SweetSonali
Active Member
- 1,526
- 1,469
- 158
Superbly written and beautifully narrated story. Excellent and exciting plot.
बहुत ही मस्त और शानदार लाजवाब मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गयाUPDATE 001
सफर
इंदौर जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 3 पर मैं एक टी स्टाल के पास खड़ा होकर , सफर के लिए स्नैक्स पानी बोतल वगैरह ले रहा था , इंदौर - पटना एक्सप्रेस अभी कुछ मिंट लेट थी ।
अक्सर मेरे साथ ये अनुभव रहा है कि जब भी कही जाने की जल्दी हो तो सवारी कही न कही खुद लेट हो ही जाती है और वो महज कुछ मिंट की देरी से लगता है कि अब समय से सारा सोचा हुआ काम होगा ही नही ।
तभी सामने से इंदौर - पटना एक्सप्रेस तेजी से हॉर्न बजाती हुई अपनी जगह पर रुकती है और मैं अपना एक पिट्ठू बैग लेकर 3Ac के एक कोच के चढ़ जाता हूं।
चढ़ते उतरते यात्रियों की भीड़ से गुजर कर अपनी सीट खोजता हुआ मैं आगे बढ़ रहा था , दोपहर के 2 बज रहे थे और ट्रेन निकल पड़ी थी ।
हल्के झटके से मैं संभलता हुआ अपना बैग वही किनारे रख कर एक महिला जो मेरे सीट पर लेटी हुई उनको खड़े खड़े आवाज देने लगा ।
आस पास के लोग भी उन्हें आवाज देने लगे , उस केबिन शायद उस वक्त तक कोई और महिला नही थी ।
स्वस्थ तदुरुस्त बदन की मालकिन दिख रही थी , पटियाला सलवार और सूट में अपने ऊपर लंबा चौड़ा काटन का दुपट्टा चढ़ाए गहरी नींद में थी वो ।
कूल्हे पर हुई सलवार में उसके मोटे विशालकाय मटके जैसे चूतड बहुत ही कामुक नजर आ रहे थे , और उन उन्नत फैले हुए नितंब को देख कर पल भर के लिए मुझे किसी की याद आई , मगर सोती हुई निर्दोष महिला के अंग निहारने से मेरे भीतर का पौरुष मुझे धिक्कारने लगा ।
मैंने नजरें फेर ली और बड़े असहज भाव से कुछ पल उनके उठने की राह निहारी , आस पास बड़ी बेबसी से जबरन होठों पर मुस्कुराहट लाकर बाकी बैठे हुए लोगो की देखा मगर शायद उन्हें भी इस चीज के लिए फर्क नहीं पड़ रहा था , शायद वो पहले भी काफी बार से उस महिला को उठाना चाह रहे थे ।
तभी उन भले लोगो में से एक ने घिसक कर मुझे खिड़की से लगी हुई किनारे की ओर सीट में जगह देदी ।
बड़ी मुश्किल से अपने कूल्हे पिचकाकर मैं वहा बैठ पा रहा था , कुछ ही मिनट बीते होंगे कि मेरी ही बेल्ट अब बगल से कुछ कमर में तो कुछ पेट में चुभने लगी थी ।
मुझे ये सफर एक झंझट सा महसूस हो रहा था , महगी टिकट और सीट भी कन्फर्म थी मगर ऐसे सफर करना पड़ रहा था ।
थोड़ा खुद को सही करता बेल्ट ढीला का बोगी की लोहे की दीवाल में सर टिका दिया , तिरछी नजर कर शीशे से बाहर निहार रहा था जल्द ही मेरी पुतलियां भी तंग होने लगी और मैंने नजरें सामने की अह्ह्ह्ह्ह गजब की ठंडक आ रही थी ,
उस महिला के दुपट्टे के नीचे से हल्की सी उसके नूरानी घाटियों की झलक सी मिली और थोड़ा सा गर्दन सेट किया तो एक लंबी गहरी दरार
आस पास नजर घुमा कर देखा तो सब बातो में लगे थे तो कोई झपकियां ले रहा था ,
मेरी नजर रह रह कर उस महिला के सूट में लोटी हुई छातियों के दरखतों के जा रही थी, कभी खुद को धिक्कारता तो कभी लालच हावी होने लगता और जैसे पल भर को आंखे मूंदता तो एक कामकल्पना से परिपूर्ण दृश्य मेरी आंखो में भर सा जाता , जहा कई कहानीयां उभर आती थी मन में ।
बार बार चीजे मन में घूमने से मेरे पेंट में कसावट सी होने लगी , जिसे छिपाने के लिए मुझे अपनी बैग का सहारा लेना पड़ा ।
कुछ देर बाद एक आदमी अगले स्टेशन पर उतर गया और मुझे भी आराम से बैठने का मौका मिला । मगर जैसे ही तन को सुख हुआ मन अपनी मनमानीयों पर उतर आया ।
अब मेरी नजर उस महिला को भरपूर नजर से निहारने लगी थी , बैग अभी भी मेरे जांघो पर थी । नीचे पेंट में तम्बू का साइज बढ़ने लगा था ।
ऐसा ही सूट सलवार कोई पहनता है जिसे मैं बचपन से देखता आ रहा हूं और वो मुझे बहुत अजीज थी ।
मेरी अम्मी ,
अभी कल ही बात लगती है कि मैं जब उनसे लिपट जाया करता था , उनके मखमली पेट पर जब वो लेटी होती थी मैं चढ़ कर अटखेलियां कर लिया करता था , उनके मोटे मोटे खरबूजे जैसे दूध की थैलियों में सर छिपा कर उनका दुलार प्यार जबरन ले लिया करता था ।
गर्मी की दोपहर अक्सर सोते हुए मेरे पैर उनके विशालकाय चूतड पर ही होते थे , अक्सर मोबाइल चलाते हुए मेरे पैर के पंजे उनके मुलायम चूतड को सलवार के ऊपर से आंटे की तरह घंटो गुदते रहते ।
अम्मी - शानू बेटा क्या कर रहा है
मैं - अम्मी मूवी देख रहा हु बस लास्ट सीन है
अम्मी - ओहो पैर हटा ना अपना , क्या कबसे गीज रहा है मुझे
मै अपनी धुन में मस्त था - अम्मी बस 5 मिंट
अम्मी - मैं क्या बोल रही हू और ये क्या सुन रहा है , कुछ नही हो सकता इसका आह्ह् रब्बा पुरा कमर लोहे का कर दिया
अम्मी लड़खड़ाती हुई उठी और गुसलखाने की ओर बढ़ गई , मैने मुस्कुरा कर मोबाइल से नजर हटा कर कमरे से बाहर जाती हुई अम्मी की मोटी थिरकती गाड़ देख कर अपना खड़ा लंड मिस दिया ।
"कितने बजे भैया ,अरे हस क्यूं रहे हो बताओ ना कितने बजे "
मै चौक कर नजर उठा कर देखा तो आस पास की सीट सब खाली थी और वो महिला जो सो रही थी वो सामने खड़ी होकर मुझे ही आवाज दे रही थी - जी ? जी 03.45 हो रहे है ।
वो महिला सुस्त होकर एक बार फिर उस सीट पर बैठ गई ।
दुपट्टे की चादर अभी भी उसके खरबूजे से चूची को अच्छे से ढके हुए थी मगर उनके उभार छिपाने में नाकाम थी ।
महिला - भैया पानी साफ है क्या ?
मै - जी , लीजिए
मैंने ढक्कन खोलकर उसकी और बढ़ाया और एक सास में जितना पी सकी वो पी गई , कुछ छलक कर उसके होठों से होकर ठूढी से टपक कर उसके सीने पर गिरने लगी और दाई ओर से चूचे के ऊपरी भाग पर दुपट्टा और सूट पर थोड़ा सा हिस्सा गिला होकर उसके सीने से चिपक गया , देखने ऐसा लग रहा था मानो दुपट्टे के नीचे उसकी रसदार चूचियां पूरी नंगी ही है ।
उसने मुझे पानी का बोतल दिया - थैंक यू
मैंने मुस्कुरा कर - आप अकेली सफर कर रही है क्या ?
उस महिला ने मुझे अजीब नजरो से देखा और फिर कुछ देर चुप्पी किए रही मुझे लगा शायद उसे मेरा सवाल समझ नही आया या फिर मेरी शक्ल ही ऐसी है ।
कुछ देर बाद वो बोली - मेरी बहन का इंतकाल हो गया था उसी सिलसिले में आई थी अब वापिस जा रही हू , और मेरे शौहर बाहर रहते है ।
उसकी बातें सुन कर मुझे तो बहुत गहरा दुख हुआ , फिर मैंने उसे खाने के लिए पूछा पहले तो उसने मना किया फिर मैंने जब दुबारा से कहा तो वो उसने मेरी टिफिन से एक रोटी ले ली
मै - कैसी है सब्जी , मैने बनाई है ?
वो मुस्कुराई और स्वाद लेती हुई - बनानी आती है क्या ?
मै - हा अम्मी से सीखी है ,
वो - अच्छी है
मै टिफिन आगे कर - और दू
वो ना में सर हिलाती हुई खाना खाने लगी और उसकी निगाहें शीशे से बाहर थी । गुमसुम सी आंखे उसकी बहुत हल्की फुल्की मुस्कान लिए सब देख रही थी ।
[मैंने भी नज़रे बाहर की ओर कर सपाट खेतो की ओर निहारने लगा , मेरी बनाई हुई सब्जी अभी भी मेरे दांतो मे पिस रही थी और मेरे चेहरे पर एक मुस्कुराहट थी
"ओहो , ऐसे नही जला देगा तू हट, हट जा " अम्मी मुझे अपने देह से मुझे धकेलती हुई मेरे हाथो से कलछी और कपड़ा ले लेती है जिससे मैंने कराही पकड़ी थी ।
अम्मी के मुलायम स्पर्श से मैं भीतर से सिहर उठा और वही उनसे लग कर खड़ा होकर उनके देह से आ रही भीनी सी खुश्बु को अपनी सासो में बसा लेना चाह रहा था ।
" अब अगला उबाल आए तो उतार देना "
" अब अगला स्टाफ आए तो बता देना " , उस महिला ने कहा ।
" जी ? जी , ठीक है "
महिला मुझे घूरती हुई - तुम फिर मुस्कुरा रहे हो ?
मै हंसता हुआ - जी ? वो काफी समय बाद घर जा रहा हु तो बस अम्मी की बातें याद आ रही है ।
वो महिला मुस्कुरा कर - बहुत प्यार करते हो न अपनी अम्मी को ?
मै अचरज से - आपको कैसे पता ?
महिला इतराहट भरी मुस्कुराहट से - तुम्हारी बातों में तुम्हारी अम्मी ही बसी होती है इसीलिए
मै उसकी बात सुनकर ऐसे मुस्कुराता जैसे वो मेरी प्रेमिका के बारे में बोल रही थी ।
महिला - कहा से आ रहे हो ?
मै - जी इंदौर में ही नौकरी है मेरी और लखनऊ जाना है ।
महिला - खास लखनऊ ही ?
मै - जी नहीं , वहा मुख्य शहर से बाहर एक गांव है वही घर है मेरा और आप ?
महिला - मुझे अगले ही स्टेशन पर उतरना है और फिर यह तो तुम अकेले पड़ जाओगे
मै हस कर - आप भी चलिए फिर मेरे साथ
महिला खिलखिलाई - अम्मी से मिलवाने हिहिहिही
मै भी उसकी खिलखिलाई सूरत देख कर हस पड़ा - हा और है ही कौन मेरा ?
वो महिला का चेहरा फीका सा पड़ने लगा - क्यू , अब्बू नही है ?
मै मुस्कुरा कर - है , वो मेरी उनसे खास बनती नही इसीलिए
महिला - और बहन ?
मैंने ना में सर हिला दिया ।
कुछ देर यूं ही हमारी बातें चलती रही और फिर आधे घंटे बाद वो उतर गई , जल्द ही कुछ नए यात्री आ गए मैंने भी इत्मीनान से अपनी सीट लेली और पैर फैला कर कोने से टेक लेकर आंख मूंद लिया ।
मेरे जहन में अब भी उस महिला की बातें चल रही थी और वो लाइन मेरे दिल में बस सी गई थी " तुम्हारी बातों में तुम्हारी अम्मी बसी होती है "
गाड़ी स्टेशन दर स्टेशन गुजरती रही और भीड़ आती जाती रही , चेहरे बदलते रहे
" अरे अरे भाई साहब देख कर बैग है मेरा " मैने एक आदमी को डांट लगाई हो अपने परिवार के साथ अभी अभी बोगी में चढ़ा था और उसके जूते मेरे बैग पर आ गए थे ।
मैंने झल्लाते हुए बैग ऊपर किया और उसको झाड़ते हुए चैन खोल कर बैग में रखा हुआ वो गिफ्ट का वो बॉक्स देखा जिसकी लाल चमकीली पन्नी देख कर मेरे होठ मुस्कुराने लगे ।
मैंने वापस बैग की चैन बंद कर बैग को अपने गोद में रख कर सीने से लगाए हुए आंख बंद लिया ।
" नही नही नही , इससे बड़ी नही मिलेगी भैया ये ही सबसे बड़ी size मेरे पास "
" भैया आपको जितने पैसे चाहिए लेलो कही से मेरे लिए शेम यही सूट की 4XL साइज देदो" , मैं मिन्नते करते हुए उस दुकानदार से बोला ।
दुकानदार ने अपने किसी स्टाफ कर बाजार की दूसरी गली से वही ड्रेस मेरे पसंद की साइज में मंगवाई और मैंने फाइनल करवा लिया
दुकानदार - देख समझ लो भैया इस साइज की कोई वापसी नहीं लूंगा मैं , आपको यकीन है ना कि जिसको आप देंगे उनकी साइज यही है ?
मै मुस्कुराता हुआ - हा भईया पता है , मेरी ही अम्म..... , अब पैक भी करवा दो ।
" टिकट टिकट , ओह भाईसाहब टिकट दिखाइए"
मैंने टीटी को अपनी टिकट दी और वो आगे बढ़ गया
मेरे मन में एक कड़वाहट सी होने लगी थी अब , ढलती रात में भी कोई न कोई मुझे डिस्टर्ब कर देता था । जिस वजह से मैने एसी की टिकट निकलवाई थी वो सफल नहीं दिख रही थी
मेरी नजर ऊपर के बर्थ पर गई सोचा किसी से बदली कर लू
मगर ऊपर वही आदमी लेटा हुआ मोबाइल चला रहा था जिसको आते ही मैंने फटकार लगा दी थी ।
रात के 10 बजने को हो रहे थे कि मेरी फोन की घंटी बजनी शुरू हुई और स्क्रीन पर अब्बू का नंबर देख कर मेरा मूड और भी उखड़ सा गया - हा हैलो नमस्ते अब्बू
: हम्म्म लो तुम्हारी अम्मी बात करेगी
मै एक पल के चहक उठा मगर अगले ही पल जब अहसास हुआ कि अब्बू भी घर पर है तो मेरा मन मायूस सा हो गया ।
मै - जी नमस्ते अम्मी
: क्या हुआ बेटा , तबियत ठीक है ना तेरी ? ट्रेन मिली ? कुछ खाना पीना किया ?
सवालों पर सवाल, फिकरमंद अम्मी ने मुझपर दागे और उसके लाड में मैं भी मुस्कुरा कर - इतनी फिकर है तो खुद क्यूं नही आती जाती हो अपने बेटे के साथ , हूह
मोबाइल में छाई चुप्पी की वजह मै समझ सकता था अब्बू के कारण अम्मी खुलकर कभी मुझसे अपने दिल की बात नही कहती और न ही ज्यादा लाड प्यार जताती ।
मै उनकी चुप्पी पर उखड़े मन से बोल पड़ा - आप फिकर ना करे , अब्बू से कह दें , मैं ठीक हूं और खाना पीना भी हो गया है सुबह 6 बजे लखनऊ पहुंच जाऊंगा ।
: ठीक है बेटा , रखती हु
मै - जी बाय
अभी फोन कटा नही था और अब्बू को शायद लगा कि कट गया । फोन पर उनकी बड़बड़ाहट और अम्मी पर गुस्सा साफ साफ सुनाई दे रहा था ।
ये सब पहली बार मैं नही सुन रहा था और मैने फोन काट दिया । आंखे भर आई मेरी ।
मेरी डबडबाई आंखे मिडल बर्थ पर लेटी एक चाची ने देख ली और करवट लेकर बोली - क्या हुआ बच्चा , सब ठीक है ना
मै आंख पोछ कर - जी ? जी सब ठीक है ?
चाची - अकेले सफर कर रहे हो क्या बच्चा
मै - जी चाची , घर जा रहा हु
चाची - कुछ खाना पीना किया ?
मै मुस्कुरा कर - आप फिकर ना करें , मैं खाना खा चुका हु । वो बस अम्मी की याद आ गई थी
चाची सीधी होकर लेट गई - सो जा बच्चा , रो कर अपनी अम्मी को तकलीफ मत दे
मै अचरज से - मतलब ?
चाची - अरे वो तेरी अम्मी है , तू उसका ही अंश है तू रोएगा तो उसका भी कलेजा रोएगा बेटा । सो जा
मै उसकी बात सुनकर अपने आशु साफ किए और लेट गया
मेरे दिमाग में उस चाची की बात घूमने लगी कि क्या सच में ऐसा होता होगा कि मैं जैसा महसूस करूंगा वो अम्मी भी करेंगी । अगले ही पल मेरी घटिया सोच मेरे साफ पाक भावनाओं पर हावी हो गई ।
मै मुस्कुरा कर खुद को गाली देते हुए - बीसी तू नहीं सुधरेगा कभी हिहीही
कुछ देर तक लेटे रहने के बाद भी मुझे नीद नही आ रही थी रात गहराती चली गई और ख्याल अम्मी के बातें उनकी यादों से भरता चला गया ।
मै उठा और बैग सही से रख कर बाथरूम की जाने लगा रास्ते में बोगी के हर कपार्टमेंट में कोई न कोई महिला के कपड़े अस्त व्यस्त दिखे ।
मन में तरंगे भी उठनी शुरू हुई और बाथरूम में जाते ही मैंने अपना अकड़ा हुआ लंड निकाल कर पेशाब करने लगा
मोबाइल हाथ में था तो उसको चलाने लगा कि मेरी नजर गैलरी ऐप पर गई
मै पूरी शिद्दत से अपने मन को रोक रहा था मगर मेरे दिमाग पर हवस हावी होने लगा था और मैने गहरी सास लेते हुए hide image से एक तस्वीर बाहर निकाली
वो एक वीडियो कॉल के दौरान ली गई स्क्रीन शॉट थी जिसमे अम्मी पहली बार बिना दुपट्टे के मेरे सामने थी और मैंने झट से वो कैप्चर कर ली थी ।
तस्वीर में उनके उन्नत और सूट में कसे हुए थन जैसे चूचे देखकर मेरा लंड बौरा उठा और मैं तेजी से अपना लंड सहलाते हुए आंखे बंद कर कभी अम्मी का चेहरा याद करता तो कभी तस्वीर में अम्मी की मोटी मोटी चूचियां निहारता , उनके गुलाबी गाल और लाल लाल कश्मीरी सेब रंग के होठ देख कर मेरे होठ बड़बड़ाने लगे ,मगर ट्रेन के टॉयलेट में एक डर था कि कही कोई मेरी आवाज न सुन ले ।
अम्मी उह्ह्ह्ह मेरी अम्मी आप क्यू नही आ जाती मेरे पास अअह्ह्ह्ह सीईईईईईआई मैं आपको हमेशा के अपना बना लेना चाहता हुं उह्ह्ह्ह पकड़ो ना मेरा लंड , कब मेरे तपते लंड को अपने इन होठों की मिठास से ठंडा करोगी , कब मेरे होठ तुम्हारे रसीले निप्पल को दुबारा से जूठा करेंगे अअह्ह्ह्ह अम्मी अहह्ह्ह्
मै अब और नही रूकूंगा अअह्ह्ह्ह इस बार तो आपको छू लूंगा , आपके बड़े मुबारक चूतड पर हाथ लगाऊंगा अह्ह्ह्ह्ह अम्मी कितने साल हो गए आपकी नरम नरम गाड़ को छुए , आपके बड़े रसीले खरबूजे जैसे चूची में अपना सर रख कर सोए उह्ह्ह्ह अम्मी मुझे बड़ा नही होना अअह्ह्ह्ह मैं आपका होकर रहना चाहता हु अह्ह्ह्ह सीईईईईईआई मत दूर करो मुझे उह्ह्ह्ह ओह येस्स उम्मम्म गॉड फक्क्क्क उह्ह्ह्ह अम्मीई अअह्ह्ह्हह
और देखते ही देखते मेरी तेज गाढ़ी मलाईदार पिचकारी बाथरूम की दिवालों पर एक के बाद एक छूटती रही और मैं मोबाइल जेब में रख कर अंत तक उसे निचोड़ता रहा ।
फिर आकर अपनी सीट पर सो गया
अगली सुबह तड़के मेरी नीद खुली , कंपार्टमेंट में अजीब गुपचुप तरीके भिनभिनाहट मची हुई थी और कुछ देर में मुझे भनक लगी कि वहा अनजाने में लोग मेरी ही बात कर रहे थे , क्योंकि हिलाने के बाद मैने पानी से कुछ भी साफ नही किया था वैसे ही निकल आया था ।
मुझे हसी भी आई और खुद को गालियां भी दी मैने की एक जग पानी मार देता तो क्या हो जाता
खैर मैं लखनऊ उतर चुका था मुझे सीतापुर रोड के लिए बस लेनी थी और आगे 15-17km बाद ही हाईवे से लगा मेरा छोटा सा कस्बानूमा गांव था - काजीपुर ।
जारी रहेगी
बहुत ही शानदार और जानदार अपडेट हैं भाई मजा आ गया गयाUPDATE 002
मनपसंद हलवा
"अम्मी ...अम्मी आओ ना "
मैं उनको आवाज देते हुए रसोई घर से हाल में आ गया , सामने देखा तो अम्मी सोफे पर सर टिका पर लेटी हुई थी और उनका सूट कूल्हे से हट गया था ।
बड़े विशालकाय चूतड बिना पैंटी के सलवार में साफ साफ झलक रहे थे , मगर दिल अक्सर यही बेईमान हो जाता है , उधर मेरी दसवीं के प्रैक्टिकल के लिए गृह विज्ञान की रेसिपी जल रही थी और यहां अम्मी के भारी चूतड को बेपर्दा हुआ देख कर भीतर से मैं ।
अम्मी को देख कर लोअर में मेरे हलचल ही होने लगी , ऐसा पहली बार नही था जब मैंने अम्मी के मुबारक पहाड़ जैसे ऊंचे उभरे हुए कूल्हे और मुलायम गाड़ देखी थी, मगर हर बार महज झलक भर से वो हसीन नजारा मेरी आंखो से कही खो सा जाता था
मगर आज वो दिन कुछ और ही था , मै धीरे धीरे अम्मी की ओर बढ़ने लगा मेरी नजर एक टक उनकी गाड़ की लाइन में जमी थी जो सलवार पर उभरी हुई थी , देखने भर से ही मुझे भीतर से महसूस हो रहा था कि कितने मुलायम होंगे , मेरे लोअर में लंड हरकत करने लगा था
मैंने मौका देख कर उन्हे छू लेना चाहा , मेरे हाथ उन लजीज रसभरे फूले हुए गुलगुलो को छुने को मचल रहे थे
" शानू "
एक तेज करकस आवाज और मैं भीतर से कांप उठा , मेरा रोम रोम भीतर से थरथराने लगा । डर से चेहरा सफेद होने लगा और उस आवाज से अम्मी भी चौक कर उठ गई ।
वो अब्बू की आवाज थी और अम्मी हड़बड़ा कर जल्दी जल्दी अपना दुपट्टा सर पर करने लगी और उन्हें कही से जलने की बू आई और वो मेरी ओर देखी और गुस्से से लाल होकर - अब फिर से क्या जला रहा है कमीने तू
अम्मी गुस्से में भागती हुई रसोई घर में गई और मैं भी तेजी से उनके पीछे गया - सॉरी अम्मी , कबसे तो जगा रहा था आपको , अब ये हलवा भी जल गया । कल मेरा प्रैक्टिकल है ?
अम्मी ने एक नजर बाहर देखा और अब्बू को ना पाकर एक गहरी सास ली - उफ्फ, बेटा तूने इसमें हिस्सा लिया ही क्यों ?
मै - अम्मी वो मीनू मैडम ने सबको बोला है सिख कर आने को ,कहती है कि शादी के बाद काम आयेगी
अम्मी मेरे भोले से जवाब पर खिलखिलाई - अच्छा तो तु भी इसीलिए सीख रहा है कि शादी के बाद अपनी बीवी को हलवा खिलाएगा हिहिही
मै हल्का सा उनके करीब होकर उनसे लिपटने को हुआ - नही तो ? मै तो अपनी प्यारी अम्मी को खिलाऊंगा ।
अम्मी रसोई घर से बाहर देखती हुई मुझसे दूर हट गई - हा हा अब लिपट मत , बड़ा आया प्यारी अम्मी का दीवाना हिहिही
मुझे बड़ी जलन सी हुई कि एक तो अम्मी ने मुझे दूर किया और उसपे से मेरे प्यार का मजाक उड़ाया , गुस्सा भी आ रहा था तब मगर मैं अपनी अम्मी से नाराज कैसे हो सकता था । कितना मुश्किल होता है जिससे प्यार करो उसपे गुस्सा दिखाना । फिल्मों में कई बार ऐसा देखा था सोचता था कि ये सब नाटक होगा मगर वो सब हकीकत में मेरे साथ होता दिख रहा था ।
: लेलो बाबूजी अच्छे आम है
: कैसे दिए काका ?
: पक्के हापुस है बाबूजी , मुंह लगाओ तो भैंस की थन जैसे दूध की तरह रस से भर जाए
मै मुस्कुराया - अरे दिए कितने भाव से ?
