30th Update (हनीमून) (Mega Update)
वैसे, सुबह दीपू कविता के कान में कहा था की आज रात वो दिव्या की गांड मारने वाला है तो उसे तैयार कर के रखना.
अब आगे..
अगली सुबह कविता उठ कर किचन में चाय बना रही होती है तो दीपू भी उस वक़्त उठ जाता है और फ्रेश हो कर किचन में जाता है जहाँ कविता चाय बना रही होती है. उसको देख कर दीपू का लंड फिर से तन जाता है क्यूंकि कविता एकदम मस्त लग रही थी ख़ास कर के उसकी गांड जो एकदम उभर कर मस्त लग रही थी.
दीपू जा कर कविता को पीछे से पकड़ कर उसकी गर्दन को चूमते हुए.. तुम तो बड़ी सेक्सी लग रही हो... खास कर ये गांड. मन करता है तुम्हारी साडी उठा कर अभी तुम्हारी गांड मार लून.
कविता भी थोड़ी मस्ती में: सुबह सुबह ही चालु हो रहे हो क्या? रात भर तुमने दिव्या और वसु को सोने नहीं दिया और उनकी बजाते रहे. तुम्हे तो मेरी गांड अच्छी ही लगेगी ना. २ दिन तक गांड मार मार के अब मुझे भी उसकी आदत दाल दी है.
दीपू: क्यों तुमको अच्छा नहीं लगा क्या?
दीपू: वैसे तुम तो कल बच गयी ना.. तुम्हारी रात का कोटा अभी पूरा कर देता हूँ.
कविता: चुप करो बदमाश. हमेशा यही सूझती रहती है तुम्हे.
दीपू: क्यों नहीं सूझेगी.. जब घर में तीन तीन मस्त घोड़ियाँ है तो और उसे आँख मार देता है.
कविता: क्यों हम तुम्हे घोड़ियाँ नज़र आते है क्या?
दीपू कविता को पलटा कर उसको देखते हुए.. हाँ घोड़ियाँ जो जल्दी ही दूध भी देने वाली है और ऐसा कहते हुए उसके होंठों को चूमते हुए उसके मस्त चूची को भी दबाता है और दुसरे हाथ से उसकी गांड को दबाता है. कविता भी सुबह सुबह गरम हो जाती है और वो भी दीपू का साथ देती है और दोनों एक दुसरे की जुबां को लड़ाते रहते है.
दीपू कविता की गांड को दबाते हुए... क्यों मैंने गलत बोलै क्या?
कविता थोड़ा शर्माते हुए... नहीं... लेकिन तीनो एक साथ? (दूध की बात)
दीपू: तीन नहीं चार. कविता दीपू को देखती है और उसकी बात समझ जाती है और उसको चूमते हुए... सही कहा.
दीपू: मीना को भी जल्दी आने को बोलो फिर.
इतने में वहां दोनों वसु और दिव्या भी आ जाते है. वसु दोनों को देखते हुए कहती है.. सुबह सुबह ही शुरू हो गए.
दीपू वसु को देख कर.. तुम भी आ जाओ..
वसु: ना बाबा अभी नहीं. रात भर तो तुमने सोने नहीं दिया. अभी फिर से शुरू होना चाहते हो. कविता वसु को देख कर: देखो ना ये क्या कह रहा है..
वसु: क्या कह रहा है?
कविता दीपू को देख कर.. हम तीनो को घोड़ियां कह रहा है.
दीपू: नहीं तुमने पूरी बात नहीं बतायी है.
वसु: कौनसी बात?
दीपू: यही की तुम तीनो घोड़ियाँ हो जो जल्दी ही दूध भी देने वाली हो.
वसु: चुप कर बदमाश और तीनो हस देते है. वहां दिव्या भी थोड़ा लंगड़ाते हुए आती है तो उसको देख कर तीनो थोड़ा हस देते है तो दिव्या कहती है: हाँ हस लो.. और वसु को देखते हुए: जिस दिन ये तुम्हारी गांड मारेगा ना तो आप मुझसे भी ज़्यादा लंगड़ा कर चलने वाली हो.
वसु: चुप कर बेशरम.. और सब हस्ते हुए चाय पीकर अपना काम करते है.
दीपू: माँ निशा से बात की हो क्या? क्या हाल है उसका?
वसु: हाँ बात की है. वो भी बहुत खुश है. कह रही थी की वो लोग कुछ दिन के लिए बाहर जा रहे है.
दीपू फिर अपना काम कर के ऑफिस चला जाता है जहाँ दिनेश पहले से ही वहां था.
दीपू: क्या हाल है? सब ठीक तो है ना? माँ कह रही थी की उसने निशा से बात की है और तुम लोग बाहर जा रहे हो.
दिनेश: हाँ यार सोच रहा था की कही कुछ दिन हनीमून के लिए जा कर आते है और जैसे हम दोनों ने बात की थी... उस वक़्त मैं निशा से माँ के बारे में भी बात करता हूँ.
दीपू: हाँ यार ये सही रहेगा. उससे बात कर और उसकी क्या सोच है वो जान. फिर आगे क्या करना है आने के बाद सोचते है.
दिनेश: हाँ ठीक है. लेकिन मेरे जाने के बाद यहाँ का हाल देख लेना. अगर कोई ज़रुरत पड़ी तो मुझे फ़ोन कर देना.
दीपू: तू चिंता मत कर. मैं देख लूँगा. आज मैं दूसरी जगह भी जाकर वहां के हाल का भी पता लगाता हूँ. दिनेश: हाँ ये ठीक रहेगा. फिर दोनों ऐसे ही बात करते हुए अपना काम करते है.
