीं जा रहा है,,,,(इतना कहने के साथ ही एक झटके से मोटी मोटी जांघों पर स्थिर साड़ी को वहां एकदम से कमर तक उठा दी,,, पल भर में ही राजू की आंखों के सामने अशोक की बीवी की गोरी गोरी गांड नंगी हो गई,,, राजू तो बस देखता ही रह गया और वह अगले ही पल नीचे बैठ गई मुतने के लिए,,,, और क्षण मात्र में ही उसकी बुर से नमकीन पानी की धार छूटने लगी,,, और गुलाबी बुर में से आ रही मधुर ध्वनि राजु के कानों में मिश्री घोलने लगी,,,।
तडपा कर छोडा है भाई।
 

Raj_sharma

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राजू अशोक को उसके घर पहुंचाने के बाद वहां पर रुकने वाला नहीं था वह वहां से वापस लौट आना चाहता था क्योंकि घर पर गुलाबी कि बुर की याद उसे बहुत आती थी,, क्योंकि अपनी बुआ को बिना चोदे उसे नींद नहीं आती थी,,, लेकिन जैसे ही उसकी नजर अशोक की बीवी पर पड़ी थी उसका इरादा एकदम से बदल गया था,,,,, और वह वहीं पर रुकना ही मुनासिब समझा,,,, और उसका वहां रुकना ऐसा लग रहा था कि धीरे-धीरे सफलता की राह पकड़ रहा था,,, क्योंकि रात पूरी तरह से गहरा चुकी थी,,, उसका पति नशे में बेसुध होकर सो रहा था,,, खाना पीना हो चुका था,,, और राजू चालाकी दिखाते हुए अशोक की बीवी को खुद अपने हाथों से खाना खिलाया था और राजू यहीं पर ही अशोक की बीवी को अपने हाथों से खाना खिलाते ही सफलता की सीढ़ी चढ़ना शुरू कर दिया था,,, वरना एक औरत किसी गैर मर्द के हाथों से खाना क्यों खाए,,,, राजू को अशोक की बीवी बहुत ही भोली भाली भी लग रही थी जो कि वह थी भी,,,,।

दोनों सोने की तैयारी कर रहे थे और तभी अशोक की बीवी को जोरो की पेशाब लगी थी और जिस तरह से वह कांपते स्वर में चोरों की पेशाब लगने वाली बात की थी उसे सुनते ही राजू के लंड ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया था,,,,,, एक ऐसी औरत जिसे मैं जानता था कि नहीं था जिसे पहली बार मिला था ज्यादा जान पहचान भी नहीं थी ऐसी खूबसूरत औरत जहां से पेशाब लगने वाली बात बोली तो इसे सुनकर ही राजू की खुशी का ठिकाना ना रहा,,,,,

राजू कुछ देर तक शांत होकर खड़ा रहा और उस खूबसूरत औरत को देखता है जो कि बहुत ही भोलेपन से पेशाब लगने वाली बात कही थी,,,, उसका बार-बार कभी दांया पैर उठाना कभी बाया फिर रह रहकर अपनी कमर पकड़ लेना,,,, ,, यह सब दर्शा रहा था कि उसे कितनी तीव्रता से पेशाब लगी है और यह सब देख कर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, पेशाब करने वाली बात से ही वह पल भर में ही उसके खूबसूरत बुर के बारे में कल्पना करना शुरू कर दिया था कि उसकी बुर कैसी होगी तुम चिकनी हो क्या मखमली रेशमी बालों से घुरी हुई होगी,,, फिर अपने ही सवाल का खुद ही जवाब देते हुए बोला,,, जैसे भी होगी बहुत खूबसूरत होगी,,,,। राजू सब कुछ भूल कर उसकी खूबसूरत यौवन को वह अपनी आंखों से पी रहा था,,, एक तरफ जहां पेशाब लगने की वजह से अशोक की बीवी की हालत खराब हो जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसके बारे में सोच कर ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, आखिरकार आशु की बीवी से बिल्कुल भी नहीं रहा गया तो वह बोली,,,।


अरे कुछ करोगे बबुआ,,,, या ऐसे ही खड़े रहोगे,,,।


अरे भाभी इसमें मैं क्या कर सकता हूं पेशाब लगी है तो बाहर जाकर कर लो,,,,,

बाहर,,,,(मुंह बनाते हुए दरवाजे की तरफ देखते हुए) नहीं बाहर मुझे डर लगता है,,,

तो पहले क्या करती थी जब तुम्हें पेशाब लगती थी तब,,,


यही कोने में,,,(आंगन के कोने में उंगली से इशारा करके दिखाते हुए) यहीं पर कर लेती थी,,,


यहां पर,,,(उसके उंगली के इशारे से दिखाए गए कोने की तरफ देखते हुए) यहां पर तुम मुतती थी,,,
(जानबूझकर राजू मुतती शब्द का प्रयोग किया था और वैसे भी अशोक की बीवी के साथ पेशाब के बारे में इतने खुले तौर पर बात करने में इस तरह की उत्तेजना का अनुभव राजू को महसूस हो रही थी राजू पूरी तरह से चुदवासा हो गया था उसके पजामे में हलचल सी होने लगी थी,,,राजू आंगन किस कोने की तरफ देखते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तो आज भी यहीं कर लो ना इस में दिक्कत क्या है,,,,(जिस तरह से वह भोलेपन से बात कर रही थी राजू को ऐसा ही लग रहा था कि उसके बोलने पर अशोक की निकली उसकी आंखों के सामने ही अपनी साड़ी उठाकर मुतना शुरू कर देगी,,,)

नहीं पागल हो गए हो क्या,,,, पहले कोई नहीं रहता था ,, तब करने मैं कोई दिक्कत नहीं होती थी लेकिन अब तो तुम हो,,,


अरे तो इसमें क्या हुआ मैं थोड़ी ना तुम्हें खा जाऊंगा,,,


देख तो लोगे ना,,,,


क्या देख लूंगा,,,?
(राजू को पूरा यकीन हो गया था कि अशोक की बीवी पूरी तरह से एकदम भोली,,है या तो फिर जानबूझकर इस तरह का नाटक कर रही है क्योंकि कोई भी औरत इस तरह से अनजान लड़के से पेशाब करने वाली बात नहीं कहती,, लेकिन जो भी हो राजू को तो मजा आ रहा था आज की रात उसे रंगीन होने की आशंका नजर आ रही थी,,,। राजू की बात सुनकर अशोक की बीवी शर्माने लगी तो राजू बोला,,,)

बोलो ना भाभी क्या देख लूंगा,,,


अरे मुझे पेशाब करते हुए बबुआ और क्या,,,


इसमें क्या हुआ भाभी अशोक चाचा भी तो देखते होंगे,,,

अरे बबुआ तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करते,,, वह तो मेरे पति हैं,,,(जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए अपने पेशाब पर अंकुश करने की कोशिश करते हुए बोली,,)

तो क्या हुआ है तो इंसान ही,,,


अरे बबुआ तो नहीं समझोगे यहां बड़े बड़े जोरों की लगी हुई है और तुम हो कि बात को इधर उधर घुमा रहे हो,,,


अरे भाभी तो दिक्कत क्या है दरवाजा खोलकर बाहर जाकर कर लो,,,


इतनी हिम्मत होती तो चली नहीं गई होती,,,


क्यों,,,?


