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Curiousbull

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Update 30:
पापा और प्राची एक सुखमय जीवन का भरपूर आनंद ले रहे थे । प्राची की राते पापा के साथ रंगीन हो रही थी और जब भी पापा का मौका मिलता प्राची के संग मिलन करते थे। उनका एक रूल बन चुका था , वो कमरे के दरवाजा बंद होते ही अपने कपड़े उतार देते थे, और प्राची भी उस रूल में शामिल थी । भले ही वो चूदाई ना भी करे , जो सिर्फ प्राची के मासिक के दिनों में ही नहीं होता था , उनके बदन पे एक भी सूत नहीं होता था।
लाइफ बढ़िया चल रही थी । दादी प्राची सी बहु पा के खुश थी और घर में किलकारी गूंजने का इंतजार में थी। उनको थोड़ा आश्चर्य तो हो रहा था कि प्राची के साथ उनका बेटा रोज लगभग मिलन कर रहा है लेकिन अब तक वो पेट से नहीं हुई थी।
उधर प्रज्ञा के एग्जाम खत्म हो गए थे । एक दिन रात को खाने के वक्त पापा ने प्रज्ञा से बोला : प्रज्ञा , अब तो तुम्हारे एग्जाम खत्म हो गए है , बताओ छुट्टियों में क्या करोगी?

प्रज्ञा : पापा, छुट्टी में तो कुछ प्लान नहीं किया , सोच रही ही थोड़ी पेंटिंग सीखू और साथ में दादी का भी थोड़ा काम ने हाथ बताउंगी , और उनसे खाना बनाना सीखूंगी।

प्रज्ञा को पेंटिंग का सौंख था । और उसे अब तक दादी ने कभी भी किचेन में आने नहीं दिया था, लेकिन वो खाने बनाना भी सीखना चाहती थी। प्राची शादी के बाद ही किचेन में जाने लगी थी ।

पापा: चलो बढ़िया है, तब कितने दिन में रिजल्ट आ जाएगा ।

प्रज्ञा : पापा लगभग 20-25 दिन तो लग हो जाएगा ।

पापा: वाह तब तो सही है। छुट्टियां एंजॉय करो।

प्रज्ञा : पापा एक बात बोलूं ?

पापा: बोल मेरी बच्ची।

प्रज्ञा : पापा अपने दीदी से शादी के बाद हनीमून पे तो उसे ले के ही नहीं गए ।

दादी और प्राची भी वही खाना खा रहे थे । वो इस सवाल को सुन के पापा के जवाब की प्रतीक्षा करने लगे ।

पापा : हां , बात तो तुमने सही कहा बेटा । लेकिन तेरी दीदी ने मुझे ऐसा कुछ कहा ही नहीं कि उसे हनीमून पे जाना है।

प्रज्ञा : आप भी एक नंबर के बुद्धू हो पापा। दीदी ने तो आपको सुहागरात को दर्द देने भी नहीं कहा था , पर अपने उनके बिना बोले ही सुहागरात तो मनाई ना ।

प्रज्ञा थोड़ी बातूनी थी और चुलबुली भी तो वो बोलते बोलते कुछ भी बोल देती थी । दादी और प्राची उसकी बात सुनके एकदम चौक गए ।

दादी : अरे , ऐसे बात करते है पापा से । उनकी शादी हुई है न प्राची से तो सुहागरात तो मनाएंगे ही ना। उसमें प्राची के बताने वाली क्या बात है। उसे अपने पति का ख्याल रखना है ना। बेटी हो के अपने पापा से ऐसे बात नहीं करना चाहिए।

प्रज्ञा थोड़े हंसते हुए: दादी मै पापा की बेटी भी हु और साली भी , मै ऐसे बात कर सकती हु। मैं तो बस बोल रही हु पापा दीदी को हनीमून पे अभी तक नहीं ले गए , मैने तो मूवीज में देखा है कि शादी के बाद हीरो और हीरोइन हनीमून पे जाते है।

प्राची : चल बस कर पगली , कुछ भी बोलती रहती है तू।

पापा: ओके साली साहिबा , तुम बोलती हो तो तुम्हारे दीदी को मै हनीमून पे ले जाऊंगा , बस?

प्रज्ञा : वाह पापा , दीदी तो खुश हो जाएगी।
सब उसकी बातों से हंसने लगे।

खाने के बाद प्रज्ञा सोफे में बैठी थी पर पापा के साथ टीवी देख रही थी ।प्राची और दादी किचेन में बर्तन धो रहे थे और रात का दूध तैयार कर रहे थे ।

प्रज्ञा : तो पापा कब ले जा रहे दीदी को हनीमून पे ।

पापा: देख बेटा , अभी तो शादी में कुछ ज्यादा ही ऑफिस का छुट्टी हो गया था , तो छुट्टी में थोड़ी प्रॉब्लम होगी , पर मैं बात करूंगा ।

प्रज्ञा : पर पापा आपके ओर दीदी के हनीमून के बहाने मै भी थोड़ा घूम लूंगी ना , मेरी तो अभी छुट्टी है बाद में क्लास शुरू हो जाएगा ।

पापा को मजरा समझ में आ गया , प्रज्ञा खुद घूमने के लिए हनीमून के बारे में बोल रही थी ।

पापा प्रज्ञा की टांग खींचते हुए : अच्छा जी , पर हनीमून में तो सिर्फ पति पत्नी जाते है , तुम कहा बीच में जाने की सोच रही हो ?

प्रज्ञा : पर पापा मुझे भी जाना है ।

पापा: वो तुम अपने पति के साथ जाना । हा हा हा ।

प्रज्ञा : ऊँहू , पापा आप मेरा मजाक उड़ा रहे ।
पापा हंसते हुए : अरे मै मजाक कहा उड़ा रहा हु । हनीमून पे अपनी पत्नी के साथ, कौन किसी और को भी ले जाता है?

प्रज्ञा : अरे पापा, मै आपको साली हु, अपने कहा था साली आधी घरवाली होती है । तो मैं कुछ नहीं जानती मेरी अभी छुट्टी चल रही है , मैं भी जाऊंगी।

पापा के लिंग में , प्रज्ञा की आधी घरवाली वाले बात का थोड़ा असर हुआ और एक झटके के साथ थोड़ा टनक सा गया।

पापा: अच्छा मेरी साली , पर हनीमून कोई फैमिली ट्रिप थोड़े होता है । उसमे तो सिर्फ पति पत्नी जाते है।

प्रज्ञा बस हनीमून के बारे में इतना ही जानती थी कि शादी के बाद पति और पत्नी हनीमून पे जाते है। उसे पता नहीं था को हनीमून पे एक पति बस अपनी पत्नी के साथ मजे ही करता है। वो सोच रही थी , इसी बहाने वो भी कही घूम लेगी।

प्रज्ञा : मुझे वो साथ ले चलो ना पापा, आप ओर दीदी अकेले घूमेंगे और मैं घर पे बोर होती रहूंगी।

पापा प्रज्ञा के साथ मजाक के मूड में थे : पर हनीमून पे तो पति अपने पत्नी के साथ ही घूमता है। तुम तो कवाब में हड्डी बन जाओगी ।

प्रज्ञा : ऊँह , मै कबाब में हड्डी ही आपके लिए ? पापा मै आपकी बेटी हु।

पापा : तो कौन अपने बेटी को हनीमून पे ले जाता है?

प्रज्ञा: तो सबके बेटी वी तो नहीं होते शादी के टाइम । वो तो बाद में होती है। आप लक्की है कि आपकी बेटी है और मां और पापा के साथ बेटी कैसे नहीं जा सकती है।

पापा: पर तुम तो मेरी साली भी हो , साली को कौन ले जाता है ? हनीमून पे कोई साली को नहीं ले जाता , क्या पता , कही बीवी से ध्यान हट के साली पे ही चला जाए ।

पापा डबल मीनिंग में बात कह रहे थे कि कही बीवी को छोड़ साली को ही न चोद दे आदमी , अगर साली को वी हनीमून पे ले जाए तो। प्रज्ञा पापा के इस डबल मीनिंग बात को ठीक से समझी नहीं ।

प्रज्ञा : तो क्या हुआ , बीवी के साथ साली का भी ध्यान रख लीजिएगा ।

पापा: अच्छा , और साली का ध्यान कुछ ज़्यादा ही रख लिया तो ? बीवी क्या करेगी ? वो तो नाराज़ हो जाएगी।

प्रज्ञा : आप मेरा ख्याल रखेंगे तो दीदी क्यों नाराज़ होगी ? वो तो मुझसे कितना प्यार करती है।

पापा : अच्छा ऐसा है और तुम्हारे दीदी को कोई एतराज नहीं है तो मैं वी तुम्हारा अच्छे से ख्याल रख लूंगा ।

पापा थोड़ा शरारती तरीके से मुस्कुराने लगे ।
इतने में दादी आ गई: कौन किसका ख्याल रख रहा है ?

पापा: मां, मुझे प्रज्ञा से ऑर्डर मिला है कि उसके दीदी के साथ उसका भी ख्याल रखु। वो भी हनीमून पे हमारे साथ जाना चाहती है ।
पापा प्रज्ञा की खिंचाई कर रहे थे।

दादी : हाय राम , ये क्या बोल रही ये लड़की, एकदम ही नादान है तू।

प्रज्ञा: मैने ऐसा क्या बोल दिया दादी ?
दादी : कुछ भी नहीं, छोड़ उसे ।

दादी पापा से : अच्छा बेटा तुझे सच में हनीमून पे जाना चाहिए । प्राची के भी कुछ अरमान होंगे । उसे पूरा करना तेरा फ़र्ज़ है बेटा । ले जा उसे हनीमून पे।

दादी जानती थी , हनीमून पे एक कपल बस दिन रात सेक्स ही करता है और मजे से घूमता है। उस सिचुएशन में लड़कियां भी आजाद फील करती है। और प्राची जितना अपने पापा के पास रहेगी और बिना किसी रोक टोक के , आजाद मन से पापा का साथ देगी , उतना ही जल्दी उसका गर्भ ठहर सकता है। तो दादी को प्रज्ञा की इडिया पसंद आई थी।

पापा मुस्कुराते हुए : पर दादी , मेरी साली साहिबा बेटी भी जाना चाहती है हमारे साथ हनीमून पे।

दादी : हाय ये क्या बोल रही है प्रज्ञा । दीदी और पापा की शादी हुई है ना। उनको हनीमून मनाना है । तू क्यों जाना चाहती है ।

प्रज्ञा : पर इनके साथ मै भी हनीमून मना लूंगी ना। मैं भी थोड़ा घूम लूंगी।

पापा का के हस पड़े , दादी भी नादानी पे हस पड़ी।

दादी : अरे पागल ये क्या बोल रही है , हनीमून क्या होता है पता भी है तुझे या ऐसे ही कही से सुन लिया और कुछ भी बोल रही है।

प्रज्ञा अपना सर खींचने सी लगी थी : दादी आप लोग हस क्यों रहे हो ? हनीमून में सब घूमने जाते है ना।

दादी : अरे नादान लड़की , घूमने नहीं जाते , हनीमून सिर्फ वो जाते है जिनकी शादी होती है । हनीमून में वो घूमते भी है और जी भर के प्यार भी करते है एक दूसरे को । और वैसे ही मिलन करते है जैसे पापा और दीदी रात को करते है । तू उसमें क्या करेगी ?


प्रज्ञा को अपनी गलती का एहसास हुआ और अपनी नादानी पे वो थोड़ा शर्मा भी गई। वो समझ गई कि पापा उसकी खिंचाई कर रहे थे।

पापा: आरे कोई नहीं मां, मेरी बेटी की खिंचाई मै इतना कर चुका हु तुम मत करो। मैं सोच रहा हु कि एक फैमिली ट्रिप पे ही चलते है। हमारा हनीमून भी हो जाएगा और आप दोनों भी थोड़ा घूम लेना । वैसे भी घर का ऐसा खराब समय था कि २-३ साल से हम जिंदगी जीना ही भूल गए थे ।

दादी : अरे नहीं बेटा , अगर तू जाना चाहता है तो जा प्राची को लेके , प्रज्ञा को मै समझा दूंगी । हनीमून तुम दोनों का होना ही चाहिए ।

पापा: अरे मा हनीमून तो हम मनाएंगे ही । साथ में आप लोगों को घुमा भी दूंगा , प्रज्ञा की भी छुट्टी है , मै भी छुट्टी का जुगार लगता हु।

दादी: ठीक है बेटा , अगर प्राची को कोई एतराज नहीं होगा तो चल सकते है।

प्रज्ञा खुशी से : ये…ह , दादी मजा आएगा । मैं रेडी हु।

पापा: हां पर मै सिर्फ अपने पत्नी के साथ हो हनीमून मनाऊंगा , साली के साथ नहीं। हा हा हा।

प्रज्ञा: अरे सॉरी पापा, मुझे पता नहीं था ।

दादी : तो तपाक से पापा से ये सब मत बोला कर , मुझ से पूछ लिया कर ।

पापा: आरे रहने दो ना मां, बच्ची है अभी ये । मेरी बेटी अभी बड़ी हो रही है धीरे धीरे और सब सीख जाएगी जल्दी ही।

दादी : ठीक है बेटा एक बार प्राची से इस बारे में बात कर लेना । फिर जैसा तुम्हारा विचार करे।

पापा: ठीक है मां ,मै बात करूंगा प्राची से ।

सब अपने कमरे में चले गए । प्राची भी अपने कमरे में पापा के लिए दूध ले के आ गई ।

अब जैसा पापा का रुटिन था । पापा ने दूध पिया और फिर प्राची के साथ मिलन को तैयार ।

पापा: आजा मेरी लाडो, थोड़ा अब अपना दूध नहीं पिलाएगी ।

प्राची : अजी , आपको तो हर दिन मेरा ही दूध पीना रहता है । पर मेरे चूची में दूध है कहा ?

पापा: मेरी जान , एक बार तेरे गर्भाशय में मेरे बीज पलने लगा । तुम्हारी दोनों चूचियां दूध से भर जाएगी मेरी बेटी।

प्राची : अच्छा , तो आपका ये प्लान है दूध पीने का , मुझे प्रेग्नेंट आप बस मेरा दूध पीने के लिए बनाना चाहते है क्या ?

पापा: हम्ममम...शायद तुम्हारे प्रेग्नेंट होने से मुझे ये सुख तो मिल ही जायेगा ।

प्राची : हट बदमाश कही के । कैसी गंदी बाते करते हो आप जी।

पापा: कोई गंदी बात नहीं , बस प्यार करता हु। आओ ना मेरी जान , अब रहा नहीं जा रहा । देख कैसे मचल रहा है ये (अपने लोअर उतरते हुए और अपने लिंग के तरफ इशारा करते हुए ) तेरे गुप्तांग में बीज छोड़ने के लिए । ये तुझे प्रेगनेंट करेगा तभी को तेरा दूध पीने का मौका मिलेगा ।

पापा का लन्ड टनटना गया था । प्राची अब अच्छे से जान गई थी कि पापा के मचलते लिंग को सुकून कैसा देना है। पापा लिंग प्रदर्शन के रहे थे और थोड़ा हिला भी रहे थे और प्राची उनके भारी और बड़े अंडकोष को सहलाने लगी ।


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प्राची: हाय मेरे पापा, क्या मुलायम लग रही है आपकी अंडकोष। लग रहा है पूरा माल से भरा है ।

पापा: यस माई डार्लिंग। ये मूसल डाल के जब तुझे चोदूंगा तो ये अंडकोष गाढ़ा माल बनाएगा । और फिर तेरे योनि में जायेगा।
पापा ने प्राची को पकड़ के अपने ऊपर सुला लिया । और होठों को चूसने लगे ।
होठ चूसा , नंगी किया , चूची चूसा, फिर गीली नरम और गरम चूत का स्वाद भी पापा ने लिया ।


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पापा प्राची को चुंबन लेते हुए ।

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पापा अपने बेटी का मुलायम चूची दबाते हुए।

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पापा प्राची की चूची चूसते हुए । sali ki chut chati
पापा प्राची की चूत चाटते हुए ।


फिर पापा ने प्राची को अपना लन्ड चूसने का इशारा किए । बेटी आज्ञाकारी लड़की के जैसे लिंग चूसने लगी । गोक गोक की आवाज ओर पापा की कराहती आवाज से कमरा गुलज़ार होने लगा ।

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प्राची पापा का लिंग चूसती हुई ।

एक अच्छी १० मिनट के लिंग चुसाई के बाद , पापा अपने बेटी में समाने को बेताब हो गए , अपनी बेटी के योनि पे अपना लिंग रगड़ने लगे । अच्छे से पूरा चूत के चिरान पे ऊपर से नीचे तक अपना लौड़ा रगड़ते रहे।
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पापा अपना लौड़ा प्राची की योनि पे घिसते हुए।

प्राची को लगा वो इस तरह पापा के रगड़ने से तुरंत झर जाएगी ,वो आज पापा के लिंग जब चूत में रहे तभी झरना चाहती थी । उसे भी पापा के लौड़े के आदत सी हो गई थी । वो छटपटाने सी लगी और अब उसकी इंतजार करने की क्षमता खत्म हो गई । उसने हाथ बढ़ा के अपने पापा का लिंग को थम लिया । और अन्दर चूत में घुसने के लिए लिंग को तैयार करने लगी । वो अपने पापा का लौरा को अपने हाथो से पकड़ के मिलने लगी और फिर योनि द्वार पे लगा दिया ।

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प्राची अपने पापा का लन्ड चूत में लेने के लिए तैयार करती हुई।

पापा ने योनि द्वार पे अपने लिंग से सुपारा को पाते ही , चूत में प्रवेश कर जाने का सोचा ओर एक धक्के में प्रवेश कर गए और जड़ तक लिंग को अपने पत्नी बनी बेटी के योनि में घुस गए।

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प्राची पापा के लिंग को अपने योनि पे सेट करते हुए ओर पापा प्राची में प्रवेश करते हुए।

