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Incest जादुई लकड़ी (Completed)

Chutiyadr

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waqai mein maine apni jindagi mein itni sex stories padhi hai .. pata nahi kitne writers ki ek se ek uth - patang kahaniya padhi hai .. but kabhi bhi aapke jaise bakchod lekhak ki kahani likhne wali kala main aaj tak kisi bhi lekhak mein nahi dekhi .. sahi mein Dr. saab aap waqai mein bahut hi bade wale Ch***ya lekhak ho :wink: aur kahani to aur bhi jyaada ch***yape se bhari hui likhte ho .. par sala kuch bhi kaho padhne mein mazaa aata hai .. aapki Ch***ya kahaniya padh - padh kar saale hum sab paatak bhi Ch***ya ban gaye hai .. aur sabse kamaal ki baat to ye hai ki ab to apna ch***ya banwane mein bhi hum paathako ko mazaa aata hai .. jabki hum logo ko pata hai ki ye kahani full Ch***yape se bhari hui hogi .. but fir bhi lage pade hai .. enjoy karne mein :lol:

koi ni Dr. saab aap banate raho .. aur hum bante rahenge .. Ch***ya. ;)
:thanks: dhanywad firefox bro ,itane pyare sahbdo ke liye :D
kaha gayab the itane dino bad comment kar rahe ho :bat:
 

Chutiyadr

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वाह .. अपडेट तो बहुत ही बढ़िया है... बहुत अच्छा लगा पढ़ कर...
वैसे,

मेरे छाती में उगे हुए बालो पर वो अपने हाथो को फेर रही थी ..
इसे लिखना ज़रूरी था क्या :lotpot: :lotpot: ...

और आजकल आपका भी हीरो सिगरेट पीने लगा है... !!:wink:
:thanks: dhanywad bhaiya ji :)
ab wo chhati wali bat bas aa gai dimag me to likh diya ...aur cigarette to raj pahle se pita hai lekin aapke hero jaisa nahi wo to pura chain smoker hai ye bechara kabhi kabhi wala hai meri tarh :)
 

Chutiyadr

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pranam dr.shaab
ye mera phela comment he apki story ko yaha dekar baada aacha laga apka bada fan tha bhut phele se and
ye story bahut achi hogi aasha karta hu abhi tak padna start nahi kiya he
start karte he comment karta hu
:thanks: dhanywad zerus bhai :) asha hai ki ye story apko pasand aayegi
 

Chutiyadr

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अध्याय 56

आखिरकार वो ही दिन आ गया जब हमारी शादी हुई ,पूरा माहौल खुश था,शहनाइयां बज रही थी ,दिल झूम रहा था ..

पहले मेरी बारात गई और फिर दूसरे दिन निकिता दीदी की शादी होनी थी ,बारात आने ही वाली थी और में दीदी के कमरे में गया …

वो दुल्हन के परिधान में बैठी हुई बहुत ही प्यारी लग रही थी ..

मैंने सबसे उनसे अकेले बात करने के लिए थोड़ा समय मांगा…

“क्या हुआ भाई”

मुझे अपने चहरे को इतना गौर से देखते हुए दीदी ने कहा

“आप बहुत ही सुंदर लग रही हो “

मैंने उनके माथे को चुम लिया..

वो भी मुस्कुरा रही थी

“दीदी ,रोहित जैसा भी है आपसे बहुत ही प्यार करता है “

“जानती हुई इसलिए तो इस शादी के लिए राजी हो गई,और तू तो है ना सब सम्हालने के लिए “

वो मुस्कुराई

“सब का मतलब…”

मैं उन्हें देखकर मुस्कुराया

“सब का मतलब सब ..अगर रोहित मुझे खुश नही कर पाया तो “

मैं हल्के से मुस्कुराने लगा

“वो कर लेगा फिक्र मत कीजिये,हमारे बीच जो भी हुआ है आजतक उसे सब पता है ,लेकिन आज के बाद आप उसकी है,मैंने उसे ट्रेन किया है वो अब मानसिक और शारीरिक रूप से पहले से बहुत ही अच्छा और मजबूत इंसान बन चुका है..”

