Incest पुरा परिवार हवस का शिकार

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कहानी का हीरो आप किसे समझ रहे हो ??


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Tiger 786

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(खेल खेल में कुछ पता चला)
रात का समय आरोही अपने कमरे से निकल के राहुल के कमरे की तरफ जाने लगती है इधर राहुल अपने लैपटॉप में कुछ देख रहा था तभी दरवाजे पे किसी की दस्तक होती है ।भैया आप सो गये हो गया ।
राहुल - नही आरोही आ जा अंदर दरवाजा खुला ही है ,
आरोही - तो भैया अब बोलो क्या करे ,
राहुल - मैं क्या बोलूं तुम बताओ मेरी गुड़िया रानी क्या करना है अब ।
आरोही - भैया कैरम खेले ?
राहुल - चल ठीक है पर हारने वाले को जीतने वाले की बात मान नी पड़ेगी ।
आरोही - कुछ देर सोच के ठीक है भैया
राहुल - चलो फिर शुरु करते है
इधर दोनो भाई बहन कैरम खेलने लगते है ठीक इसी समय गरिमा और निधि दोनो बातें कर रही थी
निधि - दी एक बात पूछूँ आप से ??
गारिमा - हाँ बोल ना निधि एक क्या दो पूछ ले मेरी बहन
निधि - दी आपका कोई बॉयफ्रेंड नहीं है क्या ?
गरिमा - ये आज अचानक तुझे क्या हुआ ऐसा सवाल क्यों पूछ रही है
निधि - ऐसे ही दी वो क्या है ना आज कल सब का होता है और आपकी तो उम्र भी हो चुकी है ।
गरिमा - अच्छा जी इसका मतलब सबका होता है तो तेरा भी होगा क्यों
निधि - अरे दी ऐसा कुछ नही है मेरा कोई बॉयफ्रेंड नही है
गरिमा - अच्छा तो मेरा भी नही है समझी
दोनो बातें करते करते सो जाती है इधर सुरेश और बरखा भी सो चुके थे ।
आरोही - इस बार तो मैं ही जीतूंगी भैया (लगतार हारने से आरोही का चेहरा थोड़ा रोने जैसा हो गया था )
राहुल - देखते है प्यारी गुड़िया ,वो भी आरोही के चेहरे को देख समझ जाता है उसकी प्यारी बहन उदास हो गयी है इस लिए वो हारने लगता है और इस तरह आरोही के चेहरे पे खुशी आ जाती है । कुछ देर बाद खेल ख़तम हो जाता है ।
आरोही - देखा भैया जीत गयी ना अब आपको मेरी बात मान नी पड़ेगी
राहुल - हाँ बोलो क्या करना पड़ेगा मुझे
आरोही - वो कल सुबह बता दूंगी अभी मुझे नींद आ रही है सोने जाना है
राहुल - इतनी जल्दी तुमने तो बोला था पुरी रात जागेंगे ।
आरोही - वो तो बस मैंने ऐसे ही बोल दिया था वैसे भी भैया पुरी रात जागने की सजा भी तो है मम्मी सुबह सुबह ही उठाने आ जाएगी इससे अच्छा सो जाते है वैसे भी 2 बज गये है ।और बोल के कमरे से निकल जाती है ।

राहुल बाथरूम जाने के लिए निकला ही था की किचन की लाइट जल के भुज गयी उसने देखा और वो भी किचन की तरफ चल दिया की कोई चोर तो नही गुस्स आया घर में ,किचन के करीब जाते ही एक हलकी आह्ह्ह्ह....सुनाई देती है ।राहुल वही रुक के सुनने लगता है की कैसी आवाज़ है ।
फिर एक हलकी आअह्ह्ह्हह...के साथ एक आवाज़ सुनाई देती है आह्ह्ह.. गरिमा मेरी जान चूस अपने पापा का लोड़ा आह्ह..,
इतना सुनते ही राहुल एक दम से आश्चर्यचकित हो जाता है ,फिर एक आवाज़ आती है ,पापा चुप चाप रहो ना कोई सुन लेगा तो चूस तो रही हूँ उम्म्म्म..क्या मस्त लंड है आपका ।
हाँ गरिमा तेरे लिए ही तो है ये उफ्फ्फ...तेरी माँ को तो चूसना ही पसंद नही है बहुत मुश्किल से मुँह में लेती है और लेकर निकल देती है। आह्ह्ह..गरिमा मेरी प्यारी बेटी
इतना सुन के राहुल के हाथ पैर काँप गये थे थोड़ी सी चुसाई के बाद लंड अपना मक्खन उगल देता है जिसको गरिमा चूस चाट के पी जाती है । सुरेश झाड़ के हलका महसूस करता है और दोनो थोड़ी देर बातें करते है ।
सुरेश - थैंक यू बेटी तु नही होती तो तेरा ये बाप इस उम्र में भी ऐसा आनंद नही उठा पाता ।
गरिम- वेलकम पापा आपकी वजह से ही तो मेरा जीवन है क्या मेरा इतना भी हक नही है आप के लिए इतना करूँ, पर पापा हमे ये अब सोच समझ के करना चाहिए आज तो पकड़े जाते ।
सुरेश -हाँ बेटा आज निधि का कॉल गलत समय पे आया कोई नही तब तक तो मेरा माल तेरे अंदर था इतना बोलते सुरेश थोड़ा हंस देता है ।
गरिमा - पापा आप भी ना निधि पकड़ लेती तो और आज तो वो मुझ से पूछ भी रही थी की मेरा कोई बॉयफ्रेंड है की नहीं ।
सुरेश - अच्छा कोई नही जान कुछ नही होता और कुछ होगा तो उसको भी चूसा दूँगा
गरिमा - आप सच में पागल हो अब चलो काफी रात हो गयी है कोई आ गया तो आज ही ये खेल समाप्त हो जायेगा।
राहुल अपने कमरे में क्या दीदी सच में पापा का लंड चूस रही थी । क्या पापा अपनी ही बेटी के साथ नही नहीं ऐसा नही हो सकता ,क्या मम्मी ये सब जानती है ऐसे बहुत से सवाल राहुल के दिमाग़ में घूम रहे थे । अब नींद तो उससे कोसो दूर हो चुकी थी की उसकी बहन का टाका उसके अपने ही पापा से है । राहुल कुछ सोचने लगता है की आज सुबह उसने गरिमा दीदी के नाम की मुठिया उनकी ब्रा में गिराए और अब ये सब पापा और दीदी कब से कर रहे है मुझे पता लगाना होगा ।
राहुल भी गरिमा का दीवाना था काफी समय से गरिमा पे हिलता था ।सोचते सोचते उसको नींद आ जाती है ।
ये अचानक नही था की गरिमा के अपने ही पिता के साथ संबध थे ये घटना करीब 9 महीने पहले शुरु हुई थी और यही से राहुल का गरिमा पे हिलाना भी शुरु हुआ था और यही वो वजह थी जहा से गरिमा और उसके पिता का रिश्ता ही बदल गया ।

अतीत में ,


9 महीने पहले दोपहर का समय था घर पे गरिमा के आलवा कोई नहीं था उसकी माँ पड़ोस की आंटी के साथ बाज़ार गयी थी ,आरोही और राहुल कुछ दिनों के लिए अपने मामा के यहाँ गये थे और निधि अपने कॉलेज के आखिरी दिनों में थी ,
गरिमा की जवानी ने उसे परेशान कर दिया था जिसकी वजह से उसकी ब्रा में कैद उसके गोल गोल चुचे समा नही पा रहे थे ,और ब्रा बहुत पुरानी हो चुकी थी इसी लिए उसने सोचा क्यों ना दो जोड़े ब्रा की ले ले ।
आज वो किसी और दुकान पे ना जाकर अपने ही दुकान के लिए निकल जाती है ।
सुरेश की दुकान लेडीज कपड़ो की थी लेकिन बाद में उसके ब्रा और पैंटी से लेकर बनियान भी बेचने लगा था ।