: 250 रुपए दर्जन से बेंच रहा हु बाबूजी
मैंने रेडी वाले काका को उसके पैसे दिए और आम लेकर आस पास देखा तो हाईवे से मेरे टाउन की ओर जाने वाले रूट पर कुछ ऑटो रिक्शा लाइन में लगे थे ।
सुबह का समय था सबके नंबर थे और पहली वाले में मैं भी बैठ गया ।
" लो भैया तुम भी खाओ , चने अच्छे है " , उस ऑटो वाले ड्राइवर ने मेरी ओर हाथ बढ़ाया ।
मै - जी अभी ब्रश नही किया मैंने
ड्राइवर : खुशबू अच्छी है , कितने भाव के दिए
मैंने एक नजर उस चाइना पन्नी में रखे हुए दो दरजन आमों की ओर देखा और मुस्कुरा कर - 250 के 12
ड्राइवर : बाप रे इतनी मंहगाई , हम जैसो को तो अब छुने को नहीं मिलती । रोशनी की मां तो चार रोज से कह रही है कि सीजन है आम लेते आओ बच्चे ज़िद दिखाते है । मगर पैसे दाल रोटी से बचे तो न शौक पूरे हो ।
उस ड्राइवर की लार छोड़ती जीभ ही ये सब उससे बुलवा रही थी ये तो पक्का था और मुझे हसी तब आई जब इसमें भी अम्मी की कही बात याद आ गई,ऐसे जब कोई चर्चा करे तो उसे अपने हिस्से से कुछ देदो नही तो नजर लग जाती है चीजों में ।
और नजर लगने का मेरा अनुभव बहुत बुरा रहा है , चार चार रोज तक पेट छुटता रहता था बचपन में । फिर अम्मी किसी सोखा ओझा से झाड़ फूंक करवाती तब तबियत ठीक होती मेरी ।
मै झट से 4 आम निकाल कर उसको देने लगा , वो मना करने लगा - अरे रोशनी बिटिया के लिए लेते जाओ , उसके चाचा की ओर से । बच्ची खुश रहेगी
वो ड्राइवर के चेहरे पर खुशी की लाली देख कर मैं खुश हो गया ,उसने एक पुराने से झोले में वो आम पहले अपने गमछे में लपेटे फिर रखे ।
फिर तो मानो उसमे कोई तेजी आ गई ,ये चिल्ला चिल्ला कर सवारियां बटोरने लगा और फिर मुझे अपने बगल में ही बिठा लिया
: कहा से हो बाबू तुम
: जी काजीपुर से ही हूं
: खास काजीपुर में ? कौन सा टोला ?
: खोवामंडी
: अच्छा वो बिलाल भाई जो टेलर है उनके आस पास क्या ?
: जी जी , बस वही गली में घर है मेरा
: क्या नाम है अब्बा का तुम्हारे बाबू
: जी अकरम अली
: अरे तो तुम वो बड़े बाबू के बेटे हो , वाह मिया क्या बात है , तुम्हारी भी नौकरी है ना कही ?
मै उसकी खुशी देख कर खुद भी खुश होने लगा और वो तेजी से ऑटो चलाता हुआ मुझसे बात करता रहा ।
: जी इंदौर में है
: अच्छा अच्छा , क्या करते हो वहा
: वो **** विभाग में सीनियर टेक्नीशियन हू
: सरकारी है ?
: जी
फिर वो आखिर तक मेरा स्टाफ नही आ गया कभी अपनी गरीबी की मार तो कभी मेरे अब्बू की बड़ी बड़ी बातें करता रहा और फिर मैं उतर गया ।
: क्या इंजीनियर साहब , शर्मिंदा करेंगे अरे बड़े बाबू सुनेगे तो क्या कहेंगे ।
: अरे बोहनी का समय है रख लीजिए
फिर मैंने जबरन उसे पैसे दिए और अलविदा कहा और निकल पड़ा अपने चौराहे से घर की ओर
सुबह का वक्त अब खड़ा होकर दुपहर की धूप छूने हो रहा था , सड़क के किनारे से होकर मकानों की छाया में चलने लगा था मैं ।
चौराहे से घर अभी दूर था और खोवामंडी के बंदर पूरे लखनऊ में आतंक मचाते हैं इसीलिए उधर जाने से पहले एक किराना स्टोर से झोला लेने चला गया ।
:हरी वाली इलाइची लेना बड़ी बड़ी हो एकदम अंगूर के दाने जैसी , ऐसी मरियल मत लेना और लिख ...
: बादाम पिस्ता 100 100 ग्राम , उस सेठानी से कहना कि नए पैकेट खोल के देगी , नही तो इस बार अच्छे से हिसाब करूंगी इसका ।
: अम्मी आपकी सहेली है तो आप चले जाओ ना , वो आंटी मुझे बहुत परेशान करती है
: प्रैक्टिकल किसका है
: मेरा ( उतरे से चेहरे से )
: हा तो जाना हो जा नही तो रहने दे और तेरी मामी लगेगी वो थोड़ा मजाक सहना सीख
मै - नमस्ते मामी
सेठानी - अरे शानू बेटा, आजा आजा चाय बन ही गई , कैसा है ?
मै - जी ठीक हु मामी , नहीं अभी ब्रश नही किया । मुझे एक झोला चाहिए था
सेठानी - हा हा अपनी मामी के लिए तेरे पास 100 बहाने है अभी कोई छोरी भैया बोल कर भी बुलाए तो उसके पीछे भौरा बनके नाचता जाएगा
मै मुस्कुराने लगा सेठानी का मजाक कुछ ऐसा ही था रिश्ते में मामी लगती थी क्योंकि मेरे मामू का ससुराल इनके मायके के गांव में ही था ।
: कही कोई पटा तो नही रखी उधर ,मुझे बता दे तेरी अम्मी को नहीं बताती मै
: क्या मामी लाओ झोला , ये सब नहीं करता मै ( मुझे कोई छेड़े मुझे भाता नहीं था )
: हम्मम फिर ठीक है और खबरदार मेरे अलावा किसी पर डोरे डाले तो
: क्या कर लोगी ( मै हसा)
: ऐसे कान पकड़ कर घर खींच लाऊंगी तुझे बदमाश कही का , चल अब चाय लाई हू पी कर ही जा
हार कर मुझे चाय पीनी ही पड़ी और चुस्कियां लेते हुए - मामी एक बात पूछूं
सेठानी - हा बोल
मै - पूरे खोवामंडी एक मैं ही मिला था परेशान करने को , इतने हैंडसम है आपके शौहर फिर भी मुझ अबला पर डोरे डालती हो
सेठानी - शुक्र कर अभी तक तेरा तबला नही बजाया , मुझे तो तू बड़ा नमकीन लगता है ना इसलिए
मै अजीब सा मुंह बना कर - नमकीन
सेठानी मेरे गाल खींच कर - हा हर तरह के मसाले है तुझमें हिहिही
मै उठता हुआ अपने गाल झाड़ने लगा मानो उसके उंगलियों के निशान मिटा रहा हो कही अम्मी ना देख ले - धत्त मामी तुम भी ना , अब मैं जा रहा हु
मै उठ कर जाने लगा - पोंछ ले पोंछ ले एक दिन खूब गाढ़ी लाल लिपस्टिक लगा कर पप्पी लूंगी , जुम्मे रात तक नहीं छूटेगी
मै डर गया कि इसका कोई भरोसा नहीं वो अम्मी के आगे भी मुझे छेड़ने से बाज नहीं आती है और मैं सरपट अपना सामान लेकर निकल गया
मुहल्ले में घुसते ही लोगो की सलाम बंदगी चालू हो गई , रुक रुक कर सबसे सफर का हाल चाल साझा करना पड़ा
घर वापसी मुझे ये एक और झंझट मेरा पीछा नहीं छोड़ती, सब के सब अब्बू की वजह से और जबसे नौकरी की पढ़ाई के लिए बाहर गया तबसे मेरा हाल चाल कुछ ज्यादा ही लेते है
हर बार मेरी छुट्टियों के पल से घंटे दो घंटे भर का समय ये सब खा जाते है और लिहाज बस मैं कुछ कहता नही बस भीतर ही भीतर जलता हूं कि इन कमबख्तो की वजह से मुझे मेरी अम्मी के पास पहुंचने में जो देरी लग रही है उसकी तड़प ये क्या जाने ।
जबरन विदा लेकर घर की ओर गुजरने लगा , खोवामण्डी अब कहने को खोवामंडी रह गई है । पुराने हलवाई अब सब यहां से अमीर होकर शहर चले गए , उनकी दुकानों में अब दूसरे चाय नाश्ता की टीन शेड लग गई है और इसी वजह से यह बंदर बहुत बढ़ गए है ।
अक्सर घर आते हुए मेरी नजर बिलाल के बंद पड़े पुराने मकान की दूसरी मंजिल की बाहर दीवार पर निकले हुए सलियों पर जाती है , जहा एक बार एक हरामी बंदर अम्मी की नई सलवार ले कर भागा था और बिलाल के छत की चारदीवारी पर से गिरा दिया मगर वो उन बाहर निकले हुए सलियों में अटके गया ।
और पूरे मुहल्ले को पता चल गया था कि अम्मी के कूल्हे कितने चौड़े है ।
पूरे बरसात अम्मी का वो सलवार वहा झंडे के जैसे लहराता रहा और बारिश धूप में सड़ गल कर खत्म हो गया ।
आज भी मेरी नजर वहा गई और भीतर से एक दबी हुई खुन्नस उस बंदर के लिए हल्की सी बजबजा कर शांत हो गई
मै घर का चैनल सरका कर बरामदे में दाखिल हुआ और अब्बू के पैर छुए
: खुश रहो और जाकर नहा लो पहले
: जी अब्बू
फिर मैं अपना समान लेकर दरवाजे से घुसा और गैलरी से हाल में गया , अम्मी कही नही दिखी ।
किचन में झोला रख कर मैं बैग लेकर ऊपर अपने कमरे में जाने लगा और मुझे ऊपर अम्मी की पायलों की खनक मिली
मै खुश हुआ और कमरे के दरवाजे पर बैग रख कर - अम्मीई
अम्मी खुश होकर मेरी ओर देखी और अपना दुपट्टा सही करने लगी - अरे आ गया बेटा
मै आगे बढ़ा और झुक कर अम्मी को कमर से पकड़ कर उनको पूरा उठा लिया - अम्मी मेरी अम्मी मैं आ गया हिहिहि
: अरे ये क्या कर रहा है शानू छोड़ मुझे , तेरे अब्बू ने देख लिया तो शामत हो जाएगी
अब्बू का नाम आते ही मेरा मुंह उतर गया और उखड़ कर मेरे मुंह से निकल ही गया - इतना भी क्या डरना अब्बू से
अम्मी आंखे दिखा कर - शानू चुप कर तू , क्या बोले जा रहा है
मेरा मूड खराब हो गया , भीतर से एक चिढ़ सी हो रही थी हर बार जब कभी अम्मी के करीब होने का सोचता या अब्बू आ जाते या फिर उनका नाम और अब तो धीरे धीरे अब्बू के नाम से भी मुझे चिढ़ होने लगती है ।
अम्मी मेरा उतरा हुआ चेहरा देख कर मुस्कुराई और बोली - वैसे मैंने तेरे लिए आज आम और सूजी वाला हलवा बनाया है ।
मै खुशी से चहक उठा और थोड़ा जलन भी हुआ कि इन्हे सब पता होता है मुझे कब कैसे मनाना है । कभी तो मुझे फिल्मों वाला ड्रामा करने देती ये औरत ।
मै - सच अम्मी और अब्बू आम लाए थे?
अम्मी मुस्कुरा कर थोड़ा हक जता कर - लायेंगे क्यू नही, उनमे इतनी हिम्मत जो तेरी अम्मी का कहा टाल दे हिहीही
मै हसने लगा तो वो मेरे बाल में हाथ घुमा कर जा जल्दी से नहा ले और कपड़े निकाल कर वाशिंग मशीन में डाल देना
अम्मी बाहर जाने लगी तो मैंने उन्हें रोका - अम्मी रुको न
अम्मी मुस्कुरा कर - हा बोल ना
मैंने झट से बैग से वो चमकीली पन्नी वाला गिफ्ट निकाल और उनको देता हुआ - ये आपकी शादी की सालगिरह का तोहफा अम्मी ,
अम्मी उस चमकती लाल पन्नी वाली गिफ्ट के पैकेट को देख कर खुश हो गई - वाओ कितना प्यारा पैकिंग हुआ है और ये क्या लिखा है
मेरी प्यारी अम्मी को शादी की सालगिराह मुबारक हो , आपका शानू और ये क्या है ?
अम्मी ने उंगली रख कर एक emoji पर मेरी ओर देखा और वहा मैंने एक चुम्मी वाली emoji अपने पेन से बनाई थी जिसे देख कर मेरी हसी निकल गई ।
अम्मी मुझे देख कर मुस्कुराई - बदमाश कही का ,चल मै जाती हु तू जल्दी से आजा नहा कर
मै - अम्मी खोल कर देखो ना क्या
अम्मी - नही नही बाद में जल्दी से नहा कर आजा अभी तेरे अब्बू ने नाश्ता नहीं किया है लेट हुआ तो डांट मिलेगी
फिर अम्मी वो गिफ्ट अपने हाथ ऐसे झुलाते लेकर कर गई मानो मेरा दिया हुआ दिल लटका रखा हो और मेरे मजे ले रही हो , मुझे सता रही हो कि ऐसे ही लटका कर रखूंगी तुझे बच्चू ।
मुझे फिर गुस्सा आया मगर उनकी हिलकोरे खाती बलखाती गाड़ ने मेरे दिल को चैन दिया और मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई ।
ना जाने क्यों अम्मी पर गुस्सा मैं कर ही नहीं पाता ।
खैर मैं नहा कर नीचे गया , चाय नाश्ता होने लगा । अब्बू से मेरी कोई खास बात चीत होती नही थी मगर न जाने क्यू वो आज वो खुद से पहल कर बातें कर रहे थे ।
: वहा रहने वहने की कोई दिक्कत नही है ना
: जी नहीं अब्बू , नया फ्लैट है rent भी सस्ता है उसका
: आस पास का क्या माहौल है
: सब ठीक ही है ,क्यों ?
: अरे घर परिवार लेकर रहने लायक है या नही ये पूछ रहा हूं
: हा , और भी लोग है वहा फैमली लेकर ( मैने अम्मी की ओर देखकर इशारे से पूछा क्या बात है तो वो ना में सर हिला दी जैसे उन्हें भी नही पता हो )
: ठीक है , आज शाम को अनवर भाई साहब आ रहे है थोड़ा कायदे से पेश आना
: जी अब्बू
मै बड़ी उलझन में था कि अब्बू ने मुझसे ऐसे बात क्यू की और फिर अनवर चचा को मुझसे क्या काम हो सकता है ।
अम्मी के पास भी इनसब का कोई जवाब नही था और अब्बू नाश्ता कर बाजार के लिए निकल गए ।
शाम हुई और तकरीबन 5 बजे तक अनवर चचा अपनी इनोवा से पूरे परिवार के साथ घर आए ।
चचा-चची के साथ उनकी बहु और उसने दो छोटे बच्चे थे जो बरामरे गलियारे हाल में शोर मचा कर खेल कूद करने लगे और अम्मी के साथ सबके लिए नाश्ते लगाते समय मेरी नजर हाल में अनवर चचा की बहु के साथ बैथी हुई रेहाना पर गई
: ओह नो , नो नो अम्मी मैं तो भाग रहा हु इंदौर अभी के अभी
: क्या हुआ शानू
: अम्मी रेहाना आई
: क्या ( अम्मी चौक कर रसोई से हाल में देखी )
हम दोनो उसके आने का मतलब साफसाफ समझ गए थे और मुझे समझ आ गया कि क्यू सुबह नाश्ते पर अब्बू ने मुझसे मेरे रहने वाली जगह का जायजा लिया
मै अम्मी को कंधे से पकड़ कर अपनी ओर घुमाया और उसकी आंखो में अपनी डबडबाती आंखो से पूरे विश्वास से देखता हुआ : अम्मी .... मै ये शादी नही करूंगा .
अम्मी एकदम से हड़बड़ा गई मेरी आंखो में आंसुओ के साथ साथ एक बगावत दिख रही थी जो मेरे ही अब्बू के खिलाफ थी , उन्हे डर था कही मेहमानों के आगे मै कुछ हंगामा ना कर दू ।
अम्मी मेरे चेहरे को थाम कर अपनी ओर किया - बेटा देख तू चुप हो जा और खुदा के लिए तू कुछ अनर्थ मत करना वरना तेरे अब्बू खाम्खा नाराज हो जाएंगे
मेरी आंखे सुर्ख लाल होने लगी मुझे अपनी अम्मी मुझसे दूर होती दिखने लगी वो सोच ने मेरी आंखे छलका दी
और होठ बुदबुदाहट के साथ फफकने वाले थे की अम्मी ने उंगली रख दी - नही बेटा रोना मत , तुझे मेरी कसम है अगर तू रोया तो
वो अपने दुपट्टे से मेरा चेहरा पोछने लगी उनकी आंखे पूरी नम हो गई थी ।
मै तो भीतर से टूट ही गया मानो , अम्मी ने तो मुझे मेरे हिस्से का दुख भी मनाने की इजाजत नही दी और अगले ही पल अम्मी ने मुझे अपने सीने से लगा लिया मैं हार कर फफक पड़ा - अम्मी मुझे ये शादी नही करनी , नही करनी
अम्मी ने मेरा सर अपने सीने से लगा कर कस लिया मुझे सालों बाद उनके गुदाज नरम फूले हुए चूचे मेरे गालों को छू रहे थे और अम्मी ने जब मुझे कसा तो वो ऐसे दब रहे थे जैसे पाव की बन हो , उसपे से उनकी सूट से आती वो मादक गंध मेरे नथुनों में बसने लगी थी । कई बार मैं इनकी खुशबू ले चुका था - तू फिकर ना बेटा , तेरी अम्मी है ना अभी । चुप हो जा मेरे बच्चे चुप हो जा
" शानू की अम्मी , अरे आओ भई मेहमान आ गए है "
अम्मी झट से मुझसे अलग हुई और अपना चेहरा पोंछ कर ट्रे लेकर बाहर चली गई मैं भी उनके साथ अपना हुलिया सही कर दूसरी ट्रे लेकर बाहर आया
जारी रहेगी
बहुत ही मस्त लाजवाब और शानदार अपडेट है भाई मजा आ गयाUPDATE 003
सैटरडे
: अम्मी यार कब तक ऐसे चलेगा , मुझे कितना मन होता है आपसे बात करने का
: हा हा सब पता है कितना मन होता है तेरा , लेकिन तू ऐसा कुछ भी नही भेजेगा फालतू खर्च करने की जरूरत नहीं है और मैं फोन करती हूं ना रोज
: कहा रोज करती हो , सैटरडे संडे जब मेरी छुट्टी होती है आप भी छुट्टी मार लेती हो ( मैंने घुडक कर जवाब दिया )
अम्मी चुप थी और वो भी जानती थी फोन न करने का असल कारण जानता हूं।
: अच्छा वीडियो काल करू
: वो जुबैदा के बेटे ने आज गेम खेल कर नेट खतम कर दिया है ( अम्मी उदास आवाज में बोली )
घर से आए मुझे आज दो रोज हो गए थे , मै पहले ही हफ्ते भर की छुट्टी की ले चुका था , अब तक घर से कोई फोन या किसी ने मेरी खोज खबर भी नहीं ली थी ।
अम्मी जो किसी ने किसी तरह से आस पास मुहल्ले में किसी का फोन लेकर मुझसे लगभग रोज ही बात कर लिया करती थी वो भी मेरा हाल चाल नही ली थी और उसपे से आज सैटरडे था
आज अब्बू घर आ जाते है और फिर सोमवार को ही जाते है
मुझे खुद से ही चिढ़ होने लगी थी कि क्यू मै मेरी भावनाओं को संभाल नहीं पाता , क्यू मै इतना जल्दी जजबाती हो जाता हूं। काश उस रात में मैं अब्बू से नही उलझता तो अम्मी से बात तो कर पाता ।
मैंने मोबाइल निकाल कर स्क्रीन के apps स्क्रोल करने लगा , कुछ भी समझ नही आ रहा था कैसे समय काटू ।
: यस्स यसस् हिही कट गई न ( मै खिलखिलाया )
: हा हा चल चल , आगे आ फिर बताती हु , ये ले खुल गई मेरी ( अम्मी ने ताली मारी )
दो चार बार पासे फेंके गए और एक बार फिर अम्मी के घेरे में उनकी गोटी मेरे आगे थी ।
: हिहिही अब कैसे बचोगी
" शानू सुन तो " अब्बू ने आवाज दी
: अम्मी मैं आ रहा हु और खबरदार मेरी गोटिया फेरी तो , सब याद मुझे इस बार आपको हरा के रहूंगा हिहिही
इधर अब्बू ने मुझे 500 का नोट पकड़ा दिया - बब्बन शेरा दुकान देख रहा है
: जी अब्बू वो तो पुलिस चौकी के आगे , वहां ( मैने शब्दो में ही घर से बब्बन शेरा की दुकान तक की दूरी नाप दी )
: हा वही , आज शनिवार है तो उसने बढ़िया शीरे वाली गुजिया तैयार की होगी , आधा किलो लेकर आ और धीरे धीरे जाना , कही लेकर गिर मत जाना
: बस गुजिया ही ( मैने आंखे नचा कर उन्हे देखा )
: अच्छा समोसा भी ले लेना अपने और अम्मी के लिए
मै खुश हुआ और बरामदे में तख्त के नीचे रखी चप्पल पहन कर एक झोला हाथो में फोल्ड करता हुआ मस्ती से गुनगुनाता हुआ बाहर निकल गया ।
ऐसा कम ही बार होता था कि अब्बू मुझे मनचाही चीजे खाने पीने के लिए छूट देते थे , शायद महीने में एक दो बार ही जब वो ड्यूटी से घर आते थे ।
मै मस्ती में जेब में रखी नोट को बीड़ी की तरह रोल करता हुआ आगे बढ़ रहा था कि मुझे ख्याल आया ,और में सड़क पर एकदम से ठहर गया । आखिरी बार जब अम्मी ने एक नोट दिया था तो फटा निकला था और सब्जी मंडी में मेरी हालत खराब हो गई थी उसे भजाते भजाते
मै झोले को कांख में दबाया और जेब से वो बीड़ी बनी नोट को फैलाया तो शक सही निकला , 500 की नोट हल्की सी फटी हुई थी ।
: अभी जाकर दूसरी ले लेता हु नही तो लेट हुआ तो अब्बू खुद की गलती के लिए भी मुझे ही दांत लगा देंगे ( मै खुद से बातें करता हुआ वापस घर की ओर घूम गया ।
मैं घर वापिस आया और चैनल सरका कर बरामदे से हाल में आया तो सब और एक चुप सन्नाटा पसरा था और अब्बू के कमरे का दरवाजा बंद था
मै उनको आवाज देने को हुआ कि अम्मी की आवाज आई
: उम्मम्म शानू के अब्बू क्या करते है हटिए धत्त अहा नही और लूडो मत बिगाड़ियेगा शानू आएगा तो मुझे कहेगा कि चीटिंग की है मैने
: आहा मेरी बेगम कहा उन छोटी गोटियों में उलझी हैं जरा मेरी गोटियों पर भी ध्यान दीजिए
: आह धत्त गंदे मै नही छूती जाओ अअह्ह्ह् देखो तो बाबू साहब की जबरजस्ती उम्मम्म
: अह्ह्ह्ह्ह शानू की अम्मी तुम्हारी गुदाज हथेलियां मेरा मूड बना देती है
: सिर्फ हथेलियां ही ? हिहिहिही
: अअह्ह्ह्हह रुकिए ना कितनी तेजी रहती है आपको उह्ह्ह्ह शानू के अब्बू अह्ह्ह्ह्ह अम्मी नोचिए मत उम्मम्म
अंदर अम्मी की सिसकियां उठने लगी और बाहर मेरे चढ़ढे में मेरा लंड सर उठाने लगा । अब समझ आया कि महीने में एक दो बार क्यू अब्बू मुझे किसी न किसी बहाने बाजार में आधे घंटे के लिए पठा देते थे ।
जबरजस्त सुरसुरी सी दौड़ रही थी बदन में मेरे उसपे से अम्मी की कामुक सिसकियां और उनके बीच की बातें सुनकर मेरा लंड और भी फौलादी होने लगा
: अह्ह्ह्ह्ह आइए ना कहा रुक गए
: बस हो ही गया बेगम अह्ह्ह्ह्ह क्या मस्त शॉट मिला है इस बार
: धत्त गंदे , क्यू निकालते है ये सब किसी ने देख लिया तो ?
: मेरी जान इसे मैं खास तौर पर छिपा कर रखता हु अगर पासवर्ड भूल गया तो मैं भी नही निकाल सकता
: अच्छा जी ऐसा क्या पासवर्ड बना दिया जो आप भूल नही पाते अअह्ह्ह्ह मेरे राजा आराम से उम्मम्म पूरा गर्म है उह्ह्ह्ह
: फरीदा , वो भी अंग्रेजी में ..सब कैपिटल
मैंने अम्मी का नाम सुनकर चौका और एक मुस्कुराहट सी फेल गई मेरे चेहरे पर और वही कमरे में चुदाई की मादक सिसकियां उठने लगी ।
मैंने मुस्कुरा कर खुद से बात करते हुए बोला - अब तो ये नोट मुझे चला कर ही आना पड़ेगा हिहीही
: नही साहब नही चलेगी , दूसरी देदो
: अरे यार हद है ( मैने पर्स से दूसरी नोट निकाल कर सब्जी वाले को दी )
फिर रूम पर आकर किचन में लाइफ की दूसरी सबसे चीज में भीड है , अम्मी की बताई रेसिपी से आज मिक्सवेज खाने का मन हो रहा था ।
फटाफट सारी सब्जियां काट ली मसाले भुने और फ्राई कर कुकुर चढ़ा दिया ।
तभी मेरे फोन पर घंटी बजी मैं खुश हुआ ये सोच कर कि शायद अम्मी ने किया होगा मगर वो ऑफिस का कलीग निकाला
: हा बोल भाई ( मै उखड़े हुए स्वर में )
: ओहो मिया क्या हाल है घर के
: रूम पर हूं भाई , काम बता ?
