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Incest जादुई लकड़ी (Completed)

Abhi

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Superb update
Raj to ekdam badal gaya.
Vo samjhdari wale baate kar raha hai.
Is accident ka raaz shyad uski maa ke ateet me chupa hua hai.
Ab vo use kaise pata karta hai.
 

Rahul

Kingkong
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wonderfull update bhaiya ji waiting new update
 

sharaabi

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Sab kuch simple ho ke bhi bahut hard lagraha he
 
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अध्याय 37

"क्या हुआ क्या देखा तुमने ??"

डॉ ने मेरे आंखे खोलते ही कहा

"कुछ नहीं,हमें चलना चाहिए "

हम वंहा से उठकर चले गए ..

"राज आखिर देखा क्या तुमने ??"

कार में जाते समय डॉ ने फिर से पूछा ,

"कुछ नहीं डॉ साहब ,बस मुझे माँ के पास जाना है "

डॉ मेरी बात सुनकर शांत हो चुके थे ,जो भी हो रहा था वो मेरे मन के अंदर ही हो रहा था ,एक द्वन्द था जो अंदर ही अंदर मुझे खाये जा रहा था ,बार बार मेरे आँखों के सामने भैरव सिंह और माँ का चेहरा घूम जाता था वही मेरे पिता की मुझे हँसते हुए दिखाई देते ,

वो मुस्कुराते और उनकी ये मुस्कुराहट मेरे लिए किसी नासूर से कम नहीं थी ,दिल में समाया हुआ एक ऐसा नासूर जिसने मेरा पूरा बचपन ही खत्म कर दिया ,नासूर जिसका जख्म मेरे पैदा होने से पहले से ही पिता जी को सताता रहा होगा और जिसका शिकार मैं हुआ हु,अब मुझे इस नासूर को साथ लेकर जीना था ..

हम हॉस्पिटल में थे मेरी बहने भैरव के साथ घर जा चुकी थी ,पता चला की पिता जी के अंतिम यात्रा की तैयारी हो रही है,हम सब तो अभी बच्चे ही थे,ऐसा लग रहा था जैसे भैरव ने ही हमारे अभिभावक की जगह ले ली है,

रश्मि की माँ अर्चना और उसकी चाची सुमन भी वंहा आ चुके थे ,जबकि उसे चाचा भीष्म अभी मेरे घर गए हुए थे ,एक बार मेरी और रश्मि की आंखे मिली ,ऐसा लगा की बहुत कुछ कहना चाहती हो लेकिन जुबान फिर भी ना हिले ,

"बेटा जो हुआ उसे नहीं बदला जा सकता अब तुम्हे अपने पिता की अंतिम विदाई सम्पन्न करने में ध्यान देना होगा,"

अर्चना आंटी ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा ..

"लेकिन माँ ??"

"बेटा अनुराधा ठीक हो जायेगी ,उसने कभी किसी का बुरा नहीं किया है भगवान उसके साथ कभी बुरा नहीं करेगा ,वो अब ठीक है ,बस थोड़े देर में उसे होश आ जायेगा ..लेकिन पिता का काम तो तुम्हे ही करना होगा "

माँ को होश आ जायेगा ,मुझे ये समझ नहीं आ रहा था की मैं उनका सामना कैसे करूँगा ..अगर वो पिता जी को देखने की जिद करेगी तो,मैं उन्हें कैसे ये बताऊंगा की उनका चेहरा आप देख नहीं पाओगी ..

मैं वंहा से चलता हुआ हॉस्पिटल में बने गार्डन में पहुंचा,कोने में जाकर चाय के साथ एक सिगरेट जला कर मैं भविष्य के बारे में सोच रहा था ,अभी एक हाथ मेरे कंधे पर पड़ा ,

"रश्मि तुम ??" रश्मि मेरे बाजु में आकर बैठ गई ,वो कुछ भी नहीं बोल रही थी ना ही मैं कुछ बोलने की स्तिथि में था ,

"आखिर कौन हो सकता है जिसे हमारी खुशियों से इतनी जलन है "

मेरे मुँह से अनायास ही निकल गया

"राज मुझे नहीं लगता की ये दौलत के लिए किया गया था .."