दिनेश शाम को घर जाकर उसकी माँ ऋतू से कहता है... माँ सोच रहा था की मैं और निशा थोड़े दिनों के लिए कहीं घूम आते है.
ऋतू: ये तो बहुत अच्छी बात है बेटा. जाओ दोनों घूम आओ.
निशा को भी अच्छा लगेगा. निशा भी उस वक़्त वहीँ रहती है तो वो भी ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाती है और ऋतू के गले लग कर.. बहुत शुक्रिया आंटी.
ऋतू: अब तो तू मुझे आंटी मत बुलाया कर... तू तो अब इस घर की बहु हो गयी हो .. माँ ही बुला ले.. मुझे भी अच्छा लगेगा.
निशा थोड़ा शर्माते हुए: जी माँ जी. अब से मैं आपको माँ ही बुलाऊंगी... यानी अब से मेरी 2 माँ है.
ऋतू: ठीक कहा बेटी और प्यार से उसे गले मिलकर उसका माथा चूम लेती है.
ऋतू: तो फिर कब जा रहे हो?
दिनेश: हम कल ही जा रहे है माँ.. मैंने सब इंतज़ाम कर लिया है. एक रिसोर्ट भी बुक कर दिया है. हम 4-5 दिन रह कर आ जाएंगे.
ऋतू: ठीक है. अच्छे से जाना. और फिर दोनों दिनेश और निशा ऋतू के पाँव छूते है और उसका आशीर्वाद लेते है.
हनीमून
दोनों दिनेश और निशा फिर एक अच्छे रिसोर्ट में जाते है जहाँ दिनेश ने पहले ही rooms बुक किया हुआ था. वहां पहुँच कर निशा जब वो जगह देखती है तो बहुत खुश हो जाती है क्यूंकि वो जगह बहुत सुन्दर थी. हरा भरा सुनेहरा पानी का झरना... सब था वहां पर. उसको देख कर निशा दिनेश को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ चूमते हुए कहती है: ये तो बहुत अच्छी जगह है.
दिनेश: हाँ मुझे पता है... इसीलिए तुम्हे यहाँ लाया. पसंद आया ना?
निशा: बहुत पसंद आया
दिनेश. चलो कमरे में चलते है. फिर दोनों सामान अपना कमरे में ले जाते है और उन्हें वहां भी एक अच्छा सरप्राइज मिलता है. कमरा पूरा फूलों से सजा हुआ था जैसे कोई सुहागरात का कमरा सजाया जाता है.
फिर दोनों थोड़ा आराम करते है और फिर शाम को थोड़ा घूम कर रात में खाना अपने कमरे में ही खाते है. खाना खाने के बाद दिनेश निशा को इशारा करता है क्यूंकि अब उसे भी थोड़ी ठरक छड़ी हुई थी और वो भी थोड़ा उतावला हो रहा था.
निशा: अभी नहीं. एक काम करो... तुम थोड़ा बाहर घूम आओ.
दिनेश: इसकी क्या ज़रुरत है. मैं यहीं रहता हूँ ना.
निशा: नहीं एक बार मेरी बात मान लो. तुमको मैं निराश नहीं करूंगी. तो दिनेश बुझे मन से कमरे से चला जाता है और कमरे में सिर्फ निशा ही रह जाती है क्यूंकि वो इस पल को वो भी एन्जॉय करना चाहती थी.
10-15 min के बाद निशा ने दिनेश को फ़ोन कर के कमरे में आने को कहा.
जब दिनेश अंदर कमरे में आया तो वहां का नज़ारा देखकर उसके चेहरा ख़ुशी से झूम उठा क्यूंकि निशा एकदम लाल साडी में सजी हुई थी जिसमें वो बहुत सेक्सी लग रही थी. मांग में सिन्दूर लाल चूड़ियां ब्लाउज जिसमें से उसकी आधी चूचियां बाहर आने को तड़प रही हो.
निशा को उस कपड़ों में देख कर अब दिनेश से भी रहा नहीं जाता और निशा को अपने आगोश में ले कर उसके होंठ चूमते हुए उसकी चुचिया और जोर से दबाने लगता है.
निशा: दी...ने..श.आआह्ह्ह!!!!”आआआह्ह्ह्ह!!!!!! ओह्ह्ह्ह!!!! रुक जाओ दिनेश वरना मैं अभी अपने होश खो दूंगी।
दिनेश: हाँ होश खो जाने दो ना... इसीलिए तो हम यहाँ आये है की दोनों एक दुसरे की होश खो बैठे और मस्ती करे और ऐसा करते हुए दिनेश उसके कपडे निकलने लगता है. दिनेश जब निशा के कपडे निकल देता है तो वो उसको ब्रा और पैंटी में देखता है तो उसका लंड पूरा तन कर 90 degs में आ जाता है क्यूंकि वो उस ब्रा और पैंटी में लग ही ऐसी थी.
निशा दिनेश को उससे ऐसे घूरते हुए देख कर हस्ते हुए..क्यों ठीक नहीं है क्या? मैंने ख़ास कर तुम्हारे लिए ही पहना है.
दिनेश: ठीक? अरे तुम तो जैसे जन्नत से उत्तरी हुई कोई परी लग रही हो.
दिनेश फिर उसे बाहों में लेकर उसके लिपस्टिक लगे होंठों को चूसने लगा. निशा भी अपनी जीभ दिनेश के मुँह में देती हुई चुम्बन का मजा लेने लगीं. दिनेश फिर उसे चूमते हुए उसकी ब्रा और पैंटी को भी निकल कर उसे पूरा नंगा कर दिया और फिर उसे चूमते हुए उसके बदन पे नीचे आने लगा. पहले उसकी चूचियों को मस्त तरीके से चूमा चूसा और काटा भी.
