Mst updateUpdate 27
हिंदी में
रामनीक जब घर पहुंची तो उसकी मां रसोई में रोटी बना रही थी। सबसे पहले उसने एक बार अपना मुंह धोया, हल्का सा मेकअप कर लिया और गले तथा छाती पर लगे लवबाइट्स को भी मेकअप से ढक लिया। उसकी टांगें आज भी दर्द कर रही थीं, पर फिर भी वह जा कर अपनी मां की मदद करने लग गई। वहां दोनों बहनें शेली और शरण टीवी देख रही थीं, हमेशा की तरह। दोनों वैसे भी घर के कामों में ज्यादा मदद नहीं करती थीं। रामनीक भी उन्हें घर के काम के लिए कुछ नहीं कहती थी, पर हां, अगर पढ़ाई में कोई गड़बड़ होती तो वह अपना सारा गुस्सा दोनों की गांड पर निकाल देती थी। दोनों बहनें भी चुपचाप मार खा लेती थीं क्योंकि जब रामनीक मारती तो प्यार उससे भी ज्यादा करती थी। अगर किसी चीज की जरूरत होती, किसी भी नई ड्रेस की, तो रामनीक बिना कुछ पूछे अपने पैसे से भी पैसे निकाल कर दे देती थी।
रसोई में जाते ही परमजीत बोली, “आ गई तू... कोई गड़बड़ तो नहीं हुई...”
रामनीक: नहीं, जैसा तुमने कहा था, मैं सीधे अंदर चली गई बिना इधर-उधर देखे...
परमजीत: तो फिर मजा आया...
रामनीक: हां मजा तो आया, पर दर्द भी काफी हुआ, अभी भी पेट दर्द कर रहे हैं सच में...
परमजीत: कोई बात नहीं, सोने से पहले एक बार नहा ले, ठीक हो जाएगा... आज आराम कर ले, अगर करना हो तो सोना हमारे कमरे में...
रामनीक: वैसे दिल तो मेरा आराम करने का है, पर डैडी का मूड देख लो, वो नाराज न हो जाएं क्योंकि उन्होंने देखा होगा कि मैं दूसरी बार जब तैया जी लगे थे तो मेरी काफी चीखें निकल रही थीं। यह सुनकर डैडी क्या सोच रहे होंगे पता नहीं। बाकी तुम देख लेना, अगर मेरी जरूरत पड़ी तो मैं आ जाऊंगी...
परमजीत उसके माथे को चूमते हुए बोली, “वाकई मेरी बेटी सयानी हो गई है, सबका ख्याल रखती है।”
रामनीक की उम्मीद के उलट उसके पिता का मूड खराब नहीं था, न ही उन्होंने कोई तीखी बात की। रामनीक के जाने के बाद वह काफी देर तक सोचते रहे और यह बात भी उनके दिमाग में बैठ गई कि उनकी तीन-तीन बेटियों ने सबको चोदना है। वे किस्मत वाले हैं कि अपनी एक बेटी की सील तोड़ दी, वरना बेगाने लड़के ने पता नहीं क्या कर दिया होता। साथ ही उनका बेटा भी कोई बुरा नहीं है, उनकी बेटी को कोई नुकसान नहीं होगा उसके साथ।
इसी तरह शाम को मिंटू की घरवाली जसप्रीत अपने बेटे अमन और बेटी तनवीर के साथ बैठी सलाह कर रही थी और साथ ही अपने घर वाले का इंतजार भी कर रही थी। बेटे का रिश्ता तो कोमल के साथ पक्का कर चुकी थी, पर अपनी बेटी तनवीर कौर के लिए कई दिनों से रिश्ता ढूंढ रही थी। आज उसे अपनी बेटी के लिए एक रिश्ता आया था। उसी के गांव की रिश्ता करवाने वाली औरत ने बताया था। वह उनके गांव से थोड़ी दूर था। लड़के का पिता फौज से रिटायर्ड था और अब खेती करता था। उसका बड़ा बेटा और बड़ी बेटी का विवाह हो चुका था। एक और बेटी थी उनकी, पर उसकी टांगें खराब थीं इसलिए उसका कहीं विवाह नहीं हो रहा था। अब उसकी उम्र भी बढ़ती जा रही थी, इसलिए सबसे छोटे बेटे रिकी के लिए लड़की ढूंढनी शुरू कर दी थी। रिकी का बड़ा भाई कनाडा में रहता था, साल में दो-दो साल बाद ही आता था। उसकी जमीन ज्यादा थी, पर वह अपनी जिद करके कनाडा में रहता था। उसकी घरवाली कनाडा नहीं जाना चाहती थी पक्के तौर पर। वहां की जिंदगी देखकर आ चुकी थी। क्योंकि उसका घरवाला उसे काम नहीं करने देता था, सारा दिन घर में अकेली बैठी रहती थी, इसलिए उसने जाना बंद कर दिया था। क्योंकि रिकी का बड़ा भाई नवप्रीत बड़ा शक्की किस्म का आदमी था। और उसके उलट उसकी पत्नी बड़ी सौम्य थी। बस एक ही बात थी, वह बहुत बोलती थी, सीधे गाली देती थी, जहां बात करने लग जाती थी, अगले का सिर खा लेती थी। बाकी रिकी ने जमीन का काम संभाल रखा था और साथ ही शहर में कंप्यूटर की दुकान खोली हुई थी जहां सीसीटीवी कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान रखा हुआ था। दो लड़के उसके नीचे काम करते थे। कुल मिलाकर उसका काम अच्छा चल रहा था।
रिकी की बहन जिसकी टांगें खराब थीं, उसका नाम गुरप्रीत कौर था। पढ़ाई में बहुत होशियार थी। असल में वह ठीक थी, पर एक बार जब वह स्कूटी पर कॉलेज से आ रही थी तो एक शराबी ड्राइवर ने उसे टक्कर मार दी। एक्सीडेंट बहुत खतरनाक था। इसमें बेचारी गुरप्रीत के घुटनों के नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। हल्की रोज-रोज की मालिश ने काफी असर किया, पर पूरी तरह ठीक नहीं हो सकी। तीस साल पूरे कर चुकी थी अब गुरप्रीत। उसका शरीर काफी गोरा था। 36-34-38 साइज का फिगर था। गांड थोड़ी ज्यादा भारी थी। ज्यादातर वह व्हीलचेयर पर रहती थी। पहले वह काफी उदास रहती थी, पर अब उसने अपने आप को समझा लिया था। दूसरा, अब परिवार वालों ने भी पूरा सपोर्ट कर दिया था क्योंकि किसी मादे आदमी के साथ अपनी बेटी नहीं तोड़ना चाहते थे। हां, रिकी की मां कई बार दुखी हो जाती थी कि जवान बेटी अपनी जिंदगी कैसे काटेगी। अपनी बेटी का जवान शरीर देखकर वह बहुत उदास हो जाती थी। क्योंकि जिस उम्र में लड़कियां विवाह कर बच्चे पैदा कर लेती हैं, उसी उम्र में उसकी बेटी घर बैठी हुई थी। चलो जो भी था, किस्मत थी उसकी।
उस शाम जब मिंटू घर आया तो जसप्रीत ने सारी बात उसे बता दी और लड़के की फोटो भी दिखा दी। तनू को तो उसने पहले ही पूछ लिया था, उसे लड़का ठीक लगा था। जब मां-बेटी राजी तो मिंटू को कभी समस्या नहीं होती। उसने भी हां कर दी। अगले दिन ही एक छोटे रेस्तरां में मिलकर चाय वगैरह का कार्यक्रम रख लिया और अंगूठी भी वहीं पहना दी क्योंकि दोनों परिवार बड़ा कार्यक्रम नहीं करना चाहते थे। विवाह के लिए भी उन्होंने यही सोचा कि इतना बड़ा विवाह करके फालतू पैसे खर्च करने से बेहतर है सारे पैसे बेटी के खाते में जमा करवा दो, जिसमें कोई फायदा तो हो, लोगों को खिलाकर क्या मिलना। यह बात वाकई सबको बहुत अच्छी लगी।
उस शाम उन्होंने सज्जन सिंह और कुलवंत कौर को भी फोन कर दिया कि हमने अपने हिसाब से बेटी के लिए लड़का ढूंढ लिया है और अब अमन और कोमल के विवाह की तारीख रख लो। अगले कुछ दिनों में कोमल के विवाह की तारीख भी तय कर दी गई। सिमर ऊपरी तौर पर खुश था। सबके साथ हंसता-खेलता रहता था, कोमल के साथ मजाक करता रहता था, पर वह बहुत उदास था। उसकी दोस्त, उसकी बहन, उसके रिश्तेदार, उसकी टीचर जो उसे पढ़ाती थी और छड़ी से मारती भी थी और सबसे बड़ी बात उसकी प्रेमिका, उसका प्यार, बेगाने घर जा रही थी।
खैर, विवाह बड़े साधारण ढंग से कर दिया गया। सिमर इकलौता लड़का था, इसलिए विवाह में पूरी मदद की, काफी काम करना पड़ा उसे। कई लड़कियों से बातें बन रही थीं, पर उसने किसी पर खास ध्यान नहीं दिया। उसका ख्याल तो सिर्फ अपनी कोमल का था जो उसे छोड़कर जा रही थी। जो फालतू पैसे शराब, महंगे होटल, लोगों को खिलाने में लगाना था, वही पैसे सज्जन सिंह ने अपनी बेटी के खाते में जमा करवा दिए। डोली तोड़ने लगे तो जिस सिमर ने इतने दिनों से अपने आप को कंट्रोल करके रखा था, वह आखिर अपना कंट्रोल खो ही बैठा और फूट-फूटकर रो पड़ा। कोमल भी बहुत रोई, उसके गले लगकर। यह वही बहन थी जो उसे खिलाती-पिलाती थी। जब बेगाने उसके मां को चोदने आते थे और वह डर जाता था तो कोमल उसे अपने गले से लगा कर सुलाती थी, छुप-छुपकर अपनी मां के कमरे में देखना। कोमल से कुछ भी छुपा नहीं था। बड़ी मुश्किल से गोपी की बहन संदीप, उसकी मां और कुलवंत कौर ने सिमर को संभाला और अंदर ले गए और कोमल भी डोली वाली कार में बैठकर चली गई।
काफी उदास था सिमर। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। सिमर को सोच-सोचकर कि कोमल क्या कर रही होगी, दुखी तो नहीं होगी, उसका दिल बैठता जा रहा था। दूसरा, उसे यह भी पता था कि मुहल्ला हो चुका है कोमल का, इसलिए कोमल की सुहागरात भी आज ही है। यह सोच उसके दिमाग पर बोझ सा पड़ रहा था। जैसा कि आजकल विवाह होते हैं, डोली के बाद सारे रिश्तेदार अपने-अपने घर चले गए क्योंकि सब अपनी-अपनी गाड़ियों से आए हुए थे। सिर्फ दो-तीन रिश्तेदार बचे थे। भूख खास नहीं थी, फिर भी धक्के से कुलवंत कौर ने सिमर को रोटी खिला दी। गोपी और सन्नी सबके बाद अपने घर गए। पूरे विवाह में सन्नी और गोपी ने बहुत मदद की, हर काम में आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभा रहे थे दोनों। किरणप्रीत सन्नी की बहन भी विवाह में आई थी। बहुत खुश हुई किरण सिमर के परिवार से मिलकर। हल्के-फुल्के पहले सिमर की फैमिली डर गई थी क्योंकि उस दिन जरूरी मीटिंग थी और उसे डीएसपी साहब के साथ बाहर जाना था, जिस वजह से वह विवाह अटेंड नहीं कर सकती थी, फिर भी सिमर के धक्के करने पर वह हाजिरी लगाने जरूर आई थी, भले ही वह अपनी वर्दी में अपने तीन अन्य सहयोगियों के साथ आई थी। सिमर की भी एक हिसाब से तोहर बन गई थी किरण के आने से। काफी बिजी होने के बावजूद किरण विवाह पर आई थी, यह बहुत बड़ी बात थी क्योंकि थोड़े ही समय में काफी बन गई थी सन्नी, सिमर और किरण की। सिमर भी बहुत इज्जत करता था किरण की।
उधर दूसरी तरफ जो हाल सिमर का था, वही हाल कोमल का भी था। अपने परिवार को छोड़कर दूसरे घर जाना, कुछ चल रहा था। दिमाग में एक डर, एक घबराहट थी। तनू और दिलप्रीत ने एक पल भी उसे अकेला नहीं छोड़ा। दिलप्रीत तो गांव में ही रुकना चाहती थी, पर कोमल उसे अपने साथ ले आई थी। तनू तो भाभी-भाभी करके नहीं थक रही थी। कोमल बेचारी ज्यादा समय चुपी लेकर सिर नीचे करके बैठी रही। जसप्रीत बहुत खुश थी और मिंटू भी। जसप्रीत खास ध्यान रख रही थी। आते ही कोमल को निम्बू पानी बना कर दे दिया ताकि बाहर का खाना खाकर पेट खराब हुआ हो तो ठीक हो जाए। फालतू की औरतों को तो उसने कमरे से भगा दिया था। कोमल का ख्याल तो उसे रखना ही था, आखिरकार कोमल उसकी यार की बहन थी। विवाह में अभी मौका नहीं मिला था, पर उसके साथ काफी बार चोद चुकी थी और सिमर को पता था कि उसका भी और उसके गुस्से का भी। वैसे भी कहते हैं औरत जिसके साथ ज्यादा बार चोद जाए, उसके साथ उसकी सांझ पड़ जाती है। यही जसप्रीत के साथ भी हुआ था। सिमर ने पूरी रूह से रगड़ी थी जसप्रीत को, बस उसी का बदला चुका रही थी। साथ ही कोमल को अच्छी तरह जानती थी जसप्रीत। समझदार, सयानी, सुंदर, सुघड़ लड़की थी कोमल।
खैर, कोई दस बजे तक घर में डीजे चलता रहा। जो खास रिश्तेदार थे, वे शराब वगैरह पीते, अपनी खुशी मनाते रहे। दिलप्रीत और तनवीर ने घर की दूसरी मंजिल पर अमन और कोमल का कमरा सजाया हुआ था। कोई ज्यादा फैंसी सजावट नहीं थी, साधारण थी पर हां, अच्छी थी। बिस्तर पर गुलाब के फूल, कमरे में बड़ा अच्छा छिड़का हुआ स्प्रे मूड बना रहा था। खासतौर पर लो बीम वाली लाइटें भी जल रही थीं। गर्मियां शुरू हो गई थीं इसलिए कमरे में एक छोटी फ्रिज भी थी जिसमें तनू ने फ्रूट्स, ठंडा पानी, बादाम, पिस्ते, काजू वाला दूध और बीयर की कुछ बोतलें लगा रखी थीं। कोमल और अमन का अब यही पक्का कमरा था, आज से ताकि दोनों की प्राइवेसी बनी रहे। अच्छा लगा कोमल को भी। यह कमरा खुला-दुल्ला था, अटैच बाथरूम था, कोने में कंप्यूटर लगा हुआ था, बाकी लैपटॉप तो कोमल के पास खुद का ही था। हर एक चीज का ख्याल रखा गया था। कोई साढ़े दस बजे तनू और जसप्रीत ने दोनों को कमरे में भेज दिया।
कोमल भले ही सब कुछ कर चुकी थी, पर फिर भी आज उसकी सुहागरात थी। बिस्तर की एक साइड पर वह अपनी उंगलियों से पैरों की लड़ाई सा लड़ रही थी। आज तो पहले किसी ने हाथ नहीं रखने दिया था, उसके शरीर पर सिर्फ सिमर का ही हक था, पर थोड़ी ही देर में कोई उसे नंगी करने वाला था। ऐसा ही हाल अमन का भी था। अमन तो कोमल से ज्यादा नर्वस घूम रहा था क्योंकि एक तो वह कोमल से बहुत प्यार करता था, ऊपर से उसके सारे दोस्त उल्टी-सीधी सलाह दे रहे थे जो उसे और परेशान कर रहे थे। ऊपर से वह कोमल से उम्र में छोटा भी था, चार साल से भी ज्यादा।
कमरे में जब अमन आया तो वह बैठी हुई थी, सिर पर चूनी ओढ़े हुए थी। कुंड तो नहीं खोली थी, पर हां, थोड़ी सी नीचे कर ली थी। यह सारा सेटअप उसी की सास ने किया था जो उसे कमरे तक छोड़कर गई थी।
कमरे में आते ही अमन ने दरवाजा लॉक कर दिया। खुद तो कपड़े बदल चुका था, पर कोमल ने अभी भी अपना भारी फेहरा वाला सूट पहन रखा था। आते ही वह कोमल के पैरों की ओर अपनी एक घुटने के बल लंबा पड़ा और कोमल की ओर एकटक लगाकर देखने लगा।
अमन के इस तरह देखते कुछ देर बाद कोमल बोल पड़ी, “क्या हुआ, इस तरह क्या देख रहे हो, कभी देखा नहीं मुझे...?”