अंधेरे में मुझे बहुत डर लगता है वैसे भी रात को चोर उचचको का डर ज्यादा रहता है इसलिए मैं बाहर नहीं जाती,,,,


तो तुम ही बताओ,,, भाभी मैं क्या करूं मैं चलूं साथ में,,,

हां,,,,,( वह एकदम से शरमाते हुए बोली,,,)

और मैंने देख लिया तो,,,,


नहीं नहीं देखना नहीं तुम्हें मेरी कसम मुझे बहुत शर्म आती है,,,,,
(उसके भोलेपन से भरी बातें और उसका भोलापन देखकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी वह अपने मन में सोचने लगा कि इसको चोदने में बहुत मजा आएगा,,, उसकी बात मानते हुए राजू बोला,,,)

ठीक है भाभी नहीं देखुंगा बस,,,,,,,


हां,,, ठीक है,,,,
(इतना कहने के साथ ही वह पैर को दबाते हुए दरवाजे की तरफ आगे बढ़ने लगी और राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि भला ऐसा हो सकता था कि बिल्ली को दूध की रखवाली करने के लिए दिया जाए और बिल्ली उसकी रखवाली ही करें,,,, ऐसा बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है,,,,,, यह तो सिर्फ एक भरोसा था जो राजू ने अपनी तरफ से अशोक की बीवी को दे रखा था,,,, अशोक की बीवी को तो ऐसा ही था कि वादा कर दिया तो निभाएगा जरूर,,, ऐसे हालात में कोई मर्द अपना वादा निभाए ऐसा मुमकिन भी नहीं है और राजू के लिए तो बिल्कुल भी नहीं,,,,,,,, राजु ने जानबूझकर दीवार से ठगी हुई लालटेन को हाथ में ले लिया क्योंकि वह जानता था कि बाहर अंधेरा होगा भले ही चांदनी रात थी तो क्या हुआ क्योंकि घर के बाहर ढेर सारे पेड़ लगे हुए थे,,, और अंधेरे में राजू उसे पेशाब करता हुआ नहीं देख सकता था,, इसलिए वह लालटेन को हाथ में ले लिया था,,,, और कोने में पड़ा मोटा सा डंडा भी हाथ में ले लिया था,,, क्योंकि रात को कभी कबार जरूरत भी पड़ जाती थी,,,अशोक की बीवी दरवाजे पर खड़ी थी दरवाजा पकड़कर और पीछे नजर कमाकर राजू को भी देख रही थी वह उसके आने का इंतजार कर रही थी क्योंकि वहां के लिए दरवाजा खोलकर बाहर जाने में भी डरती थी,,,,,, जैसे ही राजु उसके पास आया वह दरवाजे की सिटकनी खोलने लगी ,,, दरवाजा के खुलते ही पहले वह चारों तरफ नजर घुमाकर तसल्ली करने लगी और फिर इत्मीनान से अपने पैर घर से बाहर निकाल दि और पीछे पीछे राजू के घर से बाहर आ जा लालटेन को अपने हाथ में लेकर थोड़ा हाथ की कोहनी को मोड़कर उठाए हुए था और लालटेन की रोशनी में तकरीबन 15 फीट की दूरी तक सब कुछ नजर आ रहा था,,,,,,, दो कदम चलने के बाद वह फिर से खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगी तो राजू बोला,,,।


कहां मुतोगी भाभी,,,,(राजू जानबूझकर इस तरह के खुले शब्दों का प्रयोग कर रहा था,,, वह अशोक की बीवी को उकसाना चाहता था,,, और अशोक की बीवी भी अपने लिए इस तरह का शब्द का प्रयोग एक अनजान जवान लड़के के मुंह से सुन कर सिहर उठी,,,, राजू के सवाल उंगली से इशारा करते हुए बोली,,,)


वहां झाड़ियों के पास,,,


ठीक है चलो,,,,,,,
(इतना सुनकर जैसे ही अशोक की बीवी अपना एक कदम आगे बढ़ा कि उसके कानों में फिर से वही आवाज सुनाई दी जागते रहो वह एकदम से घबरा गई,,,)

हाय दैया,,,,, लगता है चोर यहीं कहीं आस पास में ही है,,, मुझे तो बहुत डर लग रहा है,,,


क्या भाभी तुम भी बच्चों जैसा डरती हो ऐसे ही धरती रही तो मुझे लगता है अपनी साड़ी गीली कर दोगी,,,,।

धत्,,,,,(अशोक की बीवी एकदम से शरमाते हुए बोली,, राजू जल्द से जल्द,,, अशोक की बीवी की गोल-गोल गांड देखना चाहता था क्योंकि इतना तो अंदाजा लगा ही लिया था कि जब चेहरा इतना खूबसूरत है तो गांड भी खूबसूरत होगी,,,, इसीलिए राजू उतावला हुआ जा रहा था,,,, उसे इस बात का डर भी था कि कहीं अशोक होश में ना आ जाए और अगर ऐसा हो गया तो रंग में भंग पड़ जाएगा,,,, अशोक की बीवी हिम्मत दिखाते हुए अपने कदम आगे बढ़ाने लगी वैसे तो उसकी हिम्मत बिल्कुल भी नहीं होती थी लेकिन उसके साथ राजू था इसलिए उसमें थोड़ी हिम्मत थी,,,, उसका धीरे धीरे से पैर रखकर आगे बढ़ना राजू को बहुत अच्छा लग रहा था उसके पायलों की खन खन से पूरा वातावरण संगीतमय हुआ जा रहा था,,, चूड़ियों की खनक राजू के कानों में पहुंचते ही सीधे उसके लंड पर दस्तक दे रही थी,,,, राजू उसकी गोल-गोल कांड को मटकते हुए लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ देख पा रहा था,,,

यही तो सबसे बड़ी कमजोरी थी राजू की औरतों की बड़ी-बड़ी गोल गोल गांड,,,, इन्हें देखते ही मदहोश होने लगता था इसीलिए तो इस समय की अशोक की बीवी की गांड को देखकर उसका नियंत्रण अपने आप पर खोता चला जा रहा था उसका मन तो कर रहा था कि आगे बढ़ कर खुद उसकी साड़ी ऊपर कमर तक उठा दी और उसकी नंगी गांड का दीदार कर ले,,,, फिर भी धीरे-धीरे में जो मजा है वह जल्दबाजी में नहीं,,, यही राजू का मूल मंत्र भी था जिसकी वजह से वह अब सफलता हासिल करता आ रहा था और औरतो कि दोनों टांगों के बीच अपना विजय पताका भी लहराता आ रहा था,,, देखते ही देखते अशोक की बीवी सामने की कर्मचारियों के करीब पहुंच गई और राजू जानबूझकर उससे दूर खड़ा रहने की जगह उसे केवल आठ 10 फीट की दूरी पर ही खड़ा हो गया,,, और अशोक की बीवी उसे दूर जाने के लिए ना बोले इसलिए वह पहले ही बोला,,,।)

भाभी लगता तो है कि चोर उचक्के इसी गांव के आसपास में ही तभी जागते रहो की आवाज बार-बार आ रही है,,,।

(इतना सुनते ही वह घबरा गई,,, और उसी जगह पर खड़े खड़े ही अपने चारों तरफ नजर घुमाने लगी,,, और तसल्ली कर लेने के बाद,,, वह अपनी नाजुक उंगलियों को हरकत देते हुए दोनों तरफ से अपनी साड़ी को उंगली से पकड़ ली और उसने ऊपर की तरफ उठाने से पहले,,, राजू की तरफ नजर करके बोली,,,।)