निशा तो जैसे जन्नत पे पहुँच गयी थी वो आआह्ह्ह!!!!”आआआह्ह्ह्ह!!!!!! ओह्ह्ह्ह!!!! करती हुई दिनेश के सर को अपनी चूचियों पे दबाती है और दिनेश भी बड़े मजे से उसकी चूचियों का पूरा रास पीने में लगा हुआ था.
निशा तो उसके चूची चूसने से ही एक बार झड़ गयी थी. उसे पता था की वो आज रात ऐसे कई बार झड़ने वाली है. दिनेश फिर उसे चूमते हुए और नीचे आता है और उसकी गहरी नाभि को चूमता है तो निशा तो जैसे पागल हो जाती है. वो दिनेश के सर को अपने पेट पे ज़ोर से दबा देती है और आंहें भर्ती रहती है. 5 Min तक वहां दिनेश उसे खूब मजा देता है और खुद भी मजा लेता है और फिर नीचे आते हुए पहले उसकी मस्त तनु हुई जांघो को चूमता है और जब वो उसकी चूत को देखता है तो देखते ही रह जाता है क्यूंकि उसकी चूत एकदम साफ़, चिकनी , गीली सनी हुई चिप छिपा रही थी.
उसके मस्त गीली हुई गांड के छेड़ को देख कर दिनेश के मुँह में पानी आ जाता है. दिनेश उसकी टांग फेला के उसकी चिकनी चूत चाटने लगा। दिनेश ने भी अपनी दो उंगलियां उसकी चूत में पेल दी... इससे निशा पागल सी हो गई और गांड उठा के अपनी चूत दिनेश के मुँह पर रगड़ने लगी... कितना मज़ा आ रहा है!! ...चोदो मुझे अपनी जीभ से चोदो!! चोदो ना!! इतना सुनते ही दिनेश ने अपनी जीभ निशा के चूत में पेल दी और उसे जीभ से ही चोदना शुरू कर दिया!!... दिनेश और ज़ोर से!! और ज़ोर से!! चूसो ना...आआअहह!! आआअह्ह्ह्ह!! आआआआआआआआअह्हह्हह्हह्ह!! हाहाएयी!!
दिनेश की जीभ के कमाल से निशा पांच मिनट के अंदर ही झड़ गयी और अपना पानी गिरा दिया। निशा ने अपना पानी राजू की नाक और मुंह पर छोड़ दिया। दिनेश गर्म चूत का नमकीन पानी ऐसे चाट-चाट कर पी रहा था जैसे एक बूंद भी बाहर नहीं गिरने देगा।
निशा भी थक कर बिस्तर पे गिर गयी और ज़ोर ज़ोर से सांसें ले रही थी. दिनेश भी मस्त हो कर उसके बगल में लेट जाता है और पूछता है कैसा लगा?
निशा: उसको देख कर... कैसा लगा? मैं तो जैसे हवा में उड़ रही थी. तुम्हारी जीभ तो कमाल कर गयी.
दिनेश: तुमने तो अभी सिर्फ मेरी जीभ का ही कमाल देखा है और निशा के हाथ को अपने तने हुए लंड पे रख कर... जैसे मैंने अपनी जीभ का कमाल दिखया है वैसे ही तुम भी अपनी जीभ और हाथों का कमाल दिखाओ. फिर देखो कैसे तुम्हे और मज़ा आता है और ऐसा बोलते हुए दिनेश निशा को चूम लेता है.
दिनेश फिर बिस्तर से उठ कर खड़ा हो जाता है और निशा को उसके सामने बिठा देता है. जब वो ऐसा करता है तो दिनेश का लंड एकदम सलामी दे रहा था निशा की आँखों के सामने.
दिनेश ...ये तो पिछले कई दिनों से अब और भी ज़्यादा बड़ा और खुंखार लग रहा है..
दिनेश: तुम्हें इस हालत में नंगी और कामुक देख कर और ज्यादा बड़ा हो गया मेरी जान!! ऐसा बोल निशा उसके सुपाडे को चूमने लगी... निशा ने धीरे से अपनी जीभ बाहर निकाली और दिनेश के लंड से निकलते पानी को चाट लिया... दिनेश सांसे रोक कर निशा की इस हरकत को देख रहा था। निशा अपनी जीभ से उसके सुपाडे को चाटने लगी। जब उसका सुपाड़ा पूरा गीला हो गया तो निशा ने धीरे से मुंह खोला और दिनेश का सुपाड़ा मुंह में ले के चूसने लगी। निशा के रसीले होठों की ठोकर से राजू का लंड और तेज़ फडकने लगा। वो मानो सातवे आसमान पे पहुंच गया था... वो अब निशा का सर पकड़ कर उसके गले तक अपना लंड अंदर घुसता रहा जैसे वो उसका मुँह चोद रहा हो.
दिनेश: तुम तो पिछले बार से भी अच्छा लंड चूस रही हो. कितना मजा आ रहा है लंड चुसवाने में!! जी करता है २४ घंटे अपना लौड़ा तुम्हारे मुँह में पेले रहु!!
निशा: अगर चौबीस घंटे लंड चूसते रहूँ तो फिर तुम मुझे कब चोदोगे और माँ बनाओगे? दिन भर तुम मुझे बिस्तर पे ही रखोगे तो फिर ऑफिस कब जाओगे?? और ऐसा कहते हुए निशा हस देती है तो दिनेश भी उसको देख कर हस देता है. अब दिनेश का लंड पूरे फॉर्म में आ गया था और निशा ने भी उसके लंड को अपनी थूक और जीभ से पूरा गीला और कड़क कर दिया था.