"हां रश्मि ,ये बहुत ही पर्सनल अटेक था "

"लेकिन राज सोचने वाली बात है की किसके ऊपर ,क्या तुम्हे नहीं लगता की टारगेट तुम भाई बहन थे और कोई आंटी को बचा रहा था ,वो भी अभी क्यों ? अगर करना ही था तो पहले क्यों नहीं मारा तुम लोगो को उसने ??"

मैंने एक बार रश्मि की ओर देखा ,उसका प्यारा सा चेहरा मुरझा सा गया था

"हां रश्मि मुझे भी लगता है की प्लान तो हमे मरने का था लेकिन माँ के बीच में आने के कारण उसने पिता जी को फोन किया ,लेकिन वो माँ को बचा क्यों रहा था ??"

रश्मि की आंखे थोड़ी नम होने लगी

"क्या हुआ रश्मि ??"

"मुझे लगता है की जिसने भी ये किया होगा वो तुम्हारी माँ से प्यार करता है ,"

वो चुप हो गई ,और मै स्तब्ध ,हां ये सही था और ये ख्याल मेरे दिमाग में भी आया था लेकिन मेरा स्तब्ध होना रश्मि के आंसुओ के कारण था ,मै समझ गया था की आखिर वो क्या सोच रही है ..

"नहीं रश्मि मुझे नहीं लगता की तुम जो सोच रही हो वो सही हो सकता है .."

"क्यों राज ??"

"क्योकि उनके पास कोई कारण नहीं है ऐसा करने का .."

हम भैरव की बात कर रहे थे ,भैरव रश्मि का पिता था और रश्मि को भी पता था की जवानी के दिनों में भैरव मेरी माँ से प्यार करता था ,

"कारन तो कुछ भी हो सकता है राज ..."

"नहीं रश्मि मुझे नहीं लगता की अंकल ऐसा करेंगे ,उन्होंने तो हर मुश्किल में मेरा साथ दिया है,और माँ के लिए उनका प्यार सच्चा है ,सच्चा प्रेम कभी किसी को दुःख नहीं पहुँचता ,उसमे कोई संघर्ष नहीं होता कोई जीत हार नहीं होती ,क्या तुम्हे कभी ऐसा लगा की अंकल ने तुम्हारी माँ को कम प्यार किया ,(रश्मि ने ना में सर हिलाया ) ,हां रश्मि तुम्हारे पिता ने तुम्हारी माँ को भी भरपूर प्यार दिया ,भले ही शायद आज भी वो मेरी माँ से प्रेम करते हो लेकिन ....लेकिन वो एक प्रेमी ही है और प्रेमी अपने प्रेम की पूजा करते है ना की वो किसी मोह में प्रेम को दुःख देते है ,अंकल ने माँ के जाने के बाद भी शायद उनसे प्रेम किया हो लेकिन फिर भी उन्होंने तुम्हारी माँ को भरपूर प्रेम दिया ,तुम्हे भरपूर प्रेम दिया ,वही एक मेरे पिता थे जिनकी आँखों में मैंने कभी माँ के लिए प्रेम नहीं देखा ,वो उनके लिए एक उपलब्धि थी जिसे वो सेलेब्रेट किया करते थे प्रेम नहीं ,अगर मेरे पिता की बात होती तो शायद मै मान भी लेता की वो मेरे साथ ऐसा करना चाहते हो ,लेकिन अंकल... नहीं ..जब मैं उनके पहली बार मिला था तो उनके आँखों में एक चमक थी ,उस चमक को मैं पहचान सकता था ,वो चमक तब आती है जब कोई इंसान अपने अजीज के बच्चो को देखता है ,मैंने अपने मन से इसे महसूस किया है,उनके अंदर मेरे लिए एक अनकहा सा प्रेम है ..वो ऐसा नहीं कर सकते ,क्या तुमने ये महसूस नहीं किया ??"

रश्मि के चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई ...

"तुमने मेरे दिल का एक बोझ ही हल्का कर दिया ,लेकिन .."

