Incest नई जिन्दगी nai zindagi (INCEST)

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Am@n

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Update-5

दोपहर कविता घर पे गप्पे लडाने आ गई बोलते बोलते वो कह गई

कविता- दीदी बुरा ना मानो तो एक बात बोलूं

सरला- कौनसी बात

कविता- दीदी शायद आप भैया से उमर मे बडी हो है ना

सरला ने नजर झुकाई

कविता- अरे देखो आप नाराज हो गई आपकी लव मैरेज है ना

सरला ने मजबूरी मे हां मे सीर हीलाया

कविता- अरे दीदी प्यार मे उमर थोडी देखी जाती है, आप दोनो का जोडा ना बहोत सुंदर है । पर बहोत दीनों से देख रही हूं

भाईसाब उदास-उदास

रहते है । कीसी गहरी सोच मे डुबे हुए लगते है । माफ कीजीएगा पर मुझे लगता है । शायद आप उनको खुष नही रख पाती

आप समझ गई ना मै

कौनसी खुषी की बात कर रही हूं ।

सरला गालो ही गालों मे हस पडी

कविता की नजर सरला की पहनी हुई चोली पर थी, कवीता ने सरला की चोली के ओर देखे बोला

कविता- क्या दीदी आप भी ना ये कौन से जमाने के ब्लाउज पहनती हो पुरे ढके-ढके । भला भैया आप पे लट्टू कैसे होंगे आज

कल खुले और बडे गले

के ब्लाउज पहनने का फैशन है । कल हम मेरे वाले टेलर के पास चलेंगे ।

सरला को तो ये सब सुन कर बडा बुरा लग रहा था, ये क्या दीन उस पे आन पडे है वो अपने बदन की नुमाईश अपने ही बेटे को

करने वाली थी ।

पर कविता और बस्ती के लोगों को शक ना हो इसीलीए अच्छा यही था की ईस नाटक को आगे बढाया जाए सरला ने भी नाटक

करने की सोच ली

कविता- दीदी आप भी ना, भाईसाब का नाम लेते ही नई दुल्हन की तरह शरमाती हो, ये शहर है आपका गाव नही ये शरमाना

छोडीये कुछ तो बोलो

दीदी कबसे मैं ही बकबक कीये जा रही हूं ।

सरला- कविता म म मेरे पती और मै , हम दोनो तुम्हे बराबर तो लगते है ना

कविता- बराबर मतलब

सरला- वो मुझसे १० साल उमर मे कम है ना

कविता- क्या दीदी आप कहा बडी लगती हो भाईसाब से, दोनो सुंदर जोडा लगते हो बिल्कूल एक-दुसरे के लिए बने हो आप दोनो



सरला- स...स सच मे

कविता- क्या दीदी आप भी कीतना डरती हो जैसे कोई पाप कर रही हो । अरे दीदी दोनो खुलके प्यार करो बाकी दुनिया गई तेल

लेने, पर हां रात मे

प्यार जरा धीरे से करो हां नही तो छोटू की निंद तुट जाएगी ।

और फीर कविता जोर-जोर से हसने लगी

सरला बेचारी मां बेटे के रीश्ते की धज्जीया उडते सह रही थी पर आखिर वो मां थी बेटे के लिए कुछ भी सहने को तैयार थी ।

सरला- कविता तेरे भाईसाब को पुराने लोगों की बडी याद सताती है और वो दुखी हो जाते है तू बता ना क्या करू

कविता- ईतनी सी बात, दीदी एसे वक्त बीवी ही पती का सहारा होती है । एक काम करो आप रोज उनका खयाल रखा करो काम

पे जाने पर उनकी

हर कुछ घंटो बाद फोन करके हालचाल पुछा करा, बाकी उन्हे कैसे खुष रखना है ये तो आपको अच्छी तरह पता होगा । मेरे पती

भी उनके बापू

गुजरने के बाद बडे सदमे मे रहते थे मैने ही उन्हे जल्द उससे बाहर निकाला ।

सरला बडी गौर से कविता की सलाह सुन रही थी ।

सुनिल अब धीरे-धीरे अपने बुरे अतित से बाहर आ रहा था पर जब कभी सरीता के यादों से जुडी कोई चीज देख लेता तो फीर