गरिमा दुकान पे पहुंच गयी थी
सुरेश - बेटा आज यहा कैसे आना हुआ
गरिमा - पापा कुछ समान चाहिए था इस लिए आ गई।
सुरेश - हाँ बोलो बेटा क्या चाहिए तुम्हारी ही दुकान है जो चाहिए ले जाओ ।
गरिमा - हाँ पापा तभी तो आयी हूँ वो कोई दिखाई नही दे रहा है सुमन कहा है (सुमन सुरेश कि वर्कर )
सुरेश - वो तो अभी कुछ देर पहले ही लंच पे गयी है ।
गरिमा - अच्छा तो में बाद में आती हूँ पापा ।
सुरेश - क्या हुआ बेटा मुझे बोलो क्या चाहिए ।
अब गरिमा कैसे बोलती अपने पापा से की उसकी जवानी की वजह से उसकी ब्रा तंग हो गयी है और ब्रा चाहिए
सुरेश - बोलो बेटा क्या सोच रही हो ।
गरिमा - पापा वो मुझे ...
सुरेश - हाँ बोलो ,
गरिमा - पापा वो मुझे ब्र... ब्र.. ब्रा चाहिए ।
ये सुन के सुरेश थोड़ा नज़ारे झुका लेता है आखिर उसकी खुद की बेटी उससे अपनी जवानी ढकने के लिए ब्रा मांग रही थी थोड़ी देर सोच के सुरेश अच्छा ठीक है ।
सुरेश - साइज क्या है गरिमा ??
गरिमा - नज़रे निचे किये हुए ही अपने मन में सोचते हुए कहा फस गयी यार अब पापा को कैसे बताऊँ साइज ।
सुरेश - क्या हुआ गरिमा बेटा क्या सोच रही हो ।
गरिमा - कुछ नही पापा वो 34B साइज है मेरा एक दम से बोल देती है
सुरेश अपनी जवानी में बहुत शिकार किये थे इस लिए उसने गरिमा का साइज सुनते ही उसकी चूची को देखने लगता है।
सुरेश - गरिमा बेटा बुरा ना मनो तो तुम 35B ले लो सही फिट होगी तुम्हे ।।
गरिमा - मन में ये पापा को क्या हो गया और वो कुछ सोच के बोलती है नही पापा मेरा साइज तो 34 ही है ।
सुरेश - हाँ पर तुमको वो तंग होगी उसके चुचों को घूरते हुए बोला ।
गरिमा - पापा आप 34 साइज ही दे दो ।
सुरेश - अच्छा ठीक है बेटा और एक लाला रंग और एक ब्लू रंग की ब्रा निकल के गरिमा को दिखता है ।
गरिमा उसे लेकर निकलने वाली थी की तभी सुरेश बोलता है बेटा पहन मे देख तो लो सही साइज है या नही
गरिमा - मन में ओह अब क्या करूँ वो भी पापा के सामने और फिर बोलती है पापा घर पे ही कर लूंगी ।
सुरेश - अरे बेटा घर से फिर थोड़ी आओगी यही कर लो
गरिमा चेंजिंग रूम में जाकर अपनी कपड़े उतार देती है और ब्रा भी खोल के नई ब्रा पहनती है । अब ये क्या ब्रा तो सच में तंग हो रही थी ब्रा का हुक नही लग पा रहा था ।काफी कोशिश के बाद हुक नही लगता तो वो मज़बूर हो पापा को आवाज़ लगती है
गरिमा - पापा पापा
सुरेश - हाँ बेटा क्या हुआ
गरिमा - पापा ये हुक नही लग रहा है और गरिमा धीरे से बोलती है आप लगा दो ना हुक..
सुरेश - ये सुनते ही थोड़ा चकित हो जाता है और मन सोचता है कैसे अपनी बेटी की ब्रा का हुक लाऊंगा ।
गरिमा - क्या हुआ पापा
सुरेश - कुछ नही बेटा
आकर देखता है गरिमा अपनी नंगी पीठ उसकी तरफ किये इंतेज़ार कर रही थी । सुरेश अपने कापतें हाथो से अपनी बेटी की ब्रा के हुक को पकड़ता है तभी गरिमा सिहिर उठती है अपने पापा के हाथों के छुवन से उसकी साँसे तेज़ी से चलने लगती है इधर सुरेश की भी धड़कन तेज़ हो चुकी थी ऐसा होना भी लाज़मी था आखिर सुरेश के आगे एक जवान माल अपना नंगा पीठ लिए खड़ी थी भले वो उसकी बेटी हो पर जवान बदन तो आकर्षण और उत्तेजना को जन्म देता ही है । सुरेश उसके हुक को लगने के लगतार प्रयास के बाद हुक लग जाता था पर ब्रा कुछ टाइट हो रही थी
गरिमा - पापा हुक खोल दीजिये
सुरेश - क्या हुआ गरिमा ब्रा का साइज सही नही है क्या ।
गरिमा - पापा थोड़ा टाइट है।
सुरेश के फिर से छूने से गरिमा की की चुत भीगने लगती है जैसे तैसे सुरेश ब्रा खोल देता है तो हुक के पास हल्के निशान बन चुके थे । गरिमा ब्रा उतर देती है वो भूल गयी थी की उसके पापा पीछे ही थे वो एक दम से पलट जाती है और उसके मोट मोट गोरे चुचे सुरेश के सामने थे दोनों ही एक दम से चौक़ जाते है क्या हो गया ।गरिमा एक दम फिर घूम जाती है और शर्म के मारे कुछ नही बोल पाती ।
सुरेश - सोर्री बेटा और गरिमा को छोड़ के बहार आ जाता था
गरिमा - इट्स ओक पापा 35 साइज की ब्रा दे दो
सुरेश 35 साइज की ब्रा लेकर गरिमा को देता है और गरिमा जल्दी से पहन के देखती है ये साइज बिल्कुल सही साइज था वो जल्दी से ब्रा लेकर निकल जाती है ।
बात ये थी की सुरेश ने अपनी जवानी में बहुत चुचों से खेला था और इतने समय से वो ब्रा बेच रहा है इस के आधार पे उसने गरिमा के दूध देख के उसका साइज बता दिया था
गरिमा के जाने के बाद सुरेश उफ़..आज ये क्या हो गया और निचे अपनी पैंट के उभर पे नज़र जाती है तो वो मुस्करा देता है इसके लंड बेटी को भी नहीं छोड़ा उसके थोड़ी देर बाद थोड़ा अजीब महसूस करता है पर तभी सुमन आ जाती है
सुमन - क्या हुआ सर कोई परेशानी है क्या
सुरेश- कुछ नही जान( सुमन भी गरिमा के उम्र की लड़की का इसका भोग सुरेश कई बार लगा चुका है
सुमन - उसके पैंट पे नज़र डालती है और बोलती है तो आपका ये राजा खड़ा क्यों है
सुरेश - तुम्हारे इंतेज़ार में खड़ा है डार्लिंग और अपना लंड निकल के सुमन की तरफ उसको चूसने के लिए इशारा करता है ।
सुमन - सर अभी खाना खा के आयी हूँ अब ये भी करना पड़ेगा
सुरेश - प्लीज सुमन सिर्फ मुँह ले लो ।
सुमन - बैठ के लंड मुँह में ले लेती है और चूसने लगती है
सुरेश - आअह्ह्ह..
सुमन - लंड मुँह निकल के बोलती है मेरे राजा क्यों खड़ा हुआ क्या देख लिया । और चूसने लगती है मस्ती में सुरेश भूल जाता है और आअह्ह... की सिसकियों के साथ वो गरिमा के चुचों को याद करते हुए गलती से आअह्ह्ह्...गरिमा चूस अपने अपने पापा का बोल देता है
सुमन - क्या ??
सुरेश को एक दम से अपनी गलती का एहसास होता है की मदहोसी के आलम में वो क्या बोल गया ।।
सुमन - क्या बोला राजा जी गरिमा अच्छा जी तो बेटी ने बाप को गर्म करके चली गयी । इतना सुनते ही सुरेश को बुरा लगता है वो मस्ती में क्या बोल गया और उसके मुँह से गरिमा नाम ही क्यों निकला ।
सुरेश - घबराता हुआ नही नही वो तो गलती से गरिमा याद आ गयी ।
सुमन - याद तो आएगी ही ना साली के चुचे गुब्बारे जैसे फुल रहे है पता नही कौन मेहनत करता होगा
सुरेश - साली कुतिया क्या बोली तु मेरी बेटी ऐसा वैसा कोई काम नही करती है समझी ।
सुमन - नही करती तो कर दो ना देखे अपने ही बाप का खड़ा करके चली गयी कम से कम हिला ही देती और सुमन हँसने लगती और फिर से चूसने लगी। और फिर लंड निकल के बोलती है तुम भी बड़े हरामी हो तभी तो ख्यालो में उससे लंड चुसवा रहे हो ।
सुरेश - शर्म से निचे देखते हुए और बोलता है गलती से हुआ जो हुआ ।
सुमन - गलती से कुछ नही होता वैसे अब जवान है कोई और चोदे इससे अच्छा खुद ही नाप लो उसकी गहराई और हँस के लंड चूसने लगती है
घर पे पहुँच के गरिमा अपने कमरे में जाती है और लेट जाती है और आज जो हुआ वो सब सोचती है की पापा क्या सोचेंगे उसके बारे में वो वह गयी ही क्यों ये सब विचार उसके मन में आ रहे थे की एक और विचार उसके मन में आएगा की पापा के छूने से उसकी धड़कन तेज़ क्यों हो गयी थी और उसकी चूत में गीला पन सा क्यों महसूस हुआ उसको ये सब सोच के गरिमा का बदन फिर गर्म हो जाता है वो अपनी चूत को सलवार के ऊपर से ही रगड़ने लगती है वो सोचती है आज उससे क्या हो गया अपने ही पापा को साइज बता दिया उफ्फ्फ..और चुचे भी दिखा दिया हाये पापा और चूत को धीरे धीरे रगड़ने से चूत भीग चुकी थी वो समझ नही पाती इस एहसास को वो मदहोशी में आकर अपनी सलवार खोल देती है और कच्छी उतर के चूत में ऊँगली करने लगती है उसने चूत में पहले भी ऊँगली की थी पर आज उससे कुछ अलग ही आनंद की प्राप्ति हो रही थी आह्ह्ह...पापा बेटी के चुचे कैसे लगे पापा उफ़...चूस लो पापा आह्ह्ह..इतना ही हुआ की गरिमा का बदन कापने लग और वो जोर जोर से आह्ह... पापा आह्ह..पापा चोद दो अपनी बेटी को कहते हुए झड़ने लगी ।और एक दम शांत होकर आँखें बंद कर ली । थोड़ी देर बाद गरिमा को एहसास होता है की अंत में वो क्या बोल गयी और सोच के मुस्करा देती है । और अपने आप से गरिमा तु भी ना पापा के साथ और चूत को देख के कहती है साली सब तेरी वजह से हुआ और इतना कहते ही वो सोचती है क्या पापा सच में मुझे चोदे तो और आँखें बंद करके सो जाती है ।
उधर सुरेश भी लंड चुसाई से झाड़ देता है और सुमन ने जो बोला वो सोचने लगता था क्या सच में गरिमा और मेरा सम्भोग हो सकता है।
Lazwaab update
 

Tiger 786

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अंजलि की चाल
अगली सुबह रोहन ,रवि ,विकास और अंकित नदी के किनारे बैठे हुए थे रोहन किसी गहरी सोच में की राहुल पे ये वार कौन कर सकता है वो तो वहा रहता भी नही हैं
रवि -क्या यार तुम सब चुप बैठो हो कोई तो बोलो
अंकित - हाँ यार रोहन चल ना पास वाले गाँव चलते है वहा का माल देखे कितना समय हो गया है ।
रोहन - नही यार तुम लोग जाओ मेरी तबियत कुछ ठीक नही है में घर जाता हूँ
इधर गन्ने के खेत में ,बोला था ना तुमको राहुल को गाँव नही भेजूंगी पर तुमने उसे बुला लिया देखा क्या हाल कर दिया मेरे बेटे का सब तुम्हारे दुश्मनों का किया धारा है ।बरखा मेरी क्या गलती है राहुल मेरा भी तो बेटा है और हमारे प्यार की निशानी है जिसको हम दोनो नही भूल सकते है । ये बात कोई सुन रहा था पर कौन???