: अरे इतना जल्दी , फ्री हो तो आज सैटरडे नाइट हो जाए
: नही यार मूड नहीं है फिर कभी , तू बता किस लिए फोन किया
: अरे यार तेरे लॉकर का पासवर्ड क्या है ? वो जो लास्ट वीक होटल *** में कंप्लेन पूरा किया था उसकी रिसीविंग माग रहे है बड़े साहब
: अच्छा , लॉकर तक पहुंच फिर बताता हु
: वही खड़ा हु भाई
: वो capital में सब रहेगा
F A R E E D A
मेरी सांसे तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी , अब्बू गुसलखाने में थे और तेजी से फोल्डर खोलकर एक फाइल ओपन की
सामने अम्मी अपनी सूट को कूल्हे तक उठा कर खड़ी थी और नीचे उनकी सलवार उतर चुकी थी और बड़े विशालकाय भारी भरकम खूबसूरत जोड़े में उनके मोटे मोटे चूतड आपस में चिपके हुए थे , अधिक चर्बी होने से दरारें इतनी सकरी दिख रही थी मानो दोनो पंजों से फाड़ कर ही उनकी सुराख देख सकते थे ।
मेरा लंड एकदम से बौरा गया और मेरे हाथ उसको मिजने लगे थे कि बगल से एक दूसरे हाथ ने मुझसे मोबाइल छीन कर चटाक से एक जोर का तमाचा मेरे गाल पर जड़ दिया
जिसकी गूंज से कुछ देर के लिए मेरे कानो में सुन्न सा हो गया , अम्मी भाग कर आई - क्या हुआ शानू के अब्बू , आवाज कैसी
मै अपने गाल पर हाथ रखे हुए उस लाल निशान को छिपाए हुए खड़ा था जो अभी अभी अब्बू ने मुझे चिपकाया था । निशान को तो फिर भी छिपा लेता मगर आंखो में आई लाली कैसे छिपा पाता
अम्मी को देखू तो ना जाने क्यू बस रोना आ ही जाता था , इशारे में अब्बू के पीछे से ही अम्मी ने ना में सर हिलाया और मैं आसू छलकने से पहले ही ऊपर अपने कमरे में चला गया ।
अम्मी के पूछने पर भी अब्बू ने उन्हें कुछ नही बताया ।
अम्मी वापस चली गई
उधर किचन में सीटियां लग रही थी
: ओह गॉड क्या मस्त खुशबू है ( मैने कुकर का ढक्कन खोल कर खिले खिल मिक्स वेज की खुशबू ली । अभी से भूख तेज होने लगी थी
फटाफट से मैने रोटियां बनाई और चावल चढ़ा कर नहाने चला गया ।
पूरा कमरा मिक्स वेज की भीनी मस्त खुशबू से महक उठा था ।
: ले खा ले ( अम्मी ने थाली मेरे बिस्तर पर रखते हुए बोली )
मै उखड़े हुए मन से कटोरी में अम्मी के बनाए मिक्स वेज देखे तो जीभ से लार टपकने लगी , मगर अब्बू की मार का असर अभी तक था । खुद की गलती होने पर भी भीतर एक मनमुटाव सा था , हालाकि वो मेरी पहली गलती थी ।
: क्यू छूता है उनका मोबाइल , जब पता है उन्हे पसंद नही
मुझे पता चल गया कि अम्मी को कुछ भी पता नही है और फिर वो मुझे निवाला बना कर खिलाने लगी , उनकी ममता से अक्सर मैं दिल पसीज जाता था ।
मेरे रुआस चेहरे पर हाथ फेरकर मुस्कुराती हुई - अगर इस साल 12वीं में तू अच्छे नंबर से पास हो गया तो मैं खुद तुझे नया मोबाइल दिलवाऊंगी
मुझे अम्मी की बातो में कही छल नजर नहीं आता था क्योंकि वो मन से साफ थी मगर डर था अब्बू का
: मगर अब्बू मानेंगे ?
: तेरे अब्बू को कैसे मनाना है तेरी अम्मी जानती है , अब खाना खा ले
खाना खा कर मैं लेट गया
शाम हुई तो सिराज को फोन घुमाया वही ऑफिस का कलीग जिसका सुबह फोन आया था
: कहा है भाई
: बस घर के निकल रहा हु दोस्त ( फोन के दूसरी तरफ से आवाज आई)
: कही चलें क्या ( उबासी और हल्की माइग्रेशन में अपनी ललाट मसलता हुआ )
: नही भाई , सुबह तूने मना किया तो मैंने भी आज घर पर बोल दिया तो ...
: अच्छा ...
: तू भी आजा ना , अम्मी भी याद रही थी
मैंने सोचा वैसे भी घर से फोन या हाल चाल लेने वाला कोई है नहीं और यहा अकेले रुका तो तबियत अलग खराब कर लूंगा इसीलिए मैं सिराज को हा बोल दिया : ठीक है भाई बाइक लेके आजा रूम पे
वो भी खुश हो गया
ऑफिस में सिराज एक प्राइवेट स्टाफ था , मेरी तो सरकारी नौकरी थी मगर वो भी उसी पोस्ट एक निजी कंपनी के टेंडर के जरिए अपनी नौकरी लगवाई थी । घर परिवार और आय से उतना संपन्न नही होने के बावजूद भी एक गजब की दिलदारी उसमे थी । बस उसका यही किरदार मुझे भाता था और मेरी उससे खूब जमती थी ।
उसकी अम्मी भी मुझे अपने बेटे से बढ़कर ही प्यार देती थी ।
खैर सिराज बाइक लेकर नीचे आया और मैं भी उसके साथ निकल गया ।
: अरे ऐसे जाएगा क्या खुशखबरी देने
: तो फिर , अब क्या दूल्हा बनके जाऊ
: ये ले , उस मिठाई की दुकान से पेड़े ले लेना ( अम्मी ने मेरे जेब में पैसे रखते हुए कहा )
: और ऐसे किसी के यहां खाली हाथ नहीं जाते
: अरे रोक रोक रोक
: क्या हुआ भाई
: कुछ नही रुक जा आता हू अभी ( मै एक स्वीट हाउस में चला गया और वापस आकर उसके बाइक पर बैठ गया )
: साले तुझे अम्मी की पसंद की मिठाई हमेशा याद रहती है हां
: सिर्फ तेरी ही अम्मी है क्या वो , चल अब
फिर मैं उसके साथ घर निकल गया और वहा मेरी पहले के जैसे ही खातिरदारी हुई
सिराज और उसकी अम्मी मैं सब हाल में बैठे थे कि अभी एक लड़की पानी लेके आई और उसे देखते ही मेरी हालत खस्ता होने लगी
मैंने गुस्से से घूर कर सिराज को देखा और इशारे से पूछा ये यहां कब आई
वो बस बत्तीसी दिखाए जा रहा था ।
दरअसल वो लड़की सिराज के बड़े भाई की साली थी और उसके कजरारी आंखो के शरारत भरे इशारे मुझे बेचैन कर जाते थे । बैठना तक मुस्किल जान पड़ता था और मेरी इस तकलीफ से सिराज की अम्मी की वाकिफ थी ।
: आज सुबह ही सिराज के अब्बू लिवा लाए है , कल इसको एग्जाम देने जाना है ( सिराज की अम्मी ने मुझे तसल्ली दिलाई )
: और भाई शानू क्या हाल चाल , शादी वादी के बारे क्या ख्याल है ( सिराज के अब्बू ने कुरकुरे चिप्स मेरी ही प्लेट से उठाते हुए बोले )
मै कुछ बोलता उसके पहले सिराज की अम्मी ने उन्हे आंखे दिखाई और इशारे से कुछ बुदबुदाई ।
मै और सिराज बस हल्के से मुस्कुराये और मेरी नजर उस लड़की पर गई जो रसोई के दरवाजे पर खड़ी मुझे देखते हुए अपनी दुपट्टे का कोना चबा रही थी ।
मेरी तो हालत खराब होने लगी और मैं सिराज को उठाता हुआ - चल चल ऊपर चलते है
और ऊपर खुली छत पर हम पहुंचे तो मैने उसका गला जकड़ लिया : साले हरामी , अभी भी दांत दिखा रहा । बहिनचोद बता नही सकता था कि ये डायन भी है घर पर
: अच्छा है ना , मस्त मौका है मसल डाल साली को , बहिनचोद मुझे लाइन देती तो अब तक फाड़ चुका होता
: हा तो जा न , कल उसको लेके एग्जाम के बहाने मेरे रूम में ठोक लियो
मेरी बात पर वो मुझे देख कर एक टक हसने लगा
: क्या ? ( मैंने उसकी कमीनेपन से भरी हंसी को हल्का हल्का समझने लगा था )
: नहीई ऐसा सोचना भी मत ( मैने सिरे से उसके इरादे को खारिज किया )
: क्या नही यार , वैसे भी तेरी छुट्टी है और मुझे बस घंटे भर का काम है **** साइट पर कुछ पैसे बन जायेंगे यार
साले ने मुझे इमोशनली फसा ही दिया उस पिसाचिनी अलीना के चक्कर में , ऐसी हवस तो हम मर्दों में भी नही टपकती जितनी उसकी भूरी पुतलियों आंखो में समाई हुई है । होठ भी हरकत करें तो मेरी सांसे गरमाने लगती है ।
ना जाने मेरी क्या हालत होने वाली थी ।
कुछ देर में मेरा खाना पीना हुआ और मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था ।
अम्मी यादें सता रही थी , कितनी बेचैनी थी मैं ही जान रहा था ।
सिराज तो खर्राटे भर रहा था मगर मुझे नींद कहा ।
: अब्बू मान तो जाएंगे न अम्मी , मैने 12वी पास भी कर ली है ।
: उनकी फिकर मत कर , सो जा तु ( अम्मी मेरे सर को दुलारते हुए बोली )
: आप कहा जा रही है
: तेरे अब्बू को मनाने ( अम्मी ने मुस्कुरा कर मुझे देखा और बिस्तर से उठ गई )
अम्मी के बातों का मत्लब मै बखूबी जानता था और उनकी मुस्कुराहट में छिपी शरारत से मेरे तन बदन में सुरसुरि सी फैल गई । लंड जोश में फड़कने लगा और उनकी मटकती गाड़ देख कर मैं पागल सा हो गया ।
कुछ पल का इंतजार और मैं अम्मी के कमरे के पास पहुंच गया ।
मादक सिसकियों की भुनभुनाहट दरवाजे के पास साफ साफ सुनाई दे रही थी
: उम्मम्म ऐसा क्यू करते है , मान जाइए न
: अअह्ह्ह्हह इतने दिन तक तुझे दूरी और तेरे ये नायाब चूतड उम्मम्म
: और शानू की बेचैनी का क्या ? उसको बोल कर आई हूं मैं कि आपको मनाने जा रही हूं
: अह्ह्ह्ह मेरी जान बस थोड़ा देर उह्ह्ह्ह रगड़ने दो ना अपनी इन गर्म लबलबाते चूत की फाकों में उह्ह्ह्ह
: बस कुछ देर और मेरे सरताज मैं बस अभी आईआई
: अरे अरे जमीला रुको न , सिराज की अम्मी रुको तो !!
अगली सुबह मैं नहा धोकर सिराज के कमरे से निकल कर उसकी अम्मी के कमरे में पहुंचा तो अलीना तैयार बैठी थी
चुस्त सलवार में उसके कूल्हे पूरे कसे हुए थे और छाती पर सूट की कसावट से उसके उम्दा कबूतरो के जोड़े आपस में चिपके हुए थे हल्की झलकती चुन्नी में उसके बगल से 32 साइज के गोल मटोल दूध की कटोरी देख देख कर मेरी भी लार टपक गई।
कनखियो से उसने मुझे देखा और अपने कर्ली लटो को कानो के के पीछे के लगी
मैंने सिराज की चाबी अपने उंगलियों में नचाते हुए उसको इशारे से : चलें
बड़ी सम्भ्यता से मुस्कुराते हुए वो हां में सर हिलाई
: आराम से जाना बेटा , भीड़ होगी रास्ते पर
: आप फिकर ना करें अम्मी , आराम करिए ( अलीना ने बिस्तर पर लेटी सिराज की अम्मी के बदन पर चादर डालते हुए बोली ) चलिए ।
मै भी सिराज की अम्मी को अलविदा कह कर निकल गया बाइक से ।
जारी रहेगी
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयाUPDATE 004
तोहफा
अजीब सी उलझन थी , रियर मिरर में वो मुझे लगातार निहारे जा रही थी और मेरे कंधे पर रखे हुए उसके हाथ भीतर से मुझे सिहरा दे रहे थे ,
तभी मेरी नजर आगे के स्पीड ब्रेकर पर गई और मैने एकदम से स्पीड जीरो कर दी और बहुत ही आराम से पैर लगा कर ब्रेकर क्रॉस किया मगर वो चतुर नार बड़ी ही होशियार । घिसक आई मेरे पीछे और मैं भी आगे टंकी तक तक , अभी भी उसके सूट का उभार मेरे पीठ में गुदगुदी पैदा कर रहा था
: रोकना (मैने ब्रेक लगा कर बाइक साइड की और उसने गुस्से से मुझे घूरा )
: तुम जाओ मैं चली जाऊंगी रिक्शा करके ( मुंह फेर पर बोली अलीना बोली )
: क्या हुआ ( मेरी एकदम से फटी )
: कुछ नही हुआ तुम जाओ
: अच्छा सॉरी बाबा , बैठ जाओ
: इतना ही अजीब लगता है मेरे साथ तो आए क्यू लिवा कर ( वो भुनभुनाते हुए बाइक पर बैठ गई , रियर मिरर के उसका गुस्से से गुलाबी होता चेहरा साफ दिख रहा था
मैंने अपनी जगह बनाई और वो लगभग मेरे से चिपक सी ही गई इस बार
: चलो लेट हो जाएगा
: ऑटो से नही लेट होता ( मै बुदबुदाया )
हम शहर में घुस चुके थे और जल्द ही अगला स्पीड ब्रेकर वो भी बड़ा
: अगर स्लो हुए तो देखना ( वो रियर मिरर में मुझे ही घूरते हुए भुनभुनाई )
मै हंसता हुआ तेजी से स्पीड ब्रेकर पर चढ़ा दिया ।
: अरे अरे अरे गिराएगा क्या मुझे , देख कर चला ना ( अम्मी ने मेरे कंधे और बाइक की पिछली कैरियर को कस कर पकड़े हुए स्पीड ब्रेकर पर उछलती हुई बोली ।
: कुछ नही होगा मुझे कस कर पकड़ लो अम्मी ( मैने रियर मियर में अम्मी को देख कर मुस्कुराया )
: धत्त बदमाश कही का , सही से चल ( अम्मी मेरे कंधे पर हल्की चपेड़ लगा कर लजाइ और मिरर में उसकी नजरो ने उनकी भावनाएं मुझसे कह दी )
: क्या अम्मी यहां अब आपको कौन पहचानेगा , चांस मार लो ना ( मेरा इशारा बुर्खे में पर्दानसिन हुए उनकी पहचान की ओर था )
: हा जैसे तु बड़ा हैंडसम है जो चांस मार लू, गाड़ी रोक आ गए हम लोग (अम्मी ने बुरखे के भीतर से मुझे हड़काया , जैसे मैं डर ही जाऊंगा
मैंने गाड़ी रोकी और वो मुस्कुराते हुए उतरी , अभी भी उसके 32 साइज के गोल मटोल पाव का गुलगुला स्पर्श मुझे मेरी पीठ पर महसूस हो रहा था ।
: कही जाना मत बस 2 घंटे लगेंगे मुझे ( पूरा हक जताते हुए वो सुरमई आंखो वाली बोली )
: जी , और कुछ सेवा मैम
: आकर बताती हुं
और वो किसी चिड़िया की तरह फुरर से गायब हो गई एग्जाम सेंटर की भीड़ में ।
जब किसी का इंतजार हो या फिर अम्मी के साथ शॉपिंग करनी हो , घड़ी की सुइयां मानो रेंगने लगती हो ।
: अम्मी और कितनी देर कबसे घुमा रही हो , पैर दुख रहे है मेरे ( मै उनके पीछे चलता हुआ बोला और वो तेजी से अपने कूल्हे मटकाते हुए दूसरे सेकसन में घुस गई )
: अम्मी ये सब तो मिलता है ना काजीपुर में , फिर इतनी क्यू खरीद रही हो
: तू चुप कर , यहां माल में चीजे सस्ती है समझा और ऑफर भी चल रहा है
: अम्मी कुछ खा ले फिर ( मै एकदम से एक जगह ठहर गया और मुंह बना कर उनको देखा )
वो मुझे मुस्कुराई और हम एक अच्छे से resturant में चले गए
: हम्मम ये लो और बताओ क्या खाना है
: तुम अपनी पसंद से कुछ भी खिला दो ( एक फिर अलीना ने अपनी मतवाली आंखे से मेरी आंखो में निहारते हुए बोली )
: जहर चलेगी ( मैने मुंह बनाया )
: हम्मम खिला दो अपने हाथ से वो भी खा लूंगी ( वो थोड़ा उखड़ कर बोली )
: अब मुंह न बनाओ , बताओ क्या खाना है ?
फिर उसने ऑडर किया और हम खा कर निकल गए घर के लिए उसने मुझे आगे चौक कर एक कास्मेटिक दुकान पर रोकने को कहा ।
हम वहा पहुंचे और उस वक्त दुकान में हम दोनो ही थे , एक लेडीज ने उससे पूछा क्या चाहिए
: मुझे अंडरगारमेंट्स चाहिए थे
: साइज ( उस महिला दुकानदार ने पूछा )
: 40 और नीचे वाला 48 में ( अम्मी ने मुझसे नज़रे चुराते हुए उससे बोली )
मेरा गला सूखने लगा अम्मी के गदराए जिस्म का साइज सुन कर , लंड खुद से ही अकड़ने लगा ।
: इसको नाप सकती हूं ( अम्मी ने उस महिला दुकानदार से पूछा तो वो औरत उसे एक केबिन नूमा कमरे में ले गई और खुद बाहर आ गई )
: शानू इधर आना बेटा (अम्मी की आवाज आई)
मै लपक कर उस केबिन के पास पहुंचा मेरी नजरें नीचे ही थी जब अम्मी ने दरवाजा खोला और उनका हाथ बाहर आया , साथ में झूलता हुआ वो कटोरेदार ब्रा : बेटा उनको बोल दे कि 40DD दे दे
अब अम्मी की के चूचों के पहाड़ जैसे उभार की कल्पनाएं उठने लगी थी , मन में छवि सी उठने लगी कि भीतर अम्मी बिना ब्रा के खड़ी होगी । मगर मेरी किस्मत तो देखो खुला दरवाजा पाकर भी मैं झाक कर देख नही सकता था , लंड एकदम से फौलादी हो गया था , पेंट में एडजेस्ट करता तो काउंटर पर बैठी वो महिला मुझे देख लेती ।
मैं बिना को हरकत के दुकान में आया और उस महिला से बात की फिर उसने साइज बदल कर दिया , इधर कुछ ग्राहक आ गए और वो बिजी हो गई
मै दूसरी ब्रा लेकर उस चेंजिंग रूम के पास पहुंचा और हाथ दरवाजे से घुसा कर ब्रा भीतर करता हू : हम्मम ये ट्राई करो
और अगले ही पल उसने मुझे भीतर खींच लिया
: क्यू भागते हो मुझसे ( मेरे जिस्म से ऐसे लिपट गई थी जैसे पेड़ो से बेल, उसकी आंखे मुझे मदहोश कर रही थी , दिल जैसे स्लो मोशन में रूक रूक कर पूरी शिद्दत से धकड़ने लगा और वही उसके नायाब कसे हुए तीर के जैसे नुकीले भूरे दाने वाले निप्पल शर्त फाड़ कर मेरी छाती को कोंच रहे थे ।
उसकी आंखे उसके इरादे बयां कर रहे थे मानो कह रहे हो कि आज तेरे दिल में अपने जोबनो से छेद कर रास्ता बनाऊंगी ।
एक गुदगुदाहट सी थी मेरे पेट में शायद बाहर उस लेडीज का डर मूझपे हावी हो रहा था
: प्लीज यहां नही ( मै हड़बड़ाया )
: तो फिर कहां ( उसके पतले होठ जिनपे डार्क मैरून मैट लिपस्टिक लगी थी वो मेरे करीब आ रहे थे , जैसे कोई चुंबक सा हो उनमें और मेरे होठ लोहे की जर्दियो के जैसे सूख कर फड़फड़ाने लगे )
मुझे समझ नही आया क्या जवाब दू उसकी कोमल कलाइयों में ना जाने कितना जोर था जो मैं चाह कर भी छूट नहीं पा रहा था
: बस यहां नही ( मै उफनाती सासों के साथ बोला )
: ठीक है ( वो मुस्कुरा कर मेरे गालों पर चुम्मी ले ली और मुझे रिहा कर दिया )
मेरा गला सुख रहा था ,फेफड़े धौकनी के जैसे उठ बैठ रहे थे और माथा पूरा पसीना पसीना मै भागकर बाहर दुकान में आ गया ।
वो महिला दुकानदार मुझे अजीब नजरो से निहार रही थी , जैसे मेरे मन की चोरी पकड़ ली हो । मै इधर उधर देखने लगा कि
: हो गया बहन जी यही फाइनल कर दीजिए उफ्फ ( अम्मी ने वो ब्रा उस महिला दुकानदार को देते हुए बोली )
: अम्मी फिर घर चलें
: बस बेटा एक जगह और जाना है
: क्या यार अम्मी ( मै उखड़ कर बोला तो अम्मी मुस्कुराए जा रही थी । )
कुछ देर बाद दुकान बाजार बदलने के बाद हमारी शॉपिंग पूरी हो गई
हमे देर हो रही थी और ढलती शाम को देखते हुए अम्मी की बेचैन हुई जा रही थी , कारण था एक तो आज संडे उसपे से अब्बू घर पर थे और उनका सामना करने की हिम्मत किसमे भला थी ।
: अम्मी मुझे डर लग रहा है , अब्बू जरूर गुस्सा करेंगे देखना
: अब जो होगा देख लेंगे , तू जल्दी चला और खोवामंडी में घुसने से पहले फैजान के मेडिकल स्टोर पर गाड़ी रोक देना
मै हाईवे से उतर कर काजीपुर टाउन के लिए बढ़ चुका था , ढलती शाम का सन्नाटा अपने पाव पसार रहा था ।
अम्मी मेरे कंधे से मुझे कसके कर पकड़े हुए थी और मैं तेजी से बाइक लेकर आगे बढ़ रहा था और सीधा फैजान के मेडिकल स्टोर पर गाड़ी रोकी मैने और अम्मी की छाती हच्च से मेरे पीठ में धंसती पिचकती चली गई ।
: हट बदमाश कही का ,अब आगे से तेरी गाड़ी पर मैं नही बैठूंगी ।किसी रोज नाली में गिरा देगा मुझे ( अम्मी बड़बड़ाई)
: बोला तो था कस कर पकड़ लो मुझे ( मै बुदबुदाया तो अम्मी मुझे मारने को हाथ उठाने लगी तो मैं हसने लगा )
: अब लेट नही हो रहा है ( मैने उन्हे याद दिलाया और वो मुंह बनाती हुई मुझे सबक सिखाने के इशारे में अपना गुस्सा दिखाती हुई सीढ़िया चढ़ कर मेडिकल स्टोर पर चली गई ,
सड़क से जहा मै बाइक लेकर खड़ा था उस दुकान के काउंटर की दूरी 20-25 मीटर रही होगी ।
मै गुनगुनाते हुए आस पास देख रहा था और मेरी नजर मेडिकल स्टोर के काउंटर पर गई ।
जहा अम्मी खड़ी थी , उनकी आवाज उस शीशे वाले दरवाजे से बाहर तो नही आ रही थी मगर बाहर से स्टोर में चल रही हलचल का अंदाजा था ।
अम्मी फैजान से कुछ बात करती है और फैजान अंदर चला जाता है और कुछ देर बाद उसकी अम्मी बाहर आती है
फैजान की अम्मी मेरी अम्मी को देख कर मुस्कुराने लगती है फिर दोनो के होठ बस हिल रहे थे जैसे वहा भी खुसफुसाहट वाली ही बात चीत हो रही थी
स्टोर के अंदर से दोनो बार बार मुझे ही देख रही थी , मुझे अजीब लग रहा था कि क्या हो रहा होगा वहा ।
फिर फैजान की अम्मी ने एक चौकोर पैकेट को दवाई वाले लिफाफे में रखा , पैकेट चौड़ा था उसमे दवाओ के पत्ते भी नजर आ रहे थे ।
जैसे ही अम्मी ने मेरी ओर फिर से देखा मैने नजरें फेर ली मानो कुछ नहीं देखा मैने
और फिर अम्मी ने वो पैकेट अपने पर्स में रख लिया फिर पैसे देकर बाहर आ गई ।
: चल अब जल्दी ( अम्मी मुझे कंधे से पकड़ते हुए बाइक पर बैठते हुए बोली )
: क्या ले रही थी अम्मी कबसे और दवा किसको खानी है
: वो तेरे अब्बू को मनाने की दवाई है ( अम्मी को होठ सिकोड़ कर छिपी हुई मुस्कुराहट के साथ मैने रियर मिरर में देखा )
: मनाने की दवाई , अब दवाई खाना किसे अच्छा लगता है भला ( मैने अजीब सा मुंह बनाया )
: वो होती है एक , उसे खाने से गुस्सा नही होता है , तू आगे देख कर चला ना
फिर मैंने बाइक तेज कर दी और सीधे घर के सामने रोक दी । वो बाइक से बड़ी आहिस्ता से उतरी
उसके चेहरे पर मुस्कुराहट अभी भी थी मगर उसके पीछे का दर्द मै भी समझ सकता था ।
: मै भी चलू साथ में
: नही मै चली जाऊंगी ( अलीना अपने पैर को सीधी करने की कोशिश में बाइक का सहारा लेती हुई खड़ी हुई )
: अम्मी पूछेगी तो क्या कहोगी ( मैने फिकर में उससे कहा )
: तुम फिकर ना करो , अब घर जाओ नही तो ( उसने एक बार फिर अपनी जादुई नजर से मुझे घूरा और मुस्कुराई )
फिर मैने बाइक घुमाई और अपने फ्लैट के लिए निकल गया ।
घर में घुसते ही वही सब रोज का ड्रामा इंतजार कर रहा था ।अब्बू को गवारा नहीं कि उनके खानदान की औरतें देर शाम तक घर से बाहर रहें। वही खानदानी रिवाज , असूल और अदब पेशायगी की बकचोदी ।
अम्मी ने मुझे ऊपर जाने का इशारा किया और कुछ ही देर में नीचे एकदम चुप्पी
ना जाने औरतों में क्या खासियत रही है वो ऐसे परिस्थितियों को संभालने में हमेशा से सक्षम रही है ।
कमरे में सोफे पर बैठा हुआ मै अलीना से फोन पर बातें किए जा रहा था
: और सिराज के अब्बू , वो नही बोले कुछ
: ऊहू , वो तो बाहर गए थे
: थैंक गॉड यार मुझे तो बहुत डर लग रहा था
: मुझसे बेहतर कौन जानेगा कि तुम कितना डरते हो ( अलीना फोन पर हसीं)
: अम्मी कैसे है ? ( मै हिचक कर पूछा उससे )
: सुबह से बेहतर लग रही है ,चल फिर रही है ( बोलते बोलते उसके बातों में छिपी हसीं की खनक मुझे साफ साफ सुनाई दी )
: यार इतना भी क्या मजे लेना अब , छोड़ो ना ( मैं उखड़ कर उससे बोला )
: शानू !! ( अपनी आवाज भारी करती हुई बोली )
: हम्मम बोलो ( मुझे अजीब लगा पहले की उसने मुझे नाम से नही बुलाया था )
: मेरा नाम लेके बुलाओ ना मुझे
" मेरा नाम लेके बुलाओ ना मुझे बेटा " , सिराज की अम्मी मेरे खड़े लंड पर अपनी बड़ी सी फैली हुई गाड़ को पटकती हुई बोली ।
: उह्ह्ह्ह ना मुझे यही बुलाना पसंद है आपको ( मै उनकी रस छोड़ती बुर में अपना लोहे सा तपता मोटा लंड घुसाए हुए बोला )
: क्या पसंद है तुझे , अअह्ह्ह्हह बोल लल्ला ( सिराज की अम्मी मेरे आंखो मे देखते हुए बोली )
: अअह्ह्ह्ह अम्मीइ उह्ह्ह्ह आएगा मेरा अअह्ह्ह्ह और तेज करो ना मेरी अम्मी उह्ह्ह्ह मजा आ रहा है अह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईआईआई अअह्ह्ह्हह
: शानू , चुप क्यों हो बोलो ना ( वो थोड़ी तेज आवाज में बोली )
: अह कुछ कहा क्या तुमने ( मै सिराज की अम्मी की यादों से निकलता हुआ अपना सर उठाता लंड मसल कर बोला )
: मुझे मेरे नाम से बुलाओ ना प्लीज ( वो लगभग शरमाते हुए लहजे में बोली )
उसकी बातें और फरमाइश मेरे होठ सुखा देते थे , बहुत छोटी सी बात थी उसका नाम लेना , महज तीन अक्षरों को होठों से पुकारना था। उसमे भी मुझे बेचैनी होने लगी थी ।
: बोलो न ( उसने फिर से मीठी सी जिद दिखाई )
: पता नही क्यों मुझसे नाम नही लिया जाता , अजीब सा लगता है
: मेरा नाम अजीब है क्या ?
