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Incest Sagar (Completed)

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kahani achchi hai .... par kabhi amar to kabhi ajay likhte ho ,thoda confusion ho jaata hai ... suspense kahani padhne me bahut maja aata hai ,aage ki kahani ka intejar .
Thanks friend for reading and supporting ?

Haa..ye galati ho gaya hai.. main baad me correct kar dunga.
 
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par amar shweta ke ghar kyu gaya tha aur wahi uska murder ho gaya.... shadi me bhi hero par humla koi bahut badi saajish ho sakti hai .... amar ki maa paise kharch karne ko taiyar hai ye bhi sahi hai ab beta hi nahi raha to paiso ka kya karegi .... par itne gambhir mahaul me char dham ki yaatra jaruri hai kya .
Thanks Mahadev Ji for your review....

Ye raaj to hai ki Amar Shweta ke ghar kaise pahuch gaya..
Amar ki maa chaar dham ki yaatra par kyon jane wali hai..Ye to baad me pata chal hi jayega.. abhi to story running hai dost..?
 
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Incestlala

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" वो शुरू से ही ऐसे थे । ज्यादा किसी से मतलब नहीं । अपने में ही खोया रहना " - चाची अपने शादी के समय को याद करते हुए बोली -" कालेज में खेलकूद में बहुत माहिर थे और खेलकूद के चलते ही नौकरी भी मिली थी । उन्होंने कई प्रतियोगिताएं भी जीती थी । मेरे मां बाप ने सरकारी नौकरी वाला लड़का देखा और फिर हमारी शादी हो गई । हमारे जमाने में लड़का लड़की देखने का रिवाज नहीं था । मां बाप अपने लड़के और लड़कियों की शादी फिक्स करते थे और शादी हो जाती थी ।"

" और यदि किसी को लड़का या किसी को लड़की पसंद ना आए तो ?"

" तो भी कुछ नहीं हो सकता था । एक बार शादी हो गई तो हो गई । भले ही लड़का या लड़की एक दुसरे को पसंद आए या ना आए , वे जिन्दगी भर के लिए शादी के डोर से बंध जाते थे । तुम्हारे मम्मी और डैडी की शादी भी तो बिना देखे हुए ही हुई थी ।"

" डैड को तो मैंने माॅम के सामने कभी तेज आवाज में बातें करते या लड़ते झगड़ते नहीं देखा है लेकिन तात श्री को कई बार आपसे लड़ते झगड़ते देखा है । उनके खौफ से श्वेता दी भी उनके सामने नहीं जाती थी । मेरे पुछने का मतलब था कि क्या जब आप की शादी हुई थी तब भी क्या वो ऐसे ही थे ?"

" नहीं नहीं , शादी के शुरुआती कई सालों तक बहुत अच्छे थे लेकिन जब से उन्हें हार्ट की बिमारी हुई तब से थोड़े बदल गये और बची खुची बवासीर के रोग ने कर दिया ।"

" बवासीर ! ये कब हुआ ?"

" छः सात साल हो गए " - चाची अपने कमरे की तरफ जाती हुई बोली -" तु बैठ । मैं पैसे लेकर आती हूं ।"

मैं सोफे पर लेट गया।

थोड़ी देर में चाची आई और सोफे पर मेरे सर के बगल बैठने का प्रयास करी। मेरे लेटने के कारण सोफे पर जगह नहीं था इसलिए मैने उठने का प्रयत्न किया तो चाची ने मेरे सर को उठा कर अपने गोद यानी जांघों पर रख दिया और बोली - " लेटा रह । मैं बैठ जाऊंगी ।"

" आपको बैठने में दिक्कत होगी " - मैंने लेटे हुए उनको देखते हुए कहा ।

" कोई दिक्कत नहीं होगी " - कहकर चाची रूपए मेरे हाथ में पकड़ाई और मेरे सर के बालों को अपनी उंगलिया से सहलाने लगी ।

मैंने अपने सर को उनके मोटे और मांशल जांघों पर एडजस्ट करते हुए रूपए गिनने लगा । बीस हजार रुपए थे ।

" ये तो बहुत ज्यादा है । कौन सी मोबाइल लाना है ?" - कहते हुए रूपयों को अपने पैंट के अंदर रख दिया ।

" कोई भी अच्छी सी देख समझ के ले लेना ।"

