Update:-36
अपस्यु, उसकी सर्विस गन वापस करते हुए…. "तुम बिना घायल हुए अकेले इतना बड़ा कांड कैसे कर सकते हो… अच्छी सी कहानी सोचो जबतक तुम्हार बैकअप पहुंचता होगा। अभी 2 लोग और हैं लिस्ट में।
थानेदार को वहीं छोड़कर अपस्यु निकला, रास्ते से ही उसने आरव को फोन लगाया…. "सब सैटल हो गया" आरव ने उधर से पूछा…
"हां फ़िरदौस का खेल खत्म बस उसके 2 चमचे है जिसके पास कुंजल की कुछ तस्वीरें है। वहीं जा जा रहा हूं। उधर सब ठीक है।"
आरव:- कुंजल को अभी तक होश नहीं आया है। मां का गुस्सा थोड़ा कम हुआ है लेकिन तू तो समझ सकता है ना।
अपस्यु:- दोनों का ख्याल रखना.. बस इन दोनों के पास पहुंच जाऊं फिर पूरा काम ख़त्म हो जाएगा.. चल तू वहां ध्यान दे मैं यहां देखता हूं।
कार अपने टॉप स्पीड में थी। 15 मिनट में ही अपस्यु फिर से सहर में दाखिल हो चुका था। अपस्यु ने सबसे पहले उन दोनों चमचों को फोन लगाया। उन्हें झांसा देकर उनसे पता निकलवाया। यह अच्छी खबर थी कि दोनों एक ही जगह किसी फैशन स्टूडियो में थे। बिना देर किए अपस्यु वहां पहुंचा और जोड़-जोड़ से दोनों का नाम पुकारने लगा… "रिकी, जैश.. रिकी.. जैश"… कुछ लड़के बाहर आए… "तुम में से रिकी और जैश कौन है"…
2 लड़के आगे आकर… "हम है.. तुम्हीं ने कॉल किया था अभी"… अपस्यु तेजी से उनके पास पहुंचा। एक हाथ से रिकी के हाथ की उंगलियां पकड़ी और उसे उल्टा घुमा दिया। दूसरे के सिर के बाल को पकड़ कर दीवार पर दे मारा। ना कोई बात और ना ही कोई संभलने का मौका.. बस 2 सेकंड लगे पहुंचने में और एक सेकंड में ये सब हो चुका था।
बाकी बचे वहां उसके 3 साथी जो अपस्यु पर लपके, लेकिन अपस्यु के हाथ में था डंडा और वो तुरंत नीचे बैठ कर इतने तेजी के साथ उनके पाऊं पर डांडिया खेला गोल-गोल घूमकर, की जब अपस्यु खड़ा हुआ तब वो तीनो पाऊं पकड़ कर नीचे बैठे कर्रह रहे थे… 10 सेकंड का ये करनामा और मात्र 11 सेकंड में पांचों के होश उड़ चले थे।
रिकी अपनी टूटी उंगली पकड़ कर चिल्ला रहा था इतने में तेजी से एक डंडा पड़ा पीठ पर.. छटपटा गया वो… इससे पहले की कुछ और प्रतिक्रिया देता पूरे एक मिनट तक उपर डंडे बरस चुके थे… 6 हड्डियां और एक पसली इसकी गई। अब बाड़ी थी उस जैश की जिसका सर घूमना थोड़ा ठीक हुआ था। वो अपने कमर से गन निकल कर जैसे ही आगे कि ओर ताना.. एक जोरदार डंडा उसकी कलाई पर और उसकी कलाई टूट गई।
"आव-आव" करके वो अपनी कलाई झटकने लगा लेकिन अपस्यु आज रुकने के मूड से बिल्कुल भी नहीं था। टूटी कलाई पर एक और जोरदार डंडा उसने दे मारा। चिल्लाना जैसे हलख में ही अटक गया हो। जैश पर अब बरसने वाला था कहर। इसके पीठ को अपस्यु ने उधेड़ दिया। शर्ट के साथ-साथ उसके पीठ का भी चिथरा हो चुका था।
अपस्यु ने रिकी और जैश का फोन लिया.. दोनों के फोन चेक करने के बाद उनका फोन भी अपने बैग में रख लिया। फिर वो स्टूडियो के अंदर वाले कमरे में गया। वहां अपस्यु को एक कंप्यूटर और 2 हार्ड ड्राइव मिली, जिसमें बहुत से लड़कियों के अश्लील तस्वीरें और वीडियो थी।
