boss8308
Girls ko sexy baate krna hai to aa jao 💦😍
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Adultary banana hai kya , asia nahi karna broBhai par thoda dever ka sathi thoda scene kro fir yaad dilayega beta
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Ye Story Maa Bete Pe Focus Karegi..Bhai par thoda dever ka sathi thoda scene kro fir yaad dilayega beta
Waiting for updateYe Story Maa Bete Pe Focus Karegi..
नई कहानी के लिए आपको बहुत बहुत शुभकामनाएँ !Update 03
पूनमदेवी ने अपनी जान लगा दी अपने पल्लू को उठा के अपने सीने को छुपाने के लिए लेकिन फिर भी अपनी बड़ी बहन की नजरो से बच ना पाई हालाकी सुमित्रा ने ये नही देखा था जो सुरज उसकी मां के साथ कर रहा था..
"सुरज बेटा तू कब आया" सुमित्रा ने अंदर आते हुए कहा..
"मासी ये सब क्या है, आप से मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी.. मुझे लगा था आप तो बाकियों जैसी नही हो लेकिन आप ने भी हमारी मजबूरी का फायदा उठाना ही चाहा.. में आप से कह देता हु मां किसी से शादी नही करेगी"
सुरज से बड़ी ही गंभीरता से कहा..
"बेटा तू अभी छोटा है ये सब नही समझ पायेगा.. मेने जो भी किया तेरी और तेरी मां की भलाई के लिए ही किया.." सुमित्रा अब सुरज के सामने खड़ी थी...
"हमे किसी और का सहारा नही चाइए मासी, हम एक दूसरे का खयाल रख सकते है, और पापा भी आखिरी ख्वाहिश भी यही थी की मां खयाल में रखू.. पापा के जाने बाद से मां मेरी जिमेदारी है, मुझे पता है उनका खयाल कैसे रखना है में भी कोई बच्चा नहीं हू मासी"
सुरज अपनी मासी की आंखो में आंखे डाल के बोल रहा था सुरज की आखों में अपनी मां के लिए प्यार साफ नजर आ रहा था.. और उसका गुस्सा भी सुमित्रा उसकी आखों में देख रही थी...
"तु अभी इतना बड़ा नही हुआ की एक औरत की जरूरतों को समझ पाए.. उसके अकलेपन को महसूस कर पाए.." सुमित्रा के मुंह से निकल गया..
"दीदी आप क्या बोल रही हो.. अगर मेरा बेटा यही चाहता है तो यही सही मुझे ये शादी नही करनी दीदी" पूनमदेवी की आखों से आसू टपकने लगे..
"बारात निकलने ही वाली होगी ये क्या बोल रही है तू"
सुमित्रा ने कहा..
"मासी आप ने सुना ना मां ने क्या कहा" सुरज ने फिर से कहा अपनी मां के कंधे पे अपना हाथ डाल के..
सुमित्रा को काफी गुस्सा आ रहा था और उसका दिमाग जैसे फट रहा था की वो उसके देवर को क्या कहेगी..वो घर की छत की और चल दी और फोन पे कुछ देर बात करने के बाद नीचे आई.. वो काफी नाराज दिख रही थी.. पूनमदेवी ने जब खाने के लिए कहा वो अपनी नाराज़गी जताते हुए थोड़े गुस्से से बोली..
"तुम दोनो ही खाओ में तो तुम्हारी दुश्मन हूं ना में घर जा रही हु मेरी तो नाक कटा दी तूने पूनम" इतना कह के सुमित्रा अपना सामान लेने फट से कमरे में घुस गई..
ये कमरा सुरज का था क्यों की सुरज घर पे नही था उसकी मासी उसके कमरे में रुकी थी.. सुमित्रा बड़े ही गुस्से में थी और कमरे में जाते ही अपने सीने से साड़ी को निकल के फेक दी.. फिर अपने ब्लाउस को भी अपने सीने से अलग करने लगी जैसे ही ब्लाउस खुला उसके दोनो बड़े बड़े स्तन खुली हवा में लटक पड़े..
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सुमित्रा का पके आम जैसा भरावदार दूधिया जिस्म उपर से पूरी तरह से नंगा था.. वो अब अपने बैग से दूसरा ब्लाउस खोज ही रही थी की उसके कानो में दरवाजा खुलने की आवाज आई.. अर्ध नंगी हालत में वो जैसे ही पीछे मुड़ी उसके सामने उसका भांजा खड़ा था.. सुरज ने कभी सोचा नही था की वो कभी अपनी मासी को ऐसी हालत में देख पाएगा.. उसके होस उड़ चुके थे लेकिन उसकी आखें बस अपनी मासी की मोटी मोटी चुचियों पे जैसे अटक गई थी..