: नही वो बात नही है , तुम्हारे नाम से मुझे वो कुछ कुछ होने लगता है ( मैने अपनी दिल के जज्बात उसको समझाना चाहा )
: सच में ? क्या होने लगता है ( वो खिलखिला कर बोली )
: पता नही , वही समझ नही आता । बस सांसे तेज हो जाती है , होठ सूखने लग जाते है , दिल बैचेन होने लगता है
: और ? ( वो बहुत प्यार से पूरे इंतजार से बोली , मानो उसे ये सब सुनना कितना भा रहा हो )
: बस तुम नजर आ जाती हो और फिर तुम्हारे वो दो बड़े बड़े खूबसूरत गोल मटोल...
: धत्त गंदे ( वो शरमाई )
: अरे मै तुम्हारी मतवाली आंखों की बात कर रहा था यार ( मै हसा )
: अच्छा जी , मुझे मत बनाओ मुझे पता है तुम्हारी नजरें कब कहा होती है ( कुछ लजा कर तो कुछ इतरा कर वो बोली )
कुछ देर बाद मैंने फोन रख दिया एक बार फिर बिस्तर पर लेटे लेटे अम्मी की यादें मुझपे हावी होने लगी , मन फिर उदास होने लगा ।
अम्मी की फिकर सी होने लगी , हर बार वो मेरे लिए अब्बू से लड़ जाती थी और उन्हें मना ही लेती थी मगर आज मेडिकल स्टोर पर जो देखा उसने मुझे और भी बेचैन कर रखा था ।
मुझसे रहा नही गया और मैं दबे पाव सीढ़िया उतरने लगा
रात के इस पहर में पूरी खोवामंडी में कुत्तों के सिवा दूसरा कोई जाग रहा था तो शायद मेरा ही परिवार रहा होगा ।
जीने से उतरते हुए अम्मी और अब्बू के कमरे से उनकी खुसफुसाहट आ रही थी , मगर इतनी भी साफ नही कि मैं सही सही उनका मतलब निकाल सकूं।
तभी मेरे पाव एकदम से ठहर गए और आंखे फेल गई । जीने के जिस हिस्से मै उसकी रेलिंग पकड़ कर खड़ा था उसके ठीक सामने अम्मी के कमरे की खिड़की के ऊपर वाला रोशनदान खुला हुआ था और कमरे में पीली रोशनी उससे निकल कर पूरे हाल में फैल रही थी ।
मगर मेरे हरकत में आने का कारण कुछ और था जिसकी छवियां अम्मी के कमरे की दीवाल पर उभरी हुई थी और जीने के जिस हिस्से पर मैं खड़ा था वहा से रोशनदान के माध्यम वो दृश्य साफ साफ मुझे परछाइयों में नजर आ रहा था ।
मेरा कलेजा जोरो से धड़कने लगा था और मेरी नजर बस वही जम सी गई । मेरे हाथ मेरे लंड को छूने लगे ,
सामने रोशनदान के उसपर कमरे की दीवार पर उकरी हुई छवियों में अम्मी अब्बू का लंड चूस रही थी
बड़ा विशालकाय मोटा टोपे वाला , परछाईंयो वो दृश्य काफी कामोतेजक दिख रहा था ,
अम्मी अब्बू के लंड को जोरो से भींच कर हिलाती हुई मुंह ले रही थी । लंड हिलाते हुए उनके बोलते होठ भी साफ साफ परछाइयों में हिल रहे थे ।
अम्मी का ये रूप देख कर मेरा लंड पूरा तनकर रॉड सा हो गया और मैने लोअर नीचे कर उसको बाहर निकाला फिर सहलाते हुए एक बार फिर रोशनदान से कमरे में झांका तो अम्मी बिस्तर पर आ चुकी थी और अब्बू का मुंह उनकी मोटी गदराई जांघो के बीच था
मेरी हालत खराब होती जा रही थी , अम्मी की सुडौल जांघें दीवाल पर उभरी हुई उन परछाइयों में और भी भड़किली और मोटी मोटी दिख रही थी जिसे वो हवा में उठाए हुए अब्बू से अपनी बुर चटवा रही थी
अम्मी की मादक सिसकियो की मीठी गुनगुनाहट अब मेरे कानो में आने लगी थी
मैं भी जोरो से अपना मूसल मसलने लगा था , आज अम्मी के लिए मेरे दिल में प्यार और भी बढ़ गया था ।
अब्बू का लंड अब हचर हचर उनकी गुदाज लचीली फुद्दी में जा रहा था ,
अम्मी को अब्बू से चुदते देख कर मुझे लग रहा था मानो अम्मी ने आज मेरे लिए कितना बड़ा बलिदान दे दिया हो और उस बलिदान का तोहफा आज मेरे हाथ में था ।
मैंने अपने लोअर से वो नया मोबाइल निकाला जिसे अम्मी ने मुझे 12th पास करने की खुशी में दिलाया था और अब वो अब्बू को मेरे लिए मना रही थी
मेरा लंड दिल सब कुछ फड़क कर धड़क कर उन्हे अपना प्यार दिए जा रहा था और कमरे में वो औंधी झुकी हुई पीछे से अब्बू के लंबे मोटे मूसल को अपनी चूत में लिए जा रही थी
अम्मी के मोटे हिल्कोरे खाते चूतड देख कर मेरे सबर का फब्बारा फूट पड़ा और जीने की सीढियों पर मैं अपनी धार छोड़ने लगा ।
उस मोबाइल को अपने होठों से लगाए जिसकी जलती स्क्रीन पर अम्मी की तस्वीर वॉलपेपर पर लगी थी ।
: अअह्ह्ह्हह मेरी अम्मीई उह्ह्ह्ह अअह्ह्ह्ह फक्क्क् उह्ह्ह्ह गॉड उम्मम्म
मै देर तक झड़ता रहा और वही सोफे पर सो गया ।
जारी रहेगी ।
बहुत ही मस्त लाजवाब और मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गयाUPDATE 005MOMMY
अगली सुबह मैं ऑफिस के लिए निकल गया था और अजीब बोरियत सी लग रही थी ।
तभी अलीना का फोन आया
: कुछ भेजा है मैने देखो ( पूरे हक से वो बोली )
मैंने मोबाइल खोला और व्हाट्सएप चेक किया तो तस्वीरें शेयर की हुई थी
जैसे ही मैने उनको ओपन किया मेरे होठ मुस्कुरा उठे ।
अभी अभी वो उठ कर बाथरूम में ब्रश करने गई थी ।
: अच्छी है ना , देख कर डिलीट कर देना ( वो चहक कर बोली)
: नही मै तो फ्रेम करवाने वाला हु इसको ( मैने उसको चिढ़ाना चाहा , मगर मेरी निगाहें उसकी नाइट सूट से झांकती गोरी गोरी मौसमियो पर थी )
: हिम्मत है तो मेरी डीपी लगा के दिखाओ व्हाट्सएप पर तो जानू
: अच्छा जी डेयर दे रही हो
: हा दिया , लगा कर दिखाओ पूरे 24 घंटे के लिए
: नही वो अब्बू !!
: क्यू फट गई ना फट्टू कही के ( उसने मुझे चिढ़ाया )
: हा जैसे तुम लगा लोगी मेरा ( मैने उसको जवाब देना चाहा )
: मैने पहले ही लगा रखी है हूंह ( वो तुनकी और फ़ोन काट दिया
मै हंसते हुए उसकी व्हाट्सएप डीपी पर अपनी तस्वीर देखने लगा जो उसने कल ही खींची थी ।
तभी उसका एक और मैसेज आया
"dekh kar delete kar dena"
: देख कर डिलीट कर देना
: क्या ? लेकिन क्यू
: तेरे अब्बू ने मोबाइल चेक किया ना तो तेरी शामत आयेगी ( अम्मी ने मुझे अब्बू का खौफ दिखाया , जैसे मैं डर ही जाऊंगा । लेकिन उन्हें क्या पता अब तो मेरी सारी मनमानायिया ही उनके भरोसे थी कि कुछ भी हो अम्मी अब्बू को माना लेंगी । )
: आप हो न मनाने के लिए उनको ( मै मुस्कुराया )
वो भीतर से गुस्से से उबली मगर फिर शांत होकर झेप भरी हंसी से खिल उठी कुछ सोचते हुए
: तू बहुत बदमाश हो गया है , क्यू देखता है ये सब फिल्में । भोजपुरी हीरो बनेगा क्या ? ( अम्मी बात बदलते हुए बोली )
: मै तो पहले से ही आपका हीरो हूं ना ( मै खिलखिलाते हुए उनसे लिपटने को हुआ तो वो मुझसे दूर होकर बिस्तर पर ही सोए सोए खिसक गई )
: नही नही मेरे ऊपर मथना नही है , तू जल्दी से खतम कर अपनी फिल्म (अम्मी मुझसे दूर होते हुए साइड बदल कर करवट लेली और उनकी बड़ी सी गाड़ फेल कर मेरे सामने थी )
मेरे पैर मजह कुछ दूरी पर थे अम्मी के गुदाज नरम भारी भरकम चुतडो से , और पैर फैला कर मैंने उन्हें अम्मी के कूल्हों पर टिका दिए जैसे सोफे पर रखते हो
: शानू फिर तू शुरू हो गया ( अम्मी ने खीझ कर बोला )
: अम्मी रखने दो ना ,ऐसे अच्छा लगता है कितना नरम है हिहि ( मैने भी उनके कूल्हों पर हक जताते हुए अच्छे से पैर रख दिया )
: हम्मम तो अब तुझे मेरे कूल्हे नरम लग रहे है बदमाश कही का ( अम्मी फिर सोने की कोशिश करने लगी )
नया नही था मेरे लिए या अम्मी के लिए जब मैं उनके कूल्हों पर पैर रखकर सोया हूं
मगर कल रात को जो कुछ भी मैने देखा मेरे दिल में लालच ने जगह बना ली और जो कुछ भी इरादे मेरे जहन में थे उन्हें सोच कर ही मेरा लंड पूरा तनमनाया हुआ था ।
मूवी तो महज एक जरिया था मेरे जिस्म में एक सिहरन सी उठ रही जब मेरी नंगी एड़ियों के तालु अम्मी की बड़ी बड़ी 48 साइज की चौड़े विशाल चूतड़ों के इर्द गिर्द रेंग रही थी
पूरे जिस्म में एक मदहोश करने वाली मीठी गुदगुदाहट सी उठने लगी थी मानो ,
पैर की उंगलियों से धीरे धीरे करके करीब 10-15 मिंट में कही मै उनके नायाब बड़े भारी भरकम चूतड से उनकी सूट को सरका पाया था । सूती सलवार में से उनकी पैंटी साफ़ साफ़ झलक रही थी जो उनकी चूतड पर में चुस्त कसी नजर आ रही थी ।
लंड मेरा पूरा फौलादी हुआ पड़ा था और जैसे ही मेरी पैर की उंगलियों ने अम्मी के नरम मुलायम चूतड को सलवार के ऊपर से छुआ एक बिजली सी दौड़ गई मेरे जिस्म में ।
रोम रोम तनमाना गया ,सांसे उफनाने लगी और डर से कलेजा धक धक होने लगा कि अम्मी गुस्से से पलट कर जवाब न दे दे ।
कुछ देर क्या पूरे 10-12 मिंट मैने पैर जड़ किए रखे , सूत भर हरकत नही की मैने और फिर धीरे धीरे पूरी ऐड़ी को अम्मी के गुदाज मुलायम चूतड पर हल्का सा सहलाते हुए गोल में घुमाया ।
अजीब सी चुनचुनाहट भरी तरंगे मेरे पैरो से होकर पूरे जिस्म ने फेल गई और लंड पूरी बगावत पर आ पहुंचा ।
मूवी फुल वैलुम पर चल रही थी , फिल्म की पड़ी ही किसे थी मेरा सारा फोकस अम्मी के फैले हुए गुदाज गुलगुले गाड़ पर था , जिसमे मेरी एडिया धंसी जा रही थी ।
धीरे धीरे मेरी पैर की उंगलियां रेंगती रही और हिम्मत कर मैने अम्मी के बड़े बड़े मटके जैसे चूतड़ों को ढलानों पर पैर को ले जाने लगभग दोनो जांघो की सिरो से उनके चूतड जुड़े होते है ।
मेरे पैर के तलवे में वहा की गर्मी महसूस होने लगी थी ।
उस तपीस से मेरा गला सूखने लगा था मेरी नज़रे कभी अम्मी के सर की ओर होता तो कभी मेरे पैरो पर जहा से महज कुछ इंच ही दूर था मैं उनकी चूत की निचली छोरो को छूने से ।
: शानू वहा नही
( मैंने चौक कर उसकी ओर देखा , वो मेरे ऑफिस की एक सीनियर थी )
: फिर कहा मैम ?
: ये यहां पर ( उसने फाइल के कागजात पर मेरे करीब खड़े होकर उंगली रखी , उसके जिस्म से आती परफ्यूम की खुशबू से मुझे बेचैनी होने लगी थी । खुद की संभालते हुए मैने सिग्नेचर बनाया )
: कहा खोए रहते हो आजकल ( अपने लटो को बहुत ही कैजूअली उसने अपने कानों के पीछे कर मुस्कुराते हुए वो बोली)
: वो मै ... ( मै अटक ही गया वही चेयर पर बैठे हुए ही उसकी नीली आंखों में )
: हा बोलो ना ( उसने मुझे अपनी ओर ऐसे देखता पाकर वो लाज से अपनी पलकें झुका ली और मुस्कुराहट से उसके गाल गुलाबी हो उठे )
: वो बस घर की याद आ रही थी ( मै इधर उधर देखने लगा )
: अच्छा , बस घर की ही या घर वाली की हिहिहि ( उसने छेड़ा मुझे )
: हा घरवाली की भी ( मै अम्मी को सोच कर उसकी बातों पर मुस्कुरा )
: तो क्या रिश्ता तय हो गया ( बड़े ही उदास दिल से उसने कहा और कुछ दूरी सी बनाई उसने )
: क्या ? नहीईईई , किसने कहा ? हा रिश्ता आया था मगर मुझे करनी नही थी ( मै हसता हुआ बोला )
एकदम उसके चेहरे की बुझती लाली फिर से खिल उठी । उसके दिल के भाव से मैं क्या पूरा ऑफिस परिचित था । कि रेशमा मैम अगर किसी पर लट्टू है तो शानू ही है । वरना भला कोई सीनियर रैंक की अधिकारी अपने क्लास 3 ग्रेड के मामूली स्टाफ से सिर्फ एक सिग्नेचर के लिए उसके टेबल पर क्यू आती ।
: वैसे आज शाम का क्या प्लान है ? ( रेशमा मैम ने फाइल हाथ में लेते हुए बोली )
: जी वो कुछ भी नही , मतलब कुछ सोचा नही है अभी ( उनके सवाल से मैं लगभग उलझ ही गया था )
: क्या तुम आज मुझे मेरे घर ड्रॉप कर दोगे , वो मेरी कार आज सर्विस के लिए गई है ।
: जी , क्यू नही जरूर ( मै चाह कर भी मना नही कर पाया उन्हे )
फिर वो मुस्कुराती हुई निकल गई ऑफिस से और मैने गहरी सांस लेते हुए अपनी क्रॉस की हुई टांगे खोल दी ।
: ओह बहिनचोद इसके करीब आते ही क्या हो जाता है , क्या नशीली परफ्यूम लेकर घुमती है साला दिमाग काम करना बंद हो जाता है । अभी बोल दिया है तो जाना ही पड़ेगा । ( मै मन ही मन बड़बड़ाया )
: हम्मम ये लो , सारे पेंडिंग कमप्लेन की फाइल ( एक लड़की ने जोर से गुस्से में 4 - 5 फाइलों को मेरे आगे डेस्क पर पटका )
: अरे क्या हुआ सबनम , मैम ने कुछ कहा क्या ( मै उसके परेशान चेहरे की ओर देख कर बोला )
बदले में वो मुझे घूरते हुए बोली : मुझे क्यू बोलेंगी मैम कुछ , उन्हे तो सिर्फ तुमसे ही बात करना पसंद है ना
: ये फाइल्स नोट डाउन हो जाए तो मुझे मैसेज कर देना ( सबनम तुनकती हुई निकल गई अपने डेस्क के लिए)
: अब इसको क्या हुआ , मै हूं क्या भाई सब मुझपर ऐसे हक जताते है जैसे मैं उनका पति हूं ( खुद से बड़बड़ाया )
खैर मैंने सारी फाइल्स नोट डाउन की और उसे मैसेज कर दिया
: sorry
: Mai kya karungi tumhari sorry ka
: Ab kya office me bhi tum aise hak jataogi
: Tum har jagah sirf aur sirf mere ho samjhe mister ( अलीना ने जवाब दिया )
: ok ok , man jaane ka kya logi ?
: Puri raat mere se baat wo bhi video calling
: Bade saste me man gayi yar
: achcha bachchu call karna fir pata lagega , ok bye
मैं मुस्कुरा रहा था और मोबाइल देख रहा था
: चले शानू ( रेशमा मैम मेरे डेस्क के पास आकर बोली )
: अह हा चलिए ( मै मोबाइल जेब में रखता हुआ )
: तुम यहां अकेले रहते हो , अम्मी को बुला क्यू नही लेते अपने , डैड भी तुम्हारे जॉब करते है जब ( बाइक पर बैठी हुई रेशमा मैम मेरे कान के पास आकर बोली )
: वो अब्बू हर वीकेंड घर आ जाते है तो अम्मी कैसे आयेंगी ( मै उदास होकर बोला )
: अरे तो क्या उन्हे अपने बेटे की जरा भी फिकर नही है ( रेशमा थोड़े जज़्बाती होकर तेज आवाज में बोली )
: नही मैम ऐसा नहीं है ( मै दिल में अम्मी को याद करते हुए लगभग रोने ही वाला था )
: आज भी कॉल नही आया ना घर से ( वो मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए बोली )
: जी , आपको कैसे ? ( मेरी आंखे छलक ही पड़ी)
: सिराज ने बताया ( वो बोली और चुपचाप बाइक चलाता रहा , कुछ ही देर में उनका फ्लैट आ गया )
: आपका घर आ गया मैम ( मैने बाइक रोकी और शर्ट की बाजू से अपना चेहरा साफ किया )
: आओ ना ( वो बाइक से उतरते हुए बोली )
: जी फिर कभी , मुझे घर जाना है ( मै खुद से ही मानो जबरदस्ती करता हुआ बोला )
: ओहो शरमाओ मत और आओ चलो ( वो मेरे बाजू में बाजू डाल कर मुझे बाइक से खींच कर उतारती हुई बोली )
: अरे लेकिन , वो ... ( मै असहज से हस्ते चेहरे के साथ उनके साथ चल पड़ा )
: मैम छोड़िए , कोई देख लेगा ( मै अपने आप को छुड़ाता हुआ बोला )
: हा तो देखने दो , मै नहीं छोड़ने वाली कही तुम भाग गए तो ( वो चहक कर पूरा हक जताते हुए बोली )
: आपको कोई चाह कर भी नही छोड़ना चाहेगा मैम ( मै उनके अदाओं से हारता हुआ खुद से ही बड़ाबड़ाते हुए उनके साथ खींचता चला गया )
: अच्छा अब हम लिफ्ट में है अब तो छोड़िए
: ठीक है , लेकिन भागना मत ( वो मुझे उंगली दिखाती हुई वॉर्न करती हुई हस पड़ी और मैं उसके खिलखिलाते चेहरे को देख कर ठहर सा गया )
मुझे अवाक देख कर वो फिर से शरमाई और अपने लटों को फिर से कानो में उलझाती हुई अपनी पलके नीची कर ली : तुम मुझे ऐसे मत देखो प्लीज
: जी , सो सॉरी वो मै ... ( मै फिर से इधर उधर देखने लगा )
: धत्त बुद्धू इसमे सॉरी वाली बात नही है ( वो आंखे नचा कर मुस्कुराई )
: फिर क्या बात है ( मेरी सांसे धक धक हो रही थी उसके शर्ट के ऊपरी खुले बटन से झांकती उसकी 36 साइज की गोरी गोरी पहाड़ियों की घाटी देख कर )
: वो... कुछ नही , आओ चले फ्लोर आ गया मेरा ( वो लिफ्ट से मेरे आगे निकली और जींस में उसके चूतड भरपूर उभरे हुए थे , गजब की मादक चाल थी । लंड पूरा हरकत में आ चुका था । )
लॉक खोल कर हम हाल में गए , सपने जैसा था मेरे जैसे मिडिल क्लास वाले लड़के के लिए ऐसा अलिसान फ्लैट जो मजह 32000 रुपए माह की तनखाह पर जीवन गुजार रहा हो ।
फिल्मों में ही देखा था ऐसा फ्लैट , चमचमाती फर्श , गलीचा और मुलायम सोफा उसके आगे ग्लास वाली मेज, सोफे के बगल में इंडोर प्लांट और सबसे बढ़ कर मन को भीतर से खुश कर दे ऐसे जादू भरी रूम स्प्रे की महक ।
कंधे से साइड बैग उतार कर उसने सोफे पर रखते हुए : मै चेंज करके आती हूं तुम बैठो
फिर वो किसकी हिरणी की तरह बड़ी अदा से अपने कूल्हे हिलाते हुए कमरे में चली गई ।
मैंने एक गहरी सास ली और हाल के टहल कर घर देखने लगा , ऐसे ही आलीशान घर का सपना देखते बड़ा हुआ था ।
: नही नही अम्मी ये देखो , ऐसे वाला स्विमिंग पूल होगा हमारे बंगले में ( मोबाइल में वीडियो चला कर अम्मी को एक बंगले और स्विमिंग पूल दिखाता हुआ बोला )
: अच्छा और इसमें नहाएगा कौन ( अम्मी अपनी हसी दबाती हुई बोली )
: आप , मै ,अब्बू
: धत्त बदमाश कही का , अपनी अम्मी को खुले में नहलाएगा वो भी ऐसे कपड़ो में ( अम्मी का इशारा स्विमिंग पूल में नहाती उस महिला की ओर था जिसने बिकनी पहन रखी थी और उसके मोटे मोटे दूध और गाड़ भरपूर खिल कर उभरे हुए थे )
: अरे नही ये बंगले में सब प्राइवेट होता है , वहा बाहर का कोई नही आता जाता ( मै अम्मी को समझाना चाहा मन में ये लालच लिए कि काश इस चीज के अम्मी हा कर दें तो उन्हें बिकनी में देख तो पाऊंगा )
: बंद कर इसे अब तेरे अब्बू को पता चला ना , इस घर में भी नहाने को नही मिलेगा तुझे ( अम्मी ने मेरे मजे लिए )
: अच्छी दिख रही है ना
: अह, हा बहुत खूबसूरत ...... ( मै दीवाल पर लगी एक पेंटिंग से नजर हटा कर रेशमा मैम की ओर देखा जो अभी अभी शोवर लेकर निकली थी और मैरून नाइटी में उनका जिस्म मुझे पागल किए जा रहा था ।
उनका एक पैर सोफे पर था और वो आगे झुक कर पैरो में पता नही किसी तरह का लोशन लगा रही थी
ऊपर उनकी मोटी मोटी चूचियां की घाटी ऐसे लटकी हुई थी मानो अब तब बाहर निकल ही जाए ।
मै नजरे चुराता हुआ गले से थूक गटकने लगा और वो मुस्कुराती हुई किचन की ओर जाने लगी : क्या पियोगे , चाय कॉफी या ड्रिंक ?
: जी , कॉफी चलेगी ( मै मेरे सूखते होठों को जीभ से गीला करता हुआ नाइटी में मटकते उछलते रेशमा मैडम के चूतड़ों को देख कर बोला )
वो लगातार कुछ न कुछ बोले जा रही थी और मैं तो बस उनकी बदन की कामुकता में खोया हुआ था कि मेरे जेब में मेरा मोबाइल वाइब्रेट हुआ
चेक किया तो अलीना के मैसेज
' kaha ho my love .. mommy missing you baby'
इस मैसेज के साथ एक 10 सेकंड का वीडियो भी था ओपन किया तो आंखे फेल गई ।
अलीना ने भी नाइट गाउन पहन वीडियो बनाई थी और उसके गदराए जोबन के जोड़े आपस में खूब चिपके हुए थे नीचे शॉर्ट गाउन में झांकती उसकी चिकनी टांगे देख कर मैंने अपनी आंखे बंद कर एक गहरी आह्ह भरी और पेंट में फड़फड़ाते लंड को हौले से भींचा ।
: अह्ह्ह्ह्ह क्या गजब की चीज है ( आंखे बंद कर मैने हल्के से बुदबुदाते हुए अलीना को याद किया )
: क्या बोले तुम ( रेशमा मैम हाथ में कॉफी लेकर घुमती हुई मेरे और आते हुए बोली )
: अरे वो आपका घर , कितना गजब है ( मेरी फटी , जरूर इसने सुना ही होगा )
: हम्म्म बैठो और पियो ( वो मेरे करीब आकर बैठते हुए बोली )
मै भी उसके पास ही बैठ गया , एक बार फिर उसके जिस्म से आती वही मदहोश करने वाली परफ्यूम ने मुझे बेचैन करना शुरू कर दिया । लंड तो अलीना ने पहले से ही फौलादी कर दिया था ।
कॉफी पीते हुए वो कप की ओट से मुझे निहार रही थी और मैं नजरे चुरा रहा था ।
: आप अकेली रहती है क्या मैम यहां?
