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Fantasy दर्दे जिगर

Mayaviguru

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दोस्तों मेरे वादे के मुताबिक पहला अपडेट दे रहा हूं और यह आशा करता हूं कि आपको यह सब पसंद आएगा।
यह कहानी पहाड़ियों के बीच बसे 1 गांव जिसका नाम सुंदरपुर है और उस गांव के बीचोबीच बने एक प्राइमरी स्कूल में 15 अगस्त की शाम को लहराते तिरंगे के साथ शुरू होती है। कहानी का नायक एक छोर पर बैठा हुआ तिरंगे को उतरते हुए देखता है और फिर वहां से उठकर गांव की अंधेरी गलियों से होता हुआ अपने जले हुए घर में जाकर अपनी मां और बाप की फोटो को देखता है। और फिर कुछ देर उसे निहारने के बाद वहां से दौड़ता हुआ चला जाता है। कुछ दूर दौड़ने के बाद सामने कुछ रोशनी सी दिखाई देती है। नायक उसी दिशा की ओर दौड़ता हुआ जाकर रुकता है और अपने आप को शमशान की उस जलती हुई लाश की आग की लपटों में तपाने लगता है।
तभी वहां पर उस शमशान में रहने वाले एक बाबा आकर उसे कहता है की बेटे कब तक अपने आप को इस तरह श्मशान में आकर इन लाशों की आग से तपाते रहोगे। मैंने आज तक तुमसे कुछ नहीं पूछा लेकिन मैं आज तुमसे अपने आप को इस तरह तपाने का कारण जानना चाहुँगा। तब इस कहानी का नायक बाबा को अपनी जिंदगी की पिछली कहानी बताना शुरू करता है
Suruwat sahi hai lounda aanath hai but ye samshan ka kya majra hai dekhte hai
 

Mayaviguru

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Ye
अब कहानी के जो मेन किरदार है उनके बारे में जान लेते है
1- धर्मदास जी - रिटायर्ड फौजी जो गांव में एक स्कूल चलाने के कारण मास्टर जी के नाम से मशहूर है।
2- सावित्री देवी- अपने नाम के अनुसार ही बहुत धार्मिक एवं अपने परिवार को प्यार करने वाली ग्रहणी
3- इस कहानी के हीरो - मां-बाप प्यार से अजय और विजय कहते थे लेकिन किस्मत ने उन्हें शिवा और कृष्ण बना दिया।
4 - गांव का धूर्त साहूकार जिसे लोग लाला कहते थे। वह लाला जो अगर मौका मिले तो पैसों के लिए अपनी मां बहन को भी बेच दे। जिसका सिर्फ एक ही धर्म एक ही भगवान सब कुछ पैसा ही था।
5- मुनीम- लाला का चमचा। उसके लिए लाला ही उसका भगवान था लाला ने कह दिया दिन तो दिन लाला ने कह दिया रात तो रात।
6- खान बाबा एक आतंकवादी संगठन का सरदार जिसका मकसद लोगों में दहशत फैलाना है।
7- असलम खान- खान बाबा का सबसे भरोसेमंद आदमी।
8- ठाकुर हरामीपन में लाला का भी बाप था। वह अपने आपको गांव का भगवान मानता था।
9- सोनिया इस कहानी की नायिका एवं ठाकुर की इकलौती बेटी जो अपने कॉलेज में टॉप 5 छात्राओं में आती है । उसे संगीत एवं नृत्य का बहुत शौक है। सुंदर है तो थोड़ा सा घमंड भी है।
तो दोस्तों यह हैं इस कहानी के मुख्य किरदार। कहानी इन के इर्द-गिर्द घूमेगी।
Ye to lag rha rabchik action story hai
 