देख बबुआ यहां पर देखना नहीं,,, नहीं तो शर्म के मारे हमारी पेशाब भी रुक जाएगी,,,,


नहीं नहीं भाभी तुम चिंता मत करो मैं नहीं देखूंगा,,,,
( और इतना कहकर दूसरी तरफ देखने का नाटक करने लगा,,,, अशोक के घर पर आकर राजू का समय बहुत अच्छे से गुजर रहा था यहां आने से पहले वह यही सोच रहा था कि अगर वहां रुकना पड़ गया तो रात कैसे बिताएगा,,, लेकिन अशोक की बीवी की खूबसूरती देखकर उसका भोलापन उसकी बातें सुनकर राजू यहां पर जिंदगी भर रुकने को तैयार हो गया था,,,, मौसम भी गर्मी का था लेकिन हवा चलने की वजह से वातावरण में ठंडक आ गई थी,,,, चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,,, वैसे तो चांदनी रात थी लेकिन चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ होने की वजह से यहां पर अंधेरा था अगर राजू साथ में लालटेन ना लाया होता तो उसे भी ठीक से कुछ दिखाई नहीं देता,,,,सामने का नजारा बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ था जोकि पूरी तरह से अपनी मदहोशी पूरे वातावरण में बिखेरने को तैयार था,,,। राजू की आंखें सब कुछ भूल कर सिर्फ सामने के नजारे को देख रही थी जल्द से जल्द राजू उसकी नंगी गांड के दर्शन करने के लिए तड़प रहा था पर ऐसा लग रहा था कि अशोक की बीवी उसे कुछ ज्यादा ही तड़पा रही है,,,,धीरे-धीरे अशोक की बीबी अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी और चारों तरफ नजर घुमाकर देख भी रही थी,,, राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था लेकिन अशोक की बीवी के मन में घबराहट हो रही थी चोर चोको को लेकर उसे चोर ऊच्चोको से बहुत डर लगता था,,,जैसे-जैसे अशोक की बीवी की साड़ी ऊपर की तरफ जा रही थी वैसे उसे लालटेन की पीली रोशनी में उसकी नंगी चिकनी टांग उजागर होती चली जा रही थी गोरी गोरी मांसल पिंडलिया देखकर राजू का मन ललच रहा था,,, देखते ही देखते उसकी साड़ी उसकी मोटी सुडोल जांघों तक आ गई,,, और मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर राजु का सब्र का बांध अब टूटने लगा,, राजू का मन उसको चोदने को करने लगा,,,उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,,
चारों तरफ सन्नाटा फैला हुआ था सिर्फ दूर-दूर तक कुत्तों की भौंकने की आवाज आ रही थी,,और रह रह कर झींगुर की आवाज आने लगती थी,,,।

एक तरफ जहां राजू का मन तड़प रहा था उसकी नंगी गोरी गोरी गांड को देखने के लिए वहीं दूसरी तरफ अशोक की बीवी के मन में घबराहट थी कि कहीं कोई आ ना जाए उसे इस बात की चिंता बिल्कुल भी नहीं थी कि उसके पीछे खड़ा एक अनजान जवान लड़का उसे पेशाब करते हुए देखने जा रहा था और वह भी हाथ में लालटेन जिसमें उसका सब कुछ नजर आ रहा था,,, साड़ी को मोटी मोटी जांघों तक उठाकर वह फिर से इधर-उधर देखने लगी तो राजू बोला,,,।)

जल्दी से करो ना भाभी,,, कितना देर कर रही हो,,,


अरे रुको तो बबुआ कोई चोर आ गया तो,,,


अरे नहीं तुम्हारी गांड मार लेगा,,,,
(राजू एकदम से खुले शब्दों में बोल दिया,,, धीरे-धीरे उसे एहसास होने लगा था कि वह बहुत भोली है वह कुछ बोलेगी नहीं इसीलिए राजू खुले शब्दों में बात करने लगा था,,)

हाय दैया यह कैसी बात कर रहे हो,,,, सच कहूं तो मुझे भी इसी बात का डर रहता है,,, इसीलिए तो रात को घर से बाहर निकलने से डर लगता है,,,,,
(उसकी भोली बातें सुनकर राजू के लंड की अकड़ पड़ने लगी वह पूरी तरह से समझ गया था कि कोशिश करने पर आज की रात उसका लंड उसकी बुर में होगा,,,,,, राजू को इस तरह से खुली बातें करने में बहुत मजा आ रहा था,,,थोड़ा थोड़ा मजा अशोक की बीवी को भी आ रहा था हालांकि उसके मन में डर भी था और वह भी चोर को लेकर,,, लेकिन एक जवान लड़की के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसे भी अच्छा लगने लगा था राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अच्छा भाभी एक बात बताना,,,तो,,,


क्या,,,? (वह उसी तरह से सारे को उसी स्थिति में जांघों तक उठाए हुए बोली,,)


पहले कहो नाराज तो नहीं होगी ना,,,


नही बबुआ,,, तुम से क्या नाराज होना,,,


अच्छा एक बात बताओ तुम्हें सच में चोर से ज्यादा डर लगता है या चुदवाने में,,,,
(राजू के मुंह से इस तरह का सवाल सुनकर अशोक की बीवी के भी तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, वह कुछ बोली नहीं बस अपनी नजर को राजू की तरफ घुमा कर उसकी तरफ देखते हूए बोली,,,)

यह कैसा सवाल है बबुआ,,,


अरे सही तो सवाल है,,,तुम्हें रात को बाहर निकलने में डर लगता है और वह भी चोर से,,,और सच कहूं तो अगर तुम्हारे घर में चोर आ भी गया तो तुम्हें देखकर बोला तुम्हारे घर का कोई कीमती सामान नहीं ले जाएगा लेकिन तुम्हारे पास रखा हुआ बेशकीमती खजाना जरूर लुटकर चला जाएगा,,,,,,,


लेकिन मेरे पास कौनसा खजाना पड़ा हुआ है जो लूट कर चला जाएगा,,,



अरे भाभी तो नहीं जानती तुम्हारे पास इतना बेशकीमती खजाना है कि उसे पाने के लिए दो दो रियासतों में मार हो जाए,,,


धत् पागल ,,, मेरे पास कोई खजाना नहीं है,,,,


हे भाभी,,, बहुत बेशकीमती खजाना है,,,

आहहहह,,, तुम रहने दो बबुआ,,, मुझसे अब ज्यादा रोका नहीं जा रहा है,,,,(इतना कहने के साथ ही एक झटके से मोटी मोटी जांघों पर स्थिर साड़ी को वहां एकदम से कमर तक उठा दी,,, पल भर में ही राजू की आंखों के सामने अशोक की बीवी की गोरी गोरी गांड नंगी हो गई,,, राजू तो बस देखता ही रह गया और वह अगले ही पल नीचे बैठ गई मुतने के लिए,,,, और क्षण मात्र में ही उसकी बुर से नमकीन पानी की धार छूटने लगी,,, और गुलाबी बुर में से आ रही मधुर ध्वनि राजु के कानों में मिश्री घोलने लगी,,,।
Aaha kya baat hai. Raju or ashok ki biwi ke beech hue kamuk vartalap ko padh kar khada ho gaya rony bhai. Gajab ka update per man nahi bhara padhkar.
Lagta hai bhabhi line pe aaj ayegi.
Raju to pakka rasiya ban chuka hai vo use jaroor pata lega. Intjaar hai agle dhasu update ka.👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
 

Ek number

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राजू अशोक को उसके घर पहुंचाने के बाद वहां पर रुकने वाला नहीं था वह वहां से वापस लौट आना चाहता था क्योंकि घर पर गुलाबी कि बुर की याद उसे बहुत आती थी,, क्योंकि अपनी बुआ को बिना चोदे उसे नींद नहीं आती थी,,, लेकिन जैसे ही उसकी नजर अशोक की बीवी पर पड़ी थी उसका इरादा एकदम से बदल गया था,,,,, और वह वहीं पर रुकना ही मुनासिब समझा,,,, और उसका वहां रुकना ऐसा लग रहा था कि धीरे-धीरे सफलता की राह पकड़ रहा था,,, क्योंकि रात पूरी तरह से गहरा चुकी थी,,, उसका पति नशे में बेसुध होकर सो रहा था,,, खाना पीना हो चुका था,,, और राजू चालाकी दिखाते हुए अशोक की बीवी को खुद अपने हाथों से खाना खिलाया था और राजू यहीं पर ही अशोक की बीवी को अपने हाथों से खाना खिलाते ही सफलता की सीढ़ी चढ़ना शुरू कर दिया था,,, वरना एक औरत किसी गैर मर्द के हाथों से खाना क्यों खाए,,,, राजू को अशोक की बीवी बहुत ही भोली भाली भी लग रही थी जो कि वह थी भी,,,,।

दोनों सोने की तैयारी कर रहे थे और तभी अशोक की बीवी को जोरो की पेशाब लगी थी और जिस तरह से वह कांपते स्वर में चोरों की पेशाब लगने वाली बात की थी उसे सुनते ही राजू के लंड ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया था,,,,,, एक ऐसी औरत जिसे मैं जानता था कि नहीं था जिसे पहली बार मिला था ज्यादा जान पहचान भी नहीं थी ऐसी खूबसूरत औरत जहां से पेशाब लगने वाली बात बोली तो इसे सुनकर ही राजू की खुशी का ठिकाना ना रहा,,,,,

