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Incest एक अनोखा बंधन - पुन: प्रारंभ (Completed)

Rockstar_Rocky

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Bhai mai har update padhne ke baad like to karta hi hoon regular reader of your story ..
comment bhi sometimes ..

Aise mat karo ab to adat ho gayi hai regular updates ki :)

मित्र,

आपके Likes मुझे निरंतर मिलते रहते हैं और यदा-कदा जब आप comment करते हैं, वो भी मैं देखत व पढता हूँ! मेरी शिकायत ये है की पिछले दो दिनों से जो readers ने कमेंट करना बंद किया है उससे मेरा motivation खत्म हो गया है!

E na karo bhayya ji
Update regular dete rajiyega
Dhanywad

अब का करें भैया, कमेंट न आई तो हम काहे आपन जान खपा कर रोज अपडेट देइ? जितनी चीनी डालिहो उतना मीठी तो चाशनी बनी!

Waiting dost

:writing:
 

Rockstar_Rocky

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पन्द्रहवाँ अध्याय: पत्नी का प्रेम
भाग - 5


अब तक आपने पढ़ा:

भौजी: नहीं..... अभी नहीं! आप अभी पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो, आज जाके आपका बुखार उतरा है, कमजोरी कुछ कम हुई है और ऐसे में....आप थक जाओगे और आपको फिर से बुखार चढ़ जाएगा|
भौजी की तेज सांसें कुछ और चाहतीं थीं, परन्तु उनका मन मेरे स्वास्थ्य के लिए चिंतित था और यही चिंता उनकी बातों में झलक रही थी| लेकिन जिस आदमी के अंदर प्रेमाग्नि जल रही हो वो थोड़ा क्रूर बुद्धि हो ही जाता है;
मैं: ओह! तो आप मेरी कही पुरानी बात का बदला ले रहे हो?
मेरा तातपर्य उस दिन से था जब बेल्ट वाला कांड हुआ था और भौजी ने मुझसे मेरे बच्चे की माँ बनने की मांग की थी| तब मैंने भी भौजी को मना किया था और मुझे लग रहा था की भौजी उस दिन का बदला मुझसे ले रही हैं|
भौजी: नहीं-नहीं...ऐसा नहीं है|
मैं आगे कुछ नहीं बोला और न ही उनकी कोई सफाई सुनी, मैं भौजी के घर से गुस्से में निकल बड़े घर आ गया और आँगन में खड़ा होके सोचने लगा! उस समय मुझे लग रहा था जैसे मेरा KLPD हो गया हो! अब KLPD क्या होता है ये तो आप सभी जानते हैं| (खड़े लंड पे धोका)


अब आगे ...

अपने गुस्से को नियंत्रित कर मुझे एहसास हुआ की भौजी ने जो कहा वो गलत नहीं था| अगर मैं उनकी जगह होता तो मैं भी यही करता| अपने गुस्से पर शर्मिंदा हो कर मैं सर झुका के खड़ा था और भौजी से माफ़ी मांगने की सोच रहा था की तभी मुझे किसी के आने के क़दमों की आहट सुनाई दी| मेरे लिए ये पदचाप जानी पहचानी थी इसलिए मैंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा| भौजी सर झुका कर चलती हुई मेरे पास आईं, उन्होंने मेरा दायाँ हाथ पकड़ के मुझे अपनी तरफ घुमाया और एकदम से मेरे गले लग गईं!

भौजी: प्लीज मुझे माफ़ कर दो! मैं आपका दिल नहीं दुखाना चाहती थी, मेरे लिए आपकी सेहत सबसे जर्रूरी है| प्लीज....प्लीज....I'm sorry!

इतना कहके वो रोने लगीं!

मैं: अरे बाबा मैं आपसे नाराज नहीं हूँ, हाँ एक पल के लिए थोड़ा बुरा लगा था पर यकीन मानो मैं समझ सकता हूँ की आप क्या कह रहे हो और आपकी बात की इज्जत करता हूँ| जबतक आप नहीं कहोगे मैं आगे नहीं बढूँगा| अब ठीक है?