: हा , यहां मेरा है ही कौन , सोच रही हू एक रूम मेट रख लूं
: हा वो सही रहेगा , नही तो अकेलापन बहुत काटता है ( मै उदास होकर बोला )
: तुम भी अकेले ही रहते हो न , तुम ही आजाओ मेरे साथ रहने ( वो मुस्कुराकर बोली )
: क्या मै ? नही नही मै कैसे आपके साथ ? ( मेरी तो फट गई इसने तो सीधे घर में ही बुलाने का सोच लिया )
: क्यू ? किसी का डर है ? ( वो शरारत भरी मुस्कुराहट से बोली )
: नही ऐसी बात नहीं है वो मै इसका रेंट नही दे पाऊंगा और ऑफिस में पता चला तो आपकी इमेज खराब होगी बस इसीलिए ( मै बातों को संभालते हुए बोला , तब तक मेरे मोबइल पर अलीना का एक और मैसेज आया
मैंने हौले से मोबाइल टेढ़ा कर व्हाट्सएप खोला और उसको देख कर मेरा लंड एकदम से फड़फड़ाने लगा
" Come to your mumma my sexy boy"
इस मैसेज के साथ अलीना ने एक और तस्वीर भेजी जिसमे उसने अपने गाउन खोल रखे थे और दोनो बूब्स बाहर , उसके दोनो निप्पल किस्मिश से भूरे दाने एकदम कड़क और चमक रहे थे ।
: अच्छा मिलने तो आ सकते हो न मुझसे ( उसने बड़े खूबसूरत अंदाज में नजरे उठा कर कहा )
: हां? जी ? हा हा आ जाऊंगा ( मै हड़बड़ा कर जेब में मोबाइल रखता हुआ खड़ा हुआ )
: क्या हुआ ?
: वो mommy का मैसेज आ रहा है मुझे घर जाना पड़ेगा कुछ जरूरी काम है ( मै जल्दी जल्दी में वो बोल गया जो नही बोलना था )
: mommy? यू मीन अम्मी राइट ?
: हा हा अम्मी ही है ( मै खुद को संभालता हुआ )
: तो तुम्हारी अम्मी पढ़ी लिखी भी है ( वो कॉम्प्लीमेंट देते हुए बोली )
: अह हा , ये वाली तो है ( मै बड़बड़ाया )
: ये वाली मतलब ? ( वो पूरी कंफ्यूज थी और वही जेब में अलीना ने फोन लगाना चालू भी कर दिया )
: कु कुछ नही मैम , मुझे लेट हो रहा है सॉरी , मेरा मतलब बाय ( मै हड़बड़ाया )
: ओके बाय , आराम से जाना ( रेशमा मैम ने बड़े उदास हॉकर कहा )
फिर कई लिफ्ट से निकलता हुआ फोन पीक किया और बाइक से निकल गया तेजी से अपने रूम के लिए
जारी रहेगी
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयाUPDATE 006
नाइटी
कमज़ोरी ही है मेरी , सैटिन की नाइटी ।
वो मखमली सा अहसास जिसपर हाथ फिराने से एक अलग ही तरह की ठंडी मुलायम तरंग दौड़ती है बदन में दिल की धड़कने बढ़ा जाती है मेरी ।
उस कपड़े में मानो एक अजीब सी मादक गंध सनी होती है , जिसकी खुशबू सासो में बसते ही पैंट में वाइब्रेशन होने लगता है ।
बाइक चलाते हुए पैंट में हाथ डाल कर मैने मोबाइल खोला , अलीना ने एक और sexy सेल्फी भेजी थी । उस तस्वीर के साथ मैसेज भी था ।
" Lo beta dudh pi lo "
: ले बेटा दूध पी ले
मगर मेरी नजर अम्मी पर थी पहली बार आज वो बिना दुपट्टे के मेरे आगे थे वो भी नाइटी में , उनके बड़े बड़े मोटे दाने के निप्पल नाइटी फाड़ कर आने को बेताब थे । मेरा मुंह कुछ बोलने को खुला मगर मैं वैसे ही ठहर सा गया
: ले पकड़ न ( मै नजरे हटा कर अम्मी के हाथ से दूध का ग्लास लिया और अम्मी ने लपक कर मेरे बिस्तर से मोबाइल उठा ली )
: अरे क्या हुआ मोबाइल क्यों ( मानो मेरी रूह उठा कर ले जा रही हो अम्मी ऐसा महसूस हुआ , ना जाने कैसा जुड़ाव हो गया था चंद दिनों में मोबाइल से )
: तेरे अब्बू ने खास बोला है कि रात में मोबाइल तेरे पास नहीं होगी ( अम्मी के दिखावटी गुस्से में भी मुझे एक छिपी हुई शरारत की झलक दिखी , मै समझ गया कि अम्मी अब्बू से बाते करेंगी )
फोन पर ..
: ऊहू इतना तड़प रहे थे क्या कि आधी काफी छोड़ कर चले आए मेरे लिए
: mommy ने दूध के लिए बुलाया था तो कैसे नहीं आता ( मैने अलीना को फुसलाया )
: उस ब्लू आइज वाली है कही तुम्हे हिप्नोटाइज तो नहीं न कर दिया ( उसने शक किया)
: तुम्हारे प्यार के जादू के आगे सब धुंधला हो जाता है मेरी जान ( उफ्फ क्या कसा हुआ जोबन है इसका , मोबाइल के आई तस्वीरों में उसके कड़क भूरे निप्पलों को निहारता हुआ मै सिहरा )
: और खबरदार जो उसके शर्ट से झांकते कबूतरों को दाना दिया तो , कामिनी जानबूझ कर चोंच उठाए घूमती है तुम्हारे आगे हूह ( वो पूरी पोजेसिव होकर मुझ पर भड़की )
: मै क्यू उन्हें दाना डालूंगा भला , मेरे पसंदीदा कबूतरों के जोड़े तो तुम्हारे पास है ओह्ह्ह्ह कितने कड़क और तने हुए है ओह्ह्ह्ह जी चाहता है कि
: क्यायाआ? बोलो न क्या मन कर रहा है ? ( अलीना की सांसे बेताब थी मेरे मुंह से लब्ज़ सुनने को , उसके बदन में उठती मदहोशी और वासना की खुमारी में मोबाइल पर महसूस कर सकता था , गर्म सासो की आहट और उसमें छिपी हुई मादक कसमसाहट , मानों वो फोन को मुंह के पास रखे हुए अपने दोनों दूधिया रस भरे चूचियों को मसल रही हो ।
: सच में बोलूं क्या ? ( मैने उसे तड़पाया )
: उम्मम्म बोलो न ( वो पूरे जोश में सिसकती हुई कुनमुनाई)
: पहले ये बताओ इसके साथ जो दिलाया था वो क्यों नहीं पहना ?
: आपने ही बोला था कि इसके साथ दूसरे कपडे पहनने की जरूरत नहीं होती
: तो क्या नीचे भी नही पहनी हो (फोन स्पीकर पर था और अब्बू की बात सुन कर मेरा लंड एकदम से तनमना गया )
फरीदा शर्मा कर : धत्त चुप करिए आप , नटखट कही के । सारी शरारत जानती हु मै आपकी
अब्बू : अब मत तरसाओ न , वीडियो कॉल करू
अम्मी : उन्हू वो इसमें कान में लगाने वाला म्यूजिक वाला नही है , आवाज ऊपर तक जाएगी
अम्मी की बात सुन कर मेरा लंड एकदम से तनामना गया कि आज रात तो पूरा फुल प्रोग्राम सेट कर रखा है अम्मी और अब्बू ने वीडियो कॉल पर
अब्बू : अच्छा ठीक है इस बार आऊंगा तो वो इयरफोन लेके आऊंगा , फिर तो अपने गदराए जिस्म का दीदार कराओगी न बेगम
अम्मी इतरा कर: उहू बिलकुल भी नही ,
अब्बू : क्या ? पर क्यू ?
अम्मी : नही आप बहुत वो हो , और मुझे शर्म भी आयेगी
अब्बू और अम्मी की बातें सुनकर मेरा लंड और मैं दोनो खुश हुए जा रहे थे
: ऊहू देखो तो मेरी शेरनी को , अब मुझसे ही शर्मा रही है उम्म्म ( मैने उसे चिढ़ाया )
: नहीईई तुम ऐसे मुझे तंग नहीं कर सकते , तुम तुम पहले जैसे रहो न ( अलीना ऐसे उखड़कर बोली जैसे उसने कुछ खो सा दिया मुझमें , मुझे पाने के बाद )
: अच्छा जी कैसे होना चाहिए मुझे फिर ( मै हंसता हुआ उससे सवाल दोहराया )
: जैसे पहले तुम मुझे देख कर डर जाते थे , मेरे करीब आने पर कांपने लग जाते थे । मै छूती थी तुम्हे तो घबरा जाते थे वैसे ही एकदम मासूम और प्यारे से । मुझे तुम्हे छेड़ना परेशान करना पसंद है समझे बुद्धु हूह ( वो अपनी बीती मीठी यादों को जबान से दुहराती हुई तुनकी)
: याद है दुकान के उसे चेंजिंग रूम में जब तुमने मुझे अपनी ओर खींचा था एकदम से मुझे अपने करीब कर लिया था , तुम्हारे वो बड़े बड़े मोटे नुकीले तीर मेरे सीने को चिर रहे थे
: हम्म्म ( अलीना की सांसे फिर से गरमाने लगी )
: तुमने ही कहा था कि मुझसे डरो मत और फिर जब तुम मेरे रूम पर आई थी जहां मैं लेता हु वहां तुम मेरे बाहों में थी चिपकी हुई बिना कपड़ो के , तुम्हारी मखमली जांघें मेरे जांघों के बीच गर्म हो रही थी और तुम मेरे सीने से लिपटी हुई मुझे कसके पकड़े हुए थी , याद है वो पल
: सीईईईई उम्मम्म वो सब मै कैसे भूल सकती हु मेरे राआजाह ( अलीना कसमसाती हुई बोली )
: मै भी नहीं भूल सकता हूं , तुमने मुझे मेरे खामियों और मेरी जिद के साथ मुझे अपनाया था । फिर तुमसे कैसे डरना , डरता था कही तुम मुझसे नफरत न कर बैठो मेरे अतीत मेरे फैंटेसी को जानने के बाद , बस इसीलिए कतराता था ।
: धत्त बुद्धू , तुम इतने प्यारे हो तुमसे नफरत कैसी और mommy अपने बेटू से कभी नाराज नहीं होती समझे हिहीही ( वो प्यार से मुझे समझाते हुए एकदम से चुलबुली सी हो गई )
: mommy
: यस्स माय बेबी ( अलीना ने बड़े लुभावने स्वर में जवाब दिया )
: I wanna see you your booby mommy ... वीडियो कॉल करो ( मै पूरे कामोत्तेजना में डूबता हुआ अपने पैर आपस में रगड़ता हुआ बोला )
: धत्त नहीइइ मै वीडियो बना कर भेज दूंगी आपको , ऐसे मुझे शर्म आएगी ( अम्मी लगभग शरमाते हुए लहजे में बोली )
: तो कुछ तस्वीरें भी भेजना मेरी जान अपने बड़े फैले हुए चूतड़ों के । उन्हें याद करता हूं तो लंड मचल उठता है मेरा ( स्पीकर पर अब्बू की बातें सुन कर मेरे आंखो में अम्मी के बड़े फैले हुए चौड़े चूतड बस से गए और लंड लोवर में अकड़ सा गया ।
: धत्त गंदे , आपको तो बस बड़ी बड़ी हिलती डुलती चीजे ही भाती है , चाहे वो मेरी हो या फिर उस हुह्ह्ह ( अम्मी ने बीच में बात को रोक दिया और मैं उलझ गया कि अब दूसरी कौन है जिसकी बड़ी हिलकोरे खाती गाड़ के अब्बू दीवाने है )
: हा मेरी जान लेकिन तुम्हारी मोटे मोटे चूतड़ों की कसी दरारों को फैलाकर कर पेलने में जो मजा आता है अह्ह्ह्ह सीईईईईई मेरी जान देखो न मेरा लंड तुम्हारे बड़े बड़े मटके जैसे चूतड़ों को याद कर लार छोड़ रहा है आओ न चाट लो सीईईईई ओह्ह्ह्ह
: अब बस भी करिए शानू के अब्बू मुझसे रहा नही जायेगा । आप दूर से मुझे तंग कर खुद को शांत कर लेते है और मुझे आपकी यादों में तड़पना पड़ता है सीईईईई अह्ह्ह्ह ( अम्मी सिसकिया लेने लगी )
: मेरी यादों में तड़पती हो या मेरे इस फौलादी लंड के जो तुम्हारी लंबी बुर के फांके चीरता हुआ तुम्हे सुकून देता है ( अब्बू की बातों से मेरी हालत खस्ता हुई जा रही थी और अम्मी की सिसकिया और कमरे से आती मादक कुनमुनाहट से साफ पता चल रहा था कि अम्मी बिस्तर पर मचल रही है । )
: ओह्ह्ह मेरे सरताज अह्ह्ह्ह्ह मेरे साजन ओह्ह्ह उसे याद करती हू तो मेरी सलवार गीली हो जाती है सीईईईई आजाओ न जल्दी से , कब तक मुझे ऐसे तड़पाओगे मेरे राजा ओह्ह्ह्ह
: तुम कहो तो कल ही आ ज़ाऊ तुम्हारे पास
: ओह्ह्ह यस्स बेटू कम टू योर हॉर्नी मम्मा उम्मम
: उम्मम माय सेक्सी mommy कल आऊंगा तो दूधू पिलाओगी न
: हा बेटू क्यू नहीं , mommy का दूधू बेटू के लिए ही है मेरा बच्चा अह्ह्ह्ह अब चूस लो न इसे ओह्ह्ह्ह यस्स ऐसे ही पी लो मेरा बच्चा ( अलीना ने वीडियो कॉल पर अपने गोरे गोरे चूचे दिखाते हुए उन्हें मस्ती में मसलने लगी और मैं भी अपना लंड बाहर निकाल कर उन्हें देख कर हिलाने लगा )
: ओह्ह्ह mommy आपके बूब्स बहुत जूसी है उम्म्म सो टेस्टी उम्मम्म सीईईईई आई लव टू सक योर बूबी उम्मम्म आह्ह्ह ( मै अपनी मोबाइल स्क्रीन पर दिखते अलीना के निप्पल को जीभ से चाटने लगा और अलीना पागल होकर अपने पैर पटकने लगी )
: ओह्ह्ह यस्स बेबी सक इट उम्मम सक इट ओह्ह्ह्ह गॉड माय सेक्सी बेटू सक योर मम्मा बूबी ओह्ह्ह्ह यस्स अह्ह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शानू मेरा आयेगा ओह्ह्ह्ह डाल दो न अंदर
: कहा डाल दु मेरी जान
: अपनी फरीदा की बुर में मेरे राजा , फाड़ो न मेरी चूत को अओहह्ह घुसा दो अपना मोटा बड़ा लंड ओह्ह्ह्ह मेरे राजा ( अम्मी सिसकियां लेती हुई तड़पती हुई बोली )
: लो मेरी जान अह्ह्ह्ह घुसा दिया ओह्ह्ह कितनी गरम और मुलायम चूत है तेरी अह्ह्ह्ह्ह कितना तप रहा है ( अब्बू की बातें सुनकर मैं भी अपना लंड मुठियाता हुआ अम्मी की चूत की गर्मी को महसूस करने लगा )
: है न मेरे राजा , आना इस बार पूरा लंड पिघला लूंगी अपनी बुर ओह्ह्ह्ह शानू के अब्बू अह्ह्ह्ह्ह मेरे राजा अह्ह्ह्ह्ह चोदो मुझे अह्ह्ह्ह्ह कस कस के चाहिए मुझे अह्ह्ह्ह
: हा मेरी जान लेहह्हा अह्ह्ह्ह हचक हचक कर तेरे ऊपर चढ़ कर पेल रहा हु तेरी बुर में ओह्ह्ह्ह कितनी रसीली है इसे और भी रसीली कर दु क्या मेरी जान
: हा मेरे राजा कर दो न , भर दो मेरी चूत को अपने गर्म रस से अह्ह्ह्ह जब आपके रस से मेरी रस मिलती है तो उसे अपने बुर पर मलने में मुझे मजा आता है आह्ह्ह्ह मेरे राजा झड़ने वाली हु मै अह्ह्ह्ह्ह आओ न झड़ जाओ न
: अह्ह्ह्ह्ह सच में मेरी जान और जब मैं तेरी गाड़ में अपनी पिचकारी छोड़ता हु तब , तब अच्छा नहीं लगता ( अब्बू की बातें सुनकर मैं चरम पर पहुंच चुका था कि अब्बू अम्मी के गाड़ में झड़ते है । )
: आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह मेरे राजा मै आ रही हू ओह्ह्ह्ह निकल रहा है अह्ह्ह्ह ( अम्मी तेज सिसकिया लेते हुए पैर पटकने लगी जिसकी आहट मुझे साफ साफ दरवाजे के पास खड़े होकर सुनाई दे रही थी )
और मेरी भी वही खड़े खड़े पिचकारी छूटने लगी ।
मन की हवस शांत हो गई थी मगर
आने वाली सुबह को लेकर मै बेचैन था । अलीना के चंद सवाल मुझ पर भारी हो रहे थे जो उसने सोने से पहले मेरे जहन में छोड़े हुए थे ।
क्या ही जवाब दूंगा मैं उसको ?
क्या बताऊंगा मै उसको ?
कैसे समझाऊंगा उसको अपने और सिराज की अम्मी के रिश्ते के बारे में ?
सिराज की अम्मी जो रूप उस रात मैने देखा था मैने कभी नहीं सोचा था इतनी मजहबी और खुद को पर्दे में रखने वाली खातून के जज्बात इस तरह से निराले होंगे ।
इधर सिराज नशे में चूर था और मैं बड़ी मुश्किल से उसको संभाल पा रहा था।
कम से कम 5 से 6 बार मुझे आवाज देनी पड़ी तब उसकी अम्मी ने दरवाजा खोला और करीब 48 साल की महिला , जिसके भारी भरकम देह पर बड़ी सी चादर डली हुई थी , सिराज की अम्मी ने पूरी कोशिश की थी सामने वाले को भनक न लगे कि वो चादर के नीचे से पूरी नंगी है , मगर जल्द ही वो भी समझ गई कि मेरी नजरो ने उनके ऊपरी हिस्से का सिटी स्कैन कर ही लिया है ।
असहज होकर वो इधर उधर देखने लगी : अरे शानू बेटा इतनी रात गए , 1 बजने को हो रहे थे और तुम सब तो कल आने वाले थे न ।
: हा अम्मी लेकिन इसने कुछ ज्यादा ही पी ली और घर जाना घर जाना की जिद पकड़ ली ( सिराज को बाहों में संभालते हुए मैने कहा )
: अह्ह्ह्ह्ह अम्मी हेल्प करिए न , नहीं तो गिर जायेगा ये ( अब मै और उसको सहारा नहीं दे पा रहा था , पूरा बदन दुख रहा था )
सिराज की अम्मी ने उसको थामा और गैलरी में ले गई, मै दरवाजा लगा कर उनके साथ हो लिया
दोनो साइड से हमने सिराज को पकड़ कर आगे बढ़ रहे थे ।
: यहां नही बेटा , कमरे में ले चल वहां अच्छे से सो पाएगा ये
: फिर इस वाले कमरे में ही चलो , वहा दूर तक ले जाना नहीं होगा मुझसे अम्मी ( ना चाहते हुए सिराज की अम्मी को मेरे थके हुए चेहरे को देखकर कर मेरी बात माननी पड़ी और हम दोनो सिराज की अम्मी के कमरे में घुस गए । )
बिस्तर तक आते आते मै एकदम से ठिठक कर खड़ा हो गया और मेरी नजर बिस्तर पर रखे हुए सिराज की अम्मी के कपड़ो थी । ये वही कपड़े थे जो आज शाम को उसकी अम्मी ने पहने थे , मगर उसके साथ साथ उनकी ब्रा और उलझी हुई पैंटी भी थी ।
सिराज की अम्मी भी अबतक समझ चुकी थी कि मैं पूरी तरह से जान चुका था कि वो चादर के नीचे से पूरी नंगी है और वो इससे असहज होने लगी थी ।
: यही सुला देते है बेटा इसे ( उन्होंने उसका हाथ अपने कंधे से हटाते हुए कहा और उसको घुमाने की कोशिश करने लगी । मैने भी ऐसा ही कुछ प्रयास किया ताकि सिराज को पीठ के बल लिटाया जा सके )
मगर मेरे हाथ बहुत बुरी तरह दुख रहे थे और जैसे तैसे वो अपनी अम्मी के कपड़ो पर ही पसर गया , सिराज के अम्मी की पैंटी उसके मुंह के पास ही थी । जिसे हम दोनो देख पा रहे थे और जैसे ही मैने उसकी अम्मी की ओर देखा उनका चादर कंधे से सरका हुआ था जिसे उन्होंने लपेट रखा था और आगे से उनकी पेट और मोटी मोटी छातियों की झलक मिल रही थी ।
जिसे देखते ही मेरा लंड एकदम से फ़नफ़नाने लगा और उन्हें जैसे ही इसका अहसास हुआ वो चादर फिर से कंधे पर फेंकते हुए आगे से खुद को ढक ली ।
: जा बेटा सिराज के कमरे में तू भी आराम कर ले
: और आप ?
: मै भी देख रही हु , अभी कही तो सोना ही पड़ेगा न !! यहां तो इसकी बदबू से मेरा सर घूमने लगा है । सोच रही हु ऊपर कमरे में साफ करके बिस्तर लगा लू
: इतनी रात में आप कहा परेशान होंगी , आप सिराज के कमरे में सो जाइए मै बाहर सोफे पर सो जाऊंगा
: नहीं नहीं वहा मच्छर बहुत है बेटा तू नहीं सो पाएगा , ऐसा कर तू भी मेरे साथ सो जाना।
: जी ठीक है ( मै ये बोल कर कुछ पल चुप रहा )
: तू चल बेटा मैं आती हूँ जरा ( वो नजरे चुराते हुए बोली और मै समझ गया कि वो कपड़े पहने वाली थी )
मै कमरे से बाहर निकल आया मगर दिल को चैन कहा ।
कमरे से निकल कर मै सिराज के कमरे की चल तो दिया मगर चार कदम चल कर धीरे से वापस
वही दरवाजे के पास से झांका तो पूरे बदन में सुरसुरि सी चढ़ने लगी थी।
पेंट में लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था उसको भींचते हुए मैने सिसक कर सामने देखा तो सिराज की अम्मी अपने जिस्म से वो चादर उतार चुकी थीं और आलमारी से कपड़े निकाल रही थी ।
उनकी बड़ी सी गाड़ पूरी दरारों सहित नहीं मेरे आंखो के आगे कमरे की उजली रोशनी में चमक रही थी ।
आगे लटके हुए उनके मोटे भारी भरकम चूचे देख कर मेरे मुंह में लार घुलने लगी थी ।
तभी उन्हें कुछ अहसास हुआ और इससे पहले वो मेरी ओर देखती मै पीछे हो गया , मगर मेरी होशियारी शायद पकड़ी ही गई थी क्योंकि ठीक मेरे पीछे एक एल.ई.डी. बल्ब जल रही थी हाल के जिससे मेरी परछाई कमरे के दरवाजे के पास फर्श पर उभरी हुई थी ।
मै झेप भरी शर्मिंदी के साथ वापस सिराज के कमरे की ओर बढ़ गया कि जरूर उसकी अम्मी ने मेरी परछाई देखी होगी और वो न जाने क्या सोचेगी ।
" क्या वो कमरे में सोने आएंगी भी "
एक डर सा लग रहा था कि न जाने आगे क्या होने वाला , कही उसकी अम्मी ने मुझे घर आने से मना कर दिया तो फिर सिराज को क्या कहूंगा , उससे मेरी दोस्ती खत्म ? न जाने क्या क्या सवाल उभर रहे थे मेरे मन में और तभी कमरे में आहट हुई और मेरी नजर सामने गई ।
ब्लैक साटिन नाइटी में अपनी मोटी मोटी खरबूजे जैसे चूचीयो को समाए हुए सिराज की अम्मी मेरे सामने थी ।
जारी रहेगी
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयाUPDATE 007
हॉफ डे
सुबह सुबह उठ कर मै फ्रेश हो रहा था कि मेरा मोबाइल बजना शुरू हो गया । स्क्रीन पर नाम देखा तो चिढ़ सी हुई मगर बॉस तो बॉस होता है । मैने कॉल पिक की ।
: जी गुड मॉर्निंग मैम
: गुड मॉर्निंग शानू , आज ऑफिस चल रहे हो न ( बड़े खुशनुमा अंदाज में उसने कहा )
: जी मैम आना तो पड़ेगा न
: अच्छा नाश्ता कर लिया तुमने ( वो चहक कर बोली , फोन पर कुछ बर्तन की खटपट भरी आवाजें भी आ रही थी )
: जी नहीं , वो मै बस नहाने ..