राजू कुछ देर तक शांत होकर खड़ा रहा और उस खूबसूरत औरत को देखता है जो कि बहुत ही भोलेपन से पेशाब लगने वाली बात कही थी,,,, उसका बार-बार कभी दांया पैर उठाना कभी बाया फिर रह रहकर अपनी कमर पकड़ लेना,,,, ,, यह सब दर्शा रहा था कि उसे कितनी तीव्रता से पेशाब लगी है और यह सब देख कर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, पेशाब करने वाली बात से ही वह पल भर में ही उसके खूबसूरत बुर के बारे में कल्पना करना शुरू कर दिया था कि उसकी बुर कैसी होगी तुम चिकनी हो क्या मखमली रेशमी बालों से घुरी हुई होगी,,, फिर अपने ही सवाल का खुद ही जवाब देते हुए बोला,,, जैसे भी होगी बहुत खूबसूरत होगी,,,,। राजू सब कुछ भूल कर उसकी खूबसूरत यौवन को वह अपनी आंखों से पी रहा था,,, एक तरफ जहां पेशाब लगने की वजह से अशोक की बीवी की हालत खराब हो जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसके बारे में सोच कर ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, आखिरकार आशु की बीवी से बिल्कुल भी नहीं रहा गया तो वह बोली,,,।


अरे कुछ करोगे बबुआ,,,, या ऐसे ही खड़े रहोगे,,,।


अरे भाभी इसमें मैं क्या कर सकता हूं पेशाब लगी है तो बाहर जाकर कर लो,,,,,

बाहर,,,,(मुंह बनाते हुए दरवाजे की तरफ देखते हुए) नहीं बाहर मुझे डर लगता है,,,

तो पहले क्या करती थी जब तुम्हें पेशाब लगती थी तब,,,


यही कोने में,,,(आंगन के कोने में उंगली से इशारा करके दिखाते हुए) यहीं पर कर लेती थी,,,


यहां पर,,,(उसके उंगली के इशारे से दिखाए गए कोने की तरफ देखते हुए) यहां पर तुम मुतती थी,,,
(जानबूझकर राजू मुतती शब्द का प्रयोग किया था और वैसे भी अशोक की बीवी के साथ पेशाब के बारे में इतने खुले तौर पर बात करने में इस तरह की उत्तेजना का अनुभव राजू को महसूस हो रही थी राजू पूरी तरह से चुदवासा हो गया था उसके पजामे में हलचल सी होने लगी थी,,,राजू आंगन किस कोने की तरफ देखते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तो आज भी यहीं कर लो ना इस में दिक्कत क्या है,,,,(जिस तरह से वह भोलेपन से बात कर रही थी राजू को ऐसा ही लग रहा था कि उसके बोलने पर अशोक की निकली उसकी आंखों के सामने ही अपनी साड़ी उठाकर मुतना शुरू कर देगी,,,)

नहीं पागल हो गए हो क्या,,,, पहले कोई नहीं रहता था ,, तब करने मैं कोई दिक्कत नहीं होती थी लेकिन अब तो तुम हो,,,


अरे तो इसमें क्या हुआ मैं थोड़ी ना तुम्हें खा जाऊंगा,,,


देख तो लोगे ना,,,,


क्या देख लूंगा,,,?
(राजू को पूरा यकीन हो गया था कि अशोक की बीवी पूरी तरह से एकदम भोली,,है या तो फिर जानबूझकर इस तरह का नाटक कर रही है क्योंकि कोई भी औरत इस तरह से अनजान लड़के से पेशाब करने वाली बात नहीं कहती,, लेकिन जो भी हो राजू को तो मजा आ रहा था आज की रात उसे रंगीन होने की आशंका नजर आ रही थी,,,। राजू की बात सुनकर अशोक की बीवी शर्माने लगी तो राजू बोला,,,)

बोलो ना भाभी क्या देख लूंगा,,,


अरे मुझे पेशाब करते हुए बबुआ और क्या,,,


इसमें क्या हुआ भाभी अशोक चाचा भी तो देखते होंगे,,,

अरे बबुआ तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करते,,, वह तो मेरे पति हैं,,,(जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए अपने पेशाब पर अंकुश करने की कोशिश करते हुए बोली,,)

तो क्या हुआ है तो इंसान ही,,,


अरे बबुआ तो नहीं समझोगे यहां बड़े बड़े जोरों की लगी हुई है और तुम हो कि बात को इधर उधर घुमा रहे हो,,,


अरे भाभी तो दिक्कत क्या है दरवाजा खोलकर बाहर जाकर कर लो,,,


इतनी हिम्मत होती तो चली नहीं गई होती,,,


क्यों,,,?


अंधेरे में मुझे बहुत डर लगता है वैसे भी रात को चोर उचचको का डर ज्यादा रहता है इसलिए मैं बाहर नहीं जाती,,,,


तो तुम ही बताओ,,, भाभी मैं क्या करूं मैं चलूं साथ में,,,

हां,,,,,( वह एकदम से शरमाते हुए बोली,,,)

और मैंने देख लिया तो,,,,


नहीं नहीं देखना नहीं तुम्हें मेरी कसम मुझे बहुत शर्म आती है,,,,,
(उसके भोलेपन से भरी बातें और उसका भोलापन देखकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी वह अपने मन में सोचने लगा कि इसको चोदने में बहुत मजा आएगा,,, उसकी बात मानते हुए राजू बोला,,,)

ठीक है भाभी नहीं देखुंगा बस,,,,,,,


हां,,, ठीक है,,,,
(इतना कहने के साथ ही वह पैर को दबाते हुए दरवाजे की तरफ आगे बढ़ने लगी और राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि भला ऐसा हो सकता था कि बिल्ली को दूध की रखवाली करने के लिए दिया जाए और बिल्ली उसकी रखवाली ही करें,,,, ऐसा बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है,,,,,, यह तो सिर्फ एक भरोसा था जो राजू ने अपनी तरफ से अशोक की बीवी को दे रखा था,,,, अशोक की बीवी को तो ऐसा ही था कि वादा कर दिया तो निभाएगा जरूर,,, ऐसे हालात में कोई मर्द अपना वादा निभाए ऐसा मुमकिन भी नहीं है और राजू के लिए तो बिल्कुल भी नहीं,,,,,,,, राजु ने जानबूझकर दीवार से ठगी हुई लालटेन को हाथ में ले लिया क्योंकि वह जानता था कि बाहर अंधेरा होगा भले ही चांदनी रात थी तो क्या हुआ क्योंकि घर के बाहर ढेर सारे पेड़ लगे हुए थे,,, और अंधेरे में राजू उसे पेशाब करता हुआ नहीं देख सकता था,, इसलिए वह लालटेन को हाथ में ले लिया था,,,, और कोने में पड़ा मोटा सा डंडा भी हाथ में ले लिया था,,, क्योंकि रात को कभी कबार जरूरत भी पड़ जाती थी,,,अशोक की बीवी दरवाजे पर खड़ी थी दरवाजा पकड़कर और पीछे नजर कमाकर राजू को भी देख रही थी वह उसके आने का इंतजार कर रही थी क्योंकि वहां के लिए दरवाजा खोलकर बाहर जाने में भी डरती थी,,,,,, जैसे ही राजु उसके पास आया वह दरवाजे की सिटकनी खोलने लगी ,,, दरवाजा के खुलते ही पहले वह चारों तरफ नजर घुमाकर तसल्ली करने लगी और फिर इत्मीनान से अपने पैर घर से बाहर निकाल दि और पीछे पीछे राजू के घर से बाहर आ जा लालटेन को अपने हाथ में लेकर थोड़ा हाथ की कोहनी को मोड़कर उठाए हुए था और लालटेन की रोशनी में तकरीबन 15 फीट की दूरी तक सब कुछ नजर आ रहा था,,,,,,, दो कदम चलने के बाद वह फिर से खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगी तो राजू बोला,,,।


कहां मुतोगी भाभी,,,,(राजू जानबूझकर इस तरह के खुले शब्दों का प्रयोग कर रहा था,,, वह अशोक की बीवी को उकसाना चाहता था,,, और अशोक की बीवी भी अपने लिए इस तरह का शब्द का प्रयोग एक अनजान जवान लड़के के मुंह से सुन कर सिहर उठी,,,, राजू के सवाल उंगली से इशारा करते हुए बोली,,,)