अब दिनेश से भी रहा नहीं जा रहा था तो उसने निशा को उठा कर बिस्तर पे पटक दिया और वो उसकी जाँघों के बीच आ गया और उसका लंड एकदम खूंखार की तरह था जैसे वो कोई जंग में जाने के लिए बेकरार हो. दिनेश ने उसकी टांग उठाकर हवा में की और अपने मोटे लंड को चूत पर रखकर धक्का लगाया।
चूत पूरी गीली थी तो लंड चार इंच अंदर तक घुस गया। निशा इस धक्के से मुँह से दबी सी सिस्की निकल गई...आराम से दिनेश... अभी तक मेरी चूत तुम्हारे इस मोटे लंड की आदत नहीं हुई है. थोड़ा आराम से करो ना.
दिनेश भी मस्ती में: क्या करून? खुल कर बोलो... तभी तुम्हे और मुझे भी मजा आएगा.
निशा: तुम सुधरोगे नहीं.
दिनेश: और मैं सुधारना भी नहीं चाहता. तो बोलो..
निशा भी हस्ती है और कहती है... थोड़ा आराम से तुम्हारे लंड को मेरी चूत में डालो ना. एक साथ पूरा घुसा दोगे तो दर्द होगा.
दिनेश: ये हुई ना जान... ऐसे ही बिस्तर पे खुल के बातें करेंगे तो हम दोनों को ही मजा आएगा. और फिर दिनेश धीरे धीरे से निशा को चोदने लगता है. पहले धीरे धीरे.. निशा की चूत भी पूरी गीली थी तो उसका लंड बड़े आसानी से अंदर बाहर हो रहा था.
थोड़ी देर बाद जब निशा को भी मस्त लगने लगता है तो वो भी मस्ती में आकर अपनी गांड आगे करते हुए उसके चुदाई में रंग लाती है तो दिनेश भी समझ आता है और फिर वो भी अब दाना दान अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए ज़ोर ज़ोर से शॉट लगाते रहता है. अब उसका लंड पूरा निशा की चूत की जड़ तक जा रहा था और निशा तो जैसे जन्नत पे पहुँच गयी थी. उसे भी बहुत मजा आ रहा था इस चुदाई में. इसी बीच ना जाने निशा कितनी बार झड़ गयी थी और अपनी पानी निकल ली थी... जिसकी वजह से दिनेश का लंड उसकी चूत में और आसानी से जा रहा था.
10 Min तक ऐसे ही चोदने के बाद दिनेश उसे घोड़ी बन जाने को कहते है तो निशा भी बड़ी ख़ुशी से घोड़ी बन जाती है. उसके ऐसे करने से उसकी गांड भी एकदम क़यामत लग रही थी. दिनेश मन में सोचता है की जल्दी ही वो निशा की गांड का उद्धघाटन भी करने वाला है.
दिनेश फिर अपने लंड पे थूक लगा कर उसकी कमर पकड़ते हुए लंड को पूरी एक बारी में ही मस्त झटके से निशा की चूत की जड़ तक पेल देता है. निशा की तो जैसे आँखें बाहर आ गयी थी. उसने सोचा नहीं था की दिनेश एक बार में ही अपना पूरा लंड उसकी चूत में दाल देगा.
अब तो इस पोजीशन में दोनों को मजा आ रहा था. जहाँ निशा आंहें भरते हुए सिसकारियां...या ये कहे की चिल्ला रही थी वहीँ दिनेश भी कभी उसकी कमर तो कभी उसकी चूचियां पकड़ कर राजधानी की रफ़्तार से पेले जा रहा था निशा को. निशा भी बार बार अपना सर घुमा कर दिनेश की तरफ देख कर उसे भी बता रही थी की उसे भी बहुत मजा आ रहा है.
10 Min बाद अब उसको भी लगता है की वो भी झड़ने के करीब है तो दिनेश निशा को बताता है और आखिर में 5-6 ज़ोर के झटके देने के बाद निशा अलग हो जाती है और उसके सामने बैठ जाती है और लंड को चूसने लगती है क्यूंकि उसे आज उसके लंड का पानी पीना था. दिनेश भी मान जाता है और फिर उसके मुँह को फिर से चोदने लग जाता है और आखिर में अपना पूरा माल निशा के मुँह में छोड़ देता है जिसे निशा बड़े चाव से पूरा पी जाती है.
दिनेश अपना पूरा माल निशा के मुँह में गिराने के बाद वो भी थक गया था तो दोनों बिस्तर पे लुढ़क कर एक दुसरे की बाहों में पड़े रहते है.
निशा: आज तो तुमने मेरी जान ही निकाल दी. इतनी देर और ज़ोर से तो कभी नहीं चोदा आज तक और ऐसा कहते हुए वो शर्मा जाती है.
दिनेश: क्यों तुम्हे मजा नहीं आया क्या? वैसे बात तुम्हारी सही भी है. आज तक हमको ऐसा खुला माहौल नहीं मिला ना. घर में हमेशा माँ रहती है और मुझे भी पता है की तुम इतनी ज़ोर से आवाज़ें निकलोगी तो वो आवाज़ माँ को भी सुनाई देगी. निशा ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और प्यार से दिनेश की बाजू में एक मुक्का मारती है.
दिनेश: वैसे सुनो मुझे तुमसे एक बात करनी थी.
निशा: क्या?
दिनेश: अभी नहीं. हम यहाँ 2-3 दिन है ना. तो फिर बात करते है क्यूंकि वो ज़रूरी है.
