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Shayari आँखे - शेरी शायरी

komaalrani

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आँखे,गेसू - शेरी शायरी

चंद शेर पेश करने की इजाज़त चाहूंगी , आँखों के बारे में और दोस्तों से अर्ज़ है, गुज़ारिश है, इल्तज़ा है , अपनी राय से जरूर नवाजेंगे और हो सके तो इसमें शिरक़त भी करें , उस्तादों के कलाम हों , या उनके अपने, अज़ीज़ों के, .... लेकिन हों इस सिलसिले से जुड़े और इसी ज़मीन पर,... तो शुरू करती हूँ,




और जुल्फों के बारे में भी
 
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चाल मस्त, नजर मस्त, अदा में मस्ती,
जब वह आते हैं लूटे हुए मैखाने को
-'जलील' मानिकपुरी
 

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छलकता भी रहे हमदम, रहे लबरेज भी साकी,
तेरी आंखों के सद्के हमने वो भी जाम देखे हैं।
-हजीं


1.लबरेज - ऊपर तक भरा हुआ, परिपूर्ण, लबालब
 

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जब मिली आंख होश खो बैठे,
कितने हाजिरजवाब हैं हम लोग।
-'असर' लखनवी
 

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जाहिद उन आंखों की टपकती हुई मस्ती,
पत्थर में गढ्ढा डाल के पैमाना बना दें

-'आर्जू' लखनवी

1.जाहिद - संयमी, विषय-विरक्त, संयम, नियम और जप-तप करने वाला व्यक्ति 2.पैमाना - शराब का गिलास, पान-पात्र
 

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जिस तरह इक नसीम को झोंका डाल देता है झील में हलचल,
यूँ तेरी निगाह ने इस वक्त कर दिया है मेरी रूह को बेकल।
-'अख्तर' अंसारी
 

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जीना भी आ गया, मुझे मरना भी आ गया,
पहचानने लगा हूँ, तुम्हारी नजर को मैं।
-असगर गौण्डवी
 

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तिरछी नजर का तीर है मुश्किल से निकलेगा,
दिल उसके साथ निकलेगा, अगर ये दिल से निकलेगा।
-'फानी' बदायुनी
 

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तुम्हारी बेरूखी ने लाज रख ली बादाखाने की,
तुम आंखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते।
 

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तेरा ये तीरे-नीमकश दिल के लिए अजाब है,
या इसे दिल से खींच ले या दिल के पार कर।


1.तीरे-नीमकश - धनुष को आधा खींचकर चलाया हुआ तीर, जो आधा अंदर हो और आधा बाहर हो, कम खींचकर चलाए हुए धनुष का तीर, जो शरीर में पार न हो सके। 2. अजाब - यातना, पीड़ा, दुख, तकलीफ
 
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