वहां झाड़ियों के पास,,,


ठीक है चलो,,,,,,,
(इतना सुनकर जैसे ही अशोक की बीवी अपना एक कदम आगे बढ़ा कि उसके कानों में फिर से वही आवाज सुनाई दी जागते रहो वह एकदम से घबरा गई,,,)

हाय दैया,,,,, लगता है चोर यहीं कहीं आस पास में ही है,,, मुझे तो बहुत डर लग रहा है,,,


क्या भाभी तुम भी बच्चों जैसा डरती हो ऐसे ही धरती रही तो मुझे लगता है अपनी साड़ी गीली कर दोगी,,,,।

धत्,,,,,(अशोक की बीवी एकदम से शरमाते हुए बोली,, राजू जल्द से जल्द,,, अशोक की बीवी की गोल-गोल गांड देखना चाहता था क्योंकि इतना तो अंदाजा लगा ही लिया था कि जब चेहरा इतना खूबसूरत है तो गांड भी खूबसूरत होगी,,,, इसीलिए राजू उतावला हुआ जा रहा था,,,, उसे इस बात का डर भी था कि कहीं अशोक होश में ना आ जाए और अगर ऐसा हो गया तो रंग में भंग पड़ जाएगा,,,, अशोक की बीवी हिम्मत दिखाते हुए अपने कदम आगे बढ़ाने लगी वैसे तो उसकी हिम्मत बिल्कुल भी नहीं होती थी लेकिन उसके साथ राजू था इसलिए उसमें थोड़ी हिम्मत थी,,,, उसका धीरे धीरे से पैर रखकर आगे बढ़ना राजू को बहुत अच्छा लग रहा था उसके पायलों की खन खन से पूरा वातावरण संगीतमय हुआ जा रहा था,,, चूड़ियों की खनक राजू के कानों में पहुंचते ही सीधे उसके लंड पर दस्तक दे रही थी,,,, राजू उसकी गोल-गोल कांड को मटकते हुए लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ देख पा रहा था,,,

यही तो सबसे बड़ी कमजोरी थी राजू की औरतों की बड़ी-बड़ी गोल गोल गांड,,,, इन्हें देखते ही मदहोश होने लगता था इसीलिए तो इस समय की अशोक की बीवी की गांड को देखकर उसका नियंत्रण अपने आप पर खोता चला जा रहा था उसका मन तो कर रहा था कि आगे बढ़ कर खुद उसकी साड़ी ऊपर कमर तक उठा दी और उसकी नंगी गांड का दीदार कर ले,,,, फिर भी धीरे-धीरे में जो मजा है वह जल्दबाजी में नहीं,,, यही राजू का मूल मंत्र भी था जिसकी वजह से वह अब सफलता हासिल करता आ रहा था और औरतो कि दोनों टांगों के बीच अपना विजय पताका भी लहराता आ रहा था,,, देखते ही देखते अशोक की बीवी सामने की कर्मचारियों के करीब पहुंच गई और राजू जानबूझकर उससे दूर खड़ा रहने की जगह उसे केवल आठ 10 फीट की दूरी पर ही खड़ा हो गया,,, और अशोक की बीवी उसे दूर जाने के लिए ना बोले इसलिए वह पहले ही बोला,,,।)

भाभी लगता तो है कि चोर उचक्के इसी गांव के आसपास में ही तभी जागते रहो की आवाज बार-बार आ रही है,,,।

(इतना सुनते ही वह घबरा गई,,, और उसी जगह पर खड़े खड़े ही अपने चारों तरफ नजर घुमाने लगी,,, और तसल्ली कर लेने के बाद,,, वह अपनी नाजुक उंगलियों को हरकत देते हुए दोनों तरफ से अपनी साड़ी को उंगली से पकड़ ली और उसने ऊपर की तरफ उठाने से पहले,,, राजू की तरफ नजर करके बोली,,,।)

देख बबुआ यहां पर देखना नहीं,,, नहीं तो शर्म के मारे हमारी पेशाब भी रुक जाएगी,,,,


नहीं नहीं भाभी तुम चिंता मत करो मैं नहीं देखूंगा,,,,
( और इतना कहकर दूसरी तरफ देखने का नाटक करने लगा,,,, अशोक के घर पर आकर राजू का समय बहुत अच्छे से गुजर रहा था यहां आने से पहले वह यही सोच रहा था कि अगर वहां रुकना पड़ गया तो रात कैसे बिताएगा,,, लेकिन अशोक की बीवी की खूबसूरती देखकर उसका भोलापन उसकी बातें सुनकर राजू यहां पर जिंदगी भर रुकने को तैयार हो गया था,,,, मौसम भी गर्मी का था लेकिन हवा चलने की वजह से वातावरण में ठंडक आ गई थी,,,, चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,,, वैसे तो चांदनी रात थी लेकिन चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ होने की वजह से यहां पर अंधेरा था अगर राजू साथ में लालटेन ना लाया होता तो उसे भी ठीक से कुछ दिखाई नहीं देता,,,,सामने का नजारा बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ था जोकि पूरी तरह से अपनी मदहोशी पूरे वातावरण में बिखेरने को तैयार था,,,। राजू की आंखें सब कुछ भूल कर सिर्फ सामने के नजारे को देख रही थी जल्द से जल्द राजू उसकी नंगी गांड के दर्शन करने के लिए तड़प रहा था पर ऐसा लग रहा था कि अशोक की बीवी उसे कुछ ज्यादा ही तड़पा रही है,,,,धीरे-धीरे अशोक की बीबी अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी और चारों तरफ नजर घुमाकर देख भी रही थी,,, राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था लेकिन अशोक की बीवी के मन में घबराहट हो रही थी चोर चोको को लेकर उसे चोर ऊच्चोको से बहुत डर लगता था,,,जैसे-जैसे अशोक की बीवी की साड़ी ऊपर की तरफ जा रही थी वैसे उसे लालटेन की पीली रोशनी में उसकी नंगी चिकनी टांग उजागर होती चली जा रही थी गोरी गोरी मांसल पिंडलिया देखकर राजू का मन ललच रहा था,,, देखते ही देखते उसकी साड़ी उसकी मोटी सुडोल जांघों तक आ गई,,, और मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर राजु का सब्र का बांध अब टूटने लगा,, राजू का मन उसको चोदने को करने लगा,,,उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,,
चारों तरफ सन्नाटा फैला हुआ था सिर्फ दूर-दूर तक कुत्तों की भौंकने की आवाज आ रही थी,,और रह रह कर झींगुर की आवाज आने लगती थी,,,।

एक तरफ जहां राजू का मन तड़प रहा था उसकी नंगी गोरी गोरी गांड को देखने के लिए वहीं दूसरी तरफ अशोक की बीवी के मन में घबराहट थी कि कहीं कोई आ ना जाए उसे इस बात की चिंता बिल्कुल भी नहीं थी कि उसके पीछे खड़ा एक अनजान जवान लड़का उसे पेशाब करते हुए देखने जा रहा था और वह भी हाथ में लालटेन जिसमें उसका सब कुछ नजर आ रहा था,,, साड़ी को मोटी मोटी जांघों तक उठाकर वह फिर से इधर-उधर देखने लगी तो राजू बोला,,,।)

जल्दी से करो ना भाभी,,, कितना देर कर रही हो,,,


अरे रुको तो बबुआ कोई चोर आ गया तो,,,


अरे नहीं तुम्हारी गांड मार लेगा,,,,
(राजू एकदम से खुले शब्दों में बोल दिया,,, धीरे-धीरे उसे एहसास होने लगा था कि वह बहुत भोली है वह कुछ बोलेगी नहीं इसीलिए राजू खुले शब्दों में बात करने लगा था,,)

