Incest एक अधूरी प्यास.... 2 (Completed)

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Kratos

Anger can be a weapon if you can control it use it
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Bro main bata nahin sakta ki main kitna excited hoon ..Ek adhuri pyaas mere ab tak ki favorite story hai...Aur aap uska 2nd part la rahe hoo...kasam se maza aajayega...aapki sukriya Bhai...aur plz ise adhura mat chodna...
Iske pahle part ka link koi de sakta hai.
 

rohnny4545

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शुभम उसे अपनी बड़ी बड़ी गांड मटका ते हुए जाते देख कर पागल होने लगा,,,, जो कि अभी एक बार झड़ने के बाद शुभम का लंड ढीला होना शुरू ही हुआ था कि एक बार फिर से ही शीतल की बड़ी बड़ी गांड को मटकता हुआ देखकर और उसकी मौत ने वाली बात सुनकर उसमें उत्तेजना भरने लगी,,,,,,, शीतल की जबरदस्त चुदाई करते करते वह पूरी तरह से पसीने से भीग चुका था इसलिए हवा लेने के लिए वह बिस्तर से खड़ा हुआ और सीधा जाकर खिड़की के पास खड़ा हो गया,,, खिड़की पर बेहद ठंडी हवा बह रही थी जिससे उसके तन बदन में ठंडक का एहसास हो रहा था,,,Nice update bhai
Nice comment with hot line
 

Vicky2009

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शुभम अपने कदम आगे तो बना रहा था लेकिन उसके मन में डर बराबर बना हुआ था वह अच्छी तरह से जान रहा था कि जिस तरह की हरकत करते हुए उसे उसकी मां ने अपनी आंखों से देखा है वह दृश्य शायद उससे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ है तभी तो वह उससे एक शब्द भी नहीं बोली थी और उसका मन उखड़ा उखड़ा लग रहा था उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां का सामना किस तरह से करेगा लेकिन फिर भी वह अपनी मां से माफी मांगने के लिए निश्चय कर चुका था इसलिए वह अपने कदम को निर्मला के कमरे की तरफ आगे बढ़ा रहा था थोड़ी ही देर में वह अपनी मां के कमरे के आगे पहुंच गया जहां पर दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और अंदर डिम लाइट का बल्ब झिलमिला रहा था।

यहां तक पहुंचने के बावजूद भी शुभम का मन कर रहा था कि यहां से वापस चला जाए क्योंकि वह सच में अपनी मां से नजरें मिलाने के काबिल बिल्कुल भी नहीं था लेकिन इस स्थिति से मुंह फेर लेना भी उचित नहीं था आखिरकार वह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां को समझने वाला केवल वही था इसलिए इस हालात में माफी मांग लेना ही उचित था और कमरे के दरवाजे को खुला देख कर वह इतना तो समझ ही गया था कि उसकी मां ने जानबूझकर कमरे का दरवाजा खुला रखी थी ताकि वह आराम से कमरे में दाखिल हो सके और निर्मला को इस बात की उम्मीद भी थी कि उसका बेटा उससे मिलने जरूर आएगा इसलिए वह जानबूझकर कमरे के दरवाजे को खुला छोड़ दी थी। अपने आप को पूरी तरह से तैयार करके शुभम कमरे के अंदर दाखिल हुआ जहां पर डिम लाइट की रोशनी में केवल उसे एक साया सा नजर आ रहा था जो कि बिस्तर पर पेट के बल लेटा हुआ था इसलिए वह एक बार अपनी मम्मी को आवाज लगाते हुए बोला।

मम्मी ओ मम्मी . (इतना कहते हुए शुभम अपने हाथों से दीवाल पर टटोलकर जल्द ही स्विच को लपक लिया और स्विच ऑन कर दिया जिससे पूरा कमरा ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में नहा गया )

अब यहां क्या करने आया है । (निर्मला अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही बोली )

क्या करने आया है ..मतलब मैं क्या अब इतना खराब हो गया कि तुम्हारे कमरे में भी नहीं आ सकता ....