Mayaviguru

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Suruwa
कहानी का यह भाग शुरू होता है 15 अगस्त के दिन से जोकि गांव के प्राइमरी स्कूल में मनाया जा रहा था।मास्टर जी के साथ अजय और विजय दोनों राष्ट्रगान गा रहे थे। स्कूल में 15 अगस्त का समारोह समाप्त होने के बाद मास्टर जी अपने दोनों बेटों के साथ घर की ओर लौट रहे थे तभी उन्हें गांव के बाहर खंडहर में कुछ हलचल दिखाई दी तो उन्होंने अजय विजय को घर जाने को कहा और खुद उस खंडहर की तरफ चल दिए। मास्टर जी जो कि खुद एक रिटायर फौजी थे उन्हें खतरे की बू दूर से ही आ गई थी। इसलिए वे छुपते छुपाते खंडहर के अंदर गए वहां जाकर उन्होंने देखा कि लाला के साथ दो बंदे खड़े हुए हैं और वह तीनों मिलकर गांव में लूटपाट करने की योजना बना रहे हैं। मास्टर जी जिस तरह से छुपते हुए अंदर गए थे उसी तरह दबे पांव खंडहर से बाहर आ गए मगर बाहर आते हुए उन्हें मुनीम ने देख लिया और लाला को जाकर बता दिया कि मास्टर ने उनकी सभी बातें सुन ली है। उस वक्त खंडहर में लाला के साथ खान बाबा और असलम थे।उसकी बात सुनकर उन्होंने मास्टर को और उसके खानदान को खत्म करने की योजना बनाई। उधर मास्टर जी ने घर पहुंचकर सारी घटना अपनी धर्मपत्नी को बताई और अगले दिन पुलिस को बताने का निर्णय लिया, लेकिन उन्हें क्या पता था कि भविष्य में क्या होने वाला है अगले कुछ पलों के बाद वह और उनका परिवार अगला दिन देखेंगे भी या नहीं। रात को खाना खाने के बाद पूरा परिवार बैठकर आपस में हंसी मजाक कर रहे थे कि तभी उनके घर के दरवाजे की कुंडी बजी। मास्टर जी के पूछने पर बाहर से मुनीम ने आवाज लगाई
"मास्टर जी नमस्कार मुझे आपसे कुछ बात करनी थी तनिक दरवाजा तो खोलिए"।
मास्टर जी ने अपने बीवी बच्चों को अंदर कमरे में जाने का बोलकर दरवाजा खोलने चल दिए। दरवाजा खोलने के बाद उन्होंने बोला
"अरे मुनीमजी इतनी रात को आप को मुझसे क्या बात करनी है, आप कल सुबह स्कूल में आकर भी तो बात कर सकते थे।"
तब योजना के तहत मुनीम मास्टर जी को घर के बाहर बुलाकर और इधर उधर की बातें करते हुए कुछ दूर तक ले आता है और इसी का फायदा उठाकर खान बाबा और असलम मास्टर जी घर के अंदर घुसकर छुप जाते हैं। कुछ देर बाद मुनीम के साथ बातचीत करके मास्टर जी घर में वापस आकर दरवाजा बंद करके अपने परिवार के पास सोने के लिए चले जाते हैं। रात को 12:00 बजे के आसपास असलम और खान बाबा अपने छुपी हुई जगह से बाहर आकर दबे पांव मास्टर जी के कमरे की तरफ जाते हैं।
दोस्तों आज इतना ही बाकी कल पता चलेगा खतरा किसके लिए है। खान बाबा और असलम के लिए या फिर मास्टर जी और उनके परिवार के लिए। अपनी राय भी दे।

