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Incest जादुई लकड़ी (Completed)

sharaabi

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Wating
 

Sona

Smiling can make u and others happy
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अध्याय 54

नेहा दीदी से मिलने पर उन्होंने साफ साफ शब्दो में कहा था की जो बीत गया उन चीजो पर अपना दिमाग मत लगाओ ,बल्कि आने वाले वक्त की सोचो …

मैं भी फिर भी थोड़ा कंफ्यूशन में था ,

“दीदी लेकिन क्या ये सही होगा की मैं उनसे ये सब छिपाऊँ ..”

मेरी बात सुनकर दीदी हँस पड़ी लेकिन जल्द ही संजीदा हो गई ..

“भाई झूल बोलकर रिश्ते की शुरुवात करना गलत है लेकिन तुमने झूठ नही बोला है बस सच को छुपाया है और जिस सच को तुमने छुपाया है वो अभी तुम्हारा सच है ,वो सच बदल सकता है ,तुम चीजो को और कॉम्प्लिकेटेड मत करो ,सच को ही बदल दो ,तुम रश्मि से प्यार करते हो या नही “

“जी दीदी करता हु “

“तो उसे बताओ की तुम उसे कितना प्यार करते हो ,पॉजिटिव तरीके से आगे बढ़ो ,उससे प्यार करो उसे अपने अहसासों का बयान करो ,और हा इन हवस के चक्रव्यूव से निकलो ये तुम्हे बर्बाद कर देगा ..”

उनकी बात सुनकर मैं थोड़ी देर के लिए चुप रहा ..

“दीदी लेकिन निशा और निकिता दीदी को माना करे करू ?“

“आज नही तो कल करना ही होगा भाई ,उन्हें भी अपने लाइफ में एक नई दिशा ढूंढनी होगी ,अभी तो ये सब चल जाएगा लेकिन जब रश्मि घर आएगी तब कैसे करोगे …”

“तो क्या करना चाहिए.??”

“मुझे पता है की निशा और निकिता दीदी दोनो ही तुझसे सच में प्यार करते है और वो बातो को समझेंगे ,तेरे और रश्मि के बीच कभी भी कोई भी दीवार नही बनेंगे ..इसलिए तुम उनकी तरफ से बेफिक्र रहो लेकिन भाई बाहर किसी से ही कोई भी संबंध मत बनाना,ऐसे किसी के भी साथ जो तुम्हे बाद में फंसा दे या फिर जिसका पता रश्मि को किसी भी तरीके से चल जाए ,खैर मैं आशा करती हु की तुम्हे इतनी तो समझ होगी ही “

मेरे मन में सामीरा का नाम कौंधा लेकिन फिर भी मैं चुप ही रहा

“जी दीदी “

“ओके भाई अब अपने काम पर ध्यान दे आखिर तू इतने बड़े साम्राज्य का मालिक बन गया है और अब तेरी शादी भी हो रही है तो तुझपर जिम्मेदारी भी बढ़ाने वाली है …”

उन्होंने मेरे गालो को खींचा ,

**************

घर में फिर से खुसिया जन्म लेने लगी थी ,मेरी और निकिता दीदी की शादी की खबरों से कोई भी अछूता नही रह गया था ,सब कुछ ठीक चल रहा था,मैं अपने नियमित दिनचर्या को अपना रहा था ताकि मैं ज्यादा शांत रह सकू और वासना की लहरे मुझे ना छुए ,तब भी मेरा जिस्मानी संबंध निशा और निकिता दीदी के साथ बना ही हुआ था ,मैं निकिता दीदी से उनकी शादी के बाद ये संबंध खत्म कर देना चाहता था ,लेकिन अभी भी रोहित पूरी तरह से तैयार नही था,उसे मैं पूरी ट्रेनिंग दे रहा था ,कोशिस यही थी की वो दीदी के साथ आगे की जिंदगी अच्छे से बसर कर सके ..

सामीरा मेरी भावनाओ को समझती थी फिर भी कभी कभी हमारे बीच संबंध बन जाया करते थे,मैं इतना सक्षम तो था की एक साथ कई लड़कियों के साथ संभोग कर सकू लेकिन मैं चाहता था की ये जितना कम हो सके उतना ही मेरे और रश्मि के रिश्ते के लिए अच्छा है,मैं ये सच छिपा कर ही रखना चाहता था ..