आ सकता था लेकिन अब नहीं आ सकता जा अपनी शीतल के पास अब उसी से तेरा मन भरेगा मेरे से तो अब तेरा मन बिल्कुल भी भर गया है ना।

यह कैसी बातें कर रही हो मम्मी ........(इतना कहते हुए वह अपनी मां के बिस्तर के करीब जाकर बिस्तर पर बैठ गया जिसका एहसास निर्मला को अच्छी तरह से हुआ हालांकि वह अभी भी शुभम की तरफ अपनी नजर नहीं घूमाई थी। )

मैं जो भी कह रही हूं ठीक ही कह रही हूं अब मेरे पास क्या करने आया है मेरे पास कुछ भी नहीं है तुझे देने के लिए जो कुछ भी मेरे पास था मैं वह सब कुछ तुझ पर निछावर कर चुकी हूं ।
(शुभम अपनी मां को इतने गुस्से में पहली बार देख रहा था उससे अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन क्या करें गलती उसकी ही थी लेकिन फिर भी इतनी तनाव युक्त माहौल होने के बावजूद भी शुभम की नजर अपनी मां की कदर आई हुई गांड पर घूम रही थी क्योंकि इस समय व पेट के बल लेटी हुई थी और जिस तरह से वह गुस्से में बोल रही थी उसकी वजह से उसके बदन में एक अजीब सी थीरकन हो रही थी और उस थीरकन की वजह से उसके भराव दार नितंबों में लहर सी दौड़ रही थी जोकि रेशमी पतली साड़ी पहने होने के कारण साफ साफ नजर आ रही थी और शुभम अपनी मां की मदमस्त गांड की थिरकन को देखकर मदहोश होने लगा था। उससे रहा नहीं गया और वह अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की मदमस्त गांड पर उसे रखते हुए बोला।)

मम्मी ऐसा क्यों बोल रही हो जो कुछ भी हुआ उसमें मेरी गलती बिल्कुल भी नहीं थी मैं नहीं चाहता था कि मैं शीतल मैडम के पास जाऊं ।(इतना कहते हुए शुभम अपनी मां की मदमस्त गांड को हल्के हल्के सहलाना शुरू कर दिया जिससे शुभम के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी लेकिन अपने बेटे की इस हरकत पर निर्मला उसका हाथ जोर से झटक ते हुए उठ कर बैठ गई और बोली।)

मेरी नहीं जाकर उसी कल की गांड को सहला क्योंकि मैं उसी दिन समझ गई थी जब तू ललचाई आंखों से उसकी मटकती हुई गांड को देख रहा था तभी मैं समझ गई थी कि अब तेरा मन भटक रहा है और मुझसे तेरा मन भरने लगा है तभी मैंने तुझे उस दिन हीं साफ साफ शब्दों में कह दी थी कि शीतल से दूर ही रहना लेकिन तू नहीं माना और लार टपका आते हुए पहुंच गया उसके पास क्लास में ।

मम्मी मैं सच कह रहा हूं मैं अपने आप वहां नहीं गया था ।

हां तुझको तो सीतल अपनी गोद में उठा कर अपने कमरे में ले गई थी।और खुद ही तेरे पेंट की चैन खोलकर तेरा लंड निकालकर मुंह में लेकर चूस रही थी यही कहना चाह रहा था ना तेरी तो गलती ही नहीं है तू बहुत सीधा-साधा है।
(निर्मला एकदम गुस्से में शुभम की आंखों में आंखें डाल कर उसे बोले जा रही थी शुभम एकदम घबरा गया था क्योंकि इससे पहले उसने अपनी मां को इस तरह गुस्से में कभी नहीं देखा था वह अपना बचाव करने हेतु सारे बयान दे डाल रहा था लेकिन यह बात वह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां को उसकी एक भी बात का विश्वास होने वाला बिल्कुल भी नहीं था फिर भी वह जो कुछ भी हुआ उसमें उसका हाथ बिल्कुल भी नहीं था इस बात का विश्वास दिलाते हुए अपनी मां से बोला ।