निशा दिनेश की आँखों में सवालिया नज़र से देखती है तो दिनेश कहता है कुछ ख़ास नहीं... अभी नहीं. अब दोनों थक गए है तो थोड़ा आराम कर लेते है. कल तुम्हे एक और अच्छा सरप्राइज दूंगा. निशा अपनी आँखें बड़ी करती हुई पूछती है क्या?
दिनेश: वो तो तुम्हे कल सुबह ही पता चलेगा. अब थोड़ा आराम कर लेते है और फिर दोनों सो जाते है.
अगली सुबह:
अगली सुबह दोनों जल्दी उठ जाते है और फ्रेश हो कर रिसोर्ट के होटल में जाकर चाय नाश्ता करते है.
दिनेश: चलो आज थोड़ा घूम आते है. आज हम यहाँ पहली बार आये है तो थोड़ा घूम भी लेते है. आज मौसम भी अच्छा है और ज़्यादा लोग भी नहीं है.
निशा: हाँ तुम सही कह रहे हो. चलो थोड़ा घूम आते है.
फिर वो दोनों घूमने जाते है और वहां के अच्छे नज़ारे को देख कर खूब खुश होते है. साफ़ वातावरण हलकी ठंडी हवा और खूबसूरत मौसम का लुफ्त उठाते हुए घुमते रहते है. एक जगह पर आकर उनको एक मस्त पानी का झरना नज़र आता है जिसे दोनों को बहुत अच्छा लगता है.
दिनेश: कल मैंने तुम्हे कहा था ना की आज तुम्हे एक सरप्राइज दूंगा.
निशा: हाँ कहा था. क्या सरप्राइज है?
दिनेश: देखो वो मस्त पानी का झरना. चलो आज वहां जा कर नहाते है.
निशा: ना बाबा ना.... कोई भी हमें देख लेगा तो अच्छा नहीं होगा.
दिनेश: देखो चारो तरफ... यहाँ कोई नहीं है और किसी के आने का आहट भी नहीं है. चलो ना नहाते है.
निशा: मैंने तो कोई कपडे भी नहीं लाये है. नहाएंगे कैसे?
दिनेश: तो इसमें क्या है? यहाँ कोई नहीं है. हम अपने कपडे निकल कर बगल में रख देते है और फिर नाहा कर आ जाते है. निशा मना करती रहती है लेकिन दिनेश नहीं मानता और फिर उसके कहने पर जहाँ दिनेश अपने कपडे निकल कर सिर्फ एक अंडरवियर में आ जाता है वही निशा की अपने कपडे निकल कर सिर्फ ब्रा और पैंटी में आ जाती है और फिर दोनों उस झरने में चले जाते है नहाने के लिए. नहाते वक़्त दिनेश निशा को पीछे से पकड़ कर उसके गले को चूमते हुए मस्ती करता रहता है जिसमें निशा को भी मजा आता है क्यूंकि वो पहली बार था जब वो दोनों खुले में ऐसे मजे कर रहे थे.
दोनों झरने में मस्ती करते हुए नहाते है. दोनों के कपडे भीग जाते है तो निशा उस ब्रा और पैंटी में बहुत सेक्सी लग रही थी क्यूंकि भीगने से उसकी ब्रा और पैंटी पारदर्शी की वजह से जैसे वो नंगी ही नज़र आ रही थी. दिनेश उसको देख कर... तुम तो गज़ब लग रही हो निशा.
निशा उसकी बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती. थोड़ी देर बाद जब वो झरने से बाहर आती है तो उसकी मस्त ठोस चूचियां पूरी साफ़ नज़र आ रही थी. उतना ही नहीं... बल्कि वो पूरी की पूरी क़यामत लग रही थी. पारदर्शी कपडे भीगे बाल पानी की बूँदें जो उसके सर से चूचियों पे गिर रहे थे.
जब वो दोनों बाहर आते है तो निशा को देख कर दिनेश से रहा नहीं जाता और वो उसे वहीँ पकड़ कर उसके होंठों पे टूट पड़ता है. पहले तो निशा को अच्छा नहीं लगता की वो लोग ऐसे खुले में कर रहे है लेकिन जब वो देखती है की वहां कोई नहीं है तो वो भी मजे लेते हुए अपनी जुबां उसकी मुँह में दाल देती है और दोनों एक दुसरे की जुबां को चूसते हुए एक दुसरे का रस आदान प्रदान कर रहे थे.
देखते ही देखते दिनेश उसकी ब्रा और पैंटी भी निकल देता है और फिर ५ मं बाद वो निशा को वहीँ घुटनों के बल बिठा देता है तो निशा देखती है की दिनेश का लंड उसको सलामी दे रहा था. निशा भी फिर पूरे मन से दिनेश का लंड अपने मुँह में लेकर खूब मजे से चूसती है और उसको पूरा गीला कर देती है और अपने गले में पूरा ले लेती है.
दिनेश भी मजे से: कैसा लगा तुम्हे मेरा सरप्राइज?
निशा: पूछो मत... मैंने कभी पहले ऐसा नहीं किया था... वो भी खुले आसमान के नीचे... बहुत मजा आ रहा है और फिर से दिनेश का लंड चूसने और चाटने में लग जाती है.
10 Min बाद जब दिनेश को लगता है की वो अगर रुका नहीं तो झड़ जायेगा तो वो निशा को उठा कर उसे वहां पर सुला कर उसकी टांगों के बीच आकर उसकी मस्त फूली हुई और गीली हुई लाल सुर्ख चूत को देख कर उसके टूट पड़ता है और ऊपर से नीचे तक चूस चूस कर निशा की तो हालत ख़राब कर देता है. निशा भी मस्ती में अपना हाथ दिनेश के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत में जैसे घुसा देती है.