सामीरा वाली बात ऐसे भी किसी को नही पता था ,वही निशा और निकिता दीदी वाली बात सिर्फ 3नो बहनो को बस पता थी,इन तीनो के अलावा किसी से भी संबंध बनाने से मैंने परहेज कर लिया था ,क्योकि मैं अपने पिता की गलती नही दोहराना चाहता था ..

अब मेरी शादी होने वाली थी और मुझे मेरी जिम्मेदारी का भी अहसास होने लगा था ,तो मैं बीजनेस में ही ज्यादा समय देने लगा था ,मैं सामीरा के साथ बैठे हुए अपने अकाउंट्स देख रहा था तभी एक नाम में आकर मैं अचानक से रुक गया …

“डागा इंटरप्राइजेज..?”

मेरे मुह से निकला

“हा राज ये डागा साहब की कंपनी थी …”

“डागा साहब ???”

“हा डेनिस चरण डागा उर्फ DCD उर्फ डागा साहब ,अलग अलग कामो के लिए अलग अलग नाम “

“मतलब ..” सामीरा की बात सुनकर मेरे कान खड़े हो गए थे

“डेनिस चरण डागा ये नाम था उनके ड्राइविंग लाइसेंस और मतदाता पत्र का नाम ,अंडरवर्ड में वो DCD के नाम से जाने जाते थे और बिजनेस की दुनिया उन्हें डागा साहब बुलाती थी ..”

“ओह...मगर इनका हमारी कंपनी से क्या कनेक्शन था “

“कभी तुम्हारे पिता और भैरव सिंह दोस्त हुआ करते थे,भैरव सिंह को ऊपर उठाना था तो उसने कुछ गलत धंधे भी शुरू कर दिए तब तुम्हारे पिता जी ने भी उनका साथ दिया था,उस समय ऐसे किसी भी काम को करना डागा साहब की परमिशन के बिना अधूरा होता था ,वो उस समय अंडरवर्ड के किंग हुआ करते थे ,अभी से उनका संबंध तुम्हारे पिता से हुआ था ,लेकिन बात में उन्होंने अपने बुरे कामो को बंद करना शुरू किया और सिंपल बिजनेस करने लगे,सुना है वो दिल के बहुत ही बड़े इंसान थे जितना कमाते थे उतना ही गरीबो और जरूरतमंदो में बांट देते थे,पुराने क्रिमनल होने के बावजूद उनका लोगो में बहुत सम्मान था ,तुम्हारे पिता जी की उन्होंने बिजनेस को बढ़ाने में बहुत मदद की थी दोनो में एक खास कनेक्शन भी था ..”

“कैसा कनेक्शन “ मैं हर एक शब्द को ध्यान से सुन रहा था

“कुछ अजीब सा कनेक्शन था ,बाद में मुझे पता चला था की वो दोनो किसी बाबा के सानिध्य में है और वंहा को साधना कर रहे है ,तुम्हारे पिता ने तो ये सब जल्दी ही छोड़ दिया लेकिन डागा साहब ने साधना जारी रखी और इससे उनके बिजनेस में बहुत ही नुकसान भी होने लगा,लेकिन फिर भी जैसे वो इस चीज को ही अपना जीवन बना लिए थे ,सारी संपत्ति बेच कर दान दे दिया और कही गायब हो गए ...तब तक तुम्हारे पिता से उनका और उनकी कंपनी का कनेक्शन खत्म हो चुका था ,सालो पहले की बात है ..फिर भी जिन लोगो को उन्होंने कंपनी बेची थी उनके साथ हमारे व्यपारिक संबंध थे ,ये उन्ही के अकाउंट्स है बाद में उन्हें जब लगा की डागा नाम का असर जब मार्किट में नही रहा तो उन्होंने कंपनी का नाम बदल लिया ..”

“ओह …”

मैं कुछ सोच में पड़ा था ,मुझे जो समझ आया वो ये ही की पिता जी और बाबा दोनो एक साथ साधना करना शुरू किये थे ,लेकिन बाबा जी ने कभी भी मुझे इस बारे में नही बताया ...अजीब बात थी ,शायद वो अपनी पुरानी जिंदगी से बहुत ही आगे निकल चुके थे …

“क्या हुआ राज किस सोच में पड़ गए “

“नही नही कुछ नही बस ..”