मम्मी जो कुछ भी हुआ उसने मेरा हाथ बिल्कुल भी नहीं था मैं वहां अपने मन से नहीं गया था वह तो जबरदस्ती शीतल मैडम ने ही इशारा करके मुझे अपने क्लास रूम में बुलाई थी।


तू दुनिया को बेवकूफ बना सकता है लेकिन मुझे नहीं तू अपने मन से नहीं गया तो शीतल के मुंह में डालने के लिए तेरा लंड खड़ा कैसे हो गया तेरा मन नहीं कर रहा था तो तुझे मजा कैसे आ रहा था।
तुम मुझे बेवकूफ बनाने की कोशिश मत कर तूने मुझे धोखा दिया है मैं तुझे लड़के से मर्द बनाई हूं और तू मुझे ही धोखा दे रहा है चुदाई का पहला सुख तुझे मुझसे ही मिला; औरतों के साथ संभोग कैसे किया जाता है उन्हें कैसे चोदा जाता है मैं तुझे सिखाई जब तू कल्पना में औरतों के अंग से खेलता था तब तुझे पता भी नहीं था कि औरतों का अंग कैसा होता है साड़ी के अंदर उनकी चूची कैसी होती है उनकी गांड कैसी होती है और उनकी बुर का आकार कैसा होता है यह सब तुझे बिल्कुल भी पता नहीं था इन सब बातों से मैंने तुझे अवगत कराया और तू सब कुछ सीखने के बाद मजा लेने के बाद मुझसे मुंह फेर कर दूसरी औरत की बाहों में जाना चाहता है ।

मम्मी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है (शुभम अपनी तरफ से अपनी मां को समझाने की पूरी कोशिश करते हुए बोला लेकिन निर्मला थी कि शुभम की बात सुनने को तैयार ही नहीं थी)

सब कुछ ऐसा ही है सब मर्द एक जैसे होते हैं तू भी तेरे बाप की तरह ही हो गया है जब मन भर गया तब दूसरी तरफ अपना ठिकाना ढूंढने लगा मैं सब जानती हूं और अच्छी तरह से जानती हूं कि मर्दों की फितरत सिर्फ औरतों को धोखा देना ही होता है भले होगा उसकी प्रेमिका हो या पत्नी हो या उसकी मां हो एक बार मजा लेने के बाद मन भर ही जाता है यह बात तो साबित कर चुका है तभी तो मजे लेकर मेरे लाख समझाने के बावजूद तू शीतल के पास गया और उसे अपना मोटा तगड़ा लंड उसके मुंह में डालकर उसको चुसवाने का मजा दे रहा था और ले भी रहा था‌।


यह क्या कह रही हो मम्मी (शुभम इससे ज्यादा कुछ बोल ही नहीं पा रहा था मन ही मन में वह अपने आप को कोसने लगा कि आखिरकार वह क्यों वहां गया ना वहां गया होता ना यह बखेड़ा खड़ा होता वह अपनी मां की तरफ बड़े ध्यान से देख रहा था वह एकदम गुस्से में थी उसके बाल बिखरे हुए थे आंखों में आंसू और वह बार-बार गुस्से में अपनी भड़ास निकाले जा रही थी।ज्यादा गुस्से में होने के कारण सुगंधा की साड़ी उसके कंधे पर से सरक कर नीचे आ गई थी जो कि नीचे बिस्तर पर बिखरी पड़ी थी और उसकी ब्लाउज का एक बटन खुला हुआ था जिसमें से उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां बाहर झांक रहे थे जिस पर ना चाहते हुए भी शुभम की नजर बार-बार चली जा रही थी आखिरकार भले वह अपनी मां से दो चार बातें सुन रहा था लेकिन फिर भी अपनी मां के खूबसूरत बदन के आकर्षण से अपनी नजर को हटा नहीं पा रहा था‌। निर्मला अपने बेटे की नजरों को भांपते हुए गुस्से में बोली।