राहुल की नज़र कसे हुए मोट मोट उरोजो पे ठहरी हुई थी आयशा झुक के झाडू लगा रही थी इस बात से अनजान राहुल उसकी गहरी खाई में डूबा हुआ है ये सब निधि देख रही थी जी हां निधि ही थी जो उस दिन आयशा की चूची और आरोही की गांड को देखते हुए, राहुल को छुप के देख रही थी ,निधि को कुछ अजीब लगता है और वो सीधा अंजलि से मिलती है और उससे पूछती है की तुम किस आम की बात कर रही थी ।
अब अंजलि तो थी एक नंबर की रंडी उसने सोचा क्यों ना इस साली की बूर में भी खुजली करवा दूँ तो वो बोली मैं कैसे कहूँ निधि जी मुझे शर्म आ रही है ऐसी बात बोलने में की एक भाई अपनी ही बहन के आम चूसना चाहता है ।
निधि - समझ तो गयी थी पर वो पुरी तरह से जान ना चाहती थी तो बोली जो बोलना है खुल के बोलो
अंजलि - कुछ सोच के ठीक है पर ये राहुल बाबू को मत बोलना की मैं आपको सब बता दी हूँ ।
निधि - ठीक है यार अब बोलो भी
अंजलि - मन में साली की बूर में कितनी खुजली हो रही है जान ने की रुक साली तेरी बूर में ऐसी आग लगाउंगी की राहुल का लेकर ही शांत होगी ।
निधि - क्या हुआ अंजलि
अंजलि - कुछ नही निधि जी वो क्या है राहुल बाबू आरोही जी के साथ सोना चाहते है मैंने गन्ने के खेत में देखा की वो आरोही जी के नाम से हिला रहे थे मुझे तो बहुत अजीब लगा की एक भाई अपनी बहन के लिए ऐसा कैसे सोच सकता है ये तो पाप है ।
निधि - क्या
अंजलि - अरे क्या क्या नही वो तो और भी बहुत कुछ बोले की आरोही को पेट से कर देंगे मौका मिला तो तभी मैंने उनको आवाज़ दी तो वो घबरा गये और अपना वो छुपा के बोले तुम यहा ,मैं बोली हाँ आपको गन्ने के खेत में घुसते देखा तो चली आयी पर तुम तो बहुत गंदे इंसान हो बहन के लिए ऐसा सोचते हो छी.छी कैसे हो तुम ।
वो बोले की मुझे माफ़ करो दो वो आरोही को देख के मै उत्तेजित हो गया था ,किसी को मत बताना अंजलि ।
मैं बोली तो बताओ और क्या क्या सोचते हो अपनी मासूम सी बहन के लिए ,मैं उसको चोदना चाहता हूँ और उसकी बुर में नही चोदुंग तो कोई और चोद देगा इस से अच्छा में ही पेल के घर की इज़्ज़त बचा लूंगा और वो तो ये भी बोले की बहन का जन्म तो भाई के लंड के लिए ही होता है
निधि - ये सब सुन के पुरी तरह से आश्चर्यचकित थी की उसका भाई ऐसा सोचता है आरोही के लिए ,उसके लिए ये मान ना बहुत मुश्किल था की राहुल ,आरोही की लेना चाहता ,नही नही वो तो उससे बहुत प्यार करता है पर
उसने खुद देखा उस दिन आरोही की गांड को देखते हुए और उसने तो फोटो भी ली थी उसकी गांड की तो क्या सच में राहुल आरोहो के साथ यौन सम्बंध बनाना चाहता है ।ये सब सोच के निधि का दिमाग़ फटा जा रहा था ।तभी अंजलि बोली की वो घर पर सब इंतेज़ार कर रहे होंगे चलती हूँ आज अंजलि ने ऐसा तीर मारा था जो शायद खाली तो बिल्कुल ही नही सा सकता था कोई ना कोई इस तीर का शिकार होने वाला था पर कौन ???
समय बीतता जा रहा था और राहुल ठीक हो चुका था और उनके जाने के दिन आ गये थे राहुल जाने से पहले एक और बार अंजलि की लेना चाहता था इस लिए वो बिना किसी को बताये अंजलि से मिलने चला गया इधर अंजलि का शराबी पति उसे लेने आ गया था बहुत मुश्किल से अंजलि मानी और उसके साथ फिर से रहने के जाने की तैयारी करने लगी। इतने में राहुल उससे मिल के उसे धन्यवाद भी बोलता है तभी अंजलि बोलती है सीधा सीधा बोल ना तुझे मेरी लेनी है बहनचोद, और दोनो मुस्कुरा देते है । अंजलि थोड़ा जल्दी आता तो ठीक था देख मेरा मर्द आ गया अब मुश्किल है पर राहुल ने बस एक बात बोली और अंजलि मुस्कुरा के जल्दी से गन्ने के खेत की तरफ चल दी और बोली जल्दी से कर ले कही मेरे मर्द को पता चल गया तो बिना लिए ही भाग जायेगा ।राहुल भी एक दम से अंजलि पे टूट पड़ा दोनो के होंठ आपस में मिल चुके थे, दोनो एक दूसरे के होठो को चूसे जा रहे थे तभी अंजलि ने मुँह खोल के राहुल के जीभ का स्वागत करती है और दोनो एक दूसरे की जीभ से खेलने लगते है राहुल को इस आनंदित खेल में जो सुख प्राप्त हो रहा था वो शब्दों में बताना मुश्किल है धीरे धीरे उरोजो के मसलते हुए एक दूसरे के बदन से खेलने लगे दोनो के कपड़े उतर चुके थे ,अंजलि के हाथ अब राहुल के लंड से खेलने लगे थे ।दोनो ही जवानी की मस्ती में चूर ,राहुल फाड़ना चाहता था अंजलि की बूर ,समय की कमी को देखते हुए ।राहुल ने कच्छी एक झटके से उतर फेंकी और लंड को बूर पे रख झटखा मरा और लंड बुर में धीरे धीरे बूर की गहराई में समाता चला गया ।और फिर शुरु हुआ संसार का सबसे बड़ा सुख का दौर जिसके लिए ये संसार पागल है राहुल ,अंजलि की बूर को गपा गप पेले जा रहा था मस्ती पूरे जोर पे थी इस एहसास से राहुल को स्वर्ग के दर्शन हो रहे थे ।दोनो ही अपनी जवानी की प्यास में सिसकियाँ लेने लगे और फिर शुरु हुआ असली खेल जिसके लिए अंजलि एक दम से मान गयी थी
अंजलि - आअह्ह्ह...राहुल भैया चोदो मुझे आज अच्छे से चोदो अपनी बहन आरोही को ,
राहुल - जोर जोर से धक्के मरते हुआ हुए मस्ती में आकर आआह्ह्.. हाँ आरोही मेरी रंडी बहन तेरी चूत फाड़ के तुझें सब से चुदवाऊंगा
अंजलि - चोदो मेरे राजा भैया अपनी आरोही को और साथ में निधि दीदी को भी पेल दो भैया ,वो भी छिनाल है उसकी बूर भी तुम्हारे लंड के लिए बनी भैया आह्ह..मेरे चोदु भैया
राहुल - हाँ मैं सबको चोदूंग अपनी तीनो बहनो को चोदूंग आअह्ह्ह..में बहनचोद हूँ, मै गरिमा ,निधि, आरोही सब को चोदुंगा ।
इतना ही बहुत था दोनो को चरमसुख के करीब लाने के लिए और दोनो झड़ने लगते है खेल ख़तम हो चुका था दोनो ही अपने साँसे काबू करने में लगे थे । पर अंजलि का ये आखिरी तीर बिल्कुल निशाने पे था क्यों की वही छुप के निधि इस खेल के मज़ा ले रही थी अंजलि जब खेत में जा रही थी तभी उसने निधि को वहा देख लिया था जो गन्ने के खेत में वहा खाली जगह देखने गयी थी जहाँ अंजलि के मुताबिक़ राहुल हिला रहा था किसी की आहट से निधि छुप जाती है , ये बात अंजलि को पता था इसी लिए उसने निधि का नाम भी ले लिया और राहुल तो मस्ती में गारिमा की बूर फाड़ने को बोल दिया जो अब तक अंजलि को पता भी नही था ।अंजलि अपने कपड़े पहनकर बोली ये गरिमा कौन है राहुल बाबू
राहुल - थोड़ा शर्मा के वो मेरी दीदी है ।
अंजलि - सागी बहन है क्या ?
राहुल- हाँ सबसे बड़ी दीदी
अंजलि - अरे बहनचोद कितनी रंडिया है तेरे घर में तेरे तो मजे ही मजे है कभी किसी की गांड देखता होगा तो
कभी किसी के चुचे साले खूब चुदवायेगी तेरे से ये तीनो इनकी बूर फाड़ के पेट से कर दे वरना किसी और का ले लेगी तो तु हिलता रह जायेगा वैसे तेरी वो निधि दीदी साली रंडी लगती है बदन देखा है उसका कितना कसा हुआ है पता नही कुंवारी है भी की नही, तेरा लेने के लिए पागल हो गयी है जल्दी से उसकी बुर फाड़ दे मैं चलती हूँ और घर के लिए निकल जाता है ।इधर निधि को अब पुरा भरोसा हो गया था की राहुल ,आरोही की लेना चाहता है
और साथ में उसकी और शायद गरिमा दीदी की भी,
राहुल का मोटा लंड निधि के बदन में गर्मी पैदा कर चुका था वो बस उस हसीन लम्हे को याद कर रही थी जब राहुल का लंड अंजलि की बुर में अंदर बहार हो रहा था ये सोच उसकी बूर में चुनचुनी होने लगी अब अलग कमरा तो था ना की बूर में ऊँगली कर सके इसी लिए वो मन मार के सो जाती हैं ।
अगली सुबह राहुल और उसके परिवार के जाने का दिन था। सुबह से ही चहल पहल लगी हुई थी ,सब के चेहरे थोड़े मायूस लग रहे थे कोई नही चाहता था की कोई जाये पर जाना तो था ही ,तभी राहुल सबको बोलता है हम दुबारा आ जाएंगे मामा जी आप चिंता मत करो पर अभी जाना ही होगा कॉलेज भी तो जाना है ।
सब तैयार हो चुके थे जाने के लिए और इधर राहुल नदी के किनारे बैठा सब को अलविदा कहने गया था ।
रवि - राहुल भाई बहुत याद आओगे ।
अंकित - हाँ यार
विकास - भाई शहर जाकर भूल मत जाना और आते रहना ।
इतना बोल के वो उनसे विदा ले लेता है और रास्ते में राहुल ,रोहन से बोलता है ।
राहुल - यार तेरी बात सही थी बहन की जवानी देखना इतना भी गलत नही होता जितना मैं समझता था ।
रोहन - राहुल को देखते हुए साले मतलब तूने भी आरोही को देखा ।
बात ऐसी है जब राहुल की तबियत ठीक नही थी तो वो बिस्तर पे पड़े पड़े ही आरोही और आयशा की जवानी को देखने लगा था जिसमे उसे अब मज़ा आने लगा था ।
राहुल - हाँ यार
रोहन - उस दिन तो मुझे बहुत ज्ञान दे रहा था पाप है ,और अब उसकी जवानी देख लंड हिलाने लगा।
राहुल - हाँ यार सच में वो मस्त माल है और शर्म से गर्दन झुका लेता है ।
रोहन - हँसते हुए ,अब शर्मा क्यों रहा है भाई जब लंड खड़ा होता है तो वो रिश्ता नही देखता बस बूर देखता है । तु अब तु समझ गया है वैसे साली आरोही है बहुत मस्त माल ,मैं तो पहले ही दिन उसकी गांड का दीवाना हो गया था ।
राहुल - मुस्कुरा जाता है और बोलता है आयशा भी कुछ कम नही है।
रोहन - हाँ तभी तो उसकी लेना चाहता हूँ पर कैसे लूं समझ नही आता
राहुल - साले तु भी ना ,तु देखेगा कुछ ???
रोहन - क्या दिखा रहा है
राहुल - आरोही की गांड वाली फोटो को दिखाते हुए बोला ये ,कैसी हैं
रोहन - वाह बहनचोद क्या गांड है यार किसकी है ये मस्तानी गांड
राहुल - मुस्कुराता हुआ आरोही की है जब देखा तो सोचा फोटो ले ही लेता हूँ हिलाने के काम काम आएगा ।
रोहन - क्या बात हैं बहनचोद तु सच्चा आशिक़ है अपनी बहन का ,और दोनो मुस्कुरा देते है
रोहन - अगली बार जब आएगा तो आरोही की सील खोलने की खबर लेकर आना
राहुल - मुस्कुरा के साले इतने सपने मत दिखा अभी तो हिलाना शुरू किया है पता नही आरोही देगी या नही ।
रोहन - वो नही देगी तो निधि दीदी की ले लेना वो भी तो गजब की माल है सुना है जिम जाती हैं। गांड और जाँघे मस्त कर लिए है जिम जाकर । वैसे कितना बार हिलाया आरोही पे तूने ??
राहुल - निधि दीदी का बदन तो मस्त है देखते है यार क्या होता है । यार ३ बार किया आरोही पे और एक बार निधि दीदी पे भी ।
रोहन - मुस्कुरता हुआ चल सही है तूने भी घर की बूर का मज़ा लेने लगा ।
दोनों का वार्तालाब ख़तम हो गया और वो घर पे आ कर दिल्ली के लिए रवाना हो गये दो दिन के सफर था बिहार से दिल्ली का इधर दिल्ली में गरिमा और उसके पापा ने भी बहुत गुल खिलाये थे जिस से ये लोग अनजान थे।