ये कहते हुए मैंने उन्हें अपने से दूर किया| पर भौजी फिर से मुझसे कस कर लिपट गईं और बोलीं;

भौजी: नहीं!

मैंने उनकी पीठ पर हाथ फेरा और पुछा;

मैं: तो?

पर भौजी ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया, बस मुझसे लिपटी खड़ी रहीं| मुझे लगा जैसे वो कुछ बोलना चाहतीं तो हैं पर बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहीं हैं, बिलकुल उस दिन की तरह जब मैं भौजी से अपने प्यार का इजहार करना चाहता था पर मेरे मुँह से बोल नहीं फूट रहे थे|



हम दोनों बड़े घर के आंगन में एक दूसरे को बाहों में भरे खड़े थे, मुझे ये डर था की कहीं कोई आ गया तो हमें ऐसे खड़ा देख बखेड़ा न खड़ा कर दे|

मैं: देखो नेहा आ गई, अब तो छोड़ दो|

मैंने जानबूझ के जूठ बोला, ताकि भौजी मुझे छोड़ दें|

भौजी: नहीं!

इतना बोल उन्होंने और कस कर मुझे अपनी बाहों में भर लिया| हम करीब पाँच मिनट तक ऐसे ही खड़े रहे, इन पाँच मिनटों में मुझे भौजी के दिल में छुपी हुई झिझक महसूस हुई| चाहती वो भी थीं की हम प्रेम मिलाप शुरू करें पर मेरी सेहत की चिंता के कारन वो अपनी इस इच्छा को दबा रहीं थीं| फिर मुझे भी जोश आगया;

मैं: तो आप ऐसे नहीं मानोगे?

भौजी ने ना में गर्दन हिलाकर जवाब दिया|

मैंने जोश में आ कर उन्हें अपनी गोद में उठा लिया और अपने कमरे में ले जाकर चारपाई पर लिटा दिया, पर अब भौजी ने अपने दोनों हाथों को मेरी गर्दन के इर्द-गिर्द लॉक कर लिया और उसे छोड़ ही नहीं रही थी| जब मैंने उनके मुख की ओर देखा तो वो बहुत गंभीर लग रहीं थीं!

मैं: क्या हुआ?

मैंने भौजी की आँखों में देखते हुए बड़े प्यार से पुछा| भौजी ने बस न में सर हिला के ये बताना चाहा की कोई बात नहीं है, पर मेरा दिल कह रहा था की उन्होंने मुझे सम्भोग करने के लिए रोक था, इसलिए उन्हें ग्लानि हो रही है| इधर भौजी ने अब तक अपने हाथों का लॉक नहीं खोला था तो मैंने बिना कुछ सोचे उनके ऊपर लेट गया और उनके वक्ष में अपना सर रख दिया| मेरे गाल के उनके सीने से स्पर्श होते ही उनकी धड़कनें तेज हो गईं! मैं उनकी तेज धड़कनें महसूस करने लगा था, उनका भी वही हाल था जो कुछ क्षण पहले मेरा था| मैंने एक फिर भौजी की आँखों में झाँका तो एक सूनापन दिखा, अपनी इच्छा को दबाने वाली पत्नी बड़ी बेबस दिखी| मेरे मन ने कहा "Kiss Her!" इसलिए मैं उनके ऊपर धीरे-धीरे झुकने लगा और फिर उनके होठों को अपने होठों की गिरफ्त में ले लिया| जो प्रेमग्न कुछ देर पहले शांत हो चुकी थी वो एक दम से भड़क उठी और मन बेकाबू हो गया| मैं भौजी के होटों को बेतहाशा चूमने लगा और भौजी भी मेरी हर kiss का जवाब देने लगीं| जल्दी-जल्दी में मैंने उनकी साडी ऊपर उठाई और अपनी पैंटकी ज़िप खोल अपना अकड़ा हुआ लिंग बाहर निकाला और भौजी की टांगों के बीच में आ गया| भौजी ने भी अपनी योनि का द्वार खोल कर मुझे आमंत्रित किया| मैं भौजी के ऊपर झुका और एक जोर दार धक्के के साथ लिंग उनकी योनि में पूर्ण प्रवेश कर गया| जैसे ही मेरा लिंग उनकी योनि में पहुंचा तो मुझे उनके गीलेपन का एहसास हुआ, मैं हैरान था की भौजी की योनि अंदर से गीली थी और वो मुझे फिर भी रोक रहीं थीं? इधर जैसे ही मेरा लिंग भौजी के योनि के भीतर दाखिल हुआ की भौजी ने अपनी गर्दन ऊपर को खींच ली और उनके मुँह से मादक 'आह!' निकली! उस समय प्रेम अग्नि इतनी प्रचंड जल उठी थी की मैंने बिना रुके जल्दी-जल्दी झटके देना शुरू कर दिया और दूसरी तरफ भौजी बड़े मजे से अपनी दोनों टांगें मेरी कमर के इर्द-गिर्द लपेट कर मेरा साथ दे रहीं थीं| हम अपने सम्भोग में इतना मशगूल हो गए की ये भी भूल गए की प्रमुख द्वार खुला हुआ है!



