दो गुना लगान ..अरे लगान दो गुना नहीं दस गुना
ननद का जोबन परमानेंटली गिरवी रखवा देंगी रीनू भाभी बड़े खिलौने भी ले आयी हैं अपनी ननद के लिए वो
मतलब एक साथ आगे भी दो और पीछे भी दो...
दो गुना लगान ..अरे लगान दो गुना नहीं दस गुना
ननद का जोबन परमानेंटली गिरवी रखवा देंगी रीनू भाभी बड़े खिलौने भी ले आयी हैं अपनी ननद के लिए वो
और हमें तो मजा मिलता हीं मिलता है...और यह मामला ककोल्ड या स्वैपिंग से एकदम अलग है जो मुझे कई बार ज्यादा यांत्रिक या अंग्रेजी कहानियों से प्रभावित लगता है, जीजा साली के रिश्ते में यह बात रिश्तों से आती है और कई बार बड़ी साली भी छोटे जीजा को साली का पूरा मजा देती है जैसे इसमें रीनू दे रही है।
आखिर कान नाक छिद्वाते भी तो दर्द हुआ था...एकदम रीनू रसज्ञ है, पारखी है और एक ऐसा सुख, पीड़ा में आनंद जिसे हो आये मेरी मधुशाला, वाला जहाँ बिना दर्द के मजा नहीं और जीजा साली के रिश्ते के नए आयाम छू रही है
अब भुगतेगी....साली का काम ही है उकसाना और गरियाना
धीरे-धीरे चिरइया कहाँ से कहाँ पहुँच गई...एकदम और वो भी अजय जीजू वाली पेशल सिगरेट
लेकिन थोड़ा फ्लैश बैक में जाइयेगा तो, गुड्डी जब बाजी हारी थी, तो उसे जिंदगी में पहली सिग्गी उसके भाई ने ही पिलाई थी, स्मोक का मजा
जोरू का गुलाम भाग ८९ - जिंदगी का पहला स्मोक पृष्ठ १२८
उसके 'सीधे साधे भैय्या ' भी सिगरेट सुलगाये ,एकदम उसके पास , और उनकी निगाहें भी अपनी उस![]()
Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी
जोरू का गुलाम। भाग २५९ तीज पार्टी का दिन -निधि पृष्ठ १६२९ १२,००० शब्दों से ज्यादा बड़ा सुपर मेगा अपडेट पोस्टेड कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें...exforum.live
एलवल वाली बहिनिया के छलकते जुबना पर ,
मैंने आँख से इशारा किया
और उनके मुंह से निकला धुंआ सीधे उस किशोरी के गोरे गोरे टॉप फाडू पहाड़ों पर ,
गुड्डी का चेहरा , उसके उरोज सब कुछ उसके भय्या के सिगरेट के धुंए में खो गए थे।
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लेकिन मुझे मजा नहीं आया।
मेने उन्हें फिर इशारा किया ,और अबकी दो तीन कश 'गुड्डी के सीधे साधें भैय्या ' ने कस कस के लिए ,उनका पूरा मुंह फूला हुआ था ,बस।
और मैंने एक हाथ में अपनी ममेरी ननद की दोनों चिट्टी कलाइयां जकड़े जकड़े , दूसरे हाथ से कस के गुड्डी के गोरे चिकने गाल दबा दिए।
चिरइया ने चोंच खोल दी , बस।और उनके होठों ने कस के अपने होंठों के बीच उस किशोरी के रसीले होंठ , और अब गुड्डी के सर को उन्होंने कस के दोनों हाथों से पकड़ लिया।
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उनके होंठ गुड्डी के होंठो को भींचे उस के होंठ का रस ले रहे थे और गुड्डी के मुंह में उनके मुंह का सारा धुंआ ,
बिचारी ,ननदिया न खांस सकती थी , न स्मोक निकाल सकती थी।
जिंदगी का पहला स्मोक ,अपने भैया के होंठों से।
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जबरदस्त अनुप्रास अलंकार, अगर हाईस्कूल में कोई लड़का इसे अनुप्रास के उदाहरण में दे दे तो १० में १२ जरूर मिले
और हर बार लगता है ..Komal ji aap ki story ab tak sabse best hai zitni bar pado utna hi maja aata hai






पहले भौजाई पर दांव लगाया...और अब उन्होंने अपनी भौजी के पिछवाड़े का मजा भी ले लिया है तो उनको मालूम है की गोल दरवाजे का रस भी कम नहीं है, पिछवाड़े के तो वो पहले ही रसिया थे और अब भौजी के बाद साली मटका मटका के चलती थी तो उसको भी उन्होंने अपने जंगबहादुर की ताकत दिखा दी।
हर हाल में खुश...ननदें होती ही हैं दोनों तरफ बल्कि हर तरफ से मजा लेने के लिए