"क्या चाहिए तुझे देख नही रहा में कपड़े पहन रही हु भाग यहां से" सुमित्रा ने अपने सीने को अपने हाथो से छुपाते हुए कहा..
"मासी मुझे करना मेंने कुछ ज्यादा ही बोल दिया आप इसे नाराज़ होके मत जाओ ना.. कल चले जाना में आप को इसे रात में अकेले नही जाने दूंगा मासी आप को मेरी कसम" सुरज का ध्यान अपनी मासी के नंगे बदन से हटने का नाम नहीं ले रहा था ये पहली बार था की सुरज किसी औरत के नंगे बदन को देख रहा था..
"अच्छा ठीक है, वैसे भी तुम दोनो मां बेटे एक जैसे हो अपनी ही मनमानी करोगे" सुमित्रा का गुस्सा जैसे एक ही पल में गायब हो गया और वो अपने सीने से हाथ हटा दी लेकिन सुरज को स्तनों की बस एक जलक ही नसीब हुए और सुमित्रा ने सुरज की तरफ अपनी नंगी पीठ कर दी...जिस से उसकी आतुरता कई गुना बढ़ गई अपनी मासी के स्तनों को फिर से देखने की वो बस उन्हे घूरता ही रहा सुमित्रा के लिए ये कोई नई बात नही थी वो जानती थी की जवान लड़के स्तन के प्रति कितना आकर्षण अनुभव करते हैं और उसको अपने स्तनों पे हल्का सा गर्व भी महसूस हो रहा था की उसका भांजा कैसे उसके सीने को घूर रहा था..
सुमित्रा ब्लाउस के बटन लगा के सुरज की और मुड़ी और कातिलाना अंदाज में मुस्कुराने लगी सुरज को मासी का बदला बदला अंदाज कुच ज्यादा समझ तो नही आया लेकिन दोनो ही कुछ देर पहले हुए इतनी बड़ी बहस को जैसे भूल ही चुके थे.. सुरज बस अपनी मासी के जिस्म को निहार रहा था उसे अपने लिंग में काफी तनाव महसूस हो रहा था लेकिन 22 साल की उम्र के बाद भी उसे ज्यादा ज्ञान नही इन सब का.. हालाकि उसे पता था की लिंग का उपयोग क्या होता है औरत के पास योनि होती है और दोनो के मिलाप से बच्चा होता है ये सब ऊपरी ऊपरी ज्ञान उसे जरूर मिला था लेकिन कभी मर्द और औरत का मिलन उसने देखा नही था.. ज्यादातर सुरज नहाते हुए अपने लिंग से खेलने लगता और जाने अंजाने में ही हस्थमैथुन का आनंद लेना सीख चुका था..
पूनमदेवी भी अपनी बड़ी बहन और बेटे को साथ आता देख राहत की सास लेती है.. वो भी अपनी बड़ी बहन से माफ़ी मांग लेती है और तीनों खाने के लिए बैठ गई..
खाना खाने के बाद तीनों छत पे सोने के लिए जाते है.. दोनो बहने सोने से पहले अपनी साड़ी को निकल एक तरफ रख दी अब दोनो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी.. सुरज पहली बार आज ध्यान देता हैं की उसकी मां ब्लाउस उसकी मासी के ब्लाउस से काफी ज्यादा पुराने जमाने का था.. मासी के स्तनों का उभार उसे साफ देख रहा था और पीछे से तो जैसे उसकी मासी नंगी ही लग रही थी उसे वही उसकी मां का ब्लाउस उसके जिस्म को जरा भी दिखने नही दे रहा था.. उसकी उत्सुकता जागने लगी की मां अगर मासी वाला ब्लाउस पहने तो वो केसी लगेगी...