ये समागम ज्यादा देर न चल स्का और 10-15 मिनट के बाद हम दोनों एक-एक कर स्खलित हुए! स्खलित होने के बाद मैं भौजी के ऊपर पड़ा रहा, क्योंकि आज पहलीबार सम्भोग के उपरान्त मैं थोड़ा थक गया था! भौजी की बाहें अब भी मेरी गर्दन के इर्द-गिर्द लॉक थीं और वो अपनी बेकाबू साँसों को काबू कर रहीं थीं| उस समय भौजी की साडी उनकी जाँघों तक ऊपर थी और उनके पैर घुटनों से मुड़े हुए थे तथा मैं उनके वक्ष पर सर रख पड़ा हुआ था, हम दोनों ही मेरे कमरे के दरवाजे की ओर सर कर के पड़े थे| तभी वहाँ अचानक नेहा आ गई! उसे देख हम दोनों हड़बड़ा गए पर अगर हम हिलते तो उसे हमारे यौन अंग दिख जाते और ये अच्छा नहीं होता! इसीलिए हमदोनों ऐसे ही पड़े रहे ताकि उसे सब सामान्य लगे. लेकिन मन ही मन हम दोनों बुरी तरह डरे हुए थे| इधर नेहा ने हमें इस स्थिति में देखा और कुछ समझ ना पाई, इसलिए उसने नासमझी में मुझसे सवाल किया;

नेहा: पापा....आप ये मम्मी के साथ क्या कर रहे हो?

उसके ये सवाल सुन हम दोनों बुरी तरह झेंप गए, भौजी ने तो मुँह मोड़ कर खुद को नेहा के सवाल से बचा लिया| अब मेरे लिए जवाब देना अनिवार्य था तो मैंने जवाब कुछ इस प्रकार दिया;

मैं: बेटा मैं आपकी मम्मी को प्यार कर रहा हूँ|

मेरे पास इससे उपयुक्त कोई जवाब नहीं था| नेहा का ध्यान मेरे जवाब पर लगा तो मैंने भौजी की नंगी जाँघ को साडी से ढकने की कोशिश की और किसी तरह उसे थोड़ा बहुत ढक भी दिया| इतने में नेहा ने अपना दूसरा सवाल दागा;

नेहा: पर 'वो' (चन्दर) तो कभी मम्मी को ऐसे प्यार नहीं करते?

नेहा ने अपने पापा को 'वो' कहा जो इस बात का सबूत था की वो मन ही मन मुझे अपना पिता मान चुकी थी|

इधर भौजी ने नेहा की इस बात का जवाब बड़े गर्व से दिया;

भौजी: बेटा क्योंकि मैं उससे प्यार नहीं करती और आप भी तो इन्हें (मुझे) ही पापा कहते हो, उसे थोड़े ही कहते हो!

