Adultery तेरे प्यार मे.... (Completed)

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Akuma

My power is Absoulute
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चाची- झूठ मत बोल . तेरे मन को पढ़ रही हूँ मैं . तुझे लालच था सोने से ज्यादा पाने का पर तू ये नहीं जानती की तू क्या पाना चाहती थी . और तू कबीर रिश्तो का बोझ इतना भी ना उठाना चाहिए की रिश्ते बोझ बन जाये . परिवार को थाम कर रखने की हसरत ने तुझे इतना झुका दिया की फिर तू कुछ भी देख नहीं पाया कुछ भी समझ नहीं पाया. कितने इशारे दिए तुझे की शांति से रह ले जी अपनी जिन्दगी पर तू नहीं माना तुझ को भी वही बिमारी की खंडहर का सच क्या है , ले देख ले खंडहर का सच क्या है . मैं हूँ खंडहर का सच , मैं हूँ वो जो तुम सब के सामने तो था पर कोई देख नहीं पाया . मैं हूँ सोने की मालिक , नहीं ये ठीक नहीं होगा मैं हूँ सोने की कैदी जिसने तुम्हारे माँ-बापों के चुतियापे की वजह से अपनी कैद से मुक्ति पाई. लालच इंसानी फितरत का गुण . एकांत बरसो से आदत थी उस एकांत की . कभी सोचा नहीं था की कैद से आजादी मिलेगी पर फिर तीन दोस्त उस खंडहर में आने लगे. जोश से भरे . घंटो फिर दिन रात वही पर डेरा डाले रहते वो लोग. उनकी दखलंदाजी खास पसंद नहीं थी पर फिर सुनैना ने उस चीज को पहचान लिया जो छिपी थी सोना. लालच ने आकर्षित कर लिया उनको . सुनैना जान गयी की वहां पर कोई चौथा भी है . उसे जूनून था किवंदिती को सच करने का . मुझे आजादी चाहिए थी . हमने एक सौदा किया सारा सोना उसका और बदले में मैं यहाँ से आजाद हो जाउंगी. उसने हाँ भर ली मैंने कायदे से सब कुछ उसे सौंप दिया पर जब शर्त उसके सामने आई तो उसके कदम डगमगा गए. इंसानों की थूक कर चाटने की आदत जो ठहरी. पर वो अकेली नहीं थी उसके साथ था बिशम्भर जो सोने के लिए कुछ भी करने को तैयार था मैंने उसे लालच दिया उसने लालच लिया . आदमखोर मेरी कैद का प्रथम रक्षक था जो छिपा हुआ था बरसो से जंगल में पर बिशम्भर ने उसका शिकार किया पर बदले में उसे क्या मिला वो खुद संक्रमित हो गया . और फिर सिलसिला शुरू हुआ . महावीर ने मेरा सच जान लिया था . वो उत्सुक था वो जानता था की एक आदमखोर ही मेरा सामना कर सकता था सुनैना के लाकेट ने उसे राह दिखाए महावीर ने सब जानते हुए भी मेरा आह्वान किया पर वो नहीं जानता था की मेरा असली रूप क्या है . वो ये नहीं जानता था की मैं आजाद थी . पर संगती का असर , रमा को चुदते देख उसके मन में भी हिलोरे जाग गयी . उसने रेणुका पर नजर डाली पर वो ये नहीं जानता था की रेणुका तो रेणुका है ही नहीं वो मैं थी जिसने रेणुका का रूप ले लिया था . रेणुका को तो एक रात नशे में चूर रमा के पति ने ही मार दिया था . खैर मैं गलत नहीं मानती उस बात को , जब छोटा ठाकुर रमा को चोद सकता था तो रमा का पति क्यों नही चोद सकता था ठाकुर की पत्नी को .

ये मेरे लिए और एक नया खुलासा था , मेरे सामने रेणुका चाची की जगह जो थी वो रेणुका थी ही नहीं .

“कौन , कौन हो फिर तू ” मैंने बड़ी मुशकिल से कहा.