फिर वही ,पति पत्नी की जोरदार चूदाई होने लगी । प्राची मदहोश होने लगी । पापा भी टाइट योनि के खिंचाव से आनंदित होके आहें भरने लगे । लगभग १० मिनट ऐसे ही प्राची को भोगते रहे।
पापा ने फिर पोजिशन चेंज किया और उन्होंने उसे एक करवट कर के लेटाया और खुद प्राची के पीठ के पीछे लेट गए । ओर पोजीशन बना के उसके योनि में फिर से अपना लौड़ा घुसेड़ कर चोदने लगे ।


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पापा अपना लिंग योनि में घुसते हुए ।

हर दिन की तरह आज भी बाप बेटी की जबर्दस्त चूदाई होने लगी । प्राची अब बर्दास्त नहीं कर पाई और झटके खाते झरने लगी । उनसे पापा ले लन्ड को अपने पानी से नहला दिया । पापा के लिए चोदना अब और मजेदार हो गया , वो अपनी बेटी को फ़ज़ा फच चोदने लगे । और 15-20 मिनट और छोड़ने के बाद वो भी झटके खाते हुए प्राची के छूट में रास्खलित हो गए।

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पापा प्राची के चूत में झरते हुए और अपना माल अंदर ही छोड़ते हुए।

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पापा अपना पानी प्राची के योनि को पिला चुके थे और प्राची की भी प्यास बुझ चुकी थी।
झरते हुए उनका एक वीर्य का फव्वारा बाहर प्राची के जांघों पे भी जा गिरा था।

पापा ने फिर से अपना लिंग प्राची के योनि में ही घुसा दिया और अभी भी लन्ड प्राची के गुप्तांग में ही दिए लेटे थे । उनकी तो आदत ही हो गई थी, जब तक उनका लन्ड सिकुड़ कर बाहर नहीं आ जाता वो प्राची के योनि में ही घुसा रहता । वो कभी भी खुद से अपना लन्ड प्राची के चुत में चुने के बाद नहीं निकलते थे।
पापा और प्राची अब तेरा रिलेक्स लग रहे थे। जबर्दस्त चूदाई के बाद का सुकून एक अलग शांति देता है ।

पापा: प्राची , मेरे जीवन को तुमने बहार से भर दिया है मेरी प्यारी बीवी।

प्राची : आपने भी तो मेरी जिंदगी में हरियाली का दी है पापा।

पापा : हम्ममम, हा बेटी मै तेरी जीवन को खुशियों से भर दूंगा । तेरा दिया हुआ यौन सुख मुझे इतना मदहोश कर देता है कि मैं अपने पे काबू ही नहीं कर पाता मेरी रानी । आई लव यू ,मेरी बेटी , मेरी प्राची , आई लव यू।

प्राची : मै भी आपसे बहुत प्यार करती हु मेरे पतिदेव। थैंक्यू आप जो मुझे इतना अच्छा चोदते है।

पापा: हां प्राची ,अब एक प्यार की निशानी भी देदो मुझे । एक नन्हा मुन्ना निशानी।

प्राची : पापा मै प्रयास तो कर रही हु । मासिक भी समय से आता है । और आप इतना गाढ़ा वीर्य भी हर दिन पिला रहे है मेरे योनि को ।फिर भी गर्भवती नहीं हो पा रही हु।

पापा: अरे, विश्वास रखो , सब ठीक हो जाएगा , मै कोशिश कर रहा हु । अभी तुम्हारी उम्र भी तो कम है। जल्दी ही हमारा प्यार रंग लाएगा ।

प्राची : जी पापा।

पापा: प्राची ,एक बात पूछनी थी , क्या तुम मेरे साथ हनीमून पे जाना चाहोगी , तुमने प्रज्ञा को सुना ही होगा। मां और मैने भी फैसला किया है कि हनीमून पे ले जाऊं मैं तुम्हे , मगर मैं चाहता हु के मां और प्राची को भी साथ ले लेते है, तो एक फैमिली ट्रिप ही हो जाएगा । इतने दिनों से हमारे घर ने सुख नहीं देखा था । अब सबको उसमें शामिल करना चाहिए ।

प्राची: हां पापा, मुझे कोई एतराज नहीं । दादी के वजह से ही तो आप मुझे मिले है । उनको तो सब पता है , वो साथ रहेगी तो मुझे भी अच्छा लगेगा ।

पापा: और प्रज्ञा , वो भी चल सकती है ना।
प्राची : वो तो आपकी आधी घरवाली है ना, आप जानो।

पापा समझ गए , प्राची उनकी खिंचाई कर रही थी ।

पापा: अरे नही, वो तो नादान बच्ची है , कुछ भी बोलती है।

प्राची : नहीं नहीं , आधी घरवाली तो आप बोल ही चुके है उसे , कभी आपका मन करेगा तो पूरी भी बना लेंगे ना ?

पापा हंसते हुए : अरे इतना जलन अपने छोटी बहन से । नहीं यार मेरी घरवाली तुम ही हो और तुम ही रहोगी ।

प्राची : नहीं मुझे क्यों जलन होगी । आप अपने आधी घरवाली से बात करेंगे तो ।

पापा: अरे बस करो बाबा, ऐसा कुछ नहीं है, वो मेरी चूलबुली बेटी है, साथ में साली भी है, इतना मजाक तो चलता है ना ।

प्राची : ओके ओके , आप जाने और आपकी आधी घरवाली जाने ये सब मजाक।

पापा: चलो गुस्सा नहीं । बताओ , प्रज्ञा को भी ले लेना फैमिली ट्रिप पे।

प्राची : ये भी कोई पूछने की बात है पापा। प्रज्ञा तो हमारी प्यारी बेटी है। वो नहीं जाएगी तो मुझे ही अच्छा नहीं लगेगा ।

पापा: वाह, आज बनी न तुम प्रज्ञा की मां। चलो मैं सारा अर्जेंजमेट करता हु और जगह भी डिसाइड करता हूं।

प्राची : ओक पापा।

पापा: वैसे एक बात तो है , प्रज्ञा के कच्चे नींबू और कच्ची काली बुर होगी तो जबरदस्त कसी हुई ।

प्राची समझ गई पापा मजाक कर रहे है( वो भी झूठा गुस्सा दिखाते हुए) : हट बदमाश , उसकी भी सील तोड़ देंगे क्या आप , जैसे मेरा तोड़ा था?

पापा हंसते हुए : अब आधी घरवाली तो वो है , तोरने को मिल जाए तो मजा आ जाए । हा हा हा ...।

प्राची : हट आप बहुत गंदे है , अपनी बीवी होते हुए दूसरी लड़की को चोदना चाहते है।
पापा: नहीं मेरी रानी मै तो मजाक कर रहा था । मै तो बस अपने प्राची को प्यार करना चाहता हूं।

इतने गरम बातों के कारण पापा का लन्ड सिकुड़ के प्राची के योनि से निकलने के बजाए उसके चूत में घुसे हुए ही टनटनाने लगा ।

पापा: आह मेरी माल , देख न फिर तुझे प्यार करने का मन कर रहा है।


प्राची : आह आह हम्ममम...हां पापा ,मुझे भी महसूस हो रहा है । आप को मैने रोका कब है।

पापा : आह, तेरी यही अदा, आह.... तो मुझे पागल बना देता है मेरी बेटी।

पापा फिर से प्राची के साथ संभोग शुरू कर दिए । चूत पे धक्के लगाने लगे और प्राची को फिर से चोदने लगे ।


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कमरा प्राची के चीत्कार से गूंज उठा , आह्ह्ह्ह.... ऊह.....आह्ह्ह....मेरे सैया जी....आह...मै आपके लौड़ा के बिना नहीं रह सकती पापा, उसके बिना मै मर जाऊंगी... अभ्य्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ः... आह्ह्ह... चोदिए पापा... आह्ह्ह...

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माहौल पूरा मादक हो गया था । प्राची की गूंज कमरे के बाहर जा रही थी और दादी का नींद भी तोड़ दी थी । दादी मन में : कितनी प्यास है दोनों की बुझती ही नहीं , पूरी रात दोनों लगे रहते है। कितना चूदाई करते है दोनों । जानवरों की तरह एक दूसरे को भोगते रहते है। चलो अच्छा ही है ,मेरा बेटा को एक गरम चूत वाली लड़की तो मिली जो उसे कभी मना नहीं करती। अच्छा है। बस अब मेरा बेटा उसको गर्भवती भी जल्दी कर दे , मुझे और कुछ नहीं चाहिए ।

इधर पापा और बेटी की काम क्रीड़ा जोरो पर थी। जबरदस्त धक्के लग रहे थे योनि पे। जबरदस्त चीत्कार से कमरा गूंज रहा था । साथ ही उन धक्कों की आवाज थप थप कर के शोर मचा रही थी ।


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पापा अब बर्दास्त नहीं कर पा रहे थे और उनके लिंग से एक गाढ़ा वीर्य का झरना निकलने लगा ।

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पापा ने प्राची के योनि को लबालब पूरी तरह से दिया। उनका वीर्य इतना निकला कि प्राची के योनि से ओवरफ्लो सा होने लगा ।

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प्राची की बच्चेदानी में पूरा एक एक बूंद पापा टपकते रहे और फिर कुछ ही देर में इनका लौड़ा,नुनु बन गया और प्राची के चूत से बाहर आ गया ।

पापा: मेरी जान आज पूरी गहराई में गया है मेरा माल ,जरा दिखा तो चूत अपना।

पापा के आदेश से प्राची ने अपना योनि पापा के सामने फैला दिया । पापा ने योनि का दोनों द्वार पे लगी पतली चमड़ी को पकड़ के चीर दिया और अंदर अवलोकन करने लगे ।

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चूत वीर्य से चिपचिपी हो गई थी । और पापा का माल अंदर तक चला गया था ।

पापा संतुष्ट थे ।

पापा: बेटी , किस्मत अच्छा रहा तो आज के संभोग के बाद तुम गर्भावस्था को प्राप्त हो जाओगी ।

प्राची शर्मा के अपना सर दूसरी और गुमा लिया । पापा ने नंगे ही प्राची का आलिंगन करते हुए उससे लिपट गए । और थोड़े देर के बाद दोनों थके हुए पति पत्नी गहरी नींद में सो गए ।
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Shandhya

संध्या
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Update 5:

Sabere jb prachi ki nind khuli , to papa office Nikal chuke the . Dadi kitchen me nasta bna chuki thi.

Prachi : dadi maa , papa chale gye office.

Dadi : haan beti. Kyu kaam tha papa se.

Prachi : nahi dadi. Suno Naa dadi maine papa ko raat me kuch karate dekha.

Dadi ( chaunkte hue) kya karte dekha , sharb pi rha tha kya phir se.mere bete ki to jaise jindgi hi badal gyi hai.jb se biwi gayi hai. Tut gya hai mera beta. Pata nhi ye ganda aadat kyu lga liya usne.

Prachi: Nhi nhi dadi , sharab nhi pi rhe the , wo papa na , wo apna wo ragar rhe the raat ko.

Dadi: wo wo kya kr rhi hai. Sahi sahi bol na kya dekha tune .

Prachi : dadi kal raat mujhe pyas lagi thi to mai pani pine gyi , but papa ke kamare ki light onn thi or mujhe laga papa aahh aahh kr rhe the. Mai samjhi papa ko sayad kuch ho gya hai unki room ke taraph gyi. To dekha , papa apna wo nunu ko hath me liye hue the unki ankhe band thi. Or hath upar niche hila rhe the. Or bahut der tkk ajib ajib awaz nikal rhe the , kv tez hilate the to kv dheere or last me unka susu nikal gya thora sa.

Dadi samjh gyi ki papa ko ekk mahila hi jarurat hai. Unka beta ek aurat ke abhaw me muth marne lag hai.

Dadi ne prachi ko samjhya: arre beta, papa maa ko miss kr rhe the. Tujhe pata nhi hoga av ye sb , lakin av tujhe ye sb pata hona chahiye , baith batati hu.

Dadi: Wo jo papa ko karate dekh wo papa ,apane aap ko kush kr rhe the. Ekk larka or laraki me sex ka pata hai na tujhe.

Prachi: Haan dadi thora thora hai.

Dadi: kya pata hai?

Prachi: yahi ki sex karne se bacha hota hai or laraka or laraki kiss karte hai sex me .

Dadi : arre sirf kis nhi karte. Larka apna lund, jise tu nunu bol rhi thi, wo laraki ke chut me , wo jo tere pass hai niche(dadi prachi ke chut ki taraph isshara kr ke ) usme gussata hai, phir usme ander bahar karta hai ,or tb tkk karta hai, sb tkk uska virya na nikal jaye laraki ke chut me.wo papa ka jo tumne susu nikalte dekha wo Virya tha.

Prachi thori curious ho gyi: dadi papa kal sex kr rhe the?

Dadi: nhi bana , maine bola na sex me ekk larka or laraki dono chahiye , papa ko kal kr rhe the wo jb kisi mard ko laraki nhi milti sex ke liye to wo apne aap ko kush karane ke liye sex jaisa soch ke apane lund ko hilata hai. Usse muth marana kahte hai. Papa kal muth maar rhe the tumhare.

Prachi: ohhh dadi,ab samajhi , papa mummy ke sath sex karte the ,but ab mummy nhi hai to akele hi mummy ko yaad karte hai or khud ko kush karte hai. Dadi sex karane se kya bhaut kushi milti hai.

Dadi : haan beta .bahut jayda kushi. Issliye mai tere papa ki shadi karana chah rhi thi dusri, magar wo tum dono ke khatir shadi nhi karega. Usse daar hai ki jo nahi maa teri aayegi wo tum dono ke sath accha suluk nhi karegi beti.

Prachi ko sara mamala samajh me aa gya. Wo thora sochne lagi or boli: dadi ekk baat puchu.

Dadi : haan beti.

Dadi : lakin ye kaisi possible hota hoga ki chut me itna bara lund ghush jata hai . Papa ka to maine dekha bahut bara tha.

Dadi : Arre kitne sawal puchegi ab. Haa koi problem nhi hota gus jata hai.

Prachi : magar dadi meri to ched niche ki kitni choti hai usme papa jaisa lund kaise ghusega.

Dadi ne jaise hi ye sunna, unke dimag thanka: (man me) aree ye bachi kitni nadan hai, papa ka lund apne chut me gushne ki baat kr rhi hai. Mera beta ka kismat kitna bura hai. Bechara isi umar me aisa ho gya uske sath, wo jidi v bahut hai, shadi nahi karega berio ke khatir. Prachi ki baato se lagta hai ki ye kafi curious hai iss baat ko leke ki papa ko kaise khusi mile.

Dadi: Arre prachi , teri chut av sil pack hai, papa agar tujhe chodenge to tere chut ka darwaja khul jayega , phir wo bari ho jayegi or aram se lund chut me ja sakta hai.

Prachi: ye chodna kya hota hai dadi.

Dadi: wahi beta sex ko hi chodna bolte hai.

Dadi jaise jaise in sawalo ke jabab de rhi thi , uske man me ekk vichar badhate jaa rha tha.

Prachi apne papa ke liye tina tension le rhi hai. Kya iski jodi mere bete ke sath jm sakti hai. Kyu ki bahar ke kisi mahila se Rajesh shadi karega nhi, or ab mai nhi chahati ki wo pura jiwan muth maarta rhe , prachi 19 saal ki kachi kali ho chuki hai, shadi ke layak iske tan badan to ho hi chuka hai, kyu na iski shadi ke liye bete se baat karu. Ghar ki baat ghar me rahegi. Mere bete ko ekk sathi mil jayega. Or pragya ko ekk maa v mil jayegi. Dadi in khayalo me khi thi or agale hi pal socha , chii ye mai kya soch lo , ekk baap or beti ki shadi. Nhi nhi ye samaj ke khilaf hoga. Or rajesh v to nhi manega ki uski beti ki shadi usse ho. Mere man me ye kya vichar aa gye the ,chhiihh..

Prachi: Dadi mujhe papa ki fikar ho rhi hai bahut.

Dadi : mujhe v beta.

Din aage badh chuka tha. Dono bahane apne kamare me padh rhi thi , dadi baith apne bete ke baare me soch rhi thi.

Kitna pahar sa dukh para hai mere bete pe. Mujhe koi upay hi nhi dikh rha ab to. Bacche v chote hai. Mera kya bharosha kb hu kb nhi. Kaise katega uska jiwan. Or agar in dono bahano ka shadi ho gya , to akele mer beta kaise jiyega. Kon karega uski dekh bhal, 4-5 saal me prachi ki or 6 -7 saal me pragya hi shadi to ho hi jayegi. Uske baad mera beta aage ka jindgi kaise kaatega.
Bhagwan ye kaisi parikha le rhe ho tum mere bete ka.mera beta v na shadi to karega nhi ab bahar kahi. Kya mera vichar thik rahega. Kya Prachi ki shadi apne bete se kara du , kya ye jayaj hoga? Samaj kya kahega? Mera beta tyar ho payega? Prachi razi ho payegi? Kya pragya apne didi or papa ki shadi ko majuri degi? Usko v to maa ki jarurat hai. Or usse to uski maa ne bola hi tha ki pragya ajj se teri maa prachi hai.

Dadi gahari soch me thi : jayaj to nhi lakin ghar ki baat ghar me rah sakti hai. Samaj ko mai apne bete ki kushi se jyada ahmiyat kyu du. Beta kmor prachi se baat kar ke unko mana to Mai lungi hi. Pragya ko v ekk maa ka sukh , prachi se jayda koi nhi de sakta.

Dadi khud swal kr rhi thi or phir uska jabab dund le rhi thi. Uss pure din dadi issi jaddoh jeghad me lagi rhi. Bahut sochne ke baad dadi ne than liya ki bete kushi ke karan or ghar ki bhalai ke liye , prachi or uske papa ki hi shadi karwani hogi.