नोट -लिखने में कोई गलती हो जाये तो क्षमा कर दीजियेगा
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Tiger 786

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प्यार का एहसास

सुरेश दुकान पे था आज वो बहुत बेचैन हो रहा है ।सुमन क्या हुआ राजा जी ? सुरेश कुछ नही सुमन आज बरखा और मेरे बच्चे आ गये है इसीलिए उनके साथ समय बिताने चाहता हूँ। सुमन अच्छा अच्छा मैडम आ गयी ,चलो अच्छा है अब आपके रात का जुगाड़ तो हुआ और मुस्कुरा देती है । उधर घर में बरखा अरे वाह गरिमा तूने तो पुरा घर अच्छे से रखा है क्या बात है मुझे तो लगा दोनो बाप बेटी घर का सत्यानाश कर दोगें ।ये सुन गरिमा को अपनी चुदाई याद आ जाती है जो पिछले 2 दिन से लगातार चल रही थी और वो उस दौरान अनेक बार चोदी थी इस बीच दोनो ने घर का कोई काम नही किया था बस चुदाई पे चुदाई किये जा रहे थे ।ये सोच के गरिमा मंद मंद मुस्कुरा रही थी
तभी आरोही बोलती है क्या हुआ दीदी आप इतना मुस्कुरा क्यों रही हो। आरोही ये बोली ही थी की सब गरिमा की तरफ देखने लगे थे ।गरिमा ऐसा कुछ नही है मैं तो बस मम्मी के मुँह से अपनी तारीफ सुन के खुश हो रही हूँ की उनके ना रहते हुए भी मैं घर संभाल सकती हूँ ,ये गरिमा ने बस बाकी लोगो के लिए बोला था पर मन में तो वो ये सोची की जब पापा को संभाल लिया । तो घर क्या चीज़ है ।
जैसे तैसे समय गुज़ार गया और बरखा आज फिर से किचन में शाम की चाय बना रही थी निधि आज जिम नही जाना चाहती थी अपने कमरे में राहुल और आरोही के बारे में ही सोच रही थी ।आरोही भी अपने कमरे में कुछ सोच रही थी पर क्या ?? पता नही ।
गरिमा और राहुल तो कैरम खेल रहे थे उसने आज थोड़ा बड़े गाले का सूट पहना था ।जिससे वो जब थोड़ी झुकती तो उसके उभार राहुल को दिखते थे ।राहुल बार बार गरिमा के उरोजो को देख रहा था और उसके मन में अंजलि की एक बात आ जाती है की तेरे घर में कितनी रंडिया है और यही सोच वो मुस्कुरा पड़ता है ।बरखा चाय लेकर आती है ।और राहुल को देख के बोलती है मेरा प्यारा बेटा क्यों मुस्कुरा रहा इतना , गरिमा ,राहुल को देखती है
राहुल की नज़र तो अभी भी गरिमा की मोटे चुचों पे थी उसका ध्यान ही नही गया की उसकी माँ कुछ बोली भी है गरिमा जब राहुल की नज़र का पीछा करती है तो देख के मुस्कुरा पड़ती है और सोचती है जैसा बाप वैसा बेटा और अपने चुचों को ढक लेती है बरखा भी साथ में बैठ जाती है ।पर निधि अपने कमरे के दरवाजे से सब देख रही थी की राहुल गरिमा की चूचियाँ कैसे देख रहा था अब उसको पुरा विश्वास हो चुका था की राहुल एक नंबर का हरामी हैं और वो कभी भी अपनी बहनों की चूत मरने की कोशिश करेगा।
बरखा आवाज़ देती है निधि ,आरोही बेटा आ जाओ चाय बन गयी आकर पिलो बेटा । सब हॉल में बैठ चाय की चुस्की लगा कर बातें करने लगे ।
गरिमा - मामा मामी कैसे है ?
बरखा - ठीक है बेटा वो लोग तुझे याद कर रहे थे ।
गरिमा - हाँ मम्मी अगली बार में भी मामा मामी से मिलकर आउंगी ।
निधि - दीदी आप कोई नौकरी कर लो खाली बैठ के कोई फायदा तो है नही ।
गरिमा - तु सही कह रही है यही अच्छा है समय भी कट जायेगा और कुछ पैसे भी आ जाएंगे
आरोही - दीदी आप को पता है राहुल भैया बहुत गंदे है मुझे कभी भी नदी किनारे घूमने नही ले गये ऐसे ही बोलते है की प्यार करते है ।उम्म..गंदे भैया मुँह बनाते हुए कहती है ।
निधि - मन में अच्छा हुआ तु नदी किनारे नही गयी वरना तेरी सील वही खोल देता । ठरकी साला ,
गरिमा - क्यों भाई क्यों नही ले गया आरोही को बेचारी सबसे अधिक प्यार तेरे को ही करती है और तु बेचारी के साथ ऐसा करता है ।
राहुल - दीदी नदी काफी दूर हैं आप तो जानती हो और आरोही को पैदल चलना पसंद नही है मैं इस घोड़ी को अब गोदी नही ले सकता कितनी भारी हो गयी है।
ये सुन सब हँसने लगते है आरोही चिड़ कर कहती है अच्छा मैं भारी हूँ या आप ही कमज़ोर हो गये हो और सड़ा हुआ मुँह बना के अपने कमरे में चली जाती है ।इधर निधि मन में आरोही ये तुझे घोड़ी बोल रहा है समझ कुछ ये साला तुझे घोड़ी बनाना चाहता है बुद्दू लड़की। ऐसे ही बातें करते हुए शाम से रात होने लगी और सब अपने अपने काम में व्यस्त हो चले ।
निधि अपने कमरे में क्या करूँ दीदी और आरोही को बता दूँ राहुल के बारे में या नही ,पर ये राहुल का बच्चा तो सीधा सीधा आरोही को घोड़ी बनाना चाहता है कितना कमीना है ये साला ठरकी अपनी ही बहन को घोड़ी बोल रहा हैं कुछ तो करना पड़ेगा ।क्या करूँ ये सोच ही रही थी की गरिमा कमरे में आकर बोलती है क्या हीरोइन क्या सोच रही है ।निधि कुछ नही दीदी बस गाँव की कुछ बातें याद कर रही हूँ । गरिमा अच्छा जी मुझे भी तो बता क्या क्या किया गाँव में निधि कुछ खास नही दीदी बस थोड़ा बहुत गाँव घूमी और दीदी ?
गरिमा बोलते बोलते रुक क्यों गयी ।दीदी वो आयशा के आम बहुत बड़े हो गये है और मुस्कुरा देती है
गरिमा क्या कहा तूने बेशर्म लड़की तु आयशा के आम देख रही थी बहुत कमीनी है । और दोनो हँसने लगती है
बहुत दिनों बाद आज सब साथ बैठ कर खाना खा रहे है ।
सुरेश तो बस प्यासा था गरिमा की चूत का आखिर उसकी पत्नी है और नई नई शादी में तो चुदाई दिल खोल के होती हैं और अब घरवालो के आने से अब ये चुदाई का खेल बंद हो जायेगा ये सोच के सुरेश बहुत उदास था ।बरखा, सुरेश से दुकान कैसे चल रही है जी ? सुरेश हाँ ठीक ही चल रही है ।खाना खा कर सब अपने कमरे चले जाते हैं और बरखा बर्तन धोने लगती हैं फिर वो भी अपने कमरे में चली जाती हैं। आरोही ,राहुल ,निधि ,बरखा ये चारों ही सो चुके थे रेल गाड़ी के सफ़र ने चारो को थका दिया था बिस्तर पे गिरते ही नींद की आगोश में चले जाते है इधर बिस्तर पे गरिमा करवटें बदल रही थी आखिर नई नई शादी हुई और पति से दूर सोना किसे अच्छा लगता भला ,इधर सुरेश का भी यही हाल था ।तभी गरिमा ने मोबाइल फोन उठा कर एक मैसेज सुरेश को किया हेल्लो पति परमेश्वर जी सो गये क्या ?? इधर सुरेश का मोबाइल पे एक मैसेज आता हैं वो वैसे ही परेशान था तो मन में बोलता है अब किसकी माँ चुद गयी जो इतनी रात को मैसेज कर रहा है ।जब मैसेज देखता है तो उसके चेहरे पे एक मुस्कान आ जाती है सुरेश नही जानू तुम्हारे बिना नींद कहा आएगी गरिमा ने एक और मैसेज किया , जान मुझे भी नींद नही आ रही है एक काम करो किचन में मिलते है ठीक है और सारे मैसेज डिलीट करके किचन के लिए चल देती है सुरेश के कमरे से किचन काफी पास में था पर गरिमा को चुप के से उतर के आ रही थी की कोई आवाज़ ना सुन ले और किचन में पहुंचते ही सुरेश लाइट जला के गरिमा को देखता है फिर बुझा देता है ।और लाइट बंद होते ही दोनो एक दूसरे लिपट जाते है।सुरेश आह्ह ... अब चैन मिला मुझे दिन भर कैसे कटा क्या बताऊँ तुमको जान गरिमा मेरा भी यही हाल है पति देव आपके बिना नींद तो दूर की बात है सांस भी लेना मुश्किल है। अब इतने सुनते ही सुरेश गरिमा के होठो पे होंठ लगा देता है और फिर दोनो एक दूसरे के होठो को चूसे जा रहे थे जैसे जन्मो के प्यासे हो जैसे एक प्यासे को पानी मिल गया हो । धीरे धीरे सुरेश के हाथ गरिमा की गांड पे चले जाते है और वो गांड से खेलने लगता है इधर दोनो के होठो के बीच एक जंग चल रही थी ।और उधर गरिमा भी सुरेश का लंड निक्कर से निकाल कर सहला रही थी काफी देर होंठ चुसाई के बाद सुरेश चूची और गांड से खेलने लगता है आह्ह.. मेरी गरिमा तेरे चुचे क्या मस्त उम्म्म..
गरिमा आह्ह्ह.. पापा पति देव धीरे चुसो कहा भागी जा रही हूँ ।
धीरे धीरे दोनो नंगे हो जाते है और सुरेश बैठ के गरिमा की बूर पे जीभ लगा देता है आज सुरेश को बूर चाटने में और भी मज़ा आ रहा था । उसने कभी सोचा भी नही था की वो इस तरह अपने ही घर के किचन में अपनी बेटी की बूर चाटेगा ।
आह्ह.. पापा गरिमा की बुर पनिया गयी थी सुरेश ने सोचा अब चाटना ठीक नही झाड़ गयी तो खड़े लंड पे धोखा हो जायेगा ।और गरिमा के कान में धीरे से बोलता है जान अब मेरा चुसो इतना सुनते ही गरिमा बैठ के लंड मुँह लेकर लापा लाप चूसने लगती है सुरेश मस्ती और आनंद के सागर में डुबकी लगते हुए आहे भर रहा था और हलकी सिसकियों से किचन गूजने लगता हैं गरिमा अपनी जीभ को टोपे पे फेर रही थी और मस्ती में सुरेश की आह्ह्ह.. गरिमा चूस साली बहन की लोड़ी मुँह से निकल जाता है । इस तरह चुसाई का खेल ख़तम हुआ और फिर सुरेश अपनी पत्नी गरिमा की एक टांग उठा के बुर पे लंड रख पेल देता है एक दम से बूर में लंड घुसने से गरिमा सिसक कर रह जाती है । बूर और लंड दोनो ही गीले थे तो बूर लंड को सट से अंदर ले लेती है और फिर हिलने का खेल चल पड़ा सुरेश ने गरिमा को खड़े खड़े ही उसकी बुर में लोडा उतार दिया और लगा धक्के पे धक्का मारने धीरे धीरे लंड पूरे सबाब से बुर की कुटाई कर रहा था और गरिमा गरम गरम आहे भरते हुए आह्ह .. पापा चोदो मुझे सुरेश साली हरामजादी भड़वी आज से रोज़ यही चोदुंगा तुझको आह्ह.. रंडी की बेटी रंडी आह्ह।.. तुझे अपने बच्चे की माँ बनाऊगा ।
हाँ बेटीचोद बना दे पर बुर को फाड़ दे बहुत तंग कर रही है
काफी देर चुदाई का ये खेल चला और दोनो चरमसुख के करीब थे आह्ह..गरिमा मैं गया मेरी जान इधर गरिमा भी आह्ह..पापा पापा...चोदो दो फाड़ दो आह्ह..और दोनो लबा लब झड़ने लगते है गरिमा की बूर का कामरस और सुरेश का वीर्य मिलकर एक नई कहानी लिख रहे । जिसका अंजाम क्या होगा पता नही पर वो तो अपनी प्यास बुझाने में सब कुछ भूल गये थे।दोनो ही साँसे काबू करने में लगे थे की बाथरूम की लाइट चालू हो गयी दोनो डर गये इतने में राहुल बाथरूम जाता दिखायी दिया गरिमा ने अपने कपड़े पहने और बोली चलती हूँ जान कही राहुल देख ना ले सुरेश हाँ मेरी डार्लिंग अब अपने को सतर्क रहना होगा हमारे मिलन में ये बाधा बन सकते हैं इसलिए चुप चाप चुदाई को अंजाम देंगे और एक दूसरे को चूमते है और पहले सुरेश चला जाता था और फिर गरिमा भी वहा से निकल जाती है ।
एक नयी सुबह कुछ नया करने के लिए होती है पर बहुत से लोगो के जीवन में कुछ भी नया नही होता है। सुरेश नास्ता करके दुकान के लिए निकल जाता हैं। राहुल और आरोही कॉलेज जा चुके थे ,राहुल का भी आखिरी समय था कॉलेज में, निधि तैयार होकर बैठी एक गहरी सोच में थी तभी।बरखा बोली निधि बेटा तुम्हे कॉलेज नही जाना क्या ये सुन के निधि भी कॉलेज के लिए निकल जाती है