ये कल से दूसरी बार था जब निशा ना जाने एक ही दिन में कितनी बार झड़ी थी. आज भी उसकी हालत वैसे ही थी. पहले जब वो दिनेश का लंड चूस रही थी और जब अब दिनेश उसकी चूत चूस रहा था... वो इन सब में कितनी बार झड़ी थी उसकी कोई गिनती भी नहीं थी. वो खुले आसमान के नीचे पहली बार इतना मजा ले रही थी.
10 Min बाद कहती है: दिनेश अब और मत तड़पाओ ना... मैं जानती हूँ जब हम ऐसे मिलते है तो तुम मुझे खुल कर बात करने को कहते हो... तो मैं कहती हूँ.. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है. मुझे अपने लंड से खूब चोदो ना इस शानदार मौसम में.
दिनेश: ये हुई ना जान... अब तुम सही में कह रही हो. दिनेश ऐसा बोल कर निशा की टांगें अपने गर्दन पे रख कर उसको देखते हुए... लो जान... अपने आप को सम्भालो और ऐसा कहते हुए दिनेश अपना पूरा लंड एक ही बार में उसकी चूत की जड़ तक धक्का मार के घुसा देता है. निशा भी ज़ोर से चिल्लाती है क्यूंकि उसे भी अब कोई दर नहीं था की कोई उसकी आवाज़ सुन ले…..आआआहह!!हाऐईईईईईईईईईई!!
उसको 7-8 Min तक ऐसे ही दाना दान पेलने के बाद वो खुद सो जाता है और निशा को उसके ऊपर आने को कहता है तो निशा उसके खड़े लंड पे बैठ जाती है कुदते रहती है जैसे उसका लंड कोई खिलौना हो. इस पोजीशन में दिनेश को भी मजा आ रहा था... जहाँ निशा उसके लंड पे कूद रही थी वही दिनेश भी पीछे से उसकी चूचियों को पकड़ कर दबा रहा था. ऐसे ही दोनों खूब खुले वातावरण में मस्ती चुदाई करते है और फिर लगभग एक घंटे तक उन्हें कोई रोकने वाला नहीं था. आखिर में दिनेश को भी लगता है की उसका भी पानी निकलने वाला है तो वो भी अपनी धक्कों की रफ़्तार बढ़ाते हुए आखिर कार ४- ४ शॉट मार कर इस बार निशा की चूत में ही झड़ जाता है. दोनों इस चुदाई के मजे में दोनों थक जाते है और फिर वहीँ ढेर हो जाते है.
दोनों थक जाते है लेकिन दोनों को बहुत मजा आता है.
दिनेश निशा को देखते हुए: क्यों जानू मजा आया क्या? कैसे रहा सरप्राइज?
निशा: पूछो मत. मैंने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था की तुम कभी ऐसा सरप्राइज भी दे सकते हो. पहला सरप्राइज तो ये की तुमने मुझे हनीमून पे ले आया है और दूसरा ये. मैं इसीलिए कह रही हूँ क्यूंकि तुम तो जानते हो... दीपू बेचारा तीन तीन शादी किया लेकिन अब तक एक बार भी हनीमून पे नहीं गया.
दिनेश: मैं जानता हूँ. जैम हम वापस जाएंगे तो मैं ही उसे कहूंगा की वो भी अपनी बीवियों को लेकर कहीं घूम आये.
निशा उसको चूमते हुए: तुम कितने अच्छे हो और हस देती है.
दिनेश: अरे ये तो करना ही था ना... तुम्हारे भाई और माँ ने मुझे इतनी अच्छी बीवी दी है और ऐसा कहते हुए फिर से वो निशा की चूची को ज़ोर से दबा देता है.
निशा:अब नहीं ना... मैं तो थक गयी हूँ. तुम नहीं थके क्या?
दिनेश: थक तो गया हूँ लेकिन जब इतनी सेक्सी बीवी बगल में हो तो थकान अपने आप निकल जाती है.
निशा: तुम भी ना...फिर वो दोनों ऐसे ही बातें और मस्ती करते हुए अपना वक़्त वहां पर बिताते है और फिर शाम को वापस अपने रिसोर्ट पे चले जाते है.
रात को:
रात को फिर से दोनों एक और बार जब के चुदाई करते है और दोनों थक जाते है. दिनेश निशा को अपनी बाहों में लेकर कर...
दिनेश: याद है कल मैंने बताया था की तुमसे एक बात करनी है.
निशा: याद है.. तुमने बताया था लेकिन इन २ दिनों की मस्ती मैं भूल ही गयी थी. बोलो क्या बात करनी है?
दिनेश थोड़ा हिचखिचाते हुए...मैं ये पूछना चाहता था की जब तेरे भाई ने तेरी माँ और मौसी से शादी की तो तुझे कैसे लगा?
निशा एकदम से दिनेश की तरफ देख कर..जैसे पूछना चाहती थी की अचानक से ये सवाल कैसे...
दिनेश उसकी तरफ देखते रहता है तो निशा उसको देख कर कहती है... पहले तो मुझे कुछ समझ नहीं आया की ऐसा क्यों हुआ है... लेकिन जब मैंने जाना की उनकी ज़िन्दगी उनसे जुडी हुई है और ये भी की दोनों माँ और मौसी भी बहुत प्यासी है अपने जिस्म को लेकर... तो मुझे लगा की दीपू ने जो किया शायद ठीक ही किया है. अभी दोनों माँ और मौसी भी उसका प्यार पा कर एकदम खुश है और मुझे इस बात की ख़ुशी है वो सब एकदम खुश है. वैसे अचानक से तुमने ये सवाल क्यों किया?