Suruwat mai hi desi action mja aayega
 

Mayaviguru

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Iski
पिछले अपडेट में आपने पढ़ा था कि मास्टर जी घर जाते हुए लाल और उसके 2 साथियों की बाते सुन लेते है जिसे मुनीम देख लेता है और लाला को बतादेता हैं। रात को लाला के दोनो साथी मास्टर जिनके घर मे घुस जाते है और 12 बजे उनके कमरे की तरफ दबे पांव बढ़ते है
अब आगे
खान बाबा और असलम मास्टर जी के कमरे के बाहर जाके आंखों ही आंखों में एक दूसरे को इशारा करते है और हाथ मे चाकू लेकर एक दम से कमरे का दरवाजा तोड़ते हुए अंदर घुस जाते है। दरवाजा टूटने की आवाज़ सुन कर मास्टर जी और उनका परिवार एक दम से डर कर उठ जाते है। मास्टर जी उन दोनों को पेचन माही पाते क्यों कि उन्होंने अपना चेहरा ढका हुआ था।
मास्टर - कौन हो तुम लोग और ये क्या तरीका है किसी के घर मे घुसनके का।
असलम- का रे मास्टर बहुत बड़ा जासूस बन रहा है। आज तेरी सारि जासूसी तेरे पिछवादे से निकलते है।
मास्टर जी - ये क्या तरीका है किसी महिला और बच्चों के सामने बात करने का। निकल जाओ यह से वरना अपनी जिंदगी की बर्बादी के जिम्मेदार तुम खुद होंगे।
खान बाबा - ओह्ह तेरी की साला एक मामूली सा मास्टर और इतना घमंड अपनी ताकत पर।
तभी बराबर में बच्चों के साथ डरी सहमी सी सावित्री देवी बोल पड़ी - देखो तुम्हे जो कुछ भी ले जाना है ले जाओ लेकिन मेरे पति और बच्चों को बख्श दो।
तब उन दोनों का ध्यान सावित्री और बच्चों की तरफ गया।
असलम - खान बाबा ई देखा ससुरे मास्टर की लुगाई तो बहुत ही खबसूरत बही।
मास्टर जी चिल्ला कर और सुमित्रा और बच्चों को अपने पीछे छुपा कर- उसके बारे में एक बार और तेरी जबान से कुछ गलत निकला तो वो पल तेरी जिंदगी की आख़िरी गलती होगी।
असलम - अबे 2 टके के मास्टर तेरी इतनी हिम्मत की तू असलम के सामने चिल्ला कर बात करे। साले असलम से चिल्ला के बात करने वाला जिंदगी में कभी बात करने लायक नहीं रहता।
मास्टर जी- हा हा हा बच्चे लगता है कि तू मुझे सिर्फ एक मास्टर के तौर पर ही जानता है। तुम्हे क्या इस गांव में किसी को नही पता कि में एक रिटायर फौजी भी हु। काम उम्र में ही फौज में भर्ती हो गया था तो जल्दी रिटायर भी हो गया जिससे किसी को नही पता चलता जैसे तुम भी धोखा खा गए।
इतना सुनना था कि खान बाबा और असलम दोनो एक दूसरे का मुँह देखने लगे गए। उन्हें लगा कि लाला ने उन्हें धोखा दिया है। लेकिन अब क्या कर सकते थे जो करने आये थे वो तो करना ही था यानी मास्टर के परिवार सहित खत्म करना। तभी खान बाबा बोलता है कि
खान बाबा - अरे तू जो कोई भी हो मास्टर या फौजी लगता है कि तूने हमे कोई छोटा मोटा चोर उचका समझ लिया है। तो थोड़ा सा हम से भी मिल लीजिये सरकार।
असलम खान बाबा की तरफ इशारा करके ये है हिंदुस्तान के सबसे सिर दर्द बने हुए बादशाह खान जिन्हें सब प्यार से नही बल्कि दहशत से खान बाबा बुलाते हैं। और नाचीज़ को कहते है असलम, खान बाबा का हमसाया।
इधर ये लोग बात कर ही रहे थे कि सुमित्रा ने अपने एक बेटे को साइड वाली खिड़की जो कि पीछे पहाड़ी के रास्ते में खुलती थी उसमें से बाहर भेज दिया जो अजय था।
इतने में ही खान बाबा ने अपनी साइलेंसर लगी पिस्तौल से खिड़की की तरफ फायर कर दिया लेकिन अजय तब तक बाहर निकल चुका था और पहाड़ी पर भागता हुआ जा रहा था कि अचानक उसका पैर फिसला और वो पत्थर से टकरा कर वही बेहोश हो गया।
इधर घर के अंदर पिस्तौल से हुआ फायर देखते ही सुमित्रा तो डर के मारे बेहोश हो गयी और मास्टर जी ने खान पर जम्प लगा दी लेकिन असलम ने बीच मे ही एक किक मार कर उन्हें साइड में गिरा दिया। गिरते ही मास्टर जी का सिर पलंग की साइड में लगा जिससे उनके सिर से खून बहने लगा और उन पर हल्की सी बेहोशी छा गयी। इसका फायदा उठा कर खान और असलम ने मास्टर और उनकी बीवी को पलंग से बांध दिया और रसोई से गैस सिलेंडर ला कर रख दिया।
खान बाबा ने असलम से विजय को भी वही बांधने को बोला लेकिन असलम ने एक जहरीली मुस्कान के देते हुए कहा कि इस देश भक्त फौजी की औलाद को हम इस देश का सबसे खुंखार आतंकवादी बनाऊंगा जो हमारे बुढ़ापे में हमे काम कर खिलाया करेगा।
इतना सुनते ही दोनों राक्षसों की तरह हँसने लगे। फिर उन्होंने विजय को बेहोश करके अपने साथ लिया और दरवाजे के पास पहुँच कर गैस सिलेंडर में गोली मार दे जिससे पूरे घर में आग लग गयी और मास्टर और उनकी बीवी उसमे जलकर खाक हो गए।
अगला अपडेट कल आएगा अगर
हम जिंदा रहे तो