चाची- मैं ही तो हूँ वो जिसका जिक्र तुम मुझसे ही किया करते थे कबीर . मैं ही हूँ इस जंगल का सच मैं , मैं हूँ वो जिसका जिक्र कोई नहीं करता मैं हूँ जंगल की रानी. मैं हूँ वो जो तुझे चाहने लगी थी .मैं हूँ वो जो रोएगी तेरे जाने के बाद.
:claps: ye to bilkul kalpana ke pare tha, laga bhi nahi ki chachi ka sone se kuch connection ho sakta hai. bahut hi badia likha bhai ye bhaag. maja aa gaya
चाची- वाह रे इन्सान तेरी फितरत न्यारी, तू अभ्भी इसे छोड़ने की गुहार लगा रहा था . इस से पूछ तो ले की इसने नंदिनी को क्यों मारा , उस नंदिनी को जिसका दर्जा सबसे ऊपर था तेरे लिए. मैं बताती हूँ तुझे. नंदिनी और अभिमानु ने आदमखोर का तोड़ तलाश लिया था , जो संक्रमण महावीर की वजह से नंदिनी को लगा था उस से निजात पा सकती थी वो अंजू को ये बात बता चल गयी ये उस से वो तोड़ चाहती थी ताकि अपने असली यार को ठीक कर सके , और कौन था इसका यार तेरा चाचा , बड़ी आसानी से इसने सबलोगो का चुतिया काट दिया . जब ये रंगे हाथ चुदते हुए पकड़ी गयी तो इसने बलात्कार वाली कहानी गढ़ ली. इसकी वजह से ही रेणुका ने झगडा किया और उन्माद में जरनैल ने उसे मार दिया. रमा की बेटी को भी इसकी वजह से ही मरना पड़ा क्योंकि उसने इसकी चुदाई देख ली थी . अपने आप का दामन साफ़ रखने के लिए जरनैल और इसने उस फूल को कुचल दिया . तब मैंने उसे उसके किये की सजा दी पर नहीं जानती थी की वो कमबख्त संक्रमित था . बिशम्भर ने संभाल लिया उसे. छिपा लिया . ये हरामजादी इसने ही अभिमानु और नंदिनी को भड़काया , अभिमानु नंदिनी के संक्रमित होने से भड़का हुआ था , मौका देख कर इसने अपने ही भाई को मार दिया क्योंकि उसने इसे खंडहर का राज बताने से मना कर दिया वो जानता था की ये नीच किस्म की है . पर आज इसका किस्सा भी खत्म हो जायेगा.

daayan ke ye sach tha, aur aadamkhor kaise bana ye bhi samjh aa gya. aur sona aur daayan se juda tha to koi daayan ko udhar sone ke sath kaid karne ki wajah aur log bhi rahe honge. kya hume iska jawab milega

aage dekhte hai, ant ki aur badhte hue
 
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Ajju Landwalia

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Ek maha gatha ka ant ho gaya...................kitni din, kitni raate har pal dimag me Kabir, Nisha, Ray Sahab, Bhabhi Abhimanu Champa Anju Ruda Mahavir Sunaina aur sabhi characters.................. na raat ko dhain na din ko aaram

Chachi.........ek aisa character jo shuru se hi suspicious tha...........kai baar point out kiya maine aur any readers ne.........lekin majaal he Fauji Bhai kabhi hamari baato par dhyan de.......sire se nakaar dena........ya baat ko aisa ghuma dena aur ek naya suspense khada kar dena ki pichla to bhul jao aur isme dimag ki dahi karo...........

Aek paralaukik gatha, jisme aadmkhor, dayan aur lalach athah sone ka............ek aisa lalach jo sabkuch nigal gaya.....parivar, pyar dosti sabkuch..........

Sadiyo se har ek yudh ke tin hi karan rahe he JAR JORU AUR JAMEEN............yaha bhi vahi tin karan..........sona............chut...........aur samrajay

Kabir aur Nisha ant me mil gaye..............lekin abhi tak yah khulasa nahi kiya Fauji Bhai ne ki Kabir ki aadamkhor wali bimari thik huyi ya nahi..............ya ye bhi genetic rup se Kabir aur Nisha ke bachcho me aage badh jayegi............

Kuch bhi kaho jab jinda rahenge Kabir aur Nisha ko yaad rakhenge hum log..............


Fauji Bhai...............aap jaisa na koi he aur na hi koi hoga.....................

AGLI MAHAGATHA KA INTEZAR RAHEGA
 

Riky0007

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Ek maha gatha ka ant ho gaya...................kitni din, kitni raate har pal dimag me Kabir, Nisha, Ray Sahab, Bhabhi Abhimanu Champa Anju Ruda Mahavir Sunaina aur sabhi characters.................. na raat ko dhain na din ko aaram

Chachi.........ek aisa character jo shuru se hi suspicious tha...........kai baar point out kiya maine aur any readers ne.........lekin majaal he Fauji Bhai kabhi hamari baato par dhyan de.......sire se nakaar dena........ya baat ko aisa ghuma dena aur ek naya suspense khada kar dena ki pichla to bhul jao aur isme dimag ki dahi karo...........

Aek paralaukik gatha, jisme aadmkhor, dayan aur lalach athah sone ka............ek aisa lalach jo sabkuch nigal gaya.....parivar, pyar dosti sabkuch..........

Sadiyo se har ek yudh ke tin hi karan rahe he JAR JORU AUR JAMEEN............yaha bhi vahi tin karan..........sona............chut...........aur samrajay

Kabir aur Nisha ant me mil gaye..............lekin abhi tak yah khulasa nahi kiya Fauji Bhai ne ki Kabir ki aadamkhor wali bimari thik huyi ya nahi..............ya ye bhi genetic rup se Kabir aur Nisha ke bachcho me aage badh jayegi............