तुझे लगता है कि मेरी चुचियों में पहला जैसा कसाव नहीं रहा ना अब यह टाइट नहीं है ....यह पपाया की तरह लटक गई है तुझे ऐसा लग रहा है ना ले देख ले देख ले .. (इतना कहते हुए अपनी ब्लाउज के बटन खोलने लगी निर्मला पूरी तरह से गुस्से में थी लेकिन गुस्से में होने के बावजूद भी वह बहुत खूबसूरत लग रही थी और उसका यह अंदाज कि गुस्से में होने के बावजूद भी वह अपनी ब्लाउज के बटन को अपने बेटे की आंखों के सामने खोल रहे थे यह देखकर शुभम शर्मिंदा होने के बावजूद भी उत्तेजना का अनुभव करने लगा और देखते ही देखते उसकी मां ब्लाउज के सारे बटन को खोल दी जिससे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पिंजरे में कैद कबूतर की तरह बाहर हवा में फड़फड़ाने लगे यह बात तो तय थी कि इस उम्र में भी निर्मला की चुचियों का कसाव जवानी के दिनों की तरह ही बरकरार थे फिर भी वह ऐसा समझ रही थी कि शायद शुभम को अब उसकी चूचियों में पहले जैसा कसाव महसूस नहीं हो रहा है इसीलिए वह दूसरी औरतों की सोबत में पड़ रहा है इसलिए वह अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपने दोनों चूचियों को अपने हाथों में पकड़ कर उसकी तरफ आगे बढ़ाते हुए गुस्से में बोली ।)

ले शुभम पकड़ अपने हाथों में ले इसे जोर से दबा .. ने पकड़ी से अब चुप क्यों मिले पकड़ना इसे दबा अपने हाथों में भरकर इसे तुझे ऐसा लग रहा है ना कि इनमें कसाव नहीं है यह लटक गई है पहले जैसे तुझे मजा नहीं आ रहा है इतना कहते हुए निर्मला अपने हाथों से अपने बेटे का हाथ पकड़कर उसके हथेली को अपनी चुचियों पर रखकर उसे दबाने के लिए बोलने लगी अपनी मां का गुस्सा देखकर उसे हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह अपनी मां की चूची को दबा दें वह सिर्फ आश्चर्य से अपनी मां की तरह देखे जा रहा था शुभम की तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना होता देखकर वो खुद हीअपने बेटे की हथेली पर अपनी हथेली रखकर उसे जोर जोर से दबाते हुए अपनी चूचियों को दबाना शुरू कर दी । और अपने बेटे की आंखों में आंखें डाल कर गुस्से में बोली ।..

बोल तुझे मजा नहीं आ रहा है ना मेरी चूचियों को दबाने में अब ईसमें खरबूजे जैसा मजा नहीं रह गया इन में रस नहीं रहगया इसलिए तू शीतल की तरफ बढ़ रहा है यही बात है ना ।
(शुभम को अब कैसे अपनी मां को समझाना है इस बात का बिल्कुल भी समझ नहीं थी उसका दिमाग काम करना बंद हो गया था। उसकी मां को वह समझाना चाहता था उससे माफी मांगना चाहता था लेकिन उसकी मां सुनने को तैयार ही नहीं थी बल्कि उसकी हरकतों की वजह से शुभम के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी... पजामे के अंदर शुभम का लंड खड़ा होने लगा था । इस तरह की स्थिति ना होती तो जिस तरह की हरकत उसकी मां कर रही थी उसे देखते हुए शुभम अब तक उसे बिस्तर पर लेटा कर उसकी दोनों टांगों को फैला कर अपने लंड को उसकी रसीली बुर के अंदर डाल दिया होता लेकिन इस समय ऐसा करना उचित नहीं था यह बात वह भी अच्छी तरह से जानता था क्योंकि ऐसे हालात में अगर वह अपनी तरफ से इस तरह की कोई प्रतिक्रिया देता है तो उसकी मां को यही लगेगा कि यह केवल हुस्न का दीवाना है इसे औरतों से इसने नहीं बल्कि उनके बदन से मोहब्बत है इसलिए वह इस तरह की हरकत नहीं करना चाहता था कि उसकी मां को इस बात से ठेस पहुंचे वह किसी तरह से अपनी मां को मना लेना चाहता था इसलिए अपनी मां को मनाने के उद्देश्य से वाह अपना हाथ पीछे हटाते हुए बोला ।)