दिनेश: इसीलिए की मेरा भी कुछ ऐसा ही सोचना है.
निशा: मतलब?
दिनेश: यही की आंटी (वसु और दिव्या) की एक तरह से शादी कर के दीपू ने उनको जितना प्यार दिया है जो सिर्फ उनके जिस्म की प्यास से बहुत बढ़कर है... यही मुझे अच्छा लगा.
निशा दिनेश की और देख कर... मुझे नहीं लगता की तुम मुझे पूरी बात बता रहे हो... अगर सिर्फ यही बात थी तो तुम मुझे घर पे भी जब हम कमरे में अलग सोते है तो बता सकते थे....बोलो ना क्या बात है..
दिनेश को अब लगता है की वो निशा को उसके मन की बात बता दे... तो कहता है.. तुम सच कह रही हो... और एक समय में जैसे आंटी की हालत थी.... वही हालत अब माँ की भी है... और ऐसा बोलते हुए दिनेश रुक जाता है और निशा की तरफ देखता है.
निशा दिनेश की आँखों में देखते हुए... तुम कहना क्या चाहते हो?
दिनेश: यही की माँ भी आंटी की उम्र की है और उसे भी एक मर्द की ज़रुरत महसूस होती है.
निशा: ये बात तुम कैसे कह सकते हो?
दिनेश: याद है जब हम दोनों अपने गाँव गए थे होली के समय. उस वक़्त मैंने माँ को देखा था... और ऐसा बोलते हुए रुक जाता है.
निशा: क्या देखा था?
दिनेश: फिर से थोड़ा हिचखिचाते हुए... माँ अपने आप को संतुष्ट कर रही थी और मेरे बाप को याद कर रही थी. मुझे तो मेरे बाप के बारे में ज़्यादा पता भी नहीं है क्यूंकि वो बहुत पहले चल बेस थे जब मैं बहुत छोटा था. इस बारे में मैंने माँ से कभी बात नहीं की... लेकिन उस दिन माँ को देख कर मुझे लगा की उसे भी अब एक मर्द की ज़रुरत है.
जब से हमारी शादी हुई है और दोनों एक दुसरे को इतना प्यार करते है तो मैं ये सोचता था की माँ इतने साल अकेले मेरी देखभाल करते हुए अपने आप को अकेला पाती है लेकिन मुझसे कभी इस बारें में बात भी नहीं की.
निशा को अब उसकी बात समझ में आने लगती है और वो मन में सोचती है की दिनेश ही उसकी मन की बात उससे कहे.
निशा: तो तुम कहना क्या चाहते हो?
दिनेश: निशा की तरफ देख कर.... यही की मैं भी दीपू की तरह अपनी माँ से शादी कर लून और उसे भी वो ख़ुशी दूँ जो दीपू आंटी को दे रहा है.
निशा के मन में ये बात आ चुखी थी... इसीलिए वो दिनेश की और देख कर... इसीलिए तुम इतना हिचखिचा रहे थे की अगर ये बात तुम मुझ से कहोगे तो मैं क्या कहने वाली हूँ. सही बात है ना?
दिनेश: हाँ तुमने सही कहा. मुझे भी थोड़ा दर लग रहा था की अगर मैं माँ से शादी करना चाहता हूँ तो तुम क्या कहोगी... मुझे इसी बात का डर था.
निशा: हाँ बात मैं समझ सकती हूँ. कोई ये बात की इतनी आसानी से अपनी बीवी से नहीं बोल सकता की वो अपनी माँ से भी शादी करना चाहता है.
दिनेश: तुम एकदम सही कह रही हो. लेकिन फिर भी मैं तुमसे ये बात करना चाहता था और तुम्हारी राय जानना चाहता था की अगर मैं माँ से इस बारे में बात करून तो तुम क्या कहोगी.
निशा भी उसकी तरफ देख कर कहती है: अगर तुम्हे ये लगता है की तुम आंटी (ऋतू) से शादी कर के उसे वो ख़ुशी दे सकते हो जो दीपू मेरी माँ और मौसी को दे सकता है तो शायद मैं भी खुश ही रहूंगी क्यूंकि आंटी को भी मैं माँ की तरह ही मानती हूँ. मेरी अभी ही शादी हुई है और जिस्म के सुख के बारे में मुझे भी अभी पता चल रहा है. अगर तुम एक दिन भी मुझे अपना प्यार नहीं देते हो तो मैं बहुत बेचैन हो जाती हूँ.
और आंटी तो बहुत सालों से इस ख़ुशी से परे है और एक मर्द के एहसास का भी. तो मैं समझ सकती हूँ की आंटी को भी शायद जिस्म की भूक तो कभी ना कभी लगेगी ही. वो भी मेरी और माँ की तरह एक औरत ही है और औरत की ज़रूरतों को हम सब समझते है.
दिनेश निशा से ये बात सुनकर एकदम खुश हो जाता है और निशा को चूमते हुए कहता है...मैं ये भी कहना चाहता हूँ की अगर मैं माँ से इस बारे में बात करून और वो मान जाए तो मेरा प्यार तुम दोनों के लिए कभी कम नहीं होगा. तुम दोनों मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा रहोगी और इससे बढ़कर और कुछ नहीं.
निशा भी दिनेश से ये बात सुनकर खुश हो जाती है और वो भी दिनेश को चूमते हुए कहती है... मुझे पता था की तुम भी मेरे दीपू की तरह ही एकदम समझदार हो और हम दोनों को उतना ही प्यार दोगे जितना मेरा दीपू अपनी बीवियों को देता है.