अमन: देखा तो कई बार है, पर आज इस सूट में सच में बहुत प्यारी लग रही हो... बाहर सब कह रहे थे मम्मी को कि लड़की बहुत प्यारी और मासूम दिखने वाली ला कर दी है... हाहाहा... उन्हें क्या पता मैडम हमारी हिटलर है...
कोमल यह सुनकर हंस पड़ी और अपनी चूनी उठाते हुए आंखें दिखाते हुए बोली, “अच्छा मैं हिटलर हूं, मैं तुम्हें क्या कहूं तो खड़े हो जाओ, थोड़ी खबर लेनी पड़ेगी...”
अमन अपने कान पकड़ते हुए हंसते हुए, “सॉरी सॉरी मैडम, नाले हौली बोलो, लोगों ने कहना पहली ही दिन जोरू का गुलाम बन गया...”
कोमल: हे हे हे... अच्छा जी, वैसे आज बहुत बोल रहे हो, बड़े उल्टी हवा में उड़ रहे हो... कोमल भी अब थोड़ा रिलैक्स हो गई थी और माहौल में ढलने लगी थी...
अमन: ले उड़ना ही है, तुम्हारे सपने देखता हूं, प्रार्थना करता हूं कि तुम मिल जाओ और देखो आज हम एक साथ बैठे हैं...
कोमल: अच्छा जी, इतना प्यार करते हो...
अमन: ले कोई शक है अभी भी...
कोमल: नहीं नहीं, शक नहीं, उदासी पूछ रही हूं...
अमन: ठीक है, नाले तुम अभी भी ऐसे क्यों बैठी हो, जाओ कपड़े चेंज तो कर लो... इतने भारी कपड़ों में तुम्हें गर्मी लग रही होगी...
“क्या फायदा चेंज करने का, थोड़ी देर में तुम वह भी उतार ही दोगे...” कोमल के मुंह से अचानक यह निकल गया...
जब कोमल को एहसास हुआ कि वह क्या बोल गई तो वह शर्मा भी गई और अपने माथे पर हाथ मारती रह गई...
अमन: ओये होये होये... मैडम तो फॉर्म में है पूरी...
कोमल: सॉरी, मेरे मुंह से निकल गया, आई एम सॉरी...
अमन: ले ऐसा न करो, माफी न मांगो, गलत बात तो वैसे कोई कही नहीं तुमने... नाले हमारे बीच कोई बात छुपी होनी चाहिए नहीं, हमारे कमरे में सब कुछ खुलकर होना चाहिए, कोई सीक्रेट नहीं, कोई झूठ नहीं... क्योंकि झूठ आगे जाकर तंग करते हैं...
कोमल: हां हां ठीक ठीक है... कोमल अब अपने पुराने वाले रूप में आ गई थी... नाले इतनी सयानी बातें कहां से सीख लीं तुमने...
अमन: बस सीखनी पड़ती है न, न सीखा तो बापू ने घर से निकाल देना था...
कोमल: क्यों, क्या हुआ...
अमन: वह उसी दिन जब हमारी एंगेजमेंट थी और मम्मी गांव रुक गई थीं, तुम्हारे तो मैं गुस्सा आ गया था, पर बापू ने बड़ी बातें काढ़ीं और फिर समझाया कि शांत रहो...
कोमल: हे हे हे... सीधा कहो न कि जब मम्मी गांव में तुम्हारे साले सिमर के नीचे लंबी पड़ी रुक गई थीं...
अमन: हाये ओये रब्बा बचा ले मुझे बहू से...
कोमल भी खिलखिला कर हंस पड़ी...
इस तरह दोनों बातें करते रहे और कोमल भी बैठे-बैठे अपनी कानों की बालियां, गले की गोल्ड चेन वगैरह और जो गोल्ड की सारी ज्वेलरी थी, धीरे-धीरे उतारकर साइड में रख दी। बड़ा सुख का सांस आया उसे जब उसने यह सारा कुछ उतारकर साइड में रख दिया। लहंगा जो उसने पहना था, वह भी काफी भारी था। फिर बाथरूम में जाकर उसने अपना सारा मेकअप भी उतार दिया। ठंडे पानी से मुंह पर मारकर आंखों को शांति सी मिली...
अब जब कोमल ने चूनी और ज्वेलरी उतारकर साइड में रख दी और मेकअप उतार दिया तो वह और ज्यादा सुंदर लग रही थी। कोमल की दोनों भौहों और हाथों पर बड़ी सुंदर मेहंदी लगी हुई थी। डिजाइन बहुत सुंदर था, जिसने भी बनाया था, बड़ी मेहनत की थी। मेहंदी तो उसके हाथों के अलावा उसके पैरों और घुटनों तक भी थी, जो अभी अमन ने नहीं देखी थी। और उसकी मेहंदी लगाने वाली लड़की ने ही रात को उसके पूरे शरीर की वैक्सिंग भी कर दी थी, खासकर उसकी टांगों के बीच और अंडरआर्म्स पर।
आखिर अमन ने धीरे-धीरे अपना काम शुरू कर दिया। कोमल के पैरों की ओर तो पहले ही लंबा पड़ा हुआ था। कोमल की पिंडलियों को चूमता हुआ उसके लहंगे को ऊपर करने लगा... चूमते-चूमते ही उसके हाथ कोमल के लहंगे के अंदर गए और उसकी पैंटी में शैतानी करने लगे। कोमल भी आराम से पड़ी मजा ले रही थी। चूमते-चूमते अमन कोमल के ऊपर आ गया और उसके माथे को चूमते हुए उसके बाल खोल दिए जो बहुत घुटकर बंधे हुए थे। अपने मजों के साथ जब वह कोमल की ओर ध्यान दे रहा था... कोमल भी यह देखकर बहुत खुश थी कि इतना ख्याल रखने वाला मिल गया, वरना उसकी कई सहेलियों ने उसे बताया था कि सुहागरात के समय हर आदमी का यही मुख्य लक्ष्य होता है कि जल्दी-जल्दी मैं लड़की पर चढ़ जाऊं... पर अमन बड़े मजों से लगा हुआ था। जब उसने कोमल के लाल रंग की लिपस्टिक लगे होंठों को चूसना शुरू किया तो कोमल पूरी मस्त हो गई और उसने अमन को जकड़ लिया...
इस समय कोमल अपने भाई को भूल गई थी, बस अपने प्यार, अपने घर वाले के साथ लगी, पूरा साथ दे रही थी। जब उसके घर वाले ने इतना खुला दिल दिखाया था तो कोमल का भी फर्ज बनता था कि पूरा साथ दे और उसे प्यार करे... अमन सब कुछ भूलकर कोमल को चूमता ही जा रहा था, कभी उसके होंठ चूसने लग जाता था और कभी उसके गालों और गले पर चुमन लगाने लग जाता था... अभी तो काम शुरू हुआ था, पर उसका लिंग पजामा में पूरा खड़ा हो चुका था जो कोमल को महसूस हो रहा था।
चूमते-चूमते ही अमन ने कोमल का लहंगा और चोली, उसका ब्लाउज एक साथ उतारकर साइड में फेंक दिया... फूलों वाले बिस्तर पर लाल रंग की बहुत सेक्सी ब्रा और ट्रांसपेरेंट पैंटी में कोमल परी लग रही थी। ऊपर लगी मेहंदी उसके रूप को चार चांद लगा रही थी। कुछ देर तो अमन उसके रूप को इसी तरह देखता रहा। अपनी किस्मत पर उसे यकीन नहीं आ रहा था। एक बार फिर वह कोमल की टांगों की ओर हुआ, उसके गोरे चिट्टे गोल पिंडलियों की ओर हुआ, उसकी पैंटी को चूमने लगा। पैंटी और जीभ फेरते उसकी योनि तक जा रहा था। हद तो तब हो गई जब कोमल की टांगों में लंबा पड़ा ही उसने पैंटी ऊपर से ही योनि पर जीभ मारनी शुरू कर दी।
इतनी देर तक वह आराम से लगा था, पर कोमल को ब्रा-पैंटी में देखकर वह पागल सा हो गया। बिना पैंटी उतारे ही उसकी एक साइड को करके योनि चूसने लगा। कोमल की योनि तो पहले ही गीली हो गई थी। पैंटी साइड करके कोमल के पेट, उसके स्तनों को ब्रा से बाहर घुटता, योनि चूसने लगा। यह तो कोमल ही थी जिसने खुद ही अपना हाथ पीछे करके अपनी ब्रा खोल दी, अमन का काम आसान कर दिया। क्योंकि उसे तो होश नहीं था। काफी देर इस तरह योनि चुसवाने के बाद कोमल ने खुद ही चूतड़ उठाकर अपनी पैंटी की इलास्टिक में उंगलियां फंसाकर अपनी पैंटी नीचे कर दी। बाकी का काम अमन ने कर दिया। पैंटी उतरते ही कोमल ने अमन को अपनी छाती की ओर खींच लिया और अपने स्तन उसके मुंह में दे दिए। उसके गोरे गोल स्तन और ब्राउन निप्पल जो अब आधा इंच से भी ज्यादा लंबे हो गए थे, यह बताते थे कि लोहा गर्म होने लगा है।
अमन कभी एक स्तन को चूसता और कभी दूसरे को। इस तरह वे एक-दूसरे को एक घंटे से भी ज्यादा चूमते-चूसते रहे। वह कभी स्तन मुंह में ले लेता और कभी टपक कर कोमल की योनि की ओर हो जाता। इतने में कोमल का एक बार पानी निकल चुका था और दोबारा गर्म भी हो गई थी, पर अमन तो अभी भी कोमल के हर एक अंग को चूम-चूस रहा था। कोमल के रूप का गुलाम ही बन गया था वह। स्तन चूसता जब वह कोमल की गोरी योनि पर जीभ फेरता तो कोमल हंसने लग जाती।
आखिर कोई आधा घंटा और चूसने के बाद वह कोमल की टांगों के बीच आ गया। खुद तो उसने पूरी रूह से कोमल को चूसा था, पर उसने कोमल को अपना लिंग चुपाने के लिए नहीं कहा था। उसे नहीं पता था कोमल कैसे रिएक्ट करेगी। कोमल की नजरें भी अपने घर वाले के लिंग का साइज नाप रही थीं। जब अमन ने अभी-अभी अपने कपड़े उतारे तो कोमल की नजरें अमन के लिंग पर पड़ीं जो कोई सात इंच का था और मोटा भी काफी था। लिंग देखकर अब उसे अपने छोटे भाई की याद आ गई। यही उसके दिमाग में चलने लगा कि सिमर क्या कर रहा होगा। पर ज्यादा कुछ सोचने का मौका नहीं दिया अमन ने। कोमल की टांगें पकड़कर उसने एक झटका मारते अपना लिंग आधा अंदर धकेल दिया और उसके ऊपर लंबा पड़ा... लिंग के अचानक हमले से आह! मुंह से ही कोमल के मजा और दर्द में मिली हुई ऊंची चीख निकल गई...
घर के शांत माहौल में चीख सबने सुन ली... जसप्रीत जो रसोई में तनू के साथ कुछ कर रही थी, हंसने लग पड़ी...
तनू: हे हे हे... ले मम्मी गड़ तो तुम्हारे बेटे ने की...
योनि में खिंच पड़ते ही कोमल ने अमन को अपनी बाहों में घुट लिया। अमन पर रुका नहीं, वह तो अब पागल हो रहा था। अगले पांच मिनट अमन इसी पोज में सात-सात जोर से झटके मारता रहा। कोमल की बजती चीखें उसे और जोश दे रही थीं। कोमल पूरी गर्म हो गई थी, योनि से पानी निकल रहा था, लिंग अंदर-बाहर हो रहा था जिससे काफी ऊंची आवाज आ रही थी।
कुछ देर बाद अमन ने कोमल की टांगें अपने कंधों पर रखकर कोमल को चोदना शुरू कर दिया। योनि मारते-मारते भी वह कोमल की टांगों को चूम रहा था। पहली बार थी इसलिए ज्यादा देर नहीं टिक सका और कोई पांच मिनट और झटके मारने के बाद उसका पानी निकल गया। पिचकारियां बजते ही एक बार और कोमल का भी पानी निकलना शुरू हो गया। भले ही सिमर से कम समय लगा अमन को, पर अपने हिसाब से पूरी बस करवाई थी। कोमल की पूरी तसल्ली करवा दी थी उसने। और क्या चाहिए था कि उसने इतना प्यार दिया कोमल को कि कोमल के दिल में उसका पहला प्यार सिमर का एक बार भी ख्याल नहीं आने दिया।
कोमल आंखें बंद करके इसी तरह टांगें खोलकर लंबी पड़ी रही। योनि से दोनों का पानी निकलकर उसके पिंडलियों से होता हुआ बिस्तर की चादर पर निशान बना रहा था। एक अच्छा प्यार करने वाला था अमन, इस बात से पता लगता था योनि मारने के बाद साइड में गिरने की जगह वह कोमल को प्यार कर रहा था। कोमल के माथे को चूमकर उसने कोमल के चेहरे पर आए पसीने को अपने हाथों से साफ कर दिया और फिर पास ही पड़े नैपकिन से कोमल की योनि को भी साफ कर दिया...