गरिमा आज देर तक सो रही थी वो आज बहुत दिनों बाद एक अच्छी नींद ले रही थी। जब से वो और सुरेश अकेले थे उसके सुलगते जिस्म ने उसे सोने नही दिया था और अपने ही पापा की दुल्हन बनने के बाद तो चुदाई पे चुदाई करवा रही थी आज वो फुर्सत से सोई दी । इधर कॉलेज में आज राहुल अपनी सबसे प्यारी दोस्त या यूँ कहे की अपनी प्रेमिका का कॉलेज आने का इंतेज़ार कर रहा था ।
और आरोही भी बहुत दिनों बाद अपने दोस्तों से मिलकर बहुत खुश थी आज आरोही बहुत मस्त माल बन के गयी थी।कई लड़को की नज़र बस उसकी गांड की उठान पे ही थी ।इधर राहुल भी अपनी दोस्त निशा से बात कर रहा था 2 सालो से राहुल निशा को चाहता है पर कभी बोल नही पाया।और शायद निशा के दिल में भी राहुल ही था इसीलिये उसने आज तक कोई आशिक नही बनाया था ।
निशा - गाँव में क्या क्या मस्ती किया तु
राहुल - कुछ नही यार बस दोस्तों के साथ गाँव घूमना और नदी में नहाना बस यही सब मस्ती की ।
निशा - नदी मतलब तुम्हारे घर के पास कोई नदी भी है
राहुल - अरे नही मेरे घर के पास नही मामा जी के घर से कुछ ही दूरी पे एक नदी है मैं अपने गाँव तो गया ही नही अगली बार ज़रूर जाऊंगा अपने गाँव
निशा - अच्छा, तुम्हारा सही है गाँव से घूमकर आ गये और एक मैं हूँ जो यहाँ रहकर बोर हो गयी हूँ ।
राहुल - तो अगली बार चलना मेरे साथ ,उतना बोला ही था की निशा खुश हो गयी थी सच में , मैं भी जा सकती हूँ गाँव ?
राहुल - हाँ निशा बिल्कुल वैसे भी हम अच्छे दोस्त है इतना तो बनता ही हैं ऐसे ही उनके बातों का सफर चलता रहा ।इधर निधि भी अपनी दोस्तों में लगी हुई थी ।तभी कॉलेज का एक लड़के ने निधि की टाइट गांड देख के कमेन्ट किया ।हाय क्या गांड है यारो और हँसने लगते है ।
अजय - यार गांड तो मस्त है ही और इस मस्त गांड के लिए कौन सी कच्छी पहनती होगी साली फिर से सब हँसने लगते है । विक्की अरे यार साली की कच्छी भी मिल जाये तो मज़ा आ जाये ।
तभी निधि अजय और विक्की के गालो पे एक एक जोरदार थप्पड़ उनके गालो पे रसीद देती थी ।अजय और विक्की गुस्से में निधि का टॉप पकड़ के फाड़ देते है , निधि ब्रा में आ जाती है ये इतनी जल्दी होता है की निधि को संभालने का मौका ही नही मिलता है । और कॉलेज के केंटीन में निधि ब्रा में खड़ी होती है । वो रोने लगती है इधर विक्की - साली रंडी तेरी ये। औकत तु हमें थप्पड़ मारेगी ।
अजय - नंगा करते है साली को तब पता चलेगा इस दो कोड़ी की रंडी को । निधि अपने उभारो को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी । तभी केंटीन मे आरोही आ जाती है और विक्की को लगातार 2-3 थप्पड़ उसके गालो पे रसीद देती हैं ये इतना अचानक था की विक्की क्या वहा खड़े सभी ही आचंभित थे । तभी अजय ,आरोही को पकड़ कर साली तु मेरे दोस्त को मारेगी और उसके दोनो उभारो को पकड़ के इतनी जोर से मसल देता है आरोही आह्ह.. की आवाज़ में जोर से चीख जाती हैं।
विक्की भी आरोही की गांड को मसलने लगता है ।तभी वहा एक प्रोफ़ेसर आ जाता और दोनो घबरा के आरोही को छोड़ देते है ।
प्रोफ़ेसर- ये सब क्या हो रहा है विक्की अजय को देखते बोलता है ।
आरोही रोते रोते सर इन लोगो ने मेरी दीदी और मेरे साथ बतमीज़ी की है और जोर जोर से रोने लगती है ।
प्रोफ़ेसर- विक्की ,अजय दोनो प्रिंसिपल रूम में चलने को बोलता है ।
विक्की साली आज बच गयी दोनो रंडिया अगली बार तुम दोनो बहनो को नंगा नही किया तो मेरा नाम भी विक्की नही ।तभी प्रोफ़ेसर ये सब क्या बकवास कर रहे हो,विक्की सर रंडी को रंडी नही तो क्या बोलेंगे और हँसने लगते है प्रोफ़ेसर फालतू बात मत करो माफ़ी मांगो और चलो प्रिंसिपल के ऑफिस ,विक्की माफ़ी और इन से कभी नही और प्रिंसिपल के ऑफिस जाने के लिए निकल जाते है।आरोही भी रोते रोते अपनी दीदी को ढकने के लिए कपड़ा ढूंढ रही ।तभी वो राहुल को फोन कर के केंटीन बुलाती है
राहुल अपनी दीदी निधि को ब्रा में देख के आचंभित था और जल्दी से अपनी कमीज उतर के निधि की जवानी को ढकता है । निधि रो रही थी ।दीदी ये कैसे हुआ बताओ मुझे ,तभी आरोही रोते रोते ही राहुल के गाले लग जाती है राहुल क्या हुआ मेरी गुड़िया तु रो क्यों रही है और ये दीदी के साथ किसने किया । इतने में निशा, निधि सांत्वना देती है आरोही रोते रोते ही भैया वो .. भैया वो .. और रोने लगती है ।राहुल अपनी जान से प्यारी बहन को रोता हुआ देख उसकी आँखे भी नम हो जाती है ।निशा जानती थी ये दोनो राहुल की बहने है पर वो कभी उनसे कुछ नही बोलती थी पर इस घटना ने निशा को बोलने पे मजबूर कर दिया और उसने निधि से पूछा ।निधि ये सब कैसे हुआ और किसने किया ।बताओ निधि ,निशा के पहली बार ऐसे अपनेपन से निधि भावुक हो जाती है और उससे लिपट के रोने लगती है । निशा भी उसको जोर से अपने बांहों में भींच लेती हैं। राहुल फिर आरोही से पूछता है ये कैसे हुआ आरोही ??
आरोही का रोना अभी थोड़ा कम हो गया था वो रोते रोते ही बोली भैया वो विक्की और अजय ने दीदी के साथ बत्तमीज़ी करने लगे थे मुझे पता चला तो मैंने उनको रोकना चाहा तो उन्होंने मेरे साथ भी बत्तमीज़ी करने लगे वो राहुल को सब बता देती है ये सब सुन राहुल का गुस्सा सातवें आसमान पे था वो गुस्से में उन हरामज़ादो को छोडूंगा नही और वो गुस्से से ही प्रिंसिपल ऑफिस की तरफ निकल पड़ता है । विक्की और अजय एक नंबर के ठरकी और लड़कीबाज़ थे वो गांजा भी पीते थे कॉलेज में ये नया नही था जब ऐसा कुछ हुआ हो ऐसा कई बार वो कर चुका था और एक बार तो एक लड़की को सब के सामने नंगा के दिया था । पर पूरे कॉलेज में एक निशा ही थी ।जिसको छूने की उनकी हिम्मत कभी हुई ही नही निशा एक दम मस्त पटाखा थी जिसे हर कोई बजाना चाहता था पर वो तो शायद राहुल से बजने के इंतेज़ार में थी ।इधर राहुल प्रिंसिपल के ऑफिस में बिना किसी की इज़ाज़त लिए घुस जाता है और विक्की और अजय और प्रिंसिपल जब उसे देखते है तो विक्की अरे नामर्द आ गया देखो तो कितना गुस्से में है और हँसने लगता है उसने इतना ही बोला था की विक्की के मुँह पे एक जोरदार पंच राहुल दे मरता है और वो इस हमले से कुर्सी से गिर जाता है ।अजय कुछ करता उससे पहले ही राहुल उसके मुँह पे 3-4 घुसे बरसा देता है और अजय संभाल नही पता और गिर जाता है उसका नाक से खून आने लगा था ।पीछे से विक्की राहुल को एक लात मरता है और राहुल अजय पे गिर जाता है अचानक हुए इस हमले से राहुल संभाल नही पा रहा था की उधर अजय राहुल को पलटकर 2-3 घुसे धर देता है और विक्की भी मिल के मरने लगता है ये सब से राहुल की हालत खराब होने लगती है ।प्रिंसिपल मारो साले को मेरे बेटे को मरेगा ।
हरामज़ादे तेरी बहनो को रखैल बनाऊगा। तभी वहा पे आरोही ,निधि और निशा और कॉलेज के और भी कई लड़के लड़किया आ जाते है निशा को देख प्रिंसिपल की हालत खराब हो जाती है वो जल्दी से विक्की और अजय को रोकने की एक्टिंग करता है की तभी राहुल, अजय की नाक पे वार कर देता है वो इतनी जोर से मरता है की इस बार अजय उठने की हालत में नही था इसी दौरान राहुल विक्की को भी धर दबोचता है और उसको दे घुसे दे लात मार मार के अधमरा कर देता है राहुल का ऐसा रूप आज तक किसी ने नही देखा था निशा तो पुरी तरह से आचंभित थी की इतना सीधा और साधा रहने वाला लड़के में इतनी हिम्मत होगी ।वो क्या है निशा हमेशा ही समझती थी की राहुल कमज़ोर है पर आज उसका ये रूप निशा ही नही निधि और आरोही के लिए भी चौकाने वाला था बल्कि सब के लिए ये एक असंभव वाली बात थी की राहुल इतना हिम्मत वाला और ताकत वाला है ,राहुल हमेशा ही कॉलेज में लगभग सभी से डरता था उसको लगता था की वो कमज़ोर है और कॉलेज में सब उसकी क्लास लगाते थे यहा तक विक्की और अजय ने तो कई बार आरोही और निधि चुदाई के बारे में भी बोल चुके थे की अपनी बहन चुदवा ले पर राहुल डर के मारे कुछ नही बोलता था ।पर आज सब कुछ उल्टा हो चुका था ।इधर राहुल बारी बारी से विक्की और अजय को धो रहा था की तभी उसकी नज़र प्रिंसिपल पे भी गयी उसने प्रिंसिपल को भी 3-4 घुसे दे मारे वो और मरता की निशा उसको पकड़ के बोलती है राहुल ये क्या कर रहे हो छोड़ो प्रिंसिपल को ये गलत है वो तुमको कॉलेज से निकल देंगे ।राहुल निशा की एक भी बात नही सुनता और प्रिंसिपल को भी अधमरा कर देता है की तभी आरोही ,राहुल को पकड़ के बोलती है भैया छोड़ दो उन्हे प्लीज और राहुल एक दम से रुक जाता है राहुल आरोही को देखता है और आरोही एक दम से राहुल से लिपट जाती है तभी राहुल बोलता है इनकी हिम्मत कैसे हुई मेरी बहनो को छूने की और तु तो मेरी जान है तेरे लिए उनका खून भी कर दूंगा मैं, वो इतने गुस्से से बोला की सब डर जाते है ।निधि ये बात सुन के चौंक जाती है की राहुल ,आरोही से कितना प्यार करता है और एक मैं हूँ जो उसके लिए गन्दा सोच रही थी की वो अपनी ही बहन की लेना चाहता है और अपने ही अंदर वो ग्लानि से भर जाती है इधर प्रिंसिपल ,विक्की ,अजय तीनो ही मार खा के दर्द से आह भर रहे थे । राहुल थोड़ा शांत होकर बोलता है अगर मेरी बहनो को अगली बार छुआ ना तो वो हाल करूंगा की तुम लोगो को अपने पैदा होने पे अफ़सोस होगा।और
वहा से निकल जाता है ,केंटीन में बैठे राहुल ,निधि आरोही और निशा एक दम शांत थे की तभी निधि
बोलती है । सोर्री भाई सब मेरी वजह से हुआ नही तो वो आरोही को हाथ नही लगते तभी राहुल बोलता है दीदी वो आरोही क्या मेरी किसी भी बहन को कोई छु लेगा तो उनकी जान ले लूंगा ये सुनते ही निधि की आँखे नम हो जाती है ।जिस भाई को वो ठरकी ,बहनचोद सोच रही थी वो उनकी इतनी फ़िक्र करता हैं।
निशा - राहुल पर तुम्हे प्रिंसिपल पे हाँथ नही उठाना चाहिए था वो तुम्हे निकाल देगा इस कॉलेज से, तुम्हारी पढ़ाई बर्बाद हो जाएगी
राहुल - जो करना है कर ले पर किसी ने भी मेरी बहनो को छुआ भी ना तो उसकी जान निकाल दूंगा । ऐसे ही सब राहुल को समझाने में लगे हुए थे कब दिन ख़तम होने लगा पता ही नही चला और वो घर के लिए निकल जाते है निशा भी सब को बाय बोल कर निकल जाती है
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Prince_007