दुखी हो जाता था ।

इसलिए सरला ने सरीता की यादों से जुडी हर चिज को घर से दुर कर दीया ।

कुछ दीन गुजर गये सरला ने एक दीन कविता की साडी और खुले गले की चोली पहन ली शाम को सुनिल थका हारा घर लौटा

सरला ने दरवाजा

खोला सरला को देख कर सुनिल की आंखे फटी की फटी रह

Update-5

दोपहर कविता घर पे गप्पे लडाने आ गई बोलते बोलते वो कह गई

कविता- दीदी बुरा ना मानो तो एक बात बोलूं

सरला- कौनसी बात

कविता- दीदी शायद आप भैया से उमर मे बडी हो है ना

सरला ने नजर झुकाई

कविता- अरे देखो आप नाराज हो गई आपकी लव मैरेज है ना

सरला ने मजबूरी मे हां मे सीर हीलाया

कविता- अरे दीदी प्यार मे उमर थोडी देखी जाती है, आप दोनो का जोडा ना बहोत सुंदर है । पर बहोत दीनों से देख रही हूं

भाईसाब उदास-उदास

रहते है । कीसी गहरी सोच मे डुबे हुए लगते है । माफ कीजीएगा पर मुझे लगता है । शायद आप उनको खुष नही रख पाती

आप समझ गई ना मै

कौनसी खुषी की बात कर रही हूं ।

सरला गालो ही गालों मे हस पडी

कविता की नजर सरला की पहनी हुई चोली पर थी, कवीता ने सरला की चोली के ओर देखे बोला

कविता- क्या दीदी आप भी ना ये कौन से जमाने के ब्लाउज पहनती हो पुरे ढके-ढके । भला भैया आप पे लट्टू कैसे होंगे आज

कल खुले और बडे गले

के ब्लाउज पहनने का फैशन है । कल हम मेरे वाले टेलर के पास चलेंगे ।

सरला को तो ये सब सुन कर बडा बुरा लग रहा था, ये क्या दीन उस पे आन पडे है वो अपने बदन की नुमाईश अपने ही बेटे को

करने वाली थी ।

पर कविता और बस्ती के लोगों को शक ना हो इसीलीए अच्छा यही था की ईस नाटक को आगे बढाया जाए सरला ने भी नाटक

करने की सोच ली

कविता- दीदी आप भी ना, भाईसाब का नाम लेते ही नई दुल्हन की तरह शरमाती हो, ये शहर है आपका गाव नही ये शरमाना

छोडीये कुछ तो बोलो

दीदी कबसे मैं ही बकबक कीये जा रही हूं ।

सरला- कविता म म मेरे पती और मै , हम दोनो तुम्हे बराबर तो लगते है ना

कविता- बराबर मतलब

सरला- वो मुझसे १० साल उमर मे कम है ना

कविता- क्या दीदी आप कहा बडी लगती हो भाईसाब से, दोनो सुंदर जोडा लगते हो बिल्कूल एक-दुसरे के लिए बने हो आप दोनो



सरला- स...स सच मे

कविता- क्या दीदी आप भी कीतना डरती हो जैसे कोई पाप कर रही हो । अरे दीदी दोनो खुलके प्यार करो बाकी दुनिया गई तेल

लेने, पर हां रात मे

प्यार जरा धीरे से करो हां नही तो छोटू की निंद तुट जाएगी ।

और फीर कविता जोर-जोर से हसने लगी

सरला बेचारी मां बेटे के रीश्ते की धज्जीया उडते सह रही थी पर आखिर वो मां थी बेटे के लिए कुछ भी सहने को तैयार थी ।

सरला- कविता तेरे भाईसाब को पुराने लोगों की बडी याद सताती है और वो दुखी हो जाते है तू बता ना क्या करू

कविता- ईतनी सी बात, दीदी एसे वक्त बीवी ही पती का सहारा होती है । एक काम करो आप रोज उनका खयाल रखा करो काम

पे जाने पर उनकी

हर कुछ घंटो बाद फोन करके हालचाल पुछा करा, बाकी उन्हे कैसे खुष रखना है ये तो आपको अच्छी तरह पता होगा । मेरे पती