“तुम बिजनेस की ज्यादा टेंशन मत लो ,अभी तुम अपनी शादी पर फोकस करो ,तैयारिया भी तो करनी होगी ..”

“हा वो भी है लेकिन अब शादी हो रही है तो जिम्मेदारियां भी तो बढ़ जाएगी “

मेरी बात सुनकर सामीरा हँस पड़ी

“तुम भैरव सिंह के दामाद बन रहे हो ,तुम्हे किस बात की फिक्र है ..”

उसने मुझे ये चिढ़ाते हुए कहा था

“हमारा बिजनेस उनसे ज्यादा है “

“हा तो क्या हुआ,पावरफुल तो वो ज्यादा है ना ..”

मैंने मुस्कुराते हुए सामीरा को देखा ,इसी पावर,पैसे और सेक्स के चक्कर ने मेरे पिता को डुबो दिया था ..मैंने मन ही मन कसम ली की मैं कभी इस गेम में नही फसुंग बल्कि अपनी जिंदगी में सादगी लेकर आऊंगा ,लोगो की मदद करूँगा जैसे बाबा जी किया करते थे,शक्तियां पाकर मेरे पिता ने जन्हा लोगो की जिंदगी बिगड़ दी और अपने परिवार से भी दूर हो गए वही बाबा जी ने उन्ही शक्तियों से बस दुसरो का भला ही किया,मेरे जैसे इंसान को इतना मजबूत और काबिल बना दिया …

और ये सब सोचते हुए मेरे चहरे में एक मुस्कान आ गई थी क्योकि आज मुझे जैसे अपने जीवन का असली मकसद मिल गया था ..
Nice update
 

Chutiyadr

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अध्याय 55

शादी को कुछ ही दिन बचे थे ,मैं निशा के साथ सोया हुआ था ,

“भाई शादी के बाद आप तो मुझे भूल ही जाओगे क्यो ?”

निशा ने मुझे ये पहली बार नही चिढ़ाया था बल्कि वो ऐसा बोलते रहती थी लेकिन आज मैं इस बारे में थोड़ा सीरियस था ..

“तू कहे तो शादी ना करू “

मेरे ऐसे जवाब से वो भी चौक गई ..

“मैंने ऐसा तो नही कहा भाई”

“तुझे दुखी करके मैं खुश कैसे रह सकता हु मेरी जान “

मैंने बड़े ही प्यार से उसके होठो को चूमा ,उसके आंखों में मैंने कुछ बूंदे देखी..

“तू मेरी बहन है जान,हमारे बीच जिस्मानी संबंध जरूर है लेकिन फिर भी मैं तुझे अपने बहन की तरह ही प्यार करता हु ,लेकिन तुझे सोचना होगा की मैं तेरे लिए क्या हु ..और शादी हो ने से कोई बहन को नही भूल जाता,तू मेरी गर्लफ्रैंड नही है जो शादी होने पर मैं तुझे भूल जाऊंगा ..”

वो सिसकते हुए मेरे सीने में आ समाई ..

मेरे छाती में उगे हुए बालो पर वो अपने हाथो को फेर रही थी ..

“भाई मैं भी आपको बहुत बहुत बहुत ज्यादा प्यार करती हु ,हा आप मेरे भाई हो लेकिन भाई से बहुत ज्यादा भी हो ,मैं ये नही कहती की आप शादी मत करो ,मुझे बेहद खुशी है की जिसे आप प्यार करते हो वो आपके जीवन में आ रही है ,रश्मि को मैं बेहद प्यार दूंगी और रही बात जिस्मानी संबंधों की तो …

मैं किसी और के साथ ये नही कर पाऊंगी ,बस मेरे लिए इतना करना होगा की मुझे हमेशा अपने पास रखना होगा,मैं आपसे कुछ भी नही माँगूँगी ,मैं समझती हु अगर आपको सिर्फ ये संबंध रश्मि के साथ रखना हो तो भी मुझे कोई दुख नही होगा लेकिन ...लेकिन मुझे किसी और के साथ जाने को मत कहना “

उसकी इस बात में मुझे इतना प्यार आया की मैंने उसके गालो को अपने हाथो में पकड़ कर उसके होठो में अपने होठो को डाल दिया..

