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Adultery खलिश

Thakur

असला हम भी रखते है पहलवान 😼
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Update no. - 15



"आह्हह््ह".....एक दम से मेरे सर में दर्द हुआ तो आंखें खुली मेरी पर तभी बहनचो जैसे पूरी जमीन एक बार फिर हिली और मेरा मुंह हवा में उठा और फिर टकरा गया....फिर मैंने जरा ध्यान दिया अपने आसपास तो मुझे महसूस हुआ कि की मैं चल रहा हूं सॉरी उड रहा हूं



"भोसडीके तू गाडी में है"....मेरी बकचोद सोच को गरीयाते हुए मेरे दिमाग ने कहा।




एक बार फिर मैंने अपने आस पास देखा तब समझ आया मैं ओमनी गाडी में था और मेरे सामने दो जानवर टाइप आदमी थे और एक मेरे बगल में बैठा था जिसको मैने पेला था । और आगे वो दोनों पुराने वाले चूतिए थे बस वो दोनो खबरी और वो पतला वाला जिसका सर पोल में दिया था वो दोनों नहीं थे और एक और सांड टाइप आदमी नहीं था शायद वो उन दोनों के पास था ।




मैंने अपने हाथ हिलाने की कोशिश की तो हिल गये मतलब मेरे हाथ बंधे नहीं थे पर सर में अभी भी ऐसा लग रहा था जैसे हथोडे पड रहे हों भयंकर वाला दर्द था मैं समझ गया था की ये लोग साक्षी को नहीं पकड पाए थे तो मुझे ही ले जा रहे थे अपने बॉस के पास मेरी नजर बहार पडी तो देखा अभी हम उस ही सुनसान रोड पर थे जिसका नाम मैंने साक्षी से पूछा था।





अब देखो वैसे तो मुझे चुपचाप डला रहना चाहिए था क्योंकि मैं अपने शरीर के दर्द से समझ गया था की इन्होने बेहोस होने के बाद भी मारा है मुझे तो मेरा दिमाग सटक चुका था कैसे लोग हैं बहनचो पीछे से मारते हैं....



(तो साले तूने भी उस खबरी को पीछे से मारा था ....मेरे मन में एक अवाज आई...



"लेकिन मैं अकेला भी तो था ".... मैंने खुद को ही समझाया और और....




और क्या सीधा हुआ एकदम से जिस सीट पर बैठा था उसपर दोनों हाथ टिकाए और शरीर को उछाल ते हुए दोनों लातें सखमने वाले के मुंह में दी उसके बहुत जोर से लगी थी क्योंकि गाडी का कांच टूटा और उसका सर बहार की तरफ लटक गया मैंने बिना मोका देते हुए अपने बगल से अधमरे गुंडे के मुंह में कोहनी दी अपना सर सीट पर टिका कर गाडी की छत की तरफ मुंह करे सो रहा था तो कोहनी सीधे नाक और होंठ में पडी और उसकी छीख निकली तभी वो जो बंदा एक और था ना सामने वाला वो सांड जैसे मुझसे टकराया और उसकी टक्कर से मेरा शरीर गाडी की बाॅडी से टकराया और मेरे फिर उस कंधे में लग गई और इस बार मुझे इतना गुस्सा आया की मेरी नसें फटने को हो गई।




मैंने अपने सीधे हाथ को उसकी गर्दन में फंदे जैसे फसाया और उसका सर एक बार दिया गाडी की बाॅडी में फिर दूसरी बार तीसरी बार चौथी बार और बस देता ही गया जब तक उसका सर नहीं फट गया जब उसके सर से खून के फब्बरा निकला तब छोडा मैंने उसको पर तब ही आगे वाले का हाथ पीछे को घूमा और उसके हाथ में बंदूक थी जैसे ही उसने निशाना मुझ पर लगाया मैंने उसके हाथ पर छलांग लगाई उसके हाथ को पकडा और अपनी तरफ खींचा और खींचता हुआ पीछे होता गया जब तक वो भी सीट के ऊपर से पीछे की तरफ नही आ गया जहां मैं बैठा था पहले तो उके हाथ को मोडा जब उसके हाथ से बंदूक छूटी तो सीधा मुक्का उसके मुंह में जडा और वो मरीयल सा एक मैं ही खून‌ डाल गया पता नहीं मर गया या बेहोश हो गया ।




जब मेरा ध्यान ड्राइवर वाली सीट पर गया तो उधर कोई था ही नहीं


"अॉटोपायलेट है ये गाडी "...... मैंने खुद से कहा लगता है मेरे दिमाग में ज्यादा चोट लगी है।




पर तब ही मेरा ध्यान गाडी की स्पीड पर गया और लोग को यकीन नहीं होगा गाडी की स्पीड...गाडी की स्पीड लंड बराबर थी मतलब गाडी जगह पर थी तब ही मेरे दिमाग ने एक बहुत मुश्किल सवाल किया कि ये सब किस तरफ इशारा कर रहे हैं।




"अबे लोडूं गाडी छोडकर ड्राइवर भाग गया "....मेरे दिमाग ने मुझे कहा।




और दिमाग की बात सुनते ही मैं जल्दी से बहार निकला और जैसे ही सुनसान रोड पर नजर डाली तो वो तीसरा चूतिया भयंकर तरीके से भाग रहा था मतलब हुसैन बोल्ट टाइप अभी मैं सोचा की इसको पकडता हूं फिर सोचा गांड मराये ये मेरे दर्द हो रहा था बुरा वाला काश मैं अपनी पटाके वाली बंदूक लाया होता तो ये चूतिया बिछ गया होता और ऐसे ही मैंने अपनी उंगलियों से बंदूक बनाकर एक आंख बंदकर उस पर निशाना लगाया और अपने मुंह से ही गोली चलाने की आवाज निकाली और ऐक्टिंग की पर बहनचो वो आदमी मर गया ....एक पल के लिए तो मैं भी चोंक गया ये क्या हुआ हाथ से गोली कैसे निकली ...




"हैलो मिस्टर कुछ हेल्प चाहिए क्या ".....मेरे पीछे से आवाज आई।



"मिस्टर नही भगवान बोल भोसडीके हाथ से गोली चलाई है मैने वो देख सामने वो 100m आगे मरा डला है "....मैने बिना पीछे मुडे ही कहा फिर जब तसल्ली हुई की मर गया मादरचोद तब पीछे घूमा।




और पीछे देखा तो एक आदमी अपनी पिस्तौल से साइलेंसर खोल रहा था और मुस्कुरा रहा था मेरी तरफ और जैसे ही मेरी और उसकी आंखें मिलीं तो उसने अपनी बंदूक की तरफ इशारा किया जैसे बता रहा हो तू चूतिया है भगवान नहीं और गोली मैंने चलाई थी तूने नहीं फिर जब मैंने सही से देखा तो उसके पीछे अंधेरे में एक जीप खडी थी जिसमें तीन और लोग थे वो आदमी धीमी चाल चलते हुए आया मेरे पास और मेरे कंधे पर हाथ रखा ।




"बल्ली नाम है मेरा और जो विष्णु भाईया ने नंबर दिया है मेरा है....... मतलब जिस नंबर पर तुमने sms किया था मदद का वो मैं ही हूं अब तुम जाके जीप में बैठो मैं जरा इनको निपटा दूं और मुझे सहारा देते हुए जीप में बिठाया और एक आदमी से इस उस ओमनी को लास के पास ले जाने को कहा फिर मैं तो टेक लगा कर जीप की सीट पर पसर गया आंखें बंद करली कुछ ही देर बाद




"धांए .. धांए........... धांए..धांए ".....चार गोली चली में समझ गया की बाकी चार भी स्वर्ग सिधार गए फिर मैंने सोचा उसको साइलेंसर लगा के क्यूं मारा पर मेरे दिमाग ने मना कर दिया की वो नहीं बताऐगा क्योंकि वो थका हुआ है इसलिए मैं उससे कुछ नहीं सोचा ।




"धम्मममममाकक्क्कक".....अभी मैंने कुछ ना सोचने का सोचा ही था की एक भयंकर धमाके की आवाज आई और मैं उचक के सीधा बैठा तो वो चारों जीप की तरफ आ रहे थे और लो ओमनी जल रही थी भयंकर तरीके से.....




उसके बाद मैं बस आंख बंद करके लेट गया जीप चालू होने की आवाज आई और आगे बड गई.....



*************


50 मिनट पहले (ये वो टाइम है जब मैं और साक्षी फालुदा खा रहे थे)




"ट्रिन ट्रिन"..... आशीष जो अभी अपने सरकारी घर जहां वो सोता था दफ्तर से आने के बाद वहां घुसा ही था की उसके फोन की घंटी बजी ।




"हेलो कौन‌"..... आशीष ने फोन जेब से निकाला और काॅल चालू करते हुए पूछा।




"आशीष अहलावत जी से बात हो रही है"...... सामने से आवाज आई।




आशीष -"जी उसी से बात हो रही है "




"मेरा नाम सैफ उस्मानी हैं "....



आशीष -"तो आखिरकार आपने हमें फोन कर ही लिया अच्छा है नहीं तो मैं खुद आ रहा था आपसे मिलने "




"मेरे पास ज्यादा वक्त नहीं है बरखुरदार आपकी तरह बस इतना कहना‌ था की मेरा माल छोड दो नहीं तो यूं ही परेशानी बुला रहे हो अपने जीवन में "




आशीष -"मैं भी यही कह रहा था आपसे आप अपना पूरा गैरकानूनी माल हमारे हवाले कर दे और आपकी इज्जत का ख्याल रखते हुए आपकी सजा कम करवा दुंगा"




"अभी आपको महीना भर हुआ है नीमच में आए इसलिए शायद आप मुझसे वाकिभ नहीं है वरना ऐसे बात नहीं कर रहे होते"...