भी उनके बापू

गुजरने के बाद बडे सदमे मे रहते थे मैने ही उन्हे जल्द उससे बाहर निकाला ।

सरला बडी गौर से कविता की सलाह सुन रही थी ।

सुनिल अब धीरे-धीरे अपने बुरे अतित से बाहर आ रहा था पर जब कभी सरीता के यादों से जुडी कोई चीज देख लेता तो फीर

दुखी हो जाता था ।

इसलिए सरला ने सरीता की यादों से जुडी हर चिज को घर से दुर कर दीया ।

कुछ दीन गुजर गये सरला ने एक दीन कविता की साडी और खुले गले की चोली पहन ली शाम को सुनिल थका हारा घर लौटा

सरला ने दरवाजा

खोला सरला को देख कर सुनिल की आंखे फटी की फटी रह गई ।
Pic add kro story m maja double ho jayega
 

vbhurke

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सरला- कुछ दीन बाद

सुनिलने अपनी पेंट खोली और अपना तन्नाया लौडा बाहर निकाला उसके बाप के लंड से भी बडा और चौडा था वो काला गन्ने जैसा कल

रात पहली बार सरला ने उसे देखा था तब से वो डरी थी उसे अचानक अतित याद आने लगता है उसे निंद ही नही आ रही थी । सुनिल

सरला के नरम हाथों को पकड कर उसकी मुठ्ठी मे देता है ।

सुनिल- हीला ईसे

सरला हीलाने लगती है उसकी नई हरी चुडीयां खनकने लगती है अपने लंड को महीनो बाद कीसी औरत का हाथ लगने से सुनिल बडा

खुश हो जाता है ।

सुनिल- अ अह बस कर नही तो निकल जाएगा

और फीर नंगा ही सरला को बाहों मे लिए सो जाता है ।

दुसरे दीन रवी दोपहर से रो रहा था । सरला को बडी चिंता होने लगती है वो कविता को बुला लाती है ।

सरला- देख ना कविता बडा रो रहा है सुबह से

कविता- अरे दीदी लाओ उसे यहा भुक लगी होगी उसे और उसका खाना यहां है

अपनी चोली से एक चुचि निकालते हुए कहती है

सरला कविता की चुचि देखती है । रवी बडी बेसबरी से मुंह मे चुसने लगता है । सरला बडी उदास होती है रवी की ये हालत देखे

कविता- दीदी आपकी छाती मे दुध नही भरा अभी तक

सरला हडबडाते हुये

सरला- ह नही

कविता- डॉक्टर को दीखाया नही

सरला- ददद दीखाया

कविता- कोई बात नही दीदी बच्चो को दो-तीन सालतक पीला सकते है दूध जब आयेगा तब पीलाना शूरू करदो मां के दुध से बढकर कुछ नही

सरला- ह हां

कुछ बाते करने के बाद कविता चलि जाती है ।

सोये हुए रवी के माथे पर सरला हाथ फेरती है ।

सरला- चिंता मत कर मेरे जीगर के तुकडे मै तेरे लिए कुछ भी सहूंगी तुझे भुका नही रहने दूंगी

सुनिल काम से लौटता है ।

वो सरला की गोद मे नई साडी रख देता है । पर उसे देख सरला को खुशी नही हुई , सरला का उदास चेहरा देख सुनिल पुछता है ।

सुनिल- ए रानी क्या हुआ उदास क्यू बैठी है

सरला चुप रही उसने कुछ जवाब नही दीया

सुनिल- क्या हुआ जवाब क्यू नही देती

सरला- सुनिल वो वो

सुनिल- ठीक से बता क्या बात है

सरला रोने लगी

सरला- सुनिल मुझे हमारे बच्चे की चिंता हो रही है । बेचारा रोज भुका रहता है । उसे मां का दुध चाहीये । बता ना मै क्या करू ।

सुनिल को बडी खुशी हुई सरला रवी को अपना बच्चा मानने लगी थी । उसने सरला के आंसू पोछ लिए ।

सुनिल- तो बन जाना उसकी मां, बनेगी ना

सरला- मतलब

सुनिल- ईतने दीन जो तेरे पिछे लगा हूं पर तू है की हम दोनो का मिलन होने ही नही देती
 

vbhurke

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सरला- पपपर क्या उससे सब ठीक होगा

सुनिल- हां तो जैसे ही बच्चा ठहरेगा कुछ महीने बाद तुझ मे भी दुध आने लगेगा बस कुछ महीने रवी को बाहर का दुध देना होगा ।