दोनो बहने थोड़ी देर बात करने के बाद गहरी नींद में सो गई लेकिन सुरज की आखों में नींद दूर दूर तक नजर नहीं आ रही थी जैसे ही वो अपनी आखें बंद करता उसके सामने उसकी मासी के स्तनों की वो हल्की सी जलक आ जाती.. उसे बस इतना ही याद था की वो काफी बड़े थे जैसे बड़े से गुब्बारे हो और उनका आकार गोल था सीने से चिपके हुए.. और लटके हुए नही लेकिन चट्टान की तरह तने हुए..और दो लंबे लंबे निपल्स.. उसने कई बार अखबार में प्रकाशित होती हीरोइन की तस्वीरे देखी थी लेकिन जब भी कैसी तस्वीर में लड़की के स्तन की जलक देखती वो काफी लटके हुए और दबे हुए देखते थे.. लेकिन अपनी मासी के स्तन काफी अलग थे वो मोटे थे लेकिन फिर भी तने हुए और निप्पल तो जैसे अंगूर की तरह तन के खड़े थे..
उसका दिल हो रहा था एक बार फिर से ठीक से देख लूं.. उसकी बेचनी रात के साथ बढ़ती ही जा रही थी..वो खड़ा हो गया और मासी के सर के पास जाके देखने लगा तो उसके होस उड़.. उसकी मासी की हालत कुछ ऐसी थी स्तन काफी ज्यादा उपर की तरफ से बाहर निकल आई थे और ब्लाउज की फिटिंग की वजह से सुमित्रा का सीना पूरी तरह से तन चुका था हर एक सास के साथ उसके स्तन उपर नीचे हो रहे थे...
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सुरज को महसूस हुआ कि उसका लिंग फिर से खड़ा हो चुका है और अब उसकी उत्तेजना इतनी बड़ चुकी थी की उसके दिमाग में ये खयाल भी नही आ रहा था की उसकी मां या मासी उठ गई तो वो क्या बोलेगा.. उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था.. उसने जैसे ठान लिया था की वो मासी के स्तनों को देख के रहेगा.. वो अपना हाथ धीरे से डरते हुए ब्लाउस के बटन पे रख उन्हे खोलने लगा उसका दिल जैसे धम सा गया था..
सुरज ने कभी ब्लाउस के बटन पे ध्यान तक नहीं दिया था और खोले तो उसने सपने में भी नही थे.. काफी देर तक कोशिश करने के बाद उसकी मासी का ब्लाउस खुल चुका था आखरी बटन खुले बिना ही सुमित्रा के दोनो मोटे स्तन खुल आसमान में बाहर निकल आई..
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सुरज का दिल जोर जोर से धड़क रहा था.. वो उसकी मासी के सर की तरफ से ये सब देख रहा था.. उसका हाथ अपने आप ही उसके लिंग को सहलाने लगा आज उसे अहसास हो रहा था की उसका लोड़ा पहले से काफी ज्यादा बड़ा और सख्त था..
दूध से सफेद चूचियों पे दो अंगूर के दाने जितने निप्पल सुरज की हालत खराब कर रहे थे उसका दिल हो रहा था की वो मासी के सीने से लग जाय और उनके स्तनों का रसपान करे उनका सारा दूध चूस के निकल दे..उसके हाथ अपने लिंग पे चल रहे थे और कुछ ही देर में उसका शरीर अकड़ने लगा और उसके लिंग ने तीन चार जटके में वीर्य की पिचकारी निकली और उसकी केपरी पूरी तरह से उसके ही वीर्य से भीग गई आज से पहले इतनी मात्रा में उसका वीर्य नही निकला था.. जैसे ही पानी निकल गया उसे होस आया और उसके दिल में गिल्ट की फीलिंग आने लगी.. और अब उसे मासी का खुला सीना देख के डर लग रहा था की सुबह क्या होगा जब उसकी मासी ब्लाउस को खुला पाएगी.. वो बटन बंद करने के लिए हाथ आगे करता है और उसका हाथ अपनी मासी के मुलायम स्तनों से लग गया.. उसे फिर से एक करेंट सा लगा लेकिन इस स्पर्श से सुमित्रा अपनी करवट बदल ली और सुरज को समझ आया की ब्लाउस बंद करना आसान नहीं होने वाला.. उसने रात के 4 बजे तक कोसिस की लेकिन सुमित्रा के स्तन इतने मोटे थे की बड़ी मुश्किल से ब्लाउस में कैद हो सकते थे और बिना उन्हे चूवे ये करना संभव नहीं था.. सुबह होने को थी इस लिए सुरज ने हार मान के अपनी जगा पे गया और कब उसकी निंद लग गई उसे भी पता ना चला...
नई कहानी के लिए आपको बहुत बहुत शुभकामनाएँ !
बहुत ही शानदार शुरुआत है !
Nice update