Pata nhi kyu ye expected lag rha tha but jo bhi ho mja aa rha hai
 
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Mayaviguru

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अब तक आपने पढ़ा के कैसे मास्टर जी के वहाँ असलम और खान बाबा हमला करते है जिसमे सुमित्रा अजय को तो भगा देती है लेकिन खुद को और अपने पति को नही बचा पाती। और असलम दोनो को मारकर विजय को अपने साथ ले जाता है।
अब आगे
अजय को जब होश आता है तो वो अपने आप को खाई के नजदीक पता है। उसे कुछ समझ मे न आया कि वो यह कैसे पहुँचा। आप ये कह सकते हो कि चोट की वजह से उसकी यददाशता चली गयी थी। वो उठता है और गाँव की तरफ चल देता है और जैसे ही वो अपने जलते हुए घर के करीब पहुँचा तो उस जलते हुए घर को देख कर उसे कुछ 2 धुंधला सा सब याद आता चला गया कि उसके और उसके परिवार के साथ क्या 2 हुआ था। लेकिन फिर अचानक उसके सिर में फिर से दर्द सुरु हो गया और वो उसके चलते एक तरफ को भागत चला गया। और जब उसे फिर से होश आया तो वो खुद को गांव के बाहर शमशान में पाता है। उधर अगले दिन लाला और मुनीम गांव में खबर फैला देते है कि रात को गैस सिलेंडर फटने से मास्टर और उनका पूरा परिवार जल कर खाक हो गया है।
वर्तमान में
अजय - बाबा ये थी मेरी दुख भारी आप बीती जिसे हर 15 अगस्त को याद करते हुए मुझे अपने माँ बाबा और भाई की याद आती है जिसकी वजह से में अपने गम को भुलाने के लिए अपने आप को इस शमशान में जलती चिताओं की आग से खुद को तपाता हु।
बाबा - बेटा ऐसे कब तक तुम अपने आप को इन चिताओ की आग से जलाते रहोगे। तुम्हे अपने माँ बाबा और भाई के हत्यारों से बदला लेना चाहिए।
अजय - बाबा बदला तो जब लू न जब मुझे उनकी शकले याद हो। हर बार कुछ धुंधली सी तस्वीर दिमाग मे आती तो है और जब में दिमाग पर ज्यादा जोर डालता हु तो सिर में इतना तेज दर्द होता है कि मै बेहोश हो जाता हूँ।
बाबा - बेटे अगर मेरी मानो तो अपने मन को शांत रखो। और दिमाग पर ज्यादा जोर न डालते हुए उसे किसी और जगह लगाओ।
अजय - वो कैसे बाबा।
बाबा - तुम चलो मेरे साथ और जो 2 में कहूँ वही करना ज्यादा मत सोचना।
फिर वो बाबा अजय को लेकर हवेली में ठाकुर के पास आते हैं।
बाबा - राम राम ठाकुर साहब।
ठाकुर - राम राम बाबा और बताओ आज कैसे याद कर लिया हवेली को और ये छोरा कौन है तुम्हारे साथ मे।
बाबा - ठाकुर साहब ये मेरा भतीजा है शिवा। कल ही आया है काम ढूंढने तो मै इसे आपकी शरण मे ले आया।अगर आप इसे अपने पास काम मे रख ले तो बड़ी मेहबानी होगी इस बूढ़े पर।
(अजय को मै अब शिवा लिखूंगा)
ठाकुर शिवा को सिर से पाँव तक घूरते हुए - बाबा शरीर से तो छोरा ठीक लगे है लेकिन ईमानदार भी है के नही। तुम्हारे कहने से इसे हवेली में रख तो लूंगा पर इसे समझ देना की अगर कुछ भी गलत करने का सोच भी तो इसकी सोच के अगले पल ही इसका सिर इसके धड़ से अलग होगा।
