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सोनू का मन सोनी की चंचलता पर फिदा हुआ था जब से वह सोनी और विकास की शादी के पहले गेस्ट हाउस में सोनी को नग्न और संभोग अवस्था मे विकास के साथ देखा था। उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सोनू सोनी के साथ संभोग रत में डूब जाएंगे लेकिन ऐसा नही हो पाया। लवली जी, कहानी में ऐसी परिस्थिति ले आइए की सोनू को...
"अच्छा? अभी तो आप नैनी पीक जाने की जल्दी में थे? अब अपनी इन कल्पनाओं को ज़रा लगाम दीजिए विकास जी, वरना हम यहीं रह जाएंगे और दिन का सारा मज़ा किरकिरा हो जाएगा।"
विकास (हौले-हौले प्रहार करते हुए): "सोनी... महसूस करो.. और, कल्पना करो कि यह सूरज का वह विशाल और फौलादी अंग है। वही दिव्य लिंग जो तुम्हारे भीतर के सारे सूखे को खत्म कर देगा। रिश्ते-नाते, लाज-शर्म सब कुछ भूल जाओ सोनी! उसे पूरी तरह अपना लो।"
बिलकुल लवली जी, पाठको को अपनी राय अवश्य देनी चाहिए। इससे लेखक का आत्मविश्वास बढ़ता है। इतनी अच्छी कहानी पर भी कोई अपनी टिप्पणी नही देते तो ये लेखक की मेहनत को मूल्यवान नही समझते।
वाह कहानी को किस दिशा में ले जाए, ये आपकी कौशल को दर्शाता है। मनोरमा के साथ उसकी बेटी पिंकी को फिर से कहानी के मुख्यधारा में जोड़ दिया। तो भविष्य में पिंकी के साथ सूरज के साथ भी कुछ पल देखने को मिलेगा। सब की कामुकता को फिर से वापस ला रहे हैं लवली जी, सोनू की कामुकता जो लंबे समय से दबी हुई है, उसे...