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गरिमा और राहुल की साँसे अब फूलने लगी थी। तभी गरिमा ने राहुल के लंड को पकड़ के दबा दिया। जिससे राहुल ने आह्ह..करते हुए बोला दीदी मार दोगी क्या ।
उसने गरिमा को देखा तो वो जोर जोर से साँसे ले रही थी और एक मुस्कुराहट लिए हुए बोली ।

" मार तो तु देगा। थोड़ा तो सांस लेने दे कितनी देर से चूस रहा हैं थोड़ा सबर तो कर ले।
" राहुल मुस्कुरा के बोला तुम जैसी माल दीदी हो तो कौन सबर करेगा ।
" अच्छा जी ।

फिर से दोनों के होंठ मिल गये और वही सिलसिला फिर चलने लगा ।इस बार होंठ चुसाई के साथ साथ एक दूसरे के गुप्तांगों को भी सहलाने लगे थे राहुल गरिमा की चूत को उसकी सलवार के ऊपर से ही रगड़ रहा था और गरिमा अपने छोटे भाई के लोड़े को पकड़ के सहला रही थी । दोनों ही भूल गये थे की छत के दरवाजे की कुंडी नही लगयी हैं।

दीदी चलो टंकी की तरफ यहा कोई देख लेगा ।
गरिमा मुस्कुरा दी और बोली
" बाप किचन में बुलाता हैं और बेटा टंकी की तरफ साले दोनों कमीने हो ।

राहुल की हलकी हंसी निकल गयी और बोला बाप ने खूब मलाई खा ली अब बेटा खायेगा और गरिमा को टंकी की तरफ लेकर छत पे बैठा के उसके होठों को चूसने लगा । कुछ देर ऐसे ही चलता रहा और दोनों अलग हुए ।राहुल ने अपने कपड़े उतार के टंकी के करीब ही छत पे बिछा दिया जिसे देख गरिमा हँसने लगी ।

" क्या हुआ दीदी ।
" कुछ नही लगता हैं मेरी किस्मत में फर्श पे ही ठुकवाना लिखा हैं बिस्तर पे नही ।

ये सुन राहुल भी मुस्कुरा दिया और गरिमा की चूची को पकड़ के दबाने लगा ।
आह्ह्ह..आउच धीरे कर राजा आह्ह्ह...

दोनों के होंठ मिले हुए थे साथ में राहुल गरिमा की चूची मसले जा रहा था । आहिस्ता आहिस्ता गरिमा राहुल के बिछाये हुए कपड़ो पे लेट गयी। और दोनों एक दूसरे के जिस्म को रगड़ के गरम करने लगे ।

राहुल ने सलवार के ऊपर से ही गरिमा की बूर को चूम लिया जिससे गरिमा सिसक उठी ।
गरिमा उठी और अपने कपड़े खोलने लगी । और वो ब्रा और पैंटी पहने हुए लेट गयी। हलकी चांदनी रात में गरिमा का बदन चमक रहा था राहुल ने आव देखा ना ताव चूत पे मुँह लगा दिया और पैंटी के ऊपर से ही चाटने लगा । राहुल के थूक से पैंटी गीली होने लगी । तभी उसने पैंटी को साइड किया और गरिमा का खज़ाना उसके सामने था उसने फोन की टॉर्च जला के बूर को देखना चाहा तो गरिमा ने बंद करवा दिया और बोली कभी और देख लेना जल्दी से चोदो।

राहुल ने गरिमा की पैंटी को उतार के सुंघा और सर में पहन लिया जिसे गरिमा देख हँसने लगी । राहुल ने चूत पे एक चुम्बन किया और अपनी जीभ को ऊपर से निचे तक चूत के मुलायम मांस को चाटने लगा । गरिमा इस एहसास में अपनी आँखें बंद कर ली । राहुल अपनी जीभ चूत की फांको में घुसाने की कोशिश करने लगा । उसने चूत को हलके से फैलाया और अपनी जीभ को घुसा दिया । इस मधुर एहसास से गरिमा की आह्ह्ह..निकल गयी।
राहुल जीभ को चूत में घूमाने लगा वो जितना अंदर हो सके उतना जीभ घुसाए जा रहा था । इधर गरिमा का जिस्म मस्ती में काँपने लगा था वो जोर जोर से आहे भरने लगी ।

" आह्ह्ह...भाई....और अंदर तक चाट आह्ह्ह...बहनचोद....

इधर राहुल चूत के दाने को अपनी जीभ से कुरेदने लगा जिससे गरिमा मदहोश हो गयी और मस्ती में सिसकियाने लगी ।
" आह्ह्ह...बहनचोद...साले आह्ह..ओह्ह्ह...खा जायेगा क्या...