थोड़ी देर तक उसके प्यारे से गालो को चूमता रहा,उसकी आंखों से अपने होठो को लगाया .और हल्के से उसके नाक पर अपने नाक को रगड़ा ,वो भी हल्के से मुस्कुराई ..

“निशा मैं तुझे हमेशा अपने साथ ही रखूंगा ,कोशिस करूँगा की शायद रश्मि हमारे रिश्ते को समझ पाए मुझे नही लगता की वो समझ पाएगी ,इसे लोग नाजायज और पाप ही समझते है और हमेशा ऐसा ही समझेंगे ,इसलिए दुनिया की मुझे कोई फिक्र नही है ,अगर ये नाजायज है और पाप है तो मैं ये पाप जीवन भर करूँगा,चाहे ये सब रश्मि से छिपकर ही क्यो न करना पड़े ..”

मैं उसके होठो में अपने होठो को डाल चुका था,वही मेरे मन में ये बात भी आ रही थी की मैं जो बोल रहा हु उसे करना कितना कठिन होने वाला है ,रश्मि मूर्ख नही थी हमारी शादी होने वाली थी और एक बार जब वो घर आ गई तो निशा के साथ मुझे जिस्मानी रिश्ते तोड़ने पड़ेंगे ,रश्मि इसी शहर में रहती थी मायके जाने वाला कोई सिस्टम ही नही था,पाप करना जितना आसान होता है उसे छिपाना उतना ही कठिन और कोई चीज तब तक पाप होती है जब तक उसे छिपकर किया जाए ….

मुझे रश्मि से बात करनी होगी ,मैं अपनी बहन को ऐसे नही छोड़ सकता ,अगर वो किसी से शादी नही करेगी ,हमेशा मेरे साथ रहेगी तो इसका मतलब साफ था की मुझे उसके जिस्मानी जरूरतों को भी पूरा करना होगा ,और छिपकर मैं कितना ही कर पाऊंगा...मुझे इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नही थी की रश्मि इसे समझ पाएगी लेकिन अगर किसी तरह उसे शादी के बाद ये सब पता चला तो शायद वो खुद को भी मार दे ,शायद वो इसे सहन ही नही कर पाए,वो मुझे छोड़ देती तो कोई बात नही थी लेकिन वो खुद भी इससे टूट जाएगी और ये मेरे लिए सबसे बड़ी बात थी जिसे मैं खुद इतना प्यार करता था मैं उसे टूटने कैसे दे सकता हु …

मैंने मन ही मन ये फैसला कर लिया था की शादी से पहले मैं उसे ये बात दूंगा …

************

शहर से बाहर एक पहाड़ी के ऊपर बैठा हुआ मैं सिगरेट के गहरे कस खीच रहा था ,सामने मेरे नजर में पास गहरी खाई दिख रही थी ,ये एक पर्यटन स्थल था जो की घुमावदार पहाड़ी रास्ते में बनाया गया था जन्हा लोग रुककर फ़ोटो वोट खिंचा करते थे,यंहा से पूरी खाई साफ साफ दिखाई देती थी साथ ही मेरा शहर भी ,और शहर से लगी नदी भी ..

इस मनोरम दृश्य को देखते हुए भी मेरे चहरे पर चिता के भाव गहरा रहे थे सिगरेट के कस इतने गहरे खीच रहा था की कोई भी देखकर कह सकता था की मेरे मन में कोई बहुत ही गहरा द्वंद चल रहा है ,मैं किसी बेहद ही गंभीर चिंता में डूबा हुआ हु ..

पास ही टॉमी भी टहल रहा था ,

जब मैं मुड़ा तो सामने से मेरी दिल की रानी,हुस्न की मलिका रश्मि आती हुई दिखी,आंखों में आंसू लिए और चहरे में ढेर सारा गुस्सा था ,उसके पीछे निशा चल रही थी उसके भी आंखों में आंसू था लेकिन चहरा मायूस था ..रश्मि मेरी ओर तेजी से बढ़ रही थी उसे देखते ही मेरे हाथो में रखी सिगरेट अपने आप ही नीचे गिर गई वो मेरे पास आ चुकी थी …

चटाक …

एक झन्नाटेदार थप्पड़ मेरे गालो में पड़ा,उसके हाथो इतने कोमल थे की मुझे किसी फूलों के टकराने सा आभास हुआ लेकिन वजन उसके हाथो में नही बल्कि उसकी भावनाओ में था..