“जानती हु भाई लेकिन उसकी बस वो देखने वाली बीमारी उसके सर में ना चढ़े वरना करने की जगह बाद देखता रह जाएगा “

हम दोनो ही इस बात पर जोरो से हँस पड़े

“डोंट वरी वो सम्हाल लेगा अब “

“और भाई रश्मि को खुश रखना,ये बड़ी बात है की वो तुमसे इतना प्यार करती है,तू नसीबवाला है की तुझे समझने वाली बीबी तुझे मिल रही है और एक बात और अपने हैवान को अपने काबू में रखना ,बेचारी के लिए सब कुछ नया होगा “

मैंने मुस्कराते हुए हा में सर हिलाया और उनका माथा फिर से चूम लिया …

दीदी की बिदाई हो चुकी थी ,सही शादी के भागदौड़ में थके हुए थे..दूसरे दिन मेरी सुहागरात होनी थी ..


मुझे सुबह से ही अपने कमरे में घुसने नही दिया गया था ,रात में जब मैं वंहा पहुचा तो पूरा कमरा अच्छे से सजाया गया था..

अंदर मेरी दो बहने मेरा इंतजार कर रही थी …

“भाई पहले शगुन दो फिर हम जाएंगे “

निशा ने इठलाते हुए कहा ,मेरी जान रश्मि अभी सिकुड़ी हुई अंदर ही अंदर मुस्कुराते हुए बैठी थी ..

वही निशा और नेहा दीदी मेरे बिस्तर पर आराम से बैठी थी ,टॉमी भी मानो कोई शगुन की आस में उनके साथ ही बैठा हुआ था ..

“क्या शगुन चाहिए “

मेरी बात सुनकर दोनो एक दूसरे को देखने लगी

फिर निशा ने ही आगे की बात की

“भाई पूरा पर्स खाली करेंगे तब ही भाभी के पास आने देंगे वरना हम यही बैठे है “

“अच्छा तो बैठे रहो मेरी जान से प्यार करने में मैं शरमाउंगा क्या ??”

“हा तू तो बेशर्म ही है,चल चुप चाप शगुन निकाल “

इस बार नेहा दीदी ने मुझे झाड़ा “

“अरे तो बताओ तो की कितना ??”

मेरी बात सुनकर फिर से दोनो बहने एक दूसरे को देखने लगे ..

“मुझे एक शगुन चाहिए “निशा बोल उठी

“अरे मेरी जान मेरा जो भी है वो तेरा ही तो है तू बोल ना तुझे क्या चाहिए “

आखिर मैंने भी बोला

“मुझे चाहिये...कि ..आप भाभी से बेहद प्यार करोगे और साथ ही उनका पूरा ख्याल रखोगे “

निशा की मासूम सी आवाज मेरे कानो में पड़ी

मेरे और नेहा दीदी के साथ साथ रश्मि भी मुस्कुराने लगी थी

“अच्छा तुझे क्या लगता है की मैं तेरी भाभी को प्यार नही करूँगा “

मैंने निशा को छेड़ा

“मैं जानती हु की आप भाभी से कितना प्यार करते हो लेकिन फिर भी मुझे कसम दो “

निशा का बालहठ जारी था

“”तू बोले तो जान दे दु तेरी भाभी के लिए .”

मेरी बात सुनकर सब थोड़ी देर के लिए चुप हो गए

“अच्छा खाई में लटक कर भी दिमाग ठिकाने नही आया ना आपका ,चलो सीधे सीधे प्रोमिश करो मुझसे “

निशा की इस बात ने कहि ना कहि मेरा दिल ही जीत लिया था ,मैं उसके हाथ में अपना हाथ रखकर बोल पड़ा..

“”मैं तेरी भाभी से जान से भी ज्यादा प्यार करूँगा ,वो मेरी जान है उसके लिये कुछ भी करूँगा ओके ..”

मेरी बात सुनकर जन्हा निशा के चहरे में नूर आ गया वही रश्मि थोड़ी और सहम सी गई ,ना जाने घूंघट के अंदर का क्या माजरा था ..