बाबा - कैसी बात करते हैं ठाकुर साहब, ये तो आप की मेहरबानी होगी इस पर और ये नमकहराम नही नमकहलाल नौकर बनकर रहेगा इस हवेली में। जहाँ आपका पसीना गिरेगा वहाँ ये खून बहा देगा।
शिवा की तरफ देखते हुए- रे बोलता क्यों नही ठाकुर साहब से। और चरण छू कर काम धंदे पर लग जा। और ध्यान रखियो ठाकुर साहब के दोस्त काम और दुश्मन ज्यादा है जिन्हें तुझे कम करने है।
शिवा ठाकुर के पैर छू कर - जैसा बाबा बोले है वैसा ही होगा सरकार।
ठाकुर खुश होते हुए- ठीक है ठीक है जाओ और घोड़ो के अस्तबल में जाके एक काला घोड़ा है जिसे हम अपनी बेटी के लिए तोहफे के रूप में लाये थे , उसे काबू में कर के दिखाओ। यूँ समझ लो कि ये तुम्हारी परीक्षा है।
शिवा अस्तबल की तरफ चल देता है और वहाँ पहुंच कर देखता है कि एक काले घोड़े को सात आठ लोगो ने चारों तरफ से रसियों से बांध कर पकड़ा हुआ है। शिवा उनके पास जाता है और उनसे दूर हो जाने को कहता है। वो जैसे ही घोड़े के पास जाता है तो घोड़ा उछल कर उसके सीने में अपनी अगली टांगे मारने को होता है लेकिन शिवा उन्हें हवा में ही पकड़ लेता है और इतनी जोर से झटका देता है कि घोड़े की पिछली टांगे भी जमीन का साथ छोड़ देती है और घोड़ा पीठ के बल जमीन पर गिर जाता है। जैसे ही घोड़ा उठाने की कोशिश करता है, शिवा फौरन उसकी गर्दन के दोनों तरफ अपने घुटने टेक कर बैठ जाता है और उसके मुंह पर एक जोरदार मुक्का मारता है जिससे घोड़ा दुबारा जमीन पर गिर कर धूल चाटता नजर आता है। ऐसा 2 बार होता है और घोड़ा फिर उठाने की कोशिश नही करता। फिर शिवा घोड़े की लगाम पकड़ता है और उसे खड़ा होने को कहता है। घोड़ा एक दम किसी वफादार कुत्ते की तरह उठ जाता है। शिवा फिर ठाकुर को बोलता है कि वो आये और उसकी सवारी करे लेकिन ठाकुर कहता है कि ये अभी कब्जे में कहा आया हैं तब शिवा उस घोड़े को जिसका नाम बादल होता है कहता है कि बादल जेक ठाकुर साहब के पैरों पर सिर रखो तो बादल एक दम से ठाकुर के पास जाके उसके पैरों पर अपना सिर रख देता है। ठाकुर और उसके बाकी सभी नौकर ये देख कर हैरान हो जाते है कि ये घोड़ा है या पालतू कुत्ता। ठाकुर के पूछने पर शिव कहता है कि सरकार मार से तो भुत भी भाग जाते है ये तो जिंदा घोड़ा ही है।
दोस्तो अब कल मिलते है ये देखने के लिए की विजय का क्या हुआ।
Lounda to dumdar nikla dekhte hai aage kis mod par jati hai ye story
 

firefox420

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ye muzhe aapki kahani mein bada jhol lag raha hai .. aka bhiya .. pehle to simple si starting thi magar ab har character se related situation complex hoti jaa rahi hai .. Vijay ka character to aapne bilkul khalnaayak wala bana diya hai .. ye to pura psycho sa hai .. aur wo dusri taraf Ajay shareef sa launda ..
 