आशीष -"अगर मैं फिर भी ना कहुं तो "




"तो फिर एक हाथ से हमारा सामान हमको देना और दूसरे से अपनी बेटी ले जाना जो कुछ ही देर में हमारे कब्जे में होगी".....और सामने से फोन कट गया।




सैफ की आखरी बात सुनते ही आशीष के तो जैसे हाथ पांव फूल गये उसने हड़बड़ाहट में रोमा को फोन किया .....




"हैलो रोमा"...... सामने से फोन उठते ही आशीष ने कहा



"क्या हुआ आपको ऐसे गबराए हुए क्यूं हो आप क्या हो गया सब ठीक है ना ".....अपने पती की घबराहट को महसूस करते हुए रोमा ने भी चिंता से कहा।




"रोमा साक्षी किधर है".....



रोमा -"वो तो मयंक के साथ बाजार तक गई आपको क्या हुआ।"




"फोन‌‌ लगाओ मयंक को दोनों बच्चों को ख
तरा है जल्दी"




रोमा -"पर हुआ क्या ये तो बताए "



"मां|||||"......अभी रोमा और आशीष बात कर ही रहे थे की साक्षी ने घर के भीतर घुसते हुए रोमा को पुकारा....
To ab daav pench lagane shuru hue he , shaah maag ke khel me pyade marte rahenge, akhir rajao ka ego bhi to satisfy karna he :dontmention:
Update 15




अपडेट से पहले आप सब रीडर एक कहानी सुनो... :D




एक जंगल में एक शेर हुआ करता था एक बार उस शेर को अकेला पाकर उसको पकडने जंगल में शिकारी आए पर एक खरगोश ने उसको अपने पीछे लगाकर जाल से बचा लिया .....जब शिकारियों को पता चला तो उन्होंने पहले खरगोश को मारने की सोची और उस पर हमला किया ......तो बताओ शेर को क्या करना चाहिए आपके उत्तर का इंतजार रहेगा... शुक्रिया!!




पता नहीं कौन सा वक्त था ये पर एक बार फिर मैं नींद से जागा और खुद को लेटा हुआ पाया पर इस बार में एक बेड पर था और जब आसपास का जाएजा लिया तो पता चला की मैं अभी अस्पताल में हूं।





सामने ही सोफे पर मेरा चुतिया साथी बैठे बैठे ही नींद की वादियों में था ।‌ और जो सबसे बढ़िया बात थी वो ये थी की अभी शरीर में दर्द नहीं था बिल्कुल पहले मैंने सोचा की राजीव को उठा देता हूं पर फिर ध्यान आया तो सोचा सो रहा है मतलब आधी रात के आसपास का टाइम होगा नहीं तो‌ ये जाग रहा होता या और भी कोई कमरे में होता इसलिए मैंने राजीव को बिल्कुल डिस्टर्ब नहीं किया और चुपचाप कमरे का जाएजा लिया तो मेरे बाएं तरफ टेबल थी जिसपर फल और कुछ दवाएं रखी थी वहीं फलों के बगल से एक रिमोट रखा था ।





तो उसको देखकर पता चला की वो‌ टीवी का रिमोट था तो चुपचाप बिना अवाज किए मैने टिवी चालू कर ली। और आवाज को 75 पर कर दिया और स्पोर्ट्स का चैनल लगा दिया उधर विश्व कप 2003 के हाईलाइट आ रहे थे वो भी फाइनल का जिसमें आस्ट्रेलिया ने भारत को हराकर विश्व कप जीता था और तब ही एक कंगारु ने छक्का मारा तो कोमेन्टेटर चिल्लाया 'सिक्स'....और जैसे ही वो चिल्लाया राजीव सोफे से उचका चूंकि आवाज बहुत कम थी तो उसका नींद से जागना मुझे समझ नहीं आया उसको इग्नोर करके मैंने टीवी पर ध्यान दिया श्रीनाथ बोलिंग के लिए रन अप ले रहा था तब ही राजीव ने मेरे हाथ से रिमोट छुडा लिया ....और यहां तीन चीज़ें एक साथ हुंई.





मेरा मुंह राजीव को गरियाने के लिए खुला , दरवाजा नर्स के अंदर आने के लिए खुला और राजीव का मुंह चिल्लाने के लिए खुला क्योंकि मैंने उसको अकेले गरियाने के लिए मुंह नहीं खोला था बल्कि मारने के लिए हाथ भी चलाया ।





"इतनी रात में टीवी कौन चलाता है"...... नर्स ने मेरे हाथ की नस को टटोलते हुए कहा और मुस्कुरा दी।





राजीव -"इसकी तरफ से मैं माफी मांगता हूं मेम "..... राजीव ने मुझे घूरते हुए कहा। इस बात को सुनकर नर्स की मुस्कान गहरी हो गई।





फिर राजीव फ्रेस होने का कहकर बहार निकल गया और नर्स ने अपनी कलाई में बंदी घडी के हिसाब से पल्स चैक किया और फिर जैसे ही वो खड़ी हुई....





"साॅरी मिस वो नींद टूट गई और बहुत अजीब सा लग रहा था तो इसलिए मूड चैंज करने के लिए टीवी चालू किया था मेरी वजह से B आकी मरीज़ को तकलीफ़ हुई होगी..."




“नहीं, यह ठीक है मयंक कोई दिक्कत वाली बात नहीं है..वैसे भी इस फ्लोर पर तुम अकेले हो तो बेफिकर रहो लेकिन तुम्हारी वजह से मुझे शिकायत जरूर हुई है "




मयंक-"आपको मेरी वजह से तकलीफ वो कैसे?"





अभी वो नर्स कुछ कहती उसे पहले ही राजीव आ गया जिसको देख कर नर्स चुप हो गई या राजीव को मेरा ध्यान रखने का कहे कर चली गई और जाते जाते एक अच्छी सी मुस्कान जरुर दे गई।





कितनी प्यारी आवाज थी उस नर्स की उम्र भी 26- 27 होगी कितना अच्छा लग रहा था उससे बात करके पर फिर एक बार राजीव ने सब चौपट कर दिया अब इसका करुं ...(आप लोग बताओ)





"ओर पंडत मेरी जान क्या हाल है.....घना कुंभकर्ण हो रहा है 8 घंटे से सो रहा है "...... राजीव ने बिस्तर के बगल से रखे एक स्टूल पर बैठते हुए कहा और एक थप्पड़ मेरी सीधी जांग पर दिया ....




मयंक -"तेरी दिक्कत क्या बहनचो लग गई मेरे और इतनी जल्दी थी आने की नर्स से बात भी नहीं करने दी ".....



राजीव -"बस बहुत है अब और ये बता तूने तो कहा था सिर्फ तीन लोग आए थे पर वो तो आठ थे .......सच कह रहा हूं कसम से अगली बार में मारुंगा अगर कुछ छुपाया तो .....और मैंने मारना शुरू किया तो कोई बचाने भी नहीं आएगा।".......... राजीव ने एक दम से सीरीयस होते हुए कहा।





मयंक -"अरे मेरे भाई गुस्सा क्यों हो रहा है अब सब हो गया ना छोड ना अब ठीक है और मेरे ख्याल से साक्षी को पकड़ने भी नहीं आएगा और अगर तुझे रोक लेता तो तू भी मेरे बगल वाले बिस्तर पर लेटा होता और साक्षी को वो ले गये होते ".....





राजीव -"कुछ घंटा ठीक नहीं हुआ तूझे पता है क्या हुआ?"..... राजीव ने थोडा चिंता और सीरियसनेस के साथ कहा....




फिर मुझे राजीव ने सब कुछ बताया अंकल और सैफ उस्मानी की बातचीत और उसकी धमकी के बारे में......




मयंक -"*म जी की कसम राजीव मैं कतई नहीं चाहता की मैं फिर इन सब में पड़ूं मैं चबंल से यहां अपनी एक नई शुरुआत करने आया हूं बीस साल का हो गया हूं पर अगर 18 साल से लेकर पिछले तीन महीने तक के समय में जैसा था अगर उसका आधा भी हुआ ना तो इस उस्मानी की 'मानी' उसकी गांड में घुस जाएगी।




राजीव -"समझ रहा हूं भाई मैं पर पहले तू खडा तो हो जा अभी तो अगर पैर जमीन पर भी रखा तो चीख निकलेगी मु़ह से"...


जैसे ही राजीव ने मुझे सिरियस देखा उसने अपने मूड को फिर नोर्मल कर लिया हम दोनों जिंदगी में बहुत कम बार साथ में सीरियस हुए हैं और मैं लिख दे सकता हूं जिसके लिए हुए थे वो आज भी चलते उठते बैठते हमें ही याद करता हो गा।




मयंक -"टाइम क्या हुआ है"......




राजीव -"रात के तीन बज रहे हैं.....क्या फायदा तेरे जैसे भाई का मैं अपनी महबूबा के साथ सपने देख रहा था तूने सब खतम कर दिया गरुण पुराण में इस पाप के लिए अलग सजा है साले देखियो तुझे भी कोई अपनी महबूबा से मिलने से रोकेगा...."