Innocence Of prachi makes story so much Intresting
 
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Update 6 :

दादी मां ने ठान लिया था कि प्राची की शादी उसके पापा से करा देगी। वो अपने बेटे को तड़पता नहीं देख सकती थी । प्राची भी जवानी की दहलीज पे आ ही चुकी थी। ऊपर से उसने तो अपने पापा का लौरा भी देख लिया था।

उस दिन जब पापा घर आए तो दादी ने डिनर खाने के बाद पापा से कहा : बेटा तुमसे कुछ बात करनी है।
पापा: हां मां बोलो ना।
दादी : बेटे मै तेरे लिए बहुत चिंता करती हु। तू अभी 40 का वो भी हुआ है और तेरे ऊपर इतना बड़ा पहाड़ टूट पर है। पत्नी नहीं रही। एक जीवनसाथी के साथ साथ तुमने अपनी ओर खुशियां वी खो दी है।
पापा : अब क्या करूं मा , भगवान ने यही लिखा था मेरे किस्मत में।

दादी : हां बेटा ,लेकिन भगवान इतना निर्दय नहीं है। एक रास्ता बंद करता है तो एक रास्ता खोल भी देता है।
पापा कन्फ्यूज हो रहे थे।

पापा : मा तुम किस बारे में बात कर रही हो।

दादी : बेटे , तुम अभी जवान हो । मै जानती हु जवानी में यौन सुख कितना जरूरी होता है। ओर बहु के जाने के बाद तुम्हारे लिए जिंदगी कितना मुश्किल हो गया है। ये मुझसे देखा नहीं जाता ।

पापा थोड़ा झेप से गए।

दादी : बेटा कल घर में कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरे दिमाग में एक अलग विचार का दिया है।

पापा: क्या हुआ है मां।

दादी: बेटा बात ऐसी है कि कल जब तू बहु के अभाव में अपने आप को रात्रि में संतुष्ट कर रहे थे तब प्राची ने वो काम क्रिया देख लिया था।

पापा एकदम आवाक रह गए।
दादी : वो बहुत जिज्ञासा से तेरे उसके बारे में बात कर रही थी। मुझे लगता है वो यौवन के उस दहलीज पे आ गई है कि इन सब बातों से उसका मन रोमांचित हो गया होगा।

पापा एकदम से शर्मिंदा हो गए थे।

पापा: मा, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। मुझे ये ध्यान रखना चाहिए थे कि घर में नई नई जवान हुई दो लड़कियां वो है। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। ये बात आपको वो पता नहीं लगानी चाहिए थी।

दादी: बेटा जो हो गया सो हो गया। मैने प्राची को सारी बाते समझा बुझा के उसके जिज्ञासा को भी शांत कर दिया है। मगर इस बात से मेरे मन में एक विचार आया है।

पापा: क्या विचार मा?

दादी : देख बेटे , मै तेरी मां हु और बच्चियों की दादी , मै हमेशा तुम लोगो के लिए अच्छा चाहती हु। मैं तुझे ऐसे नहीं देख सकती । इसी लिए मैने भी रिश्ता तेरे लिए लाया था ताकि तू अपना जीवन साथी के साथ अपनी आगे का जीवन सुखी से जी सकें। पर अब लग रहा है कि किसी वी बाहर के महिला को घर में लाने से घर बनाने से ज़्यादा बिखर जाने का ज्यादा डर है, पता नहीं वो महिला ,प्रज्ञा के साथ कैसे पेश आएगी। इसलिए कल के बार मेरे मन में विचार आया है कि तेरी जीवन संगनी अगर तुझे घर में ही मिल जाए ओर कोई प्रज्ञा का भी उसके मा के जैसी ही खयाल करे तो कितना अच्छा होगा। वो तुझे यौन सुख भी लेने देगी और घर को भी संभाल लेगी।

पापा: पर मा ये कौन सी लड़की की बात कर रहे है आप।

दादी: बेटा मैने सोचा है कि तू प्राची के साथ लगन कर ले।

पापा का दिमाग ठनक गया : क्या......!! ये क्या कह रही हो मा। जानती हो ना प्राची कौन लगती है मेरी । बेटी है वो। ये पाप मै कैसे कर सकता हु। ये ख्याल आपके मन में आया भी कैसे कि मैं अपनी बेटी से शादी के लूंगा । ये क्या वाहियात बात के दी अपने।

दादी: बेटे ,मै इसके बारे में बहुत सोची । मुझे भी पहले यही लगा कि ये रिश्ता कितना गलत होगा, लेकिन सोच , इस घर का एक महिला के बगैर क्या होगा । तू शराब में लिप्त हो गया है । मूठ मारने लगा है । कमजोर हो जाएगा । तुझे एक औरत की सख़्त जरूरत है और ऐसे में कही तो बाहर किसी रण्डी के चक्कर में पर गया तो लड़कियों का क्या होगा । मैं तो आज हु, कल नहीं। उसके बाद उनका देखभाल कौन करेगा। काम अग्नि बहुत खराब होता है बेटा। वो तुझे ऐसे काम करने पे भी मजबूर कर देगी जो तुमने कभी सोचा नहीं था। तू एक जिम्मेदार बाप है। मैं जानती ही तू अब किसी ऐसी महिला से शादी नहीं करेगा जो प्राची और प्रज्ञा की देखभाल ना कर सके। तुझे उनकी बहुत फिक्र है और मुझे तुम सब की । मै नहीं चाहती कि दोनों लड़कियों का भविष्य अंधकार में चला जाए। प्राची एक सुंदर और जवान लड़की है। अगर वो तेरे जिंदगी में आ गई तो तेरी सारी परेशानी खत्म । ओर ये सोच की अगर वो शादी कर के दूसरे घर गई ओर दोनों लड़कियां की शादी हो गई ओर कल को मै भी ना रही तो तू अपनी जिंदगी कैसे कटेगा। बेटा मै ये सोच के ही डर गई हु। मुझे ये निर्णय बिल्कुल बहुत सोचने के बात लेना परा है।
पापा के लिए ये एकदम सा विस्फोट की तरह था । उनकी खुद की मां उनको अपने ही कुंवारी ओर जवानी के दहलीज पे खड़ी बेटी के साथ शादी करवाना चाहती है। क्या मा ये भी जानती कि शादी के बाद पति पत्नी में क्या होता है। मैं अपनी बेटी के साथ ये सब कैसे कर पाऊंगा ।

पापा: मा तू जो बोल रही है वो बात मै समझ रहा हु। पर मैं ये कैसे कर सकता हु। अपनी ही बेटी के साथ। ना ना , ये गलत होगा मां। शादी के बाद तू जानती है न पति अपने पत्नी के साथ क्या करता है। तू कहती है कि मैं अपनी ही बेटी के साथ सुहागरात मनाऊं। ये मेरे से नहीं हो पाएगा ।

दादी: बेटा तू भूल जा कि वो तेरी बेटी है और तू उसका बाप। वो एक लड़की है और तू एक मर्द । तेरी बेटी प्रज्ञा को एक मां की जरूरत है और उसे अगर उसकी दीदी ही मां के रूप में मिल जाए तो उसके लिए ये कितने किस्मत की बात होगी। प्राची को वो अपने जिज्ञासा पूरा करने का मौका मिल जाएगा। वो तेरे हर अरमान पूरे करेगी। मै जानती हु कि सुहागरात में क्या करना होता है। ओर तू उसके साथ करेगा भी वही। इसीलिए तो तेरी शादी करवा रही हु मै ,की तू यौन सुख से वंचित न रहे आगे की जिंदगी में । ऊपर से याद कर की बहु ने जाते जाते क्या कहा था। उसने कहा था कि प्राची पापा का ख्याल रखना, ओर अपने छोटी बहन के लिए आज से तूही उसकी मां है। उसकी शायद यही इच्छा होगी कि उसका पति खुश रहे , उसकी बेटी खुश रहे । उसका परिवार खुशहाल रहे । और मैं भी वही चाहती हु बेटा। मेरी बात मान ले । इस घर को टूटने से बचा ले। अपनी बेटी को अपना ले

पापा: मा आपकी बाते एक मिनट के लिए मै मान भी गया तो प्राची को ये बात के लिए कैसे मनाओगे। क्या वो अपने ही बाप से शादी करने को तैयार होगी।

दादी : वो तू मुझ पे छोड़ दे बेटा । वो तेरा सामान देख चुकी है । उसके दिल में अरमान जग चुकी है। वो मान जाएगी । मुझ पे भरोसा रख।

पापा शर्माते हुए : ठीक है मा। आप अगर उससे राज़ी नहीं कर पाई तो ये बात यही खत्म कर देना।

दादी : ठीक है बेटा । मै अपने बेटे के लिए इस घर में शहनाई बजावा के ही मानूंगी।

दादी ने ठान लिया था कि वो पापा और बेटी का मिलन करवा के ही मानेगी।

Papa Toh kafi Noughty Hai Shadi ke Turant Ha kar di.. Esa lagata hai jese unke dil me pahle se Prachi ke liye kuch tha..
 
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Update: 7
दादी ने प्राची से बात करने का मन बना लिया था। अगली सुबह पापा अपने काम पे निकल चुके थे । दादी ने मौका देखा और दोनों बहनों के रूम में जा के प्राची को बोला : प्राची बेटा , जरा मेरे रूम में आना ,कुछ बात करनी है।

प्राची : जी दादी अब आई।

प्राची ओर प्रज्ञा दोनों बहने साथ बैठे पढ़ाई हो कर रही थी।

प्राची दादी के पीछे पीछे उनके रूम में पहुंच जाती है ।

दादी : आ बेटा , इधर बैठ।

दादी ने प्राची को अपने बगल में बेड पे बिठा दिया।

प्राची : हां दादी बोलिए क्या बात करना था आपको।

दादी: बाबू, उस दिन जो तुम पापा को रात में करते देखी थी ना उसी बारे में।

प्राची दादी को जिज्ञासा भरी नजरों से देखने लगी: जी दादी बताइए ना।

दादी: बेटी , उस दिन जो पापा कर रहे थे ना वो एक मर्द तब करता है जब उसके लाइफ में कोई औरत नहीं होती। उसके कारण क्या होता है पता है।

प्राची : क्या होता है दादी?

दादी : उसके कारण एक मर्द कमजोर हो जाता है। अगर रोज उस तरह हिलाने की आदत तेरे पापा को लग गई तो ये अच्छी बात नहीं होगी। उसका शरीर खराब हो जाएगा और वो जल्दी बीमार भी पर सकता है।

प्राची घबराना गई: अरे दादी , इसका कुछ तो उपाय होगा।

दादी: हां मेरी बच्ची , इसका उपाय एक ही है, तेरे पापा को एक औरत की जरूरत है। एक औरत का गुप्तांग ही तेरे पापा को राहत दे सकता है।

प्राची : दादी गुप्तांग का मतलब मेरी इससे है क्या( अपने चुत की तरफ इशारा करते हुए बोली)।

दादी: हां बेटी ठीक समझी। तेरे पापा को उसकी की जरूरत है।

प्राची : पर दादी , पापा ने तो शादी करने से हो माना किया है। फिर कैसे मिलेगा उनको ।

दादी: पापा ने तुम लोगों के कारण ही मना किया है पागल । वो तुमलोगो को खुश देखने के लिए शादी नहीं कर रहा , वो बाहरी किसी औरत को नहीं ल सकता , पता नहीं वो तुम दोनों बहनों के साथ क्या सलूक करे। इसलिए मैने एक विचार किया है।

प्राची : हां दादी बोलो ना।

दादी : तेरी ओर पापा की शादी करने का फैसला लिया है मैने बेटा। मैं अपने बेटे के लिए तेरे हाथ मांगती हु।

प्राची : दादी ये आप क्या कह रही है , पापा और मेरी शादी? पापा मुझे शादी कैसे कर सकते है? मैं तो इनको बच्ची हु?
दादी : हां बाबू बच्ची तो हो ही अब उसकी संगनी बन जाओगी। प्रज्ञा की सोच , उसको मां की जरूरत है बेटा। पापा की सोच उसको एक पत्नी की जरूरत है। मुझे भी तो एक प्यारी सी बहु की जरूरत है न बेटी।

प्राची: पर दादी ये कैसे होगा, पापा नहीं मानेंगे , मै मां को धोखा कैसे दे सकती हु। मा पापा की पत्नी थी ना।

दीदी : मा भी तो तेरी यही चाहती थी बेटी की तू प्रज्ञा को मां का प्यार दे , चाहती थी या नहीं?

प्राची : हां दादी, मा ने यही बोला था।

दादी: वो जानती थी कि अब उसका रोल तुझे निभाना है इस घर में । प्रज्ञा का देखभाल तेरी जिम्मेदारी है। पापा का देख भाल भी तुझे ही करना जो। घर तुझे संभालना है बेटा। पापा को पत्नी सुख भी देना है तुझे ।

प्राची बहुत शर्मा गई। उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि दादी उससे कभी ये करने बोलेगी।

प्राची : पर दादी पापा क्या सोचेंगे । मैने तो कही सुना भी नहीं है कि एक बाप ओर बेटी , पति और पत्नी बने है।

दादी: पापा की टेंशन मत ले बेटी, वो मान गया है। उसे तू पसंद है। तेरी हां की जरूरत है।

प्राची अब पूरी लाल हो गई थी। मन में सोचने लगी, क्या सच में पापा को मै पसंद हु। बाप रे ये सब मेरे साथ क्या हो रहा है। मैं अपने की पापा के साथ शादी कर लूंगी। पापा क्या मेरे उसमें अपना लौरा डाल के अंदर-बाहर करेंगे । दादी ये क्या करवा रही है मुझ से ।

प्राची : पर दादी में तो अभी छोटी हु । ऊपर से कॉलेज भी खत्म नहीं हुआ है। अभी शादी कैसे कर पाऊंगी , कैसे निभा पाऊंगी।

दादी: बेटा लड़कियां 16 की उमर से ही इस लायक हो जाती है कि अगर उनके बच्चेदानी में बीज गया मर्द का तो बच्चा धारण कर सकती है, उस हिसाब से तू एक लायक पत्नी बन सकती हो। तेरे मासिक भी आते होंगे ? और अब तो तू ही वो 19 की गई है।

प्राची : हां दादी आते है।

दादी : तो हो गई बात, पढ़ाई तो जारी रख सकती है। बाहर किसी को भी हम नहीं बताएंगे कि घर में कोई शादी भी हुई है। समाज का कोई इन्वॉलमेंट भी नहीं होगा इस शादी में और शादी प्राइवेट होगा। प्रज्ञा को भी मै समझा लूंगी। तू अपने पापा का साथ देना खाली।

प्राची के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था। पापा को भी वो इस हालत में नहीं देख सकती थी ।

प्राची : दादी वो सब तो ठीक है। लेकिन तुम कह रही हो पापा शादी के बाद मेरे उसमें अपना लिंग डालेंगे , मगर दादी मेरा योनि तो बहुत छोटा है अभी। मै कैसे कर पाऊंगी?

दादी हंसने लगी , अरे बेट उसकी टेंशन तू मत ले। सब हो जाता है। तेरे पापा सब कर लेंगे आराम से ,तुझे तो बस पापा का साथ देना पड़ेगा ।

दादी मन ही मन प्राची के नादानी पर मुस्कुरा रही थी कि वो इतनी खुल के ये सब बाते अपनी दादी से कर रही थी।

प्राची: ओके दादी , जैसा आपको ओर पापा को ठीक लगे।

दादी का प्लान कामयाब हुआ। अब पापा ओर बेटी दोनों शादी के लिए राज़ी थे।

उधर प्राची के दिल में आग लगी थी, हाय ये क्या सब हो रहा है मेरे साथ। दादी ने तो मुझे फंसा दिया पापा के साथ मेरी शादी । मुझे अब मम्मी की तरह पापा के साथ उनके रूम में रहना पड़ेगा । वो मेरे साथ, बाप रे, वो तो मेरे साथ चूदाई भी करेंगे । मैं कैसे ले पाउंगी ?दादी तो इतना आसानी से कह रही थी, लेकिन पापा का तो मैंने देखा है ना , बहुत ही बड़ा था। नहीं नहीं, कैसे झेल पाऊंगी मैं?

इधर पापा का हाल भी अजीब था। अपनी बेटी के साथ ही सुहागरात मै कैसे मना पाऊंगा । मा ने तो हद कर दी है। लेकिन सोचे तो कह भी सही रही है। प्रज्ञा को मां तो चाहिए ही। प्राची तो 19 साल की है। मैं ठहरा 40 साल का । मेरा वो सह पाएगी क्या? मै अपने बेटी का ही सील कैसे तोड़ पाऊंगा? वो रोने लगी तो? उसको मेरे बच्चे की मां भी तो बनाना पर जायेगा शादी के बाद? ये कैसे होगा कि एक बाप अपने ही बेटी के कोख में अपना बीज गिराए और उसको प्रेगनेंट कर दे? शादी का मतलब मुझे ये कारण होगा।

पापा का रोम रोम खिल उठा इन ख्यालों को सोच कर । वो दिल से अब शादी का ख़्वाब देखने लगे। बाप ओर बेटी का मिलन होना तय हो गया था।

दादी ने अगले ही दिन , एक दूर के मन्दिर के पंडित से दिन तय करवाने के लिए निकल पड़ी।

मंदिर पहुंच कर दादी ने पण्डित से एक शुभ सा दिन तय करवा लिया। बस पंडित को ये नहीं पता था कि जिसका उसने शादी का मुहुर्त देखा है वो बाप ओर बेटी है।

शादी 3 दिन बाद ही था।

वो मेरे साथ, बाप रे, वो तो मेरे साथ चूदाई भी करेंगे । मैं कैसे ले पाउंगी ?
🔥
प्राची तो 19 साल की है। मैं ठहरा 40 साल का । मेरा वो सह पाएगी क्या? मै अपने बेटी का ही सील कैसे तोड़ पाऊंगा? वो रोने लगी तो?

Wow Beautiful Erotic Writing
 
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Update 8:

घर में माहौल अब कुछ बदल गया था । रात को खाने के टेबल पे सब बैठे थे । दादी ने अब परिवार में सबको बताने का फैसला लिया कि घर में एक शादी बस 2 दिन बाद ही होने वाली है। प्राची, प्रज्ञा और पापा सब बैठे थे ।

दादी : खाना कैसा बना है।
सबने कहा कि अच्छा बना है।

दादी ने बोला : प्रज्ञा , मै एक बात तुम्हे बताना चाहती हु मेरी बच्ची।

प्रज्ञा : जी दादी कहिए।

दादी : प्रज्ञा , तुम्हे याद है मां ने क्या कहा था तुम्हे जब वो आखरी बार बात की थी तुमसे।

प्रज्ञा : हम्ममम , दादी मुझे जब याद है। मुझे मम्मी ने कहा था कि कोई ज्यादा शरारत मत करना । घर में हमेशा दीदी की बात मानना ओर आपको वो बात मानना।

दादी : और क्या कहा था प्राची के बारे में।

प्रज्ञा : दादी , शायद कहा था कि अपने दीदी को आज से मां की तरह मानना वो तेरी मां की तरह देखभाल करेगी, सारे सुख और दुख इसी को बताना।

दादी: फिर क्या तू सच में मां की बात मानती है।

प्रज्ञा : हां दादी प्राची दीदी मेरी मां जैसी ही है। वो मेरा ख्याल रखती है बहुत।

पापा ये सब बाते सुन रहे थे और प्राची अब शर्माने लगी वही बैठे-बैठे ।

दादी: ठीक है बेटा । अगर तू प्राची को अपना मां मान ही चुकी है तो तेरे लिए एक खुशखबरी है बेटा । तेरी दीदी अब सच में तेरी मां बनने वाली है।

प्रज्ञा : क्या दादी ,मै कुछ समझी नहीं?