अमन: थैंक्यू मेरी जान, मेरी लाइफ में आने के लिए... आई लव यू...
कोमल: आई लव यू टू सोहने... ऐसा कहते हुए उसने भी नैपकिन से अमन के मुरझा चुके लिंग को साफ करना शुरू कर दिया...
साफ करने के बाद दोनों नैपकिन फेंककर कोमल नंगी ही गांड हिलाती पेशाब करने चली गई। कोमल के थिरकते चूतड़ और इस तरह नंगी जाती देख अमन के लिंग में हरकत होने लगी। भले ही उसका पानी अभी निकला था, पर अमन का दिल और लिंग दोनों उछल गए। यह बात तो पक्की थी कि अमन काम से गया था, जो कोमल चाहेगी वही करेगा... कोमल की एक-एक अदा, उसका नखरा देखकर तो वह पागल होता जा रहा था।
कोमल जब हाथ-मुंह धोकर वापस आई तो अमन दूध के दो ग्लास तैयार करके बैठा था। दूध वगैरह पीने के बाद घंटा भर बातें करने के बाद दोनों फिर शुरू हो गए... दोनों ही कोई सुबह चार बजे सोए। चार बार अमन ने ठीक-ठाक कोमल की योनि मारी। किसी भी हिसाब से कम नहीं था। भले ही सेक्स में पूरा एक्सपर्ट नहीं था, पर उसने कम नहीं किया। कोमल को पूरी तरह थका दिया था उसने। क्योंकि नॉर्मली सिमर इतने राउंड नहीं मारता था रोज। चार बार चुदने के बाद कोमल की पिंडलियां पूरी तरह थक गई थीं। पहले राउंड के बाद अमन का समय भी ठीक हो गया था।
दूसरी तरफ सिमर आज अकेला रहना चाहता था, पर कुलवंत और सज्जन सिंह के कहने पर वह अपनी मां-पिता के साथ ही सोया। घर में काफी गेस्ट थे आज भी। सिमर बार-बार अपना फोन देख रहा था। एक उम्मीद थी कि दीदी कोई मैसेज या फोन करेगी, पर उसकी दीदी तो उधर चुद रही थी। बेगाने लड़के ने फोन देखने का समय ही नहीं दिया। यह देख सज्जन सिंह ने कुलवंत कौर को खुद ही कह दिया जब सिमर थोड़ी देर के लिए पानी पीने गया था, “यार इसे शांत कर, यह टेंशन लिए जा रहा है। इसे आदत तो अब पड़नी पड़ेगी। तुझे भी पता है, दोनों में बहुत प्यार है, पर अब कोमल शोर जा चुकी है।”
कुलवंत कौर: कोई बात नहीं, मैं करती हूं कुछ...
जब सिमर पानी पीकर वापस आया तो कुलवंत कौर अपने कपड़े उतारकर नंगी हो चुकी थी। सेक्स बड़ी कुट्टी चीज है। अपनी नंगी मां की ओर देखकर सिमर को जैसे सहारा मिल गया। जैसे किसी को अंधेरे से दीये की रोशनी मिल जाती है। वैसे ही सिमर का ध्यान एक तरफ हो गया। विवाह में काम करके वह पहले ही काफी थक गया था, पर फिर भी दो बार उसने मां के साथ प्यार किया। एक बार उसने अपनी मां की योनि मारी और एक बार गांड। दो बार अपनी मां को चोदने के बाद जब उसे नींद आ गई, उसे पता ही नहीं लगा। कुलवंत कौर भी खुश थी और उसकी बेटी कोमल भी।
अगले दिन कोमल और अमन दोनों को किसी ने नहीं जगाया। आप ही दोनों कोई नौ साढ़े नौ बजे तैयार होकर नीचे आ गए। पूरी रात चुदाई के बाद और इतनी कम नींद लेने के बाद भी कोमल का चेहरा चमक मार रहा था। मेकअप तो वह यूज नहीं करती थी। बस लिपस्टिक लगा लेती थी। शरीर की सारी थकावट दूर हो चुकी थी उसकी, इतनी कम नींद लेने के बाद भी। जब सीढ़ियां उतरकर नीचे आ रही थी तो उसके दिमाग में एक ख्याल आया, “हाये, अगर सिमर मेरे से स्क्वाट्स और और एक्सरसाइज न करवाता होता तो मेरी तो जान ही निकल जाती।”
इस ख्याल के आते ही माथे पर हाथ मारते हुए अपने पास बैठे अमन के कान में बोली, “मैं मम्मी से बात करके आती हूं।”
लगभग भागती हुई कमरे में जाती थी कि तभी उसे ख्याल आया कि कल का एक भी मैसेज उसने सिमर को नहीं किया… न ही उसका मैसेज आया था। नंबर डायल करते ही पहली ही घंटी पर सिमर ने फोन उठा लिया… कोमल अपनी गलती पर पर्दा डालते हुए सिमर को फटकारती हुई बोली, “ओए बंदर, कोई काम करवा दे घर का, फोन पर ही चढ़ा हुआ है… लगता है फिर पबजी खेल रहा होगा।” कोमल एक सांस में बोल गई।
सिमर: अच्छा जी ठीक है, रुको मैं मम्मी से बात करवाता हूं, यहीं बैठा है अभी… सिमर मजाक के मूड में नहीं था…
कोमल: मैं फोन तेरे पास लाई हूं मम्मी के पास नहीं… बस इतना ही प्यार था अपनी बहन से, एक दिन में भूल गया…
सिमर: अच्छा मैं भूल गया, तुम भूल गईं, एक भी मैसेज नहीं किया कल का, तुम्हें तो याद भी नहीं होगा कि तुम्हारा एक भाई भी है…
कोमल: तू ना अब बस कर, देख मैं अभी तैयार होकर आई हूं, ऐसी बातें ना कर नहीं तो मेरा रोना निकल जाएगा।
सिमर: सॉरी, गुस्सा आ गया था, नहीं करता और सुनाओ क्या हाल है… जीजा जी ने ज्यादा तंग तो नहीं किया…
कोमल: मैं ठीक हूं, जैसा संदीप जैसा भाई हो, उसे कोई तंग कैसे कर सकता है मेरे छोटे वीर… वैसे एक बात बता, तब तो बहुत गुस्सा आता था जब तू मुझे धक्के मारकर एक्सरसाइज करवाता था, पर सच में असली फायदा आज नजर आया, कोई थकावट नहीं हुई…
सिमर: चलो तुम्हें मेरी ट्रेनिंग का फायदा तो हो गया… गरीब की मेहनत का फल मिल गया…
कोमल: तू ना ये उजड़ अश्कों वाली बातें बंद कर दे, नहीं तो मैं तुझे अपने दाज में यहीं ले आऊंगी…
सिमर का भी मूड बात करके ठीक हो गया था। बहन की आवाज सुनकर वह फिर से उड़ने लगा था। कोई दो-तीन मिनट और बात करके उन्होंने फोन काट दिया। सिमर तो और खुश हो गया जब कोमल ने उसे बताया कि वह फेरा पड़ने के लिए दो दिन बाद आ ही रही है… कुलवंत कौर ने भी जब उसे हंसता देखा तो समझ गई कि कोमल से बात हो गई है।
जब फोन कट गया तो पीछे जसप्रीत उसकी सास खड़ी हंस रही थी…
कोमल ने फोन साइड में रखा और अपनी सास के पैरों में हाथ लगाया तो जसप्रीत ने उसे जकड़ लिया…
जसप्रीत: हो गई बात भाई से… क्या बात थी, बहुत डांट रही थी बेचारे को…
कोमल: बेचारा तो सिमर है, हे हे हे… मम्मी जी तुम भी उसका साथ देती हो, गलत बात है… मुझे कहता है फोन क्यों नहीं किया…
जसप्रीत: कोई नहीं, हो जाता है, पहली बार तो अकेला रहा, तेरा फर्ज था मैसेज करने का…
कोमल: हां यही गलती हो गई, पर तुम्हारे बेटे की भी गलती है, मुझे सांस ही नहीं लेने दिया, मैसेज कहां से करती…
जसप्रीत: ये तो तू देख बेटी, जब नया विवाह होता है तो यही होता है, रोज दिन-रात जब समय लगना, मेरे बेटे ने चढ़ जाना तेरे ऊपर, फिर भी तू बाकियों का ख्याल रख कि ऐसा न हो कि तेरा गुस्सा तेरा भाई हमारे मां-बेटी पर निकाल दे…
कोमल: हाये मम्मी जी तुम कैसे बोलती हो…
जसप्रीत: ले तो फिर क्या हुआ, इस घर में सबको पता है, तेरे डैडी जी को भी, अमन को भी कि मैं और तनू दोनों सिमर के नीचे लंबी पड़ी हुई थीं… नाले अपने भाई को भी बता दे जब दिल करे आ जाया कर… बस अमन से पूछ ले, उसे कोई समस्या तो नहीं तेरे और सिमर से…
कोमल: हां जी मम्मी जी, मैं ख्याल रखूंगी…
दोनों ही बातें करती बाहर आ गईं। दोपहर तो कुछ खास नहीं हुआ। गांव के कुछ लोग कोमल को देखने आए, माथा टेककर और शगुन देकर चले गए… जो कि आम होता ही है गांव में।
अमन तो बेसब्र हो रहा था। एक-दो बार जब कोमल कमरे में गई तो अमन पीछे-पीछे चल पड़ता। पर तनू उसके रास्ते में अड़चन बनी हुई थी। जानबूझकर उसने अपनी भाभी को अकेला नहीं छोड़ा था। तनू और कोमल भले ही लगभग एक ही उम्र की थीं, पर फिर भी तनू कोमल को ‘बहू’ कहकर ही इज्जत देती थी।
तनू: भाभी जी क्या बात है, एक रात में ही मेरे भाई को अपने पीछे लगा लिया। चुम्बक की तरह, जहां जाते हो तुम्हारे पीछे भागा आता।
कोमल: ये बात तो तू अपने भाई से पूछ, मैंने कुछ नहीं किया…
तनू: अच्छा फिर रात को मैच कैसा रहा, कितनी राउंड पड़ीं फिर…
कोमल: शर्म नहीं आती तुझे…
तनू: बताओ ना भाभी प्लीज…
कोमल: चार राउंड पड़ीं तेरे भाई ने… वैसे लगता है तू भी बड़े दिन हो गए मैच नहीं खेली, कहती है तो करा अपने भाई से बात, वो हमेशा तैयार रहता है मैच खेलने को, तू बस अपने पत्तन को तेल लगा के रख…
तनू: हे हे हे… जैसे तुम्हारा दिल करे…
कोमल को भी पता था कि जो लड़की एक बार सिमर के नीचे लंग गई, वह दोबारा उसके नीचे लंबी पड़ने से मना नहीं करती…
कोई दो-तीन बजे सब रोटी खाकर अपने-अपने कमरों में फिर चले गए… जैसा कि आम होता है, नए विवाह के चार दिन नवविवाहित जोड़े को और कुछ सूझता नहीं, यही हाल नई जोड़ी का भी था। कमरे में जाते ही फिर से अमन कोमल के ऊपर चढ़ गया… कोमल ने भी मना नहीं किया…
कोमल: मेरी जान, मैं तेरी ही हूं, कहीं नहीं भागी चली जाऊंगी, ऐसे ही मादा न हो जाओ…
अमन: तुम्हें देखकर कंट्रोल ही नहीं होता, जी करता है तुम्हें सीने से लगा कर रख दूं, तुम्हारे एक-एक अंग को चूमता-चूसता रहूं…
कोमल: अच्छा जी, इतना ज्यादा प्यार करके कहीं कमजोर न हो जाओ… लोग कहेंगे औरत ने अपना बंदा चूस लिया…
अमन: मैं ऐसा भी मादा नहीं होने वाला…
कोमल: अच्छा, सुबह मैं तुम्हें न उठाती तो तुम तो सारा दिन उठते ही नहीं…
अमन: ओके मेरी मां, तू बता क्या करूं, जो तू हुक्म करेगी वही करेगा तेरा ये गुलाम…
कोमल: मैं थोड़ी तुम्हें बताऊंगी कि करो… हां, काम से समय निकालकर एक्सरसाइज किया करो… ये नहीं कि डोल-शोल बनाओ, पर बंदा अंदर से फिट होना चाहिए…
अमन: हां ये बात तो तू सही कह रही है… बाकी की बातें अब बाद में, पहले इधर आ तू…
कोमल भी हंसती हुई अमन के ऊपर ढेर हो गई… आज उसने गुलाबी रंग का सलवार सूट पहना हुआ था और उसके नीचे मैचिंग करती गुलाबी ही रंग की ब्रा और पैंटी भी। विवाह से पहले उसकी मां ने काफी शॉपिंग करवाई थी। हर सूट के साथ मैचिंग करती ज्वेलरी, ब्रा, पैंटी, सैंडल सब अब उसके पास थे।
अगले ही पल कोमल के सारे कपड़े साइड में पड़े हुए थे। अगले दो घंटे अमन ने कोमल को बहुत चूसा-चूमा। उसके एक-एक अंग की खुशबू ले रहा था अमन। तब तो कोमल खिलखिला कर हंस पड़ती जब अमन कोमल की अंडरआर्म्स को चूमता या कोमल की गर्दन और उसके पेट पर जीभ फेरने लग जाता…
इस बार जब अमन कोमल को चूस रहा था तो कोमल ने खुद ही अमन को 69 पोज में आने के लिए कह दिया। अमन बहुत खुश था यह सुनकर। कोमल भी अपने तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती थी। अमन ने जैसे उसके साथ प्यार किया था, जैसे उसे अपना सब कुछ समझ बैठा था, वह भी अब अपना फर्ज निभाने के लिए तैयार थी। अमन और कोमल दोनों का शरीर एक सा था। कोमल का शरीर अपनी हाइट के हिसाब से बहुत अच्छा गोरा था और अमन लीन बॉडी का मालिक था, मसलुलर बॉडी नहीं थी उसकी।
जब अमन के कान में ये कोमल के शब्द पड़े, “अमन 69 पोज में आ जाओ, तुमने रात को भी एक बार भी नहीं कहा था।”
अमन: “मुझे डर था कि तू बुरा न मान जाए, इसलिए नहीं कहा था मैं…” ऐसा कहकर वह जल्दी से नीचे लंबा पड़ा गया और कोमल पहले तो बिस्तर पर नंगी ही अमन के दोनों तरफ टांगें करके खड़ी हो गई। कोमल का सेक्स में ये खुलापन अमन को बहुत एक्साइटेड करता था। ये नहीं कि कोमल सेक्स में इतनी खुली स्वभाव की थी और वह कोई घटिया लगती थी। कोमल के चेहरे पर एक मासूमियत, एक भोलापन था जो किसी के भी दिल में बस जाता था। अमन की हालत हर लड़का सोच ही सकता था कि जब सुंदर, सुघड़, ऊंची-लंबी जवान औरत नंगी तुम्हारे बिस्तर पर टांगें दोनों तरफ करके खड़ी हो तो लिंग की क्या हालत होगी। कोमल धीरे-धीरे अपने गोरे चूतड़ नीचे लाती हुई अमन की छाती पर बैठ गई। कोमल का भार अमन को बिल्कुल नहीं लग रहा था अब इस वक्त। कोमल बिना देर लगाए अमन के लिंग की तरफ झुक गई और लिंग को पकड़ लिया और हाथ से नापने लगी। जैसे अपने भाई के लिंग से तुलना कर रही हो, पर अमन तो जैसे बुत बना बैठा था और कोमल की गोरी गांड की तरफ ही देख रहा था।