मयंक -"सीधे बोलना तुझे नींद आ रही चल जा सो जा मैं तो बहार चक्कर मार कर आता हूं "




"नर्स का केविन सिडियों के पास है "......और इतना सुनते ही मैं खडा हुआ बिस्तर से... पूरा शरीर अकड रहा था भयंकर दर्द हो रहा था ।




पर यहां पर एक बात पता है ...राजीव ने एक पल के लिए भी मुझे सहारा देने के लिए हाथ आगे नहीं बढाया और साला मेरे उठते ही बिस्तर पर पसर गया । इसका मतलब समझते हैं आप लोग जो आप को जीवन में खुद से आगे देखना चाहता है वो सहारा नहीं देते बस रास्ता भटकने पर सही दिशा प्रदान करते हैं जैसे मुझे राजीव ने नर्स का एड्रेस बता कर की :whistle:




************



(ये वो समय है जब मैं और बल्ली रघु के गुंडों क़ो निपटा कर वहां से निकल चले थे।)




"ट्रिन ट्रिन"........रघु जो अभी अपने अड्डे पर स्मेक का डोस तैयार कर रहा था उसके फोन की घंटी बजी ।




"कौन बोल रहा है ".....रघु ने बिना फ़ोन नंबर देखे ही काॅल चालू कर दिया और सवाल किया।




"रघु हम बोल रहे "...... सामने से आवाज आई...




"अरे सैफ साहब बताए कैसे याद किया ...."......आवाज पहचाते हुए रघु ने कहा।



सैफ -"रघु मियां जल्द से जल्द हमें उस एहलावत की बेटी का रोता या चिल्लाता हुआ mms फोरवड करो जिससे हम भी उस एहलावत की अकड खतम कर सके"




रघु-"जी बस अभी मेरे आदमी उस लडकी को लाते ही होंगे मैं अभी भेजे देता हूं "



उसके बाद रघु ने अपने बंदों को फोन लगाया और फिर लगाता ही रहा क्योंकि उनकी गांड तो मैं तोड चुका था पर फिर उसने उस खबरी को फोन लगाया और उससे उसने सब कुछ पूछा और जब उसको पता चला की बाकी पांच लोग उस लडके (मयंक) को रघु के पास लाने के लिए निकले थे।




पर उन पांचों को फोन रघु पहले ही लगा चुका था । फिर रघु ने अपने और दूसरे लोगों से पता लग वाया और एक घंटे में पता चल गया की उन पांचों को किसी ने जला दिया ।





अब रघु भी सोच में था आखिर ये उसके आदमियों को मार कौन रहा है पर तब ही सैफ का फोन एक बार फिर आया और जब रघु ने सब कुछ सैफ को बताया तो उसका भी यही हाल था क्योंकि वो जानता था रघु कोई छोटा मोटा आदमी नहीं था इंदौर में उसका दबदबा था .......



वहीं जब सैफ का प्लान फैल हो गया तो उसको ऐसा लग रहा था मानो उसको जिंदा दफना दिया हो। क्योंकि आज से पहले कई आशीष जैसे अफसरों को डरा धमका कर अपना अफीम का धंधा बड़े आराम से चला रहा था।


एक तरफ रघु का गुस्सा उसके दिमाग में चड चुका था उसने अपना मन बना लिया था इस बार आर या पार वहीं सैफ भी एक प्रण करते हुए अपने बिस्तर की ओर चल पडा ..... वहीं इन दोनों से बेखबर मयंक लगंडाते हुए नर्स के केविन की तरफ बड रहा था तो वहीं जब आशीष को सब पता चला तो वो मयंक को देखने के लिए वापस इंदौर आ रहा था बस में सोते हुए.....




जहां आशीष सो रहा था वहीं उसकी बेटी की आंखे छत पर लगे पंखे को घूरे जा रही थी पूरी रात धीरे धीरे करके निकल चुकी थी दिन आने वाला था पर सब चीजों को जानने के बाद से साक्षी अपने कमरे से बहार नहीं निकली थी क्योंकि उसको अस्पताल जाने से मना कर दिया था कहां तो वो सोच रही थी की वो मयंक से नाराज रहेगी और उससे बात नहीं करेगी और कहां अब उसकी चिंता में उसको नींद तक नहीं आई थी......उसका मन सिर्फ एक ही सवाल दोहरा रहा था....


"आखिर क्यों मयंक ने इतना बडा रिस्क लिया .... क्यों?"

Update 17


"हैलो भाई"......रघु के फोन पर आज सुबह ये फोन आया था जो जो वो उठा नहीं सका इस वजह से उसने दोबारा फोन लगाया था




"हाँ रघु तुमसे कुछ काम था"...सामने से आवाज आई..



रघु - "हुकुम करो बलबीर भाई...आप को पूछने की जरूरत है भला आदेश करो''




बलवीर- "देख रघु मैंने तुझे हमेशा सपोर्ट किया है चाहे वो तेरे केस हो या पैसे की मदद और आज पहली बार मुझे तेरी मदद चाहिए एक लडके का पता लगाना है "




रघु -"जी भाई आप मुझे उस लडके का नाम और फोटो mms कर देना "




बलवीर -"उस लडके का नाम मयंक है "




रघु -"मयंक हम्मम ठीक है और कोई जानकारी है उसकी"




बलवीर -"अभी कुछ दिन पहले ही इंदौर रहने गया है और उसके अलावा में भी कुछ नहीं जानता उसके बारे में "




रघु -"ठीक है भाई "




ये बलवीर वही आदमी है जिसकी बात द्ददा से हुई थी। जहां ये लोग जिस लडके की बात कर रहे हैं वो इस वक्त अस्पताल के अपने कमरे के सोफे पर सो रहा था।




*************




"राजीव, राजीव उठो बेटा "...... आशीष जो बस अड्डे से सीधे यहां अस्पताल में आ पहुंचा था जब उसने कमरे में घुसकर हालत देखी तो वो एक बार के लिए उसको आंखों पर विश्वास नहीं हुआ।




कमरे का हाल कुछ ऐसा था की मयंक कमरे के कोने में रखे सोफे पर सो रहा था और राजीव आराम से बिस्तर पर घोडे बेचकर सो रहा था। अभी आशीष राजीव को उठा ही रहा था की तब ही कमरे में साक्षी और रोमा भी आ गए और सुबह छः बजे ही कमरे में राजीव और मयंक के अलावा तीन और लोग थे‌




साक्षी जैसे ही कमरे में आई तो सीधे मयंक की तरफ भागी पर बीच में ही रुक गई उसकी शकल से साफ पता चल यहा था की वो मयंक से बात करधा चाहती है पर शायद उसको एहसास हो गया था की अभी उसके मां बाप दोनों ही उसके सामने थे।





"अरे अंकल आप कब आए ! "...... राजीव की आंख जैसे ही खुली तो अपनी आंखों के सामने आशीष का चेहरा देखकर चौंक गया।




आशीष -"हां बेटा मैं पर मुझे तो बताया था की मयंक के लगी है लेकिन बिस्तर पर तुम सो रहे हो और पट्टी भी मयंक के ब़धी है।"




राजीव -"नहीं नहीं अंकल मैं एक दम सही हूं लगी मयंक के ही हैं"




रोमा -"मैं मयंक को उठा देती हूं".......जब तक राजीव भी बिस्तर से खडा हो गया।




"मयंक बेटा उठो .... मयंक"......रोमा ने मयंक के पास जाकर उसको आवाज लगाई।





"ऐसे तो उठ गया साला सांड ....." राजीव ने बुदबुदाते हुए कहा जिसको शायद साक्षी ने सुन लिया और सुनते ही राजीव को ऐसे घूरकर देखा मानो उसको खा जाएगी और राजीव ने इस हरकत पर बत्तीसी दिखा दी।




"रुको आंटी मैं उठाता हूं".....जब रोमा के दो तीन बार आवाज लगाने के बाबजूद मयंक ना उठा तो राजीव ने आगे बढ़ते हुए कहा।




"आह्हहहह.....कौन है बह्हहन्ननन"...... राजीव ने मयंक के पास पहुंचा और पहले तो ऐसे खडा हुआ की मयंक बाकी तीनों को दिखाई ना दे और हल्का सा उस जख्म को दबा दिया मयंक को जब दर्द का एहसास हुआ तो वो उचक कर खडा हुआ और उसके मुंह से गाली निकल ही जाती अगर राजीव ने समय रहते उसको बाकी तीनों की मौजूदगी का एहसास ना कराया होता।





"गुड मॉर्निंग अंकल आंटी "......अपने सामने अंकल आंटी को देखकर उनसे कहा उसके भयंकर दर्द हो रहा था और जो हरकत राजीव ने मयंक के साथ की थी वो शायद राजीव ही कर सकता था।




"तुझे तो मैं हवाल देखुंगा भोसडीके"..... मयंक ने सहारा लेकर खड़े होते हुए कहा।





राजीव -"तो साले जब तू कमरे में आया तो उठाया क्यूं नहीं और सोफे पर क्यों सो गया और तू धरती पर सोता तो लं* फर्क नख पडता पर साले तूने नर्स के साथ क्या किया वो भी नहीं बताया".... राजीव ने धीमी आवाज में कहा।




मयंक -"दिखा दी ना ओकात साले .....कैसा भाई है तू"....