दादी: हां बेटी , पापा की शादी प्राची से होने का फैसला हुआ है। घर के लिए ये बहुत जरूरी है बेटा। पापा को वो तेरी मम्मी की बहुत कमी महसूस हो रही थी।

प्रज्ञा नादान थी , उसे बस शादी कोई गुड्डे ओर गुड़िया की खेल जैसी लग रही थी , उसने कहा: क्या दादी , सच में दीदी पापा की दुल्हन बनेगी। और मेरी रियल मम्मी भी । वाह।

दादी : हां बेटी , पापा को जरूरत है मम्मी की।

प्रज्ञा अब शादी का असली मतलब नहीं जानती थी । उससे लगा बस दुल्हन बनाना और पापा का हर ध्यान रखना , उनको खाना देना , उनके नाम का सिंदूर लगाना उसी को शादी कहते है। उसे ये पता नहीं था कि शादी के बाद एक पति अपने पत्नी को चोदता है। वो ठहरी 18 साल की कच्ची काली , उसे चूदाई के बारे में कुछ व नहीं पता था, उससे ये वो नहीं पता था कि शादी के बात पापा उसके दीदी का सील तोड़ेंगे।

प्रज्ञा : वाह दादी , ये सही हो गया , दीदी मेरी मम्मी बन जाएगी तो बेस्ट रहेगा। मैं बहुत प्यार करती हू दीदी से।

दादी : ठीक है बेटी , आज से दीदी को मम्मी ही बुलाना ।

पापा के जान में जान आई , वो बहुत घबराए हुए थे कि प्रज्ञा इस शादी को कैसे अपनाएगी। लेकिन वो तो नादान निकली।

प्राची भी शर्म के मारे पानी पानी हो गई थी।

पापा की नजर अब प्राची को एक अलग नजर से देख रही थी। पापा खाते टाइम , प्राची को देख रहे थे । और सोच रहे थे: वाह क्या माल हो गई है मेरी बेटी। मेरी शादी होने वाली है इससे , सोच के ही में बेकाबू हो रहा हु। प्राची के सीने की तरफ अब पापा की नजर गई उनका मन गदगद हो गया।

वाह क्या कमाल की जवानी आई है मेरी बेटी पे। जरा इसके उभार तो देखो , संतरे जैसे छोटे छोटे । मुझे इनपर बहुत काम करना होगा । जल्दी ही मैं इनको चूसूंगा ओर दबा दबा के बड़ा करूंगा। हाय क्या समा होगा वो। इसके ओंठ तो देखो । पंखुड़ी सी को गुलाब की। रस पीने में कितना मजा आएगा। चूत भी कितनी प्यारी होगी मेरी बेटी के। मै कितना किस्मत वाला हु। ऐसी अधेड़ उम्र में एक कच्ची काली को भागूंगा। मां ने तो मेरी लाइफ बना दी। प्राची को मै अच्छे से काली से फूल बनाऊंगा।

पापा एक टक से प्राची को देखे जा रहे थे ये दादी ने भाप लिया। दादी ने बोला: बेटा ऐसे क्या देख रहा है। बस कुछ दिन सबर कर मिल जाएगी ।

प्राची का ध्यान वो मेरी तरफ आ गया और मैं पकड़ा गया और थोड़ा झेप गया।

उधर प्राची की धड़कन तेज हो गई । हाय ,क्या पापा मुझे घूर रहे थे ? दादी ने ऐसा क्यों बोला । जरूर वो घूर रहे होंगे । बाप रे पापा मुझे ऐसे क्यों देख रहे थे। कही वो मेरे साथ सुहागरात की बाते तो नहीं सोच रहे थे। मेरे स्तानो को घूर रहे थे । बाप रे पापा के इरादे बिल्कुल नेक नहीं लग रहे थे।

पापा और बेटी दोनों शर्मा रहे थे। खाना के बाद प्रज्ञा अपने रूम में जा चुकी थी।

दादी ने पापा से बोला : बेटा , मैने तो तुम दोनों से बात की थी शादी के लिए लेकिन तुम दोनों एक दूसरे से बात नहीं कर पाए इस मामले पे। तो तुम लोग थोड़ा बात कर लो , ऐसा ना हो कि शादी बिना किसी के रजामंदी के हो जाए।
दादी चाहती थी कि बाप बेटी डायरेक्ट ही सुहाग की सेज पे एक दूसरे से इस बारे में बात न करे , थोड़ा पहले ही इस बारे में बात कर के कंफर्टेबल हो जाए।

दादी अपने कमरे में हुई। और अब हॉल में सोफे पे बाप बेटी बैठे थे।

पापा: बेटी , मुझे तू कोई बुरा व्यक्ति मत मानना । ये मा का ही सुझाव था कि तुझे मेरी पत्नी बना दी जाए।
तुम्हारे मन में हजारों सवाल होंगे कि पापा क्यों मेरे साथ ऐसा कर रहे है। पर दादी का कहना वो ठीक है बेटी, प्रज्ञा को एक मां की जरूरत है। ये जरूरी है, इसलिए मैं वो माना हु।

प्राची : पापा , आप इस घर में मालिक है। मम्मी के जाने के बात आप ही मेरे सबकुछ है। दादी ने जब ये बोला कि, मुझे अपने ही मां का, जगह लेना होगा इस घर में , और आपके दिल में, तो मैं घबरा तो जरूर गई थी लेकिन सोचने के बाद ये सही लग रहा है कि प्रज्ञा के खातिर , आपके खातिर , मुझे ये शादी मंजूर है पापा। मेरा ओर कोई सवाल नहीं है आपसे , आप ने जो सोचा है अच्छा ही सोचा होगा मेरे लिए ।

इतना बोल के प्राची, शर्मा के अपने कमरे में भाग गई।
पापा को अब प्राची का ग्रीन सिग्नल मिल चुका था। वो पापा की परी ओर पत्नी दोनों बनाने को तैयार थी।

वाह क्या कमाल की जवानी आई है मेरी बेटी पे। जरा इसके उभार तो देखो , संतरे जैसे छोटे छोटे । मुझे इनपर बहुत काम करना होगा । जल्दी ही मैं इनको चूसूंगा ओर दबा दबा के बड़ा करूंगा। हाय क्या समा होगा वो। इसके ओंठ तो देखो । पंखुड़ी सी को गुलाब की। रस पीने में कितना मजा आएगा। चूत भी कितनी प्यारी होगी मेरी बेटी के। मै कितना किस्मत वाला हु। ऐसी अधेड़ उम्र में एक कच्ची काली को भागूंगा। मां ने तो मेरी लाइफ बना दी। प्राची को मै अच्छे से काली से फूल बनाऊंगा।

Bichari Prachi Pata Nahi apane se 21 Sal bade Mard ko kese sambhal payegi.. lekin Prachi ko vo sukh Milena jis ka bas aapana dekh paati he ladakiya
 
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Update:11

शादी की तैयारी होने लगी थी , वहां पहुंच के पापा ने एक कमरा लिया ताकि अब तैयार हो पाए, 11 बजे शादी का मुहूर्त था । दादी ने प्राची को तैयार करने का जिम्मा ले लिया था। प्रज्ञा भी अपना तैयारी में लगी थी। दादी प्राची के रूम में गई ओर उससे शादी का जोड़ा पहनने को बोला । प्राची नहा धो के तैयार होना स्टार्ट कर दी। दादी ने उसे अपने सामने ही सब कुछ पहनने को बोला , उससे दादी के सामने कपड़े पहनने में शर्म आ रही थी , पर दादी ने बोला मै , तुम सब कुछ सही से पहनो , वो सुनिश्चित करना चाहती हु। दादी ने प्राची को बोला : मुझ से क्या शर्मा रही हो बच्ची मैने तो बचपन से तुझे पला है। चल मुझे कपड़े पहनाने दे । उतार ये तौलिया ।

प्राची नहा के आई थी और बस एक तौलिया लपेटे हुई थी।

प्राची ने ना चाहते हुए वो दादी के सामने अपनी तौलिया उतार दिया और उसका मखमली बदन दादी के सामने खुल गया।


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अब वो नंगी खड़ी थी। दादी उसके शरीर का अवलोकन कर रही थी ।

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दादी के मुंह पे एक मुस्कान आ गई । प्राची का रंग गोरा था एकदम । उसकी नंगी बदन दमक रहा था। दादी ने उसके चूचे देखे , वो विकसित होने लगे थे।

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बहुत ज्यादा छोटे भी नहीं थे प्रज्ञा के जैसे । एकदम परफेक्ट थे , इतने बड़े थे की पापा के पूरे हथेली में समा जाए एक बार में। उसकी कमर पतली , योनि के ऊपर हल्के हल्के रेशमी से बाल भी उग आए थे। बला की खूबसूरती थी । और एक तो नई नई जवानी आई थी तो चूत देखने में ही कसा हुआ लग रहा था । दादी प्राची के पास गई और बोली : बेटी जरा सा इधर बैठ तो मैं जरा देखूं कि तेरी योनि कितनी टाइट है।

प्राची शर्म से पानी पानी होगी थी : दादी रहने दीजिए न ये सब।

दादी : अरे मुझे एक बार दिखा तो , मै देखना चाहती हु तू मेरे बेटे को कितना खुश कर पाएगी। तेरी चूत कितनी टाइट है। उसे और तुम्हे सुहागरात के क्रिया में कोई परेशानी तो नहीं होगी।

प्राची ने दादी की बात मानते हुए, पास वाले सोफे पे बैठ गई , दादी ने उसे कहा : बेटी थोड़ा टांग उठा के पैर फैला तो जरा ।

प्राची ने वैसा ही किया


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और उसका चुत दादी के सामने खुल गई थी। दादी ने देखा प्राची की योनि एक दम बंद थी , चुत के ऊपरी हिस्से में एक छोटा सा दाना (क्लीटओरर्स) था। चुत कसी हुई थी। ऊपरी चुत की दीवारें थोड़ी ब्राउन सी थी और अंदर की दीवार पिंक लग रहा था। देखने से ही वर्जिन लग रही थी बेचारी। वो पाव रोटी की तरह फूली हुई थी।

दादी को अपने ऊपर गर्व हुआ कि वो अपने बेटे को इतनी अच्छी लड़की भोगने के लिए पसंद की है। पर दादी का मन डर से भी भर गया कि उसके बेटे का लिंग़ जब इस छोटे छिद्र में जाएगा तो प्राची को कितना दर्द होगा । वो समझ गई थी कि कल का सुबह उसे प्राची की देखभाल न करनी पर जाए , वो चल भी पाएगी सही से या नहीं ।

खैर अब ये सब बात बोल के वो प्राची को डरना भी नहीं चाहती थी। दादी ने अब प्राची को कपड़े पहनना शुरू कर दिया , पहले लाल कॉलर की ब्रा और पैंटी। फिर शादी का जोड़ा। तब तक उधर पापा भी शेरवानी पहन कर तैयार थे और प्रज्ञा भी तैयार हो के बहन के मेकअप के लिए उसके कमरे में चल दी थी। अब थोड़ा जल्दी करना था । शादी ११ भी ही थी और अब १०:३० हो चुका था। प्राची का मेकअप प्रज्ञा करने लगी। मेकअप करते करते उसने दादी से पूछा : दादी , आज से प्राची दी तो पापा के साथ सोएंगी ना?


दादी: हां बेटी , जैसे तेरी मम्मी सोती थी।

प्राची को बहुत शर्म आ रहा था ।
प्रज्ञा : दादी , लेकिन प्राची दीदी तो मेरे रूम में भी सो सकती है ना।

दादी : फिर पापा तेरी दीदी के साथ सुहागरात कैसे मनाएंगे।

दादी के मुंह से बर्बस ही ये निकल गया । तब दादी को एहसास हुआ कि ये तो उससे प्रज्ञा को नहीं कहना चाहिए था।

प्रज्ञा : हां दादी मैने सुना तो है कि लड़की और लड़का का जब शादी होता है तो पहली रात को सुहागरात कहते है। पर ये होता कैसे है?

दादी : बस कर शैतान तुझे अभी ही सब जानना है? समय आने पे तुझे सब पता चल जाएगा।

प्रज्ञा : बताओ न दादी प्लीज प्लीज़।

दादी समझ गई थी, प्रज्ञा जिस बात की जिद एक बार कर देती है, और जब तक वो बात पूरा नहीं होता वो शांत नहीं बैठ सकती है।

दादी बुरा फंस गई थी। उसे अब बताना ही पड़ता ।

दादी : बेटी पापा और दीदी सुहागरात में सेक्स करेंगे ।

प्रज्ञा : हांनन्य , सेक्स कैसे होता है?

दादी : बहुत सवाल करती है बदमाश।

ये सब सुन सुन के प्राची की तो हालात खराब हो जाती है। शर्म से उसे लगता है कि वो धरती में ही समा जाए।

प्रज्ञा : बताओ न दादी प्लीज।

दादी: अरे पापा अपना नुनु तुम्हारे दीदी की गुगु ने डालेंगे और अंदर-बाहर करेंगे ।

प्रज्ञा को लिंग और योनि का यही नाम पता था।

प्रज्ञा : दादी तो इससे क्या होगा ?

दादी : तेरे दीदी और पापा दोनों में प्यार बढ़ेगा और दोनों को बहुत ज्यादा मजा आएगा । चल बस के आज के लिए इतना ज्ञान ही काफी है । दीदी की शादी का मुहूर्त जल्दी आने वाला है , निकलना भी है हमें मंदिर , जल्दी चल।

प्रज्ञा के अब भी कई सवाल थे पर दादी सही कह रही थी, वो उनसे बाद में ये सब पूछ लेगी ।
उसने दादी से बोला: दादी मुझे ये सब बताना जरूर, मै आप से ये सब जान के रहूंगी।

उसने प्राची का मेकअप के दिया अच्छे से। प्राची बिलकुल तैयार हो चुकी थी और खूबसूरत लग रही थी।


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वो नीचे आ गई ।
पापा का तो प्राची को देख मुंह खुला का खुला रह गया।

सब लोग मंदिर पहुंच गए , पंडित जी ने पहले ही सारी तैयारी करवा दी थी ,मंडप सजा था ।


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पंडित जी ने दोनों को मण्डप में बैठने को बोला और फिर शादी रस्में शुरू हुई। पंडित जी ने नोटिस किया कि दुल्हन की उम्र कम लग रही है लेकिन उनको दादी ने बता दिया था कि वो अपनी पोती की शादी किसी अमीर आदमी से कर रही है जिसका उमर थोड़ा ज्यादा है। और वैसे भी पंडित जी को क्या, उनको तो शादी करने से मतलब था।

वो मंत्र पढ़ने लगे ।

पंडित जी ने पापा को प्राची के मांग में सिंदूर डालने को बोला । और दादी ने उसके बाद अपने पोती का कन्यादान किया। फिर पंडित जी ने दोनों को फेरे लेने को बोला । दोनों बाप-बेटी फेरे लेने लगे, जो अब पति पत्नी बननेवाले थे।
पंडित जी सारी विधि करते जा रहे थे , और प्रज्ञा और दादी, एक बाप बेटी का शादी देखते जा रहे थे।


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पंडित जी ने प्राची और पापा दोनों को ७ वजन दिलवाए ओर अंत में शादी कंप्लीट हो गई। शाम का समय हो गया था।

दादी ने पंडित जी को भोजन कराया और फिर दक्षिणा भी दिया , वहां जो पंडित के चेले चपटी थे ,जिन्होंने मण्डप वगैरा सजाया और शादी की सारा व्यवस्था किया था, उन्होंने भी पापा से नेग लिया । फिर अब लोग घर की ओर चल दिए । रस्ते में सबने खाना खाया ।

घर जाते समय पापा ने एक जगह मार्केट में गाड़ी खड़ी कर दी ।

दादी ने बोला: क्या हुआ बेटे ? यह क्यों रोका है गाड़ी?

पापा: बस मां २ मिन में आया।

और पापा एक मेडिकल शॉप में चले गए , दादी को कुछ शंका हुआ । पापा थोड़े देर में गाड़ी में आए और घर की ओर चल दिए ।

घर पहुंचते ही सारे रिश्ते बदल चुके थे। जब घर से सब लोग निकले थे, तो प्राची ओर पापा , एक बाप बेटी की तरह गए थे , और जब वापस आए तो एक पति पत्नी की तरह । प्राची के लिए दादी सास बन चुकी थी और पापा के लिए, अपनी छोटी बेटी ही साली। रिश्ते बदल के रह गए थे।

दादी ने प्राची की घर में आने की रसम करवाई। उनका घर शहर से थोड़ा बाहर था और आस पास ज्यादा कोई घर भी नहीं था, तो किसी को पता भी नहीं चला कि इस घर में कोई शादी भी हुई है।

प्राची का गृह प्रवेश हो चुका था और उसे दादी ने उसके नए ठिकाने में पहुंचा दिया था, जो कि पापा का कमरा था। दादी और प्रज्ञा ने पहले ही चुपके से ये कमरा सजा दिया था। नए पर्दे , बेड पे फूलों की लड़ी और बेड पे बिखरे गुलाब की पंखुड़ी।

प्राची बेड पे बैठ, अब पापा के आने का इंतजार कर रही थी। उसका जी घबरा रहा था कि पापा आयेंगे और उसे अपने मूसल से ,उसकी ओखली की कुटाई करेंगे। आज प्राची के किला में, पापा अपने तोप से बहुत गोले बरसाने वाले थे।

दादी ने पापा से बोला: बेटा एक मिनट मेरी बात सुन जरा।

पापा: जी मां बताइए ।

दादी: बेटा मैने देखा था, तू वो दावा कि दुकान पे गए थे , क्यों गए थे?