हाय दैया यह कैसी बात कर रहे हो,,,, सच कहूं तो मुझे भी इसी बात का डर रहता है,,, इसीलिए तो रात को घर से बाहर निकलने से डर लगता है,,,,,
(उसकी भोली बातें सुनकर राजू के लंड की अकड़ पड़ने लगी वह पूरी तरह से समझ गया था कि कोशिश करने पर आज की रात उसका लंड उसकी बुर में होगा,,,,,, राजू को इस तरह से खुली बातें करने में बहुत मजा आ रहा था,,,थोड़ा थोड़ा मजा अशोक की बीवी को भी आ रहा था हालांकि उसके मन में डर भी था और वह भी चोर को लेकर,,, लेकिन एक जवान लड़की के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसे भी अच्छा लगने लगा था राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अच्छा भाभी एक बात बताना,,,तो,,,


क्या,,,? (वह उसी तरह से सारे को उसी स्थिति में जांघों तक उठाए हुए बोली,,)


पहले कहो नाराज तो नहीं होगी ना,,,


नही बबुआ,,, तुम से क्या नाराज होना,,,


अच्छा एक बात बताओ तुम्हें सच में चोर से ज्यादा डर लगता है या चुदवाने में,,,,
(राजू के मुंह से इस तरह का सवाल सुनकर अशोक की बीवी के भी तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, वह कुछ बोली नहीं बस अपनी नजर को राजू की तरफ घुमा कर उसकी तरफ देखते हूए बोली,,,)

यह कैसा सवाल है बबुआ,,,


अरे सही तो सवाल है,,,तुम्हें रात को बाहर निकलने में डर लगता है और वह भी चोर से,,,और सच कहूं तो अगर तुम्हारे घर में चोर आ भी गया तो तुम्हें देखकर बोला तुम्हारे घर का कोई कीमती सामान नहीं ले जाएगा लेकिन तुम्हारे पास रखा हुआ बेशकीमती खजाना जरूर लुटकर चला जाएगा,,,,,,,


लेकिन मेरे पास कौनसा खजाना पड़ा हुआ है जो लूट कर चला जाएगा,,,



अरे भाभी तो नहीं जानती तुम्हारे पास इतना बेशकीमती खजाना है कि उसे पाने के लिए दो दो रियासतों में मार हो जाए,,,


धत् पागल ,,, मेरे पास कोई खजाना नहीं है,,,,


हे भाभी,,, बहुत बेशकीमती खजाना है,,,

आहहहह,,, तुम रहने दो बबुआ,,, मुझसे अब ज्यादा रोका नहीं जा रहा है,,,,(इतना कहने के साथ ही एक झटके से मोटी मोटी जांघों पर स्थिर साड़ी को वहां एकदम से कमर तक उठा दी,,, पल भर में ही राजू की आंखों के सामने अशोक की बीवी की गोरी गोरी गांड नंगी हो गई,,, राजू तो बस देखता ही रह गया और वह अगले ही पल नीचे बैठ गई मुतने के लिए,,,, और क्षण मात्र में ही उसकी बुर से नमकीन पानी की धार छूटने लगी,,, और गुलाबी बुर में से आ रही मधुर ध्वनि राजु के कानों में मिश्री घोलने लगी,,,।
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राजू अशोक को उसके घर पहुंचाने के बाद वहां पर रुकने वाला नहीं था वह वहां से वापस लौट आना चाहता था क्योंकि घर पर गुलाबी कि बुर की याद उसे बहुत आती थी,, क्योंकि अपनी बुआ को बिना चोदे उसे नींद नहीं आती थी,,, लेकिन जैसे ही उसकी नजर अशोक की बीवी पर पड़ी थी उसका इरादा एकदम से बदल गया था,,,,, और वह वहीं पर रुकना ही मुनासिब समझा,,,, और उसका वहां रुकना ऐसा लग रहा था कि धीरे-धीरे सफलता की राह पकड़ रहा था,,, क्योंकि रात पूरी तरह से गहरा चुकी थी,,, उसका पति नशे में बेसुध होकर सो रहा था,,, खाना पीना हो चुका था,,, और राजू चालाकी दिखाते हुए अशोक की बीवी को खुद अपने हाथों से खाना खिलाया था और राजू यहीं पर ही अशोक की बीवी को अपने हाथों से खाना खिलाते ही सफलता की सीढ़ी चढ़ना शुरू कर दिया था,,, वरना एक औरत किसी गैर मर्द के हाथों से खाना क्यों खाए,,,, राजू को अशोक की बीवी बहुत ही भोली भाली भी लग रही थी जो कि वह थी भी,,,,।

दोनों सोने की तैयारी कर रहे थे और तभी अशोक की बीवी को जोरो की पेशाब लगी थी और जिस तरह से वह कांपते स्वर में चोरों की पेशाब लगने वाली बात की थी उसे सुनते ही राजू के लंड ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया था,,,,,, एक ऐसी औरत जिसे मैं जानता था कि नहीं था जिसे पहली बार मिला था ज्यादा जान पहचान भी नहीं थी ऐसी खूबसूरत औरत जहां से पेशाब लगने वाली बात बोली तो इसे सुनकर ही राजू की खुशी का ठिकाना ना रहा,,,,,

राजू कुछ देर तक शांत होकर खड़ा रहा और उस खूबसूरत औरत को देखता है जो कि बहुत ही भोलेपन से पेशाब लगने वाली बात कही थी,,,, उसका बार-बार कभी दांया पैर उठाना कभी बाया फिर रह रहकर अपनी कमर पकड़ लेना,,,, ,, यह सब दर्शा रहा था कि उसे कितनी तीव्रता से पेशाब लगी है और यह सब देख कर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, पेशाब करने वाली बात से ही वह पल भर में ही उसके खूबसूरत बुर के बारे में कल्पना करना शुरू कर दिया था कि उसकी बुर कैसी होगी तुम चिकनी हो क्या मखमली रेशमी बालों से घुरी हुई होगी,,, फिर अपने ही सवाल का खुद ही जवाब देते हुए बोला,,, जैसे भी होगी बहुत खूबसूरत होगी,,,,। राजू सब कुछ भूल कर उसकी खूबसूरत यौवन को वह अपनी आंखों से पी रहा था,,, एक तरफ जहां पेशाब लगने की वजह से अशोक की बीवी की हालत खराब हो जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसके बारे में सोच कर ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, आखिरकार आशु की बीवी से बिल्कुल भी नहीं रहा गया तो वह बोली,,,।


अरे कुछ करोगे बबुआ,,,, या ऐसे ही खड़े रहोगे,,,।


अरे भाभी इसमें मैं क्या कर सकता हूं पेशाब लगी है तो बाहर जाकर कर लो,,,,,

बाहर,,,,(मुंह बनाते हुए दरवाजे की तरफ देखते हुए) नहीं बाहर मुझे डर लगता है,,,

तो पहले क्या करती थी जब तुम्हें पेशाब लगती थी तब,,,


यही कोने में,,,(आंगन के कोने में उंगली से इशारा करके दिखाते हुए) यहीं पर कर लेती थी,,,


यहां पर,,,(उसके उंगली के इशारे से दिखाए गए कोने की तरफ देखते हुए) यहां पर तुम मुतती थी,,,
(जानबूझकर राजू मुतती शब्द का प्रयोग किया था और वैसे भी अशोक की बीवी के साथ पेशाब के बारे में इतने खुले तौर पर बात करने में इस तरह की उत्तेजना का अनुभव राजू को महसूस हो रही थी राजू पूरी तरह से चुदवासा हो गया था उसके पजामे में हलचल सी होने लगी थी,,,राजू आंगन किस कोने की तरफ देखते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तो आज भी यहीं कर लो ना इस में दिक्कत क्या है,,,,(जिस तरह से वह भोलेपन से बात कर रही थी राजू को ऐसा ही लग रहा था कि उसके बोलने पर अशोक की निकली उसकी आंखों के सामने ही अपनी साड़ी उठाकर मुतना शुरू कर देगी,,,)

नहीं पागल हो गए हो क्या,,,, पहले कोई नहीं रहता था ,, तब करने मैं कोई दिक्कत नहीं होती थी लेकिन अब तो तुम हो,,,