दिनेश: तुम सही कह रही हो. मेरे लिए इस दुनिया में तुम दोनों दीपू और आंटियों के अल्वा और कोई नहीं है.
दिनेश : वैसे एक और बात कहूँ?
निशा फिर से उसकी तरफ देखती है जैसे पूछ रही हो की और क्या बात है.
दिनेश निशा की तरफ देख कर हस देता है और कहता है... घबराओ नहीं... बात ये है की इस बारे में मैंने दीपू से पहले ही बात कर ली है. उसने भी मुझे यही सलाह दी थी की मैं इस बारे में पहले तुमसे बात करून... और अगर तुम राज़ी हो जाती हो तो तभी मैं अपनी माँ से बात करून.
निशा दिनेश से ये बात सुनकर खुश हो जाती है और हलके से दिनेश के कंधे पे मुक्का मारती है.
दिनेश फिर से निशा को चूमता है और फिर दोनों एक दुसरे की बाहों में सो जाते है. आज दिनेश को बहुत अच्छी नींद आती है क्यूंकि उसके मन से एक बड़ा बोझ जो उठ गया था. अब उसे कुछ दिनों में दूसरा बोझ भी दूर करना था.
दोनों फिर 3-4 दिन ऐसे ही मस्ती करते है और फिर वापस अपने घर आ जाते है.
दिनेश दीपू को पहले ही फ़ोन पे बता देता है की वो दोनों जल्दी ही आ रहे है. जब वो दोनों घर आ जाते है तो ऋतू निशा के चेहरे पे ख़ुशी देखती है और मन में सोचती है की दोनों ने हनीमून में बहुत एन्जॉय किया है. इस बात पे ऋतू थोड़ा ईर्ष्या होती है क्यूंकि उसे वैसे ख़ुशी बहुत दिनों से नहीं मिली थी.... लेकिन जल्दी ही वो ख़याल अपने मन से निकल लेती है और वो दोनों दिनेश और निशा के लिए बहुत खुश रहती है.
घर आने के बाद उस दिन दिनेश ऑफिस नहीं जाता और रात को सोते समय निशा कहती है की वो अपने घर जाना चाहती है. दिनेश को भी लगता है की निशा भी शादी के बाद अपने घर नहीं गयी है तो वो कहता है की कल सुबह ही वो उसे उनके घर छोड़ कर दीपू को अपने साथ ऑफिस ले जाएगा. निशा इस बात से बहुत खुश हो जाती है. दिनेश कहता ही की वो अपनी माँ को बता देगा की तुम अपने घर जा रही हो.
अगले दिन दिनेश निशा को लेकर उसके घर जाता है जहां दोनों को देख कर वसु दिव्या और कविता बहुत खुश हो जाते है. तीनो निशा को गले लगा कर प्यार से उसके गालों को चूमते है और दिनेश से भी बात करते है.
दिनेश दीपू को देख कर कहता है... चल यार... आज तुझसे बात करनी है... आज शहर घूम कर आते है और ऐसा कहते हुए दिनेश निशा की और देख कर उसको आँख मार देता है. निशा दिनेश की बात समझ जाती है और उसे एक थम्ब्स उप देती है.
दिनेश और दीपू फिर कार से निकल जाते है शहर की और... पार्टी करने के लिए. दीपू कार को चला रहा था और दिनेश उसके बगल में बैठा हु दीपू को वो सब बताता है जो उसने निशा से बात की थी और ये भी की निशा भी उसकी दूसरी शादी के लिए मान गयी है.
दीपू: ये तो बहुत अच्छी बात है यार. शहर जा ही रहे है तो पार्टी करते है.
दिनेश: सही कहा यार... चल मैं एक सेल्फी लेता हूँ और ऐसा कहते हुए वो अपने सीट उसे उठता है और फ़ोन ऑन करता है सेल्फी लेने के लिए. जब वो फ़ोन ऑन करता है तो उसकी आँखें एकदम बड़ी हो जाती है और मुँह खुला रह जाता है. वो वैसे ही पलट कर देखता है तो उसके चेहरे पे डर साफ़ नज़र आ रहा था....
वही दीपू के घर में:
दिव्या निशा को देख कर... तू तो इस एक महीने में बहुत गदरा गयी है. देख तेरी चूची और गांड तो एकदम उभर गयी है और प्यार से उसकी एक चूची को दबा देती है.
निशा: मौसी आप भी ना... जैसे आप को पता ही नहीं है. जैसा दीपू है दिनेश भी वैसा ही है... और ये कहते हुए वो हस देती है. खाना खाने के बाद निशा उसकी माँ वसु से कहती है... माँ मुझे आपसे कुछ बात करनी है अकेले में....
Note: Last week could not post the update as I was very busy...hence this time a Mega update posted. बहुत मेहनत और सोच लगा इस अपडेट को लिखने में. उम्मीद है आप भी इस अपडेट पर उतना ही प्यार दोगे Look forward to your likes and comments. Pls do give your comments as well. Thanks.
Bahut hi mast update hain bhai.
Sorry beech beech main message nahi kar paya kyuki busy tha.
Lekin sach main ye update bahut mast hain.
Khula asman ka neecha Nisha aur Dinesh ka beech ki chudai Mast thi.
Ab Dinesh na Nisha ko bhi bata Diya hain ki woh apna maa ka saath shadi karna chahta hain lekin dekhta Hain ki kya Ritu apna beta sa shadi ka baare main sochegi.
Aur uska saath saath , Kya Ritu ye baat manegi aur ye aakhir main kya hua hoga.
Kahi koi Aisa twist toh nahi hai. Jo aane wale waqt main story ka pura Scenes change kar de.
Waiting for next update mass bhai