शीतल कीमत मस्त जवानी जिसे देखकर शुभम का भी मन भटकने लगा था उसकी बड़ी बड़ी गांड शुभम की हालत खराब कर रहे थे



शीतल की खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर शुभम का मन करने लगा था कि उसे दबा दबा कर उसे मुंह में भरकर उस का रस पी जाए


शीतल जोकि शुभम के मोटे तगड़े लंड के दर्शन कर चुकी थी और उसकी ताकत को भाप कर उसे अपनी बुर के अंदर लेकर अपनी प्यास बुझाना चाहती थी इस तरह से

Good one
 

Ricky3565

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शुभम अपने कदम आगे तो बना रहा था लेकिन उसके मन में डर बराबर बना हुआ था वह अच्छी तरह से जान रहा था कि जिस तरह की हरकत करते हुए उसे उसकी मां ने अपनी आंखों से देखा है वह दृश्य शायद उससे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ है तभी तो वह उससे एक शब्द भी नहीं बोली थी और उसका मन उखड़ा उखड़ा लग रहा था उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां का सामना किस तरह से करेगा लेकिन फिर भी वह अपनी मां से माफी मांगने के लिए निश्चय कर चुका था इसलिए वह अपने कदम को निर्मला के कमरे की तरफ आगे बढ़ा रहा था थोड़ी ही देर में वह अपनी मां के कमरे के आगे पहुंच गया जहां पर दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और अंदर डिम लाइट का बल्ब झिलमिला रहा था।

यहां तक पहुंचने के बावजूद भी शुभम का मन कर रहा था कि यहां से वापस चला जाए क्योंकि वह सच में अपनी मां से नजरें मिलाने के काबिल बिल्कुल भी नहीं था लेकिन इस स्थिति से मुंह फेर लेना भी उचित नहीं था आखिरकार वह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां को समझने वाला केवल वही था इसलिए इस हालात में माफी मांग लेना ही उचित था और कमरे के दरवाजे को खुला देख कर वह इतना तो समझ ही गया था कि उसकी मां ने जानबूझकर कमरे का दरवाजा खुला रखी थी ताकि वह आराम से कमरे में दाखिल हो सके और निर्मला को इस बात की उम्मीद भी थी कि उसका बेटा उससे मिलने जरूर आएगा इसलिए वह जानबूझकर कमरे के दरवाजे को खुला छोड़ दी थी। अपने आप को पूरी तरह से तैयार करके शुभम कमरे के अंदर दाखिल हुआ जहां पर डिम लाइट की रोशनी में केवल उसे एक साया सा नजर आ रहा था जो कि बिस्तर पर पेट के बल लेटा हुआ था इसलिए वह एक बार अपनी मम्मी को आवाज लगाते हुए बोला।

मम्मी ओ मम्मी . (इतना कहते हुए शुभम अपने हाथों से दीवाल पर टटोलकर जल्द ही स्विच को लपक लिया और स्विच ऑन कर दिया जिससे पूरा कमरा ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में नहा गया )

अब यहां क्या करने आया है । (निर्मला अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही बोली )

क्या करने आया है ..मतलब मैं क्या अब इतना खराब हो गया कि तुम्हारे कमरे में भी नहीं आ सकता ....

आ सकता था लेकिन अब नहीं आ सकता जा अपनी शीतल के पास अब उसी से तेरा मन भरेगा मेरे से तो अब तेरा मन बिल्कुल भी भर गया है ना।

यह कैसी बातें कर रही हो मम्मी ........(इतना कहते हुए वह अपनी मां के बिस्तर के करीब जाकर बिस्तर पर बैठ गया जिसका एहसास निर्मला को अच्छी तरह से हुआ हालांकि वह अभी भी शुभम की तरफ अपनी नजर नहीं घूमाई थी। )