" ठीक है । लेकिन चाइनीज मोबाइल नहीं लाऊंगा ।"

" जो तुझे समझ में आए वो ले लेना । "

चाची के जांघों पर सर रखकर लेटने से उनके जांघों का गुदाज पन महसूस हो रहा था जिससे मुझे कुछ कुछ हो रहा था । मैंने करवट ली और उनके पेट की तरफ मुंह करके लेट गया । उनकी साड़ी पेट पर से हट गई थी जिससे उनकी थोड़ी चर्बी युक्त और थोड़ी फुली हुई पेट नग्न हो गई थी । करवट ले कर पलटने से मेरा मुंह सीधे उनके नंगे पेट से सट गया । जिससे उनके बदन में हुई सिहरन को मैंने साफ महसूस किया ।

वो अभी भी मेरे सर के बालों को सहलाए जा रही थी । चाची अभी मात्र ४३ या ४४ साल की थी । इस उम्र में भी औरतों की सेक्स लाइफ पिक पीरियड में रहती है । जबकि चाचा की बिमारी देख कर मुझे नहीं लगता था कि वो अपनी सेक्स लाइफ इन्जवाय कर रही होगी। और शायद कई सालों से ऐसी ही जीवन जी रही होगी ।मुझे उन पर ना जाने क्यों बहुत दया आई और मैंने उनकी नंगे पेट को अपने होंठों से चुम लिया ।

" अरे ! क्या करता है , गुदगुदी होती है " - चाची अपने शरीर को झटके देते हुए बोली ।

" आप को अच्छा नहीं लगता है ? " - कहते हुए मैंने फिर से उनके पेट को चुम लिया ।

वो कुछ नहीं बोली । सिर्फ मेरे बालों पर उंगलियां फेरती रही । हम ऐसे ही अवस्था में कितनी देर तक पड़े रहे । तभी किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी ।

मैं उठ कर बैठ गया । चाची अपने साड़ी को व्यवस्थित करते हुए दरवाजा खोलने चली गई ।

चाची के साथ चाचा ने हाॅल में प्रवेश किया ।

" तुम अभी यहीं हो , कालेज गए नहीं ? " - चाचा ने मुझे देख कर अपनी चिर-परिचित लहजे में कहा ।

" आज कालेज नहीं है । कल श्वेता दी और जीजू यहां शिफ्ट हो रहे हैं उसी के बारे में चाची से बातें चल रही थी ।"

" अच्छा ! थोड़ी देर पहले तो किसी के डाइवोर्स के बारे में बोल रहे थे ।"

" हां । उसके अलावा इसके बारे में भी बातें करनी थी ।"

" ठीक है ठीक है...मुझे भी पता है कि वो लोग ..यहां तुम्हारे उस दोस्त... क्या नाम था उसका.... हां , शायद अमर के घर शिफ्ट हो रहे हैं । तो इस के लिए तुम दोनों को क्या बातें करनी थी ?

" चाचा , वो लोग यहां काफी सारे सामान के साथ शिफ्ट कर रहे हैं । क्या आप ने कोई लेबर वगैरह से बात की है ? इतना सारा सामान जिसमें बड़े बड़े पलंग , आलमारी , बक्से , बर्तनों का कार्टून , बैग और न जाने क्या क्या सामान होगा , वो क्या आप खुद ही करोगे ।"

तात श्री ने मुझे घूर कर देखा और चाची से बोले -" मेरी मोबाइल यहां छुट गया है , देखो वो मेरे रूम में कहीं होगा ।"

चाची कमरे में चली गई । कुछ देर बाद वो चाचा का मोबाइल लिए हुए आई और उन्हें सौंप दी । चाचा मोबाइल लेकर बाहर चले गए ।

" तुमने मुझे ये सब बताया नहीं कि मजदूर देखने होंगे " - चाचा के बाहर निकलते ही चाची ने पूछा ।

" आप चिंता मत करो , मैंने लेबर पहले ही ठीक कर दिया है ।"

" ओह । " - चाची ने थोड़ी देर रूक कर कहा -" देखा न कैसा आदमी है... जहां काम दिखाई दिया , फट से ज़बान बन्द हो गई। कैसे लेबर जुगाड़ होगा... कैसे राजीव और श्वेता को यहां शिफ्ट करने में मदद करना है....उन को तो जैसे कोई मतलब नहीं है...सुना और भाग खड़े हुए ।"