आंखों से निर्झर आंसू बहने लगे थे,मेरी आंखे भी चंद बूंदों का रिसाव प्रारंभ कर चुकी थी ..

“तुम इतने बड़े कमीने निकलोगे मैंने सोचा भी नही था,जिसे मैंने अपने जान से ज्यादा चाहा वो ऐसा निकलेगा छि ...वो भी अपने ही बहन के साथ “

वो रोते हुए खाई के पास जाकर बैठ गई,एक बार मुझे डर लगा की कहि वो खुद ही ना जाए..

इसलिए मैं तुरंत ही उसके पास पहुचा और उसके पास बैठ गया ..उसकी दूसरी ओर निशा बैठ गई थी ..

रश्मि और निशा दोनो ही रो रहे थे ,मैं बस खाई को निहार रहा था ..

मैंने एक फैसला किया था रश्मि को अपने और निशा के बारे में बताने का फैसला ,मैं कुछ भी बोलने की हालत में नही था इसलिए मैं उसे और निशा को यंहा लेकर आया था ,और निशा ने उसे सब कुछ बता दिया था ,वो मानो किसी और ही दुनिया में खोई हुई बस रोये जा रही थी ..

ना जाने कितना समय ऐसे ही बीत गया था मैं उसे चुप कराने की कोशिस भी नही कर रहा था …..

“मैं ये शादी नही कर सकती “

आखिर उसने बोला ..

“मैं तुम्हारे फैसले का सम्मान करता हु रश्मि अगर तुम नही चाहती तो …”

मैं कुछ भी ना बोल पाया ..

लेकिन उसने अजीब आंखों से मुझे देखा

“मुझे इसकी उम्मीद नही थी राज की तुम ऐसे निकलोगे ..तुमने ये बात मुझसे छिपाई लेकिन ..लेकिन अब तुम मुझे यू ही जाने दे रहे हो ..”

उसकी बात से मैं चौक गया

“तो ..”

मैं हड़बड़ाया

“तो का क्या मतलब है ,जब हमारे परिवारों को ये पता है और उन्होंने रिश्ते के लिए मना नही किया तो हम क्यो पीछे हटे..”

इस बार मेरा सर पूरी तरह से चकराया ..

“वाट ..”

“ऐसे क्या अनजान बन रहे हो सबको पता है की तुम और मैं भाई बहन है ,हम दोनो के पिता एक ही है “

मैंने घूरकर निशा की ओर देखा ..वो सर गड़ाए हुए मुस्कुरा रही थी ,अब इस लड़की का मैं क्या करू,मैंने इसे क्या बोलने के यंहा लाया था और ये क्या बोल गई ..

“रश्मि …”अब मैं क्या बोलता मुझे समझ ही नही आ रहा था असल में रश्मि इसलिए गुस्से में थी की मैंने उसे ये बात नही बताई थी जबकि मुझे पहले से ही पता चल गया था ..

“अब कुछ बोलोगे भी ..”

वो मुझे गुस्से में देख रही थी ,मैंने एक गहरी सांस ली

“रश्मि बात बस इतनी नही है ..”

इस बार निशा ने मुझे सर उठाकर देखा उसने ना में सर हिलाया ..

लेकिन मैंने बोलना जारी रखा

“रश्मि ये बात अपनी जगह है लेकिन मैं तुम्हे यंहा कुछ और बताने के लिए लाया हु .”

“नही भइया “

निशा अनजान डर से कांप गई थी जो बात उसे बतानी चाहिये थी वंहा वो खेल गई थी ,मैं समझता था वो नही चाहती थी की एक सच में मेरे और रश्मि के रिश्ते में कोई दरार आये लेकिन मैं झूठ के सहारे नही जी सकता था …

“क्या हुआ राज कौन सी बात “

रश्मि बुरी तरह से चौक गई थी और हमे संदेह की निगाहों से देख रही थी ..

“रश्मि कैसे कहु ..लेकिन कहना भी तो जरूरी है “

मैं अपना सर पकड़ कर बैठ चुका था ,रश्मि का रोना पूरी तरह से बंद हो गया था ..