अरे तो इसमें क्या हुआ मैं थोड़ी ना तुम्हें खा जाऊंगा,,,


देख तो लोगे ना,,,,


क्या देख लूंगा,,,?
(राजू को पूरा यकीन हो गया था कि अशोक की बीवी पूरी तरह से एकदम भोली,,है या तो फिर जानबूझकर इस तरह का नाटक कर रही है क्योंकि कोई भी औरत इस तरह से अनजान लड़के से पेशाब करने वाली बात नहीं कहती,, लेकिन जो भी हो राजू को तो मजा आ रहा था आज की रात उसे रंगीन होने की आशंका नजर आ रही थी,,,। राजू की बात सुनकर अशोक की बीवी शर्माने लगी तो राजू बोला,,,)

बोलो ना भाभी क्या देख लूंगा,,,


अरे मुझे पेशाब करते हुए बबुआ और क्या,,,


इसमें क्या हुआ भाभी अशोक चाचा भी तो देखते होंगे,,,

अरे बबुआ तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं करते,,, वह तो मेरे पति हैं,,,(जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए अपने पेशाब पर अंकुश करने की कोशिश करते हुए बोली,,)

तो क्या हुआ है तो इंसान ही,,,


अरे बबुआ तो नहीं समझोगे यहां बड़े बड़े जोरों की लगी हुई है और तुम हो कि बात को इधर उधर घुमा रहे हो,,,


अरे भाभी तो दिक्कत क्या है दरवाजा खोलकर बाहर जाकर कर लो,,,


इतनी हिम्मत होती तो चली नहीं गई होती,,,


क्यों,,,?


अंधेरे में मुझे बहुत डर लगता है वैसे भी रात को चोर उचचको का डर ज्यादा रहता है इसलिए मैं बाहर नहीं जाती,,,,


तो तुम ही बताओ,,, भाभी मैं क्या करूं मैं चलूं साथ में,,,

हां,,,,,( वह एकदम से शरमाते हुए बोली,,,)

और मैंने देख लिया तो,,,,


नहीं नहीं देखना नहीं तुम्हें मेरी कसम मुझे बहुत शर्म आती है,,,,,
(उसके भोलेपन से भरी बातें और उसका भोलापन देखकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी वह अपने मन में सोचने लगा कि इसको चोदने में बहुत मजा आएगा,,, उसकी बात मानते हुए राजू बोला,,,)

ठीक है भाभी नहीं देखुंगा बस,,,,,,,


हां,,, ठीक है,,,,
(इतना कहने के साथ ही वह पैर को दबाते हुए दरवाजे की तरफ आगे बढ़ने लगी और राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि भला ऐसा हो सकता था कि बिल्ली को दूध की रखवाली करने के लिए दिया जाए और बिल्ली उसकी रखवाली ही करें,,,, ऐसा बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है,,,,,, यह तो सिर्फ एक भरोसा था जो राजू ने अपनी तरफ से अशोक की बीवी को दे रखा था,,,, अशोक की बीवी को तो ऐसा ही था कि वादा कर दिया तो निभाएगा जरूर,,, ऐसे हालात में कोई मर्द अपना वादा निभाए ऐसा मुमकिन भी नहीं है और राजू के लिए तो बिल्कुल भी नहीं,,,,,,,, राजु ने जानबूझकर दीवार से ठगी हुई लालटेन को हाथ में ले लिया क्योंकि वह जानता था कि बाहर अंधेरा होगा भले ही चांदनी रात थी तो क्या हुआ क्योंकि घर के बाहर ढेर सारे पेड़ लगे हुए थे,,, और अंधेरे में राजू उसे पेशाब करता हुआ नहीं देख सकता था,, इसलिए वह लालटेन को हाथ में ले लिया था,,,, और कोने में पड़ा मोटा सा डंडा भी हाथ में ले लिया था,,, क्योंकि रात को कभी कबार जरूरत भी पड़ जाती थी,,,अशोक की बीवी दरवाजे पर खड़ी थी दरवाजा पकड़कर और पीछे नजर कमाकर राजू को भी देख रही थी वह उसके आने का इंतजार कर रही थी क्योंकि वहां के लिए दरवाजा खोलकर बाहर जाने में भी डरती थी,,,,,, जैसे ही राजु उसके पास आया वह दरवाजे की सिटकनी खोलने लगी ,,, दरवाजा के खुलते ही पहले वह चारों तरफ नजर घुमाकर तसल्ली करने लगी और फिर इत्मीनान से अपने पैर घर से बाहर निकाल दि और पीछे पीछे राजू के घर से बाहर आ जा लालटेन को अपने हाथ में लेकर थोड़ा हाथ की कोहनी को मोड़कर उठाए हुए था और लालटेन की रोशनी में तकरीबन 15 फीट की दूरी तक सब कुछ नजर आ रहा था,,,,,,, दो कदम चलने के बाद वह फिर से खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगी तो राजू बोला,,,।


कहां मुतोगी भाभी,,,,(राजू जानबूझकर इस तरह के खुले शब्दों का प्रयोग कर रहा था,,, वह अशोक की बीवी को उकसाना चाहता था,,, और अशोक की बीवी भी अपने लिए इस तरह का शब्द का प्रयोग एक अनजान जवान लड़के के मुंह से सुन कर सिहर उठी,,,, राजू के सवाल उंगली से इशारा करते हुए बोली,,,)


वहां झाड़ियों के पास,,,


ठीक है चलो,,,,,,,
(इतना सुनकर जैसे ही अशोक की बीवी अपना एक कदम आगे बढ़ा कि उसके कानों में फिर से वही आवाज सुनाई दी जागते रहो वह एकदम से घबरा गई,,,)

हाय दैया,,,,, लगता है चोर यहीं कहीं आस पास में ही है,,, मुझे तो बहुत डर लग रहा है,,,


क्या भाभी तुम भी बच्चों जैसा डरती हो ऐसे ही धरती रही तो मुझे लगता है अपनी साड़ी गीली कर दोगी,,,,।

धत्,,,,,(अशोक की बीवी एकदम से शरमाते हुए बोली,, राजू जल्द से जल्द,,, अशोक की बीवी की गोल-गोल गांड देखना चाहता था क्योंकि इतना तो अंदाजा लगा ही लिया था कि जब चेहरा इतना खूबसूरत है तो गांड भी खूबसूरत होगी,,,, इसीलिए राजू उतावला हुआ जा रहा था,,,, उसे इस बात का डर भी था कि कहीं अशोक होश में ना आ जाए और अगर ऐसा हो गया तो रंग में भंग पड़ जाएगा,,,, अशोक की बीवी हिम्मत दिखाते हुए अपने कदम आगे बढ़ाने लगी वैसे तो उसकी हिम्मत बिल्कुल भी नहीं होती थी लेकिन उसके साथ राजू था इसलिए उसमें थोड़ी हिम्मत थी,,,, उसका धीरे धीरे से पैर रखकर आगे बढ़ना राजू को बहुत अच्छा लग रहा था उसके पायलों की खन खन से पूरा वातावरण संगीतमय हुआ जा रहा था,,, चूड़ियों की खनक राजू के कानों में पहुंचते ही सीधे उसके लंड पर दस्तक दे रही थी,,,, राजू उसकी गोल-गोल कांड को मटकते हुए लालटेन की पीली रोशनी में एकदम साफ देख पा रहा था,,,

यही तो सबसे बड़ी कमजोरी थी राजू की औरतों की बड़ी-बड़ी गोल गोल गांड,,,, इन्हें देखते ही मदहोश होने लगता था इसीलिए तो इस समय की अशोक की बीवी की गांड को देखकर उसका नियंत्रण अपने आप पर खोता चला जा रहा था उसका मन तो कर रहा था कि आगे बढ़ कर खुद उसकी साड़ी ऊपर कमर तक उठा दी और उसकी नंगी गांड का दीदार कर ले,,,, फिर भी धीरे-धीरे में जो मजा है वह जल्दबाजी में नहीं,,, यही राजू का मूल मंत्र भी था जिसकी वजह से वह अब सफलता हासिल करता आ रहा था और औरतो कि दोनों टांगों के बीच अपना विजय पताका भी लहराता आ रहा था,,, देखते ही देखते अशोक की बीवी सामने की कर्मचारियों के करीब पहुंच गई और राजू जानबूझकर उससे दूर खड़ा रहने की जगह उसे केवल आठ 10 फीट की दूरी पर ही खड़ा हो गया,,, और अशोक की बीवी उसे दूर जाने के लिए ना बोले इसलिए वह पहले ही बोला,,,।)