" आप तो उनका स्वभाव जानती हो... छोड़ो उनको... मैं सब कर लुंगा " - मैंने चाची को आश्वासन दिया ।

" हां , कई साल हो गए उनको जानते हुए । अगर तु नहीं होता तो मेरे घर का एक रत्ती भर भी काम नहीं होता....मेरा काम , श्वेता का काम , राहुल का काम.... आज तक तुने ही तो किया है ।"

" मैंने तो जो भी किया है अपनी फेमिली के लिए किया है... छोड़ो वो सब । मैं चलता हूं " - कहकर मैं दरवाजे की ओर बढ़ा ।

" कहां जाओगे ?" - चाची भी मेरे साथ चलते हुए बोली ।

" अमर की मम्मी के पास । वहां रूम वगैरह की सफाई भी तो करवानी है ।"

" ठीक है " - चाची ने कहा ।

***********

मैं वहां से निकल कर अजय की मम्मी के घर चला गया ।

वहां मजदूर उपर वाले तल्ले की साफ सफाई कर रहे थे । आंटी ( अमर की मम्मी ) मजदूरों के साथ ही खड़ी थी ।

मैंने आंटी के चरण स्पर्श कर प्रणाम किया और कहा -" आंटी , एक बार नीचे चलो न , कुछ बात करनी थी ।"

" कैसी बातें ?" - आंटी ने मुझे सवालिए दृष्टि से देखते हुए कहा ।

" अमर के बारे में ।"

आंटी कुछ नहीं बोली ।

मैं आंटी के साथ उनके कमरे में आ गया ।

" क्या बात करनी है ? - वो बिस्तर पर बैठते हुए बोली ।

" आंटी , अमर का मोबाइल कहां है ?" - मैं भी उनके बगल में बैठते हुए कहा ।

" अमर का मोबाइल यहां पर नहीं है । पुलिस भी जब यहां आई थी तब उन्होंने भी मोबाइल के बारे में पुछा था । फिर उन्होंने पुरे घर की तलाशी ली थी । उपर नीचे दोनों तल्लों में । हर जगह लेकिन मोबाइल कहीं भी नहीं मिली ।"

" ओह ! " - मैंने निराश होते हुए कहा ।

" वैसे अमर के क़ातिल का कुछ अता पता लगा ?"

" नहीं आंटी , अभी तक तो नहीं । इसीलिए तो मोबाइल के बारे में आप से पुछ रहा था । उसके काॅल डिटेल से पता चलता कि उसने उस दिन या पिछले कुछ दिनों से किस किस के साथ बात की थी । या कुछ मैसेज वगैरह से पता चलता कि हाल फिलहाल किसके साथ ज्यादा टच में था ।"

" एक महिना से भी ऊपर हो गया लेकिन अभी तक मेरे बेटे के हत्यारे को पुलिस पकड़ नहीं पाई । मुझे तो पुलिस पर यकीन ही नही रहा । मेरा बेटा उपर से मुझे देख रहा होगा और बोल रहा होगा कि मां..मेरा हत्यारा अभी तक खुलेआम घूम रहा है ... क्या उसको सजा नहीं मिलेगी... क्या उसके हत्यारे ऐसे ही खुलेआम बेफिक्र होकर घुम रहे होंगे " - वो भावुक होते हुए रूंधे गले से बोली - " क्या मेरी आत्मा ऐसे ही भटकते रहेगी ।"

" सजा मिलेगी आंटी...जरूर मिलेगी । भगवान के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं । आप थोड़ी हिम्मत बनाएं रखें ।"

" मैंने तो हिम्मत ही बनाए रखा है बेटा.... मैं तो बस इसलिए जिन्दा हूं कि एक बार हत्यारे को फांसी पर चढ़ते हुए देख लूं वर्ना मैं तो उसी दिन अमर के साथ ही ऊपर चली गई होती ।"

आंटी फफक कर रो पड़ी । मेरी आंखें भी भर आई । मैंने उन्हें अपने बाहों में भर लिया और उन्हें दिलासा देते रहा ।