वो कहते कहते रुक गई थी

"लेकिन क्या ?"

"लेकिन राज मुझे आज एक बात पता चली "

मैं जानता था की उसे क्या पता चला है ,वो मेरी आँखों में देख रही थी जैसे कोई इजाजत मांग रही हो ...मैंने अपने आँखों से ही उसे वो इजाजत दे दी थी ..

"राज तुम्हारे पिता जी को जीवन भर ये शक था की तुम ..(वो कुछ सेकण्ड के लिए चुप हो गई ) की तुम मेरे पिता का खून हो .."

रश्मि ने इतना बोलकर अपनी आंखे निचे कर ली

"और तुम्हे क्या लगता है "

उसने फिर से सर उठाया और मेरे आँखों में देखने लगी

"मुझे नहीं पता "

मैं हंस पड़ा ,और हसते हँसते मेरी आँखों में पानी आ गया ,वो किसी गम का नहीं एक अहसास का पानी था,इस लड़की के प्रेम का अहसास ,हो इन चीजों को छिपा भी सकती थी ,लेकिन वो मेरे लिए अपने पिता को भी कातिल समझने को तैयार थी ,मैंने प्यार से उसके गालो को सहलाया

"नहीं रश्मि मुझे अपनी माँ पर पूरा भरोसा है,मैं ये मान सकता हु की उन्होंने तुम्हारे पिता से प्रेम किया होगा,लेकिन ये नहीं की उन्होंने शादी के बाद मेरे पिता से धोखा किया होगा ,नहीं मै ये नहीं मान सकता ,उन्होंने तो अपना पूरा जीवन ही पिता जी को समर्पित कर दिया था रश्मि ,और जंहा बात है की पिता जी के ऐसा सोचने की तो जो आदमी जीवन भर अपनी बीबी को धोखा देता रहा उसके दिमाग में अगर ऐसी बात आ भी जाए तो इसमें अचरज क्या है,लोग जैसा सोचते है वैसा ही देखते भी है,उन्हें लगता की पूरी दुनिया उनके जैसी है .नजारो को अच्छा या बुरा हमारी नजरे ही तो बनाती है ,ये दृष्टि ही दृश्य को परिलक्षित करती है "


मेरी बात सुनकर रश्मि के चेहरे में एक मुस्कान आ गई

"तुमने मेरे मन का एक बोझ हल्का कर दिया राज "

उसकी इस बात से मेरे चेहरे में भी मुसकान खिली ,ये भरी गर्मी की दोपहर में मिलने वाली ठंडी सुकून भरी हवा जैसा अहसास था ,इस द्वन्द और युद्ध की स्तिथि में उसका प्रेम से भरा हुआ चेहरा और दिल से खिलती हुई वो मुस्कान मेरे लिए सुकून भरे थपकी से कम नहीं था ,

"तुम उस कमीने को ढूंढ लोगे राज ,मुझे तुमपर पूरा यकीन है ,उस कमीने को छोड़ना मत ,बस तुम्हे आंटी के ठीक होने का इंतजार करना चाहिए शायद इन सबका राज उनके अतीत से जुड़ा होगा "

"हां रश्मि मुझे भी ऐसा ही लगता है,शायद कोई और ऐसा है जो हमारी नजरो से ओझल होते हुए भी हमरे जीवन पर असर कर रहा है ,अतीत के कुछ किस्से कब वर्तमान को प्रभावित करने लगते है हमे पता ही नहीं चलता ,और हम इसी भ्रम में जीते है की अभी हमसे कुछ गलती हुई होगी ,लेकिन रोग पुराना होता है ,हां उसका इलाज जरूर नया हो सकता है "

मैंने मुस्कुराते हुए रश्मि को देखा ,

उसने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा

"राज अब शयद हमे चलना चाहिए,तुम्हे अपने घर जाकर अंकल के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम सम्पन्न करना चाहिए ,मैं ,मम्मी और चाची जी यही रुके हुए है हम आंटी का पूरा ख्याल रखेंगे और चाचा भी थोड़े देर में आ जायेगे "

मैंने हां में सर हिलाया और हम वंहा से निकल गए .....
Superb update bro
 

Studxyz

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भाई डॉ जी माँ से राज उगलवाओ और नेहा अभी तक कुंवारी सील पैक है क्यों की अब चंदू मर चूका है तो नेहा की भी लुब्रिकेशन लगे हाथो राज से करवा ही दो :D
 
Last edited:

Aakash.