सरला- पररर मै ईस उमर मे

सुनिल- तो क्या हुआ चाहे तो डॉक्टर से पुछ लेते है, अब तो बहोत सारी दवाईया आ चुकी है ।

सरला- ठीक है मै रवी के लिए कुछ भी कर सकती हूं चल डाक्टर के पास चलते है

दोनो डॉक्टर के पास जाते है । और अपने समस्या का समाधान पाते है । लौटते वक्त सरला खुश थी ।

सुनिल- तो देखा ना मैने क्या कहा था डॉक्टर बोला ना बस पाच-छह महीने लगेंगे और फीर दुध आने लगेगा और रवी को क्या २-३ साल

होने तक तू दुध पीला सकती है और वो ना पीये तो मै हूं ही ।

सरला- हट बेसरम कही का वो तो बस रवी के लिए होगा हां कह देती हूं

सुनिल- अरे जैसी आपकी मर्जी रानी जी मन कीया तो हमे भी चखां देना थोडासा, पर हां अब हमे देरी नही करनी चाहीये हां , आज रात

से ही हम हमारा प्रोग्राम शूरू करेंगे

सरला को उत्साह और डर दोनो लग रहा था

सुनिल ने रात को यादगार बनाने की तैयारी कर ली

खाना हो जाने के बाद सोने की तैयारी होने लगी आज सुनिल सरला के साथ सोने वाला था तो सुनिलने बीस्तर बीछा के उसे गुलाब की

पंखुडीयो से सजा दीया और पास मे दुध का भरा हुआ गीलास रखा जीसमे उसने मेडीकल से लाई हुई सेक्स की गोली मिला दी थी उसने

हवा मे परफ्यूम छीडकाया।

सरला रसोई मे सबकुछ समेट कर रख रही थी

रात के साडे बाराह बज गये सुनिलने सरला को आवाज लगाई

सुनिल- आजा मेरी जान अब और मत तडपा

सरला रसोई से बाहर आई फुलों से सजा बीस्तर देख उसने शरमाते हए उंगली दातों तले दबाई

सरला को देखते ही सुनिल ने उसका हाथ पकडे उसे बीस्तर पर खिंच लिया

आज से सुनिल की रातें रंगीन होने वाली थी सरला रोज रात सुनिल का बीस्तर जो गरम करने वाली थी दोनो असल मायने मे मिलन

करके पति-पत्नि बनने वाले थे


फिर सुनिल ने सरला को बिठाया और पास का दुध का गीलास लीया और उसमे सरला की उंगली डाली और दुध मे डुबाके हीलाने लगा

और फीर उसने वो उंगली मुंह मे भरे चुसने लगा फीर उसने वो गीलास सरला के मुह को लगाया और उसे पीलाने लगा आधा दुध सरला

को पीलाने के बाद आधा गीलास दुध वो पी गया और गीलास रखते ही सुनिल सरला के रसिले होट चुमने लगा .... जब वो चुम रहा था तो

सरला भी साथ दे रही थी

फीर सुनिलने उसे लिटा दीया और उस पर फुल बरसाने लगा और फीर उसने सरला के पल्लू को उसके छाती के उपर से हटा दीया उसके

मोटी मोटी चुचिया लाल चोली में कैद उपर निचे हो रही थी । सुनिल ने अब सरला के चोली पर हाथ डाला और उसके चोली के हुक

खोलने लगा सरला आंखे बंद कीये पडी थी उसकी तेज धडकनो से उसकी चुचिंया तेजी से उपर निचे हो रही थी दो हुक खोलने के बाद

एक हुक बचा था उसे भी तेजी से सुनिल ने खोल दीया । और सरला के दो कबूतर फडफडाते चोली से आझाद हुए जैसे सालों की कैद मे

हो, दोनो चुचिंया सुनिल के मुंह के सामने थरथरा रही थी । सुनिल सरला के दोनो आम देख पागल हो गया । आजतक उसने इतने सुंदर

गोल मुलायम दुध की तरह सफेद, पके हुये आम की तरह मोटी चुचिंया कभी नही देखी थी । सरीता तो नये जमाने की लडकीयों की तरह

दुबली पतली थी उसकी ना तो चुचिंया मोटी थी नाही चुत्तर । उसे दुसरी लडकीयां मोटी लगती थी । पर उसे अंदाजा नही था गदराया