पापा: शर्माते हुए , छोड़ो ना मा थोड़ी पर्सनल बात है।

दादी : मै तेरी मां हु , मैने ही तेरी शादी, तेरी बेटी से कराया है , मुझे हक है ये जानने का कि चल क्या रहा है, तू बीमार तो नहीं?

पापा: अरे नहीं मा।

दादी: तो फिर क्या बात है?

पापा: वो मै डरा हुआ हु थोड़ा , सुहागरात को ले के , तुम तो जानती हो , प्राची अभी कुंवारी है, तो थोड़ा कुछ सामान लाने गया था जो उसको थोड़ा राहत दे।

दादी : जैसे ?

पापा: थोड़ा मुस्कुराते हुए , वो थोड़ा एक painkiller दवा अगर उसे ज्यादा दर्द हुआ तो और एक क्रीम है लुब्रिकेशन वाला, उससे थोड़ी सुविधा होगी ।


दादी समझ गई , ये क्रीम कहा यूज़ होगा , ये उनके बेटे ने समझदारी का काम किया है। प्राची की चूत की चिकनाई को बना के रखेगा।

दादी: बेटा मै भी थोड़ी घबराई हुई हु , थोड़ा आराम से करना और समय लेना पूरा , उसको जोश दिलाना पूरा फिर करना। और ये क्रीम का इस्तेमाल करना , और ये नारियल तेल की डिब्बी भी रख ले काम देगा।

पापा : मै ध्यान रखूंगा मां।

दादी : और तो कुछ नहीं लाया न वहां से ?

पापा: हां मा , एक कंडोम लाया हु।

दादी गुस्सा हो गई : कंडोम क्यों?

पापा: अरे मां, अभी अगर प्राची प्रेगनेंट हो गई तो , अभी तो वो खुद बच्ची ही है।

दादी: खबरदार जो तूने कॉन्डम इस्तेमाल किया। किसी भी लड़की का पहली बार में , उसको अपने योनि के भीतर लिंग का रगड़, बिना किसी अवरोध के अनुभव होना चाहिए। और तू भी उसको बिना निरोध के ही सुहागरात मनाएगा। उसको अपने बीज को अंदर महसूस करने से मत रोक बेटा। ये जरूर है कि पहली बार में उसके चूत को तू अपने पानी से भरे ।

पापा : ठीक है मां, जैसा आप कहे ।

दादी: बस सब अच्छे से हो जाए , सबेरे मुझे मेरी बहु, तेरी सुहागन रूप में चाहिए । उसका योनि तेरे पानी का स्वाद चखना चाहिए। ओर उसके योनि का रस में तेरा लिंग सराबोर होना चाहिए , बोल करेगा ना ये सब।

पापा: जी मा , आपकी पोती को मै बारे ध्यान से प्यार करूंगा। सबेरे आपकी पोती एक लड़की से औरत बन चुकी होगी , उसे मै काली से फूल बना दूंगा। सबेरे आपकी पोती आपकी अपने बहु के रूप में मिलेगी, ये वादा रहा ।

दादी: शाबाश मेरे बेटे। अब जा अपने बेटी... अरे नहीं नहीं...., अपने पत्नी.. के पास , वो तेरा तेरे कमरे में इंतजार कर रही है।

पापा अब अपने बेटी के साथ सुहागरात मनाने अपने रूम में चल चुके थे।

गेट पे ही प्रज्ञा ने उन्हें घेर लिया।
प्रज्ञा: पापा अब आप मेरे जीजाजी भी है, दीदी के कमरे में जाने से पहले मुझे नेग देना होगा।

पापा: अरे ये क्या है प्रज्ञा ?मै नहीं दूंगा ।

दादी: अरे कैसे नहीं देगा , वो तेरी छोटी बेटी ही नहीं साली भी है। देना होगा।

पापा : अच्छा, साली बन रही हो मेरी , फिर तो तुम्हरा, मेरे ऊपर , आधी घरवाली वाला हक है। चलो अब घरवाली बोलेगी वो तो मानना ही पड़ेगा ।

दादी और प्रज्ञा खिलखिला के हस दिए । पर प्रज्ञा के दिल में एक टीस सी उठी जब पापा ने उसे आधी घरवाली बोला तो।

पापा ने 5100 रुपए प्रज्ञा को थमा दिए । प्रज्ञा खुशी से फूले न समाई :वाह पापा अपने तो मेरा दिन ही बना दिया ।

ओर प्रज्ञा ने अपने पापा का रास्ता छोड़ दिया और बोला: जाइए अब आप अपनी पत्नी के साथ सुहागरात करिए।

पापा हस पड़े । दादी भी हस दी।

पापा कमरे के अंदर दाखिल हो गए और दरवाजा बंद करने से पहले दादी के तरफ देखा। दादी ने इशारे से पापा को आराम से करने को , फिर से एक बार बोला।

पापा ने वो इशारे में ही दादी को आश्वासन दे दिया । दादी ने पहले ही कमरे में दूध प्रज्ञा से बोल के रखवा दिया था।

पापा अपना कमरा बंद कर के अंदर आ चुके थे। प्राची सजी धजी बेड पे बैठी थी ।


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संकोच से भरी हुई लग रही थी । लाज से उसके आंखे झुके हुए थे। फूल से होंठ थोड़े घबराहट के कारण थरथरा रहे थे ।

पापा बेड की ओर बढ़ चुके थे । सुहागरात के बेला आने ही वाली थी।

दादी: खबरदार जो तूने कॉन्डम इस्तेमाल किया। किसी भी लड़की का पहली बार में , उसको अपने योनि के भीतर लिंग का रगड़, बिना किसी अवरोध के अनुभव होना चाहिए। और तू भी उसको बिना निरोध के ही सुहागरात मनाएगा। उसको अपने बीज को अंदर महसूस करने से मत रोक बेटा। ये जरूर है कि पहली बार में उसके चूत को तू अपने पानी से भरे ।

Amazing Creative Writing

Esi Dadi Sab ko Mile...
 
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Shandhya

संध्या
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Update 12: Suhagraat(Part १) :

आज एक बाप अपनी बेटी से मिलन को तरस रहा था। अपने बेटी के तन बदन पे अपना छाप छोड़ना चाहता था। गेट बंद करते ही प्राची भी सहम सी गई थी । उसे आज एक नया अनुभव होने वाला था। उसके पापा ही आज उसके बिस्तर को गरम करने वाले थे । उसके चूत पे पापा अपना नाम लिखने वाले थे।

पापा ने खिड़कियां भी बंद करनी चालू कर दी । पापा अपनी बेटी को एकदम एकांत में भोगना चाहते थे। प्राची शर्म से लाल परती जा रही थी।

बाहर दादी अपने कमरे में जा चुकी थी। और भगवान से मना रही थी कि आज रात सब अच्छे से हो जाए । उधर प्रज्ञा भी अपने कमरे में सोने चली गई। उसे इतना जरूर पता था कि आज उसके दीदी के गुगु में पापा अपना नुनु डालेंगे पर इतना डिटेल में भी नहीं पता था।

अब घर पूरा शांत हो चुका था और पापा और प्राची के कमरे से उठने वाले तूफान का इंतजार कर रहा था।

पापा धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे और आ के पलंग पे बैठ गए । वो अपनी दुल्हन बनी बेटी को देख रहे थे। उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि ये होगा । पापा : प्राची ।

प्राची : (सहमी हुई आवाज में ) जी पापा।

पापा: बेटी , आज हमारी शादी की रात है। मैने आज तक कभी भी ऐसी शादी नहीं सुनी, जहां दुल्हन दूल्हे की सगी बेटी हो, लेकिन हम पहले होंगे जिसे किस्मत ने ऐसे मिलाया है।

प्राची : हां पापा, मैने भी कभी सोचा नहीं था कि मेरे हाथों में, अपने पापा की ही नाम की मेंहदी रचेंगी ।

पापा: क्या कर सकते है बेटी , समय बड़ा बलवान है । ये सब किस्मत का ही खेल है। ये बहुत जरूरी था अपने परिवार को एक रखने के लिए । दादी की देखभाल के लिए । प्रज्ञा को उसकी नई मां देने के लिए और मुझे जीने का एक मक़सद देने के लिए ।

प्राची चुपचाप पापा की बाते सुन रही थी।

पापा: बेटी , मै तो तुम्हारी मां के जाने के बाद बिल्कुल ही टूट गया था। मै सोच रहा था मेरी तो दुनिया ही खत्म हो गई है। मुझे प्यार देने वाला अब इस दुनिया में कोई नहीं बचा। मैं जीवन से हार चुका था बेटी। इसलिए मैने दारू पीना शुरू कर दिया था। दारू ने मुझे ऐसा पागल इंसान बना दिया था कि मुझे दुनिया की सुध ही नहीं थी । मैं तुम दोनों बहनों को भी इग्नोर कर दिया था। मै भूल गया था कि मेरी फुल सी दो प्यारी प्यारी बेटी भी है। फिर तेरी दादी ने मुझे समझा, बेटी। उसने मुझे तेरे साथ शादी करने का प्रस्ताव रखा । पहले में उसे समाज के नियम के खिलाफ़ मान रहा था लेकिन सच कहूं तो तू मेरे जीवन में एक उम्मीद की किरण मन के आई जो मेरी जान । तुझसे शादी मेरे जीवन का एक बहुत ही सुख देने वाला निर्णय था। मै अपने आप को फिर से जिंदा महसूस कर रहा हु। और अब तू मेरी बीवी है बेटी । मैं एक वादा करता हू कि मैं अब कभी शराब नहीं पीऊंगा। अब मुझे तेरे साथ जीना है मेरी जान। मैने अभी तक जो भी गलतियां की है उसके लिए मुझे तुम से माफी मांगना चाहता हु। तेरे साथ मैने १ साल से पराए व्यवहार किया । प्रज्ञा के साथ भी मैं यही किया है। मुझे माफ कर दे मेरी जान।

प्राची थोड़ा इमोशनल हो गई थी: पापा, आपकी तो दुनिया ही उजड़ गई थी । आपकी कोई गलती नहीं है। दादी हमारा बहुत ख्याल रखी है, जब आप बुरे दौर से गुजर रहे थे। और जब दादी ने मुझे आपसे शादी करने को बोला और समझाया कि ये क्यों जरूरी है, तो मैं दादी की बात टाल न सकी । मैं अपने पापा को जीना सीखने के लिए अब उनके साथ सात फेरे ले चुकी हु। मैं अब आपको ही सब कुछ मान चुकी हु पापा। आप मुझसे माफी मत मांगिए।

पापा: ठीक है प्राची , आज से तू मुझे सैया जी बुलाना । मै तुझे अपनी बाबू बुलाऊंगा ।

प्राची : जी पापा, मतलब मेरे सैया जी।

पापा: बाबू, मै जनता हु की आज की रात को लेके तेरे दिल में कितने अरमान होंगे । तू ने कितने सपने बुने होंगे । मै उन सब को पूरा करूंगा मेरी जान।

प्राची :पापा आप ऐसे नहीं बोलिए , मेरा दिल धड़कता है ऐसी बात से ।

पापा: बाबू , मै तुमसे बहुत प्यार करने लगा हु। अब तेरे बिना जी भी न पाऊंगा । मुझे तो जबसे मां ने, तुमसे शादी को पूछा था ,तब से ही तुम पे दिल आ गया था। तुम्हे अपना बनाना चाहता हु मेरी जान। मिलन करना चाहता हु तेरे साथ। और बेचैनी भी बढ़ रही है मेरी । बोल देगी न मेरा साथ।

प्राची : पापा अब आप मेरे पति है, आपका मेरे पे पूरा हक है , दादी ने मुझे अपना सबकुछ आप पे ही लूटने बोला था। मैं आपको उसी दिन से पसंद कर रही हु जिस दिन आपका वो(पापा के लन्ड के तरफ इशारा करते हुए) , देखा था मैने । आप तड़प रहे थे पापा। मिलन के लिए किसी महिला से । मैं बनूंगी वो महिला पापा। आपके लिए मै बनूंगी वो महिला। मुझसे जितना हो पाएगा मैं आपका साथ दूंगी पापा। आपका ही हक है अब मुझ पे। मेरी तन बदन पे ।

पापा: बाबू, तुमने मेरा दिल खुश कर दिया है। मैं तेरे साथ मिलन को तरस रहा हु मेरी बेटी। तेरे साथ सुहागरात मनाना चाहता हु , तेरे साथ संभोग करना चाहता हु मेरी बेटी। क्या तू अपने पति को इजाज़त देती है। क्या मैं तेरे साथ संभोग कर सकता हु। क्या मैं तेरे योनि का गहराई नाप सकता हु बेटी ?

प्राची : पापा आप मेरे सैया जी है। आप को उसकी इजाजत लेने का कोई जरूरत नहीं है। मै तो आपकी ही हो चुकी हु। आपको तो मैने उसी दिन से संभोग करने का इजाजत दे दिया था जिस दिन मैने शादी के लिए हां कहा था। आप से मिलन को मै भी तरस रही हु पापा।

प्राची अब पूरी तरह से कंफर्टेबल हो चुकी थी । उसका अपने पापा पे विश्वास बढ़ गया था । पापा उससे चूदाई की परमिशन मांग के उसका दिल जीत लिया था। किसी भी लड़की को सुहागरात ने इसी बात का डर होता है कि उसका पति उसकी बाते मानेगा या नहीं , उसके हिसाब से उससे प्यार करेगा या बहसी दरिंदे के तरह सीधे कूद पड़ेगा । पापा इस परीक्षा में तो पास हो गए थे । प्राची ने अब ठान किया था कि वो अपने पापा को परम सुख देगी। पापा को अपना चूत चोदने देगी। पापा को अपने योनि का गहराई नापने देगी। उसके योनि पे बस उसके पापा का नाम लिखा जाएगा। पापा को दिल खोल के प्यार देगी और पापा का लण्ड अपने योनि में लेगी।

पापा: थैंक्यू मेरी रानी, थैक्यू। मैं तुम्हे बहुत प्यार करूंगा मेरी बाबू। आज की रात तुम्हे चांद की सैर कराऊंगा अपने रॉकेट पे बिठा के , बोल बैठेगी न मेरे रॉकेट पे ?

प्राची पापा की शरारत और डबल मीनिंग वाली बाते समझ गई। वो शर्मा सी गई। पापा उसे अपने लन्ड पे बिठाने की बात कर रहे थे।

प्राची : हां मैं आपके रॉकेट पे भी बैठूंगी पापा, और अच्छे से सैर भी करना चाहती हु।

पापा: आजा मेरी बच्ची, मेरा तोप तो अब सलामी दे रह है। तेरे किले में घुसने को बेताब है। बोल तेरे किले पे चढ़ाई कर दु।

प्राची : पापा, मुझे तो डर लगता है ये जंग लड़ने में।

पापा : कोई नहीं बेटी ,मै हु न , सब हो जाएगा । सबेरे तू मेरी धर्म पत्नी बन जाएगी और तेरा योनि मेरे लिंग का पानी पी चुका होगा।

प्राची पापा की इस तरह के बातों से बहुत शर्मा गई ओर सहमने लगी। अपनी पैर को दूसरे पैर पे चढ़ा के अपने एक पैर के अंगूठे से दूसरे पैर को रगड़ने लगी। अपने निचले होठ को अपने दांतों में दवा लिया और एक सी...की आवाज उसके मुंह से निकल गई।

उसने पापा को बोला: अजी वो दूध पी लीजिए न , दादी ने बोला था , आपको आज ये दूध पिलाने से पहले कुछ नहीं करने को मिलेगा ।

पापा: ठीक है मेरी जान , दूध तो मैं आज पियूंगा ही, ये गिलास वाला भी ओर अपने बेटी का भी।
पापा का हर बात प्राची को मादक लग रहा था। वो अब पापा के प्यार में सराबोर होने को तैयार थी । सुहागरात अब फरमान चढ़ने वाला था। उसका दिल धक धक करने लगा इन्हीं बातों को सोच के।

Papa Prachi ko nam se ha beti kah ke bulate aur Prachi bhi papa ko papa hi bulati toh jyada erotic lagta.. aur prachi kuch jyada hi jaldi khul gai he uska innocence hota toh aur accha tha.. otherwise good update
 
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Shandhya

संध्या
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Update 14: finally sil break.