: ठीक है फिर नहा कर सीधा तुम मेरे घर पर आ जाना , यही साथ नाश्ता करेंगे और ऑफिस चल चलेंगे
: ओके मैम
: जल्दी नहीं तो ब्रेकफास्ट ठंडा हो जाएगा हीहीही बाय ( वो खिलखिलाती हुई बोली और फोन कट हो गया )
मै फटाफट से नहाया और तैयार होने लगा , रोज मै नॉर्मली तैयार होता था मगर आज मेरी एक बॉडी स्प्रे पर गई और अनायास मैने उसे स्प्रे कर लिया।
तभी अलीना का फोन रिंग हुआ ।
: कैसे हो मेरी जान
: ओह्ह्ह्ह हाय उठ गई तुम , बस रेडी हो गया हु ऑफिस के लिए निकल रहा हूं
: ऑफिस ? ओ हैलो आज तुम मिलने नहीं आ रहे ( अलीना चौक कर एकदम से उखड़े हुए स्वर में बोली )
: आऊंगा न बाबू , वो रेशमा मैम ने फोन किया था उनको भी ऑफिस लेकर जाना है ( मैने झिझक भरे लहजे में बोला , इस डर में कही अलीना भड़के नहीं )
: वो डायन क्या लेगी तुम्हारा पीछा छोड़ने का हूह ( अलीना रेशमा के नाम पर चिड़चिड़ी हो गई )
: बाबू वो मेरी सीनियर है और उसकी गाड़ी आज आ जाएगी फिर मुझे नहीं आना पड़ेगा
: ये आखिरी बार है न ( उसने मुझसे कबूलवाया )
: हा मेरा बेबी आखिरी
: प्रोमिस ?
: अरे बाबू ये कैसी जिद , आपको मुझपे भरोसा नहीं है , वो मेरी सीनियर है मै कैसे उनको मना कर सकता हु ( मै उखड़ते हुए स्वर में बोला )
: हा हा ठीक है , लेकिन ध्यान रखना ब्रेकर पर स्पीड कम हो और चिपकने मत देना उसे पीछे से , नहीं तो तुम्हारी खैर नहीं समझे ( वो गुस्से में भभकती हुई बोली )
: हा मेरी मां सब जैसा तुम कहोगी वैसे करूंगा , अब निकलूं ( भीतर उबलती खीझ को मै दबाता हुआ बोला )
: ऐसे नहीं , मम्मा को किस्सी चाहिए ( उसने मुंह बनाया )
: उम्म्म्ममआआह्ह्ह्ह्ह खुश ?
: इधर भी , दूसरे वाले पर भी ।
: उम्म्माआआह अब ठीक है न
: हम्म्म लव यू ( वो फोन पर ऐसे इतराई जैसे मेरे सीने पर लोट रही हो )
: लव यू मेरा बेबी बाय
मैने फोन रखा और निकल गया फिर रेशमा मैम के फ्लैट की ओर
कुछ देर दरवाजा बजाने पर वो बाहर आई
: अरे आप अभी रेडी नहीं हुई ( मैने उन्हे उलझे हुए बालों में देखा )
: बस 5 मिनट , आजा अंदर आजा
: मामी जल्दी करो , मुझे कॉलेज जाना है देर हो जाएगी ( अम्मी की सहेली वो सेठानी मेरे आगे आगे सूट सलवार में अपने कूल्हे मटकाते हुए चल रही थी )
: हा हा मुझे सब पता है क्यों लेट हो रहा है तुझे , वो पास के गांव की छोरियां आती है न उनके पीछे हॉर्न बजा कर बाइक निकाल कर हीरो गिरी करेगा और क्या ( मामी ने झल्ला कर जवाब दिया )
: क्या मामी , आपके रहते मै किसी और के पीछे हॉर्न मारूंगा ( मै हंसते हुए उनको आइने में देखा वो मुझे देख कर पूरी मुस्कुराई )
: धत्त बदमाश कही का ( वो शर्म से पूरी लाल होते हुए मुझे कंधी दिखाते हुए बोली )
: चलो न मामी बहुत देर हो गई है , आप तो वैसे भी हीरोइन लग रही हो
: आज बड़ी तारीफ हो रही है , इतना मक्खन पालिश किस लिए भाई
: अब क्या बताऊं , आज तो मेरा हॉफ डे का प्लान है और अम्मी को देखने का भी ( मै खुद से बड़बड़ाया )
: क्या हुआ इतनी जल्दी क्यों है बोल
: जी ? जी कुछ नहीं मैम वो बस लेट हो गया है तो
: अरे मै हु न , अहूजा सर से मै बात कर लूंगी ( वो रिलैक्स होते हुए बोली )
: मैम एक और बात थी ( मै हिचकते हुए बोला )
: हा बोलो ( वो अपने साइड पर्स को चेक करते हुए बोली )
: मैम वो .... वो आज आप .... ( मै उनको देखे जा रहा था जींस कुर्ती में गजब कहर ढा रही थी , कूल्हे कुर्ती ऊपर तक टंगी थी और गाड़ बाहर की ओर निकली हुई जिसपे चुस्त लेगी के जैसे जींस जांघों पर कसी हुई थी । देख कर ही ईमान डोल जाए । )
: क्या ? ऐसे क्या देख रहे हो ? बोलो न ? ( वो थोड़े शर्माती हुई अपने बालों को कान के पास उलझाने लगी )
: मैम वो मुझे आज हॉफ डे चाहिए था तो क्या आप आहूजा सर से .... प्लीज
वो इतराते हुए मुस्कुराने लगी और मैं उलझने लगा । हम नीचे आ गए और मै बाइक स्टार्ट कर चुका था वो मेरे पास बैठ गई थी , उनका एक हाथ मेरे कंधे पर था । मै भीतर से सिहर रहा था , मानो रेशमा मैम की मुलायम उंगलियों से शिमला की सर्दी मेरे पूरे जिस्म में उतर रही थी। मगर मन उलझा हुआ था क्योंकि अभी तक उन्होंने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया था ।
: आप कुछ बोली नहीं मैम
: किस बारे में ( वो रियर मिरर में मुझे मुस्कुरा कर देखते हुए बोली )
: वो अहूजा सर से बात करने के लिए, आज हॉफ डे चाहिए था ( मै लगभग उखड़े मन से बोला , मुझे पसंद नहीं आ रहा था कि रेशमा मैम को दुबारा से इस छोटी सी बात के लिए सिफारिश करना )
: कॉफी पीने आना पड़ेगा मेरे यहां
: जी ? ( मै खिल उठा एकदम से उनकी बातों का मतलब समझ कर और गाड़ी रेस कर दी )
: अरे अरे आराम से चला , लेकर भागेगा क्या मुझे
: आपको लेकर भागने में मेरा क्या फायदा होगा ?
: अरे बिना खर्चे के इतनी सुंदर लुगाई मिल जाएगी और चाहिए तुझे
: फिर भी मेरा घाटा ही होगा ?
: वो कैसे ? ( मामी चौकी )
: इतना मेकअप का खर्चा मेरे बस का नहीं है बाबा हिहिहीही ( मै बाइक चलाते हुए जोर से खिलखिलाया )
: धत्त कामिना कही का ( लजाते हुए वो हस्ते हुए एक हल्का सा मुक्का मेरे कंधे पर मारी और मैं भी हसने लगा )
: हम्म्म लो आ गया आपका स्टॉप
: ठीक है अब सीधे कालेज जाना इधर उधर मस्ती करने मत निकल जाना ( वो मुझे हिदायत देते हुए बोली और आगे बढ़ गई )
उन्हें मटकते कूल्हे देख कर मैने खड़े खड़े ही बाइक पर हॉर्न बजाया और वो घूम कर मुझे हंसता हुआ देख कर हस दी और वापस जाने का इशारा किया ।
मै भी बाइक लेकर कालेज के लिए निकल गया ।
घड़ी की सुइयां मानो आज रेंग रही थी
मेरी टेबल से आहूजा सर के केबिन का दरवाजा थोड़ी सी कुर्सी इधर उधर सरका कर देखा जा सकता था ।
केबिन में फैन की हवा से दरबाजे का कर्टन हिल रहा था । उन हिलते हुए पर्दो और दरवाजे के गेट के गैप से हल्की फुल्की झलक मुझे रह रह कर दिखती।
उंगलियां जो रेशमा मैम के फाइल पर घूम रही थी , साफ नजर आ रहा था कि आहूजा कुछ डिमांड ही कर रहा है उनसे और रेशमा मैम की नजरो ने परदों के बीच मुझे देख लिया । मैं नजरे फेर कर अपने काम में लग गया ।
जानता था कि जितना रेशमा मैम मेरे लिए दीवानी है उतना ही हवस लिए आहूजा भी रेशमा मैम के चौड़े कूल्हे निहारता है । आहूजा के रंगीन मिजाज से ऑफिस ही नहीं आस पास के लोकल पब्लिक भी अच्छे से वाकिफ है और रेशमा मैम मेरे लिए उसे उतनी तवज्जो नहीं देती इसीलिए वो मुझसे अच्छी खासी जलन रखता है ।
कुछ ही देर बाद रेशमा मैम उसके केबिन से निकल कर आई और फिर मुस्कुराते हुए मुझे देखा
: एक बजे
: जी थैंक यू ( मै असहज भरी मुस्कुराहट से उनको देखा , भीतर से मुझे अच्छा महसूस नहीं हो रहा था )
ठीक एक बजे मै बाइक लेकर निकल गया ।
अजीब सी घबराहट हो रही थी मैने बाइक घर से पहले ही लगा दी थी। दिन के इस पहर में वैसे तो सब खा पी कर आराम करते है मगर आज ना जाने क्या हुआ था सब के सब मुझे ही निहार रहे थे घूर रहे थे मानो मुझे इस समय होना ही नहीं चाहिए था ।
: आज हॉफ डे था क्या शानू (चाय की दुकान पर बैठे एक काका ने तो पूछ भी लिया )
: अह नहीं नहीं काका वो बुक लेने आया हु ( मेरी बुरी तरह से फटी पड़ी थी )
: कुछ भी हो बड़े बाबू का लड़का है बहुत होनहार ( वो काका अपने पास बैठे दूसरे काका से बात करते हुए बोले और मै आगे निकल गया )
उम्मीद के हिसाब से घर का चैनल बंद था अंदर से ताला लगा हुआ , ताले को देखकर मेरी सांसे और चढ़ने लगी । नीचे लंड अलग ही फड़फड़ा रहा था ।
गहरी सास भरता हुआ मैने इधर उधर देखा और मौका देख कर बिलाल ट्रेलर के बंद पड़े मकान का दरवाजा खोल कर , जो पहले ही जुआरियों और शराबियों ने तोड़ रखा हुआ था मै घुस गया ।
उमहु पेशाब और नमी की गंध से मेरे मन में उल्टी जैसा लगने लगा , ताज्जुब नहीं हुआ मुझे भीतर जाने के बाद जीने के पास मुझे वीर्य भरे कंडोम और गुटके सिगरेट के पैकेट के फेंके पड़े हुए दिखे । अजीब सी घिनघिनाहट सी हुई और मैं तेजी से ऊपर निकल गया। दो मंजिला पर आकर मैने इधर उधर देखा और मेरी नजर मेरी छत पर गई , जिसके जीने का दरबाजा मैने सुबह ही खोलकर भीड़का कर रखा हुआ था एक ईंट लगा कर ताकि अम्मी को पता न चले । एक राहत भरी मुस्कुराहट थी मगर मंजिल अभी 3 मकान दूर थी ।
बीच में जुबैदा चच्ची का मकान पीछे से एक मंजिला उसको फांदना ज्यादा रिस्की था क्योंकि जुबैदा चच्ची घर के पीछे में आंगन पूरा खुला था छत नहीं थी ।
अपने मन के इरादे फौलादी करता हुआ मैने चारदीवारी फांद कर बगल के दो छत पारकर के जुबैदा चच्ची छत पर आते ही मेरी नजर नीचे आंगन में गई और मैं फौरन फर्श पर लेट गया ।
जुबैदा चच्ची आंगन में कपड़े डाल रही थी और वो बाल्टी से झुकझुक कर कपड़े निकाल रही थी , जब वो फिर से कपड़े निकालने को हुईं मै झुके हुए ही तेजी से उनकी छत को दौड़ कर पार करता हुआ एक ही जंप में उनकी चारदीवारी कूद कर सीधा अपने छत पर आ गया
5 मिनट तक मै खुद की सास संभालता रहा और कोई मुझे मुहल्ले का देखे नहीं इसीलिए मै नीचे बैठे हुए ही घुटने के बल चलता हुआ दरवाजे तक आया और ईंट हटा कर होले से दरवाजा खोला और धीरे से जीने से नीचे उतर गया ।
पूरे घर में एक चुप्पी सी थी और उस एक चुप सन्नाटे में अम्मी की हल्की फुल्की आवाजों में खनक भरी हंसी की किलकारियां शामिल थी ।
जूते मैने ऊपर ही निकाल दिए और दबे पाव सीढ़िया सरकता हुआ अपनी सांसों को थामे नीचे आने लगा ।
इधर अम्मी की आवाओ की फ्रीक्वेंसी तेज हो रही थी उधर मेरी दिल की धड़कने।
नीचे जीने पर आकर अपनी मनपसंद जगह पर रुक कर रोशनदान से अम्मी के कमरे में झांका तो दिल गदगद हो गया ।
पूरा घर बंद करने के बाद भी अम्मी को ना जाने क्या डर कि कमरे का दरवाजा भिड़का रखा था ।एक तरह से मेरे लिए सही भी था ।
क्योंकि अम्मी के कमरे के दरवाजे से जीने का रास्ता बिल्कुल सामने ही था ।
मै बिल्लियों के जैसे बिना आहट के लपक कर अम्मी के कमरे के दरबाजे के पास पहुंचा। दरवाजे के महीन गैप से अपनी आंखों का फोकस बढ़ा कर कमरे का जायजा लिया तो अजीब सा लगा
पूरा घर बंद अन्दर से बंद है , कमरा भिड़का रखा और उसपे से अम्मी बुरखे में बैठी हुई भला किस्से पर्दा कर रही थी ।
अब्बू की आवाजें स्पीकर पर आ रही थी ।
: ओहो मेरी जान और कितना समय लगेगा , तुम्हारे दीदार के लिए ही आज हॉफ डे लिया है ( अब्बू की बातें सुनकर मुझे हसी आई फिर सोचा अम्मी के लिए हॉफ क्या फुल डे भी काफी नहीं पड़ता )
: बस बस मेरे सरताज आपकी कनीज आपके हुजूर में हाजिर है ( अम्मी ने मोबाइल को जो आलमारी पर सुला कर रखी थी उसको सहारे से खड़ा करती हुई बोली )
अब्बू की छोटी तस्वीर वीडियो काल पर साफ साफ नजर आ रही थी ।
: ओहो सुभानल्लाह , अब जरा रुख से नकाब हटा कर हमें अपने कनीज के रुखसार का दीदार तो कराओ
: ऊहू , आज ये हमारे रुख से ये पर्दा न हटेगा , भले पूरी कुदरत जहांपनाह के आगे बेपर्दा करना पड़ जाए ( अम्मी ने अब्बू को तड़पा और ललचाया भी , साथ मेरे लंड की हालत और बुरी होने लगी )
: अह्ह्ह्ह मेरी जान तुम्हारी बातों से मेरा दिल बेकाबू हो कर कही खो न जाए सीईईईई अह्ह्ह्ह
: तो आप मेरा ये दिल ले लीजिए न हुजूर ( अम्मी ने अपने बड़े से चूचे को अपने दोनों पंजे से दिल का शेप देते हुए बोली)
उफ्फ उधर अम्मी खेल अब्बू के दिल से रही थी और जज्बात मेरे मचल रहे थे ।
: अह्ह्ह्ह मेरी जान , तुम्हारे दिल के लिए ही मेरा दिल बैचेन हुआ जा रहा है जरा उसे रोशनी में तो ले आओ , क्यों छिपा रखी हो उसे अंधेर दरख़्तो में ( अब्बू के आवाज में अम्मी के लिए तड़प साफ साफ झलक रही थी
: इन मुलायम मखमली दरखतों ने ही तो आपकी कनीज का दिल बड़ी हिफाजत से रखा है मेरे राजा ( अम्मी ने अपने दोनों चूचों के पहाड़ के बीच उंगली फसा कर बुरके में दोनों चूचों के पहाड़ जैसे उभार बाहर निकाल दिए )
: अह्ह्ह्ह्ह क्या नायब कुदरती जोड़े है मेरी जान सीईईईई जी करता है अपनी उंगलियों को इनपर सैर करवाऊं ( अब्बू लगभग सिसकते हुए बोले और मै भी अम्मी की चूचियों का शेप देख कर लिए लार टपकाने लगा )
मगर अगले ही अम्मी ने अब्बू और मुझे दोनों को चौका दिया
: और इन पहाड़ी गुफाओं के बारे में क्या ख्याल है , इनमें सैर नहीं करेंगे हुजूर उम्मम ( अम्मी खड़ी होकर अपने भारी भरकम चूतड बुरके में मोबाइल के आगे हिलाने लगी , जिसे देख आकर मेरी हालत और खराब होने लगी , लंड का सुपाड़ा पूरा टमाटर जैसे फूल चुका था लंड पूरी तरह रॉड हुआ जा रहा था । )
: ओह्ह्ह फरीदा मेरी जान तुम्हारे ये पहाड़ जैसे ऊंचे ऊंचे चूतड देखकर मेरी तो हालत खराब हो जाती है सीईईईई इन्हें देखता हू तो किसी की यादें ताजा हो जाती है ( अब्बू की बातें सुनकर मेरा दिमाग ठनका मगर अम्मी पर इसका जरा भी असर नहीं हुआ , जैसे ये सब बातें उनके लिए नई न हो )
: किसकी मेरे सरताज , मेरे ये पहाड़ी चूतड आपको किसकी याद दिलाती है बोलो न मेरे राजा ( अम्मी मोबाईल के आगे अपने कूल्हे मटकाती हुई उन्हें बुर्के के ऊपर से अपने हाथों से सहलाती हुई अब्बू को उकसाते हुए बोली )
मेरा गला सूखने लगा और दिल की धड़कने बढ़ने लगी कि अब्बू किसका नाम लेने वाले थे , लंड में अब एक अलग ही उत्तेजना दौड़ रही थी ।
: अह्ह्ह्ह्ह जानू तुम्हे तो सब पता ही है मै किसकी बात कर रहा हु ओह्ह्ह्ह सोच कर ही मेरा अकड़ रहा है , देखो न ( अब्बू ने मोबाइल पर अपना लंड बाहर निकाल दिया और वो उसको सहला रहे थे , अम्मी अब्बू का मोटा मूसल देख कर सिहर उठी और अगले ही पल उन्होंने पीछे से अपना बुरका उठा कर आगे झुकती अपनी बड़ी सी फैली हुईं गाड़ को नंगी कर दी )
: क्या वो भी आपके आगे मेरी तरह ऐसे अपने गाड़ खोल देती है मेरे राजा उम्मम्म ( ये बोल कर अम्मी ने अपने दोनों पंजे से अपने मोटे मोटे चूतड़ों फाड़ते हुए फैला दिया , जैसे ही मेरी नजर अम्मी के गहरे भूरे गाड़ की मोटी सुराख पर गई मेरे लंड से रस की बूंदे टपक पड़ी, पूरी ताकत से मैने मेरे फड़फड़ाते लंड को पकड़ कर भींच लिया और खुद को काबू करने लगा ,मेरा दिल अब मेरे बस में नहीं था , धड़कने पूरी शिद्दत जोरो से धड़क रही थी । अम्मी के नंगे चूतड़ देख कर एक अलग ही प्यास से गला सूखने लगा )
: ओह्ह्ह्ह फरीदा मेरी जान अह्ह्ह्ह क्या मस्त चूतड़ है तेरे ओह्ह्ह्ह ( अब्बू मेरी तरह अम्मी के बड़े भड़कीले चूतड देख कर तड़प उठे )
: ऊहू आज फरीदा नहीं ( अम्मी बोली और मै भी अचरज से थम सा गया एक पल को और हाथ भी लंड को मसलते हुए रुक गए )
: फिर ? ( अब्बू ने बड़ी खुमारी में सवाल किया )
: आज मै आपकी नगमा फूफी हु ( ये बोलते हुए अम्मी ने अपने आगे से बुरखे को हटाया और अपने दोनों बड़े बड़े खरबूजे जैसे दूध से लबालब चूचों को नंगे अब्बू के आगे परोस दिया )
: या खुदा क्या कयामत हो तुम ओह्ह्ह्ह , आज तुमने मेरा दिल जीत लिया मेरी जान
: ऊहू पूरा बोलो न फूफी..जान ( अम्मी ने अपने नरम नरम चूचे उनके आगे सहलाए और इधर मेरी हालत और खराब हो गई, अम्मी का ये रूप मेरी समझ और सोच के दायरे के बाहर की चीज थी । उसपे से अब्बू भी अपनी सगी फूफी के चूतड़ों के दीवाने निकले )
: ओह्ह्ह्ह नगमा फूफी ( अब्बू सिहर उठे )
: हम्म्म बेटा बोलो न ( अम्मी ने भी कसमसा कर अब्बू के आगे अपने दोनों चूचे मसल दिए
: ओह्ह्ह मेरी प्यारी फूफी मुझे मेरे नाम से बुलाओ न ( अब्बू अपना लंड सहलाते हुए बोले )
: क्या धत्त नहीं , नाम नही ले सकती मै आप मेरे शौहर हो ( अगले ही पल अम्मी अपने घरेलू रूप में लौट आई और मुस्कुराने लगी )
: अच्छा बाबा मेरी इजाजत है
: ऊहू , नहीं मुझसे नहीं होगा शानू के अब्बू ( अम्मी शरमाई )
: प्लीज न मेरी प्यारी फूफी, अपने अकरम बेटे की बात मान जाओ न , देखो न आपके रसीले दूध देख कर मेरे होठ सुख रहे है पीला दो न थोड़ा दूध मुझे ( एक बार फिर अब्बू ने अम्मी को लपेटा और अम्मी ने एक गहरी सास लेते हुए अपने जोबन को मसल दिया और सिसक पड़ी)
: अह्ह्ह्ह्ह सीईईई अकरम बेटा ( अम्मी ने जैसे ही अब्बू का नाम लिया मेरा लंड एकदम से फ़नफ़नाने लगा पूरे तन बदन में सुरसुरि सी चढ़ने लगी और अब्बू अपने पैर टाइट कर लंड को भींचने लगे । )
: हा फूफी जां, कहो न
: और क्या मन करता है आपका अपनी फूफी को देख कर ( अम्मी लगातार अपने चूचे हाथों से सहलाये जा रही थी , एक मादक भी कसमसाहट सी उठ रही थी उनकी आवाज में मानो वो किसी नशे में हल्के हल्के उतर रही हो )
: अह्ह्ह्ह्ह मेरी सेक्सी फूफी आपको देखकर जी करता है आपके बदन से ये बुरका उतार फेकू और आपके गदराए जिस्म को देखते हुए अपना लंड हिलाऊ ( अब्बू ने अपने जज्बात जाहिर करते हुए बोले और अगले ही पल अम्मी ने अपने जिस्म से बुरका उतार दिया मगर अभी भी उनके चेहरे से नकाब नहीं उतरा था )
: लो अकरम बेटा, निहार लो अपनी नगमा फूफी को उम्मम्म इन रसभरे फूले हुए चूचे के लिए ही तुम तरसते हो न ( अम्मी पूरी नंगी होकर अब्बू के आगे अपने तने हुए निप्पलों वाले गोरे गोरे चूचे दिखाते हुए बोली )
: अह्ह्ह्ह हा फूफी मै तो आपकी चूचियों का दीवाना हु , आपके थन जैसे मोटे मोटे चूचे देख कर मुंह में पानी आ जाता है अह्ह्ह्ह जी करता आपके ऊपर आकर इनको खूब चूसू ( अब्बू अपना लंड मसलते हुए बोले )
: आजाओ न बेटा लो पिलो , इनपे तो तुम्हारा ही हक है आओ न ( अम्मी अब्बू के आगे चूचे को लाती हुई बोली )
: क्या सिर्फ इन्हीं पर ही मेरा हक है फूफी आपके रसीले भोसड़े पर नहीं ( अब्बू की बातें सुन कर अम्मी ने आंखे बन्द कर गहरी गहरी सांस लेने लगी उनकी चूचियां और भी फुलने लगी )
: दिखाओ न फूफी अपना रसदार गुलाबी भोसड़ा ओह्ह्ह्ह उसे देखने के लिए देखो मेरा लंड कितना बौराया हुआ है ( अब्बू अपने लंड का सुपाड़ा कैमरे के आगे ले जाते हुए बोले , अब्बू का लाल सुपाड़ा देख कर अम्मी मचल उठी और वो बिस्तर पर लेट कर मोबाईल के आगे अपनी दोनो टांगे हवा में उठा दी और उनकी लंबी फांके वाली चूत खुल कर अब्बू के आगे से आगे आ गई । जिसे देखकर मेरे लंड की नसे टपकने लगी मैने जोरो से उसको भींच रखा था , पूरा सुपाड़ा खून से भरा हुआ जल रहा था । कभी कभी मेरा फब्बारा फूट सकता था और फूटा भी
: लो बेटा देख लो अपनी फूफी का भोसड़ा अह्ह्ह्ह्ह लो देखो मैं फैला रखा है ( अम्मी अपनी टांगे उठाए हुए चूत फैलाते हुए बोली और उनकी गुलाबी चौड़ी सुरंग देख कर मुझसे रहा नही गया और मेरे हाथ में ही मेरी पिचकारी छूटने लगी ।)
अम्मी के भोसडेदार गुलाबी चूत की तस्वीर मेरे जहन में बस चुकी थी मेरे दिल में अम्मी का नाम धड़क रहा था , आसपास सब कुछ एकदम से सुन्न हो गया था कुछ पल के लिए और बंद आंखो से हाथों में मेरे लंड की धार पर धार छूट रही थी ।
: क्या हुआ जानेमन ( धड़कने थमी तो पहले अब्बू की आवाज आई)
: लगता है बाहर कोई है ( अम्मी की बातें सुनकर मैं एकदम से सतर्क हो गया और जल्दी जल्दी अपना वीर्य से सना लंड अपने पेंट में घुसाने लगा )
: अरे शानू बेटा तुम ??