माल इतना मजेदार होता है खोलने पर । सरला की चुचिंया बिल्कुल पके हुए आम की तरह मोटी और रसिली थी, सुनिल को उनके ईतने

मुलायम होने पर यकीन नही हो रहा था तो वो अपनी उंगली दबाके देख रहा था जब हाथ से उठाके छोड देता तो वो दुध की थैली की तरह

हीलने लगते उनपे सजे हुए कोले भुरे दो निप्पल कीसी चोकलेट की तरह लग रहे थे सुनिल की जीभ लपलपाने लगी सुनिल की सब

हरकते सरला आंखे बंद कीये महसूस कर रही थी सुनिल ने सरला को देखा उसने सरला के माथे पर चुमा, फीर उसकी बंद आखों पर और

फीर उसके थरथराते होटों पर इस तरह वो चुमते हुए उसकी नजर फीर सरला के तन्नाये हुए दो मनुको पर पडी दो उसने वक्त ना बरबाद

करते हुए मुंह मे लपक लिए और उसे मुंह मे भरके चुसने लगा सरला की चुप्पी का बांध तुटा उसके मुंह से खामोशी को चिरती

सससससस की करहाट निकली । और वो उत्तेजना मे तकीये को जोर से पकडके खिंचने लगी उसके होंट काटने लगी, सुनिल तो पागल

हो कर उसके दोनो चुचिंयों को आटे के गोले की तरह गुंदने लगा मसलने लगा.
 

vbhurke

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सालों बाद कीसी मर्द के हाथो सरला के मस्त गदराए बदन की मालिश हो रही थी उसकी नरम-नरम चुंचिया मसलने मे सुनिल को बडा

मजा आ रहा था पहली बार इतनी मोटी चुचिंया उसके हाथ लगी थी वो बारी बारी उनके मनुके मुंह मे दबाके चुसता दातों से काटता ।

उसका हाथ उसके नंगे उठे हुए पेट पर फेर रहा था पुरा मुलायम उसका पेट सहलाने मे सुनिल को आनंद मिल रहा था उसकी उंगली वो

बार-बार उसकी गहरी नाभी मे डाल कर अंदर दबाता तो

सरला- आहहहहह

करके सिसकने लगती

काम वासना से पागल हुए सुनिल को अब रहा नही गया

उसके सामने उसकी वही औरत लेटी थी जीसे वो इतने साल तक साडी मे लिपटी थी जो उसकी मां थी और कीस्मत ने ऐसी पलटी मारी

की आज वो उसकी पत्नी बन कर आधी नंगी लेटी थी जो कीसी भी वक्त पुरी नंगी हो सकती थी बस कुछ कपडे उतरने की देर थी ।

सुनिल तो पागलों की तरह उसे घुरता जा रहा था । उसे बडी उत्सुकता इस बात की थी की आज वो अपनी मां को नंगी करेगा । उसके

हाथ सरला की कमर के निचे साडी की ओर बढे उसने उसकी साडी की गांठ खिंचकर निकाली और झट से सरला गोल लपेटी हुई साडी वो

सरसराती हुई उसके बदन से अलग करने लगा सारी साडी सरला के बदन से अलग हो गई । सरला अब सिर्फ पेटीकोट मे उसके सामने

लेटी थी आंखे बंद कीये कुछ बडबडा रही थी सुनिल ने सरला के पेटीकोट पर बीच से उंगली फीराते हुए पैरो तक ले गया तो उसके दो पैरो

के बीच दरार बनने लगी सुनिल सरला की साडी मे गदराई दीखने वाली जांघे सचमे कीतनी मांसल है वह देखना चाहता था । उसे उसकी

मांसल जांघे और सरला का वो हीस्सा जीसे देखने इच्छा हर मर्द को तडपाती है । और जीसे सरला हमेशा अपने लाडले बेटे से छुपा कर

रखती थी , उस हीस्से को आज वो अपने बेटे को अपना सुहाग समझ कर सौपने वाली थी । सुनिल ने सरला की मांसल जांघो के बीच

बने तीकोने हीस्से पर चुम लिया । सुनिलने पेटीकोट का नाडा खिंच दीया और उसका पेटीकोट जो सरला की मांसल जांघो को चिपका