थोड़ी देर बाद वो नोर्मल हुई । वो मुझ से अलग हो गई ।

" बेटा , मैं अपनी सारी दौलत लुटा दुंगी अपने बेटे के हत्यारे को फांसी पर चढ़ाने के लिए । तु पुलिस को पैसे खिला । और यदि तुझे लगता है कि पुलिस हत्यारे को पकड़ने में कुछ नहीं कर पायेगी तो कोई डिटेक्टिव ढुंढ । उसे पैसा दे । वो जितना मांगे मैं उतना दुंगी लेकिन उस खूनी को ढुंढे और मेरे हवाले करे । उसे मै सजा दुंगी । अपने हाथों से उसका खून करूंगी ।" - आंटी क्रोधित होकर बोली ।

" आंटी , मैं कल इसी सिलसिले में गाजियाबाद जा रहा हूं पुलिस से मिलने । और प्राइवेट डिटेक्टिव के बारे में मुझे कोई खास जानकारी नहीं है । हां इतना मैंने सुना है कि वो भले ही काम का रिजल्ट दे पाए या ना दे पाए लेकिन अपना चार्ज ले ही लेंगे और उनके चार्ज भी काफी बड़ी रकम में होती है ।"

" कुछ भी कर पर उस हत्यारे को ढुंढ । रूपए पैसे की चिंता मत कर जितना लगेगा मैं दुंगी । मेरी ये सारी जमा पूंजी , सम्पत्ति किस काम की है...जब मेरा बच्चा ही नहीं रहा तो ये मेरे किस काम की ।"

" मैं कर रहा हूं आंटी । मैं पुरे जतन से खूनी का पता लगाने की कोशिश कर रहा हूं । और अब तो उस खूनी का अगला टारगेट मैं हो गया हूं ।"

" क्या ?" - आंटी ने चौंकते हुए कहा ।

" हां आंटी ।"

मैंने उन्हें मेरे और रीतु के बीच में जो बातें हुई थी , वो कह सुनाई ।

वो सुनकर चिन्तित होते हुए बोली -" मेरा एक बेटा तो चला गया और अब मैं अपने दुसरे बेटे को खोना नहीं चाहती.... एक मिनट तु बैठ , मैं अभी आती हूं ।"

ये बोलकर वो बिस्तर से उठी और अपनी अलमारी से कुछ निकाल कर वापस बिस्तर पर आकर बैठ गई । मैंने देखा वो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का उनके नाम पर चेकबुक था । उन्होंने एक चेक पर अपना साइन किया और चेकबुक से फाड़ कर मुझे दे दिया ।

" बेटा , इसमें तीन लाख रुपए भर के बैंक से उठा ले । एक लाख मुझे दे देना और बाकी तु अपने पास रख लेना । तु इन पैसों को उस हत्यारे को खोजने में लगा ।"

" ये तो काफी बड़ी रकम है आन्टी ।"

" कोई बात नहीं । और भी यदि ज्यादा पैसों की जरूरत पड़े तो मुझे बताना । "

मैंने चेक पाकेट में रख लिया ।

" बेटा , तुझसे एक बात और कहनी थी ।"

" हां आंटी बोलिए ।"

" कल तुम्हारे जीजा और बहन आ रही है तो मैं चाहती हूं कि इस बीच मैं चारों धाम दर्शन करके आ जाऊं ।"

" चारों धाम ! कौन सी चारों धाम ?" - मैं चौंक कर बोला ।

" बद्रीनाथ , केदारनाथ , गंगोत्री और यमुनोत्री ।"

" ओह ! कब जाएंगी ?"

" वो लोग कल यहां आ रहे हैं तो तु परसों की टीकट करवा दे ।"

" ठीक है आंटी.... मैं अब चलता हूं । वैसे आप को कुछ सामान वगैरह मंगवाना है ?"

" हां । कल आना , बता दुंगी ।"

मैं वहां से बाहर निकल गया ।

************

मैं बाहर निकल कर रमणीक लाल को फोन लगाया ।

रमणीक लाल करोलबाग थाने में हवलदार था । शायद ३५ से ४० के बीच उमर होगा । करप्ट पुलिसिया था । रिश्वतखोरी में फंस गया था , जिसकी वजह से काफी अरसे से सस्पेंशन में चल रहा था । एक बार उसकी कुछ लोगों के साथ पंगे के दौरान मैंने उसकी मदद की थी इसलिए वो मेरी इज्जत करता था । और मेरा दोस्त जैसा हो गया था । जबकि हमारे उम्र में काफी अंतर था । चूंकि अभी वो सस्पेंशन में चल रहा था इसलिए उसका हाथ तंग रहता था ।

" सागर बोल रहा हूं " - मैं बोला - " एक काम है , करेगा ?"