पापा अपने फुल सी बेटी को चूमते जा रहे थे । होठ में होठ मिल रहे थे । पापा का लौड़ा सलामी देने लगा था शेरवानी के पजामे के नीचे ही । पूरा माहौल ही मादक हों गया था । प्राची सुध-बुद्ध खो चुकी थी और पापा को अपना बदन सौंपने को तैयार थी। वो उसी दिशा में बह जाना चाहती थी जिस दिशा में पापा उसको बहा ले जाना चाहते थे । वो एकदम बेजान जी हो के पापा के बाहों में सिमट के रह गई थी , घबराहट से उसके टांगे कांप रहे थे । पापा ने एक एक कर के सारी ज्वेलरी अपने बेटी के चेहरे और गले से उतर दिया था।

पापा ने हाथ अपनी बेटी के उजोरो के तरफ सरका दिया धीरे से और कपड़े के ऊपर से ही प्राची के छोटे छोटे संतरों का गोलियां का अनुमान लगाने लगे । उसकी चूची अभी तक अनछुई थी । पापा के हाथ लगते ही वो बुरी थरथरा उठी।

पापा: क्या हुआ मेरी बाबू।

प्राची :पापा आपका हाथ लगने से कुछ कुछ हो रहा है।

पापा: तुझे अच्छा नहीं लग रहा है क्या मेरी रानी।

प्राची : नहीं पापा, ऐसी बात नहीं है। मुझे तो बहुत मजा आ रहा है । मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ पहले ।

पापा: आज से हर रात होगा बेटी ये तेरे साथ। आज से तेरी कच्ची उमर की चूत, मेरे लण्ङ के नाम हो गई है। अब हर दिन ये तेरे योनि में, अपना ठिकाना ढूंढेगा । तुम्हारी गहराई नापेगा बेटी और मुझे पे विश्वास रख , तुझे चरम सुख की प्राप्ति कराऊंगा मेरी बाबू।

प्राची मादक नजरों से पापा की ओर बस देखती सी रह गई। पापा आज उसे अपना बना के ही दम लेने वाले थे ।

पापा ने देर ना करते हुए, अपनी 19 साल की कच्ची काली बेटी, के दोनों चूची को अपने दोनों हाथ के हथेली में भर लिया, और जी भर के मसलने लगे ।


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बेचारी प्राची कसमसा सी गई। उसके मुंह से सीईईईई...की आवाज निकल गई । पापा अब रुकने का विचार में नहीं थे। प्राची की काम अग्नि भी अब भड़क चुका था ।

पापा ने अब ब्लाउज में कैद छोटी छोटी चूचियों को आजाद कर देने का सोचा और प्राची का ब्लाउज के अंदर हाथ घुसा दिया। प्राची सीसीआ...के रह गई। पापा धीरे धीरे ब्लाउज़ का बटन खोल रहे थे । क्या समा था वो , एक बाप अपने ही बेटी का स्तनों को देखने और उसे चूसने की लालसा में था। ब्लाउज़ खुल गया और पापा ने देर ना करते हुए चूचियों को पूरा नंगा कर देना चाहते थे। उन्होंने प्राची से बोला : बाबू अपना पीठ जरा सा उठा ।

प्राची किसी आज्ञाकारी शिष्या की तरह पापा की हर बात मानती जा रही थी। वो थोड़ा सा उठी और पापा ने अपने हाथों को पीछे ले जा के ब्रा का हुक खोल दिया , ब्रा झटके से खुल गया और आगे से ढीला हो गया । अब चूचियों का अवलोकन पापा करने वाले थे ।प्राची वापस लेट चुकी थी और ब्रा को पापा ने खींच के पूरी तरह बेटी के स्तनों को आजाद कर दिया ।
पापा के मुंह से एक आह निकल गया , हाय क्या खूबसूरत , क्या गोलाई, क्या टाइट , क्या सख्त था प्राची का चूची। पापा अपने हाथों में चूची को भर सा लिया ।


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प्राची तो अपने पापा का हाथ उसके नंगी चुचियों पे लगते ही पिघल गई। उसके जांघें थरथराने लगे और होंठ भी कंपकपाने लगी । ये उसका किसी पुरुष के हाथ से चूची का पहला छुअन था।

पापा अब बेरहमी से एक नवयौवना की स्तनों से खेलने लगे । पापा अपना काबू, अपने ऊपर से खो दिया था और कस कस के अपने बेटी का चूची दबाने लगे ।

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पापा ने एक बार तो इतना कस के दबा दिया कि प्राची चित्कार उठी : आह पापा , थोड़ा धीरे दबाइए न , दर्द हो रहा है।

पापा को प्राची के टोकने से थोड़ा होस आया ।

पापा: अरे ओह बाबू , सॉरी , थोड़ा जोश में आ गया था और भूल ही गया था कि मैं एक कुंवारी लड़की का स्तन मर्दन कर रहा हु। अब से धीरे से दबाऊंगा ।

पापा ने अब अपनी बेटी का चूची अपने मुंह में भर लिया और पीने लगे । चुसाई चालू कर दिए।



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पापा लगभग २० मिनट तक चूचियों से खेलते रहे । कभी होंठो को भी बीच बीच में चूस लेते ।


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और फिर से चूची चुसाई चालू कर देते ।

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प्राची बस पापा का साथ दे रही थी । उसका रोम रोम अब पापा का नाम ले रहा था पापा के प्यार करने से वो पागल सी हो रही थी और उसकी चूत भी अब पानीयने लगी थी। चूत में अब उसे लग रहा था, जैसे चींटियों काट रही हो।
पापा लगभग आधे घंटे चुसाई करने के बाद अब आगे बढ़ना चाह रहे थे ।पापा ने धीरे से प्राची के कान में कहा : बेटी आज में तुझे पूरी नंगी देखना चाहता हु । तेरे बदन पे एक सुत भी नहीं चाहिए बाबू।

प्राची : शर्माती हुई , जी पापा , आप जैसा ठीक समझे ,मैं तो आपकी हो ही चुकी हु।

पापा एक 19 साल की लड़की को इतनी समझदारी वाली बाते करने से बहुत खुश हुए ।

पापा ने झटके से अपना कपड़ा उतार दिया और पापा को कपड़े उतारते देख के प्राची ने अपनी आंखे बंद कर ली।

पापा ने नीचे से प्राची का लहंगा भी खींच के उतर दिया । अब लाल पैंटी में, एक टीनएजर्स लड़की, बला की मादक लग रही थी।

पापा ने पैंटी भी खींच के उतार दिया । प्राची पूरी नंगी हो चुकी थी।

पापा प्राची से सट के उसके नग्न बदन से खेलने लगे ।


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प्राची शर्म से पानी पानी हो रही थी। उसके पापा उसके नंगे बदन के स्वामी हो चुके थे । प्राची का बदन एकदम दूधिया सा था । चूची गोल गोल , चूत कसा हुआ लग रहा था , चूत पे रेशम से हल्के हल्के बाल जो अभी ठीक से उगे भी नहीं थे ,वो बहुत मादक लग रहे थे। पापा प्राची को ऊपर से नीचे तक चाटने और चूसने लगे , प्राची घबराहट से थरथरा रही थी। उसे अब उस पल का इंतजार था और थोड़ा डर भी था, जब पापा उसकी योनि में अपना लौड़ा डालते । पापा से वो इतनी शर्मा रही थी कि पापा के नंगे होने के बावजूद भी उनके लण्ङ के तरफ नहीं देख रही था । अभी भी पापा के लिंग का असली मोटाई और लंबाई उसे पता नहीं चला था। उसने पापा को मूठ मारते देखा तो था लेकिन दूर से और थोड़ा सा ही देखने से उसे, असली लौड़ा के साइज का अनुमान नहीं हुआ था।

पापा अब नीचे बढ़ के योनि के पास पहुंच गए और अपने हाथों से उसके चूत से खेलने लगे ।


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प्राची मदहोश हो चुकी थी । उसके आंखे बंद होने लगे और वो अपने पापा के सामने अपनी टांगे खोल के लेटी थी । पापा उसके योनि द्वार पे अपनी उंगली फिराने लगे और प्राची का जोश बढ़ाता ही जा रहा था । अभी वो पूरे दुनिया में सबसे विश्वासी मर्द को अपना यौवन परोस रही थी। उसे पापा पे पूरा यकीन हो चला था । एक लड़की को सबसे ज्यादा, अपने पिता या पति पे, विश्वास होता है और यह तो दोनों एक ही मर्द थे प्राची के लिए । इसीलिए तो वो टांगे खोल पाई । पापा को अपना चुत छूने दिया।
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पापा उसके योनि को बाहर से ही उपर से नीच तक सहला रहे थे , वो जानते थे कि एक वर्जिन लड़की को एक उंगली भी दर्द दे सकता है, अगर चूत में घुसाया जाए तो। वो प्राची के चूत की झिल्ली को अपने लन्ड से ही तोड़ना चाहते थे । उन्होंने प्राची का चूत थोड़ा अपने उंगलियों से खोल के देखा । अंदर का नजारा उन्हें खुश कर गया ,चूत का छिद्र इतना छोटा था कि उसका मुहाना एक दम बंद था। इस मुहाने से अब सुरंग पापा को अपने हथियार से ही बनाना था।अंदर से गुलाबी, रस से भरी हुई एक दम रसीला चूत थी प्राची की। पापा अपने लाइफ में पहली बार एक 19 साल की लड़की का चूत देख रहे थे। IMG 20260221 014642
उन्हें कोई भी चूत मारे, 2 साल से ऊपर हो चुका था और कोई टाइट चूत मारे, तो अरसा हो गया था । प्राची की मां का चूत तो प्राची के जन्म होने के बाद से ही ढीला हो गया था और वो मजा नहीं देता था। आज पापा को अर्से बाद एक कुंवारी योनि में प्रवेश करने का मौका मिला था। पापा अब अपनी प्राची को थोड़ा और गर्म करना चाहते थे , ताकि वो लिंग लेने में आनाकानी न करे । वो प्राची के चूत की बाहरी चमरी को नीचे से ऊपर तक सहलाने लगे ।098 1000
और अपना मुंह भी प्राची के चूत चूसने के लिए बढ़ा दिया । 543 1000

प्राची को इसकी उम्मीद बिल्कुल नहीं थी कि पापा ऐसा कुछ करेंगे । वो अपने मुंह में उसकी योनि को भर लेंगे । वो तो सिसक के रह गई । उसे परम आनंद आने लगा । उसे तो पता ही नहीं था कि एक छोटी सी चूत, जिसे वो गंदा मानती थी, वो उसे इतना मजा दे सकता है। और पापा पे तो उसे इतना प्यार आ रहा था कि क्या कहना । पापा को अब वो अपने अंदर समा लेना चाहती थी। पापा ने अब एक और दांव खेला जिसकी प्राची को कोई उम्मीद नहीं थी , पापा ने प्राची के चूत के दाने को अपने उंगली से मसलना शुरू किया । ये तो उसे परम आनंद से भी ज्यादा आनंद देने वाला था । उसे इतना ज्यादा मजा आया कि वो पापा का सर पकड़ के इनके बालों को नोचने लगी। 545 1000

पापा कभी उसका चुत चूसते, तो कभी उसके दाने को रगड़ देते ,तो कभी चूत के लकीर को छेड़ते। प्राची अब इतना जोश से भर गई थी कि अब उसे एक मूसल भी मिल जाता तो अपने योनि में डाल लेती। उसकी चूत एकदम पनिया गई थी।

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अब पापा समझ गए थे कि लोहा गरम हो गया था और हथौड़ा मारना चाहिए । पापा का मन, अपने बेटी के मुंह में, अपना लन्ड भी देने का था, पर अब वो देर करते तो ठीक नहीं होता । शायद इतना जोश में प्राची को दुबारा लाने के लिए भी उन्हें एक घंटे का मेहनत और करना पड़ता ।
उन्होंने मन बना लिया कि अब अपनी बेटी की चूत में प्रवेश कर जाना है।

पापा : बेटी , वक्त आ गया है कि इस सुहागरात को हम फरमान चढ़ाए और मै तेरी योनि में प्रवेश करूं बेटी।

प्राची का दिल धक-धकाने लगा । वो आने वाले पल को लेके एक दम से सहम गई।

प्राची : पापा , क्या बहुत दर्द होगा ?

पापा : नहीं बेटी, मुझ पे भरोसा रख अब अच्छे से होगा । मैं आराम से करूंगा ।
पापा ने एक झूठा दिलासा प्राची को दिया क्योंकि एक अनाड़ी भी कह सकता था कि सब 40 साल के एक आदमी का मोटा लन्ड एक 19 साल की लड़की के योनि में जाएगा तो उस लड़की को कितना दर्द होगा।

प्राची पापा के तरफ मादक नजरों से देखने लगी कि पापा कितना प्यार करते है उससे , उसे दर्द वो नहीं दें चाहते ।

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प्राची अरमानों भरे नजरों से अपने पिता को देखते हुए । 53531398 029 7c46

पापा ने उसे चित लेट जाने को बोला और लन्ड चूत में डालने के लिए पोजीशन बनाने लगे ।

पापा : बेटी मै आराम से करूंगा तू घबराना मत।
प्राची इतना शर्मा रही थी कि उसे पापा के तरफ देख पाना वो दुभर हो रहा था । लन्ड तो देखने की उसकी हिम्मत वो नहीं थी। ये भी ठीक ही था क्योंकि अगर वो पापा का लन्ड देख लेती तो हो सकता है बिंदक भी सकती थी, चोदवाने से ।

पापा पोजिशन में आ गए और प्राची के चूत पे चढ़ाई करने की तैयारी कर दी । उन्होंने चूत पे लन्ड को सटाया और परफेक्ट छेद में जाने का ऐंगल तलास करने लगे । पापा ने योनि द्वार पे लन्ड लगा के थोड़ा दबाव बनाया । योनि से लन्ड छिटक गया । फिर दुबारा प्रयास किया , लन्ड फिर छिटक गया।
अचानक उन्हें दादी का दिया हुआ विचार का याद आया । वो भूल ही गए थे कि उन्होंने लुब्रिकेशन क्रीम भी लाया था इसी पल के लिए । और दादी ने भी वो नारियल का तेल दिया था । पापा ने उसे अपने बेड के दराज में ही रखा हुआ था । उन्होंने दराज खोला और क्रीम निकला । प्राची बस आंखे बंद कर के पड़ी हुई थी । उसे आने वाले पल से बहुत डर लग रहा था । पापा ने क्रीम का दक्कन खोला और अंजुल से भर के क्रीम प्राची के चूत के मुहाने पे चपोर दिया।

पापा अपने लन्ड पे भी दादी की दी हुई नारियल तेल से मालिश कर लिया । लन्ड चमकने लगा था। प्राची का योनि अब इतनी चिकनी हो चुकी थी कि प्रवेश करना बहुत आसान सा लग रहा था । एक तो चूत, उसके ही चूतरस से गीली, ऊपर से क्रीम की चिकनाई।

पापा ने फिर से वही पोजीशन बनाया और लौड़ा को अपनी सगी पत्नी बनी बेटी के चूत में ठेलने लगे।


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लन्ड योनि के मुहाने को थोड़ा सा खोल गया पापा के एक करारा धक्के के साथ । प्राची छटपटाने लगी । और सी सी करने लगी । अभी तो बस झिल्ली को पापा का सुपारा बस स्पर्श ही हुआ था और उसे इतना दर्द हो रहा था । पूरा लन्ड अंदर पेसा जाएगा तो क्या होगा , पापा ये सोच एक दहल गए । पर सुहागरात को मुकम्मल तरह से निभाने के लिए लिंग का योनि में घुसना जरूरी नहीं, बहुत जरूरी था।
पापा ने अपने मन पे थोड़ा काबू किया और बेटी के योनि पे अपने लन्ड से थोड़ा और जोर लगने का सोच ।
पापा ने ताव में आके एक जबरदस्त धक्का प्राची के चूत पे मारा । लन्ड पक्क की आवाज के साथ प्राची के चूत में आधा प्रवेश के गया । पापा के लन्ड का सुपारा ,प्राची के चूत की झिल्ली चीर चुका था।

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प्राची को एक असहनीय दर्द का अनुभव हुआ। वो तो आंखे बंद कर पापा पे भरोसा कर आराम से लेटी थी ,अपने पापा के सामने टांगे फैलाए । उसे पता नहीं था कि पापा उसका ये हाल करेंगे ।

वो एकदम से चीत्कार उठी। उसकी जबर्दस्त चीख निकल गई ।
उसने जोर से चिल्ला दिया : आअआआआअह.... हुह्ह्ह्ह्हःहःहः....पापाआअआआ....बहुततत.... दर्द.....हो...रहा....है....पापा......।

चीख इतना जोरदार था कि अगर उनके परोस में वो किसी का घर होता तो उसको वी सुनाई देता।
पापा घबरा गए कि कोई सुन ना ले और उन्हें कुछ न सुझा। वो कस के प्राची के मुंह पे अपना हाथ डाल दिया और दबा दिया, ताकि वो फिर से न चीखे।

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मगर जो होना था, वो तो हो चुका । चीख जोरदार था। और दादी और प्रज्ञा के कानों तक पहुंच गया । प्रज्ञा ने सोचा , अरे दीदी को क्या हुआ , उसे दर्द क्यों हो रहा है। कही उसे कुछ हो तो नहीं गया।

उधर दादी समझ गई कि प्राची अब कुंवारी काली से एक औरत बन गई है, यानि उसकी योनि खुल चुकी है , ओर खोलने वाला ओर कोई नहीं उसका अपना सगा बाप ही है। दादी घबरा गई । लेकिन उसे तो पता ही था कि ये होना ही था।
इधर प्रज्ञा भागते हुए दादी के पास आई : दादी दादी, प्राची दीदी को कुछ हो गया है , वो अभी बहुत कस के चीख रही थी।

दादी ने सोचा अरे प्रज्ञा अगर कही पापा के कमरे के दरवाजे पे पहुंच गई और पापा को प्राची के चूदाई के बीच में ही डिस्टर्ब कर दिया तो अच्छा बात नहीं होगा । अभी अभी तो मेरे बेटे ने मेरे पोती के चूत में लन्ड फंसाई होगी , अभी तो ठीक से चूदाई स्टार्ट भी नहीं हुआ होगा मेरे बेटे का । प्रज्ञा को कुछ तो समझा ही देना होगा ।

दादी: अरे कुछ नहीं बेटी , आपके पापा और दीदी का सुहागरात है ना। पापा ने अपना नुनु शायद दीदी के गुगु में डाला है, इसलिए उसे थोड़ा दर्द हुआ है।

प्रज्ञा बहुत जिज्ञासा ले के अब दादी से सब सवालों का जवाब चाहती थी। इस दादी और प्रज्ञा के बीच हुए बातचीत पे हम बाद में आयेंगे।

अभी पापा के रूम में चलते है , जहां पापा का सुपारा उनके बेटी के योनि में गर चुका था । और प्राची असहनीय दर्द में थी।