“राज तुम मुझे डरा रहे हो क्या बात है ..”

“नही भईया ऐसा मत करो “इस बार निशा फफक कर रो पड़ी थी

मैंने एक गहरी सांस ली ,और रश्मि का हाथ अपने हाथो में ले लिया

“रश्मि एक बात ये जान लो की मैं तुमसे बेहद प्यार करता हु ,तुम्हारे बिना मेरे लिए ऐसा है जैसे सांस लिए बिना जीना ,तू अगर मुझसे दूर हुई तो मैं तड़फ जाऊंगा ,इसलिए मैंने ये बात अभी तक तुमसे छिपा कर रखी है मैं नही चाहता था की मैं तुमसे दूर हो जाऊ लेकिन ...लेकिन मैं अपने रिश्ते की बुनियाद झूठ से नही रखना चाहता ,मुझे बोलना ही होगा ,ये झूठ मैं तुमसे नही बोल सकता ..”

रश्मि ने मेरे आँखों में देखा वो सच में घबराई हुई थी

“क्या राज ..??”

“रश्मि...मेरे और निशा के बीच ..जिस्मानी संबंध है ..”

मैं इतना ही बोलकर चुप हो गया था ,वही रश्मि का हाथ किसी बर्फ की तरह ठंडा हो चुका था,वो बस मुझे देख रही ही उसकी आंखों में एक आंसू भी नही था ,चहरा किसी मुर्दे की तरह पिला पड़ चुका था ,

“रश्मि ..”

मैंने उसे हिलाया ,निशा भी और मैं दोनो ही उसकी इस हरकत से डर गए थे .

“रश्मि उठो ..रश्मि “

वो कुछ भी नही बोली ,उसकी आंखे तो खुली हुई थी लेकिन वो बस चुप थी ..

चटाक ,चटाक चटाक

मैंने पूरी ताकत से उसे तीन झापड़ लगा दिए ,तब जाकर उसकी नजर मुझसे मिली …

बस हमारी नजर मिली थी हम एक दूसरे को देख रहे थे,पता नही वो क्या बोलने वाली थी लेकिन वो चुप थी बिल्कुल ही चुप ,मैं चाहता था की वो मुझे मारे मुझे गालियां दे लेकिन वो चुप थो...और उसकी यही चुप्पी मुझे डरा रही थी ...बेहद ही डरा रही थी ..

“रश्मि कुछ बोलो “

मेरी आवाज भर गई थी

“माफ नही कर सकती तो कम से कम गालियां ही दे दो ,मुझे मारो रश्मि ,लेकिन ऐसे चुप तो ना रहो “

मैंने उसके चहरे को पकड़ कर झिंझोरा ,वो हल्के से हंसी

“बहुत खूब राज पिता जी सही कहते थे तुम रतन चंदानी के खून हो ,और उसपर कोई भी भरोसा नही कर सकते ..तुमने अपनी ही बहन के साथ ..वाह राज वाह..”

तभी निशा ने रश्मि का हाथ पकड़ लिया

“रश्मि ये मेरी गलती थी ,मैं ही भाई को उकसाती रही ,मैंने ही उनसे प्यार कर बैठी थी ,उन्होंने तो बस मुझसे प्यार किया था ,ये कब जिस्मानी हो गया मुझे पता ही नही चला ,प्लीज् रश्मि भाई को मत छोड़ना,मैं तुम्हारे जीवन से बहुत ही दूर चली जाऊंगी ,मेरा साया भी इनके ऊपर नही पड़ेगा ,रश्मि प्लीज ..ये तुम्हे बहुत प्यार करते है तुम्हारे बिना नही जी सकते “

निशा ,उसके पैर को पकड़ कर गिड़गिड़ा रही थी ..

रश्मि ने उसके बालो पर अपने हाथ फेरे ..

“नही निशा तू कहि नही जाएगी ,तूने अपने भाई से प्यार किया है और ये प्यार तुझे मुबारक हो ,जाऊंगी तो मैं तुम्हारे जीवन से “

इससे पहले ही कोई कुछ समझ पाता रश्मि खड़ी हुई और सीधे खाई में खुद गई ..