मैं जो भी कह रही हूं ठीक ही कह रही हूं अब मेरे पास क्या करने आया है मेरे पास कुछ भी नहीं है तुझे देने के लिए जो कुछ भी मेरे पास था मैं वह सब कुछ तुझ पर निछावर कर चुकी हूं ।
(शुभम अपनी मां को इतने गुस्से में पहली बार देख रहा था उससे अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन क्या करें गलती उसकी ही थी लेकिन फिर भी इतनी तनाव युक्त माहौल होने के बावजूद भी शुभम की नजर अपनी मां की कदर आई हुई गांड पर घूम रही थी क्योंकि इस समय व पेट के बल लेटी हुई थी और जिस तरह से वह गुस्से में बोल रही थी उसकी वजह से उसके बदन में एक अजीब सी थीरकन हो रही थी और उस थीरकन की वजह से उसके भराव दार नितंबों में लहर सी दौड़ रही थी जोकि रेशमी पतली साड़ी पहने होने के कारण साफ साफ नजर आ रही थी और शुभम अपनी मां की मदमस्त गांड की थिरकन को देखकर मदहोश होने लगा था। उससे रहा नहीं गया और वह अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की मदमस्त गांड पर उसे रखते हुए बोला।)

मम्मी ऐसा क्यों बोल रही हो जो कुछ भी हुआ उसमें मेरी गलती बिल्कुल भी नहीं थी मैं नहीं चाहता था कि मैं शीतल मैडम के पास जाऊं ।(इतना कहते हुए शुभम अपनी मां की मदमस्त गांड को हल्के हल्के सहलाना शुरू कर दिया जिससे शुभम के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी लेकिन अपने बेटे की इस हरकत पर निर्मला उसका हाथ जोर से झटक ते हुए उठ कर बैठ गई और बोली।)

मेरी नहीं जाकर उसी कल की गांड को सहला क्योंकि मैं उसी दिन समझ गई थी जब तू ललचाई आंखों से उसकी मटकती हुई गांड को देख रहा था तभी मैं समझ गई थी कि अब तेरा मन भटक रहा है और मुझसे तेरा मन भरने लगा है तभी मैंने तुझे उस दिन हीं साफ साफ शब्दों में कह दी थी कि शीतल से दूर ही रहना लेकिन तू नहीं माना और लार टपका आते हुए पहुंच गया उसके पास क्लास में ।

मम्मी मैं सच कह रहा हूं मैं अपने आप वहां नहीं गया था ।

हां तुझको तो सीतल अपनी गोद में उठा कर अपने कमरे में ले गई थी।और खुद ही तेरे पेंट की चैन खोलकर तेरा लंड निकालकर मुंह में लेकर चूस रही थी यही कहना चाह रहा था ना तेरी तो गलती ही नहीं है तू बहुत सीधा-साधा है।
(निर्मला एकदम गुस्से में शुभम की आंखों में आंखें डाल कर उसे बोले जा रही थी शुभम एकदम घबरा गया था क्योंकि इससे पहले उसने अपनी मां को इस तरह गुस्से में कभी नहीं देखा था वह अपना बचाव करने हेतु सारे बयान दे डाल रहा था लेकिन यह बात वह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां को उसकी एक भी बात का विश्वास होने वाला बिल्कुल भी नहीं था फिर भी वह जो कुछ भी हुआ उसमें उसका हाथ बिल्कुल भी नहीं था इस बात का विश्वास दिलाते हुए अपनी मां से बोला ।

मम्मी जो कुछ भी हुआ उसने मेरा हाथ बिल्कुल भी नहीं था मैं वहां अपने मन से नहीं गया था वह तो जबरदस्ती शीतल मैडम ने ही इशारा करके मुझे अपने क्लास रूम में बुलाई थी।