पापा ने उसे किस करना स्टार्ट कर दिया , थोड़ा चूची भी दवाएं लगे ताकि प्राची थोड़ा और जोशीया जाए और पापा लगभग ५ मिनट तक प्राची का मुंह दबा के रखा , वो रो रही थी । उसका सील टूट चुका था। पापा ने देखा कि अगर वो रुक के फिर से थोड़े देर बाद एक ओर धक्का मारेंगे पूरा लन्ड योनि में प्रवेश के लिए तो फिर से प्राची को दर्द होगा ,तो क्यों न एक बार में ही पूरा लौड़ा बेटी के चूत में उतर दिया जाए। पापा ने पूरा कंट्रोल अपने हाथ में लिया , प्राची के होठों के अपने होठों से बंद किया और कच से एक ओर जबरदस्त धक्का मार के अपने बेटी के योनि में पूरी तरह दाखिल हो गए।
प्राची कस के फिर चीखीं पर इस बार उसकी चीख दब के रह गई। बस एक , उम्ममम उह.... जैसी ही आवाज उसके मुंह से निकल सकी । वो पूरी जोर लगा के पापा को अपने हाथों से धक्का देके अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी , पर एक नन्ही सी 19 साल की जान एक 40 साल के आदमी के बल से कैसे जीत पाती। पापा ने अपने पूरा का पूरा लन्ड जड़ तक प्राची के बुर में धंआस दिया था। वो पैर फैलाए, बस अंशु ही बहाते हुए लेटी थी और पापा उसको कस के जकड़ के, पकड़े हुए थे, और उसके योनि में अपना लौड़ा डाले उसके ऊपर पड़े हुए थे।
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पापा अभी अपने बेटी को ऐसे उपयोग कर रहे थे जैसे वो उसका रेप कर रहे हो । उसकी एक नहीं सुन रहे थे ।प्राची रोती जा रही थी, उसके अंशु पापा को दिख जरूर रहे थे । पर वो जानते थे कि एक बार प्राची के चूत से अगर अभी उन्होंने लन्ड निकाला तो फिर वो दुबारा घुसाने नहीं देगी। पापा बस इंतजार करते रहे, लिंग को अपनी बेटी के योनि में डाले, ऐसे ही उसके बदन पे लेटे रहे ।

लगभग 10 मिनट तक इंतजार करने के बाद पापा को लगा कि प्राची की सीसकरी थोड़ी धीरे हुए है, उसके अंशु भी रुक चुके थे। और इनको थोड़ा सा प्राची का गांड़ भी उचकता महसूस हुआ । वो समझ गए कि, अब बेटी की चूदाई स्टार्ट की जा सकती है। वो धीरे धीरे अपना कमर उठा के प्राची के बूर पे बजार देते। थोड़ा थोड़ा अपने लिंग को योनि में अंदर-बाहर, अंदर-बाहर करने लगे और अब प्राची का मुंह भी खोल दिया था । वो चीत्कार मार रही थी , उसके पापा के इस तरह के हमला से अभी वो उभर नहीं पाई थी। बस वो बेबस सी पारी हुई थी। अभी भी उसको दर्द हो रह था।

पापा ने पूछा : बेटी ,मुझे माफ करना ,ये बहुत जरूरी था बेटी , अगर में अभी बेरहमी नहीं दिखता, तो शायद आज तेरे भीतर, मै अपना लिंग प्रवेश नहीं कर पाता बाबू। पहली बार था न तेरा , चुत का सील टूटने में थोड़ा दर्द तो होता ही है। ये दर्द तो हर लड़की को सहना पड़ता है बेटी । आज तू अपने पापा की हो गई है। ओर मै तेरा ।

प्राची अभी भी कुछ बोलने की हालत में नहीं थी।

पापा ने भी सोचा अब धक्के थोड़े तेज कर देता हु । चूदाई रफ़्तार पकड़ेगी तो प्राची खुद गरम होके लन्ड लेने लगेगी आराम से । पाप ने अचानक से अब रफ्तार बढ़ा दिया धक्कों का।
प्राची दबी सी आवाज में बड़बड़ाने लगी : aahhhhhhh....ahhhh.... पापा.... छोड़ दीजिए ....रहम करिए अपने बेटी पे.....मै मर जाऊंगी पापा...बहुत मोटा है आपका ...पापा... ahhhhhhhhhhhh....उम्ह्ह्ह...

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पापा को तो टाइट चूत का जन्नत मिल गया था वो कहा रुकने वाले थे। वो प्राची की बात को अनसुना कर के चूदाई जारी रखे हुए थे । उनका हर एक धक्का प्राची के बच्चेदानी को स्पर्श कर रहा था। वो जानते थे कि अगर थोड़ी देर वो प्राची के योनि का मर्दन करते रहेंगे, तो योनि में उनके लिंग का रास्ता जरूर बन जायेगा, और प्राची को फूल जोश भी जरूर आयेगा ।

पापा के हर धक्के के साथ प्राची के चूत के अंदरूनी चमड़ी बाहर , लन्ड को जकड़े , आ जाती थी और ठेलने के साथ ही चूत में अंदर की ओर चली जाती थी। प्राची का चुत था ही इतना टाईट।
खैर लगातार धक्के लगाने से प्राची का जोश थोड़ा जग गया , अब भी उसको थोड़ा दर्द हो रहा था पर अब उसको ये दर्द थोड़ा मीठा सा लग रहा था ।
पापा ने एक बार फिर लन्ड को बाहर खींचा और प्राची के चूत पे बहुत सारा लुब्रिकेशन वाला क्रीम लगाया । चूत अब फूल चिकनी हो चुकी थी । पापा ने देखा कि थोड़ा सा खून भी सील तुरई के कारण, प्राची के योनि से रिस के बेड शीट पे गिर गया है, और उनके लन्ड पे भी ,प्राची के योनि का रस और कुछ से मिला मिश्रण, लगा है। पापा ने लन्ड पे लगे खून को साफ किया और फिर नारियल तेल चपोरा थोड़ा सा। और इस बार बिना किसी विरोध के वो प्राची के चूत में समा गए।
चिकनाई के कारण अब चूत लौड़ा को अपने अंदर आने के लिए कम विरोध कर रहा था।
पापा योनि मर्दन किए जा रहे थे । उनका सुपारा प्राची के बच्चेदानी पर दस्तक देता जा रहा था।
पापा शॉर्ट पे शॉर्ट लगाए जा रहे थे और प्राची के तरफ से अब जवाब आने लगा था । यानि प्राची चूदाई के रंग में रंगने लगी थी। कमरे की दीवारें आज एक बाप बेटी के यौन संबंध का साक्षी बना हुआ था। ठप ठप थापा ठप चूदाई हो रही थी। कमरे में फच फच की आवाज , प्राची के पायल की छन छन की आवाज के साथ मिल के एक अलग ही संगीत सुना रही थी। चूत का रस भी अब पापा को, थोड़ा मदद कर रहा था। प्राची का चुत भी अब पूरा चिकना गया था और लन्ड आराम से पाचा पच अंदर बाहर हो रहा था। प्राची मदहोश हो गई ओर अब उसके मुंह से विरोध के नहीं, चूदाई के सहमति के बोल निकलने लगे : Aaahhh aahhhh uahhhhhh uhhh पापा चोदिए ना और जोर से ।

पापा भी अब दुगुना जोश में आ चुके थे । और पूल स्पीड से बुर मर्दन कर रहे थे अपने 19 साल के नवयौवना बेटी का।

उधर दादी और प्रज्ञा को, पापा के रूम से, उठ रहे तूफान की हर गरज सुनाई दे रही थी । अब तक प्रज्ञा को तो, दादी चूदाई और सुहागरात की हर क्रिया, से वाक़िफ करा चुकी थी। पलंग का चोई चोई भी दोनों दादी और पोती को सुनाई दे रहा था।
प्रज्ञा : दादी, पापा बहुत जोर से दीदी को चोद रहे है ना।
दादी : हां बेटी तेरे दीदी को आज पापा जन्नत दिखा कर ही मानेंगे ।

प्रज्ञा : नादानी से : दादी मुझे भी चाहिए पापा से चूदाई , देखो न दीदी कितनी खुश लग रही है, अजीब अजीब आहे निकला रही है दादी। कितना मजा आ रहा होगा दीदी को।

दादी चौक सी गई : ये क्या कह रही है पगली , दीदी की पापा के साथ शादी हुई है ना। फिर तो उसकी चोदई कर रहे है पापा। तू कैसे के सकती है ये?

प्रज्ञा : तो मेरी भी कर दो पापा से शादी , और वैसे वी दीदी पापा की घरवाली है तो मैं उनकी साली मतलब ,आधी घरवाली हु ना। पापा ने ही कहा था ये मुझे ।

दादी प्रज्ञा के नादानी पे हंसने लगी : धत्त पगली , एक आदमी के २ बीवी थोड़ी होती है।

दादी और पोती का ऐसे ही संवाद चलता रहा।

उधर प्राची मदहोशी से पापा के लन्ड के नीचे लेटी, चूत का मर्दन करवा रही थी , पसीने पसीने हो गए थे दोनों बाप बेटी ।

प्राची को अब इतना आनंद आ रहा था कि उसकी आंखें बंद हो गई थी और पापा का मोटा लौड़ा अपने बच्चेदानी में महसूस कर रही थी।

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पापा को बेटी के यौवन को भोगते हुए लगभग 25 मिनट हो गया था । पापा लगभग 2 साल से चुत के प्यासे थे । आज बेटी की टाइट चूत ने उनके अरमान पूरे कर दिए । पापा अब बहुत तेज तेज धक्के मारने लगे । प्राची का भी बदन अब तीसरी बार अकरने लगा । प्राची 2 बार पहले भी झर चुकी थी, पापा के लौड़े के चोट से। अब वो तीसरी बार झाड़ने वाली थी। पापा भी अब अपने बेटी के टाइट चूत के सामने नहीं टिक पाते । पापा को अब बहुत जोर का अकरन सा महसूस हुआ और वो झटके खाते हुए अपने बेटी के चुत को अपने लन्ड के पानी से भरने लगे । उधर प्राची भी पापा के साथ ही झरी । पापा ने अपने बेटी के बच्चेदानी को अपने बीज से भर दिया । प्राची का चुत भी लूप लूप कर के पापा का लिंग रस पीने लगी । प्राची 19 साल की जरूर थी ,मगर उसके बच्चेदानी में अंडे का, पापा के बीज से सिंचाई हो चुका था । प्राची एक मादा थी और एक नर का बीज एक मादा के बच्चेदानी में पर चुके थे । प्राची के पीरियड आए भी 15 दिन हो चुके थे , यानि प्रजनन के लिए एक दम सही वक्त ।
पापा अपना लन्ड, प्राची के योनि में, एकदम गहराई में, तब तक पेल के रखें, जब तक उनके बीज का आखरी बूंद तक प्राची के चूत में ना गिर गया।
2 मिनिट बाद पापा जब आसावत हो गए कि सारा पानी बेटी के चूत में, वो गिरा चुके है , तब उन्होंने लन्ड बाहर खींचा। पापा का लौड़ा, पुच्च के आवाज के साथ सगी 19 साल की बेटी के योनि से निकल गया । योनि द्वार पापा के सुपारा से फैल चुका था ।

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पापा : मेरी जान , तुमने मुझे बहुत मजा दिया मेरी बाबू। I love You मेरी बाबू।

प्राची : पापा आप अभी इतने प्यार से बोल रहे है,पर उस वक्त, कितने बेरहमी से मुझे चोदा अपने । इतना दर्द हुआ मुझे ।

पापा : अच्छा मजा नहीं आया क्या बाद में ?

प्राची : मुस्कुराते हुए , आया मेरे सैया जी।

पापा: फिर क्या , अब तो रोज चूदाई होगी आपकी।

प्राची : नहीं मुझे दर्द होगा ।

पापा : अरे पागल रोज थोड़ी इतना दर्द होगा , आज तो तुम्हारा पहला दिन था , सील टूटा था ,इसलिए दर्द हुआ इतना , अब तो बस मजे ही मजे आयेगा तुमको।

प्राची: पापा ,अंत में वो गरम गरम सा पानी आपके लौड़ा से जो निकला वो बीज था ना?

पापा: हां बेटी ,वो तेरे पापा का वीर्य था, जो आज मैने तेरे अंदर ही डाल दिया ।

प्राची : पापा मैने बायोलॉजी में पढ़ा था । अगर पीरियड के 10-12 दिन बाद बीज योनि में जाता है तो लड़की प्रेगनेंट हो सकती है।

पापा: हां बेटी , मै तो विचार में था कि कॉन्डम यूज़ कर लूं ,पर तेरी दादी ने मना किया था । वो इस घर में किलकारी गूंजता देखना चाहती है।

प्राची एकदम से शर्मा गई। वो जानती थी कि अगर अब ठीक रहा और बीज बच्चेदानी में भरा है इतना , तो वो प्रेग्नेंट हो सकती है।

वो अब कर भी क्या सकती थी। वो पापा की सुहागन तो हो ही गई थी। अगर अब पापा ही उसे प्रेगनेंट करना चाह रहे है तो वो क्या कर सकती थी।

वो पापा को बस मुस्कुरा कर देखने लगी। उसके चुत से अब भी मादक सुगंध आ रहा था। उसके योनि से पापा का रस भी टपक रहा था ,ये उसके और उसके पापा के बीच हुए , सुहागरात की निशानी थी।

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प्राची का चुत अब खुल चुका था और जबरदस्त चुदाई के कारण थोड़ा फूल गया था और लाल हो गया था। पापा का लन्ड फिर से खड़ा हो गया ।

पापा: बेटी आ जा ,एक बार फिर से तुझे प्यार करूं।
पापा फिर चालू हो गए ।

उस रात, देर रात तक पापा और बेटी का सुहागरात चलता रहा , 19 साल की नन्ही जान को, उसके पापा, रात को 5 राउंड चूदाई ओर कर चुके थे । उसमें अब सहने की शक्ति नहीं बची, तब जा के पापा ने छोड़ा उसे । ऐसे चोदा था उसके पापा ने उसे, जैसे वो उसका रेप कर दिए हो। पर अब क्या फरक पड़ता है ,बेटी अब हो भी तो गई थी अपने पापा की ही। सुहागरात इतना जबरदस्त हुआ था कि शायद कल प्राची चल भी न पाए अच्छे से । ऊपर से पापा ने हर राउंड के बाद अपने लन्ड का गरम पानी और बीज प्राची के बच्चेदानी में ही डाला था । बिना कांडोम के ही पापा ने पूरी रात चूदाई की अपनी बेटी की।

रात के 3 बज चुके थे और अब प्राची पापा के बांहों में लिपट के नंग धरंग ही सो गई।

Bichari Prachi, Uske papa toh jese bhul hi gai the ki vo 19 sal ki hai thoda pyaar se karate vo kahi bhage toh nahi ja rahi thi..
 
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Shandhya

संध्या
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Update 15:

सुबह
की मीठी हल्की धूप खिल चुकी थी। घर में एक सुकून वाला सन्नाटा अब भी पसरा हुआ था । ये शांति एक ऐसी शांति थी जो किसी तूफान के थमने के बाद आती हैं। रात का तूफान था ही इतना जबरदस्त । एक तो प्यासा 40 साल का अधेड़ और कामना से भरा हुआ आदमी , ऊपर से जिसे 2 साल से स्त्री की गर्मी महसूस करने को नहीं मिला हो , उसकी क्या ख़ुशी रही होगी जब उसे एक कच्ची काली और फुल सी लड़की को भोगने का, उसे तो एक सुनहरा मौका मिल गया था , आप सोच सकते है कितना खुश होंगे पापा।

उधर रात को जब पापा ने अपने की बेटी के किले का द्वार तोड़ा था तो घर में कोई भी उससे अपरिचित नहीं रह गया था । दादी को पता चल गया था कि उसके बेटे ने अपनी पत्नी बनी बेटी के साथ अच्छे से सम्भोग की क्रिया की है, रात को। और प्रज्ञा भी इससे एकदम वाक़िफ हो चुकी थी कि आज से उसकी दीदी, सिर्फ दीदी की नहीं, उसकी मां भी बन गई है , जिसे हर रात अब पापा के साथ बिताना होगा, जैसे सुहाग की रात दीदी ने पापा के कमरे में बिताया था ।

प्रज्ञा तो इतना डर गई थी, उस रात जब दीदी की गुटी हुई चीख सूनी थी उसने । वो दादी के पास भाग गई थी और कितना घबरा सी गई थी वो, अपनी दीदी के लिए । वो तो दादी ने समझाया था कि असल में क्या हुआ है, नहीं तो प्रज्ञा तो यही समझती कि पापा ने उसके बहन के साथ कुछ कर दिया है।

जब रात को पापा का मोटा लन्ड अपने प्यारी बेटी प्राची के योनि में धंसा था, और प्राची जब उसे बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और, उसकी चीख जो निकली थी, वो दादी के साथ प्रज्ञा के कानों तक भी पहुंचा था ।

प्रज्ञा तो दौड़ते हुए अपनी दादी के पास पहुंच गई थी और उनसे, अपने दीदी के लिए , अपना चिंता, दादी से जाहिर किया था ।
दादी ने उसे अब समझाया की , ये तो होना ही था बेटी , एक लड़का और लड़की का जब शादी होता है तो उसे अपने बीवी को ये दर्द देना ही पड़ता है । वही दर्द तो पापा ने दिया था अपनी फुल सी बेटी को।

प्रज्ञा : अच्छा दादी पापा का नूनू, दीदी के गुगू डालने से इतना दर्द हुआ है दीदी को?

दादी : हां बाबू , पापा ने अपना लिंग तेरे दीदी के गुप्तांग में पहली बार डाला है ना इसलिए ही थोड़ा तेरी चीख पड़ी थी , तू टेंशन मत ले बेटी, तेरी दीदी बिल्कुल ठीक रहेगी।

प्रज्ञा : पर दादी ,क्या ये हर लड़की को करना ही पड़ता है।

दादी : बेटी इंसान के जीवन का ये तो एक जरूरी अध्याय है। शादी होना , शादी होने के बाद बच्चे होना , फिर उस बच्चे को पालना और उसे फलते फूलते देखना , यही तो जीवन का सार है बेटी , ओर उसकी शुरुआत तो सुहागरात से ही होती है। और सुहागरात में हर लड़की को ये करना पड़ता है बेटी , ये दर्द सहना पड़ता है।

प्रज्ञा : हां दादी कही तो सुनी थी मैने कि एक लड़का अगर लड़की के साथ सेक्स करता है, तो लड़की को बच्चा ठहर जाता है। पता है दादी, मै बहुत दिनों से इस गलत फाहमी में थी कि अगर कोई लड़का kiss करता है, किसी लड़की को तो वो प्रेगनेंट हो जाती है। मुझे इसके बारे में बिल्कुल पता नहीं था कि नुनु लड़की के गुगु में घुसने को सेक्स बोलते है।

दादी प्राची के नादानी पे हस पड़ी : हाहाहाहाहा , अरे नहीं बेटी , अब जो पापा और दीदी कर रहे है, उसे सेक्स कहते है , उस से भी बच्चा नहीं होता , बच्चा तो तब ठहरता है जब सेक्स के बाद लड़का अपनी काम रस लड़की के चूत में डाले ।

प्रज्ञा : हांय्ह्ह, दादी काम रस क्या होता है?