भाभी लगता तो है कि चोर उचक्के इसी गांव के आसपास में ही तभी जागते रहो की आवाज बार-बार आ रही है,,,।

(इतना सुनते ही वह घबरा गई,,, और उसी जगह पर खड़े खड़े ही अपने चारों तरफ नजर घुमाने लगी,,, और तसल्ली कर लेने के बाद,,, वह अपनी नाजुक उंगलियों को हरकत देते हुए दोनों तरफ से अपनी साड़ी को उंगली से पकड़ ली और उसने ऊपर की तरफ उठाने से पहले,,, राजू की तरफ नजर करके बोली,,,।)

देख बबुआ यहां पर देखना नहीं,,, नहीं तो शर्म के मारे हमारी पेशाब भी रुक जाएगी,,,,


नहीं नहीं भाभी तुम चिंता मत करो मैं नहीं देखूंगा,,,,
( और इतना कहकर दूसरी तरफ देखने का नाटक करने लगा,,,, अशोक के घर पर आकर राजू का समय बहुत अच्छे से गुजर रहा था यहां आने से पहले वह यही सोच रहा था कि अगर वहां रुकना पड़ गया तो रात कैसे बिताएगा,,, लेकिन अशोक की बीवी की खूबसूरती देखकर उसका भोलापन उसकी बातें सुनकर राजू यहां पर जिंदगी भर रुकने को तैयार हो गया था,,,, मौसम भी गर्मी का था लेकिन हवा चलने की वजह से वातावरण में ठंडक आ गई थी,,,, चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,,, वैसे तो चांदनी रात थी लेकिन चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ होने की वजह से यहां पर अंधेरा था अगर राजू साथ में लालटेन ना लाया होता तो उसे भी ठीक से कुछ दिखाई नहीं देता,,,,सामने का नजारा बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ था जोकि पूरी तरह से अपनी मदहोशी पूरे वातावरण में बिखेरने को तैयार था,,,। राजू की आंखें सब कुछ भूल कर सिर्फ सामने के नजारे को देख रही थी जल्द से जल्द राजू उसकी नंगी गांड के दर्शन करने के लिए तड़प रहा था पर ऐसा लग रहा था कि अशोक की बीवी उसे कुछ ज्यादा ही तड़पा रही है,,,,धीरे-धीरे अशोक की बीबी अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी और चारों तरफ नजर घुमाकर देख भी रही थी,,, राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था लेकिन अशोक की बीवी के मन में घबराहट हो रही थी चोर चोको को लेकर उसे चोर ऊच्चोको से बहुत डर लगता था,,,जैसे-जैसे अशोक की बीवी की साड़ी ऊपर की तरफ जा रही थी वैसे उसे लालटेन की पीली रोशनी में उसकी नंगी चिकनी टांग उजागर होती चली जा रही थी गोरी गोरी मांसल पिंडलिया देखकर राजू का मन ललच रहा था,,, देखते ही देखते उसकी साड़ी उसकी मोटी सुडोल जांघों तक आ गई,,, और मोटी मोटी चिकनी जांघों को देखकर राजु का सब्र का बांध अब टूटने लगा,, राजू का मन उसको चोदने को करने लगा,,,उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,,
चारों तरफ सन्नाटा फैला हुआ था सिर्फ दूर-दूर तक कुत्तों की भौंकने की आवाज आ रही थी,,और रह रह कर झींगुर की आवाज आने लगती थी,,,।

एक तरफ जहां राजू का मन तड़प रहा था उसकी नंगी गोरी गोरी गांड को देखने के लिए वहीं दूसरी तरफ अशोक की बीवी के मन में घबराहट थी कि कहीं कोई आ ना जाए उसे इस बात की चिंता बिल्कुल भी नहीं थी कि उसके पीछे खड़ा एक अनजान जवान लड़का उसे पेशाब करते हुए देखने जा रहा था और वह भी हाथ में लालटेन जिसमें उसका सब कुछ नजर आ रहा था,,, साड़ी को मोटी मोटी जांघों तक उठाकर वह फिर से इधर-उधर देखने लगी तो राजू बोला,,,।)

जल्दी से करो ना भाभी,,, कितना देर कर रही हो,,,


अरे रुको तो बबुआ कोई चोर आ गया तो,,,


अरे नहीं तुम्हारी गांड मार लेगा,,,,
(राजू एकदम से खुले शब्दों में बोल दिया,,, धीरे-धीरे उसे एहसास होने लगा था कि वह बहुत भोली है वह कुछ बोलेगी नहीं इसीलिए राजू खुले शब्दों में बात करने लगा था,,)

हाय दैया यह कैसी बात कर रहे हो,,,, सच कहूं तो मुझे भी इसी बात का डर रहता है,,, इसीलिए तो रात को घर से बाहर निकलने से डर लगता है,,,,,
(उसकी भोली बातें सुनकर राजू के लंड की अकड़ पड़ने लगी वह पूरी तरह से समझ गया था कि कोशिश करने पर आज की रात उसका लंड उसकी बुर में होगा,,,,,, राजू को इस तरह से खुली बातें करने में बहुत मजा आ रहा था,,,थोड़ा थोड़ा मजा अशोक की बीवी को भी आ रहा था हालांकि उसके मन में डर भी था और वह भी चोर को लेकर,,, लेकिन एक जवान लड़की के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसे भी अच्छा लगने लगा था राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अच्छा भाभी एक बात बताना,,,तो,,,


क्या,,,? (वह उसी तरह से सारे को उसी स्थिति में जांघों तक उठाए हुए बोली,,)


पहले कहो नाराज तो नहीं होगी ना,,,


नही बबुआ,,, तुम से क्या नाराज होना,,,


अच्छा एक बात बताओ तुम्हें सच में चोर से ज्यादा डर लगता है या चुदवाने में,,,,
(राजू के मुंह से इस तरह का सवाल सुनकर अशोक की बीवी के भी तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,, वह कुछ बोली नहीं बस अपनी नजर को राजू की तरफ घुमा कर उसकी तरफ देखते हूए बोली,,,)

यह कैसा सवाल है बबुआ,,,


अरे सही तो सवाल है,,,तुम्हें रात को बाहर निकलने में डर लगता है और वह भी चोर से,,,और सच कहूं तो अगर तुम्हारे घर में चोर आ भी गया तो तुम्हें देखकर बोला तुम्हारे घर का कोई कीमती सामान नहीं ले जाएगा लेकिन तुम्हारे पास रखा हुआ बेशकीमती खजाना जरूर लुटकर चला जाएगा,,,,,,,


लेकिन मेरे पास कौनसा खजाना पड़ा हुआ है जो लूट कर चला जाएगा,,,



अरे भाभी तो नहीं जानती तुम्हारे पास इतना बेशकीमती खजाना है कि उसे पाने के लिए दो दो रियासतों में मार हो जाए,,,


धत् पागल ,,, मेरे पास कोई खजाना नहीं है,,,,


हे भाभी,,, बहुत बेशकीमती खजाना है,,,

आहहहह,,, तुम रहने दो बबुआ,,, मुझसे अब ज्यादा रोका नहीं जा रहा है,,,,(इतना कहने के साथ ही एक झटके से मोटी मोटी जांघों पर स्थिर साड़ी को वहां एकदम से कमर तक उठा दी,,, पल भर में ही राजू की आंखों के सामने अशोक की बीवी की गोरी गोरी गांड नंगी हो गई,,, राजू तो बस देखता ही रह गया और वह अगले ही पल नीचे बैठ गई मुतने के लिए,,,, और क्षण मात्र में ही उसकी बुर से नमकीन पानी की धार छूटने लगी,,, और गुलाबी बुर में से आ रही मधुर ध्वनि राजु के कानों में मिश्री घोलने लगी,,,।
super duper hot update
 
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