" कैसा काम ?" - रमणीक लाल ने कहा ।

" मामूली काम ।"

" अरे ! पहले काम तो बता ?"

" थोड़ा रूटीन काम है । थोड़ा लेग वर्क है , थोड़ा क्लैरिकल वर्क है । कुछ कमाई का भी जोगाड़ है ।"

" क्या बात है । लगता है कोई लाटरी लग गई है ?"

" वो सब छोड़ , काम करेगा तो हां बोल बरना..."

" अगर इल लैगल काम है तो सुन....मेरा सस्पेंशन का दौर खत्म हो गया है , मेरी नौकरी बहाल हो गई है ।"

" ये तो बहुत अच्छी खबर है । ठीक है मैं किसी और को देखता हूं ।"

" कितना देगा ?"

" रमणीक लाल , काम मेरी मर्जी का और उजरत तेरी मर्जी का ।"

" जरूर कोई मोटा बकरा काटा होगा ।"

मैं हंसा ।

" कुछ लोग की फुल बैक ग्राउंड टटोलनी है । उनके बारे में जितनी ज्यादा जानकारी हासिल हो सके , इकठ्ठा करनी है ।"

" कौन लोग ?"

" इस काम के लिए तुम्हें एक दो आदमी भी एंगेज करने पड़े तो उस की फीस भी मैं भरूंगा ।"

" जरूर , जरूर । कोई मोटा बकरा है ।"

" हां या ना बोल ।"

" हां ।"

" कागज कलम निकाल और जो बोलता हूं , उसे नोट कर ।"

" करा ।"

मैंने उन तमाम लोगों के नाम लिखाये जो इस केस से सम्बंधित थे ।

" सब नोट कर लिया ?" - फिर मैंने पूछा ।

" हां ।"

मैंने सम्बन्ध विच्छेद किया और बाइक पर बैठ कर पहाड़गंज चला गया ।
Superb update
 
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Update 20.


पहाड़गंज जिस काम से मैं गया था वो हुआ नहीं तो मैंने संजय जी के होटल से ही उनको फोन लगाया और उनसे मिलने की इच्छा जताई । उन्होंने बताया कि वो अभी दिल्ली से बाहर है , थर्सडे तक वापस दिल्ली आयेंगे । आज सेटरडे था.... इसका मतलब वो पांचवें दिन वापस दिल्ली लौटेंगे ।

वहां से वापस मैं रोहिणी निकल पड़ा । रोहिणी पहुंचने के बाद उस बैंक में गया जिसमें आंटी का एकाउंट था । पहला सेटरडे होने के कारण बैंक खुला हुआ था । लेकिन न जाने क्यों आज भीड़ ज्यादा थी । पैसे निकालते निकालते तीन बज गए ।

वहां से फिर आंटी के घर गया और उन्हें उन रूपयों में से एक लाख रुपए वापस दे दिए । लेबर अभी भी काम में व्यस्त थे । उनका मजदूरी भी जोड़ जाड़ के काम शेष होने के पहले ही दे दिया । आंटी ने जो सामान मंगवानी थी उसका लिस्ट भी आज ही दे दिया तो वहां से फिर मैं मार्केट चला गया और आंटी के सामानों की खरीदारी कर उन्हें उनके घर देता हुआ अपने घर चला आया ।

जब मैं घर पहुंचा तब चार से कुछ ही मिनट उपर हुए थे । दरवाजा माॅम ने खोला था । माॅम ने खाने के लिए पुछा तो मैंने मना कर दिया । मैं सीधे अपने कमरे में चला गया । और बिना पैन्ट शर्ट चेंज किए बिस्तर पर लेट गया ।

मै हैरान था कि आखिर कल से माॅम ने मेरे मैसेज का कोई रियेक्सन क्यों नहीं दिया । वो मैसेज देख ली है , ये तो साफ कन्फर्म है ... और उस युवती का नाम भी पढ़ ली है जिसके बारे में मैंने बताया था कि नाइटी उस युवती के लिए लाया हूं और उसके साथ मेरा सेक्सुअल रिलेशन है और और वो युवती उनके जान पहचान में ही है । फिर भी उसके बारे में अभी तक मुझसे कुछ पुछा क्यों नहीं... मुझे फटकारा क्यों नहीं...। हो सकता है ये सब पुछने के लिए उन्हें समय ना मिला हो ।