ये नजारा देख कर अपस्यु का और खून खौल गया। वो फिर बाहर आया और इस बार पचों के अंडकोष पर इस बेरहमी से हमला किया कि जिंदा तो रहेंगे लेकिन अब इनकी ज़िन्दगी में सेक्स नहीं रहेगा।
एक हार्ड ड्राइव वहीं सबूत के लिए फेंक कर बाकी सरा सामान बैग के साथ ही गाड़ी के डिक्की में रखा और वहीं से 5 फिट का रोड निकाल लाया। गुस्सा इतना था कि अपस्यु ने पूरे फ़ैशन स्टूडियो को तहस-नहस कर दिया। बिल्कुल वो अपने आपे से बाहर हो चुका था।
तभी मौके पर पुलिस पहुंच गई। थानेदार अपने वहीं महान व्यक्ति निकले जिन्होंने अपस्यु को उसके परिवार से मिलाया, श्रीमान अजिंक्य सिंह। अपस्यु अब भी तोड़-फोड़ में लगा था। अजिंक्य पहुंचे ही अपस्यु को पीछे से पकड़ा और उसे धक्का देते हुए पीछे 2 डंडे हौंक दिए।
अपस्यु गुस्से में मुड़ा ही था मारने के लिए, की सामने पुलिस की वर्दी और वर्दी में खड़ा अजिंक्य। अपस्यु को इस रूप में देखकर अजिंक्य कहने लगा… "साला तय नहीं कर पा रहा हूं कि तू मीडियम रेंज का क्रिमिनल होगा या मेजर रेंज का। कहीं ना कहीं क्राइम करते ही मिलता है।कैसे पागलों कि तरह मारा है इनको, जरा इनकी हालात तो देखो.. शर्मा जी एम्बुलेंस को कॉल कीजिए, एकाध टपक गया तो छोड़े की जवानी जेल में ही सर जाएगी। तेरे साथी कहां है बे"…
अपस्यु:- सब भाग गए.. कोई अपशब्द नहीं बोलना और ना ही हाथ लगाना मैं साथ चल रहा हूं।
अजिंक्य:- तुझे तो पूरा कानून पता है। लॉ कर रहा है या पैदाइशी क्रिमिनल है।
अपस्यु, बिल्कुल खामोश रहा और अजिंक्य के साथ-साथ चलते उसने सिन्हा जी को कॉल लगा दिया… "हां अपस्यु बोलो"…
"मारपीट का केस है और चार्ज शायद 5 हाफ मर्डर का लगे.. बेल चाहिए अभी"… अपस्यु ने अजिंक्य को देखते बोला।
सिन्हा जी:- किसने किया और कौन सी चौकी में बंद है"…
अपस्यु:- मैं खुद अभियुक्त हूं। सराफतगंज थाना…
इतना कहकर अपस्यु उनकी जीप में जाकर बैठ चुका था। जीप आगे बढ़ी और अजिंक्य पूछने लगा… "ना बे तुझमें इतना तेवर कहां से आया है।"… अपस्यु ने कोई जवाब नहीं दिया। … "कोई शातिर खिलाड़ी लगता है तू, लेकिन तेरी किस्मत मेरे आगे ही दम तोड़ देती है। लगता है आज तक सही पुलिसवाले से तेरा पाला नहीं पड़ा है।"… अपस्यु बस सुनता रहा।
जीप जैसे ही थाने में घुसी वहां का मुंसी भागता हुआ पहुंचा… "किसको अरेस्ट कर के लाए हो, यहां तो धुरंधर वकीलों की लाइन लगी हुई है।"
अजिंक्य:- बैनचो यहीं कुत्ते कि जिंदगी है। इसकी शक्ल देखो, साला पढ़ने-लिखने वाला लड़का है ये। आज सजा होती तो कल सुधर कर निकलता। साला इन वकीलों को ही पहले ठोकना चाहिए।
अपस्यु:- वहां से जो एक हार्ड डिस्क उठाया है उसे ध्यान से देखना। और हां हर सजा सबको सुधारती नहीं, कभी-कभी लोग क्राइम की दलदल में बस सजा के कारण ही घुसते चले जाते हैं।
अजिंक्य:- ओ तेरी.. अपने बाप को देख कर तेरी भी जुबान खुलने लगी…