"क्या धीमे धीमे बात कर रहे हो तुम दोनों".....रोमा ने हल्का हस्ते हुए कहा।




"कुछ नहीं आंटी..... मैं जरा फ्रेस होकर आता हूं"....... राजीव ने कहा और जाने लगा ।





"राजीव मैं भी चल रहा हूं "..... मयंक ने कहा और लड़खड़ाते हुए आगे बडा ।





पर तब ही मयंक थोडा गिरने के लिए हुआ तो साक्षी ने आगे बढ़ते हुए उसको संभाला और एक बार फिर राजीव को घूरा जैसे कह रही हो शरम है क्या और राजीव भी समझ गया और आगे आकर मयंक को सहारा दिया और अपने साथ ले गया ।




उसके बाद मयंक से सब ने बता की और सब कुछ पूछा और आशीष ने कुछ देर मयंक से अकेले में भी बात की और फिर सब कुछ देर वहीं रहे लेकिन इस सब के दौरान साक्षी ने एक बार भी मयंक से कुछ बोला नहीं ना उसका हाल चाल पूछा बस चोर नजर से मयंक को देखे जा रही थी और इस दौरान मयंक की भी उससे आंखें मिली और राजीव आशीष बगेरा के आते ही अपने घर चला गया था चूंकि वो रात से ही यहां था और फिर उसने भी अपने घर सब कुछ बताया इस सब में दोपहर हो गई तो आशीष बगेरा भी घर चले गए क्योंकि वो लोग सुबह ही आ गये थे ।





उसके बाद अनिल राजीव उसकी मां और बडी बहन आ गये जहां दीदी ने मयंक को झूठे गुस्से से डांटा भी अनिल अभी तक कमरे में नहीं आया था वो नीचे अस्पताल में सब चीज देख रहा था और जब वो कमरे में आया तो सबसे पहले उसने राजीव की बाइक उससे ली और कार की चाबी थमाते हुए राजीव और बाकी सब को घर बेज दिया।





"चाचा आप गुस्सा नहीं करोगे पहले ही कह रहा हूं".....जब कमरे में अनिल और मयंक रह गये तो मयंक ने अनिल से कहा।




"बेटा तुझे एकाद का चेहरा याद है क्या "..... मयंक की बात को नजरंदाज किया और मयंक के सर पर बंधीं पट्टी देखते हुए सवाल किया।





"चाचा क्या फायदा अगर याद भी होता तो.....सब का अंतिम संस्कार तो हो चुका है हीहीही..."..... मयंक जानता था की अनिल कौन है इसलिए वो बस अपने इस चाचा को शांत करने की कोशिश कर रहा था जिसकी आंखें लाल थी सुर्ख लाल .....वो जानता था की उसका चाचा उसको बहुत प्यार करता था और बचपन में भी विष्णु से पहले उसने ही मयंक को खिलाया था।




"वो तो मुझे पता है बल्ली ने सब बता दिया ....अगर काम जरूरी नहीं होता रात को मुझे तो बल्ली उनको सिर्फ पकडता मारता नहीं और उनको सुबह तक जिंदा रख सकते नहीं थे क्योंकि उन्होंने तुझ पर हमला किया था।"...... अनिल ने पास ही रखे स्टूल पर बैठ कर कहा।





"चाचा उन पांचों के अलावा भी तीन थे जो बच गए हैं शायद किसी होस्पीटल में है क्योंकि मैंने बेहोस होने से पहले उनको मारा था ।"






अनिल -"ठीक है तू आराम कर और तेरे बाप को मैं देखुंगा साले को सब पता था फिर भी कुछ नहीं बताया ..... मैं जरा आता हूं अकेले रहने में कोई दिक्कत तो नहीं है?".......आखरी बात अनिल ने खड़े होकर मुस्कुराते हुए पूछी....





"नहीं चाचा मुझे क्या दिक्कत होगी भला"..... मयंक ने कहा




"टेंशन मत ले तेरी चाची को छोडकर राजीव आता होगा अभी"....और इतना कहते ही अनिल कमरे से बहार निकल गया।





**************




"हैलो बल्ली कुछ पता चला क्या "...... अनिल ने कमरे से बहार निकल कर राजीव की बुलट मतलब अपनी बुलट पर बैठते हुए फोन पर बल्ली से पूछा।





"अनिल यार बस एक बार तसल्ली करनी है बाकी पता तो चल गया है उस आदमी के बारे में "...... बल्ली ने जबाब दिया।





"तीन और थे मयंक ने बताया .....वो लोग शायद मयंक के बेहोस होने से पहले ही घायल हो गए थे इसलिए उन पांचों के साथ जाने की जगह अस्पताल चले गये अब वही तीन मादरचोद बताएंगे की तूने जिस आदमी को ढूंढा है वो ही इस सब के पीछे है या कोई और "...





"ठीक फिर तू आजा यही मेरे घर पर जब तक उन तीनों का पता लगाता हूं"..... बल्ली ने कहा




"हां आ रहा हूं तू तैयार रहे बस इनकी मां आज रात मैं ही चोदें* "...... अनिल ने गाडी चालू की और अस्पताल से निकल गया।



***********



"आज मयंक जी,तू और राजीव नहीं आए कोचिंग?"..... इफ्तिका जब कोचिंग से घर वापस आई तो सीधे साक्षी के घर पहुंची और अभी दोनों साक्षी के कमरे में मौजूद थे।




"यार कल रात बहुत बडा कांड हो गया "..... साक्षी ने एक गहरी सांस छोड़ते हुए कहा।




"क्या हुआ साक्षी हम जब से मैं आई हूं तू कुछ ठीक सी भी नहीं लगी मुझे और क्या कांड हुआ है ".....




उसके बाद साक्षी ने ‍ सब कुछ इफ्तिका को कह सुनाया.....




"क्या इतना सब हो गया ?...और तूने एक फोन भी नहीं किया .....और मयंक जी कैसे हैं "....... इफ्तिका ने सब कुछ सुकर घबराते हुए कहा....




एक पल के लिए तो इफ्तिका की आवाज में मयंक के लिए घबराहट देखकर साक्षी को उसका अपना सा हाल लगा पर फिर उसने नजर अंदाज किया।




"हां यार मयंक के बहुत चोट लगी है.... उससे ठीक से चला तक नहीं जा रहा ".....और इतना कहते ही साक्षी की आंखों में नमी आ गई जो इफ्तिका ने भी भली-भांति देखी।




"अरे साक्षी तू रो क्यों रही है अब तो मयंक ठीक है ना और घबरा मत अभी हम घर पर दादाजी को फोन करते हैं और मैं और तू चलते हैं मिलने उनसे"....




और इफ्तिका ने अपने दादा आदिश मिर्जा से बात करने के लिए अपने घर फोन लगा दिया जो उसकी बड़ी बहन इकरा ने उठाया...





ये दोनों यहां मयंक से मिलने की तैयारी कर रहे थे और वहां मयंक के गले को राजीव दबाए हुए था उसकी छाती पर बैठ के....... क्योंकि मयंक ने राजीव के लाख बार पूछने पर भी कल रात बाले नर्स के कांड के बारे नहीं बताया था ।




वैसे असलियत में मयंक बस राजीव को परेशान कर रहा था क्योंकि जब वो नर्स के केविन तक पहुंचा तो वो वहां थी ही नहीं पर फिर भी मयंक ने हार नहीं मानी और इतनी बुरी हालत होने के बाद भी सीढियां उतरकर वो निचे रिसेप्शन पर गया और उस नर्स का पूछा तो पता चला की उसकी ड्यूटी रात को ही खत्म
हो गई थी पर कल रात स्टाफ की कमी होने की वजह से वो मौजूद थी पर फिर जब वो स्टाफ आ गया तो वो भी निकल गई....




जिसके बाद मयंक ने अपना फोन निकाला था रात को और किसी से एक घंटे तक बात की पर किस से की ये जानना दिलचस्प होगा ।



Next update - "Raghu Finished "
Matlab suspense bhari bana hua he :D
Anil ke liye Mayank uske bete jaisa he to wo bhi ab chup na raha, sawal ee he ke dushman kab Tak chukega ?
 

Thakur

असला हम भी रखते है पहलवान 😼
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Update 17



"सब तैयारी हो गई क्या बल्ली"।....... अनिल ने बल्ली के घर पहुंच कर उससे पूछा।





ये बल्ली का घर मैंने सिटी से बहार की तरफ था और ये काभी बडा था ।





"हां अनिल सारी तैयारियां हो गई और ये रहे वो तीनों जो उस रात बच गये थे"..... बल्ली ने तीन लोगो की तरफ इशारा करते हुए कहा।




"हम्म बताया इन्होने कौन है जिसने मयंक पर हमला किया ".... अनिल ने अपनी पूरी बांह वाली आस्तीन को ऊपर चढाते हुए कहा।





बल्ली -"नहीं तूने अभी कुछ देर पहले ही फोन किया था की तीन बचे हैं इतनी जल्दी मिल गये ये कम हैं।"




"कोई बात नहीं अब बताएंगे मादर चोद "..... अनिल ने कहा और उन तीनों की तरफ बढ चला।




"बताओ किसने भेजा था तुमको उस लडके को मारने"..... पहले वाले का मुंह पकड़ते हुए अनिल ने पूछा जिस पर उसने अपनी गर्दन को दांए बांए करते हुए मना कर दिया।





"चट्ट्टटाक्क््क".......तू बता भोसडीके "...... पहले को छोड दूसरे पर थप्पड़ जडते हुए उससे पूछा।..... उसने भी मना कर दिया ।




"अरे बहनचोद तुम लोग क्या समझ रहे हो कि ये कोई खेल चल रहा है ऐसे नहीं बताओगे तुम.....ओए एक हथोडा तो लेके आ ".... अनिल ने गुस्से में खडा होते हुए कहा और फिर एक आदमी को हथोडा लाने को कहा।





और वो आदमी भी जल्दी से जाकर एक हथोडा ले आया जब तक एक आदमी से कह कर उन तीनों में से एक का मुंह बांधवा दिया जिससे चिल्लाने की आवाज जोर से ना आए।