माॅम को ह्वाट्सएप करने के बाद और फिर ताजातरीन घर में हुई चर्चा के बाद माहौल भी तो बदला था । शायद अभी उन सब बातों से ज्यादा उन्हें मेरी सलामती की फ़िक्र सताए जा रही हो । यही कारण हो सकता है कि उनके अभी तक नहीं पुछने का ।

सोचते सोचते मेरी आंख लग गई । पांच बजे माॅम ने जगाया । डैड और रीतु भी घर आ चुके थे । चाय नाश्ते के बाद मैं क्लब चला गया ।

फिर वही सब जो वहां रोज होता है । लड़के और लड़कियों को ट्रेनिंग देना । ट्रेनिंग खत्म होने के बाद आफिस जाना । आज भी मालिक कम मैनेजर कुलभूषण खन्ना नहीं था । वहां से वापस घर आ गया ।

माॅम और रीतु रात के खाने की तैयारी कर रही थी जबकि डैड हमेशा की तरह टीबी के सामने बैठे अपने पसंदीदा चैनल पर डेली ओपेरा सिरियल का लुत्फ उठा रहे थे । मैं सीढ़ियों से होता हुआ अपने कमरे में चला गया और पैंट शर्ट खोलकर पायजामा और हल्का शर्ट पहन लिया ।

अभी सात ही बजे थे । मैंने सोचा श्वेता दी को कल अपने गाजियाबाद आने की सूचना तो दी ही नहीं । मैं कमरे से बाहर निकल कर खुले छत पर आया , एक सिगरेट सुलगाया और उन्हें फोन लगाया ।

दो रिंग बजते ही उन्होंने फोन उठाया ।

" हैलो !" - श्वेता दी की मधुर आवाज़ आई ।

" क्या कर रही हो तुफाने हमदम ?"

" डिनर की तैयारी कर रही हूं....तु बता वहां क्या खबर है ?"

" कोई खास नहीं । और बताओ तुमलोग की पैकिंग शैकिंग हो गई ?"

" वो तो कल ही हो गई । बस कुछ बर्तन , कपड़े और कुछ खुचरा सामान बाकी है , वो सब कल कर लेंगे ।"

" पलंग खोल दिया है क्या ?"

" हां । कल हम जमीन पर ही चादर डाल कर सोये थे ।"

" और गाड़ी वगैरह ?"

" गाड़ी भी बुक हो गई है । हम कल सुबह दस बजे यहां से निकल भी जायेंगे ।"

" सुनो , मैं कल वहां आ रहा हूं । मेरे वहां पहुंचने के बाद ही निकलना है ।"

" क्यों ? क्या हुआ ? ...कोई काम है क्या ?"

" हां । थाने में थोड़ा काम है । वैसे मैं तुम्हारे पास ग्यारह बजे तक पहुंच जाऊंगा ।"

" देर नहीं हो जायेगी ?...वहां पहुंच कर सामान सब रखवाना है , एडजस्ट करवाना है ।"

" कुछ भी देर नहीं होगा । यहां के लिए मजदूर कर दिया है , एकाध घंटे में वो सब रख देंगे । और बाकी रहा एडजस्ट करने का वो धीरे धीरे बाद में करने के लिए तुम्हारे दो आशिक तो है ही ।"

" दो नहीं सिर्फ एक है ।"

" अपने हसबैंड को काम करने से बचाना चाहती हो ?"

" वो यहां रहेंगे तो न काम करेंगे ।"

" क्यों ? अमेरिका , युरोप जा रहे हैं ?"

" नहीं । मुम्बई जा रहे हैं ।"

" अरे ! किस्त किस्त में क्या बोल रही हो । साफ साफ बताओ ना ?"

" आज सुबह इनके आफिस से इनके बाॅस का फोन आया था तो वो सुबह आफिस चले गए थे । वहां बाॅस ने इन्हें मुम्बई में कम्पनी के डेलीगेट मीटिंग में शामिल होने को कहा है । वो मीटिंग बुधवार से शुरू होगी जो तीन चार दिनों तक चलेगी । इसलिए ये दिल्ली से सोमवार को ही निकल जायेंगे ।"

" लेकिन जीजू तो छुट्टी पर थे ना ?"