“भाई अब शगुन दे और हमे बिदा कर “

नेहा दीदी ने साफ शब्दो में कहा

“अरे तो बोलो ना,अपनी बहनो के लिए तो जान हाजिर है “

“जान नही बस तू पर्स इधर दे “

मैंने मुस्कुराते हुए अपना पर्स उन्हें दे दिया…

“ छि कैसा कंगाल आदमी है ,इतनी बड़ी प्रॉपर्टी का मालिक हो गया है फिर भी जेब में सिर्फ 2 हजार रुपये “

“अरे दीदी क्रेडिट कार्ड रख लो जो लेना हो ले लेना “

“हमे बस नेंग के लिये चाहिए,अभी यंहा से निकलेंगे तो पूरे परिवार वाले पूछेंगे की भाई ने कितना दिया ,ये क्रेडिट नही केस होता है “

“ओह..कैश तो इतना ही है “

“कोई बात नही इतने में काम चला लेंगे “

दीदी ने पैसे अपने पास रख लिए और रश्मि के सर पर एक किस किया साथ ही मेरे माथे को भी चूमा ,वही निशा ने भी किया ..

“बेस्ट ऑफ लक भाई”

दोनो मुस्कुराते हुए वंहा से निकल गई ,साथ ही टॉमी को भी ले गयी ..

“अरे उसे तो छोड़ दो ,उसे कहा ले जा रही हो “

मेरी बात सुनकर दोनो ही हँस पड़ी वही मुझे रश्मि की भी हंसी की आवाज सुनाई दी ..

“आज इसे हम लोगो के पास रखने दे ओके..”

मैंने कोई बहस नही किया ,क्योकि अगर वो ऐसा कर रही थी तो कुछ सोचकर ही कर रही थी ...

ये परम्पराए भी अजीब होती है ,इतनी दौलत होते हुए भी मेरी बहने 2 हजार में खुश हो गई ..

खैर सामने रश्मि शरमाई और सहमी ही बैठी थी ,ऐसे जिनकी लव मैरिज हुई हो उन्हें ऐसे शर्माना तो शोभा नही देता लेकिन सच कहो तो ये शर्म एक औरत को और भी खूबसूरत बना देता है ..

मैंने धीरे से उसका घूंघट उठाया,वो हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी ..

“हाय मेरी जान कितनी खूबसूरत लग रही हो “

सच में वो बेहद ही सूंदर लग रही थी ,सुंदरता सिर्फ जिस्म की नही होती असल में सूंदर होना और सूंदर दिखना दोनो में फर्क है ,कोई दुनिया की नजर में सूंदर हो सकता है लेकिन आप को सूंदर ना लगे वही कोई दुनिया की नजर में सुंदर नही हो वो आपको बेहद ही सूंदर लगे ,जैसे की मा को उसके बच्चे हमेशा से सूंदर लगते है चाहे वो जैसे भी हो ..

प्रेम में होने से सुंदरता और भी बढ़ जाती है ,मैं प्रेम में था एक गहरे प्रेम में था और रश्मि भी शायद मेरे लिए वैसा ही महसूस करती थी..

मुस्कराती हुई रश्मि को देखकर मुझे समझ ही नही आ रहा था की मैं शुरू कहा से करू क्योकि मैं जो भी करता तो हो सकता है उसकी मुस्कराहट चली जाती और मै ये नही होने देना चाहता था ..

“इन लोग टॉमी को भी ले गए “

मैंने बात बढ़ाने के लिए कहा,हमारे रिलेशन को इतना दिन हो गया था फिर भी मुझे यंहा बैठकर नर्वस सी फिलिंग आ रही थी ..

मेरी बात सुनकर वो हंसी

“मैंने ही कहा था “

“वाट ? क्यो??”

“मुझे शर्म आती ना इसलिए “

“अरे तो टॉमी से क्या शर्माना “

वो फिर से हल्के से हंसी “

“नही पता लेकिन उसके सामने “

“उसके सामने क्या ?”

“वो मेरा देवर जो है “

रश्मि की बात सुनकर मुझे बेहद प्यार आया और मैंने उसके गालो को चुम लिया

“अच्छा वो तुम्हारा देवर है “

“अब आप मेरे पति हो “

मुझे अचानक ही ये याद आया की मैं सच में उसका पति हु ,ये हो गया था ..ये फिलिंग भी मेरे दिमाग से निकल गई थी ,पति होने की फिलिंग ..वो मेरी पत्नी थी इसका मतलब बहुत ही बड़ा था.एक जिम्मेदारी साथ थी ,और उसके साथ ही एक अधिकार भी ..