और हथोडा आते ही उसके हाथ को पकडा और पास ही एक पत्थर पर रखते हुए हथोडा उस हाथ पर मारने उठाया तो वो आदमी अपने हाथ को छुड़ाने की कोशिश करने लगा पर अनिल जानवर टाइप आदमी था और तो और उसकी पकड इतनी मजबूत थी की वो आदमी लाख छटपटाने के बाद भी अपना हाथ थोडा सा भी ना हिला पाया ।




"धम्ममम््््"....... भयंकर आवाज हुई जब वो हथोडा उस पत्थर पर ठकराया पर पत्थर और हथोड़े के बीच में जो उंगली थी वो अब वहां नहीं थी सिर्फ खून था क्योंकि वो उंगलियां हाथ से अलग हो चुकी थी खून के छीटे अनिल पर पडने ही थे पर उसके साथ साथ अनिल के पीछे खड़े बल्ली पर पडे और वो आदमी गांड फाड चिल्लाया मतलब बहुत ज्यादा तेज मुंह बंधा होने के बाद भी उसकी चीख इतनी तेज थी उसके बाकी दो दोस्त पेंट में मूत चुके और छटपटा रहे थे वो अलग अगर उनके हाथ पांव ना बंधे होते तो अब तक वो दो किमी दूर होते





"म्मममैं मैं बताऊंगा..... मैं ".....वो आदमी जिसके हथौडा पडा था वो तो अधमरा ही हो गया था पर तब ही बाकी दो में से एक बोल पडा।





"हां भोसडीके अब तो तू बताएगा ही जब अच्छे से पूछा तो मना कर रहा था तू टेंशन मत ले उस आदमी के बारे में तो हम तेरी लास से भी पूछ ही लेते "......और इतना कहते ही एक बार फिर हथोडा चला और सीधे उस आदमी के सर में पडा और उसका सर तरबूज की तरह खुल गया और इस बार दो चीख निकली। और दोनों ही मरने वाले के साथी थे क्योंकि ये तो स्वर्ग सिधार चुका था।





"र्रररररघघुघूघू ..... रघु। नाम है उसका ".....बाकी बचे दो में से एक चिल्लाया डर से कांपते हुए।




"औ्रररृ और उसका अड्डा ****** नगर में बंद पडी वो शक्कर की फैक्ट्री है"........ पहले वाले को बोलता देख दूसरा भी अपनी जान बचाने के उद्देश्य से बोला ।




"हाहहाहहा अरे चूतियों तुम दोनों से अच्छा तो ये था कम से कम अपने मालिक के बारे कुछ बताया तो नहीं"..... बल्ली ने पास ही रखी तलवार उठाते हुए कहा और तलवार उठाकर अनिल की तरफ उचका दी ।




जिसके बाद दो बार तलवार चली और वो दोनों भी ऊपर पहुंच गए।




"यार बल्ली ये रघु नाम सुना सुना लग रहा है"....एक कपड़े से हाथ पहुंचते हुए अनिल ने बल्ली से कहा।




"हां.....सुना तो बहनचो मैंने भी है"..... बल्ली ने अपने आदमियों को इशारा किया जैसे कह रहा हो ये सब कुछ साफ करो ।




"हां.....याद आया "..... बल्ली ने कहा।



"बता कौन है".....अपने हाथ पैर पास ही बने सीमेंट के टेंक से धोते हुए अनिल ने पूछा।




"तूने उस्मानी का नाम सुना है"...... बल्ली ने पूछा।




"वो नीमच वाला ?"....... अनिल ने अपना अंदाजा बताया




"हां वही ..... उससे ही जुडा लग रहा है ये रघु और वैसे भी दो सालों से मैं इस घर से बहार ना निकला और शायद निकलता भी नहीं अगर बिष्णु भईया कहते नहीं "...... बल्ली ने जूठी मुस्कुराहट सजाते हुए कहा।




"हां भोसडीके वो तो खसम है ना तेरा उसकी बात तो मानेगा ही क्योंकि मुझे यहां आए महीना भर हो गया और मेरे कहने पर तो सिर्फ दो बार ही आया तू "...... अनिल ने बल्ली को संग लगाते हुए कहा।





बल्ली- "चल छोडना .....तू ये बता की निबटाना है रघु को "......




"आज रात को .....तू ऐसा कर अपने दो सबसे बढिया आदमी भेज फैक्ट्री में और पता लगावा की वो कितने लोग हैं मैं जब तक और इस रघु के बारे में पता लगवाता हूं और ये भी देखता हूं की ये उस्मानी से जुडा है या नहीं ".....और उसके बाद एक घंटा अनिल ने यहां गुजारा और फिर अपने आॅफिस के लिए निकल गया शाम का मिलने का कहते हुए।




*****************




"दद्दा आज बिष्णु राजस्थान में जाएगा ....".......ये व्यक्ति दद्दा के बदन की मालिश कर रहा था जब इसने बिष्णु का जिक्र किया।




"तो क्या करना है".....दद्दा ने आंखें खोलते हुए एक नजर इस आदमी को देखा और सवाल किया ।




"आप कहो तो पकड लें क्या उसको "......




"हाहाहा मुझे अच्छा लगा सुनकर की मेरे बदले की चिंता मुझसे ज्यादा तुझे है कल्लू.....पर ये इतना आसान नहीं है".....दद्दा ने आंख बंद रखे ही कहा।




कल्लू -"आप कहो तो दद्दा और फिर मुझ पर छोड दो ....वो तीन घंटे में आपके कदमों में होगा ।




दद्दा -"कदमों में आने की तो बात ही नहीं है.....अगर मैं उसको फोन करके यहां आने की कहुंगा नि तो वो निहथ्था खुद ही आजाएगा।....खैर छैड ये बता कितनी देर में निकलेगा वो "...




कल्लू -"अभी एक घंटे में जाएगा वो यहां से ".....




दद्दा -"हम्म ....ठीक है चल दिया मौका तुझे कर ले कोशिश "




अब आप पाठक गण जरा इस इलाके के बारे में कुछ और भी जान लें......तो जिस शहर में बिष्णु यानी मयंक का घर है वो मध्यप्रदेश में आता है और फिर उसी शहर से बहार निकलते ही चंबल नदी की बीहड शुरू हो जाती है जो लगभग 11 किमी. लंबी है जहां ये दद्दा का राज चलता है और इस बिहड को पार करते ही राजस्थान की सीमा लगती है। तो जब बिष्णु रोड से राजस्थान जाएगा तो उसको इस बीहड को भी पार करना होगा जहां कल्लू ने उसको पकड़ने की सोची है।





अब जैसे ही टोल से बिष्णु की गाड़ी निकली तो कल्लू तक इस चीज की खबर पहुंची जो नदी के पूल को पार करते ही सेंद लगाए बिष्णु का इंतजार कर रहा उसने रोड जो की‌ ना के बराबर थी मतलब उस रोड पर सीमेंट से ज्यादा मट्टी मौजूद थी उस पर किलें बिछा दी जिससे वो गाड़ी रोक सकें ।




और उसके बाद उसका प्लान था की गाड़ी पर वो अपने साथियों के साथ हमला कर देगा अब चूंकि उसने दद्दा से वादा किया था कि वो
बिष्णु को जिंदा लाएगा तो बंदूक का क्या काम था और तो और जब उसको पता लगा की एक ही गाडी है तो वो और भी निश्चिंत हो गया की बिष्णु को पकड ही लेगा।.....




और लग भी ऐसा ही रहा था की बिष्णु को कल्लू आराम से पकड लेगा खैर वो वक्त भी आ गया जब बिष्णु की गाडी के टायर उन किलों पर से गुजरने जा रहे थे ........और जैसे ही गाडी के आगे का राइट साइड वाला टायर कील से गुजरा और इस सुनसान सडक पर...




"फ्फफफटट्ट्ट".......एक भयानक आवाज हुई और बिष्णु की एंबेसडर का जो नया मोडल 2003 में ही लांच हुआ था उसका पहला टायर फट गया जिसके साथ ही गाडी काबू से बहार हुई और उसकी ब्रेक लगी और कुछ दूर चल कर वो रुक गई।




पहले तो गाडी की ड्राइविंग सीट से एक आदमी बाहर निकला उसने टायर को देखा तो वो फट चुका था और तब उसकी नजर रोड पर पडी तो
पाया की वहां काभी सारी कील डली थी । और ये देखकर वो तुरंत बिष्णु की साइड बढा और वो कुछ कहता तभी रोड पर कल्लू और उसके दस साथी निकल आए और इस बार बिष्णु की तरफ का दरवाजा खुला............?

अध्याय 18




अनिल के कहे मुताबिक बल्ली ने दो आदमी रघु के यहां भेज दिए थे। पर तब ही बल्ली का एक आदमी उसके पास आया।




"बल्ली भईया ".......




"हां परम बोल "......जब उस आदमी ने बल्ली को पीछे से बुलाया तो बल्ली ने उससे मुखातिब होते हुए कहा।




"आप से एक बात कहनी थी".......



