होली के बाद अंकुश की जैसे दुनिया ही बदल गयी, अब अंकुश का धयान ना घूमने फिरने में था और न ही खेल कूद में, अब तो उसने घर से निकलना ही बंद कर दिया था, अब उसका पूरा दिन किसी न किसी बहाने से छत के चक्कर लगाने में ही निकल जाता था, शरू में तो गरिमा भी कम ही नज़र आती थी लेकिन फिर धीरे धीरे उसका भी छत आना...