जारी रहेगी
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयाUPDATE 008
गुलाबी चाय
: अरे शानू बेटा तुम ??? ( दरवाजा खोलते हुए मुझे सामने देखकर सिराज की अम्मी बोली और मेरी नजर हाल में सीढ़ियों से फुर्ती से उतरती अलीना पर थी । जमीला ने गर्दन घुमा कर उसकी ओर देखा तो अलीना नजरे चुराने लगी )
: सिराज भी आया है क्या ( जमीला ने गर्दन बाहर कर देखा और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी )
: जी नहीं , वो आज साइट विजिट करने गया है और मुझे आज ऑफिस में काम नहीं था तो सोचा आपसे मिलता चलूं (मैने बातें घुमाने की पूरी कोशिश की मगर जमीला समझ चुकी थी )
: मेरे हाल तो एकदम अच्छे है लग रहा है शायद किसी और की तबियत बिगड़ी हुई है ( जमीला मुस्कुराते हुए अलीना को देखा जो नजरे चुराते हुए मुस्कुरा रही थी )
: अरे अलीना बेटा , शानू को नाश्ता करवाओ मै तबतक नहा लेती हूं, ( ये बोलकर जमीला अपने बड़े से चूतड़ एक ढीली नाइटी में मटकाती हुई अपने कमरे की ओर चली गई)
मै उनके हिलकोरे खाते चूतड़ों को एक टक निहार रहा था इतने में अलीना मेरे करीब आ चुकी थी
: उस रात यही वाली थी क्या ( अलीना का इशारा जमीला के काटन की नाइटी पर था जो वो पहने हुए थी )
: ऊहू .... ब्लैक साटिन ( बोलते हुए मै मुस्कुराया )
: वैसे गुलाबी चाय पियोगे या फिर ब्लैक कॉफी ( अलीना ने दोहरे शब्दों में ऑफर किया और मेरी नजर उसकी गुलाबी टॉप पर थी जिसमें उसके निप्पल हार्ड होकर टीशर्ट फाड़ने को आतुर दिख रहे थे )
: तुम्हारे हाथों की कुछ भी चलेगी ( मै अलीना को बोलकर जमीला को उसके कमरे से बाथरूम की ओर जाते देखने लगा उनके कपड़ो के नीचे से गुलाबी रंग की ब्रा लटकी हुई थी। उसे देखते ही पल भर में कुछ यादें जहन में ताजा सी हो गई
: मै नहाने जा रही हु , ये कपड़े तू वाशिंग मशीन में डाल देना ( अम्मी ने फरमाया )
: जी अम्मी लेकिन ये आपकी सलवार रंग छोड़ती है न , इसको भी डालनी है क्या
: हा डाल दे और वाशिंग मशीन में जो हल्के रंग के कपड़े होंगे उन्हें बाहर बाल्टी में अलग करके चला देना ( अम्मी बाथरूम में घुसकर कड़ी लगाते हुए बोली )
मै सारे कपड़े लेकर जीने के नीचे रखे वाशिंग मशीन के पास पहुंचा , एक दो मेरे शर्ट के अलावा अम्मी के कपड़ो में लिपटी हुई मुझे एक गुलाबी पैंटी ब्रा का सेट मिला ।
मैने उसे बाहर निकाला और बाथरूम की ओर देखा । वहा से टोटी की आवाज आ रही थी मै मेरे हाथ में अम्मी के मुलायम ब्रा और पेंटी को भरने लगा । अम्मी की पहनी हुई ब्रा और पैंटी का स्पर्श मुझे पागल कर रहा था और मेरा लंड एकदम से फड़फड़ाने लगा।
: इसे अभी काबू में रखो ( अलीना ने पेंट में उठे तम्बू को दबाते हुए मेरे पास नाश्ते की ट्रे रखते हुए बोली )
: सीईईई अह्ह्ह्ह्ह अब बर्दाश्त नहीं होता ( मैने उसकी कमर में हाथ डाल कर उसको अपनी ओर खींचा और उसके लिप्स से अपने लिप्स जोड़ लिए । मेरे हाथ उसके लोवर के ऊपर से उसके कूल्हे मसलने लगे और वो भी पूरे जोश में मेरे लिप्स चूसने लगी )
: नहीं रुका जाता तो चले जाओ न , अम्मी मना थोड़ी न करेंगी ( वो मेरे पैंटी के ऊपर से मेरे अकड़े सुपाड़े को मुठ्ठी में भरते हुए बोली और मेरी आंखे उलटने लगी )
: चलो न देखते है कैसे नहाती है अम्मी ( मेरी आंखो में एक चमक सी उठी और वो हसने लगी ... मैने दो बार और उसे मनाया लेकिन उसने मना कर दिया )
: मै अभी आया ( ये बोलकर मै बाथरूम की ओर चला गया)
पानी की आवाज तेज थी उधर वाशिंग मशीन भी शुरू हो चुका था
मैने लपक कर किचन से एक स्टूल खींच लाया और बाथरूम के बाहर लगा कर खड़ा हो गया , मगर अभी भी बाथरूम का रोशनदान ऊंचा था ।
जेब टटोल कर मोबाईल निकाला और फ्लैश ऑफ करके वीडियो कैमरा की रिकॉर्डिंग चालू कर दी ।
दिल के जज्बात भीतर से उफान पर थे और लंड पूरी बगावत पर , मोबाइल ने आज चीजे काफी आसान कर दी थी मगर दिल में डर था कि कही अम्मी दरवाजा न खोल दे इसीलिए कुछ 20-25 सेकेंड के बाद मै नीचे उतर आया और किचन में स्टूल रख कर मोबाइल चालू कर अपना लंड लोवर में मसलने लगा : अह्ह्ह्ह अम्मी कितनी बड़ी गाड़ है आपकी सीईईईईईआईआई अअह्ह्ह्हह
मोबाइल में अम्मी बाथरूम में शावर ले रही थी और बालों से शैम्पू रिस कर पूरे बदन पर फेल रहा था और जब झाग अम्मी के गाड़ के दरारों में जाने लगा तो अम्मी उंगली डाल कर अपनी गाड़ साफ करने लगी जिसे देख कर मेरा लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था ।
मै वापिस लालच में बाथरूम की ओर बढ़ा कि सामने अम्मी ने दरवाजा खोल दिया और मैने झट से मोबाईल जेब में डाल दिया
: अरे बेटा , क्या हुआ फ्रेश होना है क्या ( सिराज की अम्मी एक काटन की नाइटी में मेरे आगे खड़ी थी उनके बालों में तौलिया लगा हुआ था और पूरी छाती गहरे गले वाली नाइटी से झलक रही थी )
: मै तो आपके साथ नहाने आ रहा था ( मैने धीरे से बड़बड़ा कर उनको आंख मारी )
: धत्त बदमाश कही का , बाहर तेरी हीरोइन है चुपचाप पेशाब करके आजा । अगर रात रुकेगा तो कुछ हो सकता है ( सिराज की अम्मी ने मुस्कुरा कर देखते हुए अपने बड़े बड़े मटके हिलाती हुई अपने कमरे की ओर चली गई । )
वही बाहर आने पर अलीना की हसी नहीं रुक रही थी
: यार इतनी जल्दी कौन नहाता है ( मै सफाई देते हुए बोला)
: उस रोज भी वो नहा कर आई थी न कमरे में ( अलीना ने मेरी यादें करते हुए बोली )
: हम्म्म शायद ? ( मै मुस्कुरा )
: शानू बेटा देखना हाल में मोबाईल है क्या ( सिराज की अम्मी ने आवाज दी )
: जाओ मोबाईल के बहाने इसकी थोड़ी सेवा करवा लेना , मै इंतजार कर रही हु ऊपर ( अलीना ने मेरे कड़े लंड को एक बार फिर से पेंट के ऊपर से मसला और मै जमीला का मोबाइल सोफे से उठा कर उनके कमरे की ओर बढ़ गया )
: जी अम्मी ये लो ( अम्मी को मोबाइल देते हुए मै बोला )
: बेटा वो कपड़े वाशिंग मशीन ने निकाल कर छत पर डाल आ और बाकी दूसरे कपडे मशीन में डाल कर चला दे ( अम्मी अपने बाल फोड़ती हुई बोली और मोबाइल मेरे हाथ से ले लिया)
मै वाशिंग मशीन से कपड़े निकाल कर बाल्टी में रखने लगा और मशीन चालू कर धुले हुए कपड़े लेकर ऊपर जाने लगा । सीढ़िया चढ़ते हुए मुझे महसूस हुआ कि अम्मी ने एक बार कमरे से बाहर आकर मेरी ओर देखा था और जैसे ही मैं घुमा वो कमरे में घुसती हुई मुझे नजर आई।
मैने बाल्टी वही रास्ते में छोड़ कर दबे पाव सीढ़िया सरकता हुआ नीचे आया और कमरे पास खड़ा होकर आवाजे सुनने लगा
: हा बाबा वो भी भेज रही हु , आपको तो बड़ी जल्दी रहती है
: अह्ह्ह्ह्ह मेरी जान तुम्हे नंगी देखने के लिए मेरी बेताबी का अंदाजा भी नहीं लगा सकती हो
अम्मी अब्बू को अपनी नंगी तस्वीरों की स्नैप भेज रही थी ये सोच कर ही मेरा लंड एकदम से फ़नफ़नाने लगा लेकिन अगले ही पल मेरे अरमानों पर पानी फिर गया
: हो गया
: ओके मेरी जान अब गैलरी से सारी फोटो डिलीट कर दो , शानू के हाथ न लगे ( बहिनचोद मेरी जान हलक में , अलग अम्मी ने गैलरी खोली तो उनकी नहाने वाली वीडियो उनके हाथ लग जाएगी । मेरी सांसे धक धक होने लगी , मन ही मन खुदा से आज तक जीवन भर की गई सभी अच्छाइयों के बदले एक पाप से बचाने की भीख मांगने लगा )
: हा गया , वो कैमरा वाला पूरा फोल्डर ही डिलीट कर दिया , अब खुश ( अम्मी तुनक कर बोली )
: तुम खफा न हो बेगम , ये सब शानू के भले के लिए ही है और इससे उसके और हमारे बीच के रिश्तों में दूरी आयेगी । तुम समझो न
: हा हा समझ गई मेरे साजन , आप मुझे कही भी बेपर्दा होने नहीं देंगे , अब मै तैयार हो जाऊं ( अम्मी इतरा कर बोली )
: हा हो लो न मेरी जान , बस तैयार होकर एक अच्छी से तस्वीर भेजना फूल वाली
: शानू से खिंचवानी पड़ेगी , चलेगा न ( अम्मी खिलखिलाई )
: बस कपड़े पहन कर खिंचवाना हाहाहाहाहा ( अब्बू ठहाका लगाकर हंसे)
: धत्त गंदे कही के रखो ( अम्मी लजा कर फोन रख दी और मै भी ऊपर चला गया कपड़े डालने )
: उह्ह्ह्ह छोड़ न बदमाश कही का अह्ह्ह्ह कैसे मसल रहा है उम्मम्म बेटा रहने दे
: अह्ह्ह्ह्ह अम्मी आपको देखने के बाद अब रहा ही नहीं जाता इसीलिए तो आपके पास चला आया ( मैने जमीला की मोटी मोटी चूचियां नाइटी के ऊपर से मसलता हुआ बोला )
: चल झूठा कही , मुझे सब पता है तू अपनी हीरोइन के लिए आया है , साफ साफ बोल क्यों नहीं देता उससे कि तू भी उसे चाहता है ।किइईईतनीईई प्यारी बच्ची है उम्मम्म बेटा मान जा न रात में प्लीज ओह्ह्ह्ह ( मेरे पंजे अब ऊपर से नाइटी में घुस कर जमीला ने ब्रा के ऊपर से उसके चूचों को मसल रहे थे । )
: प्यारी तो आप भी हो न अम्मी और कितनी प्यारी आपकी दूध की ये टंकिया है और सबसे प्यारे होठ आपके ( मैने झुक कर जमीला के मोटे होठों को चूस लिया वो पूरी तरह भीतर से सिहर उठी )
: अपने होठों को जरा इसपर सजाओ न ( मैने उनका हाथ अपने पेंट के ऊपर से कड़क लंड पर रखा , जैसे उसकी गर्मी हथेली से उनके ठंडे जिस्म में उतरने लगी और वो एकदम से सिहर उठी )
: अरे मेरे पगलू मेरे होठों ने कब इंकार किया है इससे , आज मौका उसके होठों की हामी लेले जा ( जमीला ने बड़ी अदा से मेरे लंड और चेहरे को सहलाते हुए बोली )
: लेकिन कोई रिश्क तो नहीं होगा न , मतलब कोई आ गया तो ( मैने उनके सामने नाटक किया)
: मै हु न , कोई नहीं आएगा
: थैंक यू अम्मी ( मैने झुक कर उनके बूब्स मसलते हुए उनके लिप्स को चूसा और कमरे से निकल गया )
: बावरा कही का , प्यार करता है लेकिन मानता नहीं हीहीहीही ( कमरे से निकलते हुए अम्मी की आवाजें मेरे कानो में पड़ी और मैं मुस्कुराता हुआ तेजी से ऊपर चला गया ।)
बाथरूम से शावर की आवाज आ रही थी और मै तबतक अलीना के कमरे का जायजा लेता हुआ बिस्तर पर लेट गया और मोबाइल देखने लगा ।
: हाय जानेमन ( अलीना ने बड़ी अदा से इतराते हुए कहा और उसको ब्लैक ट्रांसपैरेंस नाइटी में देख कर मेरी आंखे चमक उठी और मै बिस्तर से उठने को हुआ
: आहा उठना मत , मै आ रही थी ( उसने उंगली से इशारे करते हुए कहा और बिस्तर पर चढ़ गई )
उसकी नाइटी जांघों तक भी नहीं थी और उस पारदर्शी नाइटी के उसकी ब्लैक पैंटी साफ़ साफ़ झलक रही थी और उसकी वैक्स हुई लंबी चिकनी गोरी गोरी टांगे देख कर पैंट में मेरा लंड बगावत पर उतर गया था
मै अवाक होकर उसके उसके इस रूप को निहार रहा था और वो मेरे करीब खड़ी हो गई , रुका नहीं गया मुझसे और मैने हाथ बढ़ा कर उसकी जांघों को पर पंजे लगा दिए , इतना मुलायम और इतना फिसलन भरा अहसास हुआ मानो मेरा दिल जिगर सब कुछ आज पिघल ही जाएगा ।
उसकी जांघों को हाथों में भर कर उसके करीब आकर उसके जिस्म से आती खुशबू को नथुनों में भरते हुए मैने आंखे बंद कर उसके जांघों को चूमा और वो सिसक पड़ी ।
उसकी एडी सीधा मेरे तंबू पर थी और जींस के ऊपर से ही वो एड़ी से मेरे सुपाड़े को मसल रही थी
मेरे हाथ उसके चिकनी जांघों को सहला रहे थे चूम रहे थे ।
: उस रोज अम्मी ने ऐसे ही पहना था ना ( वो मुझे सताते हुए बोली और
मैंने उसकी ओर देख कर हा में सर हिलाते हुए उसके जांघों को चूमते हुए चूत की ओर बढ़ने लगा और वो मेरे सर को पकड़ कर सिसकने लगी
: अह्ह्ह्ह्ह बताओ न कैसे किया था ( वो कामोत्तेजना के नशे में तैरती हुई बोली )
मेरे पंजे अब उसके नंगे चूतड़ पर थे क्योंकि पैंटी तो उसके दरारों में कही छिपी हुई थी , मै उन्हें मसल रहा था सहला रहा था फैला रहा था और मेरे होठ उसके पैंटी के ऊपर से चूत के ऊपर रेंग रहे थे ।
: उम्मम बताओ न जान, क्या वो ऐसे तुम्हारी गोद में थी ( वो सरक कर नीचे आ गई और मेरे ऊपर बैठ गई )
मैने मुस्कुरा कर न में सर हिलाते हुए उसके कंधे को सहलाते हुए उसके हाथ पकड़ कर अपने चेहरे से लगाने लगा , उसके उंगलियों का स्पर्श मुझे भीतर से और जोशीला किए जा रह था । मेरा तन मन भीतर से चाह रहा था अलीना मुझे अपनी बाहों में कस ले मुझे हर तरह से छूए जैसे उसने मेरे मन को छू लिया था ।अलीना मेरे लंड पर स्वार थी और जींस के ऊपर से ही तम्बू पर अपनी चूत घिसने लगी थी , मगर घुमा फिरा कर सवाल वही था
: बताओ न मेरी जान ( मैंने उसे कस कर अपने करीब कर लिया और उसके लिप्स से अपने लिप्स जोड़ दिए )
वो पूरी जोशीली होकर मेरे लिप्स पर टूट पड़ी और चूत को दुगरी रफ्तार से मेरे लंड पर घिसने लगी , मेरा लंड भीतर से फड़फड़ा रहा और अब मै उसे ज्यादा देर तक अंदर रख नहीं सकता था
मैने जींस के बटन खोल कर जिप नीचे कर दी और लंड बाहर , इससे पहले अलीना मेरे लंड को थामती मै उसको झटक कर बिस्तर पर लीटा दिया और उसको पीछे से करवट लेके पकड़ लिया
: उम्मम धत्त बदमाश मेरा माल मेरे हाथ में तो दो , तभी तुम बोलोगे ( वो मेरी बाहों में खिलखिलाते कसमाते हुए बोली )
: उह्ह्ह्ह ऐसे ही पकड़ने दो न ( मैने नाइटी के ऊपर से उसके नारियल से कड़क मोटे मोटे चूचों को दोनो पंजों में भरते हुए कहा और फड़कता लंड सीधा उसकी गाड़ के दरखतो में , पतली सी थांग वाली पैंटी भला मेरे नुकीले बांस की चोट को कैसे रोकती , दुबक कर उन्हीं दरारों में अड़स सी गई , सुपाड़ा उसके दरारों को चीरता हुआ आग उगलता अलीना के पिछली दरवाजे पर दस्तक दे रहा था और मेरे जीभ उसके चिकने कंधे और गर्दन पर रेंग रहे थे )
एड़िया उसके पंजों पर घिस कर गजब की गर्माहट पैदा कर रही थी , पूरे बदन में हल्की गुदगुदाहट सी हो रही थी , उसकी चिकनी जांघें और मुलायम चूतड मेरे जांघों की गोद में कसमसा रहे थे और लंड उन जांघों के बीच उसके सुराख पर जोर दिए जा रहा था ।
: उम्मम तो ऐसे ही शुरुआत हुई थी न ( वो लगभग समझ ही गई )
: हम्म्म ऐसे ही कुछ ( मैने उसके रेशमी बालों छिपे कानो को चूमते हुए बोला और वो पूरी सिहर उठी , उसके निप्पल की हार्डनेस मुझे मेरे हथेली में महसूस हो रही थी )
: तो क्या तुम भी बिस्तर में ऐसे नंगे थे और अम्मी भी
: ऊहू पहले तो मैने पेंट पहन रखा था मगर जब अम्मी कमरे में आई तो
: तुझे दिक्कत तो नहीं होगी न बेटा , कह तो मै हाल में सो जाऊंगी ( सिराज की अम्मी उस ब्लैक साटिन नाइटी में बेड के पास खड़ी खड़ी बोली और चादर के नीचे मेरा लंड एकदम से अकड़ा हुआ था , मेरी नजरें उनके बड़े बड़े रसीले मम्मों पर थी जिसके खजूर से निप्पल नाइटी में साफ साफ उभरे हुए थे और बड़े से कूल्हे पर नाइटी पूरी चुस्त कसी हुई थी । )
: नहीं अम्मी कोई दिक्कत नहीं होगी बहुत जगह है यहां, (मैने चादर हटाते हुए थोड़ा खसक कर उनको बिस्तर में आने का आमंत्रण दिया और उनकी नजर सीधा मेरे नंगे जांघों और बॉक्सर पर गई फिर वो मुस्कुराते हुए बिस्तर पर बैठ गई । )
उनके बड़े बड़े कूल्हे पूरे गद्दे में 5-6 इंच तक धंस चुके थे फिर भी पूरे बिस्तर पर फैले हुए थे , देखते ही मन में अजीब से बेताबी होने लगी , अंडरवियर में अलग ही तूफान उठा हुआ था ।
: बत्ती बुझा दूं या फिर ऐसे ही सोएगा तू ( वो कब घूम कर मुझे देखने लगी पता नहीं लगा मुझे और मेरी नज़रे उनके भड़कीले चूतड से हटकर उनसे मिली तो एक झिझक सी हुई मन में , जैसी आपकी मर्जी मुझे कोई दिक्कत नहीं है अगर बत्ती जल रही है तो )
: मुझे भी बत्ती जला कर ही सोने की आदत है और देर रात नहा कर सोने की भी ( सिराज की अम्मी ने सफाई देते हुए बोली मगर मैं समझ गया था)
: तो फिर आप नहाई क्यों नहीं ( मैने शरारती मुस्कुराहट से सवाल किया और वो अपने होठ सिलते हुए मुस्कुरा दी )
: बहुत बिगड़ गया है तू , तू देख रहा था न कमरे में मुझे ये जानते हुए भी कि मैने कुछ नहीं पहना था तब ( वो मेरी ओर करवट लेकर बोली और उनकी मोटी मोटी चूचियां भी नाइटी की ओट बिस्तर पर लेट गई और मेरी नज़रे सीधा उनपे ही थी )
: सॉरी अम्मी वो मै वापस जा रहा था पता नहीं कुछ याद आया वही पूछने आपके पास आया था मगर आपको देख कर भूल गया
: क्या , धत्त बदमाश, ऐसा क्या था जो भूल गया ( वो नजरे फेरते हुए लजाते हुए बोली )
: पता नहीं अम्मी , बस आपको वैसे देखा तो दिमाग ही काम करना बंद हो गया था , सॉरी ( मै अपना चेहरा उदास करता हुआ बोला )
: चल ठीक है हो जाता है , सो जा अब ( वो मेरे गाल छूती हुई बोली और मैने उनके स्पर्श पाते ही आंखे बंद कर ली पूरे बदन में एक सनसनी फैल गई )
कुछ देर की चुप्पी और मुझसे रहा नही गया
: चचा की याद आ रही थी न आपको
: क्या मतलब ?
: वो सोफे के पास ..... ( मै बोलते हुए रुक गया और सिराज की अम्मी समझ गई सीधा मेरे मुंह पर हाथ रख दिया ताकि एक भी शब्द आगे न बोल सकू)
: चुप पागल कही का, तुझे ऐसा क्यों लगा , वो मैने खाने के लिए निकाले थे आजकल मै डाइट पर हु न ( वो मुंह फेरते हुए बोली , मगर उनके गालों के गुलाबीपन कमरे की रोशनी में साफ साफ झलक रहे थे और उन्हें फंसता देख मै चादर में अपना लंड अंडरवियर के ऊपर मिज रहा था )
: डाइट के साथ नारियल का तेल ?
: अब चुप हो जा भाई , क्यों मुझे शर्मिंदा कर रहा है । सबकी अपनी अपनी जरूरतें है और ऐसा नहीं है कि सिराज के अब्बू मुझे प्यार नहीं करते , घर में अकेली थी तो .... ( वो बोलते हुए मेरी ओर पीठ कर ली और उनकी बड़ी सी गाड़ मेरे आगे निकल आई, जिसे देख कर मेरा लंड पूरा हरकत में आ गया
: वैसे मुझे ऐसा ही कुछ सूझता है अक्सर जब मैं कमरे पर होता हु , इसमें शर्माने जैसा क्या है ? अगर आपको बुरा लगा तो सॉरी ( मै थोड़ा आगे बढ़ कर उनके करीब हुआ )
: इसलिए तो कह रही हु शादी कर ले न अलीना से ( सिराज की अम्मी मुझे जवाब देने के लिए हल्का सा गर्दन फेरते हुए मेरी ओर घूमी और उन्हें भनक भी नहीं थी मै उनके एकदम पीछे सरक कर आ गया था और वो एकदम से मुझसे चिपक सी गई )
: क्यू शादी करने से क्या आपकी जरूरत कम हो गई जो मेरी हो जाएंगी ( मै अब उनके पीछे से बोला और मेरा लंड उनकी कूल्हे के पास पंप हो रहा था जिसकी कठोरता वो साफ साफ महसूस कर पा रही थी , मगर उन्होंने जरा भी इसके लिए मुझे रोक या टोका नहीं )
: धत्त बदमाश, तू न बहुत बिगड़ गया है ( वो सामने दीवाल की ओर देखते हुए बोली )
: आप बात मत बदलो , पहले जवाब दो ( मै उनको पीछे से पकड़ते हुए बोला , मेरी हिम्मत बढ़ चुकी थी अबतक क्योंकि सिराज की अम्मी ने अब तक जरा भी मेरे किसी भी बात या हरकत का विरोध नहीं किया था एक चुप्पी भरी सहमति नजर आ रही थी )
: हा तू सही है , जरूरतें भला किसकी कम हुई है और मुझे ये भी पता है कि ये तेरी जरूरत ही है जो मेरे पीछे ठोकर मार रहा है ( सिराज की अम्मी अब थोड़ा खुलना शुरू हुई और उनकी बातों से मेरा लंड और फैलने लगा )
: एक आप ही तो अम्मी जो मुझे और मेरी जरूरतों को समझती हो ( मै उनसे एकदम चिपक गया और लंड को टोपा अंडरवियर के नीचे से अब उसकी नाइटी को फाड़ता हुआ उनकी गाड़ की कसी दरारों में धंसने लगा )
: अब मार खायेगा तू , दूर हट बदमाश कही का ( सिराज की अम्मी अपने गाड़ को मेरे लंड पर धकेलती हुई मुझे दूर करती हुई हसी और मैने उनको और कसके पकड़े हुए पीछे से हग कर लिया)
: रहने दो न अम्मी अच्छा लग रहा है ऐसे , जैसे लग रहा है अपनी अम्मी के साथ सोया हु ( अभी भी मेरा सुपाड़ा उनकी गाड़ की दरारों में घुसा हुआ फूल रहा था )
: ऐसे ही तंग करता है क्या तू अपनी अम्मी को , चल अब सो जा ( सिराज की अम्मी करवट होकर चादर ढक कर सोने लगी और मैं कुछ देर तक उनसे चिपका रहा , मेरा लंड उनके गुदाज मुलायम चूतड के स्पर्श से और अकड़ने लगा था और मेरे हाथ उनकी नाइटी के ऊपर से चादर के नीचे धीरे धीरे उनकी मोटी गदराई चूचियो की ओर बढ़ रहे थे । उनकी गहराती सांसे साफ बता रही थी वो जाग रही है और मेरे एक एक स्टेप को महसूस कर रही है )
: ऊहू क्या कर रहा है तू ( सिराज की अम्मी ने चादर हटाते कर घूम कर देखा मेरा लंड एकदम उफनाया हुआ पूरा लाल बौराया हुआ उनके सामने और आंखे फाड़ कर वो उसका साइज निहार रही थी )
: अच्छा ठीक है कर ले लेकिन ऊपर ऊपर से , अन्दर नहीं ( मै कुछ सफाई देता इसके पहले ही ये बोलकर वो अपनी नाइटी ऊपर कर वापस करवट होकर चादर ओढ कर लेट गई )
मै भी खुशी से उनको पीछे से पकड़ लिया और इस बार मेरा मोटा सुपाड़ा सीधा उनकी जांघों के बीच से चीरता हुआ चूत के फाकों में ।
: अह्ह्ह्ह्ह ( वो सिसकी )
मैने हल्के से टांगे उठाई और लंड को हौले से उसकी गीली चूत में सरका दिया और चादर के नीचे से उसकी चूत में लंड देने लगा
: ओह्ह्ह्ह यस्स बेबी उम्मम्म फक्क्क् ओह्ह्ह्ह तुम्हारी बातों ने तो मुझे गिला कर दिया उन्ह्ह्ह सीईईईई अह्ह्ह्ह फक मीईईईई ओह्ह्ह ( अलीना मेरे लंड को अपनी गीली बुर में महसूस करती हुई चीख रही थी और मै चादर के नीचे से उसकी चूत में तेजी से लंड पेलने लगा )
और जैसे ही मेरी नजर कमरे के दरवाजे के पास गई मै एकदम से रुक गया , एक परछाई थी वह जो मेरी नजर उस ओर पाते ही वहां से सरक गई थी ।
जारी रहेगी
बहुत ही मस्त और शानदार अपडेट है भाई मजा आ गयाUPDATE 009
: क्या हुआ कोई है क्या ( मोबाईल स्क्रीन पर रेशमा मैम के मैसेज चेक करता हुआ मै बोला )
: कोई दिख नहीं रहा है यार और होगा ही कौन अम्मी के सिवा घर पर कोई नहीं ( मैने नजर उठा कर दरवाजे की ओर देखा ,
सामने हल्की विजिबल नाइटी में अलीना के अपने चूतड़ फेंके हुए दरवाजे से बाहर झाक रही थी और उसकी बड़ी सी फैली हुई गाड़ साफ़ साफ़ उसकी शॉर्ट नाइटी से झलक रही थी और मेरा बेकाबू लंड एक बार फिर से फडफड़ाने लगा ।)
मै धीरे से चादर से पूरा नंगा बाहर निकला और चुपके से अपना लंड सीधा उसके गाड़ के फाकों में रगड़ता हुए चूत के मुहाने तक ले गया और वो सिसक पड़ी
: सच में कोई नहीं है ( मै उसके कान के पास फुसफुसाया )
: ऊहू नहीं है मेरी जां ( वो पूरी तड़पड़ी सिसकती हुई मेरे सुपाड़े से अपनी चूत को फैलता महसूस कर रही थी )
: अह्ह्ह्ह्ह देखते रहना है ठीक है ( और मै पीछे से उसके नरम नरम चूतड़ थामता हुआ उसके चूत में लंड पेलने लगा )
: अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह हा बाबू देख रही हू ओह्ह्ह्ह फक्क्क् उह्ह्ह्ह उम्मम्म कितना टाइट है आह्ह्ह्ह ( वो दरबाजे के गेट के सहारे झुकी हुई मेरा लंड अपनी चूत में महसूस करती हुई बोली )
मै सटासट उसकी बुर में लंड पेले जा रहा था और वो अकड़ती जा रही थी , उसकी चूत से रस उसकी जांघों को तर किए जा रही थी मै भी चरम तक आ गया फिर उसने अपने रसीले लबों से मेरे लंड को साफ किया और बाथरूम में घुस गई ।
इधर रेशमा मैम को मैने रिप्लाई नहीं किया तो चिंता में काल करने लगी
मैने फोन पिक किया
: जी सॉरी मैम वो थोड़ा बिजी था तो मैसेज का रिप्लाई नहीं कर पाया
: अच्छा ठीक है कोई बात नहीं , तुम अच्छे से पहुंच गए न ( वो फिकर में बोली )
: हा , और थैंक यू मैम आपने मेरे लिए इतना सब और वो केबिन में देखा मैने आहूजा सर कैसे ?