“रश्मि..” दो आवाजे तेजी से निकली ..और फिर

“भाई ..”निशा चिल्लाई ,क्योकि मैं भी रश्मि के पीछे खुद गया था …

जैसे ही रश्मि खाई की तरफ भागी थी मुझे समझ आ गया था की वो क्या करने वाली है और मैं उसके पीछे दौड़ा वो कूदी और उसके पीछे मैं भी कूद गया ,इतने दिनों के बाद मैंने फिर से अपनी शक्तियों का प्रयोग किया मेरा दिमाग बिल्कुल ही शांत हो चुका था,मेरे हाथो में रश्मि का हाथ आ चुका था,मैंने उसकी कलाई को जकड़ लिया और अपने दूसरे हाथ से पहाड़ में उगे एक पेड़ को पकड़ लिया,नीचे खाई थी और हम अधर में लटके हुए थे …

“छोड़ दो मुझे राज मुझे मर जाने दो मैं ऐसे नही जी सकती “

रश्मि चिल्लाई

“चुप चुप बिल्कुल चुप..”उसकी इस हरकत से मेरा दिमाग गर्म हो चुका था

“क्या सोच कर अपनी जान दे रही है तू ,तेरे जाने के बाद क्या मैं खुश रह पहुँगा ..क्या निशा कभी अपने को माफ कर पाएगी ,अगर हम इसे तुझसे छिपाते तो जिंदगी भर कभी इसकी खबर नही होती और आज सच बोलने की तू मुझे ये सजा दे रही है “

“राज तुम मुझपर गुस्सा हो रहे हो तुम्हे इसका कोई हक नही है ,तुमने गलती की है ..”

वो रोते हुए चिल्लाई

“गलती की है तो क्या खुद की जान ले लेगी,अरे मरना है तो मैं मारूंगा तू क्यो मारने को खुद गई ,और जब हम दोनो ही मारने वाले है तो सुन ..सिर्फ निशा ही नही बाली निकिता दीदी से भी मेरे सबन्ध रहे और हा मैं लड़कियों को सिर्फ देखकर ही उन्हें आकर्षित कर सकता हु लेकिन कभी तुझे किया क्या नही ना,क्योकि मैं तुझसे प्यार करता था ,और निकिता दीदी के साथ साथ सामीरा और सना से भी हो चुका है ,और कान्ता और शबीना से भी ..”

खाई के उपर लटक रही थी ,उसकी कलाई को मैंने पकड़ के रखा था हम दोनो ही मौत में झूल रहे थे ..

वो आश्चर्य से मुझे देख रही थी ..

“क्या ...क्यो मेरे प्यार में ऐसी क्या कमी रह गई थी राज “

वो रोने लगी थी

“क्या कमी ?? तुझे उस लकड़ी के बारे में बताया था न और आठ ही ये भी की उसने मेरे अंदर कितनी ताकत भर दी ,तो वो ताकत मेरे सेक्स में भी बढ़ गई ..मैं पागल रहने लगा था सेक्स के लिए तभी मुझे निशा ने प्रपोज कर दिया ,तू तो शादी से पहले कुछ भी नही करना चाहती थी तो क्या करता तेरे साथ जबरदस्ती करता क्या,जो मिला उससे ही काम चला लिया “

ये सब बोलते ही मुझे थोड़ा भी डर नही लग रहा था मुझे बस ये लग रहा था की मारने से पहले बस उसे सब सच सच बता दु,मुझे अब ऐसा भी नही लग रहा था जैसे मैंने जिस्मानी संबंध बनाकर कोई गलती की हो मुझे सब बिल्कुल भी नार्मल सा लग रहा था और इसलिए मैं ये बोल पा रहा था ..

“तो तुम मुझे बता तो सकते थे ना की तुम्हे क्या परेशानी है ,मैं तुम्हे संतुष्ट करती “

मैं जोरो से हँस पड़ा

“तू..तू तो मुझे अकेले अभी भी सन्तुष्ट नही कर पाएगी ,शायद तुझे पता नही की ये आग क्या है रश्मि,मैं तुझे कभी भी धोखा नही दे सकता इसलिए मैंने शादी से पहले के सभी संबंध खत्म करने के लिए भी सोच लिया लेकिन ...लेकिन जब ये आग भड़कती है तो ..तो तुझे बता नही सकता की क्या हो जाता है मैं जानवर बन जाता हु ,एक लड़की के बस का नही है पगली “

वो मुह फाडे देख रही थी

“अगर सच्चाई बता देते तो मैं कुछ ना कुछ तो कर हि सकती थी “

“ले अब बात दिया ना सच्चाई कर ले क्या कर सकती है “

मैं ये बोलकर हँस पड़ा था वही रश्मि मुझे खा जाने वाली निगगहो से देख रही थी ,मैंने एक गहरी सांस ली और उसे ऊपर उछाल दिया ,वो हवा में उछली और मैंने उसके कमर को पकड़कर अपने से चिपका लिया ..