चूत पुरी तरह पनियाने लगी थी हलका नमकीन सा स्वाद राहुल के मुँह में जाने लगा गरिमा की चूत थूक से पुरी तरह साराबोर हो चुकी थी। राहुल ने गरिमा की चूची को पकड़ा और दबाने लग और एक चूची को मुँह में भर के पीने लगा ।राहुल निप्पलों को मुँह भर के निप्पलों से खेलने लगा ।
इधर गरिमा का जिस्म आग की तरह तपने लगा उसके जिस्म में हवस समा चुकी थी । गरिमा राहुल के सर को पकड़ के अपनी चूची में दबाने लगी । राहुल भी बारी बारी दोनों चूचियों को मुँह लेकर चूस चूस से दबा रहा था । तभी गरिमा ने राहुल को ऊपर खींच लिया और होठों को होठों से मिला के चूमने लगी । दोनों ही इस बात से बेखबर थे की उनका ये खेल कोई देख रहा था।

गरिमा उठी और राहुल लेट गया और गरिमा ने राहुल के लंड को पकड़ के अपने होठों में भर ली और चूसने लगी ।गरिमा के मुँह में जाते ही राहुल मचलने लगा उसके मुँह की गर्माहट से उसका लंड पिघलने लगा वो जोर जोर से सिसकियाने लगा ।
" आह्ह्ह....दीदी...चुसो आह्ह...उफ्फ्फ...क्या मस्त चुस्ती हो ।

गरिमा लंड को लपा लप लॉलीपॉप की तरह चाटने और चूसने में लगी हुई थी । वो लंड के उपरी भाग पे ऐसे जीभ लगाती की राहुल कसक के रह जाता । चांदनी रात में लंड चमकने लगा था पुरा लंड थूक से सना हुआ था ।प्री-कम की बूँद आती और गरिमा उसके अपनी जीभ से चाट के उसका स्वाद लेती । जब वो लंड को मुँह से बहार करती तो थूक की एक लाइन उसके मुँह से लंड तक बन जाती ।

" आह्ह्ह...दीदी अब चोदने दे नही तो झाड़ दूंगा ।

ये सुन गरिमा हलका सा मुस्कुराई और लेट गयी । राहुल ने लिंग को गरिमा की योनि पे रखा और आहिस्ता से जोर लगाया तो लिंग का उपरी भाग योनि को खोलता समा गया। इधर गरिमा सिसक उठी । राहुल ने आहिस्ता आहिस्ता ही लिंग को योनि में प्रवेश करवा दिया और राहुल का लिंग गरिमा की योनि के अंदर की गर्माहट लेने लगा । दोनों को ही एक अजीब से एहसास ने घेर लिया । उनपे वासना का सुरूर छाने लगा और कब दोनों हिलने लगे पता ही नही चला । राहुल आहिस्ता आहिस्ता अपने धक्के तेज़ करते जा रहा था और गरिमा छत पे आसमान को देखते हुए अपने ही सगे भाई का लंड अपनी चूत की गहराई में उतरवा रही थी । दोनों ही चुदाई का का ये खेल खेलने में मशरूफ़ थे ।और इधर बरखा उनको देख रही थी बरखा को विश्वास नही हो रहा था की उसकी बेटी और बेटा अपने पवित्र रिश्ते को इस तरह अपनी हवस में कुचल देंगे ।
गरिमा और राहुल दोनो की ही सांसे तेज़ होने लगी थी उनका बदन पसीने से भीगने लगा । और राहुल का लंड गरिमा की चूत की गहराई नाप के बहार आता फिर चला जाता । दोनों ही मस्ती में आकर जोर जोर से धक्के मरने लगे गरिमा भी निचे से गांड उठा उठा के अपने भाई का साथ देने लगी ।

" आह्ह्ह...चोद साले माँ के लोड़े भड़वे चोद हरामी आह्ह्ह...ओह्ह्ह
" ले साली रंडी आह्ह...बाप से चुदवाती हैं छिनाल तो भाई का भी ले आह्ह...मेरी रंडी दीदी

गरिमा ने अपनी टाँगे राहुल के कमर पे लपेट ली और उसको अपनी तरफ खींचने लगी । दोनों ही चुदाई के इस खेल का आनंद उठा रहे थे ।गरिमा की चूत रस छोड़ने लगी और लंड अंदर बहार करने में अब राहुल को आसान लगने लगा वो पुरी रफ़्तार से अपनी दीदी की चूत को चोदने लगा ।
इधर बरखा की बूर भी ये सब देख और सुन के गीली होने लगी वो ये सुन के और भी सन्न थी की सुरेश और गरिमा भी चुदाई करते थे । पर वो ये सब भूल गयी जब उसने दोनों की गरम बातें सुनी वो अपनी बूर को रगड़ने लगी ।

चुदाई का ये सिलसिला काफी समय तक चलता रहा और दोनों का जिस्म कांपने लगा । दोनों ही चरमसुख को पाने के करीब पहुंच चुके थे ।तभी गरिमा का बदन अकड़ने लगा और उसने अपने नाखून राहुल की पीठ में गाड़ा दिये । जिससे राहुल की एक दर्द भरी आवाज़ आयी ।आह्ह...ये दर्द एक मीठे दर्द की तरह लगा राहुल को और वो जोर जोर से झटके मारने लगा ।

" आह्ह्ह्ह...बहनचोद गयी मैं आह्ह्ह्ह...मादरचोद, चोद साले अपनी बहन को आह्ह..रंडी की औलाद ।

बोलते हुए गरिमा की चूत पानी फेंकने लगी । अपने लंड पे गरम गरम द्रव्ये को महसूस करके राहुल भी ज़्यादा समय तक नही टिका और गरिमा की चूचियों को भींच के झड़ने लगा ।उसका लंड झटके मार मार के अपने अंदर से सफ़ेद मलाई गरिमा की योनि में छोड़ने लगा ।गरिमा की योनि अपने ही भाई के वीर्य से लबा लब भरने लगी और वो जोर जोर से हांफ्ते हुए एक दूसरे पे पसर गये ।

दोनों ही अपनी साँसे काबू करने में लगे हुए थे दोनों का बदन पसीना पसीना हो चुका था । इधर बरखा भी धीरे से निकल ली ।
" आह्ह..दीदी मज़ा आ गया सच में तुम कमाल की चीज़ हो तभी पापा रोज़ किचन में पेलते थे ।
" गरिमा मुसकुराई और बोली साले तु भी कुछ कम नही हैं दीदी की चूत को ऐसे रगड़ रहा था की कोई बाज़ारू रांड हूँ ।
कुछ देर दोनों भाई बहन बात किये और गरिमा ने कपड़े पहन कर निचे भाग आयी ।

**********
इधर रोहन निधि के पास बैठा बाते कर रहा था और निधि बेचारी शर्म के मारे चादर से बहार नही आना चाहती थी।
तभी गरिमा आयी और रोहन वहा से चला गया। और निधि को राहत महसूस हुई।
इधर बरखा की बूर में चुनचुनी काट रही थी । उसने सुरेश को उठाना चाहा पर वो नही उठा तो वो मन मारकर सोने की कोशिश करने लगी ।

सब सो चुके थे ।तभी आयेशा की आँख खोली और वो बाथरूम गयी और वापस आयी तो अपने फूफ़ा जी को हॉल में देखा वो इधर उधर टहल रहे थे ।

" क्या हुआ फूफ़ा जी इतनी रात को आप यहाँ क्या कर रहे हो ।

"सुरेश अचानक ही एक आवाज़ सुन के उस तरफ देखा और बोला आयेशा बेटा तु इतनी रात को क्या कर रही हैं ।

" फूफ़ा जी मैं तो बाथरूम गयी थी पर आप इतनी रात को यहाँ कैसे ।
" आँख खुल गयी और नींद नही आ रही थी तो सोचा थोड़ा टहल लूं ।
" आयेशा अपने मन में नींद कैसे आएगी बेटी की बूर जो नही मिली होगी ।और मुस्कुरा दी ।
" जिसे सुरेश ने देख लिया और बोला क्या हुआ मेरी आयेशा मुस्कुरा क्यों रही हैं
" कुछ नही फूफ़ा जी मैं चलती हूँ

वो जाने को हुई की उसका पैर मूड गया और वो गिरने को हुई तभी सुरेश ने उसे जैसे तैसे पकड़ लिया । और आयेशा ने अपने फूफ़ा जी को धन्यवाद बोला । तभी उसको एहसास हुआ की उसके फूफ़ा जी का एक हाथ उसकी गांड की गोलाई को थामे हुए हैं और एक हाथ उसके पीठ से होता हुआ उसके चूचियों को छू रहा था । जब सुरेश को भी अपने हाथ में कुछ मुलायम सा महसूस हुआ तो वो समझ गया ।और जल्दी से दोनों अलग हुए । आयेशा जाने को हुई ।पर उसके मन में कुछ अजीब हो रहा था जो वो समझ नही पा रही थी ।इधर सुरेश को भी मांस का वो टुकड़ा पकड़ के एक गजब का एहसास हुआ जिसे वो फिर से छूना चाहता था ।
ये सब रोहन दरवाजे से खड़ा होकर देख रहा था वो एक गुस्से और बदले की आग में जलने लगा ।

**************
रोज की तरह सुबह हुई ।और नाश्ते के लिए मारा मारी जारी थी ।इधर राहुल और गरिमा एक दूसरे को देख मुस्कुरा रहे थे । बारी बारी जिसको जहा जाना था वो निकल गये ।



 

Golu_nd

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गरिमा और राहुल की साँसे अब फूलने लगी थी। तभी गरिमा ने राहुल के लंड को पकड़ के दबा दिया। जिससे राहुल ने आह्ह..करते हुए बोला दीदी मार दोगी क्या ।
उसने गरिमा को देखा तो वो जोर जोर से साँसे ले रही थी और एक मुस्कुराहट लिए हुए बोली ।

" मार तो तु देगा। थोड़ा तो सांस लेने दे कितनी देर से चूस रहा हैं थोड़ा सबर तो कर ले।
" राहुल मुस्कुरा के बोला तुम जैसी माल दीदी हो तो कौन सबर करेगा ।
" अच्छा जी ।

फिर से दोनों के होंठ मिल गये और वही सिलसिला फिर चलने लगा ।इस बार होंठ चुसाई के साथ साथ एक दूसरे के गुप्तांगों को भी सहलाने लगे थे राहुल गरिमा की चूत को उसकी सलवार के ऊपर से ही रगड़ रहा था और गरिमा अपने छोटे भाई के लोड़े को पकड़ के सहला रही थी । दोनों ही भूल गये थे की छत के दरवाजे की कुंडी नही लगयी हैं।


दीदी चलो टंकी की तरफ यहा कोई देख लेगा ।
गरिमा मुस्कुरा दी और बोली
" बाप किचन में बुलाता हैं और बेटा टंकी की तरफ साले दोनों कमीने हो ।

राहुल की हलकी हंसी निकल गयी और बोला बाप ने खूब मलाई खा ली अब बेटा खायेगा और गरिमा को टंकी की तरफ लेकर छत पे बैठा के उसके होठों को चूसने लगा । कुछ देर ऐसे ही चलता रहा और दोनों अलग हुए ।राहुल ने अपने कपड़े उतार के टंकी के करीब ही छत पे बिछा दिया जिसे देख गरिमा हँसने लगी ।

" क्या हुआ दीदी ।
" कुछ नही लगता हैं मेरी किस्मत में फर्श पे ही ठुकवाना लिखा हैं बिस्तर पे नही ।

ये सुन राहुल भी मुस्कुरा दिया और गरिमा की चूची को पकड़ के दबाने लगा ।
आह्ह्ह..आउच धीरे कर राजा आह्ह्ह...