Mayaviguru

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Lounda thakur ki
अब तक आपने पढ़ा कि कैसे कृष्णा इंस्पेक्टर वर्मा को अपने जाल में फसा कर उसे एक ऐसे तिराहे पर खड़ा कर देता है जहाँ उसे फैसला लेना होना की वो किसे मारे अपने दुश्मन को, अपने आप को या फिर अपने प्यार को जो इस वक़्त एक ऐसे नशे की गिरफ्त में है जिसमे उसे सिर्फ अपने जिस्म की भूख ही दिखाई दे रही है।
अब आगे
कृष्णा ने अभी दारू का एक घुट भरा ही था कि कमरे में 2 आवाजें एक साथ गुंजी पहली गोली चलने की और दूसरी निधि की। गोली चलते ही वर्मा ने कृष्णा पर भी गोली चलानी चाही लेकिन पिस्तौल खाली था जिसे एक तरफ फैक वर्मा ने जल्दी से निधि को लपक कर अपने सीने से लगा लेता है और रोते हुए निधि आए बार 2 माफी मांगने लगता है। निधि अपने अंतिम समय मे वर्मा के चेहरे को प्यार से सहलाते हुए मर जाती है। वर्मा चीखते हुए
वर्मा - निधि मुझे माफ़ कर देना में तुम्हे उस नरक की जिंदगी नही जीने दे सकता था। फिर कृष्णा को देखते हुए तू बहुत खुश हो रहा होगा लेकिन याद रख ऊपर वाला जब भी अपना हिसाब बराबर करने पे आएगा तो तुझे नरक में ही जगह मिलेगी।
कृष्णा हस्ते हुए - तू मेरी फिकर मत कर वर्मा अपनी कर क्योंकि एक पुलिस ऑफिसर होते हुए भी अभी 2 तूने एक कत्ल किया है जिसका में चश्मदीद गवाह हु। और अगले 15 मिनट में यहाँ पुलिस आ जायेगी और तू होगा जेल में।
इतना सुनते ही वर्मा गुस्से से भर जाता है और कृष्णा पर हमला कर देता है लेकि उस इंजेक्शन के असर के कारण वो वही गिर जाता है।
कृष्णा - अरे में तुझे एक बात बताना भूल गया कि वो जो इंजेक्शन तूने खुद को लगाया था जहर वाल समझ के उसमे जहर नही था बल्कि हाई ड्रग था। जो इंसान के अंदर की हवस को कई गुणा बढ़ा देता है। और जब तेरा मेडिकल होगा तो यही बात सामने आएगी की तुम दोनों ये ड्रग लेते थे और आज कुछ ज्यादा होने की वजह से तू काबू से बाहर हो गए और तूने अपनी ही मंगेतर को गोली मार दी।
इतने में वहाँ पुलिस आ जाती है जिसमे रिश्वतखोर इंस्पेक्टर गुफरान था। वो वर्मा को गिरफ्तार करके ले जाता है और जाते 2 कृष्णा उसे कुछ इशारों में कहता है जिसे समझते हुए गुफरान अपनी गर्दन हा में हिलाते हुए वर्मा को ले जाता है।
अगले दिन अखबार और समाचारों में ये खबर थी कि इंपेक्टर वर्मा ड्रग डीलर था और खूनी था। जब उसे पुलिस पकड़ कर ले जा रही थी तो उसने भागने की कोशिश की जिसमे उसका इंपेक्टर गुफरान के द्वारा एनकाउंटर हो गया।
इस खबर को सुनते ही खान बाबा और असलम उछल पड़ते है और कृष्णा की तरफ देखते है जो वह बैठा दारू पी रहा था।
असलम कृष्णा को गले लगाते हुए - देखा खान मैंने कहा था न कि अपना शेर सब संभाल लेगा।
इधर ठाकुर की हवेली पर शिवा अपनी सेवा और तेज दिमाग के चलते ठाकुर का विश्वास पात्र बनता जा रहा था। लेकिन बात थी जिसे ठाकुर की तेज आँखे भी पकड़ नही पाई की शिवा रोज़ बिना नागा उन शमशान वाले बाबा से मिलने जाता था और वहाँ करीब 1 घंटा रुक कर वापस आता था।
एक दिन ठाकुर ने शिवा को बोला - तुम्हे मेरे साथ शहर चलना है, गाड़ी निकलो। शिवा ठाकुर के साथ गाड़ी में बैठा और वो दोनों शहर की तरफ चल दिये। यहां एक कॉलेज में ठाकुर की बेटी पढती है जिसका आज वार्षिक महोत्सव था जिसमे ठाकुर को भी बुलाया गया था। कॉलेज में पहुँचने पर ठाकुर शिवा को अपने साथ लेकर स्टेज के सामने बैठ जाता है जबकि शिवा उसके पीछे खड़ा रहता है। फिर वार्षिक महोत्सव शुरू होता है और कॉलेज के विद्यार्थी अपने हुनर का प्रदशर्न करते है। आखिरी में मंच पर एक लड़की आती है और अपना नृत्य दिखती है जिसे देखते ही शिवा का दिल जोरो से धड़कने लगता है। वो उसमे इतना खो जाता है कि उसे पता ही नही चलता कि वो नृत्य कब का खत्म हो चुका है और ठाकुर को मंच पर बुलाया जाता है। जब ठाकुर उसे हिलाता है तब उसे होश आता है और वो ठाकुर के पीछे 2 मंच पर चल देता है।
बाकी का कल बताता हूं कि आगे क्या हुआ।
Thakur ki beti ki to shiva lekar rahega
Sahi hai mast chal rhi story
 