कोमल ने लिंग पकड़कर उसके टोपे को चूमना शुरू कर दिया। जब उसे अमन के होंठ अपनी योनि और गांड पर महसूस न हुए तो वह आप ही थोड़ी पीछे खिसक गई और अपने चूतड़ अमन के मुंह पर रख दिए। अमन की ख्यालों की डोर इससे टूट गई और वह अपने मुंह पर रखी कोमल की गांड पर हाथ फेरता हुआ उसे चाटने लगा। कोमल आगे की तरफ झुकी हुई उसका लिंग का टोपा चूस रही थी। उसका ढंग ऐसा था कि अमन को लगा उसका पानी अभी निकल जाएगा। वह भी अपनी जीभ का कमाल दिखाने लगा और कुत्ते की तरह सारी जीभ बाहर निकालकर कोमल के दोनों चूतड़ चाटने लगा। वह कोमल की गांड को अपने मुंह पर घुट लेता, जब कोमल उसका लिंग अपने मुंह से बाहर निकाल अमन के अंडकोष मुंह में लेती और फिर बाहर निकाल अपनी जीभ अमन के लिंग की नसों पर फेरने लग जाती। कोमल बड़े ही ढंग से लगी हुई थी। अमन को कई बार ऐसा लगा कि उसका पानी निकल जाएगा, पर जैसे कोमल के पास कोई जादू की छड़ी थी, वह हर बार अमन के अंडकोष जोर से घुट देती जिससे अमन को हल्का सा दर्द होता और उसका पानी न निकलता।
आखिर ऐसे ही चूसन-चुमन के बाद इस बार कोमल आप ही अमन से उठ गई और अमन की तरफ देखने लगी जैसे बिना बोले पूछ रही हो कि कैसे करना है। अमन इशारा समझ बिस्तर से नीचे उतर गया। यह देख कोमल भी बिस्तर के किनारे पर आकर घोड़ी बन गई। जैसे कोमल घोड़ी बनी थी, वैसा तो अमन ने फिल्मों में ही देखा था। कोमल का सिर बिस्तर पर लगा हुआ था और चूतड़ पूरे ताकत से उठे हुए थे, टांगें कोमल ने काफी खोल रखी थीं। दोनों में सेक्स करते वक्त अभी कोई खास बात-चीत नहीं हो रही थी। बस दोनों की सिसकारियां निकल रही थीं।
अमन ने बिना देर किए अपना काफी सारा थूक निकालकर अपने लिंग पर मल लिया। कोमल की योनि तो पहले ही बहुत गीली थी। पर उसने सुना था कि थूक से ज्यादा मजा आता है, इसलिए वह आज यह ट्राई करना चाहता था। अपने सामने घोड़ी बनी अपनी औरत की पीछे होकर पहले उसने एक बार फिर उसकी गांड को चूमने लगा। पर इस बार जल्दी ही वह खड़ा होकर कोमल की कमर पकड़ अपनी लिंग उसकी गीली हुई योनि में धकेल दिया। लिंग घुसते ही कोमल की सिसकारी निकल गई और उसने अपना मुंह तकिए में घुट लिया। घर में सब थे, दूसरा वह दिन-दहाड़े अपनी सिसकारियों की आवाज बाहर नहीं देना चाहती थी। इस बार अमन ने उसे सांस भी नहीं लेने दिया और तेज-तेज झटके मारने शुरू कर दिए। क्योंकि कोमल ने उसके अंडकोष को घुटकर दबाकर इतना जोश दिला दिया था कि आग उसके अंदर-बाहर कर दी और उसका माल बाहर आने के लिए तरस रहा था, उसके अंडकोष माल से भरे पड़े थे और दर्द कर रहे थे, उसे बस आराम चाहिए था। इसलिए वह कोमल की कमर से पकड़कर खींच-खींचकर झटके मार रहा था।
कोमल की गांड से टकराते अमन के पिंडलियों का बड़ा अच्छा म्यूजिक चल रहा था कमरे में। यह सब बाहर खड़े मिंटू और जसप्रीत भी देख रहे थे। असल में घर कोई दोनों को मिलने आया था, जिद करता था ज्यादा ही तो जसप्रीत उन्हें लेने आई थी। जसप्रीत उनके कमरे के अंदर चली ही थी कि कोमल की सिसकारियां सुनकर रुक गई और अपनी बहू और बेटे का शो देखने लगी। उसके पीछे मिंटू आ गया था।
मिंटू: सच्ची कहूं आज दिल को बड़ा सुकून मिला यह शो देखकर, जिसने मेरी बेटी और औरत को चोदा, उसकी बहन आज मेरे बेटे के आगे घोड़ी बनी हुई है…
जसप्रीत यह सुन थोड़ा सा हंसी और मिंटू को कान से पकड़ खींचती हुई सीढ़ियों की तरफ नीचे ले जाने लगी।
मिंटू ने कान चुदाने की कोशिश की तो जसप्रीत ने कान छुड़ा दिया। जसप्रीत ने बड़ी जोर से मसला था।
जसप्रीत: लड़की की तरफ बुरी निगाह से देखना तो क्या, अगर उसके बारे में कुछ उल्टा सोचा या बोला तो उसका क्या नतीजा होगा, वह मैं तुम्हें रात को बताऊंगी।
मिंटू चुपचाप नीचे चल पड़ा। उसे पता था जसप्रीत को ज्यादा गुस्सा दिलाया तो आज तो जूती से ही मार पड़ेगी, अगर जसप्रीत ज्यादा खिज गई तो वह बेल्ट फाड़ लेती है और बाद में उसके पास कई दिन बैठना नहीं होता, हफ्ता भर। बात तो उसने नॉर्मल मूड में ही कही थी, पर जसप्रीत जब से सिमर के नीचे पड़ी थी, अपने घर वाले को मारने का कोई मौका जान नहीं देती थी। मिंटू की शराब घर लाते आना, बिना गले लड़ना-गल्ला काढ़ना सब बंद करवा दिया था जसप्रीत ने। जसप्रीत ने सीधा कहा हुआ था, या तो मुझे जान मार दे, नहीं तो अब मेरे साथ रहना है तो बंदे का बेटा बनकर रहना।
खैर उधर अमन घोड़ी बनी कोमल के पीछे पागल की तरह झटके मार रहा था। अमन तो हांफ रहा था, सांस सही हो रही थी, पर कोमल के तो मजा लग रहे थे। हालाँकि घोड़ी बनी वह थक गई थी क्योंकि पिछले काफी समय से एक ही पोज में अमन झटके मार रहा था। आखिर कोमल ने ही स्कीम लड़ाई और वह बिस्तर पर घोड़ी बनी-बनी ही आगे की तरफ गिर पड़ी और पेट भारी हो गई। थोड़ी देर के लिए अमन का लिंग योनि से निकल गया, पर जल्दी ही वह कोमल के ऊपर लेट गया और लिंग फिर से उसके अंदर धकेल दिया। आखिर इसी पोज में कोमल की योनि मारते-मारते अमन ने अपना सारा पानी कोमल की योनि में ही बहा दिया।
अमन पूरा थक चुका था, सांस उसके काबू में नहीं आ रही थी। वह काफी देर कोमल के ऊपर ही पड़ा रहा। कोमल ने ही उसे अपने ऊपर से हटा दिया। सेक्स के बाद तो औरत से भी आदमी का भार नहीं झेला जाता, यह बात तो सब जानते ही हैं।
कोमल अमन को इस तरह हांफता देख फिर तीखी करने लगी। उसने पहले अपने पेट और योनि साफ की और फिर अमन का लिंग साफ कर दिया। उसके बाद फ्रिज से जूस का ग्लास अमन को देते हुए बोली, “हाये मेरी मां, ये क्या पल्ले पड़ा, दूसरे दिन ही थक गया ये बंदा मेरा… ये लो जूस पियो, ताकत आएगी तुममें।”
जूस पीकर अमन को थोड़ी ताकत आई और वह कुछ भी नहीं बोला। वैसे बात तो कोमल की सही थी। जिम तो उसने आज तक जा नहीं देखा था। खैर कोमल ने भी ज्यादा तंग नहीं किया और दोनों नंगे ही घंटा भर सो गए। दोनों की नींद फोन की घंटी से टूटी, तनू ने ही हंसते हुए उन्हें जगाया था।
शाम की रोटी खाकर नौ बजे जब कमरे में चले ही तो तनू बोल पड़ी…
तनू: भाभी आज वॉक पर चलते हैं, खा-पीकर पच जाए…
कोमल भी अपनी ननद को मना कैसे कर सकती थी। अमन, कोमल और तनू दोनों सैर करने निकल पड़े। तनू तो दोनों में हड्डी ही बनी हुई थी। अपने भाई-भाभी की छेड़छाड़ देख तनू तो बस हंसी जा रही थी। सैर का बहाना था, यह जसप्रीत ने ही कहा था। वह मिंटू को सजा देना चाहती थी अकेले में। इसलिए उसने तनू को कहा था कि दोनों को सैर पर ले जाए…
पर इधर तो अमन को खाली पड़ी हुई थी, तनू ने हिंट दिया भी, पर अमन को तो कोमल के अलावा कुछ सूझ ही नहीं रहा था। कोई पांच मिनट भी नहीं सैर की थी कि अमन वापस चल पड़ा तनू और कोमल को लेकर। पांच मिनट में जब घर पहुंचे तो अंदर से आती आवाजें सुन अमन का माथा ठनका कि क्यों तनू रोक रही थी घर आने को।
अमन: दीदी आओ ऊपर ही चलते हैं, बातें करते हैं वहां…
कोमल ने अपना हंसा बड़ा अकेला कंट्रोल किया हुआ था। कमरे में आते ही पानी पीते-पीते कोमल का हंसा निकल गया। उसकी सास के कमरे से उसके ससुर की आती आवाजें, “ओवी आऊं आह्ह्ये प्लीज बस कर, कोई आ जाए… प्लीज आगे तो नहीं कहता कुछ…” ये ही शब्द तीनों ने सुने थे कि अमन ऊपर ले आया था।
कोमल: दीदी तुम तो सैर को ले गईं, मुझे तो मम्मी जी डैडी को सजा दे सकें… दीदी गलत बात है, तुम मुझे अपने घर का मेंबर नहीं समझतीं अभी तक, जो मुझे बाहर भेज रहे थे… जाओ मैं नहीं बोलती तुम्हारे साथ…
तनू: यार मेरे साथ क्यों नाराज होती हो, मैंने जो मम्मी ने कहा मैंने वही किया… अमन तू कह ना कुछ…
अमन: मुझे क्यों फंसाती पड़ी है बीच में… नाले मुझे क्या पता था डैडी आज फिर मम्मी के साथ लड़े हैं…
तनू: मुझे भी नहीं पता था आज का प्रोग्राम, हां वैसे शाम को कोई बात हुई थी… और सारे गेस्ट भी चले गए हैं, तुझे पता है। मुझे मम्मी ने रसोई में कहा था जब डिनर कर रहे थे।
कोमल: चलो कोई बात नहीं, ये कोई नई बात नहीं। गलती की होगी, सजा तो मिलनी ही थी। मेरी मम्मी भी ऐसी ही हैं। हमें दोनों बहन-भाइयों को डैडी जी बहुत प्यार करते हैं जब गलती करते हैं।
तनू: हाये भाभी सच्ची। तुम तो कितनी अच्छी हो, स्मार्ट हो, तुम्हें क्यों मारते थे मासी जी…
कोमल: हे हे हे… बड़ी शरारती थी मैं भी और तेरा यार सिमर भी। उसे तो अभी भी पड़ते हैं मेरे से और मम्मी से। थोड़े दिन पहले ही फिर खड़ी थी बाहर किसी से लड़कर आई थी।
तनू: भाभी इसके सामने ऐसा न बोलो… वह अमन की तरफ इशारा करती हुई बोली…
अमन: कोई नहीं दीदी, फिर क्या हुआ, मेरी बहन उसके पास, वो मेरे पास… हाहाहा
काफी देर ऐसे ही बातें करते रहे तीनों। कोई आधा घंटा और बातें करने के बाद तनू नीचे अपने कमरे में चली गई। सुबह उसने देखा था उसका सोहरा एक भी मिनट नहीं बैठा था। रोटी भी उसने रसोई में खड़े होकर खाई थी। कोमल हंसती हुई सोचने लगी कि उसके दोनों घर एक जैसे हैं।
खैर, अगले दो दिन अमन ने जब भी मौका मिला, दिन-रात राज करके कोमल को चोदा। कोई कसर नहीं छोड़ी थी उसने कोमल पर अपने प्यार की मोहर लगाने में। दो दिन बाद कोमल और अमन को लेने के लिए पहली बार फेरा पड़ने के लिए सिमर, कुलवंत कौर और सज्जन सिंह आ गए थे।
सिमर की खुशी तो दूर से ही देखने वाली थी। कोमल के चेहरे पर खुशी देखकर उसे बड़ा सुकून सा मिला। कोमल के चेहरे की लाली बताती थी कि उसका ससुर दिल लग गया है। अपने पीहर जाने के लिए वह भी बहुत उतावली थी। अपनी सास जसप्रीत से कहकर उसने तनू को भी अपने साथ ही ले लिया।
Guys bhaut bada update ho gaya tha isliye ek sath nahi diya
Super excellentUpdate 27
हिंदी में
रामनीक जब घर पहुंची तो उसकी मां रसोई में रोटी बना रही थी। सबसे पहले उसने एक बार अपना मुंह धोया, हल्का सा मेकअप कर लिया और गले तथा छाती पर लगे लवबाइट्स को भी मेकअप से ढक लिया। उसकी टांगें आज भी दर्द कर रही थीं, पर फिर भी वह जा कर अपनी मां की मदद करने लग गई। वहां दोनों बहनें शेली और शरण टीवी देख रही थीं, हमेशा की तरह। दोनों वैसे भी घर के कामों में ज्यादा मदद नहीं करती थीं। रामनीक भी उन्हें घर के काम के लिए कुछ नहीं कहती थी, पर हां, अगर पढ़ाई में कोई गड़बड़ होती तो वह अपना सारा गुस्सा दोनों की गांड पर निकाल देती थी। दोनों बहनें भी चुपचाप मार खा लेती थीं क्योंकि जब रामनीक मारती तो प्यार उससे भी ज्यादा करती थी। अगर किसी चीज की जरूरत होती, किसी भी नई ड्रेस की, तो रामनीक बिना कुछ पूछे अपने पैसे से भी पैसे निकाल कर दे देती थी।
रसोई में जाते ही परमजीत बोली, “आ गई तू... कोई गड़बड़ तो नहीं हुई...”