" ये बहुत ही अर्जेंट काम है इसलिए इन्हें जाना ही पड़ेगा । वैसे भी इनकी तबीयत ठीक हो ही गई है और सोमवार से ज्वाइनिंग भी करनी ही थी ।"

" जीजू अभी घर पे ही है ?

" नहीं । दोस्तों से मिलने गए हैं , अब आते ही होंगे ।"

" मुम्बई जाने का मतलब सात आठ दिन जीजू घर से बाहर...वाह ! और घर पर सिर्फ़ हम तुम ।"

" क्या हम तुम ?"

" हम तुम एक कमरे में बंद हो और चाबी खो जाय " - मैंने बाॅबी मूवी का गाना गाया ।

" बड़ा शौक है ना ! और तुम्हारे साथ मैं क्यों कमरे में बंद हुंगी , आन्टी है ना... उनके साथ रहुंगी ।"

" आंटी भी मंगलवार से चार धाम के यात्रा पर जा रही है । समझी ! एक हफ्ते तक...अब मैं ही तुम्हें बजाऊंगा... मुझे तो सोच सोच के न जाने क्या क्या हो रहा है ।"

" बड़ा आया बजाने वाला । मैं मम्मी को बुला लुंगी ।"

" चाची को बुला लोगी तो चाचा और राहुल का देखभाल कौन करेगा ? तुम करोगी ?...चाचा का मुड तो वैसे ही हर समय दुर्योधन के गुस्से जैसा रहता है... इधर तुमने चाची को अपने घर बुलाया उधर तात श्री रासन पानी लेकर चाची के पीछे पीछे तुम्हारे घर में ।"


" मैं उर्वशी को बुला लुंगी... वैसे भी संजय जी भी कहीं बाहर गए हैं तो वो पक्का आ जायेगी ।"

" वाह वाह ! दो फुल एक माली....मजा आ जायेगा ।"

" हमें फुल समझने की गलती मत करना बेटा...गन्ने की तरह चुस डालेंगे ।"

" मैं तो कब से तैयार बैठा हूं मम्मी कि कोई मुझे गन्ने की तरह चुस डाले । तुम पहले यहां आओ तो जानेमन ।"

" आ रही हूं बेटा... थोड़ा सब्र कर.... बस दो ही दिन की तो बात है ।"

" मैं तो बस सब्र ही किए जा रहा हूं कि कब आवोगी और मैं तुम्हें कब आगे पीछे दोनों साइड से बजाऊं ।"

" खबरदार जो दोनों साइड के बारे में सोचा... पीछे के बारे में भुल कर भी मत सोचना ।"

" पीछे के बारे में क्या बुराई है ?.... आजकल सारी लड़कियां करवाती है ।"

" मुझे औरों के बारे में नहीं सोचना... मैं सिर्फ अपने बारे में कह रही हूं.... मुझे तो सोचकर ही कंपकंपी छूट जाती है ।"

" अरे कुछ नहीं होता... लड़कियो को लड़कों से भी ज्यादा मजा आता है । ब्लू फिल्म में नहीं देखी है ?"

" मुझे बेवकूफ मत बनाओ... मुझे सब पता है । बाप रे ! वो इतना छोटा और तुम्हारा इतना बड़ा.... जायेगा ही नहीं , अगर भुले भटके चला भी गया तो वो मेरी जिंदगी का अन्तिम दिन ही हो जायेगा... असम्भव...नो...नेभर ।"

" बेकार में टेंशन ले रही हो... कुछ नहीं होता... हां , पहली बार थोड़ा सा दर्द होगा और वो तो आगे वाली सील भी टुटने से होता है । इसमें भी सेम वैसा ही होगा । और एक बार ले लिया न तो खुद ही कुद कुद कर कहोगी कि मेरे पीछे ढुकाओ ।"

" मैं ऐसा कभी नहीं कहने वाली हूं । और तुम भी कोई जबरदस्ती नहीं करोगे ।"

" जैसी आप की इच्छा स्वीट हार्ट । वैसे पीछे करवाना स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक होता है ।"

" अच्छा ! भला वो कैसे ?"

" जिन्दगी में कभी पाइल्स की बिमारी नहीं होगी ।"

" फिर कोई उल जलूल तर्क देगा । फिर भी बता कैसे पाइल्स नहीं होगी ?"

" पाइल्स में जानती हो न कि क्या होता है ?"