दोनों के होंठ मिले हुए थे साथ में राहुल गरिमा की चूची मसले जा रहा था । आहिस्ता आहिस्ता गरिमा राहुल के बिछाये हुए कपड़ो पे लेट गयी। और दोनों एक दूसरे के जिस्म को रगड़ के गरम करने लगे ।

राहुल ने सलवार के ऊपर से ही गरिमा की बूर को चूम लिया जिससे गरिमा सिसक उठी ।
गरिमा उठी और अपने कपड़े खोलने लगी । और वो ब्रा और पैंटी पहने हुए लेट गयी। हलकी चांदनी रात में गरिमा का बदन चमक रहा था राहुल ने आव देखा ना ताव चूत पे मुँह लगा दिया और पैंटी के ऊपर से ही चाटने लगा । राहुल के थूक से पैंटी गीली होने लगी । तभी उसने पैंटी को साइड किया और गरिमा का खज़ाना उसके सामने था उसने फोन की टॉर्च जला के बूर को देखना चाहा तो गरिमा ने बंद करवा दिया और बोली कभी और देख लेना जल्दी से चोदो।

राहुल ने गरिमा की पैंटी को उतार के सुंघा और सर में पहन लिया जिसे गरिमा देख हँसने लगी । राहुल ने चूत पे एक चुम्बन किया और अपनी जीभ को ऊपर से निचे तक चूत के मुलायम मांस को चाटने लगा । गरिमा इस एहसास में अपनी आँखें बंद कर ली । राहुल अपनी जीभ चूत की फांको में घुसाने की कोशिश करने लगा । उसने चूत को हलके से फैलाया और अपनी जीभ को घुसा दिया । इस मधुर एहसास से गरिमा की आह्ह्ह..निकल गयी।
राहुल जीभ को चूत में घूमाने लगा वो जितना अंदर हो सके उतना जीभ घुसाए जा रहा था । इधर गरिमा का जिस्म मस्ती में काँपने लगा था वो जोर जोर से आहे भरने लगी ।

" आह्ह्ह...भाई....और अंदर तक चाट आह्ह्ह...बहनचोद....

इधर राहुल चूत के दाने को अपनी जीभ से कुरेदने लगा जिससे गरिमा मदहोश हो गयी और मस्ती में सिसकियाने लगी ।
" आह्ह्ह...बहनचोद...साले आह्ह..ओह्ह्ह...खा जायेगा क्या...

चूत पुरी तरह पनियाने लगी थी हलका नमकीन सा स्वाद राहुल के मुँह में जाने लगा गरिमा की चूत थूक से पुरी तरह साराबोर हो चुकी थी। राहुल ने गरिमा की चूची को पकड़ा और दबाने लग और एक चूची को मुँह में भर के पीने लगा ।राहुल निप्पलों को मुँह भर के निप्पलों से खेलने लगा ।
इधर गरिमा का जिस्म आग की तरह तपने लगा उसके जिस्म में हवस समा चुकी थी । गरिमा राहुल के सर को पकड़ के अपनी चूची में दबाने लगी । राहुल भी बारी बारी दोनों चूचियों को मुँह लेकर चूस चूस से दबा रहा था । तभी गरिमा ने राहुल को ऊपर खींच लिया और होठों को होठों से मिला के चूमने लगी । दोनों ही इस बात से बेखबर थे की उनका ये खेल कोई देख रहा था।

गरिमा उठी और राहुल लेट गया और गरिमा ने राहुल के लंड को पकड़ के अपने होठों में भर ली और चूसने लगी ।गरिमा के मुँह में जाते ही राहुल मचलने लगा उसके मुँह की गर्माहट से उसका लंड पिघलने लगा वो जोर जोर से सिसकियाने लगा ।
" आह्ह्ह....दीदी...चुसो आह्ह...उफ्फ्फ...क्या मस्त चुस्ती हो ।

गरिमा लंड को लपा लप लॉलीपॉप की तरह चाटने और चूसने में लगी हुई थी । वो लंड के उपरी भाग पे ऐसे जीभ लगाती की राहुल कसक के रह जाता । चांदनी रात में लंड चमकने लगा था पुरा लंड थूक से सना हुआ था ।प्री-कम की बूँद आती और गरिमा उसके अपनी जीभ से चाट के उसका स्वाद लेती । जब वो लंड को मुँह से बहार करती तो थूक की एक लाइन उसके मुँह से लंड तक बन जाती ।

" आह्ह्ह...दीदी अब चोदने दे नही तो झाड़ दूंगा ।

ये सुन गरिमा हलका सा मुस्कुराई और लेट गयी । राहुल ने लिंग को गरिमा की योनि पे रखा और आहिस्ता से जोर लगाया तो लिंग का उपरी भाग योनि को खोलता समा गया। इधर गरिमा सिसक उठी । राहुल ने आहिस्ता आहिस्ता ही लिंग को योनि में प्रवेश करवा दिया और राहुल का लिंग गरिमा की योनि के अंदर की गर्माहट लेने लगा । दोनों को ही एक अजीब से एहसास ने घेर लिया । उनपे वासना का सुरूर छाने लगा और कब दोनों हिलने लगे पता ही नही चला । राहुल आहिस्ता आहिस्ता अपने धक्के तेज़ करते जा रहा था और गरिमा छत पे आसमान को देखते हुए अपने ही सगे भाई का लंड अपनी चूत की गहराई में उतरवा रही थी । दोनों ही चुदाई का का ये खेल खेलने में मशरूफ़ थे ।और इधर बरखा उनको देख रही थी बरखा को विश्वास नही हो रहा था की उसकी बेटी और बेटा अपने पवित्र रिश्ते को इस तरह अपनी हवस में कुचल देंगे ।
गरिमा और राहुल दोनो की ही सांसे तेज़ होने लगी थी उनका बदन पसीने से भीगने लगा । और राहुल का लंड गरिमा की चूत की गहराई नाप के बहार आता फिर चला जाता । दोनों ही मस्ती में आकर जोर जोर से धक्के मरने लगे गरिमा भी निचे से गांड उठा उठा के अपने भाई का साथ देने लगी ।

" आह्ह्ह...चोद साले माँ के लोड़े भड़वे चोद हरामी आह्ह्ह...ओह्ह्ह
" ले साली रंडी आह्ह...बाप से चुदवाती हैं छिनाल तो भाई का भी ले आह्ह...मेरी रंडी दीदी

गरिमा ने अपनी टाँगे राहुल के कमर पे लपेट ली और उसको अपनी तरफ खींचने लगी । दोनों ही चुदाई के इस खेल का आनंद उठा रहे थे ।गरिमा की चूत रस छोड़ने लगी और लंड अंदर बहार करने में अब राहुल को आसान लगने लगा वो पुरी रफ़्तार से अपनी दीदी की चूत को चोदने लगा ।
इधर बरखा की बूर भी ये सब देख और सुन के गीली होने लगी वो ये सुन के और भी सन्न थी की सुरेश और गरिमा भी चुदाई करते थे । पर वो ये सब भूल गयी जब उसने दोनों की गरम बातें सुनी वो अपनी बूर को रगड़ने लगी ।

चुदाई का ये सिलसिला काफी समय तक चलता रहा और दोनों का जिस्म कांपने लगा । दोनों ही चरमसुख को पाने के करीब पहुंच चुके थे ।तभी गरिमा का बदन अकड़ने लगा और उसने अपने नाखून राहुल की पीठ में गाड़ा दिये । जिससे राहुल की एक दर्द भरी आवाज़ आयी ।आह्ह...ये दर्द एक मीठे दर्द की तरह लगा राहुल को और वो जोर जोर से झटके मारने लगा ।

" आह्ह्ह्ह...बहनचोद गयी मैं आह्ह्ह्ह...मादरचोद, चोद साले अपनी बहन को आह्ह..रंडी की औलाद ।


बोलते हुए गरिमा की चूत पानी फेंकने लगी । अपने लंड पे गरम गरम द्रव्ये को महसूस करके राहुल भी ज़्यादा समय तक नही टिका और गरिमा की चूचियों को भींच के झड़ने लगा ।उसका लंड झटके मार मार के अपने अंदर से सफ़ेद मलाई गरिमा की योनि में छोड़ने लगा ।गरिमा की योनि अपने ही भाई के वीर्य से लबा लब भरने लगी और वो जोर जोर से हांफ्ते हुए एक दूसरे पे पसर गये ।

दोनों ही अपनी साँसे काबू करने में लगे हुए थे दोनों का बदन पसीना पसीना हो चुका था । इधर बरखा भी धीरे से निकल ली ।
" आह्ह..दीदी मज़ा आ गया सच में तुम कमाल की चीज़ हो तभी पापा रोज़ किचन में पेलते थे ।
" गरिमा मुसकुराई और बोली साले तु भी कुछ कम नही हैं दीदी की चूत को ऐसे रगड़ रहा था की कोई बाज़ारू रांड हूँ ।
कुछ देर दोनों भाई बहन बात किये और गरिमा ने कपड़े पहन कर निचे भाग आयी ।

**********
इधर रोहन निधि के पास बैठा बाते कर रहा था और निधि बेचारी शर्म के मारे चादर से बहार नही आना चाहती थी।
तभी गरिमा आयी और रोहन वहा से चला गया। और निधि को राहत महसूस हुई।
इधर बरखा की बूर में चुनचुनी काट रही थी । उसने सुरेश को उठाना चाहा पर वो नही उठा तो वो मन मारकर सोने की कोशिश करने लगी ।

सब सो चुके थे ।तभी आयेशा की आँख खोली और वो बाथरूम गयी और वापस आयी तो अपने फूफ़ा जी को हॉल में देखा वो इधर उधर टहल रहे थे ।

" क्या हुआ फूफ़ा जी इतनी रात को आप यहाँ क्या कर रहे हो ।

"सुरेश अचानक ही एक आवाज़ सुन के उस तरफ देखा और बोला आयेशा बेटा तु इतनी रात को क्या कर रही हैं ।

" फूफ़ा जी मैं तो बाथरूम गयी थी पर आप इतनी रात को यहाँ कैसे ।
" आँख खुल गयी और नींद नही आ रही थी तो सोचा थोड़ा टहल लूं ।
" आयेशा अपने मन में नींद कैसे आएगी बेटी की बूर जो नही मिली होगी ।और मुस्कुरा दी ।
" जिसे सुरेश ने देख लिया और बोला क्या हुआ मेरी आयेशा मुस्कुरा क्यों रही हैं
" कुछ नही फूफ़ा जी मैं चलती हूँ

वो जाने को हुई की उसका पैर मूड गया और वो गिरने को हुई तभी सुरेश ने उसे जैसे तैसे पकड़ लिया । और आयेशा ने अपने फूफ़ा जी को धन्यवाद बोला । तभी उसको एहसास हुआ की उसके फूफ़ा जी का एक हाथ उसकी गांड की गोलाई को थामे हुए हैं और एक हाथ उसके पीठ से होता हुआ उसके चूचियों को छू रहा था । जब सुरेश को भी अपने हाथ में कुछ मुलायम सा महसूस हुआ तो वो समझ गया ।और जल्दी से दोनों अलग हुए । आयेशा जाने को हुई ।पर उसके मन में कुछ अजीब हो रहा था जो वो समझ नही पा रही थी ।इधर सुरेश को भी मांस का वो टुकड़ा पकड़ के एक गजब का एहसास हुआ जिसे वो फिर से छूना चाहता था ।
ये सब रोहन दरवाजे से खड़ा होकर देख रहा था वो एक गुस्से और बदले की आग में जलने लगा ।

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