मैंने रश्मि को जोरो से जकड़ लिया था .

“क्या हुआ आपको “

वो मुझे आप कहने लगी थी ,मेरे चहरे में ये सुनकर मुस्कान आ गई

“तुम मेरी हो गई जान “

“मैं तो हमेशा से ही आपकी हु “

“लेकिन आज दुनिया के सामने भी हो गई ,”

“और आप भी अब मेरे हो “

“हा मेरी जान “

मैंने रश्मि के होठो पर अपने होठो को रख दिया ,झलकते हुए पैमानों से होठो का रस मेरे होठो में घुलने लगा था ,उसने भी अपनी बांहे मेरे गले में डालकर मुझे खुद को सौप दिया था..

हम आगे बड़े और तब तक नही रुके जब तक हम एक दूसरे में खो ही नही गए …..


*********

शादी को 10 दिन हो चुके थे ,हम कही घूमने जाने का प्लान भी कर रहे थे ,तभी नेहा दीदी ने मुझे एक गिफ्ट दिया ..

उसमे एक जादू के शो की कुछ टिकटे थी ,कोई बहुत बड़ा जादूगर शहर आया था,देश विदेश में उसका नाम था ,शहर के बड़े बड़े लोग भी वंहा पहुचे थे..

“अरे दी मुझे ये जादू वादु में कोई इंटरेस्ट नही है “

“देख हम सभी तो जा रहे है तू अपना देख ले लेकिन याद रख नही गया तो जीवन भर पछतायेगा “

उनकी बात मुझे थोड़ी अजीब लगी ,मैंने उनके आंखों में देखा कुछ तो अजीब था ...वही रश्मि और निशा बहुत ही एक्साइटेड थे क्योकि उन्होंने उस जादूगर के कुछ खेल यु ट्यूब और टीवी में देखा था,उन्होंने भी मुझे जाने के लिए बहुत फ़ोर्स किया आखिर मैं भी मान ही गया……

शो शानदार था और कुछ ऐसा था जो हजारों सवाल मेरे दिमाग में ला रहा था ,जैसे उस जादूगर ने खुद को ऊपर लटकाया था उसके हाथ पैर बांध दिए गए थे,मजबूत ताले लगा दिए गए थे,वही

नीचे बड़े बड़े मगरमच्छ से भरा हुआ शीशे की बानी टंकी थी ,अगर वो नीचे गिरता तो मगरमच्छ उसे खा जाते ,ऊपर की रस्सी को भी जला दिया गया था जो की एक मिनट बाद ही टूट जाती ,जिससे वो नीचे गिर जाता ..

अब उसे अपने हाथ और पैर के ताले खोलकर टंकी के बाजू में खुद जाना था वो भी सिर्फ 1 मिनट के अंदर वरना वो मारा जाता ,सभी अपनी उंगली दांत से दबा चुके थे ,समय निकल रहा था और वो अपने हाथो को खोलने में कामियाब रहा था लेकिन पैरो को नही खोल पा रहा था .1 मिनट पूरा होगा गया चारो तरफ लाल लाइट जलने लगी और आखिर रस्सी टूट गई ,जादूगर का शरीर सीधे उस टब में गिरा और चारो तरफ से चीखों की आवाज गूंज गई ,मेरा दिल ही जोरो से धड़का ,टब के अंदर के मगरमच्छो ने उसके शरीर के चिथड़े चिथड़े उड़ा दिए …

पूरा हाल शांत हो गया था तभी एक आवाज आय

“क्या आप मुझे यंहा देखना चाहते है”

ये आवाज हाल के पीछे से आई सही का सर उधर घुमा और तालियों की गड़गड़ाहट से फिर से पूरा हाल गूंज गया ..वो जादूगर हाल के एंट्री पॉइंट में खड़ा था .

सभी जैसे पागल हो गए थे और तालिया बजा रहे थे ,और ये तो बस एक ही आइटम था उसने कुछ और भी चीजे दिखाई जिसे देखकर मेरे दिमाग में बस एक ही सवाल गुंजा …

आखिर कैसे ….????
 
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