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Mayaviguru

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Krishna ne inspector ke sath mast khel khela
Mast scene tha mja aa gya ye to bhoukal ho gya
 

Naughtyrishabh

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बेहद ही शानदार और जबरदस्त अपडेट भाई ।
बहुत खूब superb

तो निधि भी गयी और इंस्पेक्टर वर्मा भी ।
खान और असलम दोनों खुश ।
शिवा(अजय) बन गया ठाकुर का विश्वासपात्र और दिल धड़का भी तो उसी की बेटी पर ।
बड़ा ही बेहतरीन अपडेट ।
मज़ा आ गया भाई वाह ।

और अब ,
आगे का इंतजार


अब तक आपने पढ़ा कि कैसे कृष्णा इंस्पेक्टर वर्मा को अपने जाल में फसा कर उसे एक ऐसे तिराहे पर खड़ा कर देता है जहाँ उसे फैसला लेना होना की वो किसे मारे अपने दुश्मन को, अपने आप को या फिर अपने प्यार को जो इस वक़्त एक ऐसे नशे की गिरफ्त में है जिसमे उसे सिर्फ अपने जिस्म की भूख ही दिखाई दे रही है।
अब आगे
कृष्णा ने अभी दारू का एक घुट भरा ही था कि कमरे में 2 आवाजें एक साथ गुंजी पहली गोली चलने की और दूसरी निधि की। गोली चलते ही वर्मा ने कृष्णा पर भी गोली चलानी चाही लेकिन पिस्तौल खाली था जिसे एक तरफ फैक वर्मा ने जल्दी से निधि को लपक कर अपने सीने से लगा लेता है और रोते हुए निधि आए बार 2 माफी मांगने लगता है। निधि अपने अंतिम समय मे वर्मा के चेहरे को प्यार से सहलाते हुए मर जाती है। वर्मा चीखते हुए
वर्मा - निधि मुझे माफ़ कर देना में तुम्हे उस नरक की जिंदगी नही जीने दे सकता था। फिर कृष्णा को देखते हुए तू बहुत खुश हो रहा होगा लेकिन याद रख ऊपर वाला जब भी अपना हिसाब बराबर करने पे आएगा तो तुझे नरक में ही जगह मिलेगी।
कृष्णा हस्ते हुए - तू मेरी फिकर मत कर वर्मा अपनी कर क्योंकि एक पुलिस ऑफिसर होते हुए भी अभी 2 तूने एक कत्ल किया है जिसका में चश्मदीद गवाह हु। और अगले 15 मिनट में यहाँ पुलिस आ जायेगी और तू होगा जेल में।
इतना सुनते ही वर्मा गुस्से से भर जाता है और कृष्णा पर हमला कर देता है लेकि उस इंजेक्शन के असर के कारण वो वही गिर जाता है।