रामनीक: नहीं, जैसा तुमने कहा था, मैं सीधे अंदर चली गई बिना इधर-उधर देखे...
परमजीत: तो फिर मजा आया...
रामनीक: हां मजा तो आया, पर दर्द भी काफी हुआ, अभी भी पेट दर्द कर रहे हैं सच में...
परमजीत: कोई बात नहीं, सोने से पहले एक बार नहा ले, ठीक हो जाएगा... आज आराम कर ले, अगर करना हो तो सोना हमारे कमरे में...
रामनीक: वैसे दिल तो मेरा आराम करने का है, पर डैडी का मूड देख लो, वो नाराज न हो जाएं क्योंकि उन्होंने देखा होगा कि मैं दूसरी बार जब तैया जी लगे थे तो मेरी काफी चीखें निकल रही थीं। यह सुनकर डैडी क्या सोच रहे होंगे पता नहीं। बाकी तुम देख लेना, अगर मेरी जरूरत पड़ी तो मैं आ जाऊंगी...
परमजीत उसके माथे को चूमते हुए बोली, “वाकई मेरी बेटी सयानी हो गई है, सबका ख्याल रखती है।”
रामनीक की उम्मीद के उलट उसके पिता का मूड खराब नहीं था, न ही उन्होंने कोई तीखी बात की। रामनीक के जाने के बाद वह काफी देर तक सोचते रहे और यह बात भी उनके दिमाग में बैठ गई कि उनकी तीन-तीन बेटियों ने सबको चोदना है। वे किस्मत वाले हैं कि अपनी एक बेटी की सील तोड़ दी, वरना बेगाने लड़के ने पता नहीं क्या कर दिया होता। साथ ही उनका बेटा भी कोई बुरा नहीं है, उनकी बेटी को कोई नुकसान नहीं होगा उसके साथ।
इसी तरह शाम को मिंटू की घरवाली जसप्रीत अपने बेटे अमन और बेटी तनवीर के साथ बैठी सलाह कर रही थी और साथ ही अपने घर वाले का इंतजार भी कर रही थी। बेटे का रिश्ता तो कोमल के साथ पक्का कर चुकी थी, पर अपनी बेटी तनवीर कौर के लिए कई दिनों से रिश्ता ढूंढ रही थी। आज उसे अपनी बेटी के लिए एक रिश्ता आया था। उसी के गांव की रिश्ता करवाने वाली औरत ने बताया था। वह उनके गांव से थोड़ी दूर था। लड़के का पिता फौज से रिटायर्ड था और अब खेती करता था। उसका बड़ा बेटा और बड़ी बेटी का विवाह हो चुका था। एक और बेटी थी उनकी, पर उसकी टांगें खराब थीं इसलिए उसका कहीं विवाह नहीं हो रहा था। अब उसकी उम्र भी बढ़ती जा रही थी, इसलिए सबसे छोटे बेटे रिकी के लिए लड़की ढूंढनी शुरू कर दी थी। रिकी का बड़ा भाई कनाडा में रहता था, साल में दो-दो साल बाद ही आता था। उसकी जमीन ज्यादा थी, पर वह अपनी जिद करके कनाडा में रहता था। उसकी घरवाली कनाडा नहीं जाना चाहती थी पक्के तौर पर। वहां की जिंदगी देखकर आ चुकी थी। क्योंकि उसका घरवाला उसे काम नहीं करने देता था, सारा दिन घर में अकेली बैठी रहती थी, इसलिए उसने जाना बंद कर दिया था। क्योंकि रिकी का बड़ा भाई नवप्रीत बड़ा शक्की किस्म का आदमी था। और उसके उलट उसकी पत्नी बड़ी सौम्य थी। बस एक ही बात थी, वह बहुत बोलती थी, सीधे गाली देती थी, जहां बात करने लग जाती थी, अगले का सिर खा लेती थी। बाकी रिकी ने जमीन का काम संभाल रखा था और साथ ही शहर में कंप्यूटर की दुकान खोली हुई थी जहां सीसीटीवी कैमरा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान रखा हुआ था। दो लड़के उसके नीचे काम करते थे। कुल मिलाकर उसका काम अच्छा चल रहा था।
रिकी की बहन जिसकी टांगें खराब थीं, उसका नाम गुरप्रीत कौर था। पढ़ाई में बहुत होशियार थी। असल में वह ठीक थी, पर एक बार जब वह स्कूटी पर कॉलेज से आ रही थी तो एक शराबी ड्राइवर ने उसे टक्कर मार दी। एक्सीडेंट बहुत खतरनाक था। इसमें बेचारी गुरप्रीत के घुटनों के नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया। हल्की रोज-रोज की मालिश ने काफी असर किया, पर पूरी तरह ठीक नहीं हो सकी। तीस साल पूरे कर चुकी थी अब गुरप्रीत। उसका शरीर काफी गोरा था। 36-34-38 साइज का फिगर था। गांड थोड़ी ज्यादा भारी थी। ज्यादातर वह व्हीलचेयर पर रहती थी। पहले वह काफी उदास रहती थी, पर अब उसने अपने आप को समझा लिया था। दूसरा, अब परिवार वालों ने भी पूरा सपोर्ट कर दिया था क्योंकि किसी मादे आदमी के साथ अपनी बेटी नहीं तोड़ना चाहते थे। हां, रिकी की मां कई बार दुखी हो जाती थी कि जवान बेटी अपनी जिंदगी कैसे काटेगी। अपनी बेटी का जवान शरीर देखकर वह बहुत उदास हो जाती थी। क्योंकि जिस उम्र में लड़कियां विवाह कर बच्चे पैदा कर लेती हैं, उसी उम्र में उसकी बेटी घर बैठी हुई थी। चलो जो भी था, किस्मत थी उसकी।
उस शाम जब मिंटू घर आया तो जसप्रीत ने सारी बात उसे बता दी और लड़के की फोटो भी दिखा दी। तनू को तो उसने पहले ही पूछ लिया था, उसे लड़का ठीक लगा था। जब मां-बेटी राजी तो मिंटू को कभी समस्या नहीं होती। उसने भी हां कर दी। अगले दिन ही एक छोटे रेस्तरां में मिलकर चाय वगैरह का कार्यक्रम रख लिया और अंगूठी भी वहीं पहना दी क्योंकि दोनों परिवार बड़ा कार्यक्रम नहीं करना चाहते थे। विवाह के लिए भी उन्होंने यही सोचा कि इतना बड़ा विवाह करके फालतू पैसे खर्च करने से बेहतर है सारे पैसे बेटी के खाते में जमा करवा दो, जिसमें कोई फायदा तो हो, लोगों को खिलाकर क्या मिलना। यह बात वाकई सबको बहुत अच्छी लगी।
उस शाम उन्होंने सज्जन सिंह और कुलवंत कौर को भी फोन कर दिया कि हमने अपने हिसाब से बेटी के लिए लड़का ढूंढ लिया है और अब अमन और कोमल के विवाह की तारीख रख लो। अगले कुछ दिनों में कोमल के विवाह की तारीख भी तय कर दी गई। सिमर ऊपरी तौर पर खुश था। सबके साथ हंसता-खेलता रहता था, कोमल के साथ मजाक करता रहता था, पर वह बहुत उदास था। उसकी दोस्त, उसकी बहन, उसके रिश्तेदार, उसकी टीचर जो उसे पढ़ाती थी और छड़ी से मारती भी थी और सबसे बड़ी बात उसकी प्रेमिका, उसका प्यार, बेगाने घर जा रही थी।
खैर, विवाह बड़े साधारण ढंग से कर दिया गया। सिमर इकलौता लड़का था, इसलिए विवाह में पूरी मदद की, काफी काम करना पड़ा उसे। कई लड़कियों से बातें बन रही थीं, पर उसने किसी पर खास ध्यान नहीं दिया। उसका ख्याल तो सिर्फ अपनी कोमल का था जो उसे छोड़कर जा रही थी। जो फालतू पैसे शराब, महंगे होटल, लोगों को खिलाने में लगाना था, वही पैसे सज्जन सिंह ने अपनी बेटी के खाते में जमा करवा दिए। डोली तोड़ने लगे तो जिस सिमर ने इतने दिनों से अपने आप को कंट्रोल करके रखा था, वह आखिर अपना कंट्रोल खो ही बैठा और फूट-फूटकर रो पड़ा। कोमल भी बहुत रोई, उसके गले लगकर। यह वही बहन थी जो उसे खिलाती-पिलाती थी। जब बेगाने उसके मां को चोदने आते थे और वह डर जाता था तो कोमल उसे अपने गले से लगा कर सुलाती थी, छुप-छुपकर अपनी मां के कमरे में देखना। कोमल से कुछ भी छुपा नहीं था। बड़ी मुश्किल से गोपी की बहन संदीप, उसकी मां और कुलवंत कौर ने सिमर को संभाला और अंदर ले गए और कोमल भी डोली वाली कार में बैठकर चली गई।
काफी उदास था सिमर। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। सिमर को सोच-सोचकर कि कोमल क्या कर रही होगी, दुखी तो नहीं होगी, उसका दिल बैठता जा रहा था। दूसरा, उसे यह भी पता था कि मुहल्ला हो चुका है कोमल का, इसलिए कोमल की सुहागरात भी आज ही है। यह सोच उसके दिमाग पर बोझ सा पड़ रहा था। जैसा कि आजकल विवाह होते हैं, डोली के बाद सारे रिश्तेदार अपने-अपने घर चले गए क्योंकि सब अपनी-अपनी गाड़ियों से आए हुए थे। सिर्फ दो-तीन रिश्तेदार बचे थे। भूख खास नहीं थी, फिर भी धक्के से कुलवंत कौर ने सिमर को रोटी खिला दी। गोपी और सन्नी सबके बाद अपने घर गए। पूरे विवाह में सन्नी और गोपी ने बहुत मदद की, हर काम में आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभा रहे थे दोनों। किरणप्रीत सन्नी की बहन भी विवाह में आई थी। बहुत खुश हुई किरण सिमर के परिवार से मिलकर। हल्के-फुल्के पहले सिमर की फैमिली डर गई थी क्योंकि उस दिन जरूरी मीटिंग थी और उसे डीएसपी साहब के साथ बाहर जाना था, जिस वजह से वह विवाह अटेंड नहीं कर सकती थी, फिर भी सिमर के धक्के करने पर वह हाजिरी लगाने जरूर आई थी, भले ही वह अपनी वर्दी में अपने तीन अन्य सहयोगियों के साथ आई थी। सिमर की भी एक हिसाब से तोहर बन गई थी किरण के आने से। काफी बिजी होने के बावजूद किरण विवाह पर आई थी, यह बहुत बड़ी बात थी क्योंकि थोड़े ही समय में काफी बन गई थी सन्नी, सिमर और किरण की। सिमर भी बहुत इज्जत करता था किरण की।
उधर दूसरी तरफ जो हाल सिमर का था, वही हाल कोमल का भी था। अपने परिवार को छोड़कर दूसरे घर जाना, कुछ चल रहा था। दिमाग में एक डर, एक घबराहट थी। तनू और दिलप्रीत ने एक पल भी उसे अकेला नहीं छोड़ा। दिलप्रीत तो गांव में ही रुकना चाहती थी, पर कोमल उसे अपने साथ ले आई थी। तनू तो भाभी-भाभी करके नहीं थक रही थी। कोमल बेचारी ज्यादा समय चुपी लेकर सिर नीचे करके बैठी रही। जसप्रीत बहुत खुश थी और मिंटू भी। जसप्रीत खास ध्यान रख रही थी। आते ही कोमल को निम्बू पानी बना कर दे दिया ताकि बाहर का खाना खाकर पेट खराब हुआ हो तो ठीक हो जाए। फालतू की औरतों को तो उसने कमरे से भगा दिया था। कोमल का ख्याल तो उसे रखना ही था, आखिरकार कोमल उसकी यार की बहन थी। विवाह में अभी मौका नहीं मिला था, पर उसके साथ काफी बार चोद चुकी थी और सिमर को पता था कि उसका भी और उसके गुस्से का भी। वैसे भी कहते हैं औरत जिसके साथ ज्यादा बार चोद जाए, उसके साथ उसकी सांझ पड़ जाती है। यही जसप्रीत के साथ भी हुआ था। सिमर ने पूरी रूह से रगड़ी थी जसप्रीत को, बस उसी का बदला चुका रही थी। साथ ही कोमल को अच्छी तरह जानती थी जसप्रीत। समझदार, सयानी, सुंदर, सुघड़ लड़की थी कोमल।
खैर, कोई दस बजे तक घर में डीजे चलता रहा। जो खास रिश्तेदार थे, वे शराब वगैरह पीते, अपनी खुशी मनाते रहे। दिलप्रीत और तनवीर ने घर की दूसरी मंजिल पर अमन और कोमल का कमरा सजाया हुआ था। कोई ज्यादा फैंसी सजावट नहीं थी, साधारण थी पर हां, अच्छी थी। बिस्तर पर गुलाब के फूल, कमरे में बड़ा अच्छा छिड़का हुआ स्प्रे मूड बना रहा था। खासतौर पर लो बीम वाली लाइटें भी जल रही थीं। गर्मियां शुरू हो गई थीं इसलिए कमरे में एक छोटी फ्रिज भी थी जिसमें तनू ने फ्रूट्स, ठंडा पानी, बादाम, पिस्ते, काजू वाला दूध और बीयर की कुछ बोतलें लगा रखी थीं। कोमल और अमन का अब यही पक्का कमरा था, आज से ताकि दोनों की प्राइवेसी बनी रहे। अच्छा लगा कोमल को भी। यह कमरा खुला-दुल्ला था, अटैच बाथरूम था, कोने में कंप्यूटर लगा हुआ था, बाकी लैपटॉप तो कोमल के पास खुद का ही था। हर एक चीज का ख्याल रखा गया था। कोई साढ़े दस बजे तनू और जसप्रीत ने दोनों को कमरे में भेज दिया।
कोमल भले ही सब कुछ कर चुकी थी, पर फिर भी आज उसकी सुहागरात थी। बिस्तर की एक साइड पर वह अपनी उंगलियों से पैरों की लड़ाई सा लड़ रही थी। आज तो पहले किसी ने हाथ नहीं रखने दिया था, उसके शरीर पर सिर्फ सिमर का ही हक था, पर थोड़ी ही देर में कोई उसे नंगी करने वाला था। ऐसा ही हाल अमन का भी था। अमन तो कोमल से ज्यादा नर्वस घूम रहा था क्योंकि एक तो वह कोमल से बहुत प्यार करता था, ऊपर से उसके सारे दोस्त उल्टी-सीधी सलाह दे रहे थे जो उसे और परेशान कर रहे थे। ऊपर से वह कोमल से उम्र में छोटा भी था, चार साल से भी ज्यादा।
कमरे में जब अमन आया तो वह बैठी हुई थी, सिर पर चूनी ओढ़े हुए थी। कुंड तो नहीं खोली थी, पर हां, थोड़ी सी नीचे कर ली थी। यह सारा सेटअप उसी की सास ने किया था जो उसे कमरे तक छोड़कर गई थी।
कमरे में आते ही अमन ने दरवाजा लॉक कर दिया। खुद तो कपड़े बदल चुका था, पर कोमल ने अभी भी अपना भारी फेहरा वाला सूट पहन रखा था। आते ही वह कोमल के पैरों की ओर अपनी एक घुटने के बल लंबा पड़ा और कोमल की ओर एकटक लगाकर देखने लगा।
अमन के इस तरह देखते कुछ देर बाद कोमल बोल पड़ी, “क्या हुआ, इस तरह क्या देख रहे हो, कभी देखा नहीं मुझे...?”