जब से मैं आया था तब से मैंने नेहा को कभी चन्दर के पास जाते हुए या उसे पापा कहते हुए नहीं देखा था, वो हमेशा ही चन्दर से डरी-डरी रहती थी|

बातों ही बातों में मुझे याद आया की प्रमुख दरवाजा अब भी खुला है ओर अगर कोई आगया तो आज ही सब कुछ खत्म हो जायेगा;

मैं: बेटा आप प्रमुख दरवाजा बंद करके आओ फिर हम तीनों बैठ के बातें करते हैं|

नेहा तुरंत दरवाजा बंद करने गई और उसी मौके का फायदा उठा के मैं और भौजी अलग हुए तथा अपने-अपने कपडे ठीक करके पुनः लेट गए| जब मैंने भौजी की आँखों में देखा तो उनकी आँखों में मेरे प्रति चिंता साफ़ दिख रही थी|

मैं: आपको चिंता करने की कोई जर्रूरत नहीं है और न ही खुद को दोष देने की कोई जर्रूरत है, मैं बिलकुल ठीक हूँ|

मैंने पूरे आत्मविश्वास से कहा लेकिन भौजी अब भी थोड़ी परेशान थीं, मैं भी मन ही मन ये दुआ कर रहा था की मैं बीमार न पड़ जाऊँ वरना भौजी का दिल टूट जायेगा! इतने में नेहा दरवाजा बंद कर के आ गई, मैंने माहोल को हल्का करने के लिए नेहा को हमारे बीच में सोने को कहा| नेहा मुझसे कुछ ज्यादा ही दुलार करती थी, इसलिए बजाय हमारे बीच में लेटने के वो सीधा मेरे पेट पर बैठ गई और मेरे सीने पर सर रख के लेट गई|

भौजी: नेहा बेटा ऊपर से हटो और यहाँ सो जाओ अपने पापा को आराम करने दो!

एक तो नेहा भौजी से थोड़ा डरी हुई थी और दूसरा उसे वो मुझसे प्यार करने के मामले में थोड़ी जिद्दी थी, इसलिए मुझे ही उसका पक्ष लेना पड़ा|

मैं: कोई बात नहीं सोने दो, वैसे भी बहुत दिन हुए मुझे इसको लाड किये|

मैंने नेहा के सर को चूम कर कहा|

भौजी: सर पे चढ़ा रखा है आपने इसे!

भौजी ने नराज होते हुए कहा|

मैं: तो चढाउँ नहीं, एक ही तो बेटी है मेरी!

ये सुन नेहा खुश हो गई और उसने मुझे जोश में आ कर अपनी नन्ही बाहों में कसना चाहा|

भौजी: बहुत जल्द कोई और भी आने वाला है!

भौजी ने मुस्कुराते हुए कहा, उनका इशारा हमारी आने वाली संतान से था|

मैं: जब वो आई तब दोनों को इसी तरह अपने से चिपकाए रखूँगा|

भौजी: मैं आपके लिए दूध लेके आती हूँ|

ये कहते हुए भौजी उठीं, पर मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचा और उन्हें फिर से लिटा दिया|

मैं: नहीं रहने दो, आप मेरे पास लेटो|

लेकिन भौजी को मेरे बीमार होने की चिंता थी|

भौजी: आपको जर्रूरत है!

उन्होंने भोयें सिकोड़ते हुए कहा|

मैं: नहीं बाबा! अगर होगी तो मैं आपको बता दूँगा| अभी आप लेटो मेरे पास, इतने दिनों बाद तो तीनों को साथ लेटने का मौका मिला है|

भौजी मेरा दिल नहीं तोडना चाहतीं थीं, इसलिए वो मेरी तरफ करवट ले कर लेट गईं और अपना हाथ नेहा की पीठ पर रख दिया|

मैं: अच्छा नेहा, ये बाताओ आप अपनी मम्मी से गुच्छा (गुस्सा) हो?