अपस्यु:- अपने कहे का अफसोस हो तो मुझे कॉल कर लेना।
थाने के अंदर सारी फॉर्मेलिटी करने के बाद अपस्यु बाहर आया। वहां आए वकीलों को उसने धन्यवाद कहा और अपनी गाड़ी से पैसे निकालकर उनकी पूरी फ़ी देदी। बिना कोई देर किए वो वापस फ्लैट पहुंच गया और नहा धोकर फिर तुरंत हिल हॉस्पिटल के लिए निकल गया।
रास्ते में ही उसने एक कहानी तैयार की, हॉस्पिटल पहुंचकर मां को वो कहानी सुनाया और यकीन करवा चुका था कि सभी दोषियों को पुलिस ने पकड़ लिया है। नंदनी के लिए ये एक राहत के पल थे। उसने चैन कि सांस ली और वहीं बैठी रही अपनी बेटी के पास।
शाम के तकरीबन 7 बजे कुंजल को होश आया। आंख खुलते ही पूरे परिवार को अपने पास पाकर, कुंजल फिर से रोने लगी।… "अरे यार इसको तो ठीक से रोना भी नहीं आता।"… आरव ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा…
अपस्यु:- अरे मां आप जरा वो क्लासिकल रोना तो दिखाओ इसे। लड़कियों के रोने में कैसी नजाकत और अदा होनी चाहिए।
नंदनी ने भी अपने चूड़ियों से भरे हाथ को बिल्कुल मिना कुमारी की तरह अपने सिर पर रखी और दिखा दी क्लासिकल स्टाइल में रोने कि झलकियां….. "कुंजल लड़कियों का रोना मतलब अपने सारे बिगड़े काम एक ही रोने में बन जाए। दोबारा कोशिश करो और इस बार अच्छा परफॉर्म करना बेटा।"
घरवालों का रोने के ऊपर की प्रतिक्रिया को देखकर कुंजल हसने लगी। थोड़े ही देर में डॉक्टर भी वहां पहुंच गए। कुंजल को पूरी तरह जांचने के बाद उन्होंने एक दिन रुककर कुछ और टेस्ट करवाने के लिए बोल दिया।
सभी लोगों को वहां से जबरदस्ती भेजकर अपस्यु वहीं रुक गया। रात के 9 बजे उसे खाना खिलाकर अपस्यु जब उसके मुंह को साफ करने लगा तब कुंजल ने उसका हाथ पकड़कर कहने लगी… "बस भाई इतना भी ना करो कि हर बात में रोना अा जाए।"
अपस्यु:- मार खाएगी। एक बात बताओ ये फ़िरदौस तुझे 10 दिनों से कॉल कर रहा था हमे बताई क्यों नहीं।
कुंजल:- मैंने सोचा मैं खुद ही हैंडल कर लेती।
अपस्यु, उत्सुकता वश:- और वो कैसे बेटा..
कुंजल:- वो सोचने के लिए तुम थे ना भाई… (और हसने लगी)
अपस्यु:- हां तो तेरे भाई ने आज उसके बारे में सोच भी लिया और उसका चेप्टर भी खत्म कर दिया।
कुंजल:- चैप्टर खत्म मतलब..
अपस्यु:- मतलब वहीं जो तुम सोच रही हो..
कुंजल:- सच..
अपस्यु:- हां बाबा सच..
कुंजल खुशी के मेरे गले लगने के लिए, उठने कि कोशिश करने लगी। लेकिन अपस्यु उसे लिटाते हुए उसके गले लग गया और उसके सर पर हाथ फेरने लगा। कुछ ही समय लगे होंगे और कुंजल गहरी नींद में सो गई। वो वहीं उसके पास बैठा उसके सर पर हाथ रख, कुंजल को ही देख रहा था। 10.30 के करीब हो रहे थे और उसके फोन की घंटी बाजी।
"जी कहिए मिस"…. अपस्यु वार्ड के बाहर आते हुए बात करने लगा..
साची:- कैसी है तुम्हारी बहन अभी।
अपस्यु:- वो बिल्कुल ठीक है। कल कुछ टेस्ट में बाद डिस्चार्ज मिले शायद।
साची:- सुबह पुलिस अाई थी तुम्हारे यहां?
अपस्यु:- यहीं बताने के लिए कॉल की हो क्या?