Kuch bhi kaho jab jinda rahenge Kabir aur Nisha ko yaad rakhenge hum log..............


Fauji Bhai...............aap jaisa na koi he aur na hi koi hoga.....................

AGLI MAHAGATHA KA INTEZAR RAHEGA
आप हवस भूल रहे हो, जिसके कारण अभिमानु और नंदिनी को जान गवानी पड़ी।

लालच के ऊपर हवास थी यहां, हवास रमा और अंजू की जिसने कइयों की जान ली, और कइयों को आदमखोर बनाया, सोना इन दोनो को नही चाहिए था।

रमा को सोने की जगह बस सोना पाने का ज्ञान चाहिए था जो उसकी हवस में दब गया,जबकि अंजू को चाचा की हवास का शिकार होना मंजूर था चाहे उसके लिए वो अपने भाई और भाभी की हत्या तक कर देती है।
 

stupid bunny

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Fauji bhai apna wadda kiya tha sare raaz kholenge story end karna sein oagela
prologue likho is story ka Kabir chutiya sein chacha chaudhary kaisa ban gaya bataoo
Champa ka shadi Mai woh aadamkhor kaun tha jisna humla kiya tha
Nisha ka character ki detail
Bhabhi ko kaisa maloom hua Nisha kidnaap hui hai
Kahi aisa to nahi Anju chachi / Dayan chutiya thi ki Nisha ko behoosh kuwa par Kiya aur uska behoshi ki halat mai uta kar Ghar lekar Gaye fir bhabhi Champa ko mara fir sone ke khadaan mai lekar Gaya
Siyar kaun tha aur uska Nisha sein kya samband tha
 

Riky0007

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कुछ चीजे साफ़ हो गयी थी . जंगल में जो भी क़त्ल हुए थे वो रक्त के लिए हुए थे कातिल जो भी रहा हो . पहले मैंने सोचा था की सोने की खान का राज खुल ना जाये पर सच तो ये था की रक्त की तृष्णा , रक्त चाहिए था चाचा की प्यास के लिए. खंडहर खामोश था कुछ लकडियो में जान बाकी थी जो चटक रही थी . एक बार फिर हम तहखाने में गए पर जैसा हमने छोड़ा था सब वैसा ही था .

मैं- हो न हो निशा सुनैना ने सोना खोजने की योजना को यही मूर्त रूप दिया होगा या फिर यही से उसने अपने टोने किये होंगे. और यही पर उसने सोने की कीमत चुकाई होगी.

निशा- कैसे मालूम हो की वो कीमत क्या थी .

मैं- वो कीमत श्राप थी . आदमखोर का श्राप . सोने की कीमत थी जिदंगी . अब ये श्राप किसका था क्यों था और ये सोना जो सुनैना ने चुराया, मेरी बात समझना चुराया उसका मालिक कौन था .

निशा- तुम किवंदितियो की बात कर रहे हो .

मैं- नहीं, मैं कहानी के उस पन्ने को तलाश रहा हूँ जो छिपा है . कहानी निशा, पुराने समय में मानो किसी ने भी ये सोना यहाँ पर छुपाया होगा. हो सकता है ये किसी लूट का हिस्सा हो. कोई भी रहा हो उसने अगर ये सोना छिपाया तो उसने कोई इंतजाम भी किया होगा उसकी सुरक्षा का .

निशा- कोई टोटका

मैं- ऐसा ही समझ लो और जब सोना सुनैना ने उठाया तो उसकी सुरक्षा जाग्रत हुई होगी.

निशा-कैसे मालुम हो ये सुनैना से जुड़ा कोई भी तो नहीं

मैं- है कोई ,

निशा- राय साहब

मैं- उसके आलावा भी कोई एक .

निशा- तो फिर देर किस बात की

मैं- अब कोई देर नहीं . अब तक इन लोगो ने हमसे खेला है अब हम खेलेंगे .

घर आने के बाद निशा भाभी के पास गयी . मैंने मौका देख कर चाची को पकड़ लिया और उसके होंठ चूसने लगा.

चाची- बहु आ गयी अब भी चाची ही चाहिए तुझे

मैं- तेरे जैसी कहाँ है वो मेरी जान . आज रात को आऊंगा तेरे पास

चाची- पागल है क्या निशा जाग गयी तो .

मैं- नहीं जागेगी पर तेरी जरुर लूँगा.

मैंने चाची की चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया . चाची कसमसाने लगी .

चाची अभी जा तू

मैं- नहीं रहने दे तेरे पास

चाची- तेरे पास ही तो हूँ , पर तुझे सब्र रखना होगा कभी मौका हुआ तो मना नहीं करुँगी.