बल्ली -"हां सुन रहा हूं बता"




परम -"भाई मैने सुना है कि आपने अभी रघु के यहां अपने आदमी भेजे हैं।"



बल्ली -"हां सही सुना है आज शाम तक खतम करते हैं इस रघु को"





परम-"तो भाई अपने आदमियों को भेजने की जरूरत है ही नहीं मेरा एक दोस्त उसके साथ‌ ही काम करता है उससे लेते हैं ना सारी जानकारी.....अब आप तो किसी नये को काम पर रखते नहीं वरना वो अपने साथ ही होता .....पर अब काम आएगा बस आप उसको जिंदा छोड देना "........परम ने हाथ जोड़ते हुए कहा।





बल्ली -"अगर हमारे काम आएगा तो क्यूं मारेंगे.....लगाओ फोंन मैं बात करता हूं उससे "





उसके बाद परम ने उस आदमी से बात की सब उसको बताया और वो आदमी बल्ली को अच्छे से जानता था तो अपनी जान बचाने के लिए एकपल की देर भी ना लगी। फिर बल्ली ने उससे बात की....




आदमी -"बल्ली भईया आपको रापचिक खबर बोलता मैं ......देखो इधर फेक्ट्री पर आज सुबह ही उस्मानी ने अपने लोग भेज दिए थे क्योंकि ये उस्मानी और रघु कुछ बहुत बडा करने वाले थे उस एहलावत के साथ सीधा उसके घर पर हमला करने की सोची थी और उस लड़के का भी पता चल गया रघु को वो उसको भी अस्पताल में मारने के वास्ते लोग भेज चुका है ......तो हम फेक्ट्री पर रघु को नहीं मार सकते पर अभी एक घंटे में रघु किसी से पेमेंट लेने ****** जाएगा आप उसको उधर पकडो और जल्द से जल्द उस लडके को बचाने के वास्ते जाओ ..."





अब तक बल्ली फोन काट चुका था और अपनी रिवॉल्वर उठाकर जीप की तरफ भागा उसके साथ परम भी भागा बल्ली को भागता देख और दो लोग भी जीप में बैठ गए थे बल्ली के साथ जीप में जब परम गाडी चला रहा था...... बल्ली ने फोन उठाया और अनिल को लगाया पर घंटी जाती रही लेकिन फोन नहीं उठा




"बहनचोद!....अगर आज मयंक के साथ कुछ हुआ तो इस उस्मानी को और रघु की मां चोद दूंगा....एक तो ये अनिल भी फोन नहीं उठा रहा ".......... बल्ली ने गुस्से से कहा पर तब ही उसके फोन की घंटी बजी और फोन अनिल का ही बल्ली ने जल्दी से फोन उठाया और उसको सब बता दिया .....




"सुन बल्ली तू मयंक को छोड उस मादरचोद को पकड वैसे भी तुझे ******** पहुंचते पहुंचते 45 मिनट तो लग ही जाने हैं और मयंक के यहां मैं जाता हूं ठीक है "........सब सुनने के बाद अनिल ने बल्ली को समझाते हुए कहा।




और इतना सुनते ही बल्ली ने गाडी को ****** के रास्ते पर मुडवा लिया और वहां अनिल भी निकल चुका था मयंक को बचाने....
वहीं शाम होने की वजह से मयंक और राजीव अस्पताल के पीछे बने बगीचे में घूमने आ गये थे और इस बगीचे से लगकर ही एक छोटा जगंल शुरू होता था जिसको पार करते ही इंदौर से लगा एक गांव था ।




उधर एक टवेरा गाडी अस्पताल के सामने आकर रुक चुकी थी। जिसमें बैठे लोग मरीज तो कतई ना थे।.......



************


अभी मयंक और राजीव बगीचे में आए ही थे की राजीव ने मयंक से अपने प्यासे होने का जिक्र किया और चल दिया पानी की तरफ




वहीं मयंक का फोन बजा और उसने नंबर देखा तो तुरंत फोन उठाया और बात करने लगा ये वही शक्स है जिससे मयंक ने उस रात भी बात की थी जब नर्स नहीं मिली थी।




अब तक राजीव को गये हुए वक्त हुआ था और वो लोट रहा था तो अब उसके हाथ में दो आइसक्रीम कप थे और जैसे ही वो बगीचे में जाने लिए बनी सीढ़ियों पर आया तो सबसे नीचे वाली सीढ़ी पर मयंक बैठा था जो बात कर रहा था राजीव उसको आवाज़ देने ही वाला था की उसके कानों में मयंक की आवाज पडी।




"देखो जिद नहीं करते ना प्लीज अभी टाइम है मैंने सबसे चुपा कर आपको वहां भेजा है ना तो कैसे अपने पास बुला लूं......और आपको पता है आपके बारे में तो मैंने राजीव को भी नहीं बताया है.... हां वही राजीव जिसकी मैंने आपको फोटो दिखाई थी ... कुछ टाइम और फिर मेरे पास ही तो रहोगी ना आप .....ओक्के चलो बाए राजीव आ गया तो हमारा सीक्रेट खुल जाएगा।".......




और इतना कहते ही मयंक ने फोन काट दिया और सीढ़ियों से खडा हुआ और जैसे ही खडा हुआ उसको अपने पीछे किसी के खड़े होने का एहसास हुआ मुड कर देखा तो राजीव खडा था।





*************



बड़ी ही अनोखी गंध थी इस समय इस जगह जो अक्सर श्मशान में या उसके आसपास पाई जाती थी..... वैसे ही गंध अभी इस NH3 पर फैली हुई थी और ये हिस्सा वही था जहां कुछ देर पहले कल्लू और और उसके आदमी विष्णु को पकड़ने आए थे ।




अब इस जगह कल्लू को छोड कर बाकी उसके 9 साथी सडक के किनारे जल रहे थे । .......आप लोग भी सोच रहे होंगे ये क्या हो गया टेंशन ना लो ऐसे नहीं निवटाऊंगा चलो फिर चलते हैं आधे घंटे पीछे :D.......




विष्णु के तरफ का दरवाजा खुला और वो बहार आया साधारण से कुछ ज्यादा लंबाई और चौड़ाई घनी काली मूंछ और डाढी ये व्यक्ति कुछ ज्यादा ही खूंखार मालुम पडता था पर सिर्फ कुछ लोगों के लिए जैसे अभी इन दस नहीं.... नहीं.......9 लोगों के लिए क्योंकि वो कल्लू को जानता था और उसको मारने का कोई इरादा नहीं था ।




जैसे ही वो गाड़ी से उतरा और उसने उन लोगों को देखा तो एक लंबी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई सबसे पहले तो उसने अपनी आंखों पर लगे उस किले चश्मे को निकाला और उसको अपने ड्राइवर को पकडा दिया उसके बाद उसने अपने सफेद कुर्ते को थोडा ऊपर उठाया कमर पर बंधे उस बेल्ट को निकाला जिसमें रिवाल्वर रहती है वो भी निकाल कर ड्राइवर को पकडाया एक बार तो वो लोग विष्णु के पास रिवाल्वर को देख घबराए पर फिर शांत हो गये जब उसने उसको अपने पास ना रखा तो।





कल्लू और विष्णु एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे और कल्लू को विष्णु के मुंह पर सजी वो मुस्कुराहट बहुत भयभीत कर रही थी जो एक पल के लिए भी कम नहीं हुई थी।





विष्णु उन सभी लोगों की तरफ बडा जिसको देख वो लोग भी सोच में थे की आखिर कैसा आदमी है जो दस लोगों को देख भी भयभीत नहीं हो रहा था । जब वो लोग इस छोटे सदमे से उभरे तब तक विष्णु उनसे बस दो कदम दूर था । ये बिल्कुल वैसा सीन था मानो पहले किसी शेर की पूंछ पर पांव रखा हो और जब एहसास हुआ तो घबराने के अलावा कुछ बचा नहीं क्योंकि वो सब भी जानते हैं कि वो जिंदा बचने वाले नहीं हैं





ये शीन प्रकिया में ही था कि तब ही एक चूतिए को चुल हुई जिसके हाथ में एक मोटा सा बांस था‌। वो बिष्णु की तरफ भागा और उस आदमी को अपने तरफ आता देख एक दम से विष्णु के तेवर बदल गये और जैसे ही उस आदमी का हाथ बांस चलाने घूमा तो विष्णु का हाथ भी चला जो सीधा उस आदमी के हाथ में पडा और उस आदमी के मुंह से भयंकर चीख निकली उसका हाथ लटक गया और लाख कोशिश की उसने उठाने की पर वो हाथ दुबारा उठा ही नहीं और वो आदमी जब जब हाथ उठाने की कोशिश करता विष्णु उसके नाक और माथे के बीच में मुक्का मारता बिचारा वो आदमी हाथ उठाने की कोशिश दो बार ही कर सका क्योंकि दो मुक्के उसके होश भागाने के लिए काफी थे।




"चटाक्कककक ".......वो आदमी नीचे गिरा ही था कि एक और आ गया जिसको विष्णु ने कुछ करने का मोका तक नहीं बल्कि खुद आगे बड कर एक भयंकर थप्पड़ उसके गाल पर दिया पर विष्णु का हाथ इतना बडा था की उसके हाथ का असर उस आदमी के गालों के साथ साथ कानों को भी सुन्न कर चुका था बिचारा एक थप्पड़ से उभर पाता उससे पहले तीन और थप्पड़ उसके पड चुके थे जब विष्णु के हाथ पर उस आदमी का खून लगा जो उसके कां से निकल रहा था तब थप्पड़ रोके और एक लात सीधे उसके छाती में पडी जिससे वो आदमी तीन फुट पीछे जा गिरा।