" हां , जानती हूं ।"

" क्या होता है ?"

" वो लैट्रिन के रास्ते में घाव हो जाता है और वहां से खून निकलने लगता है ।"

" ठीक कहा लेकिन लैट्रिन के रास्ते में घाव क्यों हो जाता है ?"

" मुझे क्या पता । तु ही बता ?"

" हम जब लैट्रिन करते हैं तब ना हमारे मलद्वार से कभी मल पतला निकलता है तो कभी मोटा तो कभी सही तरीके से ... जानती हो न..।"

" छी...छी... मुझे नहीं सुनना तेरी ये गन्दी बातें ।"

" अरे भाई सुन तो पहले... फिर बाद में गन्दी अच्छी करते रहना ।"

" बक ।"

" पतला और मोटा मल निकलना पेट की बिमारी के कारण होता है ।"

" वो सभी को पता है । तु पाइल्स के बारे में बता ?"

" जब लैट्रिन होते वक्त मल मोटे मोटे हार्ड रूप में निकलने लगता है तो उससे गुदा छिद्र छील जाता है । और यही यदि अक्सर होने लगे तो वो जगह छिलते छिलते घाव का रूप अख्तियार कर लेता है । और इसी घाव के कारण वहां से खून का रिसाव होने लगता है । और यही पाइल्स कहलाता है । ये बिमारी यदि ज्यादा बदतर पोजीशन में चला जाय तो कैंसर भी बन जाता है ।"

" तो पीछे वाले हिस्से में करने से इस बिमारी का क्या मतलब ?"

" पीछे करने से गांड़ का छोटा छेद बड़ा हो जाता है और छेद बड़ा होने से मल कितना भी मोटा क्यों न हो फ्रिक्वैटंली बड़े आराम से बाहर निकल जाता है । और जब मल बिना विध्न वाधा के बाहर निकल जाए तो थोड़ी न मल छिद्र में कोई खिंचाव आयेगा या कोई जख्म बनेगा । और जब जख्म नहीं होगा तो पाइल्स भी नहीं होगा ।"

" ये सब डाक्टर ने बताया ?"

" नहीं । ये मेरी थियुरी है ।

" कमीने , कुत्ता , बदमाश......."- वो गरम हो कर बोली ।

" शान्त बालिके... शान्त " - मैंने हंसते हुए कहा ।

" कितना गन्दा थियुरी है ।"

" अच्छा यदि तुम्हें विश्वास नहीं है तो किसी डॉक्टर से पुछ लो... वैसे एक डाक्टर है मेरी नजर में... डॉ. चुतिया । बहुत ही काबिल डाक्टर है । उनके सैकड़ों किताबें भी मार्केट में उपलब्ध है ।"

( साॅरी डॉ साहब ये मैंने आपसे बिना इजाजत लिए लिख दिया )

" जरूरत नहीं है मुझे किसी डॉक्टर वाक्टर से पूछने की । और यदि ऐसा ही है तो तु खुद ही क्यों नहीं मरवा लेता ? तुझे कभी बवासीर नहीं होगा ।"

" तुम यदि लड़का होती तो मरवा भी लेता ।"

" कोई बात नहीं , वहां आने के बाद तेरी ये इच्छा मैं फिर भी पुरी कर दुंगी "

" तुम अपनी इच्छा पूरी करना और मैं अपनी इच्छा पुरी करूंगा ।"

" नो वे ।"

" तेरा पीछा ना छोडूंगा सोनिये , भेज दे चाहे जेल में..."

" ये क्या है ?"

" गाना है और क्या है ।"

" सुन , मैं फोन रखती हूं , शायद वो आ गए हैं ।"

" ओके । बाॅय एंड स्वीट ड्रीम्स ।"

" सेम टू यू ।"

उन्होंने फोन काट दिया ।

फिर कुछ खास नहीं हुआ । डिनर के पश्चात सभी अपने अपने कमरे में चले गए । मैं भी अपने कमरे में चला गया । सुबह जल्दी ही निकलना था इसलिए सोने की कोशिश करने लगा ।
 
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phone pe dono ki achchi baatchit huyi aur anal sex ke faayde bhi bata diye ki anal sex karne se bawasir nahi hota ? ... itna lamba chauda bhashan diya ki laga sach me doctor hi batate hai lekin ye to sagar ki khud ki theory hai .....
 
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