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"क्या हुआ क्या देखा तुमने ??"

डॉ ने मेरे आंखे खोलते ही कहा

"कुछ नहीं,हमें चलना चाहिए "

हम वंहा से उठकर चले गए ..

"राज आखिर देखा क्या तुमने ??"

कार में जाते समय डॉ ने फिर से पूछा ,

"कुछ नहीं डॉ साहब ,बस मुझे माँ के पास जाना है "

डॉ मेरी बात सुनकर शांत हो चुके थे ,जो भी हो रहा था वो मेरे मन के अंदर ही हो रहा था ,एक द्वन्द था जो अंदर ही अंदर मुझे खाये जा रहा था ,बार बार मेरे आँखों के सामने भैरव सिंह और माँ का चेहरा घूम जाता था वही मेरे पिता की मुझे हँसते हुए दिखाई देते ,

वो मुस्कुराते और उनकी ये मुस्कुराहट मेरे लिए किसी नासूर से कम नहीं थी ,दिल में समाया हुआ एक ऐसा नासूर जिसने मेरा पूरा बचपन ही खत्म कर दिया ,नासूर जिसका जख्म मेरे पैदा होने से पहले से ही पिता जी को सताता रहा होगा और जिसका शिकार मैं हुआ हु,अब मुझे इस नासूर को साथ लेकर जीना था ..

हम हॉस्पिटल में थे मेरी बहने भैरव के साथ घर जा चुकी थी ,पता चला की पिता जी के अंतिम यात्रा की तैयारी हो रही है,हम सब तो अभी बच्चे ही थे,ऐसा लग रहा था जैसे भैरव ने ही हमारे अभिभावक की जगह ले ली है,

रश्मि की माँ अर्चना और उसकी चाची सुमन भी वंहा आ चुके थे ,जबकि उसे चाचा भीष्म अभी मेरे घर गए हुए थे ,एक बार मेरी और रश्मि की आंखे मिली ,ऐसा लगा की बहुत कुछ कहना चाहती हो लेकिन जुबान फिर भी ना हिले ,

"बेटा जो हुआ उसे नहीं बदला जा सकता अब तुम्हे अपने पिता की अंतिम विदाई सम्पन्न करने में ध्यान देना होगा,"

अर्चना आंटी ने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा ..

"लेकिन माँ ??"

"बेटा अनुराधा ठीक हो जायेगी ,उसने कभी किसी का बुरा नहीं किया है भगवान उसके साथ कभी बुरा नहीं करेगा ,वो अब ठीक है ,बस थोड़े देर में उसे होश आ जायेगा ..लेकिन पिता का काम तो तुम्हे ही करना होगा "

माँ को होश आ जायेगा ,मुझे ये समझ नहीं आ रहा था की मैं उनका सामना कैसे करूँगा ..अगर वो पिता जी को देखने की जिद करेगी तो,मैं उन्हें कैसे ये बताऊंगा की उनका चेहरा आप देख नहीं पाओगी ..

मैं वंहा से चलता हुआ हॉस्पिटल में बने गार्डन में पहुंचा,कोने में जाकर चाय के साथ एक सिगरेट जला कर मैं भविष्य के बारे में सोच रहा था ,अभी एक हाथ मेरे कंधे पर पड़ा ,

"रश्मि तुम ??" रश्मि मेरे बाजु में आकर बैठ गई ,वो कुछ भी नहीं बोल रही थी ना ही मैं कुछ बोलने की स्तिथि में था ,

"आखिर कौन हो सकता है जिसे हमारी खुशियों से इतनी जलन है "

मेरे मुँह से अनायास ही निकल गया

"राज मुझे नहीं लगता की ये दौलत के लिए किया गया था .."