अब दो आदमी एक साथ आए जिसमें एक के हाथ में तलवार थी वहीं आगे था और जैसे ही उसने तलवार घुमाई विष्णु नीचे झुका और आगे बढ़ते हुए दूसरे की छाती में लात दी और जैसे ही पहले वाली की तरफ घूमा तो तलवार सीधे उसके पेट को निशाना बनाते हुए आई जिसको हड़बड़ाहट में विष्णु ने हाथ ही पकड लिया तलवार तो रुक गई पर विष्णु का पूरा हाथ कट गया अब विष्णु को गुस्सा आया और झटके के साथ उस तलवार को खींचा और तलवार विष्णु के हाथ में आते ही चली और उस आदमी की गर्दन एक तरफ को लटक गई।





"भोसडीके जब चलानी आती नहीं तो लाते क्यूं हो ......जय हो भवानी मा* की "...... पहले तो‌ लात से उस अधकटी गर्दन वाली लाश को पांव से हटाया और तलवार को माथे से लगाते हुए उन बचे आदमियों की तरफ बढा उसके बाद बस तलवार चली और किसी की आंतें बहार आई तो किसी की नसें एक की तो गर्दन ही उसके धड से अलग हो चुकी थी और उसके धड से खून ऐसे निकल रहा था मानो फब्बरा पानी को ऊपर तक उछाल देता है।




जब विष्णु रुका तो उसका सफेद कुर्ते कहीं से भी सफेद नहीं लग रहा था जगह जगह खून यहां तक उसके चेहरे पर भी खून लगा था जो मंजर को हद से ज्यादा खौफनाक बना रहा था। जब विष्णु को कल्लू का‌ ध्यान आया और उसको आसपास देखा तो रोड किनारे बीहड में भागता हुआ पाया ।





"अरे कलुआ सुनतो !!!"...... कल्लू को रोकने के उद्देश्य से विष्णु चिल्लाया जिसपर वो रुका और विष्णु की तरफ घूमा और ये देखते ही विष्णु एक बार फिर मुस्कुराया





"आज बड़े भाई के पैर ना छुऐ तने .....यो अच्छे लक्षण कोंणया छोरे"......ये बोलते हुए विष्णु कल्लू की तरफ बडा तो वो भी पीछे हो गया (अपने शुरुआती दिन बिष्णु ने राजस्थान में बिताए थे। तो कभी कभी वो बोली भी वैसी ही रखता था)




"दूर रहो भाईसा मेरे पास ना आओ वहां से बोलो जो बोलना है".... कल्लू ने पीछे होते हुए बोला।




"बेटा तूने भाईसा नहीं बोला होता तो आज जिंदा ना जाता .....जा .जा द्ददा को रा*-रा* कहना मेरा "....... मुस्कुराते हुए विष्णु ने कहा और अपनी गाड़ी की तरफ बडा तब ही एक गाडी वहां आ चुकी थी जो विष्णु के ड्राइवर ने बुलाई थी ।





अभी आए आदमियों को मरे हुए आदमियों का सफाया करने का कहते हुए विष्णु ने अपने कपड़े बदले मुंह धोया और एक बार फिर अपनी एंबेसडर ग्रेंड में बैठ कर अपनी मंजिल कि ओर बड चला जो राजस्थान का एक शहर ही था।





विष्णु के आदमियों ने पहले लाशों को सडक किनारे उगे उन सूखे पौधों में फेंका और पौधों समेत जला दिया सडक पर डले खून को छुपाने के लिए कुछ तसले मिट्टी उस जगह पर डाली और वो लोग भी लौट गये ......




अगर विष्णु इन लाशों को ठिकाने ना लगबाता फिर भी राहगीर इन लाशों को नजरंदाज कर आगे बढ़ने
वाले थे क्योंकि 1910 से 2010 तक इस जगह का खौफ इतना था की लोग पेट्रोल से ज्यादा अपनी जान कीमती समझते थे और इन शहरों ना होकर बाइपास के द्वारा राजस्थान या यूपी से जाना पसंद करते थे।.....




Agla update shayad aapki aankhon mein aanshu naamak paani laane waala hai :yawn: ....
Re bhai beta to beta baap bhi tevar wala he matlab Umar ho gayi par waise ka waisa he ho :roflbow:
Bus ek he baat bachi Jo he ke Mayank kisse baat kar raha tha chhupa chhupa ke
 

Sanju@

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188
अध्याय 18




अनिल के कहे मुताबिक बल्ली ने दो आदमी रघु के यहां भेज दिए थे। पर तब ही बल्ली का एक आदमी उसके पास आया।




"बल्ली भईया ".......




"हां परम बोल "......जब उस आदमी ने बल्ली को पीछे से बुलाया तो बल्ली ने उससे मुखातिब होते हुए कहा।




"आप से एक बात कहनी थी".......



बल्ली -"हां सुन रहा हूं बता"




परम -"भाई मैने सुना है कि आपने अभी रघु के यहां अपने आदमी भेजे हैं।"



बल्ली -"हां सही सुना है आज शाम तक खतम करते हैं इस रघु को"





परम-"तो भाई अपने आदमियों को भेजने की जरूरत है ही नहीं मेरा एक दोस्त उसके साथ‌ ही काम करता है उससे लेते हैं ना सारी जानकारी.....अब आप तो किसी नये को काम पर रखते नहीं वरना वो अपने साथ ही होता .....पर अब काम आएगा बस आप उसको जिंदा छोड देना "........परम ने हाथ जोड़ते हुए कहा।





बल्ली -"अगर हमारे काम आएगा तो क्यूं मारेंगे.....लगाओ फोंन मैं बात करता हूं उससे "





उसके बाद परम ने उस आदमी से बात की सब उसको बताया और वो आदमी बल्ली को अच्छे से जानता था तो अपनी जान बचाने के लिए एकपल की देर भी ना लगी। फिर बल्ली ने उससे बात की....




आदमी -"बल्ली भईया आपको रापचिक खबर बोलता मैं ......देखो इधर फेक्ट्री पर आज सुबह ही उस्मानी ने अपने लोग भेज दिए थे क्योंकि ये उस्मानी और रघु कुछ बहुत बडा करने वाले थे उस एहलावत के साथ सीधा उसके घर पर हमला करने की सोची थी और उस लड़के का भी पता चल गया रघु को वो उसको भी अस्पताल में मारने के वास्ते लोग भेज चुका है ......तो हम फेक्ट्री पर रघु को नहीं मार सकते पर अभी एक घंटे में रघु किसी से पेमेंट लेने ****** जाएगा आप उसको उधर पकडो और जल्द से जल्द उस लडके को बचाने के वास्ते जाओ ..."





अब तक बल्ली फोन काट चुका था और अपनी रिवॉल्वर उठाकर जीप की तरफ भागा उसके साथ परम भी भागा बल्ली को भागता देख और दो लोग भी जीप में बैठ गए थे बल्ली के साथ जीप में जब परम गाडी चला रहा था...... बल्ली ने फोन उठाया और अनिल को लगाया पर घंटी जाती रही लेकिन फोन नहीं उठा




"बहनचोद!....अगर आज मयंक के साथ कुछ हुआ तो इस उस्मानी को और रघु की मां चोद दूंगा....एक तो ये अनिल भी फोन नहीं उठा रहा ".......... बल्ली ने गुस्से से कहा पर तब ही उसके फोन की घंटी बजी और फोन अनिल का ही बल्ली ने जल्दी से फोन उठाया और उसको सब बता दिया .....




"सुन बल्ली तू मयंक को छोड उस मादरचोद को पकड वैसे भी तुझे ******** पहुंचते पहुंचते 45 मिनट तो लग ही जाने हैं और मयंक के यहां मैं जाता हूं ठीक है "........सब सुनने के बाद अनिल ने बल्ली को समझाते हुए कहा।




और इतना सुनते ही बल्ली ने गाडी को ****** के रास्ते पर मुडवा लिया और वहां अनिल भी निकल चुका था मयंक को बचाने....
वहीं शाम होने की वजह से मयंक और राजीव अस्पताल के पीछे बने बगीचे में घूमने आ गये थे और इस बगीचे से लगकर ही एक छोटा जगंल शुरू होता था जिसको पार करते ही इंदौर से लगा एक गांव था ।




उधर एक टवेरा गाडी अस्पताल के सामने आकर रुक चुकी थी। जिसमें बैठे लोग मरीज तो कतई ना थे।.......



************


अभी मयंक और राजीव बगीचे में आए ही थे की राजीव ने मयंक से अपने प्यासे होने का जिक्र किया और चल दिया पानी की तरफ




वहीं मयंक का फोन बजा और उसने नंबर देखा तो तुरंत फोन उठाया और बात करने लगा ये वही शक्स है जिससे मयंक ने उस रात भी बात की थी जब नर्स नहीं मिली थी।




अब तक राजीव को गये हुए वक्त हुआ था और वो लोट रहा था तो अब उसके हाथ में दो आइसक्रीम कप थे और जैसे ही वो बगीचे में जाने लिए बनी सीढ़ियों पर आया तो सबसे नीचे वाली सीढ़ी पर मयंक बैठा था जो बात कर रहा था राजीव उसको आवाज़ देने ही वाला था की उसके कानों में मयंक की आवाज पडी।




"देखो जिद नहीं करते ना प्लीज अभी टाइम है मैंने सबसे चुपा कर आपको वहां भेजा है ना तो कैसे अपने पास बुला लूं......और आपको पता है आपके बारे में तो मैंने राजीव को भी नहीं बताया है.... हां वही राजीव जिसकी मैंने आपको फोटो दिखाई थी ... कुछ टाइम और फिर मेरे पास ही तो रहोगी ना आप .....ओक्के चलो बाए राजीव आ गया तो हमारा सीक्रेट खुल जाएगा।".......