मैंने थोड़ा तुतलाते हुए कहा तो नेहा ने हाँ में सर हिलाया, मैंने भौजी की तरफ झूठे गुस्से से देखा और उन्हें प्यार से डाँटते हुए बोला;

मैं: आगे से आप मेर इ बेटी के सामने किसी को नहीं डाटोगे, देखो मेरी बच्ची कितना डर गई है!

ये सुन भौजी ने डरने का नाटक किया और अपने कान पकड़ते हुए बोलीं;

भौजी: सॉरी मेरा बेटू, I promise मैं आज के बाद आपके सामने किसी से लड़ाई नहीं करुँगी! अब तो माफ़ कर दो, वरना आपके पापा भी मुझसे बात नहीं करेंगे!

ये सुन कर नेहा मुस्कुराने लगी और उसने अपनी मम्मी को एकदम से माफ़ कर दिया|

जारी रहेगा भाग - 6 में...
 

Rockstar_Rocky

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आज की अपडेट छोटी होने का कारन है आप सभी रीडर्स का Like तथा comment न करना! चाहता तो ये अपडेट दुगनी बड़ी भी दे सकता था, परन्तु आप सभी के कमेंट ना आने के कारन ये छोटी अपडेट दे रहा हूँ! देखते है की आप सभी रीडर्स आगे कितना प्यार देते हैं! :verysad:
 

Harshit

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B
पिछले दो दिन में जिस तरह से सभी रीडर्स के कमेंट घटने लगे हैं, उससे




Bhai kuchh logon ke chakkar me aap apne regular readers ko kyun pareshan kr rhe ho bhai baki story aapki hai hum to sirf request hi kr sakte hain aap bhi sab kuchh jayaz hain ke writer pandiy ji ke jaise karne lage unhe bhi yahi lagta tha ki log sirf unki hi story padhen aur kisi ki nhi saare readers unhi ki story pr comments karen bhai ji aapse sirf ek request kr sakta hun ki aap sirf apna karm kijiye bhai aapki update me comments isiliye kam ho gaye kyun kuchh dino se aapki story se mja thoda kam ho gya bhai jaise jaise aapki story romanchak hoti jaigi comments apne aap hi badhte jaenge aapko bolne ki jarurat hi nhi padegi bhai ji bura nhi manna mai aapki har update pr comments karta hun pr mujhe bhi pichhle kuchh update sahi nhi lage kuchh boring the pr maine fir bhi achchhe comments hi kiye aaj shayad mai kuchh jyada hi bol gya maaf karna dost aapki story hai jaisi marji update kijiye readers ko mja aaega to aapko comments ke liye bolna hi nhi padega bura laga to maaf karna pr ek sirf readers ki hi kami nhi hai na bhai taali ek haath se to nhi bajti na i m sorry dost
 

Harshit

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आज की अपडेट छोटी होने का कारन है आप सभी रीडर्स का Like तथा comment न करना! चाहता तो ये अपडेट दुगनी बड़ी भी दे सकता था, परन्तु आप सभी के कमेंट ना आने के कारन ये छोटी अपडेट दे रहा हूँ! देखते है की आप सभी रीडर्स आगे कितना प्यार देते हैं! :verysad:
Maaf karna dost maine aapse shayad pahale bhi kaha tha ki please kabhi kabhi update badi diya karo to aapne kaha tha kabhi kabhi chhoti update se hi kam chala liya karo maaf karna dost aaj mai aapki update pr like aur comment nhi kar paunga i m sorry.
 

Avi12

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एक नंबर अपडेट, छोटा था किन्तु अच्छा था । उम्मीद करता हूं कि बाकी रीडर्स कमेंट और लाईक करना शुरू कर दें और मेरी उन सभी से गुज़ारिश भी है कि लाइक और कमेन्ट ज़रूर करें
 
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