अमन: देखा तो कई बार है, पर आज इस सूट में सच में बहुत प्यारी लग रही हो... बाहर सब कह रहे थे मम्मी को कि लड़की बहुत प्यारी और मासूम दिखने वाली ला कर दी है... हाहाहा... उन्हें क्या पता मैडम हमारी हिटलर है...
कोमल यह सुनकर हंस पड़ी और अपनी चूनी उठाते हुए आंखें दिखाते हुए बोली, “अच्छा मैं हिटलर हूं, मैं तुम्हें क्या कहूं तो खड़े हो जाओ, थोड़ी खबर लेनी पड़ेगी...”
अमन अपने कान पकड़ते हुए हंसते हुए, “सॉरी सॉरी मैडम, नाले हौली बोलो, लोगों ने कहना पहली ही दिन जोरू का गुलाम बन गया...”
कोमल: हे हे हे... अच्छा जी, वैसे आज बहुत बोल रहे हो, बड़े उल्टी हवा में उड़ रहे हो... कोमल भी अब थोड़ा रिलैक्स हो गई थी और माहौल में ढलने लगी थी...
अमन: ले उड़ना ही है, तुम्हारे सपने देखता हूं, प्रार्थना करता हूं कि तुम मिल जाओ और देखो आज हम एक साथ बैठे हैं...
कोमल: अच्छा जी, इतना प्यार करते हो...
अमन: ले कोई शक है अभी भी...
कोमल: नहीं नहीं, शक नहीं, उदासी पूछ रही हूं...
अमन: ठीक है, नाले तुम अभी भी ऐसे क्यों बैठी हो, जाओ कपड़े चेंज तो कर लो... इतने भारी कपड़ों में तुम्हें गर्मी लग रही होगी...
“क्या फायदा चेंज करने का, थोड़ी देर में तुम वह भी उतार ही दोगे...” कोमल के मुंह से अचानक यह निकल गया...
जब कोमल को एहसास हुआ कि वह क्या बोल गई तो वह शर्मा भी गई और अपने माथे पर हाथ मारती रह गई...
अमन: ओये होये होये... मैडम तो फॉर्म में है पूरी...
कोमल: सॉरी, मेरे मुंह से निकल गया, आई एम सॉरी...
अमन: ले ऐसा न करो, माफी न मांगो, गलत बात तो वैसे कोई कही नहीं तुमने... नाले हमारे बीच कोई बात छुपी होनी चाहिए नहीं, हमारे कमरे में सब कुछ खुलकर होना चाहिए, कोई सीक्रेट नहीं, कोई झूठ नहीं... क्योंकि झूठ आगे जाकर तंग करते हैं...
कोमल: हां हां ठीक ठीक है... कोमल अब अपने पुराने वाले रूप में आ गई थी... नाले इतनी सयानी बातें कहां से सीख लीं तुमने...
अमन: बस सीखनी पड़ती है न, न सीखा तो बापू ने घर से निकाल देना था...
कोमल: क्यों, क्या हुआ...
अमन: वह उसी दिन जब हमारी एंगेजमेंट थी और मम्मी गांव रुक गई थीं, तुम्हारे तो मैं गुस्सा आ गया था, पर बापू ने बड़ी बातें काढ़ीं और फिर समझाया कि शांत रहो...
कोमल: हे हे हे... सीधा कहो न कि जब मम्मी गांव में तुम्हारे साले सिमर के नीचे लंबी पड़ी रुक गई थीं...
अमन: हाये ओये रब्बा बचा ले मुझे बहू से...
कोमल भी खिलखिला कर हंस पड़ी...
इस तरह दोनों बातें करते रहे और कोमल भी बैठे-बैठे अपनी कानों की बालियां, गले की गोल्ड चेन वगैरह और जो गोल्ड की सारी ज्वेलरी थी, धीरे-धीरे उतारकर साइड में रख दी। बड़ा सुख का सांस आया उसे जब उसने यह सारा कुछ उतारकर साइड में रख दिया। लहंगा जो उसने पहना था, वह भी काफी भारी था। फिर बाथरूम में जाकर उसने अपना सारा मेकअप भी उतार दिया। ठंडे पानी से मुंह पर मारकर आंखों को शांति सी मिली...
अब जब कोमल ने चूनी और ज्वेलरी उतारकर साइड में रख दी और मेकअप उतार दिया तो वह और ज्यादा सुंदर लग रही थी। कोमल की दोनों भौहों और हाथों पर बड़ी सुंदर मेहंदी लगी हुई थी। डिजाइन बहुत सुंदर था, जिसने भी बनाया था, बड़ी मेहनत की थी। मेहंदी तो उसके हाथों के अलावा उसके पैरों और घुटनों तक भी थी, जो अभी अमन ने नहीं देखी थी। और उसकी मेहंदी लगाने वाली लड़की ने ही रात को उसके पूरे शरीर की वैक्सिंग भी कर दी थी, खासकर उसकी टांगों के बीच और अंडरआर्म्स पर।
आखिर अमन ने धीरे-धीरे अपना काम शुरू कर दिया। कोमल के पैरों की ओर तो पहले ही लंबा पड़ा हुआ था। कोमल की पिंडलियों को चूमता हुआ उसके लहंगे को ऊपर करने लगा... चूमते-चूमते ही उसके हाथ कोमल के लहंगे के अंदर गए और उसकी पैंटी में शैतानी करने लगे। कोमल भी आराम से पड़ी मजा ले रही थी। चूमते-चूमते अमन कोमल के ऊपर आ गया और उसके माथे को चूमते हुए उसके बाल खोल दिए जो बहुत घुटकर बंधे हुए थे। अपने मजों के साथ जब वह कोमल की ओर ध्यान दे रहा था... कोमल भी यह देखकर बहुत खुश थी कि इतना ख्याल रखने वाला मिल गया, वरना उसकी कई सहेलियों ने उसे बताया था कि सुहागरात के समय हर आदमी का यही मुख्य लक्ष्य होता है कि जल्दी-जल्दी मैं लड़की पर चढ़ जाऊं... पर अमन बड़े मजों से लगा हुआ था। जब उसने कोमल के लाल रंग की लिपस्टिक लगे होंठों को चूसना शुरू किया तो कोमल पूरी मस्त हो गई और उसने अमन को जकड़ लिया...
इस समय कोमल अपने भाई को भूल गई थी, बस अपने प्यार, अपने घर वाले के साथ लगी, पूरा साथ दे रही थी। जब उसके घर वाले ने इतना खुला दिल दिखाया था तो कोमल का भी फर्ज बनता था कि पूरा साथ दे और उसे प्यार करे... अमन सब कुछ भूलकर कोमल को चूमता ही जा रहा था, कभी उसके होंठ चूसने लग जाता था और कभी उसके गालों और गले पर चुमन लगाने लग जाता था... अभी तो काम शुरू हुआ था, पर उसका लिंग पजामा में पूरा खड़ा हो चुका था जो कोमल को महसूस हो रहा था।
चूमते-चूमते ही अमन ने कोमल का लहंगा और चोली, उसका ब्लाउज एक साथ उतारकर साइड में फेंक दिया... फूलों वाले बिस्तर पर लाल रंग की बहुत सेक्सी ब्रा और ट्रांसपेरेंट पैंटी में कोमल परी लग रही थी। ऊपर लगी मेहंदी उसके रूप को चार चांद लगा रही थी। कुछ देर तो अमन उसके रूप को इसी तरह देखता रहा। अपनी किस्मत पर उसे यकीन नहीं आ रहा था। एक बार फिर वह कोमल की टांगों की ओर हुआ, उसके गोरे चिट्टे गोल पिंडलियों की ओर हुआ, उसकी पैंटी को चूमने लगा। पैंटी और जीभ फेरते उसकी योनि तक जा रहा था। हद तो तब हो गई जब कोमल की टांगों में लंबा पड़ा ही उसने पैंटी ऊपर से ही योनि पर जीभ मारनी शुरू कर दी।
इतनी देर तक वह आराम से लगा था, पर कोमल को ब्रा-पैंटी में देखकर वह पागल सा हो गया। बिना पैंटी उतारे ही उसकी एक साइड को करके योनि चूसने लगा। कोमल की योनि तो पहले ही गीली हो गई थी। पैंटी साइड करके कोमल के पेट, उसके स्तनों को ब्रा से बाहर घुटता, योनि चूसने लगा। यह तो कोमल ही थी जिसने खुद ही अपना हाथ पीछे करके अपनी ब्रा खोल दी, अमन का काम आसान कर दिया। क्योंकि उसे तो होश नहीं था। काफी देर इस तरह योनि चुसवाने के बाद कोमल ने खुद ही चूतड़ उठाकर अपनी पैंटी की इलास्टिक में उंगलियां फंसाकर अपनी पैंटी नीचे कर दी। बाकी का काम अमन ने कर दिया। पैंटी उतरते ही कोमल ने अमन को अपनी छाती की ओर खींच लिया और अपने स्तन उसके मुंह में दे दिए। उसके गोरे गोल स्तन और ब्राउन निप्पल जो अब आधा इंच से भी ज्यादा लंबे हो गए थे, यह बताते थे कि लोहा गर्म होने लगा है।
अमन कभी एक स्तन को चूसता और कभी दूसरे को। इस तरह वे एक-दूसरे को एक घंटे से भी ज्यादा चूमते-चूसते रहे। वह कभी स्तन मुंह में ले लेता और कभी टपक कर कोमल की योनि की ओर हो जाता। इतने में कोमल का एक बार पानी निकल चुका था और दोबारा गर्म भी हो गई थी, पर अमन तो अभी भी कोमल के हर एक अंग को चूम-चूस रहा था। कोमल के रूप का गुलाम ही बन गया था वह। स्तन चूसता जब वह कोमल की गोरी योनि पर जीभ फेरता तो कोमल हंसने लग जाती।
आखिर कोई आधा घंटा और चूसने के बाद वह कोमल की टांगों के बीच आ गया। खुद तो उसने पूरी रूह से कोमल को चूसा था, पर उसने कोमल को अपना लिंग चुपाने के लिए नहीं कहा था। उसे नहीं पता था कोमल कैसे रिएक्ट करेगी। कोमल की नजरें भी अपने घर वाले के लिंग का साइज नाप रही थीं। जब अमन ने अभी-अभी अपने कपड़े उतारे तो कोमल की नजरें अमन के लिंग पर पड़ीं जो कोई सात इंच का था और मोटा भी काफी था। लिंग देखकर अब उसे अपने छोटे भाई की याद आ गई। यही उसके दिमाग में चलने लगा कि सिमर क्या कर रहा होगा। पर ज्यादा कुछ सोचने का मौका नहीं दिया अमन ने। कोमल की टांगें पकड़कर उसने एक झटका मारते अपना लिंग आधा अंदर धकेल दिया और उसके ऊपर लंबा पड़ा... लिंग के अचानक हमले से आह! मुंह से ही कोमल के मजा और दर्द में मिली हुई ऊंची चीख निकल गई...
घर के शांत माहौल में चीख सबने सुन ली... जसप्रीत जो रसोई में तनू के साथ कुछ कर रही थी, हंसने लग पड़ी...
तनू: हे हे हे... ले मम्मी गड़ तो तुम्हारे बेटे ने की...
योनि में खिंच पड़ते ही कोमल ने अमन को अपनी बाहों में घुट लिया। अमन पर रुका नहीं, वह तो अब पागल हो रहा था। अगले पांच मिनट अमन इसी पोज में सात-सात जोर से झटके मारता रहा। कोमल की बजती चीखें उसे और जोश दे रही थीं। कोमल पूरी गर्म हो गई थी, योनि से पानी निकल रहा था, लिंग अंदर-बाहर हो रहा था जिससे काफी ऊंची आवाज आ रही थी।
कुछ देर बाद अमन ने कोमल की टांगें अपने कंधों पर रखकर कोमल को चोदना शुरू कर दिया। योनि मारते-मारते भी वह कोमल की टांगों को चूम रहा था। पहली बार थी इसलिए ज्यादा देर नहीं टिक सका और कोई पांच मिनट और झटके मारने के बाद उसका पानी निकल गया। पिचकारियां बजते ही एक बार और कोमल का भी पानी निकलना शुरू हो गया। भले ही सिमर से कम समय लगा अमन को, पर अपने हिसाब से पूरी बस करवाई थी। कोमल की पूरी तसल्ली करवा दी थी उसने। और क्या चाहिए था कि उसने इतना प्यार दिया कोमल को कि कोमल के दिल में उसका पहला प्यार सिमर का एक बार भी ख्याल नहीं आने दिया।
कोमल आंखें बंद करके इसी तरह टांगें खोलकर लंबी पड़ी रही। योनि से दोनों का पानी निकलकर उसके पिंडलियों से होता हुआ बिस्तर की चादर पर निशान बना रहा था। एक अच्छा प्यार करने वाला था अमन, इस बात से पता लगता था योनि मारने के बाद साइड में गिरने की जगह वह कोमल को प्यार कर रहा था। कोमल के माथे को चूमकर उसने कोमल के चेहरे पर आए पसीने को अपने हाथों से साफ कर दिया और फिर पास ही पड़े नैपकिन से कोमल की योनि को भी साफ कर दिया...