दादी अब समझ गई, कि उसे अपनी पोती को आज एक शिक्षिका के तरह अब बताना पड़ेगा ।

ये सब ज्ञान दादी उस टाइम प्रज्ञा को देने वाली थी जब कमरे के अंदर पापा अपनी बेटी के गुप्तांग में, अपने मर्दानगी की निशानी को घुसाए, मजा ले रहे थे और अपनी बेटी को भोग रहे थे।

दादी : प्रज्ञा लग रहा है अब तू भी बारी होने को आतुर हो गई है। चल में तुझे बताती ही की एक पति ओर पत्नी का रिश्ता क्या होता है , और वो कैसे बनता है।

प्रज्ञा एक जियासु बच्चे की तरह दादी की बाते सुनने को तैयार थी।

प्रज्ञा : हां दादी बताइए ।

दादी : देख बेटी , इतना तो तुझे पता चल है कि सेक्स कैसे होता है। लड़का अपना नुनु, यानी कि लिंग या लन्ड या लौड़ा, सभी नुनु के ही नाम है , किसी लड़की के गुगु , यानी चूत या गुप्तांग या बुर या योनि , सभी गुगू के नाम है, उसमें घुसाता है तो उसे सेक्स बोलते है। अब वो घुसाने का भी एक लंबा तरीका होता है , लिंग को लड़की के योनि में डाल के लड़का उसको अंदर-बाहर लगातार करता है, और फिर सेक्स के अंत में लड़के और लड़की को चरम सुख मिलता है ,वो तरीका करने के बाद ही बच्चा पैदा हो सकता है , चरम सुख यानि लड़के के लिंग से एक गाढ़ा सफ़ेद रस निकलता है तो उसे सेक्स करने के टाइम एक दम अंत में आता है। वो, उस लड़का को लड़की के योनि में भरना पड़ता है , तभी वो बच्चेदानी में जा के अंडे की सींचता है और फिर सब सही रहा तो लड़की पेट से हो जाती है।

दादी प्राची को उसी के भाषा में समझा रही थी। वो अपने नादान पोती को सब बता रही थी।
प्रज्ञा का जिज्ञासा और बढ़ गया ।

प्रज्ञा : दादी, यानी पापा, वो अपना लन्ड अभी दीदी के चूत में डाल दिए है, और अब अंदर बाहर कर रहे है, इसीलिए पलंग भी चोई-चोई और दीदी का पायल छन-छन कर रहा है , अब मैं समझी दादी।

दादी : हां बेटी , तू बिलकुल सही है।

प्रज्ञा : तो क्या दादी , पापा दीदी के भी योनि में अपना गढ़ा सफेद पानी डालेंगे ।

दादी : हां बेटी वो डालेंगे , और उस गाढ़े सफेद पानी का नाम ,वीर्य होता है। वो बीज की तरह काम करता है लड़की के बच्चेदानी में ।

दादी ने , अपने पोती को सच में जीवन का परम ज्ञान दिया था आज। प्रज्ञा को अब हर चीज का मतलब समझ आने लगा था ।

प्रज्ञा : दादी पापा कब तक दीदी के योनि में अंदर बाहर करते रहेंगे ।

दादी : बेटी अंदर बाहर करने को चोदना या चूदाई करना बोलते है। पापा तेरी दीदी को तब तक चोदेंगे जब तक अपना वीर्य प्राची के योनि में न डाल दे बेटी।

प्रज्ञा अब हर बात समझ गई । तभी उसे और दादी को महसूस हुआ कि , प्राची के आहे भरना ओर तेज़ हो गया था और पलंग भी और तेज चोई चोई करने लगा था।

प्रज्ञा : दादी , पापा बहुत जोर से दीदी की चूदाई के रहे है ना।

दादी : हां बेटी , पापा अच्छे से चुदाई के रहे है तेरे दीदी का।

प्रज्ञा : दादी ,मुझे भी ये महसूस करना है , मैने अब तक ये कभी अनुभव नहीं किया है। पापा को बोलो न मुझे वो एक बार चोदे ।

दादी प्रज्ञा के नादानी पे हंसी पड़ी : अरे पागल ,तुझे पापा कैसे चोदेंगे, प्राची के तो शादी है पापा के साथ , वो उनकी पत्नी है अब , उसे जी भर के चोद सकते है तेरे पापा। तू बेटी है उनकी, वो तुझे कैसे चोदेंगे।

प्रज्ञा : दादी घर दीदी पापा की घरवाली है ,तो मैं भी पापा की साली हुई ना, यानी आधी घरवाली , पापा ने ही मुझे बोला था ।

दादी उसकी नादानी पे एकदम हस पड़ी : हा हा , धत पहली , किसी वो आदमी की २ बीवी थोड़ी होती है।

प्राची : दादी तो मेरी भी शादी कर दो न पापा से , पहले के राजा के पास तो बहुत सी बीवी होती थी ,फिर क्यों नहीं कर सकते शादी ।

दादी ने बोला: बेटी , तू अपने ही दीदी की सौतन बनाना चाहती है। तेरी दीदी तो तेरे इस तरह के जिद से टूट जाएगी। उसकी नई नई शादी , उसकी नई दुनिया टूट जाएगी मेरी बच्ची ।

प्रज्ञा को अब होश आया कि वो तो अपनी दीदी का ही हक मारना चाह रही थी। उसे तो सेक्स के बारे में सुन के इतना आनंद आया और पापा और दीदी की शादी के बाद पापा जिस तरह से दीदी को चोद रहे थे उसने उसे रोमांचित कर दिया था इसलिए वो ऐसे बोल परी थी । उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।

प्रज्ञा : ओह ,दादी मै तो आपकी बातें सुन के इतना रोमांचित हो गई थी कि मैने ऐसी बात कर दी। मुझे माफ कर दो दादी

दादी : कोई नहीं मेरी बच्ची, मै तेरी मनोदशा समझ रही हु।

पापा ओर प्राची का सुखद चीत्कार दोनों दादी और पोती को रात भर सुनाई देता रहा , प्रज्ञा दादी के रूम में ही सो गई थी रात में ।

आज सुबह , सारे घर में एक नए रिश्ते के आगाज के साथ शुरू हुआ है ।

रात के सुहागरात के बाद, पापा की नींद सबेरे 8 बजे जब खुली, उन्होंने अपनी बाहों में नंगी पड़ी अपनी बेटी को सोता हुआ पाया । पापा अपने आप को आज पूरा मर्द महसूस कर रहे थे । रात को वो लम्हा पापा को याद आ गया जब वो बेदर्दी से अपनी बेटी भोग रहे थे। आह कितना मजा दिया मेरी बेटी ने मुझे। पापा अपने आप पे गर्व भी महसूस के रहे थे, क्योंकि वो 5 बार जन्नत का सैर कर चुके थे और बेटी को तो पता नहीं कितनी बार चरम सुख तक पहुंचाया था।

पापा एक टक से रात को चोदी हुई बेटी को देखने लगे।


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अभी उनकी बेटी एक दम शान्त समंदर की तरह लग रही थी । रात को तो पापा ने इस समंदर में इतने गोते मारे थे म, कि ये समंदर रात भर हिलकोरे मरता रहा था ।

पापा अपनी बेटी की मासूमियत भरा चेहरा देखते रहे । उन्हें अपने बेटी पे प्यार आ रहा था । रात को कितना दर्द दिया था उन्होंने अपने सगी बेटी को। प्राची के चूत की तरफ जब पापा का ध्यान गया तो उन्होंने देखा कि योनि का बाहरी हिस्सा डबल रोटी की तरह फूला हुआ था एकदम लाल हो गया था । उसका छिद्र पहले से काफी बड़ा हो गया था यानी कि वो अब कली नहीं फूल बन चुकी थी। उसके गर्दन , चूची ओर पेट हर जगह पे लाल लाल काटे का निशान पापा के बेरहमी का गवाही दे रहा था , कितने लव बाइट दिए थे एक बाप में अपनी बेटी को ,संभोग के संयम ।
अब भी प्राची रात के थकान के बाद पापा के सामने निर्वस्त ऐसे पड़ी हुई थी कि वो पापा की गुलाम हो ।

इधर दादी वी उठी हुई थी और उसको उठे हुए १ घंटा हो चुका था ।

अभी तक नए दूल्हा और दुल्हन का दरवाजा बंद था, जो उनके बेटे ने ,उनकी पोती के साथ, कल रात को सुहागरात मनाने से पहले बंद किया था।

दादी अब ओर इंतज़ार नहीं करना चाहती थी अपने पोती का हाल चल लेने के लिए वो , जानती थी कि उसके योनि में आज कितना दर्द हो रहा होगा और उसको दादी की जरुरत हो सकती है ।

दादी से रहा नहीं गया और वो अपने बेटे और बहू के कमरे की ओर चल दी ।

पापा इधर अपनी बेटी को सोते हुए एक टक से निहारे जा रहे थे, वो उसकी बनावट और सुंदरता के कायल हुए परे थे।

तभी बाहर से दादी ने हल्का सा गेट पे दस्तक किया: बेटा , बेटा ।

पापा - हां मा ।
पापा भी उसी नग्न अवस्था में ही दादी को जवाब दिया ।

दादी : बेटा , दरवाजा खोल न । प्राची ठीक है न तोरा जी घबरा है उसके लिए।

प्राची रात के थकान के बाद थोड़ी गहरी नींद में पड़ी हुई थी।

पापा: मां थोड़ा समय दो , हम थोड़े ऐसे अवस्था में है कि थोड़ा समय लग जाएगा ।

दादी समझ गई कि बेटा ओर पोती अंदर अब वी नंगे ही परे है। दादी लौट के जाने ही वाली थी पर मन में एक विचार आ गया।

दादी - बेटा , कोई बात नहीं मुझे जरा हाल लेने दे अपनी पोती का ,बहुत जी घबरा रहा है मेरा ,रात का चीख सुन के ।

पापा समझ गए रात को जो प्राची की चूत की झिल्ली उन्होंने अपने लिंग से फारी थी और उस वक्त प्राची ने चीखा था वो मां के कानों तक गया था । पापा शर्मिंदा हो गए थोड़ा ।

दादी २ मिनट इंतज़ार के बाद समझ गई बेटा दरवाज़ा खोलने में संकोच कर रहा है ।

उन्होंने थोड़ा दिलासा दिलाते हुए कहा : कोई बात नहीं बेटा ,मै जानती हु तुम दोनों अब नग्न अवस्था में होगे । पर मुझसे क्या शर्माना ।

पापा दादी की बात मान कर , प्राची के ऊपर चादर डाल दिया ताकि वो नंगी न दिखे दादी को और अपने नीचे कमर में एक तौलिया बांध के दरवाजा खोला : जी मां बोलिए ।
अंदर प्राची अब भी बेसुध पड़ी थी।

दादी : बेटे ,रात को सब अच्छे से हुआ न ।

पापा: हां मा , मैने अब अच्छे से किया ।

दादी : मेरी पोती कैसी है बेटे । (ये सवाल करती हुई दादी रूम के अंदर तक आ गई)

पापा : ठीक ही है मां वो भी।

दादी को पता था कि उनकी पोती ने 40 साल के मोटे लिंग को सहा है रात को । वो ठीक नहीं होगी । वो जानती थी जैसा दादी ने कल रात को अपने पोती को ,अपने बेटे के रूम में छोड़ा था, और रात को जैसा वो चीखी थी, वैसा वो बिल्कुल नहीं होगी जैसा वो कल सुहागरात से पहले थी।

दादी ने प्राची के तरफ देखा । वो अब भी बेसुध चादर ओढ़े पड़ी थी। ऐसा लग रहा था कि रात को बहुत थक गई थी और थकान के कारण अभी वी सो रही थी । दादी ने गर्दन पे ध्यान दिया तो उनको पापा का दिया हुआ लव बाइट दिख गया उन्हें । पापा ने ये भाप गए और थोड़ा नज़ारे नीची कर लिया।

दादी ने पापा को बोला- बेटा एक मिनिट के लिए दरवाज सटा दे जरा , अपने पोती को देखना है मुझे । तू आदमी है और एक औरत का तकलीफ तू नहीं समझ सकता । एक बार मैं अवलोकन कर लूंगी तो आश्वस्त हो जाऊंगी ।

पापा दादी को मना नहीं कर सकते थे , आखिर मा ने ही तो उनकी उनके बेटी के साथ मिलन करवाया था । वो उनकी गार्जियन थी।

पापा ने दरवाजा हल्के से भीरा दिया ।

दादी : बेटे , अपनी दुल्हन का जरा चादर हटा तो।

पापा थोड़े झेप से गए । वो समझ गए कि जो कल रात को उन्होंने अपने बेटी के साथ बेदर्दी से शंभोग किया था उसका सबूत उनकी मां को दिख जाएगा ।

दादी ने फिर से कहा : मुझे देखना है बेटे अपने पोती को । चादर हटा तू।

पापा ने प्राची का चादर उठा दिया , दादी के सामने प्राची पूरी नंगी ही पड़ी थी।


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पापा अपनी नजरें नीचे किए हुए वही खड़े थे ।

दादी ने ऊपर से नीचे तक अपने पोती के नंगे बदन का अवलोकन किया । प्राची के शरीर में काफी बदलाव दिख रहे थे दादी को , क्योंकी दादी ने शादी से पहले भी प्राची को नंगी कर के अवलोकन किया था। प्राची के योनि एक दम सुजा हुआ प्रतीत हो रहा था । जगह जगह शरीर पे लाल लाल कटे का निशान गवाही दे रहे थे कि पापा ने रात को शानदार तरीके से बेटी को भोगा है।

दादी 5 min तक अपने बेटे की दुल्हन को देखी और समझ गई कि अब उसे प्राची का ख्याल रखना पड़ेगा कुछ दिनों तक , चूत पे हुईं सूजन को देख के लग रहा था कि शायद वो चल भी ना पाए 1-2 दिन और सेक्स तो 5-6 दिनों तक नहीं ही होना चाहिए ।

दादी ने पापा को बोला : बेटा इसकी तो तूने हालात खराब कर दी है। मैने तुझे बोला था कि आराम से करना,तूने तो इसको बेदर्दी से किया है। देख के लग रहा है तूने मेरी पोती का रेप ही कर दिया है। ये क्या किया तूने ?

पापा: मा, मैने तो बस जैसे करते है वैसे किया था। अब सील तोड़ने के लिए थोड़ा तो बेदर्द बनाना ही पड़ा ,नहीं तो इसे तो इतना दर्द हो रहा था ये तो अंदर ही न प्रवेश करने देती मां।

दादी पापा की बात समझ रही थी , पर पोती पर हुई बेदर्दी से उन्हें पता था कि प्राची की ऐसी हालत सिर्फ़ सील तोड़ने से नहीं हुई है ।

दादी : अच्छा तूने सिर्फ सील तोड़ी ओर इसकी योनि की ये हालत हो गई ? सही सही बता कितनी राउंड किया ?

पापा पकड़े गए थे । अब झूठ नहीं बोल सकते थे ।

पापा: 5 राउंड मा।

दादी : क्या... ?? तुझे पता था न, की ये तेरी 19 साल की बेटी है। मैने मान लिया कि तेरी सुहागरात थी तो सील तोड़ना जरूरी था । लेकिन तू तो स्वार्थी के तरह पूरी रात अपनी फूल सी बेटी को रौंदता रहा । 5 बार करने से पहले तेरा दिल नहीं दहला ? एक बार में सुहागरात हो गया था न पूरा? तो फिर 5 बार करने की क्या जरूरत थी तुझे? में तेरी क्या है?

पापा अब अपनी गलती का एहसास कर रहे थे: मेरी पत्नी और बेटी है मां।

दादी - तो तूने इससे रण्डी समझ के इसके मजा रात भर ले लिया ? अब इसकी इतनी देख भाल करनी पड़ेगी मुझे , शायद ये चल वो ना पाए अभी।

पापा: माफ के दो मुझे मा। मै थोड़ा हवस में बह गया था ।

दादी : अब क्या फायदा , नुकसान तो तेरा ही है, एक बार करता तो आज रात एक दम फिट रहती बेटी तेरी , तू फिर संभोग कर सकता था । इसकी हालत देख के तो अब तू 1 सप्ताह के लिए नई दुल्हन के साथ रात का मिलन भूल ही जा ।

पापा शर्मिंदा थे ।

दादी : चल अब मुंह मत बना । पता है २ साल से तू प्यासा था मेरे बेटे । लेकिन तुझे ऐसे तो नहीं संभोग नहीं करना चाहिए था ना। अपनी बेटी है तेरी , कोई बाजारी औरत नहीं । तेरी पत्नी है । रोज घर में तेरे लिए ही उपलब्ध रहती ना। चल अब मैं चलती ही , इसे नींद से जगा और दोनों जन बाहर आओ फ्रेश होके , तुम दोनों को एक पूजा करनी है। रिवाज है कि शादी के बाद नई दुल्हन और दूल्हा साथ करते है अपना पहला पूजा , सुहागरात के बाद।

पापा : ठीक है मां, आते है , आधे घंटे का समय दीजिए हम दोनों को।

दादी फिर से प्राची पे चादर डाल दिया । और कमरे से बाहर चली गई।

पापा थोड़े स्तब्ध हो गए। पर अब वो अपनी गलती का एहसास कर रहे थे । बेटी को पूरी रात उन्हें नहीं रौंदना चाहिए था ।

खैर दादी के बात को इनको पापा को कोई बुरा नहीं लगा , वो जानते थे दादी पोतियों से और उनसे कितना प्यार करती है। ग़लती करूंगा तो डांटेगी भी ।

वो अब प्राची को उठाने चल दिए ।

Chalo aaccha hua dadi ko toh apani poti ki chinta he nahi toh uske papa ne toh prachi ke bholepan ka pura fayda uthaya tha.. Papa Toh aur bhi jyada khyal rakhte pahali baar me lekin prachi ke papa jese apana hos kho bethe..
 
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