कृष्णा - अरे में तुझे एक बात बताना भूल गया कि वो जो इंजेक्शन तूने खुद को लगाया था जहर वाल समझ के उसमे जहर नही था बल्कि हाई ड्रग था। जो इंसान के अंदर की हवस को कई गुणा बढ़ा देता है। और जब तेरा मेडिकल होगा तो यही बात सामने आएगी की तुम दोनों ये ड्रग लेते थे और आज कुछ ज्यादा होने की वजह से तू काबू से बाहर हो गए और तूने अपनी ही मंगेतर को गोली मार दी।
इतने में वहाँ पुलिस आ जाती है जिसमे रिश्वतखोर इंस्पेक्टर गुफरान था। वो वर्मा को गिरफ्तार करके ले जाता है और जाते 2 कृष्णा उसे कुछ इशारों में कहता है जिसे समझते हुए गुफरान अपनी गर्दन हा में हिलाते हुए वर्मा को ले जाता है।
अगले दिन अखबार और समाचारों में ये खबर थी कि इंपेक्टर वर्मा ड्रग डीलर था और खूनी था। जब उसे पुलिस पकड़ कर ले जा रही थी तो उसने भागने की कोशिश की जिसमे उसका इंपेक्टर गुफरान के द्वारा एनकाउंटर हो गया।
इस खबर को सुनते ही खान बाबा और असलम उछल पड़ते है और कृष्णा की तरफ देखते है जो वह बैठा दारू पी रहा था।
असलम कृष्णा को गले लगाते हुए - देखा खान मैंने कहा था न कि अपना शेर सब संभाल लेगा।
इधर ठाकुर की हवेली पर शिवा अपनी सेवा और तेज दिमाग के चलते ठाकुर का विश्वास पात्र बनता जा रहा था। लेकिन बात थी जिसे ठाकुर की तेज आँखे भी पकड़ नही पाई की शिवा रोज़ बिना नागा उन शमशान वाले बाबा से मिलने जाता था और वहाँ करीब 1 घंटा रुक कर वापस आता था।
एक दिन ठाकुर ने शिवा को बोला - तुम्हे मेरे साथ शहर चलना है, गाड़ी निकलो। शिवा ठाकुर के साथ गाड़ी में बैठा और वो दोनों शहर की तरफ चल दिये। यहां एक कॉलेज में ठाकुर की बेटी पढती है जिसका आज वार्षिक महोत्सव था जिसमे ठाकुर को भी बुलाया गया था। कॉलेज में पहुँचने पर ठाकुर शिवा को अपने साथ लेकर स्टेज के सामने बैठ जाता है जबकि शिवा उसके पीछे खड़ा रहता है। फिर वार्षिक महोत्सव शुरू होता है और कॉलेज के विद्यार्थी अपने हुनर का प्रदशर्न करते है। आखिरी में मंच पर एक लड़की आती है और अपना नृत्य दिखती है जिसे देखते ही शिवा का दिल जोरो से धड़कने लगता है। वो उसमे इतना खो जाता है कि उसे पता ही नही चलता कि वो नृत्य कब का खत्म हो चुका है और ठाकुर को मंच पर बुलाया जाता है। जब ठाकुर उसे हिलाता है तब उसे होश आता है और वो ठाकुर के पीछे 2 मंच पर चल देता है।
बाकी का कल बताता हूं कि आगे क्या हुआ।
 

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