अमन: थैंक्यू मेरी जान, मेरी लाइफ में आने के लिए... आई लव यू...
कोमल: आई लव यू टू सोहने... ऐसा कहते हुए उसने भी नैपकिन से अमन के मुरझा चुके लिंग को साफ करना शुरू कर दिया...
साफ करने के बाद दोनों नैपकिन फेंककर कोमल नंगी ही गांड हिलाती पेशाब करने चली गई। कोमल के थिरकते चूतड़ और इस तरह नंगी जाती देख अमन के लिंग में हरकत होने लगी। भले ही उसका पानी अभी निकला था, पर अमन का दिल और लिंग दोनों उछल गए। यह बात तो पक्की थी कि अमन काम से गया था, जो कोमल चाहेगी वही करेगा... कोमल की एक-एक अदा, उसका नखरा देखकर तो वह पागल होता जा रहा था।
कोमल जब हाथ-मुंह धोकर वापस आई तो अमन दूध के दो ग्लास तैयार करके बैठा था। दूध वगैरह पीने के बाद घंटा भर बातें करने के बाद दोनों फिर शुरू हो गए... दोनों ही कोई सुबह चार बजे सोए। चार बार अमन ने ठीक-ठाक कोमल की योनि मारी। किसी भी हिसाब से कम नहीं था। भले ही सेक्स में पूरा एक्सपर्ट नहीं था, पर उसने कम नहीं किया। कोमल को पूरी तरह थका दिया था उसने। क्योंकि नॉर्मली सिमर इतने राउंड नहीं मारता था रोज। चार बार चुदने के बाद कोमल की पिंडलियां पूरी तरह थक गई थीं। पहले राउंड के बाद अमन का समय भी ठीक हो गया था।
दूसरी तरफ सिमर आज अकेला रहना चाहता था, पर कुलवंत और सज्जन सिंह के कहने पर वह अपनी मां-पिता के साथ ही सोया। घर में काफी गेस्ट थे आज भी। सिमर बार-बार अपना फोन देख रहा था। एक उम्मीद थी कि दीदी कोई मैसेज या फोन करेगी, पर उसकी दीदी तो उधर चुद रही थी। बेगाने लड़के ने फोन देखने का समय ही नहीं दिया। यह देख सज्जन सिंह ने कुलवंत कौर को खुद ही कह दिया जब सिमर थोड़ी देर के लिए पानी पीने गया था, “यार इसे शांत कर, यह टेंशन लिए जा रहा है। इसे आदत तो अब पड़नी पड़ेगी। तुझे भी पता है, दोनों में बहुत प्यार है, पर अब कोमल शोर जा चुकी है।”
कुलवंत कौर: कोई बात नहीं, मैं करती हूं कुछ...
जब सिमर पानी पीकर वापस आया तो कुलवंत कौर अपने कपड़े उतारकर नंगी हो चुकी थी। सेक्स बड़ी कुट्टी चीज है। अपनी नंगी मां की ओर देखकर सिमर को जैसे सहारा मिल गया। जैसे किसी को अंधेरे से दीये की रोशनी मिल जाती है। वैसे ही सिमर का ध्यान एक तरफ हो गया। विवाह में काम करके वह पहले ही काफी थक गया था, पर फिर भी दो बार उसने मां के साथ प्यार किया। एक बार उसने अपनी मां की योनि मारी और एक बार गांड। दो बार अपनी मां को चोदने के बाद जब उसे नींद आ गई, उसे पता ही नहीं लगा। कुलवंत कौर भी खुश थी और उसकी बेटी कोमल भी।
अगले दिन कोमल और अमन दोनों को किसी ने नहीं जगाया। आप ही दोनों कोई नौ साढ़े नौ बजे तैयार होकर नीचे आ गए। पूरी रात चुदाई के बाद और इतनी कम नींद लेने के बाद भी कोमल का चेहरा चमक मार रहा था। मेकअप तो वह यूज नहीं करती थी। बस लिपस्टिक लगा लेती थी। शरीर की सारी थकावट दूर हो चुकी थी उसकी, इतनी कम नींद लेने के बाद भी। जब सीढ़ियां उतरकर नीचे आ रही थी तो उसके दिमाग में एक ख्याल आया, “हाये, अगर सिमर मेरे से स्क्वाट्स और और एक्सरसाइज न करवाता होता तो मेरी तो जान ही निकल जाती।”
इस ख्याल के आते ही माथे पर हाथ मारते हुए अपने पास बैठे अमन के कान में बोली, “मैं मम्मी से बात करके आती हूं।”
लगभग भागती हुई कमरे में जाती थी कि तभी उसे ख्याल आया कि कल का एक भी मैसेज उसने सिमर को नहीं किया… न ही उसका मैसेज आया था। नंबर डायल करते ही पहली ही घंटी पर सिमर ने फोन उठा लिया… कोमल अपनी गलती पर पर्दा डालते हुए सिमर को फटकारती हुई बोली, “ओए बंदर, कोई काम करवा दे घर का, फोन पर ही चढ़ा हुआ है… लगता है फिर पबजी खेल रहा होगा।” कोमल एक सांस में बोल गई।
सिमर: अच्छा जी ठीक है, रुको मैं मम्मी से बात करवाता हूं, यहीं बैठा है अभी… सिमर मजाक के मूड में नहीं था…
कोमल: मैं फोन तेरे पास लाई हूं मम्मी के पास नहीं… बस इतना ही प्यार था अपनी बहन से, एक दिन में भूल गया…
सिमर: अच्छा मैं भूल गया, तुम भूल गईं, एक भी मैसेज नहीं किया कल का, तुम्हें तो याद भी नहीं होगा कि तुम्हारा एक भाई भी है…
कोमल: तू ना अब बस कर, देख मैं अभी तैयार होकर आई हूं, ऐसी बातें ना कर नहीं तो मेरा रोना निकल जाएगा।
सिमर: सॉरी, गुस्सा आ गया था, नहीं करता और सुनाओ क्या हाल है… जीजा जी ने ज्यादा तंग तो नहीं किया…
कोमल: मैं ठीक हूं, जैसा संदीप जैसा भाई हो, उसे कोई तंग कैसे कर सकता है मेरे छोटे वीर… वैसे एक बात बता, तब तो बहुत गुस्सा आता था जब तू मुझे धक्के मारकर एक्सरसाइज करवाता था, पर सच में असली फायदा आज नजर आया, कोई थकावट नहीं हुई…
सिमर: चलो तुम्हें मेरी ट्रेनिंग का फायदा तो हो गया… गरीब की मेहनत का फल मिल गया…
कोमल: तू ना ये उजड़ अश्कों वाली बातें बंद कर दे, नहीं तो मैं तुझे अपने दाज में यहीं ले आऊंगी…
सिमर का भी मूड बात करके ठीक हो गया था। बहन की आवाज सुनकर वह फिर से उड़ने लगा था। कोई दो-तीन मिनट और बात करके उन्होंने फोन काट दिया। सिमर तो और खुश हो गया जब कोमल ने उसे बताया कि वह फेरा पड़ने के लिए दो दिन बाद आ ही रही है… कुलवंत कौर ने भी जब उसे हंसता देखा तो समझ गई कि कोमल से बात हो गई है।
जब फोन कट गया तो पीछे जसप्रीत उसकी सास खड़ी हंस रही थी…
कोमल ने फोन साइड में रखा और अपनी सास के पैरों में हाथ लगाया तो जसप्रीत ने उसे जकड़ लिया…
जसप्रीत: हो गई बात भाई से… क्या बात थी, बहुत डांट रही थी बेचारे को…
कोमल: बेचारा तो सिमर है, हे हे हे… मम्मी जी तुम भी उसका साथ देती हो, गलत बात है… मुझे कहता है फोन क्यों नहीं किया…
जसप्रीत: कोई नहीं, हो जाता है, पहली बार तो अकेला रहा, तेरा फर्ज था मैसेज करने का…
कोमल: हां यही गलती हो गई, पर तुम्हारे बेटे की भी गलती है, मुझे सांस ही नहीं लेने दिया, मैसेज कहां से करती…
जसप्रीत: ये तो तू देख बेटी, जब नया विवाह होता है तो यही होता है, रोज दिन-रात जब समय लगना, मेरे बेटे ने चढ़ जाना तेरे ऊपर, फिर भी तू बाकियों का ख्याल रख कि ऐसा न हो कि तेरा गुस्सा तेरा भाई हमारे मां-बेटी पर निकाल दे…
कोमल: हाये मम्मी जी तुम कैसे बोलती हो…
जसप्रीत: ले तो फिर क्या हुआ, इस घर में सबको पता है, तेरे डैडी जी को भी, अमन को भी कि मैं और तनू दोनों सिमर के नीचे लंबी पड़ी हुई थीं… नाले अपने भाई को भी बता दे जब दिल करे आ जाया कर… बस अमन से पूछ ले, उसे कोई समस्या तो नहीं तेरे और सिमर से…
कोमल: हां जी मम्मी जी, मैं ख्याल रखूंगी…
दोनों ही बातें करती बाहर आ गईं। दोपहर तो कुछ खास नहीं हुआ। गांव के कुछ लोग कोमल को देखने आए, माथा टेककर और शगुन देकर चले गए… जो कि आम होता ही है गांव में।
अमन तो बेसब्र हो रहा था। एक-दो बार जब कोमल कमरे में गई तो अमन पीछे-पीछे चल पड़ता। पर तनू उसके रास्ते में अड़चन बनी हुई थी। जानबूझकर उसने अपनी भाभी को अकेला नहीं छोड़ा था। तनू और कोमल भले ही लगभग एक ही उम्र की थीं, पर फिर भी तनू कोमल को ‘बहू’ कहकर ही इज्जत देती थी।
तनू: भाभी जी क्या बात है, एक रात में ही मेरे भाई को अपने पीछे लगा लिया। चुम्बक की तरह, जहां जाते हो तुम्हारे पीछे भागा आता।
कोमल: ये बात तो तू अपने भाई से पूछ, मैंने कुछ नहीं किया…
तनू: अच्छा फिर रात को मैच कैसा रहा, कितनी राउंड पड़ीं फिर…
कोमल: शर्म नहीं आती तुझे…
तनू: बताओ ना भाभी प्लीज…
कोमल: चार राउंड पड़ीं तेरे भाई ने… वैसे लगता है तू भी बड़े दिन हो गए मैच नहीं खेली, कहती है तो करा अपने भाई से बात, वो हमेशा तैयार रहता है मैच खेलने को, तू बस अपने पत्तन को तेल लगा के रख…
तनू: हे हे हे… जैसे तुम्हारा दिल करे…
कोमल को भी पता था कि जो लड़की एक बार सिमर के नीचे लंग गई, वह दोबारा उसके नीचे लंबी पड़ने से मना नहीं करती…
कोई दो-तीन बजे सब रोटी खाकर अपने-अपने कमरों में फिर चले गए… जैसा कि आम होता है, नए विवाह के चार दिन नवविवाहित जोड़े को और कुछ सूझता नहीं, यही हाल नई जोड़ी का भी था। कमरे में जाते ही फिर से अमन कोमल के ऊपर चढ़ गया… कोमल ने भी मना नहीं किया…
कोमल: मेरी जान, मैं तेरी ही हूं, कहीं नहीं भागी चली जाऊंगी, ऐसे ही मादा न हो जाओ…
अमन: तुम्हें देखकर कंट्रोल ही नहीं होता, जी करता है तुम्हें सीने से लगा कर रख दूं, तुम्हारे एक-एक अंग को चूमता-चूसता रहूं…
कोमल: अच्छा जी, इतना ज्यादा प्यार करके कहीं कमजोर न हो जाओ… लोग कहेंगे औरत ने अपना बंदा चूस लिया…
अमन: मैं ऐसा भी मादा नहीं होने वाला…
कोमल: अच्छा, सुबह मैं तुम्हें न उठाती तो तुम तो सारा दिन उठते ही नहीं…
अमन: ओके मेरी मां, तू बता क्या करूं, जो तू हुक्म करेगी वही करेगा तेरा ये गुलाम…
कोमल: मैं थोड़ी तुम्हें बताऊंगी कि करो… हां, काम से समय निकालकर एक्सरसाइज किया करो… ये नहीं कि डोल-शोल बनाओ, पर बंदा अंदर से फिट होना चाहिए…
अमन: हां ये बात तो तू सही कह रही है… बाकी की बातें अब बाद में, पहले इधर आ तू…
कोमल भी हंसती हुई अमन के ऊपर ढेर हो गई… आज उसने गुलाबी रंग का सलवार सूट पहना हुआ था और उसके नीचे मैचिंग करती गुलाबी ही रंग की ब्रा और पैंटी भी। विवाह से पहले उसकी मां ने काफी शॉपिंग करवाई थी। हर सूट के साथ मैचिंग करती ज्वेलरी, ब्रा, पैंटी, सैंडल सब अब उसके पास थे।
अगले ही पल कोमल के सारे कपड़े साइड में पड़े हुए थे। अगले दो घंटे अमन ने कोमल को बहुत चूसा-चूमा। उसके एक-एक अंग की खुशबू ले रहा था अमन। तब तो कोमल खिलखिला कर हंस पड़ती जब अमन कोमल की अंडरआर्म्स को चूमता या कोमल की गर्दन और उसके पेट पर जीभ फेरने लग जाता…
इस बार जब अमन कोमल को चूस रहा था तो कोमल ने खुद ही अमन को 69 पोज में आने के लिए कह दिया। अमन बहुत खुश था यह सुनकर। कोमल भी अपने तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती थी। अमन ने जैसे उसके साथ प्यार किया था, जैसे उसे अपना सब कुछ समझ बैठा था, वह भी अब अपना फर्ज निभाने के लिए तैयार थी। अमन और कोमल दोनों का शरीर एक सा था। कोमल का शरीर अपनी हाइट के हिसाब से बहुत अच्छा गोरा था और अमन लीन बॉडी का मालिक था, मसलुलर बॉडी नहीं थी उसकी।
जब अमन के कान में ये कोमल के शब्द पड़े, “अमन 69 पोज में आ जाओ, तुमने रात को भी एक बार भी नहीं कहा था।”