: छोड़ो ना वो सब , ये बताओ जिस काम के लिए गए थे वो हुआ
: अह हा हो ही गया है क्यू ?
: अरे यार वो कार शो रूम वाले मेरी गाड़ी ऑफिस के जगह फ्लैट पर भिजवा दी तो क्या तुम मुझे पिक कर लोगे ?
: हा लेकिन ऑफिस से डायरेक्ट, कही किसी ने देख लिया और कंप्लेन हो गई तो ?
: अच्छा ठीक है जब मैं तुम्हे फोन करु तो VENUS माल आ जाना , ठीक है ?
: हा फिर ठीक है ?
: ओके बाय , इंजॉय हीहीही
: क्या मैम आप भी ( मै भी मुस्कुरा दिया )
शाम ढल रही थी और मै रेशमा मैम के फोन का इंतजार कर रहा था
चिंता हो रही थी कही उन्हें समय से गाड़ी नहीं मिली इसीलिए फिकर में मै सिराज के घर से निकल गया विनस माल की ओर
घड़ी में अभी 6 बजने में समय था माल के कैफेटेरिया में मै टाइम पास करने लगा कि मेरी नजर बाहर सड़क के दूसरी तरफ होटल सुमित पर गई जहां से रेशमा मैम बाहर निकल रही थी छिपते छिपाते और वो फिर एक चार पहिया वाहन में आगे बैठ गई ।
गाड़ी देखते ही मेरी आंखे फेल गई क्योंकि ये गाड़ी तो मेरे सीनियर आहूजा की थी
मै भी लपक कर अपनी बाइक से गाड़ी के पीछे हो लिया और वो गाडी रेशमा मैम के घर की ओर ना जाकर किसी और ही रोड पर घूम गई और सड़क के कही गुम सी हो गई ।
मै उस गाड़ी का पीछा करने लगा
मुझे फिकर सी हो रही थी और मन उदास भी था कि उन्होंने ये बात मुझसे क्यों छिपाई ।
कुछ देर बाद बाजार की भीड़ से निकलते ही एक बार फिर उनकी बड़ी सी गाड़ को बाइक से कैरियर से लटकते देखा और अम्मी के सूट को देखते ही मै दुबारा से उनको पहचान गया मगर इस बार मेरी नजर बाइक चला रहे शक्श पर भी जिसके लिए मै अम्मी का पीछा कर रहा था । वो शक्श कोई और नहीं हमारे फैमिली डॉक्टर रहीम अंकल के हॉस्पिटल का स्टाफ था । जिसे मैने कई बार उनके केविन ने देखा था ।
अब मेरी चिंता और बढ़ गई लेकिन मैं अम्मी के पास जा नहीं सकता था और ना ही उनको बता सकता था कि आज मैने क्लास दुबारा से उनको देखने के लिए बंक मारी थी ।
अजीब कशमकश थी मै वापस घर के लिए घूम गया था
यकीन नहीं हो रहा था कि रेशमा मैम मुझे बुला कर उस आहूजा के साथ निकल जाएंगी
आज खाना बनाने का मूड भी नहीं हो रहा था और 8 बजे के करीब सिराज का फोन आया ।
: क्या बे साले घर ही आना था बताया क्यों नहीं ( जरूर सिराज की अम्मी ने बताया होगा मैने सोचा )
: हा यार बस ऐसे कुछ फाइनल करना था अलीना से ( मै उखड़ कर बोला )
: तो फिर शादी कब कर रहा है साले , हरामी मुझे तो शक था कि तू भी पसंद करता ही है ( सिराज हंसता हुआ बोला )
: भाई बाद में बात करे ( मै उसकी बातों को एकदम से नकारते हुए कहा )
: क्या हुआ , घर से कुछ हुआ क्या
: क्या हुआ बोल न (मै चुप रहा तो सिराज ने दुबारा से सवाल दोहराया )
: अह नहीं ऐसा कुछ भी है , एक फोन आ रहा है जरूरी है । मै बाद में फोन करता हु ( मैने मोबाइल स्क्रीन पर आ रही रेशमा मैम के फोन को देख कर बोला )
: ठीक है , फोन करना रखता हु
( मै भी उसको बाय बोल कर रेशमा मैम का फोन पिक किया )
: जी मैम, वो आपका फोन नहीं आया
: ओह सॉरी सॉरी शानू , दरअसल वीनस माल के बाहर मेरी एक सहेली मिल गई तो मैं उसके साथ घर चली गई , तुम वहा आए तो नहीं थे ।
: जी ? जी नहीं , आपने कहा था फोन करने को तो ( पराया सा महसूस हुआ जब रेशमा मैम ने अहूजा सर को अपनी सहेली का नाम दे दिया , मुझसे भी क्या छिपाना भला )
: अच्छा किया , वैसे तुम हो कहा ?
: अभी अभी घर पर आया हु मैम, कहिए ?
: नहीं कुछ नहीं , अच्छा तो मैं रखूं सब वेट कर रहे है ( वो जल्दबाजी भरे लहजे में बोली )
: जी , ओके मैम गुड नाइट
: कौन था रेशमा ( मोबाइल से काल कटने से पहले आखिरी आवाज आई जो कि किसी मर्द की और उस मोटी आवाज के मालिक को मै अच्छे से जान रहा था )
मै मोबाइल बिस्तर पर फेक कर लेट गया
पराया सा महसूस हो रहा था आज , बार बार जहन में वो झलकियां उभर आ रही थी जो मैने आज बाजार में देखी थी , अम्मी की तबियत खराब है और उन्होने एक बार भी मुझसे जिक्र तक नहीं किया और वो खातून जो पराए मर्द की आंखों से भी पर्दा करती है वो आज किसी गैर के मोटरसाइकिल पर बाजार में घूम रही थी ।
अजीब कशमकश थी कुछ देर बाद अम्मी घर आ चुकी थी और हैरान थी कि मैं समय से पहले घर पर था ।
: अरे बेटा आज जल्दी घर आ गया ( खुद के हाव भाव ज़ाहिर न हो इसीलिए वो मुझसे नजरे चुराते हुए अपने कमरे में जाने लगी )
: जी अम्मी आज हॉफ डे था ( मैने साफ साफ उन्हें जताया कि मुझे पता है कि वो दोहपर से गायब थी )
: अच्छा , वो आज तेरी मामी ने बुलाया था जरा और उसकी तो बातें ही खत्म नहीं होती है। ( अम्मी झूठ की हसी चेहरे पर ला रही थी और फिर बाथरूम में चली गई )
उनके बाथरूम में घुसते ही मै भी लपक कर उनकी बैग चेक करने लगा और मुझे कुछ मलहम के ट्यूब और एक छोटी लिक्विड बोतल दिखी । बाथरूम में फ्लश की आवाज पाते ही मै सतर्क होकर जस का तस बैग रख दिया और हाल में बैठ गया ।
अम्मी ने जरा भी जाहिर नहीं किया कि वो कहा से आई थी और क्या करने गई थी और मै भी चुप ही रहा जैसे सब कुछ सामान्य ही हो ।
कुछ देर बाद मै अपने कमरे में और वो मलहम और तेल के बारे में सर्च करने लगा ।
पता चला कि ये दोनों मलहम और तेल एक तरह की दवाई है जो उन महिलाओं के लिए उपयोगी है उनकी बढ़ती उम्र और अधिक वजन होने से स्तन के साइज बढ़ जाते हैं या फिर सही फिट की ब्रा नहीं पहनने से स्तन मांसपेशियों में खिंचाव का असर निपल्स पर पड़ता है जिससे वह दर्द होने लगता है । तेल से पूरे स्तन की मालिश करनी होती है और निपल्स एरिया में वो ट्यूब लगानी होती है।
दवाओ के बारे पढ़ते ही ना जाने क्यों लंड एकदम उफान पर था , अम्मी के बड़े बड़े चूचे अब उन्हें ही तंग करने लगे थे ,
: अह्ह्ह्ह्ह अम्मी मुझसे कहती आपके चूचे पूरे दिन हाथ में थामे रखता मै , जरा भी दर्द नहीं होता उन्हें अह्ह्ह्ह्ह अम्मीईईई ( मै हल्की बुदबुदाहट में अपना मूसल भींचता हुआ दोनों टांगे फैला कर अंगड़ाई लेने लगा )
तभी नीचे से अम्मी की आवाज आई और मै नीचे चला गया । खाने के बाद रोज की तरह आज भी अम्मी मोबाइल मांगने मेरे कमरे में आने वाली थी मगर आज मैने भी तैयारी कर ली थी , अम्मी को भनक न लगे
इसीलिए जैसे ही उनके आने की आहट मिलनी शुरू हुई मैने मोबाईल में पहले से ही डाउनलोड की हुई स्क्रीन रिकॉर्डर ऐप को स्टार्ट कर दिया और उसके आइकन को हटा दिया , अब पूरे मोबाईल की गुप्त रूप से स्क्रीन रिकॉर्डिंग चालू हो गई थी ।
अम्मी अभी भी उसकी सूट सलवार में थी जो पहन कर वो बाजार में गई थी
अम्मी आती इससे पहले मै बिस्तर पर अपना बाजार सजा चुका था और स्कूल के प्रोजेक्ट की लिखा पढ़ी करने लगा
: पढ़ते हुए सो मत जाना , ये दूध पी लेना ( अम्मी दूध को टेबल पर रखते हुए मेरे पास से मोबाइल उठाती हुई बोली )
: अम्मी बात करके थोड़ा जल्दी दे देना , मुझे प्रोजेक्ट की वीडियो देखनी है ( मै अम्मी की ओर देख कर बोला )
: अच्छा !!! ( उनका चेहरा एकदम उतर गया था और पहले वो मोबाइल वापस रखने को हुई मगर कुछ सोच कर )
: ठीक है मै तेरे अब्बू से बात करके तुझे दे जाऊंगी
: ठीक है अम्मी ( मै बिना उनकी ओर देखे बोला )
फिर अम्मी कमरे से बाहर जाने लगी और मैं उनके भारी भरकम कूल्हे देख कर मुस्कुराने लगा ।
कुछ देर बाद मै दबे पाव सीढ़िया सरकता हुआ नीचे आने लगा ,
अम्मी के कमरे से हल्की फुल्की आवाजे आ रही थी फोन स्पीकर ही रहता था अक्सर इन दिनों ।
मै धीरे धीरे खिड़की के पास चला गया
: और खबरदार आगे से मुझे किसी गैर के साथ भेजा तो , कितना अजीब लग रहा था और सब घूर रहे थे
: अच्छा ठीक है मेरी जान , आगे से रहीम को बोल दिया करूंगा वो घर पर ही चेकअप के लिए आ जाया करेगा
: नहीं नहीं नहीं , मुझे कुछ नहीं चेक करवाना अब ( अम्मी खड़े लहजे में बोली)
: क्यों क्या हुआ ?
: ओहो देखो तो भोलू को , आपको नहीं पता क्या हुआ क्या नहीं ? हुह ( अम्मी मुंह बनाते हुए बोली और मुझे हसी सी आई अम्मी के नखरे पर )
: अरे सच में मेरी अभी रहीम से कोई बात नहीं हुई , बताओ न क्या कहा उसने ?
: आपके दोस्त ने आज मेरे जोबन में डाका डाल दिया था
: क्या ? ( अब्बू चौके और मै भी , अम्मी की मीठी खनक भरी हंसी भी आई )
: क्या हुआ साफ साफ बोलो न ( अब्बू फिकर में बोले )
: अरे अब जांच करवानी थी करवा ली , बोल रहे थे कि वजन बढ़ गया है मेरे तबेले का ( अम्मी ने अब्बू को छेड़ा )
: तो क्या उसने हाथ लगा कर चेक किया ? ( अब्बू हिचकते हुए बोले और अब्बू की बातें सुन कर मेरा लंड इस बात के लिए फड़फड़ाने लगा कि अम्मी के मुलायम बड़े बड़े रसीले मम्मों को रहीम अंकल ने कैसे हाथों में लेके सहलाया होगा )
: नहीं ? लेकिन मुझे सूट ऊपर करना पड़ा था ( अम्मी उखड़ कर बोली )
: फिर ? ( अब्बू की गहराती सांसे साफ स्पीकर पर पता चल रही थी )
: उन्होंने मेरे दोनों निप्पलों को गौर से देखा कि कही सूजन और लाली तो नहीं
: फिर ? ( अब्बू के साथ साथ मेरी भी बेचैनी बढ़ने लगी थी )
: फिर क्या फिर क्या ? मेरा कलेजा भीतर से कांप रहा था कही आपके दोस्त का ईमान न डोल जाए
: अरे नहीं रहीम अच्छा डॉक्टर है , वो ऐसा नहीं है
: हा बड़े आए ऐसा नहीं है , देखा मैने कैसे मेरे सूट ऊपर होते ही आंखे चमक उठी थी उनकी ( अम्मी मुंह बनाते हुए बोली )
अम्मी की बातें सुनकर मेरा हाथ जोरो से लंड मसलने लगा था कि अम्मी ने आज पहली बार अब्बू के अलावा किसी गैर मर्द के आगे अपने चूचे नंगे किए थे।
: अच्छा ठीक है , ये बताओ कुछ दवा वगैरह दिया है या नहीं ( अब्बू ने बात बदलते हुए कहा )
: हा यही दोनो दिए है , एक तेल है और एक मलहम है
: तो लगाओ न मेरी जान
: धत्त बदमाश मै नहीं दिखाने वाली आज , हूह ( अम्मी लजाए और इतराई )
इधर मेरा लंड और दिल दोनो खुश हो गए कि अब असल पार्ट रिकार्ड होगा ।
: प्लीज जान दिखाओ न , देखूं तो कही लाली तो नहीं तुम्हारे निप्पल में
: अच्छा डॉक्टर साहब आप भी जांच करेंगे क्या मेरी ( अम्मी की आवाज में एक मस्ती थी )
: हा , मैडम जरा अपना सूट ऊपर कीजिए और अपने स्तन दिखाइए
: अह्ह्ह्ह्ह लो डॉक्टर साहब देख लो , ना जाने क्यों मेरे निपल्स में दर्द रहता है ( अम्मी की बातों में शरारत झलक रही थी )
: हम्मम थोडा और करीब आइए जरा
: अह्ह्ह्ह्ह सीईईई अच्छे से देखिए ना डॉक्टर साहब , देखिए ना जाने क्यों ये टाइट हो जाता है उम्मम्म
अम्मी की गरमाहट भरी बातें सुनकर मेरा लंड और अकड़ने लगा उसपे से अम्मी अब्बू की गजब की कैमिस्ट्री थी सेक्स को लेकर
: ओह्ह्ह्ह मैडम जी आपके स्तन काफी तंदुरुस्त और भरे भरे है , आपके शौहर को खासा लगाव होगा
: अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह डॉक्टर साहब सही कह रहे है वो तो सारी सारी रात उन्हें मुंह लेके चूसते रहते है उम्मम्म ओह्ह्ह्ह हाथ लगा कर देखिए न डॉक्टर साहब क्या हुआ मेरे चूची में
: अह्ह्ह्ह्ह मैडम जी आपके चूचे तो कमाल के लग रहे है , जरा इनकी मालिश कीजिए न , आराम मिलेगा
: हा क्यों नहीं , अह्ह्ह्ह्ह लीजिए ओह्ह्ह काफी ठंडा सा है उह्ह्ह्ह ( अम्मी सिसकी)
: हा अच्छे से लगाइए हा पूरे चूचे पर मलिए ऐसे ही , वाह तेल ने तो आपके दूध को और भी गोरा कर दिया है मैडम , आपको देख मुझे कुछ कुछ हो रहा है
: उम्मम सच में , इन्हें देख कर क्या
वीडियो में अम्मी अब्बू को अपने पूरे चूचे पर तेल मल कर निप्पल पर उंगली घुमा रही थी और बंद कमरे में मै उनकी वीडियो देख कर लंड हिला रहा था ।
वही अब्बू भी सामने से अपना मोटा मूसल निकाल चुके थे , अब्बू के मूसल को देखते ही अम्मी के जिस्म में गजब सी हलचल दिख रही थी
: अह्ह्ह्ह्ह डॉक्टर साहब बड़ा मोटा सिरिंज है आपका , हाय दैय्या उफ्फ कितना बड़ा और मोटा उम्मम ( अम्मी वीडियो कॉल पर अब्बू के सामने अपने बदन को सहलाने लगी थी और देखते ही देखते सलवार खोलने लगी )
: अह्ह्ह्ह्ह मैडम जी जरा घूम कर अपना मखमली कूल्हा तो दिखाओ , तभी न इलाज करूंगा अपने इस मोटे इंजेक्शन से ( अब्बू वीडियो कॉल पर अपना लंड तेल से लिपते हुए बोले )
: हा क्यों नहीं लो , लगा दीजिए डाक्टर साहब अह्ह्ह्ह्ह ( अम्मी घूम कर मोबाइल को अपने बड़े से नंगे चूतड़ के पास ले गई और उनकी बड़ी सी नंगी गाड़ को इतना पास से देख आकर मेरा लंड एकदम से बगावत पर आ गया ,
अम्मी के गाड़ की फैली हुई दरारें देख मुंह में पानी भरने लगा और वही अब्बू भी अपना सुपाड़ा खोल कर मोबाइल कैमरा के करीब लाकर अम्मी के कूल्हे में अपनी मोटी सुई लगाने लगे )
: ओह्ह्ह्ह्ह डॉक्टर साहब आराम से बहुत मोटा है आह्ह्ह्ह अम्मीईई ओह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है अह्ह्ह्ह सीईईईईई उम्मम्म , आगे डाल दो न ( अम्मी ने मोबाइल आगे रख दिया और अपनी जांघें खोलते हुए अपना फूला हुआ झांटों से ढका भोसड़ा अब्बू के आगे मोबाइल में परोस दिया )
: उम्मम्म मैडम क्या बात है , लेकिन आपने इसकी काफी समय से सफाई नहीं की है क्या ,कुछ साफ साफ दिख नहीं रहा ( अब्बू मोबाईल पर अपना लंड मुठियाते हुए बोले )
: मुझे डर लगता है कही रेजर से कट न जाए , ऐसे देख लीजिए न डॉक्टर साहब ( अम्मी अपनी चूत के दाने को सहलाते हुए अपने झाटों से भरी चूत के फांके खोलकर दिखाने लगी उनकी गुलाबी चूत का दीदार करते हुए मेरे सबर का फब्बारा फूट पड़ा
और एक एक करके पिचकारी छोड़ता रहा
वही मोबाइल पर अम्मी अब्बू के आगे अपनी चूत मसलती रही
मै झड़ते हुए थक कर सो गया
अगली सुबह नीद खुली तो जोरो की भूख लगी थी , नहा धो कर बाहर नाश्ता कर निकल गया मै ऑफिस के लिए
कल जो कुछ भी हुआ उसे याद कर मुझे ऑफिस जाने का मन नहीं हो रहा था , मगर नौकरी करनी ही थी
मन मारकर मै भी ऑफिस पहुंचा
पार्किंग में रेशमा मैम गाड़ी लगाती हुई दिखी। आज एक अलग ही चमक सी थी उनके चेहरे पर और टाइट जींस में वो कहर ढा रही थी । देखते ही लंड एकदम फड़फड़ाने लगे ऐसे बाहर निकले हुए चूतड़ ।
: हाय शानू ( वो चेहरे से सनग्लासेज उतारते हुए बोली )
: जी गुड मॉर्निंग मैम ( मै जबरन होठों पर मुस्कुराहट लाते हुए बोला )
: गुड मॉर्निंग गुड मॉर्निंग, तो कैसी रही डेट तुम्हारी कल ( वो इतराती हुई बोली )
: मेरी छोड़िए आपकी कैसी रही ( ना चाहते हुए न जाने क्यों मन का दर्द जुबान से निकल ही पड़ा )
: सॉरी , मेरी डेट ? मै समझी नहीं ? ( उनके चेहरे के हाव भाव उड़े हुए थे और मै उनकी ओर जरा भी नहीं देख रहा था )
: ये तुम क्या कह रहे हो शानू ? ( वो जबरन हसने की कोशिश करती हुई बोली )
: कुछ नहीं , आइए चलते है
: तो तुमने कल देखा था मुझे है न ( लिफ्ट में ऊपर जाते हुए वो बोली)
: हम्म्म, वैसे मुझसे छिपाने जैसे क्या था उसमे ( मैने नेक्स्ट फ्लोर के लिए बटन दबाया )
: सॉरी बाबा , वो बस सर के यहां छोटी सी पार्टी थी तो चलने की जिद करने लगे तो ( वो सफाई देते हुए बोली )
: पार्टी होटल में थी या घर पर उनके
: शानू ? तुम कहना क्या चाहते हो ? देखो तुम जो सोच रहे हो ऐसा कुछ भी नहीं है और तुम .... ( इससे पहले वो और कुछ भड़क कर बोलती हमारा फ्लोर आ गया और हम दोनो चुप हो गए क्योंकि सामने से दूसरे स्टाफ लिफ्ट में घुस रहे थे )
: तुम ऐसा सोच भी कैसे सकते हो छीइई ( वो लगभग आंखे छलकाती हुई अपने केबिन में चली गई और मै मेरे काउंटर पर )
अजीब कशमकश सी हो गई थी , आहूजा जैसे कमीने को मै अच्छी तरह से जानता था आज तक उसके रडार में आई कोई भी महिला बच नहीं सकती थी फिर कैसे यकीन करता कि रेशमा मैम साफ पाक थी ।
समझ नहीं आ रहा था क्या करूं, दिल ही दिल रेशमा मैम को रुलाने का दुख अलग ही टीस उठा रहा था ,
हारकर मैने उन्हें सॉरी का मैसेज कर दिया लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया शाम तक ।
ऑफिस में आज काम बहुत था रेशमा मैम मेरे काउंटर से निकलती हुई मोबाईल पर मैसेज की
" पार्किंग में मिलो "
मेरी फटने लगी कि क्या होगा , कही वो और न भड़क जाए । पहले से इस ऑफिस में उनकी वजह से आहूजा के प्रताड़ना से बच रहा हु , हर बार वो मेरे लिए एक ढाल के जैसे खड़ी रही है और आज मैने उनके साथ क्या किया । बहुत कचोट रहा था दिल मेरा मुझे ।
हिम्मत कर मै अपना काउंटर बंद कर पार्किंग में आया
: गाड़ी में बैठो ( वो पूरे हक से बोली और मेरी हिम्मत नहीं हुई कि मैं मना कर पाऊं )
: कहा जा रहे है हम ? और मेरी बाइक ? ( मेरे जहन में कई सवाल थे )
: बाइक यही रहेगी कल ले लेना आज तुम मेरे साथ चल रहे हो
: क्या ? लेकिन मैं कैसे ?
: कॉफी का वादा भूल गए ( वो मुस्कुराई )
: क्या मैम आप भी डर गया मै तो हेहेहेे ( मै गहरी सांस लेता हुआ बोला और गाड़ी उन्होंने अपने फ्लैट की ओर ले लिया । )
जारी रहेगी