हुआ था जोर-जोर से खिंचने लगा सरला बेचारी सुनिल को दीक्कत होते देख पैर उपर करके पेटीकोट उतारने मे मदत करने लगी और

जैसे ही पेटीकोट हट गया सुनिल तो दंग रह गया सरला की चिकनी जांघे सफेद रौशनी मे संगमरमर सी चमक रही थी । गुदाज फैली हुई

नरम मुलायम जांघे और पीछे छुप कर बैठे हुए उसके चुत्तर उसकी निक्कर से अपने होने का अहसास उसे करवा रहे थे सुनिल तो

पागलों की तरह बीस्तर पर खडा हो कर अलग अलग जगह से सरला की नंगी जवानी घूर रहा था । अपने कपडे एक-एक करके उतारने

लगा और नंगा हो कर । भुके भेडीये की तरह सरला के नंगे गुदाज बदन पर तुट पडा । और सरला को चुमने चाटने लगा

सुनिल- आय हाय,आय हाय उममम उममम उममम कहां थी तू ईतने साल कीतना नसिब वाला हूं में उममम राणी हीरा है तू हीरा ,

यकीन नही हो रहा है , इतना जबरदस्त माल इतने मेरे सामने था और मेरी नजर तक नही पडी , बापू ने बडे मजे कीये होंगे तेरे साथ अब


मेरी बारी है । उममममममहह

सुनिल की नजर सरला के उस हीस्से को ढके हुई निक्कर पर गीरी ।

सुनिल- आहहह जान ये कीस जमाने की निक्कर पहनती है तू तेरे इस परी से बदन पर ये बिल्कूल धब्बा लगती है, कल से तू अगर

पहनेगी तो नये जमानेकी निक्कर नही तो अंदर नंगी रहेगी कह देता हूं ।

सुनिलने झपटते हुए उसके निक्कर पर हाथ डाला और बेरहमी से उसे उसकी जांघो से खिंच-खिंच कर दूर फेक दीया । सरला मादरजात

नंगी सुनिल के सामने पडी थी शरम और डर के मारे अपना सिर गीराये हाथ से चुत छीपाने की कोशीश कर रही थी । पर बार-बार

सुनिल उसका हाथ हटाता ।

सुनिल- हाय हाय हाय क्या गजब की चुत है तेरी बिल्कूल पाव रोटी सी फुली हुई । अरे छुपा क्यू रही है हाथ हटा मै कोई पराया थोडी तेरा

पति हूं । हर अंग पर मेरा हक है ।

सुनिल ने उसका हाथ चुत से हटाया और उसकी टांगे फैलाई

उसने अपनी लपलपाती जीभ सरला की चुत पर लगाई सरला के बदन मे बीजली दौड गई उसकी चुत गीली हुई थी उसका पाणी सुनिल

चाटने लगा ।

सरला- छी छी नननननही सुननननिल वहा नही

सुनिल- उमममम सससस उमममम

सरला- अ आहहहह आ आ मममम ससस

सुनिल- उमममम आहहह मजा आ गया अब रहा नही जाता

सरला- छी ये क्या कीया तुने बेटा वो तोगंदी जगह है

सुनिल- क्या मतलब बापू ने कभी एसे

सरला ने ना मे सिर हीलाया
 

vbhurke

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सुनिल- अरे ये नये जमाने की बात है आजकल बहोत लोग करते है, तुझे मजा आया ना

सुनिल ने अपने आठ ईंच तने हुए लौडे को हीलाने लगा सरला की तिरछी नजर उसपर गीरी तो उसने आंखे बंद करली । और फीर

बडबडाने लगी ।

सुनिल सरला पे लेट गया उसने उसके लंड का सुपडा सरला के चुत के मुहाने पर लगाया उसकी नजर बडबडाती सरला पर गीरी ।

सरला- हे भगवान बचाले, हे भगवान बचाले

सुनिल- क्या हुआ मां डर क्यू रही है आंखे खोल

सरला चुप हो गई

सुनिल- सच सच बता क्या बात है

सरला- वो तततेरे बापू जब करते थे ना तो मुझे बडा दर्द होता था दुसरे दीन वहां से चमडी छीलने से खुन भी आता था पर मै तेरे बापू को