"हां रश्मि ,ये बहुत ही पर्सनल अटेक था "

"लेकिन राज सोचने वाली बात है की किसके ऊपर ,क्या तुम्हे नहीं लगता की टारगेट तुम भाई बहन थे और कोई आंटी को बचा रहा था ,वो भी अभी क्यों ? अगर करना ही था तो पहले क्यों नहीं मारा तुम लोगो को उसने ??"

मैंने एक बार रश्मि की ओर देखा ,उसका प्यारा सा चेहरा मुरझा सा गया था

"हां रश्मि मुझे भी लगता है की प्लान तो हमे मरने का था लेकिन माँ के बीच में आने के कारण उसने पिता जी को फोन किया ,लेकिन वो माँ को बचा क्यों रहा था ??"

रश्मि की आंखे थोड़ी नम होने लगी

"क्या हुआ रश्मि ??"

"मुझे लगता है की जिसने भी ये किया होगा वो तुम्हारी माँ से प्यार करता है ,"

वो चुप हो गई ,और मै स्तब्ध ,हां ये सही था और ये ख्याल मेरे दिमाग में भी आया था लेकिन मेरा स्तब्ध होना रश्मि के आंसुओ के कारण था ,मै समझ गया था की आखिर वो क्या सोच रही है ..

"नहीं रश्मि मुझे नहीं लगता की तुम जो सोच रही हो वो सही हो सकता है .."

"क्यों राज ??"

"क्योकि उनके पास कोई कारण नहीं है ऐसा करने का .."

हम भैरव की बात कर रहे थे ,भैरव रश्मि का पिता था और रश्मि को भी पता था की जवानी के दिनों में भैरव मेरी माँ से प्यार करता था ,

"कारन तो कुछ भी हो सकता है राज ..."

"नहीं रश्मि मुझे नहीं लगता की अंकल ऐसा करेंगे ,उन्होंने तो हर मुश्किल में मेरा साथ दिया है,और माँ के लिए उनका प्यार सच्चा है ,सच्चा प्रेम कभी किसी को दुःख नहीं पहुँचता ,उसमे कोई संघर्ष नहीं होता कोई जीत हार नहीं होती ,क्या तुम्हे कभी ऐसा लगा की अंकल ने तुम्हारी माँ को कम प्यार किया ,(रश्मि ने ना में सर हिलाया ) ,हां रश्मि तुम्हारे पिता ने तुम्हारी माँ को भी भरपूर प्यार दिया ,भले ही शायद आज भी वो मेरी माँ से प्रेम करते हो लेकिन ....लेकिन वो एक प्रेमी ही है और प्रेमी अपने प्रेम की पूजा करते है ना की वो किसी मोह में प्रेम को दुःख देते है ,अंकल ने माँ के जाने के बाद भी शायद उनसे प्रेम किया हो लेकिन फिर भी उन्होंने तुम्हारी माँ को भरपूर प्रेम दिया ,तुम्हे भरपूर प्रेम दिया ,वही एक मेरे पिता थे जिनकी आँखों में मैंने कभी माँ के लिए प्रेम नहीं देखा ,वो उनके लिए एक उपलब्धि थी जिसे वो सेलेब्रेट किया करते थे प्रेम नहीं ,अगर मेरे पिता की बात होती तो शायद मै मान भी लेता की वो मेरे साथ ऐसा करना चाहते हो ,लेकिन अंकल... नहीं ..जब मैं उनके पहली बार मिला था तो उनके आँखों में एक चमक थी ,उस चमक को मैं पहचान सकता था ,वो चमक तब आती है जब कोई इंसान अपने अजीज के बच्चो को देखता है ,मैंने अपने मन से इसे महसूस किया है,उनके अंदर मेरे लिए एक अनकहा सा प्रेम है ..वो ऐसा नहीं कर सकते ,क्या तुमने ये महसूस नहीं किया ??"

रश्मि के चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई ...

"तुमने मेरे दिल का एक बोझ ही हल्का कर दिया ,लेकिन .."

वो कहते कहते रुक गई थी

"लेकिन क्या ?"