अमन: “मुझे डर था कि तू बुरा न मान जाए, इसलिए नहीं कहा था मैं…” ऐसा कहकर वह जल्दी से नीचे लंबा पड़ा गया और कोमल पहले तो बिस्तर पर नंगी ही अमन के दोनों तरफ टांगें करके खड़ी हो गई। कोमल का सेक्स में ये खुलापन अमन को बहुत एक्साइटेड करता था। ये नहीं कि कोमल सेक्स में इतनी खुली स्वभाव की थी और वह कोई घटिया लगती थी। कोमल के चेहरे पर एक मासूमियत, एक भोलापन था जो किसी के भी दिल में बस जाता था। अमन की हालत हर लड़का सोच ही सकता था कि जब सुंदर, सुघड़, ऊंची-लंबी जवान औरत नंगी तुम्हारे बिस्तर पर टांगें दोनों तरफ करके खड़ी हो तो लिंग की क्या हालत होगी। कोमल धीरे-धीरे अपने गोरे चूतड़ नीचे लाती हुई अमन की छाती पर बैठ गई। कोमल का भार अमन को बिल्कुल नहीं लग रहा था अब इस वक्त। कोमल बिना देर लगाए अमन के लिंग की तरफ झुक गई और लिंग को पकड़ लिया और हाथ से नापने लगी। जैसे अपने भाई के लिंग से तुलना कर रही हो, पर अमन तो जैसे बुत बना बैठा था और कोमल की गोरी गांड की तरफ ही देख रहा था।
कोमल ने लिंग पकड़कर उसके टोपे को चूमना शुरू कर दिया। जब उसे अमन के होंठ अपनी योनि और गांड पर महसूस न हुए तो वह आप ही थोड़ी पीछे खिसक गई और अपने चूतड़ अमन के मुंह पर रख दिए। अमन की ख्यालों की डोर इससे टूट गई और वह अपने मुंह पर रखी कोमल की गांड पर हाथ फेरता हुआ उसे चाटने लगा। कोमल आगे की तरफ झुकी हुई उसका लिंग का टोपा चूस रही थी। उसका ढंग ऐसा था कि अमन को लगा उसका पानी अभी निकल जाएगा। वह भी अपनी जीभ का कमाल दिखाने लगा और कुत्ते की तरह सारी जीभ बाहर निकालकर कोमल के दोनों चूतड़ चाटने लगा। वह कोमल की गांड को अपने मुंह पर घुट लेता, जब कोमल उसका लिंग अपने मुंह से बाहर निकाल अमन के अंडकोष मुंह में लेती और फिर बाहर निकाल अपनी जीभ अमन के लिंग की नसों पर फेरने लग जाती। कोमल बड़े ही ढंग से लगी हुई थी। अमन को कई बार ऐसा लगा कि उसका पानी निकल जाएगा, पर जैसे कोमल के पास कोई जादू की छड़ी थी, वह हर बार अमन के अंडकोष जोर से घुट देती जिससे अमन को हल्का सा दर्द होता और उसका पानी न निकलता।
आखिर ऐसे ही चूसन-चुमन के बाद इस बार कोमल आप ही अमन से उठ गई और अमन की तरफ देखने लगी जैसे बिना बोले पूछ रही हो कि कैसे करना है। अमन इशारा समझ बिस्तर से नीचे उतर गया। यह देख कोमल भी बिस्तर के किनारे पर आकर घोड़ी बन गई। जैसे कोमल घोड़ी बनी थी, वैसा तो अमन ने फिल्मों में ही देखा था। कोमल का सिर बिस्तर पर लगा हुआ था और चूतड़ पूरे ताकत से उठे हुए थे, टांगें कोमल ने काफी खोल रखी थीं। दोनों में सेक्स करते वक्त अभी कोई खास बात-चीत नहीं हो रही थी। बस दोनों की सिसकारियां निकल रही थीं।
अमन ने बिना देर किए अपना काफी सारा थूक निकालकर अपने लिंग पर मल लिया। कोमल की योनि तो पहले ही बहुत गीली थी। पर उसने सुना था कि थूक से ज्यादा मजा आता है, इसलिए वह आज यह ट्राई करना चाहता था। अपने सामने घोड़ी बनी अपनी औरत की पीछे होकर पहले उसने एक बार फिर उसकी गांड को चूमने लगा। पर इस बार जल्दी ही वह खड़ा होकर कोमल की कमर पकड़ अपनी लिंग उसकी गीली हुई योनि में धकेल दिया। लिंग घुसते ही कोमल की सिसकारी निकल गई और उसने अपना मुंह तकिए में घुट लिया। घर में सब थे, दूसरा वह दिन-दहाड़े अपनी सिसकारियों की आवाज बाहर नहीं देना चाहती थी। इस बार अमन ने उसे सांस भी नहीं लेने दिया और तेज-तेज झटके मारने शुरू कर दिए। क्योंकि कोमल ने उसके अंडकोष को घुटकर दबाकर इतना जोश दिला दिया था कि आग उसके अंदर-बाहर कर दी और उसका माल बाहर आने के लिए तरस रहा था, उसके अंडकोष माल से भरे पड़े थे और दर्द कर रहे थे, उसे बस आराम चाहिए था। इसलिए वह कोमल की कमर से पकड़कर खींच-खींचकर झटके मार रहा था।
कोमल की गांड से टकराते अमन के पिंडलियों का बड़ा अच्छा म्यूजिक चल रहा था कमरे में। यह सब बाहर खड़े मिंटू और जसप्रीत भी देख रहे थे। असल में घर कोई दोनों को मिलने आया था, जिद करता था ज्यादा ही तो जसप्रीत उन्हें लेने आई थी। जसप्रीत उनके कमरे के अंदर चली ही थी कि कोमल की सिसकारियां सुनकर रुक गई और अपनी बहू और बेटे का शो देखने लगी। उसके पीछे मिंटू आ गया था।
मिंटू: सच्ची कहूं आज दिल को बड़ा सुकून मिला यह शो देखकर, जिसने मेरी बेटी और औरत को चोदा, उसकी बहन आज मेरे बेटे के आगे घोड़ी बनी हुई है…
जसप्रीत यह सुन थोड़ा सा हंसी और मिंटू को कान से पकड़ खींचती हुई सीढ़ियों की तरफ नीचे ले जाने लगी।
मिंटू ने कान चुदाने की कोशिश की तो जसप्रीत ने कान छुड़ा दिया। जसप्रीत ने बड़ी जोर से मसला था।
जसप्रीत: लड़की की तरफ बुरी निगाह से देखना तो क्या, अगर उसके बारे में कुछ उल्टा सोचा या बोला तो उसका क्या नतीजा होगा, वह मैं तुम्हें रात को बताऊंगी।
मिंटू चुपचाप नीचे चल पड़ा। उसे पता था जसप्रीत को ज्यादा गुस्सा दिलाया तो आज तो जूती से ही मार पड़ेगी, अगर जसप्रीत ज्यादा खिज गई तो वह बेल्ट फाड़ लेती है और बाद में उसके पास कई दिन बैठना नहीं होता, हफ्ता भर। बात तो उसने नॉर्मल मूड में ही कही थी, पर जसप्रीत जब से सिमर के नीचे पड़ी थी, अपने घर वाले को मारने का कोई मौका जान नहीं देती थी। मिंटू की शराब घर लाते आना, बिना गले लड़ना-गल्ला काढ़ना सब बंद करवा दिया था जसप्रीत ने। जसप्रीत ने सीधा कहा हुआ था, या तो मुझे जान मार दे, नहीं तो अब मेरे साथ रहना है तो बंदे का बेटा बनकर रहना।
खैर उधर अमन घोड़ी बनी कोमल के पीछे पागल की तरह झटके मार रहा था। अमन तो हांफ रहा था, सांस सही हो रही थी, पर कोमल के तो मजा लग रहे थे। हालाँकि घोड़ी बनी वह थक गई थी क्योंकि पिछले काफी समय से एक ही पोज में अमन झटके मार रहा था। आखिर कोमल ने ही स्कीम लड़ाई और वह बिस्तर पर घोड़ी बनी-बनी ही आगे की तरफ गिर पड़ी और पेट भारी हो गई। थोड़ी देर के लिए अमन का लिंग योनि से निकल गया, पर जल्दी ही वह कोमल के ऊपर लेट गया और लिंग फिर से उसके अंदर धकेल दिया। आखिर इसी पोज में कोमल की योनि मारते-मारते अमन ने अपना सारा पानी कोमल की योनि में ही बहा दिया।
अमन पूरा थक चुका था, सांस उसके काबू में नहीं आ रही थी। वह काफी देर कोमल के ऊपर ही पड़ा रहा। कोमल ने ही उसे अपने ऊपर से हटा दिया। सेक्स के बाद तो औरत से भी आदमी का भार नहीं झेला जाता, यह बात तो सब जानते ही हैं।
कोमल अमन को इस तरह हांफता देख फिर तीखी करने लगी। उसने पहले अपने पेट और योनि साफ की और फिर अमन का लिंग साफ कर दिया। उसके बाद फ्रिज से जूस का ग्लास अमन को देते हुए बोली, “हाये मेरी मां, ये क्या पल्ले पड़ा, दूसरे दिन ही थक गया ये बंदा मेरा… ये लो जूस पियो, ताकत आएगी तुममें।”
जूस पीकर अमन को थोड़ी ताकत आई और वह कुछ भी नहीं बोला। वैसे बात तो कोमल की सही थी। जिम तो उसने आज तक जा नहीं देखा था। खैर कोमल ने भी ज्यादा तंग नहीं किया और दोनों नंगे ही घंटा भर सो गए। दोनों की नींद फोन की घंटी से टूटी, तनू ने ही हंसते हुए उन्हें जगाया था।
शाम की रोटी खाकर नौ बजे जब कमरे में चले ही तो तनू बोल पड़ी…
तनू: भाभी आज वॉक पर चलते हैं, खा-पीकर पच जाए…
कोमल भी अपनी ननद को मना कैसे कर सकती थी। अमन, कोमल और तनू दोनों सैर करने निकल पड़े। तनू तो दोनों में हड्डी ही बनी हुई थी। अपने भाई-भाभी की छेड़छाड़ देख तनू तो बस हंसी जा रही थी। सैर का बहाना था, यह जसप्रीत ने ही कहा था। वह मिंटू को सजा देना चाहती थी अकेले में। इसलिए उसने तनू को कहा था कि दोनों को सैर पर ले जाए…
पर इधर तो अमन को खाली पड़ी हुई थी, तनू ने हिंट दिया भी, पर अमन को तो कोमल के अलावा कुछ सूझ ही नहीं रहा था। कोई पांच मिनट भी नहीं सैर की थी कि अमन वापस चल पड़ा तनू और कोमल को लेकर। पांच मिनट में जब घर पहुंचे तो अंदर से आती आवाजें सुन अमन का माथा ठनका कि क्यों तनू रोक रही थी घर आने को।
अमन: दीदी आओ ऊपर ही चलते हैं, बातें करते हैं वहां…
कोमल ने अपना हंसा बड़ा अकेला कंट्रोल किया हुआ था। कमरे में आते ही पानी पीते-पीते कोमल का हंसा निकल गया। उसकी सास के कमरे से उसके ससुर की आती आवाजें, “ओवी आऊं आह्ह्ये प्लीज बस कर, कोई आ जाए… प्लीज आगे तो नहीं कहता कुछ…” ये ही शब्द तीनों ने सुने थे कि अमन ऊपर ले आया था।
कोमल: दीदी तुम तो सैर को ले गईं, मुझे तो मम्मी जी डैडी को सजा दे सकें… दीदी गलत बात है, तुम मुझे अपने घर का मेंबर नहीं समझतीं अभी तक, जो मुझे बाहर भेज रहे थे… जाओ मैं नहीं बोलती तुम्हारे साथ…
तनू: यार मेरे साथ क्यों नाराज होती हो, मैंने जो मम्मी ने कहा मैंने वही किया… अमन तू कह ना कुछ…
अमन: मुझे क्यों फंसाती पड़ी है बीच में… नाले मुझे क्या पता था डैडी आज फिर मम्मी के साथ लड़े हैं…
तनू: मुझे भी नहीं पता था आज का प्रोग्राम, हां वैसे शाम को कोई बात हुई थी… और सारे गेस्ट भी चले गए हैं, तुझे पता है। मुझे मम्मी ने रसोई में कहा था जब डिनर कर रहे थे।
कोमल: चलो कोई बात नहीं, ये कोई नई बात नहीं। गलती की होगी, सजा तो मिलनी ही थी। मेरी मम्मी भी ऐसी ही हैं। हमें दोनों बहन-भाइयों को डैडी जी बहुत प्यार करते हैं जब गलती करते हैं।
तनू: हाये भाभी सच्ची। तुम तो कितनी अच्छी हो, स्मार्ट हो, तुम्हें क्यों मारते थे मासी जी…
कोमल: हे हे हे… बड़ी शरारती थी मैं भी और तेरा यार सिमर भी। उसे तो अभी भी पड़ते हैं मेरे से और मम्मी से। थोड़े दिन पहले ही फिर खड़ी थी बाहर किसी से लड़कर आई थी।
तनू: भाभी इसके सामने ऐसा न बोलो… वह अमन की तरफ इशारा करती हुई बोली…
अमन: कोई नहीं दीदी, फिर क्या हुआ, मेरी बहन उसके पास, वो मेरे पास… हाहाहा
काफी देर ऐसे ही बातें करते रहे तीनों। कोई आधा घंटा और बातें करने के बाद तनू नीचे अपने कमरे में चली गई। सुबह उसने देखा था उसका सोहरा एक भी मिनट नहीं बैठा था। रोटी भी उसने रसोई में खड़े होकर खाई थी। कोमल हंसती हुई सोचने लगी कि उसके दोनों घर एक जैसे हैं।
खैर, अगले दो दिन अमन ने जब भी मौका मिला, दिन-रात राज करके कोमल को चोदा। कोई कसर नहीं छोड़ी थी उसने कोमल पर अपने प्यार की मोहर लगाने में। दो दिन बाद कोमल और अमन को लेने के लिए पहली बार फेरा पड़ने के लिए सिमर, कुलवंत कौर और सज्जन सिंह आ गए थे।
सिमर की खुशी तो दूर से ही देखने वाली थी। कोमल के चेहरे पर खुशी देखकर उसे बड़ा सुकून सा मिला। कोमल के चेहरे की लाली बताती थी कि उसका ससुर दिल लग गया है। अपने पीहर जाने के लिए वह भी बहुत उतावली थी। अपनी सास जसप्रीत से कहकर उसने तनू को भी अपने साथ ही ले लिया।
Guys bhaut bada update ho gaya tha isliye ek sath nahi diya

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