कभी बताती नही थी ।

सुनिल- बस ईतनी सी बात वो बापू बराबर डालते नही होंगे तेरे छेद मे , मै तेल लगा के डालता हूं फीर ठीक है ।

सरला- बेटा आज मुझे बडा डर लग रहा है , फीर कभी कर लेंगे ना आज नही

सुनिल- अरे एसे कैसे इतना सबकुछ तो हो गया है बस अब छेद मे डालने की देर है, और सोच ले अगर तू ऐसी टालती रहेगी तो तू कब

पेटसे होगी, कब तेरी छाती मे दूध भरेगा तब तक क्या रवी भुका रहेगा, तु उसकी मां है ना उसके लिए बस थोडा सह ले, मै गारंटी देता हूं

तुझे ज्यादा दर्द नही होगा बादमे तुझे मजा आने लगेगा ।

सरलाने सोये हुए रवी को देखा और उसकी आंखे नम हो गई

सरला ने सुनिल को इशारों मे हा कर दी

सुनिल ने सरला के होटों को अपने होटों से बंद कर लिया सुनिल ने सरला की चुत मे जोर का झटका मारा, झट से उसका लंड सरला की

चुत के होट फैलाता हुआ अन्दर घुस गया।

सरला की तो दर्द के मारे चिंख निकली

सरला- आआआआआआहहहहहहहहह मर गई रे मां ,उममममममममम हहहह आ आ आ

सरला पागल हूई जा रही थी चिल्ला रही थी , पर उसकी चिंखे सुनिल के मुंह मे दबी जा रही थी ।

सुनिल- आहहहा हा कीतना नरम-नरम गरम-गरम है तेरा छेद रानी

सरला- उ उ उ

सुनिल ने उसके होंट चुसना शुरू रखा और निचे धक्के लगाना

सुनिल- कीतनी माल औरत है तू । कीतनी अच्छी बीवी है तू, ले मेरे लंड को निगल जा ले सह ले मेरे झटके, तुझे मां बनना है ना, मै तेरी

गोद भरूंगा आज मेरा बीज तेरी कोख मे गीरा के ।

सरला- ई उ ई उ इ इ

सुनिल- क्या कमाल की औरत है तू तेरा हर अंग रसिला है रे तेरे ये शहद छोडते होंट, निचे गरम मुलायम अमरीत रस छोडती चुत , सच

मे, मेरे काले गन्ने की रोज सेवा करती रह मै तुझे रानी बनाके रखुंगा उममममह तु एक सच्ची मां है रवी के लिए क्या कुछ नही कर रही

है । उमममम

सुनिल ने सरला के होंट छोडे

सरला- ईईईईईई उउ हाय मां, मर गई रे मेरी चुततततत, सुनिल बबबबबबेटटटटा धिरे कर आहहहहह !

सरला जोर जोर से चिल्ला रही थी, दोनो हवस की तपीश मे चुदाई के मजे ले रहे थे, सरला की नई हरी चुडीयां खनक रही थी । पायल

झन झन करती बज रही थी ।

सुनिल ने देखते ही पूरा लंड सरला की चुत में उतार दिया और जोर-जोर से झटके लगाने लगा, लंड सरला की बच्चे दानी से टकरा रहा

था।

सरला- आ आ आ ई ई

सुनिल- चिल्ला जान जोर से चिल्ला, डर मत जान हम वही कर रहे है जो रात को पति पत्नी करते है

सरला- उई उई उई उई

सुनिल- ले ले और जोर का ले सालो से प्यासी है ना तू ले
 

vbhurke

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सरला- उममममा उ ई आ आ आ

सुनिल सरला के दोनो मुलायम चुत्तर अपने पंजो मे भर के बेरहमी से मसल रहा था नोच रहा था ।

सुनिल- हाय साली क्य़ा मुलायम नरम गद्देदार पिछवाडा है तेरा, अब तो रोज तुझे नंगी ही रखूंगा पता नही था साडी के अंदर इतनी

जबरदस्त फुली हुई गांड छुपा कर रखती थी । उममम तु तो मेरे घर का खजाना निकली ।

सुनिल सरला के चुत्तर फैला कर उसकी दरार मे उंगली फीराने लगा उसकी उंगली सरला के गांड के छेद के पास रूक गई वो अपनी

उंगली छेद मे घुसाने की कोशीश करने लगा सरला सिहर गई उसने सुनिल को कस के जखड लिया ।