तू दुनिया को बेवकूफ बना सकता है लेकिन मुझे नहीं तू अपने मन से नहीं गया तो शीतल के मुंह में डालने के लिए तेरा लंड खड़ा कैसे हो गया तेरा मन नहीं कर रहा था तो तुझे मजा कैसे आ रहा था।
तुम मुझे बेवकूफ बनाने की कोशिश मत कर तूने मुझे धोखा दिया है मैं तुझे लड़के से मर्द बनाई हूं और तू मुझे ही धोखा दे रहा है चुदाई का पहला सुख तुझे मुझसे ही मिला; औरतों के साथ संभोग कैसे किया जाता है उन्हें कैसे चोदा जाता है मैं तुझे सिखाई जब तू कल्पना में औरतों के अंग से खेलता था तब तुझे पता भी नहीं था कि औरतों का अंग कैसा होता है साड़ी के अंदर उनकी चूची कैसी होती है उनकी गांड कैसी होती है और उनकी बुर का आकार कैसा होता है यह सब तुझे बिल्कुल भी पता नहीं था इन सब बातों से मैंने तुझे अवगत कराया और तू सब कुछ सीखने के बाद मजा लेने के बाद मुझसे मुंह फेर कर दूसरी औरत की बाहों में जाना चाहता है ।

मम्मी ऐसा बिल्कुल भी नहीं है (शुभम अपनी तरफ से अपनी मां को समझाने की पूरी कोशिश करते हुए बोला लेकिन निर्मला थी कि शुभम की बात सुनने को तैयार ही नहीं थी)

सब कुछ ऐसा ही है सब मर्द एक जैसे होते हैं तू भी तेरे बाप की तरह ही हो गया है जब मन भर गया तब दूसरी तरफ अपना ठिकाना ढूंढने लगा मैं सब जानती हूं और अच्छी तरह से जानती हूं कि मर्दों की फितरत सिर्फ औरतों को धोखा देना ही होता है भले होगा उसकी प्रेमिका हो या पत्नी हो या उसकी मां हो एक बार मजा लेने के बाद मन भर ही जाता है यह बात तो साबित कर चुका है तभी तो मजे लेकर मेरे लाख समझाने के बावजूद तू शीतल के पास गया और उसे अपना मोटा तगड़ा लंड उसके मुंह में डालकर उसको चुसवाने का मजा दे रहा था और ले भी रहा था‌।


यह क्या कह रही हो मम्मी (शुभम इससे ज्यादा कुछ बोल ही नहीं पा रहा था मन ही मन में वह अपने आप को कोसने लगा कि आखिरकार वह क्यों वहां गया ना वहां गया होता ना यह बखेड़ा खड़ा होता वह अपनी मां की तरफ बड़े ध्यान से देख रहा था वह एकदम गुस्से में थी उसके बाल बिखरे हुए थे आंखों में आंसू और वह बार-बार गुस्से में अपनी भड़ास निकाले जा रही थी।ज्यादा गुस्से में होने के कारण सुगंधा की साड़ी उसके कंधे पर से सरक कर नीचे आ गई थी जो कि नीचे बिस्तर पर बिखरी पड़ी थी और उसकी ब्लाउज का एक बटन खुला हुआ था जिसमें से उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां बाहर झांक रहे थे जिस पर ना चाहते हुए भी शुभम की नजर बार-बार चली जा रही थी आखिरकार भले वह अपनी मां से दो चार बातें सुन रहा था लेकिन फिर भी अपनी मां के खूबसूरत बदन के आकर्षण से अपनी नजर को हटा नहीं पा रहा था‌। निर्मला अपने बेटे की नजरों को भांपते हुए गुस्से में बोली।

तुझे लगता है कि मेरी चुचियों में पहला जैसा कसाव नहीं रहा ना अब यह टाइट नहीं है ....यह पपाया की तरह लटक गई है तुझे ऐसा लग रहा है ना ले देख ले देख ले .. (इतना कहते हुए अपनी ब्लाउज के बटन खोलने लगी निर्मला पूरी तरह से गुस्से में थी लेकिन गुस्से में होने के बावजूद भी वह बहुत खूबसूरत लग रही थी और उसका यह अंदाज कि गुस्से में होने के बावजूद भी वह अपनी ब्लाउज के बटन को अपने बेटे की आंखों के सामने खोल रहे थे यह देखकर शुभम शर्मिंदा होने के बावजूद भी उत्तेजना का अनुभव करने लगा और देखते ही देखते उसकी मां ब्लाउज के सारे बटन को खोल दी जिससे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पिंजरे में कैद कबूतर की तरह बाहर हवा में फड़फड़ाने लगे यह बात तो तय थी कि इस उम्र में भी निर्मला की चुचियों का कसाव जवानी के दिनों की तरह ही बरकरार थे फिर भी वह ऐसा समझ रही थी कि शायद शुभम को अब उसकी चूचियों में पहले जैसा कसाव महसूस नहीं हो रहा है इसीलिए वह दूसरी औरतों की सोबत में पड़ रहा है इसलिए वह अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल कर अपने दोनों चूचियों को अपने हाथों में पकड़ कर उसकी तरफ आगे बढ़ाते हुए गुस्से में बोली ।)