साची:- नहीं, बस बात शुरू करने के लिए कोई ढंग के शब्द ही नहीं मिल रहे, उसी को शुरू करने की कोशिश कर रही हूं।
अपस्यु:- गूगल कर लो शायद जवाब मिल जाए।
साची:- वेरी फनी.. अच्छा सुनो मुझे सच में दिल से गिल्टी फील हो रहा है पता नहीं मैंने गुस्से में क्या से क्या कर दिया। बहुत दिनों से तुम्हे कॉल करने का सोच रही लेकिन हिम्मत ही नहीं पड़ रही थी।
अपस्यु:- तुम्हे इतना घबराने कि जरूरत नहीं है। जब दिल करे तब कॉल लगा लिया करो। जितना वक़्त सोचने में हम बर्बाद कार देते हैं उतने में तो हम काम खत्म कर लेंगे। काम जब खत्म हो गया फिर सोचेंगे की अच्छा हुआ या बुरा।
साची:- जी गुरुदेव.. वैसे गुरु देव से याद आया कि तुम्हारी गुरिवी मिस सुनैना दीक्षित कितनी हॉट है ना।
अपस्यु:- 2 पेग चढ़ा कर कॉल लगाई हो क्या?
साची:- नहीं पूरे होश में हूं और कुछ फ्रैंडली बातें कर रही हूं ताकि मैं क्लासमेट से तुम्हारी दोस्त बन सकूं। वैसे दोस्ती कि बात से याद आईं उस दिन घर पर जब तुमने मेरा हाथ खिंचा था और मै जब तुम्हारे ऊपर गिरी थी उस वक़्त की तुम्हारी फीलिंग क्या थी? वो दिन रात बालकनी में खड़े रहना? और वो जो तुमने मुझसे कहा था… दिल में फीलिंग कुछ और रखकर दोस्ती नहीं कर सकता?.. और वो सरप्राइज वाली बात भी?
अपस्यु:- एक ही बार में इतने सारे सवाल। तुम्हे जो जानना है, मैं वहीं से शुरू करता हूं। जब मैंने तुम्हे पहली नजर में देखा तो तुम्हे देखता ही रह गया। मैं अपने उस वक़्त के अनुभव को साझा नहीं कर सकता। तुम्हारी एक झलक के लिए मै प्यासा रहता। जब तुम मेरी सेवा कर रही थी तब ऐसा लगा जैसे दिल के बहुत ही करीब हो। मैं बयां नहीं कर सकता इससे ज्यादा कुछ। उस दिन का सरप्राईज यहीं था कि जो बात अभी मैंने कम शब्दों में बयां किया उसे मैं तुम्हे विस्तार से बताता। तुम्हारे साथ चंद लम्हे मैं बांटता।
साची:- तो अब ये सब फीलिंग खत्म हो गई या फिर मुझ में कोई शैतान दिख गया। गलतियां तो हर किसी से होती है। क्या ये कह देना कि "मैं तो एक अरबपति का बेटा हूं".. ये अहम नहीं था। वहीं मेरे पैरेंट की तुमने ऐसे उदहारण से तुलना की जो जरा भी तुलनात्मक नहीं था। जिसने कई साल सर्विस में बिताया हो, पुरखों की अर्जी हुई संपत्ति हो वो क्यों नहीं महीने के 70 या 80 हजार का खर्च अपने बच्चों के लिए उठाएगा।
अपस्यु:- हां अनियंत्रित मै भी हो गया था और बाद में मुझे भी इस बात का अफसोस भी हुआ। मै खुद मिलकर तुमसे इस बात के लिए माफी भी मांगता लेकिन कहानी ही कुछ उलझी थी सो मैं ये कर ना सका।
साची:- अभी भी मेरे सवाल का जवाब नहीं मिला। अभी जो तुमने जवाब दिया वो सवाल के दूसरे हिस्से का जवाब था, पहला हिस्सा अभी भी अधूरा है।
अपस्यु:- कल मिलकर बात करे क्योंकि कुछ सवालों के जवाब आमने-सामने होकर ही दिए जाए तो बेहतर होता है।
साची:- मैं कल के इंतजार में नहीं रुक सकती, बाहर मिलो मुझ से अभी।
अपस्यु:- नहीं मिल सकता कुंजल के पास हूं हॉस्पिटल में।
साची :- कौन से हॉस्पिटल में हो।
अपस्यु:- तुम्हारे दिमाग में चल क्या रहा है?
साची:- ये मेरे सवाल का जवाब नहीं है। सवाल अब भी वही है.. कौन से हॉस्पिटल में हो।
अपस्यु:- लालजी हॉस्पिटल।
साची:- ठीक है मेरा इंतजार करना, सोना मत।आमने सामने बैठकर ही सवाल जवाब करेंगे।
"हेल्लो.. साची.. हेल्लो" और कॉल डिस्कनेक्ट हो गया।………