सुनिल- आह हा ये तो बंद है । इस छेद का सील कीसी अच्छे दीन खोलूंगा ।

सरला- आ आह उम उम हह

सुनिल ने दो तीन तगडे झटके लगाए

सुनिल- या आह ले ये ले

सरलाने अपने नाखून सुनिल के पीठ मे गढाए और झडने लगी,

सरला- आआआ आ आ आहहहहह मममममममांहहह ह ह ह ह

सरला ढीली पड गई वो बिस्तर पर बाहे फैलाई पडी रही और झटके लगाते सुनिल को देखने लगी

सुनिल- अरे झड गई मुझे लगा तु अनुभवी है वक्त लगेगा कोई बात नही मेरा भी निकलने वाला, उममममहह

सरला- अह ह ह ह आहह

सुनिलने दो-तीन तगडे झटके लगाए और फरफराता सरला की चुत मे जोर जोर से पिचकारी मारने लगा सुनिल- आहहहह ह ह

सरला चुत तो दोनों के मधुर मिलन के कामरस से खिल उठी जैसे विरान बंजर धरती पर पहली बारीश हुई हो सरला की चुत से गाढा

सफेद पिले रस बाहर बहने लगा सुनिल के लंड को चिपकने लगा।

और फीर सुनिल अपना हथियार सरला के चुत मे ढीला छोड, सरला पे लेट गया और दोनो कुछ देर नंगे लेटे रहे फीर कुछ मिनट बाद

सुनिलने सरला को चुम लिया ।

सुनिल- उममममह तो कैसी रही हमारी पहली रात मेरी रानी मजा आया ना

सरलाने शरमा कर मुंह घुमा लिया

सुनिल- बाकी कुछ भी बोल तुने दील जीत लिया तुने, तेरे जैसी माल औरत पहली बार मेरे नसिब मे आई है लग रहा है मेरी पहली

सुहागरात है ।

सरला तो सुनिल की बाते सुनकर नई नवेली दुल्हन की तरह शरमाने लगी शरम से पुरी लाल हो गई थी ।

सुनिलने चद्दर ओढली और नंगी सरला को लिपट के सो गया सरला भी अपने नये नवेले पति के साथ लिपट के बदन को बदन चिपकाये

सो गई । सुबह की कीरन खिडकी से सरला की आंखो पर गिरी और सरला की निंद तुटी । उसकी नजर घडी पर गीरी सुबह के ५ बजे थे ।

सरला का सारा बदन तुट रहा था सुनिल उसको पकडे उसके मुलायम चुंचियो मे सिर घुसाये नंगा सोया पडा था । सरला ने उसे अपने

बदन से हटाया और बिस्तर पर बैठ गई । पास मे लेटे सुनिल को देख वो शरमाई । एक हल्की सी कीस उसने सुनिल के माथे पर दी ।

सरलाने विजय पे चद्दर ओढ दी और बाल बांध के साडी लपेट कर बाथरूम मे चली गई और बैठ कर सी...सी....सी करती मुतने लगी

उसकी उंगली उसके छेद तक गई जहा अंदर सुनिल ने छोडा हुआ माल था । फीर गांड मटकाती बाथरूम से बाहर आई । और नहाके रोज

के काम करने लगी ।

सुबह ८ बजे रवी की रोने के आवाज जब सुनिल के कानो पर पडी तो सुनिल की निंद तुटी उसके खुदको बिस्तर पर बदन पर चद्दर मे

पाया ।

आंखों को रगडते हुए उसकी नजर दुध की बोतल रवी के मुंह मे देती सरला पर गई । आहहहा हा सुबह सुबह उसकी सुंदर गदराई परी

अपने ही धुन मे बैठी थी और उसे देख सुनिल को उसके साथ बीताए रात के हसिन पल याद आने लगे । सरला सुनिल को जगते देख

नजरे झुकाए रवी को थपथपा रही थी । सुनिलने सरला का हाथ थाम लिया और उसे चुमने लगा ।

सरला- हहहुमम.... छोडो ना

सुनिल- अरे मेरी जान, चुमने दे ना...
 

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Sunil ne Sarla ka bhedan kar hi diya. Ab Ravi ki Bhukh bhi mitegi. Pratiksha agle rasprad update ki
 
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