ले शुभम पकड़ अपने हाथों में ले इसे जोर से दबा .. ने पकड़ी से अब चुप क्यों मिले पकड़ना इसे दबा अपने हाथों में भरकर इसे तुझे ऐसा लग रहा है ना कि इनमें कसाव नहीं है यह लटक गई है पहले जैसे तुझे मजा नहीं आ रहा है इतना कहते हुए निर्मला अपने हाथों से अपने बेटे का हाथ पकड़कर उसके हथेली को अपनी चुचियों पर रखकर उसे दबाने के लिए बोलने लगी अपनी मां का गुस्सा देखकर उसे हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह अपनी मां की चूची को दबा दें वह सिर्फ आश्चर्य से अपनी मां की तरह देखे जा रहा था शुभम की तरफ से कोई प्रतिक्रिया ना होता देखकर वो खुद हीअपने बेटे की हथेली पर अपनी हथेली रखकर उसे जोर जोर से दबाते हुए अपनी चूचियों को दबाना शुरू कर दी । और अपने बेटे की आंखों में आंखें डाल कर गुस्से में बोली ।..

बोल तुझे मजा नहीं आ रहा है ना मेरी चूचियों को दबाने में अब ईसमें खरबूजे जैसा मजा नहीं रह गया इन में रस नहीं रहगया इसलिए तू शीतल की तरफ बढ़ रहा है यही बात है ना ।
(शुभम को अब कैसे अपनी मां को समझाना है इस बात का बिल्कुल भी समझ नहीं थी उसका दिमाग काम करना बंद हो गया था। उसकी मां को वह समझाना चाहता था उससे माफी मांगना चाहता था लेकिन उसकी मां सुनने को तैयार ही नहीं थी बल्कि उसकी हरकतों की वजह से शुभम के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी... पजामे के अंदर शुभम का लंड खड़ा होने लगा था । इस तरह की स्थिति ना होती तो जिस तरह की हरकत उसकी मां कर रही थी उसे देखते हुए शुभम अब तक उसे बिस्तर पर लेटा कर उसकी दोनों टांगों को फैला कर अपने लंड को उसकी रसीली बुर के अंदर डाल दिया होता लेकिन इस समय ऐसा करना उचित नहीं था यह बात वह भी अच्छी तरह से जानता था क्योंकि ऐसे हालात में अगर वह अपनी तरफ से इस तरह की कोई प्रतिक्रिया देता है तो उसकी मां को यही लगेगा कि यह केवल हुस्न का दीवाना है इसे औरतों से इसने नहीं बल्कि उनके बदन से मोहब्बत है इसलिए वह इस तरह की हरकत नहीं करना चाहता था कि उसकी मां को इस बात से ठेस पहुंचे वह किसी तरह से अपनी मां को मना लेना चाहता था इसलिए अपनी मां को मनाने के उद्देश्य से वाह अपना हाथ पीछे हटाते हुए बोला ।)

शीतल कीमत मस्त जवानी जिसे देखकर शुभम का भी मन भटकने लगा था उसकी बड़ी बड़ी गांड शुभम की हालत खराब कर रहे थे



शीतल की खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर शुभम का मन करने लगा था कि उसे दबा दबा कर उसे मुंह में भरकर उस का रस पी जाए


शीतल जोकि शुभम के मोटे तगड़े लंड के दर्शन कर चुकी थी और उसकी ताकत को भाप कर उसे अपनी बुर के अंदर लेकर अपनी प्यास बुझाना चाहती थी इस तरह से

Iska first part kahan milega ek aduri pyaas 1 kahan milega?
 
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