"लेकिन राज मुझे आज एक बात पता चली "

मैं जानता था की उसे क्या पता चला है ,वो मेरी आँखों में देख रही थी जैसे कोई इजाजत मांग रही हो ...मैंने अपने आँखों से ही उसे वो इजाजत दे दी थी ..

"राज तुम्हारे पिता जी को जीवन भर ये शक था की तुम ..(वो कुछ सेकण्ड के लिए चुप हो गई ) की तुम मेरे पिता का खून हो .."

रश्मि ने इतना बोलकर अपनी आंखे निचे कर ली

"और तुम्हे क्या लगता है "

उसने फिर से सर उठाया और मेरे आँखों में देखने लगी

"मुझे नहीं पता "

मैं हंस पड़ा ,और हसते हँसते मेरी आँखों में पानी आ गया ,वो किसी गम का नहीं एक अहसास का पानी था,इस लड़की के प्रेम का अहसास ,हो इन चीजों को छिपा भी सकती थी ,लेकिन वो मेरे लिए अपने पिता को भी कातिल समझने को तैयार थी ,मैंने प्यार से उसके गालो को सहलाया

"नहीं रश्मि मुझे अपनी माँ पर पूरा भरोसा है,मैं ये मान सकता हु की उन्होंने तुम्हारे पिता से प्रेम किया होगा,लेकिन ये नहीं की उन्होंने शादी के बाद मेरे पिता से धोखा किया होगा ,नहीं मै ये नहीं मान सकता ,उन्होंने तो अपना पूरा जीवन ही पिता जी को समर्पित कर दिया था रश्मि ,और जंहा बात है की पिता जी के ऐसा सोचने की तो जो आदमी जीवन भर अपनी बीबी को धोखा देता रहा उसके दिमाग में अगर ऐसी बात आ भी जाए तो इसमें अचरज क्या है,लोग जैसा सोचते है वैसा ही देखते भी है,उन्हें लगता की पूरी दुनिया उनके जैसी है .नजारो को अच्छा या बुरा हमारी नजरे ही तो बनाती है ,ये दृष्टि ही दृश्य को परिलक्षित करती है "


मेरी बात सुनकर रश्मि के चेहरे में एक मुस्कान आ गई

"तुमने मेरे मन का एक बोझ हल्का कर दिया राज "

उसकी इस बात से मेरे चेहरे में भी मुसकान खिली ,ये भरी गर्मी की दोपहर में मिलने वाली ठंडी सुकून भरी हवा जैसा अहसास था ,इस द्वन्द और युद्ध की स्तिथि में उसका प्रेम से भरा हुआ चेहरा और दिल से खिलती हुई वो मुस्कान मेरे लिए सुकून भरे थपकी से कम नहीं था ,

"तुम उस कमीने को ढूंढ लोगे राज ,मुझे तुमपर पूरा यकीन है ,उस कमीने को छोड़ना मत ,बस तुम्हे आंटी के ठीक होने का इंतजार करना चाहिए शायद इन सबका राज उनके अतीत से जुड़ा होगा "

"हां रश्मि मुझे भी ऐसा ही लगता है,शायद कोई और ऐसा है जो हमारी नजरो से ओझल होते हुए भी हमरे जीवन पर असर कर रहा है ,अतीत के कुछ किस्से कब वर्तमान को प्रभावित करने लगते है हमे पता ही नहीं चलता ,और हम इसी भ्रम में जीते है की अभी हमसे कुछ गलती हुई होगी ,लेकिन रोग पुराना होता है ,हां उसका इलाज जरूर नया हो सकता है "

मैंने मुस्कुराते हुए रश्मि को देखा ,

उसने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा

"राज अब शयद हमे चलना चाहिए,तुम्हे अपने घर जाकर अंकल के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम सम्पन्न करना चाहिए ,मैं ,मम्मी और चाची जी यही रुके हुए है हम आंटी का पूरा ख्याल रखेंगे और चाचा भी थोड़े देर में आ जायेगे "

मैंने हां में सर हिलाया और हम वंहा से निकल गए .....
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