“देखा तेरे होने वाले पति में इतनी ताकत है की तुझे किसी गुड़िया की तरह उछाल दिया “

मैं जोरो से हंसी ..

“पति हु ..”

भले ही हम जिंदा बचे या ना बचे लेकिन रश्मि की नाराजगी का गायब होना मेरे लिए इतना सुखद था की मैं अब हँसते हँसते ही मर सकता था ..

“ये पगली ,आई लव यू,और शादी के बाद किसी से कोई भी संबंध नही ,मेरा प्रोमिश है “

“और निशा के साथ “

“तेरी इजाजत से ,वो भी तो मुझे बेहद प्यार करती है और मेरे सिवा किसी और की नही होना चाहती “

“वो तुम्हारी बहन है “

“तू भी तो है ..”

मेरी बात सुनकर रश्मि शर्मा गई

“मेरी बात अलग है ..”

मैंने उसके चहरे में एक फूक मारी ,मेरे हाथो में अब दर्द होने लगा था,ये हमारे जीवन का अंतिम समय हो सकता था और मैं इसे और भी हसीन बनाना चाहता था ,

“हम शायद अब मारने वाले है मारने से पहले मुझे माफ कर दे जान ,मैं तेरा हु और सिर्फ तेरा ही रहूंगा,आई लव यू मेरी रानी “

मैंने रश्मि के नाक में अपनी नाक रगड़ी..

उसकी आंखों में पानी था ,उसने अपने हाथ मेरे गले में जकड़ लिए थे,और पैर मेरे कमर में ..

हमारे होठ मील गए ..

जीवन में ऐसा किस मैंने कभी भी नही किया था ,इसमे इतना प्रेम था इतनी गहराई थी …..

मेरा हाथ फिसलने लगा था ,और अब मैं अपनी जान के बांहो में समाए हुए अपने जीवन का अंत करना चाहता था ..

“मैं इसी तरफ से मरना चाहता था जान “

हम दोनो की आंखे मिल गई थी ..

“लेकिन अब मैं मरना नही चाहती ,तुम्हारे साथ जीना चाहती हु “

उसने सुबकते हुए कहा ,

“अरे वो कोई जगह है क्या रोमांस करने की ,रस्सी को पकड़ो “

ऊपर से निशा चिल्लाई ,देखा तो पास में एक रस्सी अभी अभी लटक रही थी शायद निशा ने फेंकी थी ..

“तुम साथ हो तो मैं कैसे मर सकता हु “

मैंने ताकत लगाई और अपनी पकड़ और भी मजबूत कर दी और उसे रस्सी को अपनी ओर खिंचने के लिए कहा,रस्सी से मैंने उसे अपनी और मेरी कमर को जोरो से बंधने के लिए कहा ,जब उसने आश्वस्त किया की हमारी कमर रस्सी से अच्छे से बंध चुकी है तो मैंने रस्सी को दोनो हाथो से पकड़ लिया,रश्मि मुझे जोरो से पकड़े हुए थी ..

ये मेरे ताकत की परीक्षा थी ,मैं पुरी ताकत लगाकर ऊपर चढ़ रहा था ,हाथो में गजब का दर्द था लग रहा था की कहि ये शून्य ना हो जाए लेकिन मैं गहरी सांस लेकर ऊपर चढ़ रहा था ……..

ऊपर आने के बाद जन्हा निशा रोते हुए हमसे लिपट गई वही ,रश्मि ने मुझसे अलग होते ही एक तेज करारा झापड़ मेरे गालो में झड़ दिया …

“अकेले मरने भी नही दे सकते क्या “

वो गुस्से में बोली

मैंने मुस्कुराते हुए हा में सर हिलाया और वो फिर से मुझसे लिपट गई …...
 
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