और इतना कहते ही मयंक ने फोन काट दिया और सीढ़ियों से खडा हुआ और जैसे ही खडा हुआ उसको अपने पीछे किसी के खड़े होने का एहसास हुआ मुड कर देखा तो राजीव खडा था।





*************



बड़ी ही अनोखी गंध थी इस समय इस जगह जो अक्सर श्मशान में या उसके आसपास पाई जाती थी..... वैसे ही गंध अभी इस NH3 पर फैली हुई थी और ये हिस्सा वही था जहां कुछ देर पहले कल्लू और और उसके आदमी विष्णु को पकड़ने आए थे ।




अब इस जगह कल्लू को छोड कर बाकी उसके 9 साथी सडक के किनारे जल रहे थे । .......आप लोग भी सोच रहे होंगे ये क्या हो गया टेंशन ना लो ऐसे नहीं निवटाऊंगा चलो फिर चलते हैं आधे घंटे पीछे :D.......




विष्णु के तरफ का दरवाजा खुला और वो बहार आया साधारण से कुछ ज्यादा लंबाई और चौड़ाई घनी काली मूंछ और डाढी ये व्यक्ति कुछ ज्यादा ही खूंखार मालुम पडता था पर सिर्फ कुछ लोगों के लिए जैसे अभी इन दस नहीं.... नहीं.......9 लोगों के लिए क्योंकि वो कल्लू को जानता था और उसको मारने का कोई इरादा नहीं था ।




जैसे ही वो गाड़ी से उतरा और उसने उन लोगों को देखा तो एक लंबी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई सबसे पहले तो उसने अपनी आंखों पर लगे उस किले चश्मे को निकाला और उसको अपने ड्राइवर को पकडा दिया उसके बाद उसने अपने सफेद कुर्ते को थोडा ऊपर उठाया कमर पर बंधे उस बेल्ट को निकाला जिसमें रिवाल्वर रहती है वो भी निकाल कर ड्राइवर को पकडाया एक बार तो वो लोग विष्णु के पास रिवाल्वर को देख घबराए पर फिर शांत हो गये जब उसने उसको अपने पास ना रखा तो।





कल्लू और विष्णु एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे और कल्लू को विष्णु के मुंह पर सजी वो मुस्कुराहट बहुत भयभीत कर रही थी जो एक पल के लिए भी कम नहीं हुई थी।





विष्णु उन सभी लोगों की तरफ बडा जिसको देख वो लोग भी सोच में थे की आखिर कैसा आदमी है जो दस लोगों को देख भी भयभीत नहीं हो रहा था । जब वो लोग इस छोटे सदमे से उभरे तब तक विष्णु उनसे बस दो कदम दूर था । ये बिल्कुल वैसा सीन था मानो पहले किसी शेर की पूंछ पर पांव रखा हो और जब एहसास हुआ तो घबराने के अलावा कुछ बचा नहीं क्योंकि वो सब भी जानते हैं कि वो जिंदा बचने वाले नहीं हैं





ये शीन प्रकिया में ही था कि तब ही एक चूतिए को चुल हुई जिसके हाथ में एक मोटा सा बांस था‌। वो बिष्णु की तरफ भागा और उस आदमी को अपने तरफ आता देख एक दम से विष्णु के तेवर बदल गये और जैसे ही उस आदमी का हाथ बांस चलाने घूमा तो विष्णु का हाथ भी चला जो सीधा उस आदमी के हाथ में पडा और उस आदमी के मुंह से भयंकर चीख निकली उसका हाथ लटक गया और लाख कोशिश की उसने उठाने की पर वो हाथ दुबारा उठा ही नहीं और वो आदमी जब जब हाथ उठाने की कोशिश करता विष्णु उसके नाक और माथे के बीच में मुक्का मारता बिचारा वो आदमी हाथ उठाने की कोशिश दो बार ही कर सका क्योंकि दो मुक्के उसके होश भागाने के लिए काफी थे।




"चटाक्कककक ".......वो आदमी नीचे गिरा ही था कि एक और आ गया जिसको विष्णु ने कुछ करने का मोका तक नहीं बल्कि खुद आगे बड कर एक भयंकर थप्पड़ उसके गाल पर दिया पर विष्णु का हाथ इतना बडा था की उसके हाथ का असर उस आदमी के गालों के साथ साथ कानों को भी सुन्न कर चुका था बिचारा एक थप्पड़ से उभर पाता उससे पहले तीन और थप्पड़ उसके पड चुके थे जब विष्णु के हाथ पर उस आदमी का खून लगा जो उसके कां से निकल रहा था तब थप्पड़ रोके और एक लात सीधे उसके छाती में पडी जिससे वो आदमी तीन फुट पीछे जा गिरा।





अब दो आदमी एक साथ आए जिसमें एक के हाथ में तलवार थी वहीं आगे था और जैसे ही उसने तलवार घुमाई विष्णु नीचे झुका और आगे बढ़ते हुए दूसरे की छाती में लात दी और जैसे ही पहले वाली की तरफ घूमा तो तलवार सीधे उसके पेट को निशाना बनाते हुए आई जिसको हड़बड़ाहट में विष्णु ने हाथ ही पकड लिया तलवार तो रुक गई पर विष्णु का पूरा हाथ कट गया अब विष्णु को गुस्सा आया और झटके के साथ उस तलवार को खींचा और तलवार विष्णु के हाथ में आते ही चली और उस आदमी की गर्दन एक तरफ को लटक गई।





"भोसडीके जब चलानी आती नहीं तो लाते क्यूं हो ......जय हो भवानी मा* की "...... पहले तो‌ लात से उस अधकटी गर्दन वाली लाश को पांव से हटाया और तलवार को माथे से लगाते हुए उन बचे आदमियों की तरफ बढा उसके बाद बस तलवार चली और किसी की आंतें बहार आई तो किसी की नसें एक की तो गर्दन ही उसके धड से अलग हो चुकी थी और उसके धड से खून ऐसे निकल रहा था मानो फब्बरा पानी को ऊपर तक उछाल देता है।




जब विष्णु रुका तो उसका सफेद कुर्ते कहीं से भी सफेद नहीं लग रहा था जगह जगह खून यहां तक उसके चेहरे पर भी खून लगा था जो मंजर को हद से ज्यादा खौफनाक बना रहा था। जब विष्णु को कल्लू का‌ ध्यान आया और उसको आसपास देखा तो रोड किनारे बीहड में भागता हुआ पाया ।





"अरे कलुआ सुनतो !!!"...... कल्लू को रोकने के उद्देश्य से विष्णु चिल्लाया जिसपर वो रुका और विष्णु की तरफ घूमा और ये देखते ही विष्णु एक बार फिर मुस्कुराया





"आज बड़े भाई के पैर ना छुऐ तने .....यो अच्छे लक्षण कोंणया छोरे"......ये बोलते हुए विष्णु कल्लू की तरफ बडा तो वो भी पीछे हो गया (अपने शुरुआती दिन बिष्णु ने राजस्थान में बिताए थे। तो कभी कभी वो बोली भी वैसी ही रखता था)




"दूर रहो भाईसा मेरे पास ना आओ वहां से बोलो जो बोलना है".... कल्लू ने पीछे होते हुए बोला।




"बेटा तूने भाईसा नहीं बोला होता तो आज जिंदा ना जाता .....जा .जा द्ददा को रा*-रा* कहना मेरा "....... मुस्कुराते हुए विष्णु ने कहा और अपनी गाड़ी की तरफ बडा तब ही एक गाडी वहां आ चुकी थी जो विष्णु के ड्राइवर ने बुलाई थी ।





अभी आए आदमियों को मरे हुए आदमियों का सफाया करने का कहते हुए विष्णु ने अपने कपड़े बदले मुंह धोया और एक बार फिर अपनी एंबेसडर ग्रेंड में बैठ कर अपनी मंजिल कि ओर बड चला जो राजस्थान का एक शहर ही था।





विष्णु के आदमियों ने पहले लाशों को सडक किनारे उगे उन सूखे पौधों में फेंका और पौधों समेत जला दिया सडक पर डले खून को छुपाने के लिए कुछ तसले मिट्टी उस जगह पर डाली और वो लोग भी लौट गये ......




अगर विष्णु इन लाशों को ठिकाने ना लगबाता फिर भी राहगीर इन लाशों को नजरंदाज कर आगे बढ़ने
वाले थे क्योंकि 1910 से 2010 तक इस जगह का खौफ इतना था की लोग पेट्रोल से ज्यादा अपनी जान कीमती समझते थे और इन शहरों ना होकर बाइपास के द्वारा राजस्थान या यूपी से जाना पसंद करते थे।.....




Agla update shayad aapki aankhon mein aanshu naamak paani laane waala hai :yawn: ....
बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है
मयंक राजीव से क्या छुपा रहा था और वह किससे बात कर रहा था विष्णु ने तो कल्लू के आदमियों का सफाया कर दिया है अब देखते हैं अनिल हॉस्पिटल में किस का सफाया करता है
 

Hell Strom

🦁
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Gazab ki update he Hell Strom Bhai,

Mayank kis se baat kar raha tha.........Rajiv se aakhir kya chhupa raha he mayank.............ye to aane wale updates me hi pata chalega.........

Balli dwara Raghu ka band bajna lagbhag pakka ho chuka he............Anil bhi mayank ko bachane hospital pahuch chuka hoga..........

Vishnu ne to akele hi 9 logo ki nipta diya............Kallu ko jinda nahi chodna chahiye tha........

Keep posting Bhai
Thanks ajju bhai for wonderful review :dost:

Keep supporting :five:
 
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