तभी कुछ आहट हुई तो हम अलग हो गए. भाभी थी .

भाभी- पूरा दिन ही घूमते रहे आज

मैं- बस यूँ ही

भाभी- हाँ ठीक है न . ये ही तो दिन है

मैंने भाभी को साइड में आने का इशारा किया

भाभी- अरे कबीर, ऊपर से कुछ सामान लाना है जरा आओ

हम दोनों चोबारे की तरफ चल दिए.

भाभी- क्या बात है .

मैं- आपने एक बार कहा था की अंजू परिवार की सबसे बिगडैल लड़की है .

भाभी- अब क्यों पूछना है तुमको

मैं- आपने ऐसा क्यों कहा था .

भाभी- मैंने अंजू को किसी ऐसे के साथ देखा था जो कोई नहीं सोच सकता था .

मैं- महावीर , आपने उसके साथ देखा था न अंजू को आपतिजनक अवस्था में

भाभी- नहीं ,

मैं- तो फिर कौन

भाभी- रमा का पति . कैसे क्यों ये मैं नहीं जानती पर मैने दोनों को देखा था . अंजू को कच्ची उम्र से ही ये चस्का लग गया था पर जैसे जैसे उसको समझ आई अब वो बदल गयी है.

मैं- पक्का बदल गयी है न

भाभी- देख वो सदा से स्वछन्द रही है उसके साथ हुए हादसे के बाद तो वो बहुत बदली है

मैं- रमा के पति के अलावा कोई और

भाभी- एक दो नौकर थे जिनको फूफा ने मरवा दिया था .

मैं- क्या इसी बात का बदला लेने के लिए रमा की बेटी के साथ ज्यादती हुई .

भाभी- मैं नहीं जानती उस बारे में .

मैं- ब्याह वाली रात मैंने असली आदमखोर की गंध महसूस की थी टेंट में . अगर वो आप नहीं थी तो फिर कौन था .

भाभी- नहीं जानती मैंने बताया तो था

मैं- एक बार मुझे आपको उस रूप में देखना है

भाभी- तुझे मेरी बात का यकीन नहीं

मैं- मैंने आज तक खूबसूरत आदमखोर नहीं देखा .

भाभी- उस रूप में आई तो मुझे रक्त की तलब होगी तुंरत

मैंने अपनी कलाई आगे की .

भाभी- नहीं मानेगा

मैंने ना में गर्दन हिलाई . भाभी दो कदम रख कर कमरे में थोड़ी सी अन्दर हुई और पलक झपकते ही मेरे सामने वो सच था . मैंने अपनी कलाई भाभी के नुकीले दांतों पर लगाई पर अगले ही पल मेरे सामने फिर से नंदिनी खड़ी थी

भाभी- मेरा खुद पर काबू है कबीर . और तेरा रक्त पीना पड़े वो दिन आएगा तो मैं उस से पहले ही मरना पसंद करुँगी.

भाभी ने मेरे सर पर हाथ फेरा .


“सच खूबसूरत होता है सच घिनोना होता है ” रुडा के शब्द मेरे मन में गूंजने लगे. एक संक्रमण ने भाभी के अस्तित्व को बदल कर रख दिया था . मैं इतना तो समझ गया था की महावीर इस बीमारी को बाहर से नहीं लाया था . कुछ भी करके मुझे सुनैना का इतिहास जानना था और उसके लिए अब मुझे अपने मोहरे का इस्तेमाल करना था . अगले दिन गाँव भर मे ये चर्चा फ़ैल गयी की छोटे ठाकुर लौट आये है . उनको इलाके में देखा गया. अफवाह में बड़ी शक्ति होती है . हमारे घर तक भी बात पहुंचनी ही थी . जीवन में पहली बार मैंने चाची के चेहरे पर पीलापन देखा , चिंता की लकीरे देखि . पूरा दिन उधेड़बुन में बीता और रात को जब हम कुवे पर घात लगाये हुए थे हमने पायल की झंकार सुनी ..........................
ये तो रह ही गया फौजी भाई

जीवन में पहली बार मैंने चाची के चेहरे पर पीलापन देखा , चिंता की लकीरे देखि . पूरा दिन उधेड़बुन में बीता और रात को जब हम कुवे पर घात लगाये हुए थे हमने पायल की झंकार सुनी ..................
 

stupid bunny

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ये तो रह ही गया फौजी भाई

जीवन में पहली बार मैंने चाची के चेहरे पर पीलापन देखा , चिंता की लकीरे देखि . पूरा दिन उधेड़बुन में बीता और रात को जब हम कुवे पर घात लगाये हुए थे हमने पायल की झंकार सुनी ..................
Yeh point mai update ka baad hi bol diya tha unhona kaha baad mai clear karenge
 
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adultery romance suspense thriller
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